Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV performance comparison

Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV performance comparison
Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV

The Mahindra XEV 9S Pack Three Above and MG Hector Tomahawk EV are  three-row electric SUVs that differ in their acceleration, driving range and charging capabilities. Here’s how the two compare on performance, specifications and price.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Specifications

SpecificationsMahindra XEV 9S Pack Three AboveMG Hector Tomahawk EV
Battery capacity79kWh69.2kWh
Electric motor setupSingle, rear-mountedSingle, front-mounted
Power286hp204hp
Torque380Nm310Nm
GearboxSingle-speed automaticSingle-speed automatic
Drive layoutRear-wheel driveFront-wheel drive
Claimed MIDC range679km517km
Maximum DC charging rate180kW90kW
Claimed DC charging time20min (20-80 percent)Around 35min (30-80 percent)
AC charging time

11.7 hours (7.2kW charger)

8 hours (11.2kW charger)

12.5 hours (10-100 percent)

The XEV 9S has a 82hp advantage over the Tomahawk EV and produces 70Nm more torque. The two SUVs also differ in their drive layouts. The XEV 9S sends power to the rear wheels, while the Tomahawk EV is front-wheel drive. Both use a single-speed automatic transmission.

The XEV 9S has a claimed MIDC range of 679km, which is 162km more than the Tomahawk EV’s 517km. It also supports DC fast charging at up to 180kW, compared with 90kW for the MG.

Mahindra claims the XEV 9S can charge from 20-80 percent in 20 minutes, while MG quotes around 35 minutes for a 30-80 percent charge. Since the quoted charging times cover different charging windows, they are not directly comparable. The AC charging figures also use different charging ranges. The XEV 9S supports an optional 11.2kW AC charger, in addition to the 7.2kW unit. The Tomahawk EV supports 7.4kW AC charging.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Acceleration timings 

Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV: Acceleration timings (seconds)

 

Mahindra XEV 9S

MG Tomahawk EV

0-20kph

1.39

1.47

0-40kph

2.73

2.84

0-60kph

4.17

4.25

0-80kph

5.62

5.93

0-100kph

7.54

8.23

0-120kph

9.98

11.28

The XEV 9S gets off the line slightly quicker, reaching 20kph 0.08 seconds ahead of the Tomahawk EV. The gap remains narrow at 40kph and 60kph, with the Mahindra holding leads of 0.11 seconds and 0.08 seconds, respectively. 

It begins to pull further ahead beyond 60kph, reaching 80kph 0.31 seconds sooner and 100kph 0.69 seconds sooner than the MG. By 120kph, the difference has widened to 1.30 seconds, with the XEV 9S completing the run in 9.98 seconds against the Tomahawk EV’s 11.28 seconds. The results show the Mahindra’s advantage growing at higher speeds, rather than coming solely from its initial launch.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Rolling acceleration timings 

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Rolling acceleration timings (seconds)

Rolling acceleration tests

Mahindra XEV 9S

MG Hector Tomahawk EV

20-80kph (in kickdown)

4.11

4.56

40-100kph (in kickdown)

4.74

5.45

The results show that the XEV 9S retains its lead across both rolling acceleration tests. It completes the 20-80kph run in 4.11 seconds, 0.45 seconds quicker than the Tomahawk EV’s 4.56 seconds. The gap widens in the 40-100kph test, with the Mahindra taking 4.74 seconds against the MG’s 5.45 seconds. This gives the XEV 9S a 0.71-second advantage in the higher-speed run, further underlining its stronger acceleration performance across both speed ranges.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Braking tests 

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Braking tests

 

Mahindra XEV 9S

MG Hector Tomahawk EV

80-0kph distance (m)

29.67

27.52

80-0kph time (seconds)

2.55

2.39

80-20kph L1 regen distance (m)

341.03

575.94

80-20kph L2 regen distance (m)

215.8

389.91

80-20kph L3 regen distance (m)

162.46

210.09

The Tomahawk EV has the advantage in the conventional braking test, stopping from 80kph in 27.52m and 2.39 seconds. The XEV 9S takes 29.67m and 2.55 seconds to come to a halt, requiring 2.15m more distance.

