Happiest Minds share Price: बाजार खुलते ही शेयर क्रैश, जानिए क्या है पूरा मामला

Happiest Minds share Price: हैपिएस्ट माइड्ंस के शेयर 1 सितंबर को बाजार खुलते ही क्रैश कर गए। इसकी वजह कंपनी का एक बड़ा ऐलान है। आईटी कंपनी ने आईटीसी इंफोटेक में अपने विलय का ऐलान किया है। यह ऐलान बाजार को पसंद नहीं आया। 11:10 बजे हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज का शेयर 11.84 फीसदी गिरकर 358.75 रुपये पर चल रहा था। 2026 में यह शेयर अब तक 21 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है।

हैपिएस्ट माइंड्स के फाउंडर बेच रहे हिस्सेदारी

Happiest Minds के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अशोक सूता (Ashok Soota) और अशोक सूता मेडिकल रिसर्च एलएलपी कंपनी में 22.1 फीसदी हिस्सेदारी ITC Infotech को बेचने को तैयार हो गए हैं। यह डील 1,329.72 करोड़ रुपये में होगी। इसके बाद Happiest Minds का विलय रेगुलेटरी एप्रूवल के बाद ITC Infotech में हो जाएगा।

प्रमोटर की हिस्सेदारी की बिक्री दो चरणों में होगी

हैपिएस्ट माइंड्स के प्रमोटर की हिस्सेदारी की बिक्री (Sell) दो चरणों में होगी। पहले ITC Infotech प्रति शेयर 390 रुपये की कीमत पर हैपिएस्ट माइंड्स में 11 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। इसके लिए उसे 653.26 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। उसके बाद वह और 11.06 फीसदी हिस्सेदारी प्रति शेयर 400 रुपये की कीमत पर खरीदेगी। उसे कुल 676.46 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।

हैपिएस्ट माइंड्स के शेयरहोल्डर्स को प्रत्येक 81 शेयर पर 25 शेयर मिलेंगे

इस विलय के लिए तैयार् प्लान के मुताबिक, हैपिएस्ट माइंड्स के शेयरहोल्डर्स को अपने प्रत्येक 81 शेयरों के बदले आईटीसी इंफोटेक के 25 फुली पेड-अप शेयर मिलेंगे। बाद में आईटीसी इंफोटेक अपने शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट कराएगी, जबकि हैपिएस्ट माइंड्स का वजूद खत्म हो जाएगा।

दोनों कंपनियों की इतनी लगाई गई है वैल्यू

हैपिएस्ट माइंड्स ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया कि इस ट्रांजेक्शन के लिए उसकी वैल्यू EBITDA की 15.1 गुना लगाई गई है, जबकि आईटीसी इंफोटेक की 13.6 गुना लगाई गई है। प्रॉफिट और रेवेन्यू के लिहाज से आईटीसी इंफोटेक करीब 2.17 गुना बड़ी है। इसका कैश बैलेंस भी ज्यादा है।

विलय के बाद आईटी कंपनी में ITC की 74% हिस्सेदारी होगी

विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी में आईटीसी की करीब 74 फीसदी हिस्सेदारी होगी। हैपिएस्ट माइंड्स ने कहा है कि इस डील के तहत ओपन ऑफर पेश करने का प्रस्ताव नहीं है। विलय के बाद आईटीसी इंफोटेक का टारगेट FY28 तक 1 अरब डॉलर से ज्यादा रेवेन्यू का होगा।

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शेयर बाजार में शुरुआती दबाव के बाद रिकवरी

1 सितंबर को शेयर बाजारों में शुरुआती दबाव के बाद रिकवरी दिखी। 11:30 बजे निफ्टी 0.19 फीसदी यानी 47 अंक चढ़कर 24,126 रुपये पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.32 फीसदी यानी 242 अंक चढ़कर 77,202 पर था। हालांकि, बैंक निफ्टी पर दबाव दिखा। यह 0.47 फीसदी नीचे चल रहा था।

GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

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रक्षाबंधन के बाद Sensex लाल, 24100 के नीचे बंद Nifty, निवेशकों के ₹3.79 लाख करोड़ साफ

