Stocks to Watch: 6 अगस्त को इन 18 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार, 6 अगस्त के कारोबार में कई शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इनमें तिमाही नतीजे, बड़े ऑर्डर, शेयर बायबैक, USFDA अपडेट और मैनेजमेंट की अहम घोषणाओं से जुड़े स्टॉक्स शामिल हैं। ऐसे में इन 18 कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank ने कहा कि HDFC लिमिटेड के मर्जर का असर कम होने के साथ अगले 2-3 वर्षों में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और CASA रेशियो बेहतर होगा। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन राजीव कुमार ने AGM में कहा कि मर्जर के बाद बैलेंस शीट की संरचना बदली है, जिसका असर खत्म होने में कुछ समय लगेगा।

Aurobindo Pharma

फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 25.2% बढ़कर 1,032 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 16.3% बढ़कर 9,150.3 करोड़ रुपये और EBITDA 1,881 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के नतीजे बाजार के अनुमान से बेहतर रहे, जबकि EBITDA मार्जिन बढ़कर 21% हो गया।

Neuland Laboratories

फार्मा कंपनी Neuland Laboratories का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 14 करोड़ रुपये से बढ़कर 148 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 292.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 641.5 करोड़ रुपये रही। EBITDA 34.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 222.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 11.8% से बढ़कर 34.7% पर पहुंच गया।

Bikaji Foods International

पैकेज्ड फूड कंपनी Bikaji Foods International का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में मामूली 0.4% बढ़कर 60.1 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, रेवेन्यू 12.5% बढ़कर 734.3 करोड़ रुपये हो गई। बढ़ती ऑपरेटिंग लागत की वजह से कंपनी के मुनाफे की रफ्तार सीमित रही।

Biocon

फार्मा कंपनी Biocon का शुद्ध मुनाफा 31.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 141 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 10% बढ़कर 4,336 करोड़ रुपये रही। EBITDA 10.6% बढ़कर 847.2 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 19.43% से बढ़कर 19.54% हो गया।

JK Lakshmi Cement

सीमेंट कंपनी JK Lakshmi Cement का शुद्ध मुनाफा 150 करोड़ रुपये से घटकर 108 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 9.4% बढ़कर 1,905 करोड़ रुपये रही। EBITDA 311.2 करोड़ रुपये से घटकर 258.7 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 17.9% से घटकर 13.6% पर आ गया।

PB Fintech

फिनटेक कंपनी PB Fintech का शुद्ध मुनाफा 85 करोड़ रुपये से बढ़कर 163 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 40.1% बढ़कर 1,888.2 करोड़ रुपये रही। EBITDA 34.22 करोड़ रुपये से बढ़कर 139.1 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 2.54% से बढ़कर 7.37% हो गया।

Navin Fluorine

स्पेशलिटी केमिकल कंपनी Navin Fluorine का शुद्ध मुनाफा 117.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 243.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 44.1% बढ़कर 1,045.1 करोड़ रुपये रही। EBITDA 206 करोड़ रुपये से बढ़कर 357 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 28.5% से बढ़कर 34.2% हो गया।

Godrej Agrovet

एग्री-इनपुट कंपनी Godrej Agrovet का शुद्ध मुनाफा 149 करोड़ रुपये से घटकर 128.3 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 9.2% बढ़कर 2,855.2 करोड़ रुपये रही। EBITDA 269.6 करोड़ रुपये से घटकर 240.1 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 10.32% से घटकर 8.41% पर आ गया।

Bayer CropScience

एग्रोकेमिकल कंपनी Bayer CropScience का शुद्ध मुनाफा 278.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 321.6 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 4.2% घटकर 1,835 करोड़ रुपये रही। EBITDA 5.5% बढ़कर 367.6 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 18.2% से बढ़कर 20% हो गया।

Aster DM

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM का शुद्ध मुनाफा 85.5 करोड़ रुपये से घटकर 16.1 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 21.6% बढ़कर 1,311 करोड़ रुपये रही। EBITDA 27.5% बढ़कर 264.3 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 19.2% से बढ़कर 20.2% हो गया।