The results reverse under regenerative braking. In the 80-20kph tests, the XEV 9S covers a shorter distance at all three regeneration levels. At L1, it takes 341.03m to slow down, compared with 575.94m for the MG. At L2, the respective distances are 215.8m and 389.91m, while at L3, they are 162.46m and 210.09m. The difference is largest at L2, where the Tomahawk EV covers 174.11m more than the Mahindra before slowing from 80kph to 20kph.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Prices

ModelPrice (ex-showroom)
Mahindra XEV 9S Pack Three AboveRs 29.95 lakh
MG Hector Tomahawk EVRs 19.49 lakh-23.49 lakh

The MG Hector Tomahawk EV is priced between Rs 19.49 lakh and Rs 23.49 lakh, while the Mahindra XEV 9S Pack Three Above costs Rs 29.95 lakh. The Tomahawk EV’s top variant is Rs 6.46 lakh cheaper than the XEV 9S. The Mahindra, however, gets a larger 79kWh battery and higher power and torque outputs, and was quicker in all three acceleration tests. The MG stopped in a shorter distance in our 80-0kph braking test.

Autocar India’s testing standards

Before conducting our performance tests, we check and maintain tyre pressure based on the manufacturer’s recommendation and ensure that the car is charged to 100 percent. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

All prices are ex-showroom, India.

Bajaj Finance Q2 Results: बजाज की कंपनी को ₹6367 करोड़ का मुनाफा, NII में 23% का उछाल

Bajaj Finance Q2 Results: दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने 19 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कमाई और लोन के कारोबार में बढ़ोतरी से नतीजों को मजबूती मिली।

ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी

बजाज फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) दूसरी तिमाही में 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹10,785 करोड़ थी। वहीं, कंपनी की कुल नेट इनकम भी 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ हो गई।

AUM बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हुआ

30 सितंबर 2026 तक कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 26% बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हो गया। AUM का मतलब है कि कंपनी ने कुल कितने पैसे का लोन दे रखा है या मैनेज कर रही है। सितंबर तिमाही में इसमें ₹37,680 करोड़ जुड़े।

इस दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन बांटे। यह एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा है। तिमाही में 44.2 लाख नए ग्राहक भी जुड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12.885 करोड़ हो गई। इसमें सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई।

लोन की वसूली कैसी रही?

सितंबर के अंत में बजाज फाइनेंस का ग्रॉस NPA 1.06% रहा। जून तिमाही में यह 0.96% था। वहीं, नेट NPA 0.39% से बढ़कर 0.42% हो गया। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले खराब लोन का अनुपात थोड़ा बढ़ा। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। तब ग्रॉस NPA 1.24% और नेट NPA 0.60% था।

लोन के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ₹2,166 करोड़ का प्रोविजन किया। यह पिछले साल से 4% ज्यादा है। इसमें आर्थिक जोखिमों को देखते हुए ₹337 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल है। इसे हटा दें तो लोन लॉस और प्रोविजन 12% घटकर ₹1,829 करोड़ रह जाते हैं।

आगे कंपनी की क्या योजना है?

Bajaj Finance को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वह 6 करोड़ से 6.2 करोड़ नए लोन बांटेगी। कंपनी 1.8 करोड़ से 2 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष के दौरान 150 से 175 नई लोकेशन खोलने का लक्ष्य है।

दूसरी तिमाही में कंपनी के लिए फंड जुटाना भी सस्ता हुआ। फंड की लागत 9 बेसिस पॉइंट घटकर 7.31% रह गई। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के दौरान कुल नेट इनकम के मुकाबले ऑपरेटिंग खर्च का अनुपात 25 से 40 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है।

नतीजों से पहले शेयर गिरा

सोमवार को नतीजे आने से पहले Bajaj Finance का शेयर 2.5% गिरकर ₹957.35 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 1.6% नीचे है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें 11% से ज्यादा की गिरावट आई है।

JIO Platforms के IPO को लेकर फुल जोश में मार्केट दिग्गज, 4 साल में मार्केट कैप डबल होने की जता रहे उम्मीद

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

Diwali Muhurat Trading 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने दिवाली के दिन होने वाले विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की टाइमिंग का ऐलान कर दिया है। इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दिन भारतीय शेयर बाजार नए हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत करेगा।

भारतीय शेयर बाजार में दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में शेयर बाजार में निवेश करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और वित्तीय उन्नति बनी रहती है। आइए जानते हैं NSE द्वारा जारी मुहूर्त ट्रेडिंग का मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल।

मेन ट्रेडिंग सेशन

मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान मुख्य बाजार में कारोबार की समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:

