UP Panchayat Chunav 2026: यूपी पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने के भीतर इलेक्शन कराने के निर्देश

UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यूपी पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की बात कही गई है। इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और समयसीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा कराने की बात कही गई है। यह आदेश ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निवर्तमान ग्राम प्रधानों की भूमिका पर भी निर्देश

कोर्ट ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की बात भी कही है। इससे चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि, प्रशासक के तौर पर उनकी शक्तियों और जिम्मेदारियों का सटीक दायरा आधिकारिक आदेश के विस्तृत डिटेल्स आने के बाद ही स्पष्ट होगा। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को अवैध बताया गया था। इसका मतलब है कि अगले तीन महीने तक पंचायतों का कामकाज प्रशासकों के माध्यम से जारी रह सकता है।

चुनाव की तैयारियों पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों की ओर से पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर उठाए जाने वाले कदम अहम होंगे। चुनाव की तारीखों, अधिसूचना और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि तीन महीने के अंदर यूपी के पंचायत चुनाव हो जाने चाहिए। पहले कयास ये कगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव होगा। यह फैसला जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद सुनाया।

सरकार के आदेश को कोर्ट ने बताया वैध

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार की ओर से जारी शासनादेश पूरी तरह वैध है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पंचायत निकायों के चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कराए जाएं। इस फैसले से पंचायत चुनाव की तैयारी और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अदालत ने प्रशासकों को चुनाव समाप्त होने तक कामकाज जारी रखने की व्यवस्था भी बरकरार रखी है।

OBC आयोग की प्रक्रिया से अलग होगी चुनाव की तैयारी?

हाई कोर्ट ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम बिना किसी बाधा के जारी रखेगा। लेकिन पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया आयोग की कार्यवाही पूरी होने पर निर्भर नहीं रहेगी। यानी आयोग की प्रक्रिया के कारण चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे।

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चुनाव प्रक्रिया में 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन करना होगा। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, चुनाव की तारीखों और मतदान के शेड्यूल को लेकर सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी।

UP News: ‘जो भगवान श्री राम का विरोध करें…’; यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत सपा के 3 विधायक BJP में शामिल

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा है। बुधवार (14 अक्टूबर) को SP के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी के ये तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि अभय सिंह अयोध्या की गोसाईंगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं।

इन विधायकों ने 2022 का चुनाव SP के टिकट पर जीता था। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर दिया था। यूपी के अमेठी में बुधवार (14 अक्टूबर) को BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में तीनों बागी सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुवेर्दी BJP में शामिल हुए।

कौन हैं MLA अभय सिंह?

अभय सिंह भगवान राम की नगरी अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। सिंह भी समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद अभय सिंह पर कार्रवाई हुई थी। बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी ने अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों और राजनीतिक बयानों के कारण उनका नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है। औपचारिक सदस्यता से पहले भी अभय सिंह कई मौकों पर भगवा पार्टी के मंच पर दिखाई दिए थे। 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत का प्रमुख केंद्र बन चुकी अयोध्या का सियासी तापमान अब और बढ़ने की उम्मीद है।

बुधवार को गोसाईंगंज के विधायक अभय सिंह आधिकारिक तौर पर भगवा पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद अब वह BJP के लिए निर्भय होकर मैदान में उतर सकेंगे। अभय सिंह ने SP के टिकट पर 2012 और 2022 में गोसाईंगंज विधानसभा सीट जीती। 2017 के विधानसभा चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी से हार गए थे। जबकि 2022 में सिंह ने BJP उम्मीदवार आरती तिवारी को 13,079 वोटों से हराया।

‘जो श्री राम का विरोध करेगा, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे’

समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह ने BJP में शामिल होने पर न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का विरोध करें, जो राष्ट्र का विरोध करेंगे, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में जन-जन तक हिंदी और अवधि में पहुंचाने वाले, तुलसीदास ने राम चरित मानस को लिखा। उस रामचरित मानस को जलाया जाए, फाड़ा जाए। उसके बाद इस घटना पर कोई टिप्पणी न की जाए। उसके बाद दर्शन से रोका जाए। ये सब चीजें ऐसी हैं जो उचित नहीं हैं।”

कौन हैं राकेश प्रताप सिंह?

राकेश प्रताप सिंह अमेठी के गौरीगंज से विधायक हैं। सिंह हाईस्कूल तक की पढ़ाई की हुई है। वह साल 2012, 2017 और 2022 में तीन बार विधायक चुने गए हैं। 2022 में राकेश प्रताप सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्होंने शानदार जीत भी दर्ज की थी। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से राकेश प्रताप सिंह सपा को धोखा देकर अपनी पार्टी के अन्य बागी विधायकों के साथ चले गए। इसके बाद अखिलेश यादव ने साल 2025 के जून महीने में राकेश सिंह को सपा से निकाल दिया था।

विनोद चतुर्वेदी के बारे में जानें

जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी  BJP में शामिल हो गए हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को 2,816 वोटों से हराकर कालपी विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। कालपी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने से पहले चतुर्वेदी ने यूपी के जालौन जिले में उरई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वे 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार के तौर पर उरई सीट से चुने गए थे।