GMM Pfaudler

इंजीनियरिंग कंपनी GMM Pfaudler का शुद्ध मुनाफा 55.1 करोड़ रुपये से घटकर 4.8 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 16.4% बढ़कर 924.8 करोड़ रुपये रही। EBITDA 7.1% घटकर 94 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 12.7% से घटकर 10.1% पर आ गया।

NBCC

सरकारी कंपनी NBCC को 801.20 करोड़ रुपये के दो नए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) ऑर्डर मिले हैं। इनमें RBI से 780.38 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है, जिसके तहत अमरावती में ऑफिस और आवासीय परिसर बनाए जाएंगे। वहीं, ओडिशा में छात्रावास निर्माण के लिए कंपनी को 20.82 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर मिला है।

SIS Ltd

सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी SIS Ltd का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 9.4% बढ़कर 101.7 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 29.7% बढ़कर 4,603.6 करोड़ रुपये और EBITDA 36.2% बढ़कर 207.1 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने 106 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का भी ऐलान किया।

Cummins India

इंजन निर्माता Cummins India का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 589 करोड़ रुपये से घटकर 543 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 17.9% बढ़कर 3,426 करोड़ रुपये रही। EBITDA 616.2 करोड़ रुपये से घटकर 609.2 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 21.5% से घटकर 18% पर आ गया।

RMC Switchgears

इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RMC Switchgears को अंडरग्राउंड केबलिंग प्रोजेक्ट्स के लिए 333.8 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं। नए ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। इससे आने वाले समय में कारोबार को सहारा मिलने की उम्मीद है।

Cohance Lifesciences

फार्मा कंपनी Cohance Lifesciences को हैदराबाद स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के निरीक्षण के बाद अमेरिकी दवा नियामक USFDA से Form 483 मिला है। निरीक्षण के दौरान एजेंसी ने पांच ऑब्जर्वेशन जारी किए हैं। अब कंपनी इन टिप्पणियों का जवाब देगी।

तिमाही नतीजे 5 अगस्त

आज कई कंपनियां जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Advent Hotels International, The Anup Engineering, Aegis Logistics, Apollo Tyres, Bajaj Electricals, BirlaNu, BLS E-Services और Blue Star शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों और बाजार की नजर रहेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: फार्मा कंपनी का प्रॉफिट 10 गुना बढ़ा, रेवेन्यू भी डबल; शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: फार्मा कंपनी न्यूलैंड लेबोरेटरीज ने जून तिमाही (Q1 FY27) में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10 गुना से ज्यादा बढ़कर 148 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी दोगुना से ज्यादा होकर 641.5 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 292.7 करोड़ रुपये थी।

EBITDA और मार्जिन में जबरदस्त सुधार

जून तिमाही में EBITDA बढ़कर 222.7 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 34.4 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.8% से बढ़कर 34.7% पर पहुंच गया। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार हुआ है।

कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 650.1 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल 300.6 करोड़ रुपये थी। टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 17.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 197.5 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 13.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 147.4 करोड़ रुपये हो गया।

CMS और GDS कारोबार ने दिखाई दमदार ग्रोथ

मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सहर्ष दावुलुरी ने कहा कि तिमाही का प्रदर्शन कंपनी की उम्मीदों के मुताबिक रहा। कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (CMS) और जेनेरिक ड्रग सब्सटेंस (GDS) कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया।

कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान कमर्शियल प्रोडक्ट्स से सबसे ज्यादा रेवेन्यू आई। साथ ही प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। ग्राहकों की दिलचस्पी भी कंपनी की व्यापक क्षमताओं में बढ़ रही है।

विस्तार पर रहेगा फोकस

न्यूलैंड लेबोरेटरीज ने कहा कि वह API, जटिल मॉलिक्यूल्स और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। हालांकि, आने वाले समय में कंपनी का प्रदर्शन नए प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने, नए प्रोडक्ट्स के सफल कमर्शियल लॉन्च और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखने पर निर्भर करेगा।