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचा तो कच्चा तेल उबल पड़ा। इसकी आंच में एशियाई मार्केट झुलस गया और घरेलू मार्केट में भी बिकवाली की आंधी चलने लगी। इस दबाव में सेंसेक्स 513 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव तेज रहा लेकिन मिडकैप में रिकवरी दिखी। निफ्टी स्मॉलकैप 100 शुरुआती कारोबार में करीब आधे फीसदी की गिरावट से उबरते हुए अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए लेकिन निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी से अधिक टूट गया।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज प्राइवेट बैंकों और फार्मा कंपनियों ने संभालने की काफी कोशिश की लेकिन मेटल और एफएमसीजी का दबाव अधिक भारी पड़ गया। आईटी सेक्टर ने रिकवरी की काफी कोशिश की लेकिन 1% से अधिक गिरावट से उबरते हुए इसकी गिरावट आधे फीसदी से थोड़ी कम रह ही गई। वहीं निफ्टी प्राइवेट में करीब 1% तो निफ्टी फार्मा में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त रही तो निफ्टी मेटल करीब ढाई फीसदी और निफ्टी एफएमसीजी डेढ़ फीसदी से अधिक नीचे आ गया। इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 31 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 307.24 प्वाइंट्स यानी 0.40% की फिसलन के साथ 76,957.27 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 95.25 प्वाइंट्स यानी 0.39% की कमजोरी के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 513.19 प्वाइंट्स फिसलकर 76,751.32 और निफ्टी 182.05 प्वाइंट्स गिरकर 23,993.60 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹3.79 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 28 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,94,12,415.27 करोड़ था। आज यानी 31 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,90,33,359.29 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹379,055.98 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 10 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ अदाणी पोर्ट्स, आईटीसी और एयरटेल में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

 

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US-Iran War: अमेरिका का ईरान पर फिर बड़ा हमला, होर्मुज स्ट्रेट में की जमकर बमबारी, तेहरान ने जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर दागी मिसाइलें

इन चार वजहों से आज मार्केट में कोहराम

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Nifty से ज्यादा Gold ETF में गिरावट, दो वजहों से 4 % तक आया नीचे

Gold ETF Big Fall: गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में आज बिकवाली का तेज दबाव दिखा और यह 4% तक टूट गया। इसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श (Kevin Warsh) की हॉकिश यानी सख्त कमेंट्स से झटका लगा, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ीं तो सोने-चांदी के ईटीएफ की चमक फीकी पड़ी। यह बिकवाली वैश्विक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी के मुताबिक ही है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में सोमवार को भी गिरावट जारी रही।

शुक्रवार को सोने में 3% से अधिक की गिरावट आई, जो जून की शुरुआत के बाद इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। सिंगापुर में कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर प्रति औंस $4,422.75 प्रति औंस तो सिल्लर भी 0.4% गिरकर $66.12 प्रति औंस पर आ गया। इसका असर घरेलू बूलियन मार्केट में भी दिखा और MCX Gold प्रति 10 ग्राम 1.14% गिरकर ₹1,54,496 और MCX Silver Futures करीब 1.28% गिरकर ₹2,39,341 प्रति किग्रा पर आ गया।

Gold ETF की तुलना में Silver ETF में अधिक गिरावट

आज 31 अगस्त तो गोल्ड ईटीएफ की तुलना में सिल्वर ईटीएफ में अधिक गिरावट रही। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ (SBI Silver ETF) 4.05% गिरकर ₹226.55 पर आ गया, तो निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (Nippon India Silver ETF- Silver BeES) 4.06% गिरकर ₹221.07 पर आ गया। टाटा सिल्वर ईटीएफ (Tata Silver ETF) भी 3.98% गिरकर ₹22.44 और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ (ICICI Prudential Silver ETF) भी 3.87% गिरकर ₹231.21 पर आ गया।

गोल्ड ईटीएफ में भी भारी गिरावट रही। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ (ICICI Prudential Gold ETF) 3.59% गिरकर ₹130.75, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ (SBI Gold ETF) 3.50% टूटकर ₹130.30 और निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएसएस (Nippon India ETF Gold BeES) 3.48% गिरकर ₹126.30 पर आ गया। वहीं टाटा गोल्ड ईटीएफ (Tata Gold ETF) 3.19% गिरकर ₹14.87 पर आ गया।

क्या है US Fed का रुझान

फेडरल रिजर्व की सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में केविन वॉर्श ने कहा कि वह महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए प्रतिबंध है। इसके बाद सोना-चांदी धड़ाम हो गया क्योंकि इससे अमेरिकी मौद्रिक नीतियों के सख्त होने की उम्मीदें बढ़ गई। ट्रेडर्स का मानना है कि सितंबर में नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 50% से अधिक है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर सोने और चांदी जैसी बिना यील्ड वाली एसेट्स पर पड़ता है।