प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री: दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक (इसमें ऑर्डर दर्ज, संशोधित या रद्द किए जा सकते हैं)।

ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 2:15 बजे से 2:17 बजे तक।

प्री-ओपन बफर टाइम: दोपहर 2:17 बजे से 2:20 बजे तक।

कंटीन्यूअस ट्रेडिंग: दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगा।

मार्केट क्लोजिंग टाइम: नॉन-क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रतिभूतियों के लिए बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद होगा, जबकि CAS सिक्योरिटीज के लिए सामान्य बाजार 3:15 बजे समाप्त होगा।

CAS और पोस्ट-क्लोज सेशन का शेड्यूल

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और उसके बाद के सत्रों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन: दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक।
  • CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड: दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे तक।
  • ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक।
  • CAS ट्रांजिशन टाइम: दोपहर 3:35 बजे से 3:50 बजे तक।
  • पोस्ट-क्लोज सेशन: दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • ट्रेड मॉडिफिकेशन कट-ऑफ टाइम: शाम 4:15 बजे तक।

नोट: प्री-ओपन और CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड के अंतिम 2 मिनट में सिस्टम-ड्रिवन रैंडम क्लोजर लागू रहेगा।

ब्लॉक डील, IPO और अन्य विशेष सत्र

ब्लॉक डील विंडो: दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुलेगी।

IPO और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन: दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक (अंतिम 10 मिनट में रैंडम क्लोजर)।

स्पेशल प्री-ओपन वाली कंपनियों का नॉर्मल मार्केट: दोपहर 3:05 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

कॉल ऑक्शन इलिक्विड सेशन: दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक रहेगा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के दौरान एग्जिक्यूटेड सभी सौदों के लिए सेटलमेंट दायित्व अनिवार्य रूप से लागू होंगे।

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aprila scooter

इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो ग्रुप (Piaggio Group) भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी भारत के लिए एक नया स्कूटर प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिस पर पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के स्कूटर तैयार किए जाएंगे। कंपनी की योजना इस नई रेंज को 2027 में अप्रिलिया (Aprilia) ब्रांड के तहत लॉन्च करने की है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 85,000 रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है।

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पियाजियो व्हीकल्स के चेयरमैन, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डिएगो ग्राफी ने नई स्कूटर रेंज की योजनाओं की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, इस रेंज में इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ 125cc पेट्रोल इंजन वाला मॉडल भी शामिल होगा। इनकी कीमत 85,000 रुपये से लेकर 1.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी जा सकती है। इस रेंज के ऊंचे कीमत वाले मॉडल प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर होंगे।

 

₹85,000 से ₹1.30 लाख के बीच होगी कीमत

 

कंपनी का लक्ष्य भारतीय बाजार में उन ग्राहकों को आकर्षित करना है, जो किफायती कीमत पर नया पेट्रोल या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं। डिएगो ग्राफी के मुताबिक, कंपनी 85,000-90,000 रुपये की शुरुआती कीमत से लेकर 1.20-1.30 लाख रुपये तक के सेगमेंट को ध्यान में रखकर उत्पाद पेश करेगी। इस रेंज में अधिक कीमत वाले प्रीमियम इलेक्ट्रिक वेरिएंट भी शामिल होंगे।

 

कंपनी पिछले कुछ वर्षों से भारत के लिए इस नए प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है। यह प्लेटफॉर्म भारत में पियाजियो की विस्तार योजनाओं का अहम हिस्सा है। इसके जरिए कंपनी पेट्रोल स्कूटर के साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

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इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों स्कूटर के लिए बनेगा नया प्लेटफॉर्म

 

पियाजियो का नया प्लेटफॉर्म खासतौर पर भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। कंपनी ने इसे शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक और पेट्रोल, दोनों तरह के स्कूटरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।

 

आमतौर पर कंपनियां अपने मौजूदा पेट्रोल स्कूटर प्लेटफॉर्म में बदलाव करके इलेक्ट्रिक मॉडल तैयार करती हैं। हालांकि, पियाजियो का कहना है कि उसका नया प्लेटफॉर्म शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को समायोजित करने के लिए तैयार किया गया है। इससे लागत, परफॉर्मेंस और ड्राइविंग रेंज के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

 

कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन उद्योग से जुड़े नए घटनाक्रमों पर भी नजर रख रही है। इनमें दिल्ली की घोषित ईवी पॉलिसी 2026 भी शामिल है। हालांकि, पियाजियो की रणनीति किसी एक राज्य तक सीमित रहने के बजाय पूरे भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर स्कूटर लॉन्च करने की है।