शेयरों का हाल

नतीजों से पहले बुधवार को NSE पर न्यूलैंड लेबोरेटरीज का शेयर 4.03% की बढ़त के साथ 20,049 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 51.86% चढ़ा है। वहीं, बीते 5 साल में इसने 1,081% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 25.72 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 349% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; शेयरों पर रहेगी नजर

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी बायोकॉन ने 5 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर चार गुना से ज्यादा बढ़कर 141 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 31.4 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी का प्रॉफिट करीब 349% उछला है।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10% बढ़कर 4,336 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,942 करोड़ रुपये थी।

EBITDA और मार्जिन में सुधार

जून तिमाही में EBITDA 10.6% बढ़कर 847.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 766.1 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी मामूली बढ़कर 19.54% हो गया, जो एक साल पहले 19.43% था।

ग्रॉस EBITDA 902 करोड़ रुपये रहा। इसका मार्जिन 21% रहा। कंपनी ने कहा कि बायोफार्मा कारोबार में बेहतर मुनाफे की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

बायोफार्मा कारोबार ने कमाल किया

बायोकॉन का बायोफार्मा कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन रहा। इस कारोबार की रेवेन्यू 17% बढ़कर 3,615 करोड़ रुपये पहुंच गई। बायोसिमिलर कारोबार की रेवेन्यू 16% बढ़कर 2,855 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, जेनेरिक दवाओं की रेवेन्यू 21% बढ़कर 760 करोड़ रुपये रही।

कंपनी ने कहा कि नए बायोसिमिलर और जेनेरिक प्रोडक्ट लॉन्च होने से यह बढ़त मिली। हालांकि, सर्विसेज कारोबार दबाव में रहा। इस सेगमेंट की रेवेन्यू 16% घटकर 736 करोड़ रुपये रह गई।

फाइनेंस कॉस्ट घटी, R&D खर्च बढ़ा

बैलेंस शीट मजबूत करने की रणनीति के चलते कंपनी का ब्याज खर्च 23% घटकर 213 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च 17% बढ़कर 240 करोड़ रुपये हो गया।

अमेरिका और यूरोप में कई नए प्रोडक्ट लॉन्च

बायोकॉन के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीहास तांबे ने कहा कि कंपनी ने तिमाही के दौरान अमेरिका और यूरोप समेत विकसित बाजारों में कई प्रो़डक्ट लॉन्च किए। साथ ही उभरते बाजारों में नए प्रोडक्ट और साझेदारियों के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई। उन्होंने कहा कि कि कंपनी को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार और तेज होगी। इसका असर दूसरी छमाही के नतीजों में साफ दिखाई देगा।

बायोकॉन की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि कंपनी अब रणनीतिक निवेश को टिकाऊ ग्रोथ में बदलने पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि बायोसिमिलर के लिए बेहतर नीति माहौल और अमेरिका में बढ़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

बायोकॉन के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले बुधवार को बायोकॉन का शेयर 0.76% की बढ़त के साथ 425.20 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक यह करीब 10% चढ़ चुका है। वहीं, पिछले एक साल में इसने 14% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

-हरिशंकर मिश्र

Kanwar Yatra social harmony: किसी भी समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता का वातावरण तब स्वतः निर्मित होता है, जब व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर भक्ति का पथ अपनाता है। कांवड़ यात्रा इसी सत्य का सजीव प्रतीक है। मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की यह एक विराट यात्रा है जिसमें जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक भेदभाव गौण हो जाते हैं। कांवड़ यात्रा हमारे लिए यह बड़ी सीख भी है कि सामाजिक समरसता किसी उपदेश से नहीं, बल्कि साझा आस्था, सहभागिता और परस्पर सम्मान से विकसित होती है और इसे वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप में देखा भी जा सकता है जबकि एक साथ हजारों लोग कंधे पर गंगाजल लिए शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

विविधताओं के बीच एकात्मता का यह दृश्य इस सावन में जीवंत हो उठा है। प्रेम, सेवा, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर टिकी हुई यह श्रद्धा यात्रा वह आध्यात्मिक शक्ति है जो लोगों को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ती है। इस सामूहिक अनुशासन के पीछे एक साक्षा पहचान है-भोला। यानि वह संज्ञा जो मनुष्य को शिव से एकाकार करती है।