सोने-चांदी की चमक पर अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई गहहाने से तेल की कीमतों में उबाल ने और दबाव बनाया। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया जोकि एक महीने से अधिक समय में ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई थी। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया, जबकि बाजार पहले से ही आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कैलकुलेशन कर रहा था।

Ola Electric के शेयरों में 3% की तेज रिकवरी, लगातार तीसरे साल ₹95.81 करोड़ के इंसेंटिव ने भरा जोश

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और क्रूड में उछाल से भारतीय बाजार के सेंटिमेंट कमजोर दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे आ गया है। शुक्रवार को FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 5600 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली। इनके नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट फिर दो लाख के पार चले गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

28 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला खत्म होगा। IT शेयरों में बढ़त की वजह से निफ्टी 24,150 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 330.92 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 77,264.51 पर और निफ्टी 84.80 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 24,175.65 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो मार्केट में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट जारी रही। बीते हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी50 दोनों में 0.3% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा और निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ कारोबार खत्म हुआ

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

28 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे,लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,183 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर इसकी भरपाई कर दी और लगातार 14वें दिन भी खरीदारी जारी रखी।

Stock Market LIVE Updates : GIFT Nifty से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, US और एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला असर दिख रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.29% और जापानी येन 0.09% मजबूत हुए हैं। दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.04% की गिरावट आई है,जबकि फिलीपींस पेसो 0.10% कमजोर हुआ है। थाई बाहत 0.19% और ताइवान डॉलर 0.17% गिरे हैं। चीनी रेनमिनबी में 0.14% की नरमी आई हैं,जबकि मलेशियाई रिंगित 0.20% टूटा है। सिंगापुर डॉलर भी 0.02% नीचे आया है।

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ी

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ गई है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार हुआ है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के सुप्रीम लीडर र्मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि डॉलर की भूमिका धीरे-धीरे खत्म करने की जरूरत है। इधर क्रूड 90 डॉलर के पार चला गया है।

US फेड चेयरमैन ने दिए दरें बढ़ाने के संकेत, बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार, डॉलर इडेक्स में उछाल

US फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महंगाई लक्ष्य से ज्यादा रही तो कदम उठाने पड़ेंगे। इस बयान के बाद बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार चली गई है। डॉलर इंडेक्स में भी उछाल आया है। सोना-चांदी ठंडे पड़े हैं। अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए। वहीं एशिया भी कमजोर दिख रहा है। निक्केई और कॉस्पी 2% फिसले हैं।

सबसे बड़े IPO का रास्ता हुआ साफ

देश के सबसे बड़े IPO का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने जियो प्लैटफॉर्म्स के IPO को मंजूरी दे दी है। जियो प्लैटफॉर्म्स 27 करोड़ फ्रेश शेयर जारी करेगी। इस रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा।

HDFC बैंक से रिटायर होंगे शशिधर जगदीशन

शशिधर जगदीशन दोबारा HDFC बैंक के MD&CEO नहीं बनेंगे। ये 26 अक्टूबर को रिटायर होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। उन्होंने बैंक के बोर्ड से कहा है कि उत्तराधिकारी तलाश करने का प्रोसेस तेज किया जाए।

सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज की और से बड़ी खबर आई है। सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध किया गया है। NCLT के फैसले को कैनरा, HDFC बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस चुनौती देंगे।

MSCI की आज रीबैलेंसिंग

आखिरी आधे घंटे में आज MSCI की रीबैलेंसिंग होगी। लॉरस लैब्स,लेंसकार्ट,अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो शामिल होंगे। वहीं बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, SBI कार्ड्स और एस्ट्रल बाहर होंगे। MSCI में भारत के वेटेज में भी हल्की बढ़त होगी।

HDFC Bank के नए CEO के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्या नई लीडरशिप निवेशकों का भरोसा लौटा पाएगी?

HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन के पद छोड़ने के फैसले के बाद अब नए CEO की तलाश शुरू हो गई है। यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं है। बैंक के सामने निवेशकों का भरोसा लौटाने और गवर्नेंस से जुड़े सवालों को पीछे छोड़ने की भी बड़ी चुनौती है।

बैंक ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे। उनके पद छोड़ने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अटकलें चल रही थीं। उनका आखिरी वर्किंग डे 26 अक्टूबर होगा। अब बैंक का बोर्ड नए CEO की नियुक्ति के लिए RBI से मंजूरी मांगेगा। नया CEO बैंक के भीतर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

2020 में संभाली थी बैंक की कमान

शशिधर जगदीशन HDFC Bank में करीब तीन दशक से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2020 में आदित्य पुरी के बाद बैंक की कमान संभाली थी। आदित्य पुरी ने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंक का नेतृत्व किया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जगदीशन के कार्यकाल में बैंक की बैलेंस शीट तेजी से बढ़ी। उनके नेतृत्व में 2023 में HDFC Bank का देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर भी हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में बैंक के नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

IIFL Capital ने क्या कहा?

IIFL Capital के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिकिन शाह का कहना है कि जगदीशन का दोबारा नियुक्ति नहीं लेना शेयर के लिए बनी बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि अगर RBI छोटा कार्यकाल मंजूर करता, तो शेयर पर दबाव और लंबे समय तक बना रह सकता था।

शाह के मुताबिक, अगर बैंक किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार को CEO बनाता है, तो इससे नेतृत्व में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। नए CEO को बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय भी मिल सकता है।

शेयर ने इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया

HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान बैंक है। इसका मार्केट कैप करीब 116 अरब डॉलर है। इसके बावजूद इस साल बैंक का शेयर दबाव में रहा है।

इस साल शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले Nifty Bank में सिर्फ 3.5% की गिरावट रही है। HDFC Bank का यह प्रदर्शन अपने बैंकिंग इंडेक्स और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। 2003 के बाद यह बैंक के शेयर का सबसे खराब रिलेटिव प्रदर्शन है।

गवर्नेंस को लेकर क्यों उठे सवाल?

पिछले कुछ समय में बैंक को कई विवादों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दुबई के स्थानीय रेगुलेटर ने प्रोसेस में खामियां मिलने के बाद HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था।

मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मतभेदों का हवाला दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि दुबई रेगुलेटर से जुड़े मुद्दों को बैंक ने जिस तरह संभाला, उससे उन्हें चिंता हुई थी। हालांकि, HDFC Bank ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। RBI ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।

बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग पर कार्रवाई

बैंक पर सवाल तब और बढ़े, जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक ने एक सरकारी कंपनी को ज्यादा ब्याज दिया। इसे कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

जुलाई में बैंक के बोर्ड ने इस मामले में जगदीशन समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की। बोर्ड ने कहा कि डिपॉजिट रेट तय करने से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपनी व्यावसायिक सीमा से आगे जाकर फैसले लिए थे।

बैंक के सामने अमेरिका में शेयरधारकों की संभावित कानूनी कार्रवाई का भी जोखिम है। निवेशकों ने मिस-सेलिंग के आरोप भी लगाए हैं। बैंक ने कहा है कि वह इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।

नए CEO का जल्दी चयन जरूरी

नए CEO की नियुक्ति में ज्यादा देरी बैंक के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद यह दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

अब निवेशक यह देखेंगे कि नया CEO कौन बनता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि नेतृत्व परिवर्तन कितनी आसानी से होता है। नए CEO को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत है और बैंक की ग्रोथ पर पूरा फोकस रहेगा।

HDFC Ltd के मर्जर की चुनौतियां

2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मर्जर के बाद बैंक के पास लंबी अवधि वाले होम लोन का बड़ा पोर्टफोलियो आ गया। इससे बैंक की लिक्विडिटी और मार्जिन पर दबाव पड़ा है।

नए CEO के सामने इन चुनौतियों को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बैंक को मर्जर का पूरा फायदा निकालने के साथ अपनी ग्रोथ और मुनाफे में सुधार करना होगा।

बाजार के लिए क्यों अहम है HDFC Bank?