 

Vespa ब्रांड के तहत फिलहाल नहीं आएगा इलेक्ट्रिक स्कूटर

 

पियाजियो ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल वेस्पा (Vespa) ब्रांड के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने की उसकी योजना नहीं है। कंपनी के मुताबिक, मौजूदा कॉन्फिगरेशन में किफायती कीमत के साथ अपेक्षित रेंज और परफॉर्मेंस हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।

 

इसी वजह से कंपनी नए प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसे इलेक्ट्रिक स्कूटर की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है। कंपनी का उद्देश्य लागत को नियंत्रित रखते हुए बेहतर परफॉर्मेंस, पर्याप्त रेंज और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करना है।

 

भारत से दूसरे देशों में भी निर्यात करेगी कंपनी

 

पियाजियो भारत को सिर्फ घरेलू बिक्री का बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में भी विकसित करना चाहती है। कंपनी के महाराष्ट्र स्थित बारामती प्लांट में बनने वाले कुल दोपहिया वाहनों में से फिलहाल लगभग 10-20 प्रतिशत का निर्यात विभिन्न देशों में किया जाता है।

 

कंपनी का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर कम से कम 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यानी भारत में बनने वाले उसके कुल दोपहिया वाहनों का आधा हिस्सा घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के लिए तैयार करने की योजना है।

 

भारत में निर्मित अप्रिलिया RS 457 और Tuono 457 पहले से ही कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। कंपनी भविष्य में आने वाले मॉडलों के साथ भी इसी रणनीति को अपनाना चाहती है।

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यूरोप में भी बिकेंगे नए स्कूटर

 

डिएगो ग्राफी के मुताबिक, विकास के चरण में मौजूद नए इलेक्ट्रिक और पेट्रोल स्कूटर सिर्फ भारत के लिए नहीं होंगे। इनके समान वेरिएंट यूरोप के बाजारों में भी निर्यात किए जाएंगे।

 

इस तरह पियाजियो की आगामी स्कूटर रेंज भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति का भी हिस्सा होगी। हालांकि, इन स्कूटरों के अंतिम डिजाइन, फीचर्स, बैटरी क्षमता, वास्तविक रेंज और लॉन्च की सटीक तारीख की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

JIO Platforms के IPO को लेकर फुल जोश में मार्केट दिग्गज, 4 साल में मार्केट कैप डबल होने की जता रहे उम्मीद

Jio Platforms IPO : जियो प्लेटफार्म्स के IPO का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आज यह इश्यू एंकर निवेशकों के लिए खुला। इसमें घरेलू और विदेशी कंपनियां बढ़ चढ़कर बोलियां लगा सकती हैं। बुधवार से यह IPO सभी निवेशकों के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर के बीच है। Jio Platforms अपने 30000 करोड़ से ज्यादा के इश्यू साइज से भारतीय बाजार में एक नया इतिहास रचने जा रही है। डिजिटल इंडिया के इस पोस्टर BOY ने महज 10 सालों में देश में डिजिटल क्रांति की इबारत लिखी है। ये सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, उससे कहीं बढ़कर है। यह देश का सबसे बड़ा डिजिटल और मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क है।

JIO PLATFORMS के IPO को लेकर बाजार के दिग्गज फुल जोश में हैं। दिग्गज निवेशकों ने इसमें बढ़कर चढ़कर निवेश करने की सलाह दी है। एनाम ग्रुप के को-फाउंडर वल्लभ भंशाली ने कहा है। सिर्फ 10 साल में बेहतरीन कंपनी बनकर तैयार हुई है। रमेश दमानी ने कहा है कि जियो IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। उधर देवेन चोकसी ने कहा है कि कंपनी की ग्रोथ बेहतरीन है। इसका मार्केट कैप 4 साल में डबल हो जाएगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स IPO पर उदय कोटक ने कहा कि यह दुनिया की अकेली ऐसी कंपनी है जिसके पास प्रोपराइटरी एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी (Proprietary End-to-End Connectivity है। समय के साथ लगातार तेज ग्रोथ बनी हुई है।

फिच रेटिंग्स के डायरेक्टर, गिरीश मदान ने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म्स मार्केट लीडर है। आगे ARPU बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी की बैलेंस शीट दमदार है। कंपनी की नेट डेट टू EBITDA 1x से कम है। यह आगे और नीचे आएगा। कंपनी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।