 

‘भोला’ कोई साधारण संबोधन नहीं है। यह बराबरी का संवाद है। कांवड़ उठाते ही श्रद्धालु का नाम, उसका कुल, उसकी आर्थिक हैसियत गौण हो जाती है। सड़क किनारे सेवा शिविर में एक करोड़पति व्यापारी का बेटा और एक दिहाड़ी मजदूर का बेटा एक ही पंगत में बैठकर बराबरी से भोजन करते हैं। यह सिर्फ भूख मिटाना भर नहीं हैं। यह सदियों पुरानी सामाजिक दूरियों को पाटने का एक मौन प्रयास है और आस्था की स्वाभाविक शक्ति से यह भाव जन्म लेता है।

 

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सामाजिक आयाम को गहराई से समझा है और यही कारण है कि कांवड़ यात्रा को व्यवस्थागत समर्थन लगातार दिया जा रहा है। योगी सरकार की दृष्टि में यह यात्रा ऐसा सामाजिक अवसर है जहां समाज अपने भीतर की खाइयों को स्वयं पाटने का काम करता है। सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था, यह सब एक तरह से सामाजिक समरसता के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास है।

 

इस समरसता का एक और भावनात्मक पक्ष हिंदू-मुस्लिम सहभागिता के रूप में दिखाई देता है। बरेली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली के कई कस्बों में कांवड़ बनाने का काम पीढ़ियों से मुस्लिम कारीगरों के हाथों में रहा है। बांस को मोड़ना, रंगीन कागज और कपड़े से सजावट करना, घंटियां टांकना, यह हुनर उन परिवारों की जीविका का हिस्सा है, जो साल भर सावन का इंतजार करते हैं। उम्मीद के इस भाव के साथ कि सावन आए और उनकी कारीगरी किसी शिवभक्त के कंधे की शोभा बने। यह भारतीय समाज की उस गहरी बुनावट का प्रमाण है, जहां श्रद्धा और आजीविका एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

Kanwar Yatra UP 2026

यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता के अन्य बिंदु भी देखने को मिलते हैं। कई कस्बों में मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर कांवड़ियों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था करते हैं। कुछ जगहों पर मस्जिद परिसर में थके यात्रियों को विश्राम की अनुमति दी जाती है। यात्रा के दौरान उभरने वाली यह सहजता दिखाती है कि आस्था और मानवता, राजनीतिक विमर्श से कहीं गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिर भी कुछ लोग प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह समरसता समाज में स्थायी छाप भी छोड़ जाती है? इसका उत्तर है कि मानव मन स्मृतियों से बनता है और हम अपनी यात्रा के अनुभव कभी नहीं भूलते। यात्रा के अनुभव समाज की सामूहिक चेतना में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। सामाजिक बदलाव ऐसे ही संचित अनुभवों से आता है, थोड़ा धीमे-धीमे, लेकिन निश्चित रूप से।

 

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो भी कांवड़ यात्रा हमें समरसता से ओतप्रोत करती है। शिव स्वयं समरसता के प्रतीक हैं। वह श्मशान में विराजते हैं और कैलाश पर भी, वह भस्म रमाते हैं और चंद्रमा भी धारण करते हैं, उनके गले में सर्प है और जटाओं से गंगा प्रवाहित होती है। शिव को विरोधाभासों का देवता कहा जाता है। वह कल्याण भी करते हैं और विध्वंस भी। कांवड़िया जब अपने कलश में गंगाजल भरता है, तब उसे अहसास होता है कि उसके भीतर की सारी भिन्नताएं उस जल में समाहित हो रही हैं। इसके बाद उसके शरीर के साथ ही उसकी आत्मा भी यात्रा करती है। वह आत्मा जो किसी जाति, किसी वर्ग, किसी संप्रदाय को नहीं जानती।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि शिक्षा, आर्थिक अवसर, न्यायसंगत नीतियां और निरंतर सामाजिक संवाद, यह सब मिलकर परिवर्तन लाते हैं, लेकिन कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन वह भूमि तैयार करते हैं, जिस पर बड़े सामाजिक परिवर्तन के बीज बोए जा सकते हैं। योगी सरकार में इस यात्रा के लिए जो प्रतिबद्धता दिखाई देती है, उसके मूल में यही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके लिए सारी व्यवस्थाएं पूरी कर एक तरह से गहरा सामाजिक निवेश करते हैं, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा। 