HDFC Bank की Nifty 50 में करीब 10% हिस्सेदारी है। इसलिए इस शेयर की बड़ी चाल का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ सकता है। बैंक के शेयर में गिरावट ने हाल के समय में Nifty पर भी दबाव बनाया है।

Nifty 50 में इस साल करीब 7.5% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले MSCI Asia Pacific Index करीब 22% चढ़ा है। ऐसे में HDFC Bank के शेयर का कमजोर प्रदर्शन भारतीय बाजार के लिए भी एक अहम मुद्दा बन गया है।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक की कमान कौन संभालता है। निवेशक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया, नए CEO के आने के बाद बैंक की ग्रोथ और गवर्नेंस मानकों को भी करीब से देखेंगे। अब नया नेतृत्व ही तय करेगा कि HDFC Bank आगे कितनी जल्दी निवेशकों का भरोसा वापस जीत पाता है।

Nifty Outlook: 31 अगस्त को निफ्टी किस तरफ जाएगा? HDFC Bank समेत इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty Outlook: 31 अगस्त को निफ्टी किस तरफ जाएगा? HDFC Bank समेत इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Nifty Outlook: निफ्टी में अगस्त की शुरुआत से ही खास हलचल नहीं दिखी है। पूरे महीने इंडेक्स सीमित दायरे में फंसा रहा। न नीचे की तरफ कोई बड़ा ब्रेकडाउन हुआ और न ऊपर की तरफ ब्रेकआउट मिला। महीने के आखिरी कारोबारी दिन से पहले Nifty, 31 जुलाई के मुकाबले करीब 200 अंक नीचे था।

लेकिन महीने का आखिरी कारोबारी दिन काफी अहम रहने वाला है। बाजार के सामने कई बड़े ट्रिगर हैं। इनमें सबसे ज्यादा नजर HDFC Bank पर रहेगी। बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन ने अक्टूबर में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है।

HDFC Bank बाजार की दिशा तय कर सकता है?

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि निवेशक इस खबर को कैसे लेते हैं। इसे नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होने के तौर पर देखा जाएगा या फिर नया CEO चुने जाने तक एक और अनिश्चितता बनी रहेगी।

इसका असर सिर्फ HDFC Bank पर नहीं, बल्कि Nifty की चाल पर भी पड़ सकता है। भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक का शेयर इस साल दबाव में रहा है। ऐसे में सोमवार को यह शेयर एक बार फिर फोकस में रहेगा।

Nifty सुस्त, लेकिन स्मॉलकैप में तगड़ी तेजी

Nifty भले ही पूरे महीने सीमित दायरे में रहा, लेकिन छोटे शेयरों में जोरदार हलचल दिखी। पिछले हफ्ते BSE Smallcap Index के 13 शेयर 20% या उससे ज्यादा चढ़े। वहीं 58 शेयरों में 10% से 20% तक की तेजी रही।

Nifty 500 के भी 10 शेयरों ने पिछले हफ्ते 10% से 25% तक का रिटर्न दिया। शुक्रवार को BSE Smallcap Index के 29 शेयरों ने नया ऑल टाइम हाई बनाया।

IPO में भी जमकर दिखा जोश

प्राइमरी मार्केट में भी जबरदस्त हलचल रही। अगस्त में 14 कंपनियों ने शेयर बाजार में डेब्यू किया। इन कंपनियों को औसतन 30% से ज्यादा का लिस्टिंग प्रीमियम मिला।

शुक्रवार को लिस्ट हुई Tempsens Instruments ने निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी का शेयर अपने इश्यू प्राइस से 111% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ। यह 2026 का पहला IPO बन गया, जिसने लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से 100% से ज्यादा की छलांग लगाई। इससे पहले साल की शुरुआत में Bharat Coking Coal ने 96% प्रीमियम पर लिस्टिंग की थी।

Nifty के लिए 24,400 बड़ा स्तर

पिछले हफ्ते Nifty ने 24,400 के स्तर को पार करने की कोशिश की थी। हालांकि, यह सफल नहीं हो सका। पिछले हफ्ते Nifty का हाई 24,378 रहा। इसलिए 24,400 का स्तर अब काफी अहम हो गया है।

नीचे की तरफ 24,100 से नीचे का दायरा बाजार के लिए अहम सपोर्ट रहेगा। शुक्रवार का इंट्राडे लो 24,077 था। गुरुवार को Nifty 24,090 तक गिरा था।

24,200 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है

LKP Securities के रुपक डे के मुताबिक हाल की चाल को देखते हुए Nifty का ट्रेंड फिलहाल बहुत बुलिश नहीं है। 24,200 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस दिख रहा है।