JIO IPO पर मार्केट एक्सपर्ट राकेश बंसल ने कहा कि जियो IPO के लिए नए डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं। वहीं, कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा ने कहा कि अच्छे वैल्युएशन पर, निवेशकों के लिए इसमें कमाई के अच्छे मौके हैं।

JIO IPO पर SMIFS की राय है कि इसमें निवेशक लंबे वक्त के लिए सब्सक्राइब करें। रेलिगेयर की भी इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह है। मोतीलाल ओसवाल का भी JIO IPO पर पॉजिटिव व्यू है।

बोनांजा का कहना है का JIO IPO का वैल्युएशन वाजिब है। यह भारती से डिस्काउंट पर मिल रहा है। अर्निंग ग्रोथ और टैरिफ बढ़ने पर आगे ठीक-ठाक ग्रोथ देखने को मिलेगी। वहीं, मंगलदास केशव का कहना है कि JIO IPO उम्मीद से बेहतर वैल्युएशन पर आय है। IPO प्राइसिंग वाजिब नजर आ रही है।

JIO IPO पर वेंचुरा की राय है कि आगे टैरिफ बढ़ोतरी और प्रीमियमाइजेशन अहम फैक्टर का काम करेंगे। यह भारती के इंडिया टेलीकॉम कारोबार के मुकाबले प्रीमियम पर है।

दिग्गज निवेशकों की राय

इसके साथ ही बाजार के दिग्गज निवेशक भी जियो प्लेटफॉर्म जैसे बड़े IPO को भारतीय बाजार की मजबूती की कहानी कह रहे हैं। सभी ने एक लाइन में कहा निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे। BSE के मेंबर और बाजार के दिग्गज निवेश रमेश दमानी के मुताबिक जियो के IPO को निवेशक हाथों हाथ लेंगे। जियो के 55 करोड़ ग्राहक हैं जो एक तिहाई भारतीयों को सेवा दे रही है। सिर्फ 10 साल में मुकेश अंबानी ने जियो को IPO के लिए तैयार कर दिया। हैरानी होती है कि भारत में जियो जैसी इतनी बड़ी कंपनी है। मुकेश अंबानी हर बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हैं। मुकेश अंबानी ने 10 साल में जियो को IPO के लिए तैयार किया। निवेशक जियो IPO को हाथों हाथ लेंगे।

HDFC AMC के MD नवनीत मुनोत ने कहा कि भारतीय बाजार में बड़े IPO आ रहे हैं। बड़े IPOs बाजार की मजबूती बता रहे हैं। कंपनियां अरबों डालर जुटाने में कामयाब हो रही हैं। भारतीय बाजार में काफी मजबूती है।10 साल पहले जियो ने बड़ी शुरुआत की। जियो प्लेटफॉर्म अब बड़ी रकम जुटा रहा है।

DRChoksey FinServ के MD,देवेन चौकसी ने कहा कि JIO IPO निवेशकों के लिए बेहतर मौका है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए है। पिछले कुछ साल में EBITDA ग्रोथ 18% रही। अगले कुछ साल में 20% CAGR ग्रोथ की उम्मीद। अगले 4 साल में इसका EBITDA दोगुना हो सकता है। कंपनी का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपए हो सकता है।

Elixir Equities के डायरेक्टर दीपन मेहता के मुताबिक जियो के IPO का वैल्युएशन काफी अच्छा है और लिस्टिंग पर अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद है। AI और डाटा सेंटर इंडस्ट्री इसके लिए ग्रोथ का अहम ट्रिगर होंगे। डाटा कंजम्प्शन बढ़ने से इंडस्ट्री ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जियो IPO को लेकर आउटलुक पॉजिटिव है।

 

 

(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Sugar Stocks: शुगर स्टॉक्स में भारी गिरावट, गन्ने-चीनी से एथेनॉल बनाने पर सरकारी रोक का दिखा असर

Sugar Stocks: चीनी कंपनियों के शेयरों में 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली दिखी। कई शेयर 7% तक टूट गए। इसकी वजह एथेनॉल की खरीद से जुड़ा सरकार का फैसला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नए टेंडर से चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद को बाहर कर दिया है। इससे चीनी कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

Bajaj Hindusthan Sugar का शेयर 5.59% गिरकर ₹20.08 पर आ गया। Shree Renuka Sugars में 7% की गिरावट रही। वहीं, Balrampur Chini Mills का शेयर 3.33% और EID Parry का शेयर 3.22% टूट गया। Triveni Engineering and Industries में 1.54% की गिरावट रही। Dhampur Sugar का शेयर भी 4% से ज्यादा गिरा।

सरकार ने क्या फैसला लिया?

सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के लिए एथेनॉल खरीद का नया टेंडर जारी किया है। BPCL ने 16 अक्टूबर को यह टेंडर निकाला था। इसमें गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद शामिल नहीं है।

इसके अलावा, मक्का से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमत भी घटा दी गई है। इसे ₹71.86 से कम करके ₹68.86 प्रति लीटर कर दिया गया है। टेंडर में करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां मांगी गई हैं।

चीनी कंपनियों को क्यों होगा नुकसान?

चीनी कंपनियां गन्ने से चीनी के साथ एथेनॉल भी बनाती हैं। इससे उन्हें कमाई का एक और रास्ता मिलता है। कई कंपनियों ने एथेनॉल बनाने की क्षमता बढ़ाने में पैसा भी लगाया है।

अब चीनी से बनने वाले एथेनॉल की सरकारी खरीद टेंडर में शामिल नहीं होने से कंपनियों की मुश्किल बढ़ सकती है। उनकी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चुनौती बन सकता है। इससे मुनाफे पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतें 10% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। वहीं, प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश से उत्पादन घटने की आशंका है।

भारत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखता है। अब इस जरूरत को पूरा करने के लिए मक्का और दूसरे अनाज से बनने वाले एथेनॉल की भूमिका बढ़ सकती है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग पर क्या असर होगा?

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस सीजन इसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है। चीनी से बनने वाले एथेनॉल का उत्पादन घटने के साथ मक्के की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।

प्रफुल्ल विठलानी के मुताबिक, पिछले सीजन में एथेनॉल सप्लाई में चीनी की हिस्सेदारी 25% थी। अब यह घटकर सिर्फ 2% के आसपास रह सकती है।

क्या चीनी की कीमतें बढ़ेंगी?

उत्पादन को लेकर चिंता के बावजूद फिलहाल चीनी की कीमतों में बड़ी हलचल की उम्मीद नहीं है। विठलानी के मुताबिक, सरकार ने कोटा जारी करके बाजार में सप्लाई को संभाला है। त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

ज्यादातर चीनी मिलों में नवंबर की शुरुआत तक पेराई शुरू होने की उम्मीद है। सरकार के सप्लाई प्रबंधन से अगले दो महीने तक कीमतें स्थिर रह सकती हैं। इसके बाद बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि चीनी का असल उत्पादन कितना रहता है और फसल की स्थिति कैसी रहती है।

Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

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खत्म हुआ 78 साल का इंतजार! रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार ने ठोके 400 रन, ब्रायन लारा और ब्रैडमैन के खास क्लब में हुए शामिल

भारतीय घरेलू क्रिकेट में मिजोरम के 29 वर्षीय बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने इतिहास रच दिया है। सुतार ने नागालैंड के खिलाफ 517 गेंदों पर नाबाद 400 रन बनाए। ये मुकाबला सोविमा स्थित नागालैंड क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। इस पारी के साथ चिन्मय सुतार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक ही पारी में 400 रन बनाने वाले भारत के दूसरे और दुनिया के 10वें खिलाड़ी बने। इससे पहले भारत के लिए ये रिकॉर्ड करीब 78 साल पहले देखने को मिला था। सुतार से पहले महाराष्ट्र के बीबी निंबालकर ने 1948 में पुणे में नाबाद 443 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल की थी। अब चिन्मय सुतार का नाम भी भारतीय क्रिकेट के इस खास रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है।

इस उपलब्धि के साथ चिन्मय सुतार दुनिया में फर्स्ट क्लास क्रिकेट की एक पारी में 400 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले दसवें बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने अपनी इस शानदार पारी के दम पर ब्रायन लारा और डॉन ब्रैडमैन जैसे दिग्गज क्रिकेटरों की सूची में जगह बना ली है।