 

वस्तुतः समरसता एक ऐसा अनुभव है, जिसे जीना पड़ता है, बांटना पड़ता है, कंधे पर उठाना पड़ता है। यह यात्रा हर वर्ष याद दिलाती है कि विभाजन की रेखाएं मनुष्य की बनाई हुई हैं, जबकि साझी श्रद्धा, साझी प्यास, साझी थकान और साझा विश्राम, यह सब हमारी सामाजिक एकता के प्रमाण हैं। ‘बोल बम’ की गूंज केवल शिव का आह्वान नहीं, बल्कि उस समाज का आह्वान भी है जो अपने भीतर एकत्व, समरसता और आत्मबोध की चाह रखता है।

 

यह उद्घोष हमें स्मरण कराता है कि शिव अंतर्मन में विद्यमान उस चेतना के प्रतीक हैं जो भेदभाव से ऊपर उठकर समता, करुणा और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करती है। अहंकार, स्वार्थ और विकारों का परित्याग करने को प्रेरित करती है। जब मन निर्मल हो, व्यवहार करुणामय हो और जीवन लोककल्याण के संकल्प से जुड़ जाए, तभी शिव की उपासना पूर्ण होती है। यही ‘बोल बम’ का सनातन संदेश है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

 

HDFC Bank AGM: आने वाली तिमाहियों में HDFC बैंक के CASA और NIM सुधरेंगे : चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank AGM: देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि बैंक की कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसे आगे और सशक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली कुछ तिमाहियों में CASA (करंट अकाउंट-सेविंग अकाउंट) रेशियो और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होगा।

मर्जर से बैलेंस शीट का स्ट्रक्चर बदला

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC लिमिटेड के मर्जर के बाद बैंक की बैलेंस शीट के स्ट्रक्चर में बदलाव आया है। इसका सबसे ज्यादा असर CASA रेशियो और NIM पर पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘हम डिपॉजिट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही कंजम्प्शन आधारित कारोबार पर फोकस बढ़ा रहे हैं। हमें भरोसा है कि अगले 2-3 वर्षों में CASA और NIM दोनों में सुधार होगा।’

पहली बार AGM में किया संबोधन

राजीव कुमार ने 5 अगस्त को बैंक की 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) को संबोधित किया। यह उनका चेयरमैन के तौर पर पहला संबोधन था।

उन्होंने कहा कि बैंक की कार्यसंस्कृति मजबूत है। आंतरिक नियंत्रण प्रणाली भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने शेयरधारकों, ग्राहकों और सभी हितधारकों के भरोसे की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। बैंक के कामकाज का तरीका और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मजबूत है। इसे आगे और सशक्त बनाया जाएगा।’

पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे के बाद आया बयान

राजीव कुमार का यह बयान अहम माना जा रहा है। मार्च में तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मूल्यों में मतभेद की बात कही थी। इसके बाद स्वतंत्र कानूनी जांच कराई गई। जून में आई रिपोर्ट में किसी तरह की गवर्नेंस या नैतिक चूक के सबूत नहीं मिले।

CEO के तीसरे कार्यकाल पर चुप्पी

राजीव कुमार ने कहा कि बोर्ड में नई नियुक्तियां सिर्फ मेरिट के आधार पर होंगी। उन्होंने कहा कि योग्यता, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

हाल के महीनों में MD और CEO शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल को लेकर चर्चा रही है। हालांकि, राजीव कुमार ने अपने संबोधन में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

 