उनका मानना है कि 24,200 के नीचे रहने पर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रह सकता है। इससे Nifty में 23,900 तक गिरावट की गुंजाइश बन सकती है। अगर 23,900 का सपोर्ट भी टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। हालांकि, Nifty अगर 24,200 के ऊपर टिकता है तो शॉर्ट टर्म ट्रेंड मजबूत हो सकता है।

24,000-24,400 के बीच फंसा Nifty

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का कहना है कि Nifty फिलहाल 24,000 से 24,400 के दायरे में बना हुआ है। हालांकि, इस रेंज में तेजी का हल्का रुझान है।

अगर निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी आती है तो Nifty जल्द ही 24,300 से 24,400 के स्तर की तरफ जा सकता है। ट्रेंड में बदलाव के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम है।

Bank Nifty में भी ब्रेकआउट का इंतजार

Nifty के मुकाबले Bank Nifty ने अगस्त में कुछ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह 31 जुलाई के मुकाबले 200 अंक से ज्यादा चढ़ा है। हालांकि, बैंकिंग इंडेक्स भी अपने रेंज से बाहर नहीं निकल पाया।

Bank Nifty फिलहाल 57,000 से 58,000 के दायरे में फंसा हुआ है। SAMCO Securities के ओम मेहरा के मुताबिक 57,200 इसका पहला अहम सपोर्ट है। इसके बाद 57,100 का स्तर महत्वपूर्ण होगा ऊपर की तरफ 57,800 पहला बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके बाद 57,900 का स्तर अहम होगा। अगर Bank Nifty इस जोन के ऊपर मजबूती से बंद होता है, तो तेजी का रुझान फिर मजबूत हो सकता है।

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Next Week: भारत से अमेरिका तक आ रहे ये आंकड़े, अगले हफ्ते तय करेंगे मार्केट की चाल

Market next week: 31 अगस्त से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की चाल मुख्य तौर पर जीडीपी के घरेलू आंकड़ों, कच्चे तेल के भाव और अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इसके अलावा एनालिस्ट्स के मुताबिक मैक्रोइकनॉमिक रिलीज, ऑटो सेल्स के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले कारोबारी हफ्ते यानी 17-21 अगस्त के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) 276.32 प्वाइंट्स यानी 0.35% गिरा, तो निफ्टी (Nifty) 76.35 प्वाइंट्स यानी 0.31% नीचे आया। लगातार तीसरे हफ्ते ये लाल हुए।

Market next week: क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। जीडीपी के घरेलू आंकड़े और वैश्विक आर्थिक आंकड़े मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था में बात करें तो जून 2026 तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी होंगे। अजीत के मुताबिक निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शंस, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और रुपये की चाल पर भी रहेगी।

अजीत के मुताबिक सबसे बड़ा ट्रिगर तो अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा रहेगा। 4 अगस्त को अगस्त के नॉन-फार्म पेरोल्स का आंकड़ा आएगा। अजीत का मानना है कि यग फेडरल रिजर्व के सितंबर महीने की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स और एमर्जिंग मार्केट्स में फंड्स फ्लो से जुड़ी उम्मीदों पर असर डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में भारतीय इक्विटीज में अब तक ₹30,919 करोड़ का नेट निवेश किया है और लगातार दूसरे महीने उनकी नेट खरीदारी जारी रही।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि घरेलू स्तर पर जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े ब्रोडर रिस्क सेंटिमेंट के लिए अहम होंगे। इससे यह पता चलेगा कि घरेलू अर्थव्यवस्था किस चाल से बढ़ रही है, खासतौर से ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज रॉकेट बने हुए हैं और पश्चिमी एशिया में तनाव अभी भी बना हुआ है।

पोनमुडी का कहना है कि जैक्सन होल में फेड चेयर कैविन वार्श के हॉकिश कमेंट के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कैटेलिस्ट बन गई है। पोनमुडी का कहना है कि मार्केट की नजर अब 4 सितंबर को आने वाले अगस्त की जॉब्स रिपोर्ट के साथ-साथ अगली इनफ्लेशन रीडिंग पर भी नजर रहेगी। इन आंकड़ो से यह तय होगा कि सितंबर में रेट हाइक की हाल में बढ़ी उम्मीदें बनी रहती हैं या कम होती हैं।

रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि सोमवार को भारतीय इकॉनमी के लिए जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े के आंकड़े आएंगे, जिससे घरेलू आर्थिक विकास की दिशा पता चलेगी। वहीं शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा वैश्विक बाजारों के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है। उनका कहना है कि इसके बाद निवेशक फिर से फेडरल रिजर्व की सितंबर की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी उम्मीदों को रिव्यू करेंगे।