मिजोरम की हुई खराब शुरुआत

मिजोरम की टीम की शुरुआत खराब रही और साहिल रेजा 4 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद लालहुरुआइजेला ने 31 रन और मनेंद्र सिंह ने 27 रन बनाकर टीम का स्कोर आगे बढ़ाया, जबकि जोसेफ लालथनखुमा केवल 1 रन ही बना सके। शुरुआती विकेट गिरने के बाद चिन्मय सुतार ने मोर्चा संभाला और विकेटकीपर जेहू एंडरसन के साथ 168 रन की साझेदारी की। एंडरसन ने 151 गेंदों पर 69 रन बनाए। हालांकि, नागालैंड के गेंदबाजों ने वापसी करते हुए मिजोरम के निचले क्रम के बल्लेबाजों को जल्दी आउट कर दिया। अनिल गुप्ता ने तीन विकेट लिए, जबकि सौरव कुमार और नीजेखो ने दो-दो विकेट हासिल किए।

इससे मिजोरम का स्कोर 314 रन पर चार विकेट से बढ़कर 392 रन पर नौ विकेट तक पहुंचा। इसके बाद चिन्मय सुतार ने लालरेम्पुइया छकछुक के साथ मिलकर आखिरी विकेट के लिए नाबाद 189 रन जोड़े। छकछुक ने 76 गेंदों पर नाबाद 14 रन बनाए। उनकी इस ऐतिहासिक पारी की बदौलत मिजोरम ने 154.1 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 581 रन बना लिए। इसके बाद टीम ने अपनी पारी घोषित कर दी।

इस खास क्लब में हुए शामिल

मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने घरेलू क्रिकेट में नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रच दिया है। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले महाराष्ट्र के बीबी निंबालकर ने 1948 में नाबाद 443 रन बनाए थे। करीब 78 साल बाद किसी भारतीय बल्लेबाज ने इस खास क्लब में जगह बनाई। सुतार अब दुनिया के उन चुनिंदा 10 बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट की एक पारी में 400 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं।

इस सूची में वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा और ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमैन जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी शामिल हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने का रिकॉर्ड ब्रायन लारा के नाम है, जिन्होंने वारविकशायर की ओर से डरहम के खिलाफ नाबाद 501 रन बनाए थे।

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Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे गिरकर 94.92 पर हुआ बंद, जानिए आगे कैसी रह सकती है रुपए की चाल

Dollar Vs Rupee : सोमवार, 19 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवाते हुए 3 पैसे की गिरावट के साथ 94.92 के स्तर पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के लगातार बने दबाव के बीच, रुपये की लगातार 6 सेशन की तेजी का सिलसिला टूट गया और यह गिरावट के साथ बंद हुआ।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.90 पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान, यह 94.75 के हाई और 94.97 के निचले स्तर तक गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 94.92 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 3 पैसे कम है।

शुक्रवार को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की हाजिर मांग को नियंत्रित करने के उपायों के चलते, रुपया लगातार छठे सत्र में मजबूत हुआ था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 94.89 पर बंद हुआ।

16 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान, डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा उठाए गए कदमों की मदद से भारतीय रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती आई थी।

लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड, गौरव गर्ग ने कहा कि RBI के कदम शॉर्ट टर्म में करेंसी के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसमें कोई टिकाऊ सुधार तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पूंजी की निकासी रुकने और बाहरी दबावों में कमी पर आने पर निर्भर करेगा।

गर्ग ने आगे कहा कि हालांकि रुपये में सुधार उत्साहजनक है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या RBI के सपोर्ट के साथ-साथ ग्लोबल और घरेलू बुनियादी हालात (फंडामेंटल्स) भी बेहतर होते हैं।

इस बीच छह बड़ी मुद्राओं के एक बॉस्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.93 पर कारोबार कर रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेड) में 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 108.58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के चलते उम्मीद है कि रुपया पॉजिटिव रुख के साथ कारोबार करेगा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और FII की निकासी इसमें बड़ी तेजी को सीमित कर सकती हैं।

HDFC सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपया लगातार सातवें सत्र में भी मजबूत हुआ। हालांकि, दिन के दौरान हुई अधिकांश बढ़त गंवाने के बाद, यह मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और मंगलवार को बाजार में छुट्टी होने से पहले घरेलू शेयरों में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण, रुपये की तेजी सीमित रही। वहीं, RBI के दखल और अमेरिकी डॉलर के स्थिर रहने से रुपये को सहारा मिला। तकनीकी रूप से देखें तो स्पॉट USDINR के लिए 94.70 के स्तर पर सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 95.50 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।