डिपॉजिट ग्रोथ रही मजबूत

राजीव कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में HDFC बैंक के डिपॉजिट में 14.4% की बढ़ोतरी हुई। यह पूरे बैंकिंग सिस्टम की 11.5% वृद्धि से बेहतर रही। वहीं, इसी अवधि में बैंक के एडवांस (लोन) 12.1% बढ़े।

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC बैंक से पहली बार होम लोन लेने वाले 95% से ज्यादा ग्राहक बैंक में सेविंग अकाउंट भी खोल रहे हैं। इससे मर्जर के बाद क्रॉस-सेलिंग के अवसर बढ़े हैं।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

HDFC बैंक के शेयर बुधवार को 0.99% की गिरावट के साथ 734.65 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.47% गिरा है। वही, 1 साल के दौरान 25.70% टूटा है। पिछले 5 साल का रिटर्न भी 1.56% नेगेटिव हो गया है। बैंक का मार्केट कैप 5.65 लाख करोड़ रुपये है।

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया को नया CEO मिला, अब टेवोल्डे गेबरमरियम संभालेंगे कमान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया को नया CEO मिला, अब टेवोल्डे गेबरमरियम संभालेंगे कमान

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेबरमरियम (Tewolde Gebremariam) को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) नियुक्त किया है। वह कैंपबेल विल्सन की जगह लेंगे। कंपनी ने 5 अगस्त को इसकी आधिकारिक घोषणा की।

एयर इंडिया ने बयान में कहा कि यह बदलाव कंपनी के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम का अहम हिस्सा है। इसका मकसद एयर इंडिया को वर्ल्ड क्लास दिग्गज एयरलाइन बनाना है।

बोर्ड ने किया व्यापक चयन

एयर इंडिया के बोर्ड ने बताया कि नए CEO के चयन के लिए व्यापक प्रक्रिया अपनाई गई। दुनिया भर के आंतरिक और बाहरी उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया। सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद बोर्ड ने सर्वसम्मति से टेवोल्डे गेबरमरियम के नाम पर मुहर लगाई।

कंपनी के अनुसार, उनके पास मजबूत नेतृत्व क्षमता है। साथ ही ऑपरेशनल मैनेजमेंट और स्ट्रैटजी को लागू करने का लंबा तजुर्बा भी है। यही वजह है कि उन्हें एयर इंडिया के अगले ग्रोथ स्टेज के लिए सबसे काबिल उम्मीदवार माना गया।

कौन हैं एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेबरमरियम?

इथियोपिया के टेवोल्डे गेबरमरियम (Tewolde Gebremariam) एविएशन इंडस्ट्री के सबसे काबिल वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। टेवोल्डे ने अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में स्नातक और ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी से MBA किया है। वह इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स समेत कई वैश्विक एविएशन संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1985 में इथियोपियन एयरलाइंस से अपने विमानन करियर की शुरुआत की थी।

टेवोल्डे ने इथियोपियन एयरलाइंस में ट्रैफिक ऑफिसर के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद कार्गो, मार्केटिंग, सेल्स और ऑपरेशंस समेत कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 2006 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बनाया गया। 2011 में वह इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के CEO बने।

उनके कार्यकाल में चार गुना बढ़ी रेवेन्यू

CEO के रूप में टेवोल्डे गेबरमरियम के नेतृत्व में इथियोपियन एयरलाइंस ने रिकॉर्ड विस्तार किया। कंपनी की रेवेन्यू 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गई। एयरलाइन का फ्लीट 33 विमानों से बढ़कर करीब 130 विमान हो गया। वहीं, यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई। इसी दौरान इथियोपियन एयरलाइंस अफ्रीका की सबसे बड़ी और सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली एयरलाइन बन गई।

एयर इंडिया मैनेजमेंट ने क्या कहा

टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “कैंपबेल विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने बदलाव के शुरुआती दौर का बड़ा काम पूरा कर लिया है। अब कंपनी तेजी से विस्तार और योजनाओं को जमीन पर उतारने के अगले चरण में प्रवेश कर रही है।”

