Gold Silver Price: सोने-चांदी का चढ़ा भाव, अमेरिकी जॉब्स डेटा से रेट हाइक की चिंता घटी

Gold Silver Price: अमेरिका में सितंबर का जॉब्स डेटा उम्मीद से कमजोर रहा। इसके बाद सोने में शुक्रवार को 1% से ज्यादा तेजी आई। कमजोर रोजगार आंकड़ों से इस महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ाने की चिंता कम हुई है। हालांकि, मजबूत डॉलर और ऊंची ट्रेजरी यील्ड अभी भी सोने पर दबाव बना रही हैं।

1% से ज्यादा चढ़ा सोना

शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड 1.1% बढ़कर 4,223.49 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.2% चढ़कर 4,254.10 डॉलर प्रति औंस हो गया।

हालांकि, पूरे हफ्ते की बात करें तो सोना अभी करीब 1.5% नीचे है। यानी शुक्रवार की तेजी के बावजूद साप्ताहिक नुकसान की भरपाई नहीं हो पाई है।

सितंबर में सिर्फ 29,000 नौकरियां बढ़ीं

अमेरिका में सितंबर के दौरान नॉन-फार्म पेरोल में सिर्फ 29,000 की बढ़ोतरी हुई। अगस्त के आंकड़े को भी घटाकर 1.33 लाख कर दिया गया है।

रॉयटर्स के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान लगाया था। यानी असल आंकड़ा अनुमान से काफी कम रहा।

फेड की रेट हाइक की उम्मीद घटी

कमजोर जॉब्स डेटा के बाद अक्टूबर में अमेरिकी फेड की ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी कम हो गई है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, अब ट्रेडर्स रेट हाइक की सिर्फ 14% संभावना देख रहे हैं।

जॉब्स डेटा से पहले यह संभावना 28% थी। हफ्ते की शुरुआत में तो यह करीब 70% थी। रेट हाइक की उम्मीद घटने से डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ और सोने को सहारा मिला।

Marex के एनालिस्ट एडवर्ड मेयर ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम होने से डॉलर पर दबाव आया। इसका फायदा सोने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि सोने में पहले काफी बिकवाली हो चुकी थी, इसलिए इसमें उछाल आना स्वाभाविक था।

फिर भी सोने पर दबाव क्यों?

सोने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अभी बड़ी चिंता है। 10 साल और 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड गुरुवार को 2002 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।

ऊंची यील्ड आमतौर पर सोने के लिए चुनौती होती है। इसकी वजह यह है कि सोने से ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए सोने की आकर्षकता कम हो सकती है।

युद्ध शुरू होने के बाद 20% गिरा सोना

फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 20% गिर चुका है। युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता ने अमेरिकी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की उम्मीद बढ़ाई थी।

हालिया महंगाई के आंकड़े भी उम्मीद से नरम रहे हैं। इसके अलावा, कम से कम दो बड़े फेड अधिकारियों ने अक्टूबर में एक और रेट हाइक का विरोध किया है। इससे बाजार में रेट को स्थिर रखने की उम्मीद बढ़ी है।

आगे क्या देखना होगा?

Bybit के चीफ मार्केट एनालिस्ट हान टैन के मुताबिक, सोने में आगे भी तेजी की गुंजाइश हो सकती है। इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का अपने ऊंचे स्तर पर पहुंचना अहम होगा।

दूसरी ओर, Marex के एडवर्ड मेयर ने कहा कि सोने का चार्ट अभी कमजोर दिख रहा है। अगर ब्याज दरों का चक्र फिर ऊपर जाता है, तो सोने में और गिरावट आ सकती है।

चांदी भी 2% चढ़ी

सोने के साथ दूसरे कीमती मेटल्स में भी शुक्रवार को तेजी रही। स्पॉट सिल्वर 2% बढ़कर 62.07 डॉलर प्रति औंस हो गया।

प्लैटिनम 1% चढ़कर 1,740.53 डॉलर और पैलेडियम 2.2% बढ़कर 1,197.47 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, ये तीनों मेटल्स भी इस हफ्ते अब तक गिरावट में हैं।

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Market Next Week: भारत से अमेरिका तक आ रहे ये आंकड़े, अगले हफ्ते तय करेंगे मार्केट की चाल

Market next week: 31 अगस्त से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की चाल मुख्य तौर पर जीडीपी के घरेलू आंकड़ों, कच्चे तेल के भाव और अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इसके अलावा एनालिस्ट्स के मुताबिक मैक्रोइकनॉमिक रिलीज, ऑटो सेल्स के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले कारोबारी हफ्ते यानी 17-21 अगस्त के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) 276.32 प्वाइंट्स यानी 0.35% गिरा, तो निफ्टी (Nifty) 76.35 प्वाइंट्स यानी 0.31% नीचे आया। लगातार तीसरे हफ्ते ये लाल हुए।

Market next week: क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। जीडीपी के घरेलू आंकड़े और वैश्विक आर्थिक आंकड़े मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था में बात करें तो जून 2026 तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी होंगे। अजीत के मुताबिक निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शंस, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और रुपये की चाल पर भी रहेगी।

अजीत के मुताबिक सबसे बड़ा ट्रिगर तो अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा रहेगा। 4 अगस्त को अगस्त के नॉन-फार्म पेरोल्स का आंकड़ा आएगा। अजीत का मानना है कि यग फेडरल रिजर्व के सितंबर महीने की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स और एमर्जिंग मार्केट्स में फंड्स फ्लो से जुड़ी उम्मीदों पर असर डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में भारतीय इक्विटीज में अब तक ₹30,919 करोड़ का नेट निवेश किया है और लगातार दूसरे महीने उनकी नेट खरीदारी जारी रही।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि घरेलू स्तर पर जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े ब्रोडर रिस्क सेंटिमेंट के लिए अहम होंगे। इससे यह पता चलेगा कि घरेलू अर्थव्यवस्था किस चाल से बढ़ रही है, खासतौर से ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज रॉकेट बने हुए हैं और पश्चिमी एशिया में तनाव अभी भी बना हुआ है।

पोनमुडी का कहना है कि जैक्सन होल में फेड चेयर कैविन वार्श के हॉकिश कमेंट के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कैटेलिस्ट बन गई है। पोनमुडी का कहना है कि मार्केट की नजर अब 4 सितंबर को आने वाले अगस्त की जॉब्स रिपोर्ट के साथ-साथ अगली इनफ्लेशन रीडिंग पर भी नजर रहेगी। इन आंकड़ो से यह तय होगा कि सितंबर में रेट हाइक की हाल में बढ़ी उम्मीदें बनी रहती हैं या कम होती हैं।

रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि सोमवार को भारतीय इकॉनमी के लिए जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े के आंकड़े आएंगे, जिससे घरेलू आर्थिक विकास की दिशा पता चलेगी। वहीं शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा वैश्विक बाजारों के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है। उनका कहना है कि इसके बाद निवेशक फिर से फेडरल रिजर्व की सितंबर की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी उम्मीदों को रिव्यू करेंगे।

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