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Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

Meesho Share Price: दिग्गज ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मीशो के शेयरों की घरेलू ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा ने खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। वेंचुरा ने इसके शेयरों का जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, उसके मुताबिक मौजूदा लेवल से यह 33% से अधिक ऊपर चढ़ सकता है। अभी की बात करें तो पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार 28 अगस्त को बीएसई पर यह 0.51% की बढ़त के साथ ₹208.60 पर बंद हुआ था। आईपीओ के तहत ₹111 के भाव पर जारी होने के बाद इसके शेयर घरेलू मार्केट में 10 दिसंबर 2025 को लिस्ट हुए थे और लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर 2025 को यह ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा था।

Meesho पर क्यों हुआ ब्रोकरेज फिदा

ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑनलाइन खरीदारी का बाजार तेजी से बढ़ने वाला है। वेंचुरा के मुताबिक जैसे-जैसे टियर-2, टियर-3 और गांवों में इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन रिटेल का दायरा बढ़ रहा है, वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2030 के बीच इसकी GMV (ग्रास मर्चेंडाइज वैल्यू) सालाना 20% की रफ्तार से बढ़ सकती है।

वेंचुरा का मानना है कि ग्रोथ के सुनहरे मौके को भुनाने के लिए मीशो ने खुद को मजबूत स्थिति में रख लिया है।

मीशो का मार्केटप्लेस मॉडल ऐसा है कि पूंजी की जरूरत कम से कम पड़ती है और दुकानदारों को अपना सामान सस्ते में बेचने की सहूलियत मिलती है जिससे दाम देखने वाले ग्राहकों के बीच इसे कॉम्पटीटिव एडवांटेज मिल रहा है।

वेंचुरा के मुताबिक अभी मीशो का फोकस ग्राहक और ऑर्डर्स बढ़ाने पर है लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ेगा, हर ऑर्डर और ग्राहक से कमाई ज्यादा हो सकती है।

कमाई में उछाल के उम्मीद की वजह ये है कि अधिक ऑर्डर्स होने से प्री-ऑर्डर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम हो सकती है, एआई की मदद को ग्राहकों को सही प्रोडक्ट्स दिखाए जा सकते हैं, वाल्मो (Valmo) के जरिए लॉजिस्टिक्स अधिक बेहतर हो सकती है, सेलर्स से एडवरटाइजिंग और दूसरी सर्विसेज की कमाई बढ़ सकती है, और फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सॉल्यूशंस जैसे रेवेन्यू के नए रास्ते तैयार हो सकते हैं।

वेंचुरा के मुताबिक कुल मिलाकर मीशो को सिर्फ सामान बेचने से नहीं बल्कि ऐड, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सर्विसेज से भी कमाई हो सकेगी।

मीशो के ATU (एनुअल ट्रांजैक्टिंग यूजर्स) यानी साल में कम-से-कम एक बार मीशो पर खरीदारी करने वाले यूजर्स की संख्या अभी 27.4 करोड़ है और वेंचुरा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक यह 40.9 करोड़ पर पहुंच सकता है तो ऑर्डर्स की संख्या सालाना करीब 28.2% की रफ्तार से वित्त वर्ष 2029 में 561.9 करोड़ तक पहुंच सकता है।

वेंचुरा का अनुमान है कि मीशो का रेवेन्यू 26.2% की रफ्तार से ₹25,403 करोड़ पर पहुंच सकता है। वहीं ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2028 तक ऑपरेटिंग लेवल पर प्रॉफिटेबल हो सकती है और शुद्ध मुनाफा हासिल हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक वित्त वर्ष 2029 तक कंपनी ₹1,404 करोड़ के EBITDA और ₹1,702 करोड़ के शुद्ध मुनाफे में पहुंच सकता है।

इन सब बातों को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने खरीदारी की रेटिंग और ₹278 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है।

अब रिस्क की बात करें तो यूजर्स के बढ़ने की रफ्तार उम्मीद से कम होने और कॉम्पटीशन बढ़ने से मीशो के कारोबार को झटका लग सकता है।

गिरता Nifty नहीं बना पा रहा पुट से पैसा, समझें कहां हो रही गड़बड़ी, कैसी स्ट्रैटेजी करेगी काम

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