उन्होंने कहा कि टेवोल्डे गेबरमरियम ने दुनिया की सबसे सफल और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली एयरलाइन कंपनियों में से एक को आगे बढ़ाया है। उनके अनुभव और नेतृत्व पर हमें पूरा भरोसा है कि वह एयर इंडिया को विकास की अगली ऊंचाई तक ले जाएंगे।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Investment: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मोतीलाल ओसवाल ने निवेशकों को दी खास सलाह

Gold Investment: हाल के वर्षों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन अब निवेश की रणनीति बदलने की जरूरत हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) का कहना है कि तेजी के दौरान एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा।

ब्रोकरेज के मुताबिक, अब सोने की कीमतों पर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का असर नहीं पड़ता। अमेरिकी महंगाई, ब्याज दरें और रियल यील्ड जैसे फैक्टर्स भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

MOFSL का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को एक बार में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय अलग-अलग स्तर पर धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6% से 8% तक की गिरावट आ सकती है। इसके बाद अगले 12 से 15 महीनों में कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

भारतीय निवेशकों के लिए ब्रोकरेज ने ₹1.30 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए वाजिब माना है। वहीं, मीडियम टर्म में ₹1.68 लाख और उसके बाद ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य दिया है।

ब्याज दरों पर क्यों रखें नजर?

सोना नियमित आय नहीं देता, जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड देते हैं। इसलिए ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है।

जब रियल यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने पर दबाव आ सकता है। वहीं, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने की मांग बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसले, ग्लोबल लिक्विडिटी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश पर नजर रखनी चाहिए।

चांदी को लेकर क्या राय है?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी की चाल सोने से अलग होती है। इसकी वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी होता है।

इसी कारण चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। इस पर औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक स्थिति, निवेशकों की खरीदारी और ब्याज दरों का असर पड़ता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

ब्रोकरेज का मानना है कि सोना और चांदी लंबी अवधि में पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अच्छा विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, निवेशकों को छोटी अवधि की तेजी या गिरावट के पीछे भागने के बजाय अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहिए। महंगाई, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखना ज्यादा अहम होगा।

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Q1 Results: अग्रवाल टफन्ड ग्लास का रेवेन्यू 23% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पहुंची

Agarwal Toughened Glass Q1 Results: टफन्ड, लैमिनेटेड, इंसुलेटेड और सेफ्टी ग्लास बनाने वाली कंपनी Agarwal Toughened Glass India Ltd ने जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 22.86% बढ़कर ₹34.40 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹28 करोड़ था।

ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पर पहुंची

30 जून 2026 तक कंपनी की एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ रही। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने ₹95 करोड़ का रेवेन्यू और ₹22 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।

किन वजहों से बढ़ा कारोबार?

कंपनी ने बताया कि आर्किटेक्चरल, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू-एडेड ग्लास प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग से कारोबार को सहारा मिला। ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश भी किया जा रहा है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

अग्रवाल टफन्ड ग्लास के प्रमोटर और होल-टाइम डायरेक्टर महेश अग्रवाल ने कहा कि FY27 की शुरुआत सकारात्मक रही है। मजबूत ऑर्डर बुक और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस से कारोबार को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि हाल ही में कंपनी ने पूंजी भी जुटाई है। इससे बैलेंस शीट और मजबूत हुई है। अब कंपनी अगले चरण की ग्रोथ के लिए तैयार है।

आगे की क्या रणनीति है?

कंपनी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत करने पर काम कर रही है। फोकस इंसुलेटेड ग्लास, लैमिनेटेड ग्लास और जंबो ग्लास जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर रहेगा। कंपनी प्रीमियम कमर्शियल बिल्डिंग, एयरपोर्ट, मेट्रो रेल और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

मुनाफा बढ़ाने पर रहेगा फोकस

अग्रवाल टफन्ड ग्लास का लक्ष्य बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के जरिए मार्जिन बढ़ाना है। साथ ही कच्चे माल और बिजली की लागत को नियंत्रित करने के लिए सोर्सिंग और एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार किया जाएगा। कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी करना चाहती है, ताकि नए बाजारों में तेजी से और कम लागत पर डिलीवरी की जा सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।