घरेलू इक्विटी बाजार में, सेंसेक्स 876.37 अंक गिरकर 73,852.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक गिरकर 22,888.95 पर आ गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) खरीदार बन गए और उन्होंने कुल 1,165.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस बीच, शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.578 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड ऑफ रिसर्च, राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को रुपया लगातार सातवें सत्र में मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 94.8 के स्तर को छू गया और डॉलर के मुकाबले 94.95 के आसपास बना रहा। इस तरह, महीने की शुरुआत में 97 के स्तर से आई इसकी जोरदार रिकवरी कायम रही। शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है। 9 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया। इस तरह, सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल 60 अरब डॉलर की कमी आई है। यह एक अहम आंकड़ा है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने केवल करेंसी सट्टेबाजों को चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अपने नियमों को सख्त करने से पहले एक ‘कृत्रिम आधार’ (artificial floor) बनाने के लिए भारी रकम भी खर्च की।

हालांकि शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ना यह बताता है कि RBI हमेशा के लिए बाजार में शांति नहीं बनाए रख सकता। अब बाजार के बुनियादी कारकों (market fundamentals) को ही स्थिति संभालनी होगी।

 

Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

New Tesla Roadster image gallery

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Tesla has unveiled its new Roadster EV, with production set to begin in 2028. It will be the second generation of the Roadster, whose first generation was discontinued in 2012. The new model will be offered in a standard Performance trim, along with Thrust and Rocket packages. Bookings for the Performance trim and Thrust package are open in India at Rs 5 lakh, while the Rocket package is available only by invitation.

Tesla claims the new Roadster can accelerate from 0-100kph in under a second. However, final powertrain details, including battery capacity, motor output and range, are yet to be revealed. The electric sports car also gets an underbody suction fan for extra grip. The Thrust package adds four rear-mounted thrusters, while the Rocket package adds 10 more, allowing the car to perform airborne manoeuvres.

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SBI Life Smart Platina Plus: एसबीआई लाइफ का ‘स्मार्ट प्लैटिनम प्लस’ एक नॉन-लिंक्ड सेविंग्स प्लान है, जो बिना किसी मार्केट रिस्क के गारंटीड रिटर्न और लाइफ कवर देता है। सुरक्षित और तयशुदा इनकम के जरिए अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

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SBI Life स्मार्ट प्लैटिनम प्लस की मुख्य विशेषताएं

इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रिटर्न पूरी तरह फिक्स और कॉन्ट्रैक्टुअल होते हैं, यानी शेयर बाजार की चाल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और फीचर्स:

प्लान टाइप: यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार लाइफ इंश्योरेंस सेविंग्स प्लान है।

इनकम विकल्प: इसमें दो मुख्य विकल्प मिलते हैं- पहला ‘गारंटीड इनकम ऑप्शन’ (रेगुलर फिक्स इनकम के लिए) और दूसरा ‘लाइफ इनकम ऑप्शन’ (पेआउट पीरियड के दौरान रेगुलर गारंटीड इनकम)।

प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT): पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के अनुसार 6, 7, 8 या 10 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान चुन सकते हैं।

न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम सालाना प्रीमियम ₹50,000 तय किया गया है।

न्यूनतम सम एश्योर्ड: प्लान के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹5,50,000 है।

पेआउट फ्रीक्वेंसी: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इनकम का भुगतान सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर ले सकते हैं।

मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स

मैच्योरिटी बेनिफिट: पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर, निवेशक को कुल चुकाए गए प्रीमियम का 110% हिस्सा रिफंड कर दिया जाता है।

डेथ बेनिफिट: पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर नॉमिनी को एकमुश्त डेथ बेनिफिट मिलता है। इसके अलावा, गारंटीड इनकम विकल्प के तहत कमेंसमेंट के बाद भी पेआउट मिलने का प्रावधान जारी रह सकता है।

पॉलिसी लोन सुविधा: वित्तीय आपातकाल के समय पॉलिसीधारक सरेंडर वैल्यू जो कम से कम 2 साल के पूरे प्रीमियम भुगतान के बाद मिलती है उसके 50% तक का लोन ले सकते हैं।

ऑप्शनल राइडर्स: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें एसबीआई लाइफ एक्सीडेंटल बेनिफिट राइडर (एक्सीडेंटल डेथ / आंशिक विकलांगता) और एसबीआई लाइफ वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।