अखिलेश पर बोला हमला

राकेश प्रताप सिंह ने उनके BJP में शामिल होने पर ANI से कहा, “मैं अपने क्षेत्रवासियों का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारा समर्थन किया और मुझसे अनुरोध किया कि भाजपा की सदस्यता लीजिए। उन लोगों ने मुझसे कहा कि वे मेरे साथ हैं… 98% लोग जो अपना बूथ जिताते या हराते थे, वे समाजवादी पार्टी का परित्याग करेंगे और BJP की सदस्यता लेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “विधायक विनोद चतुर्वेदी, अभय सिंह और मैं स्वयं भाजपा में शामिल हो रहा हूं। हमारे साथ ऐसे करीब 1000 लोग जो जनप्रतिनिधि या पूर्व जनप्रतिनिधि हैं वो शामिल होंगे…लगभग 1 दर्जन विधायक मंच पर मौजूद रहेंगे।”

इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने एक X पोस्ट में लिखा, “14 अक्टूबर 2026 का दिन मेरे राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। यह मेरे लिए केवल भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि सनातन की रक्षा, अपनी आस्था, अपने संस्कारों और अपने सिद्धांतों के साथ एक नई राजनीतिक यात्रा प्रारंभ करने का बहुमूल्य दिन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने राजनीतिक जीवन में सदैव अपनी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है। बीते समय में समाजवादी पार्टी के भीतर सनातन धर्म, हमारी धार्मिक परंपराओं और पवित्र ग्रंथों को लेकर जिस प्रकार की टिप्पणियां और घटनाएं सामने आईं, उनसे मेरी भावनाएँ बार-बार आहत हुईं। विशेष रूप से जब मुझ जैसे सैकड़ों विधायकों एवं राजनैतिक व्यक्तियों को आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के दर्शन करने ना जाने देना, तो वह क्षण मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक था। उसी दिन मेरे मन में यह विचार दृढ़ हो गया था कि जिस राजनीतिक विचारधारा के साथ मेरी आस्था और मेरा अंतर्मन सहमत नहीं है, उसके साथ आगे बढ़ना मेरे लिए संभव नहीं होगा।”

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Neha Bora: प्रोटेस्ट में पुलिस को खूब छकाने के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बनीं नेहा बोरा JNU से कर रही हैं कैसी पढ़ाई?

Neha Bora Qualification: राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग पार करने, पुलिसकर्मियों से बचते हुए आगे बढ़ने और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसके बाद उनकी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, पारिवारिक बैकग्राउंड और छात्र राजनीति में उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रदर्शन के बाद भारत समेत दुनियाभर में नेहा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और उत्तराखंड से छात्र राजनीति तक के सफर के बारे में भी जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फिलहाल क्या पढ़ाई कर रही हैं और वह राजनीति में कैसे आईं…

कहां की रहने वाली हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सेना में तैनाती के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों और सैन्य छावनियों में रहना पड़ा। इसी वजह से नेहा का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता।

कहां से की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई?

हमारे सहयोगी ‘News18 हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा बोरा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विचारों में बढ़ने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने कम्युनिस्ट एवं क्रांतिकारी विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा लेखन में दिलचस्पी ली।

बताया जाता है कि उनके शुरुआती वैचारिक अनुभवों ने सामाजिक मुद्दों और राजनीति के प्रति उनकी समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।

DU से ग्रेजुएशन, अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स

नेहा बोरा ने देश की राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर, कला, अभिव्यक्ति और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का स्टडी किया जाता है। नेहा की परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर और सामाजिक विषयों की अहम भूमिका रही है।

JNU में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के बाद नेहा बोरा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एडमिशन लिया। वह फिलहाल JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में PhD कर रही हैं। वह अभी यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल स्कॉलर हैं। इस तरह उनकी शैक्षणिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू होकर अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी तक पहुंची। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में भी लगातार एक्टिव रहीं।

थिएटर से भी जुड़ी रही हैं नेहा

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता के तौर पर नहीं है। वह लंबे समय तक थिएटर से भी जुड़ी रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह ‘संगवारी’ के साथ काम किया है। स्ट्रीट थिएटर के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी नेहा के लिए सामाजिक सवालों पर संवाद करने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम रही।

CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। उस समय देश के कई यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इसी दौर में नेहा की सामाजिक मुद्दों, कैंपस चर्चाओं और थिएटर से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के साथ छात्र राजनीति में सक्रियता भी बढ़ी। बाद में वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। AISA एजुकेशन, छात्र अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने वाला छात्र संगठन है। नेहा आगे चलकर इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में क्यों आईं?

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी एजुकेशन और छात्र राजनीति में भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नेहा की यात्रा में उच्च शिक्षा, थिएटर और छात्र आंदोलनों के तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। उत्तराखंड से निकलकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और फिर छात्र संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सफर अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Muhammad Yunus Video: ‘तुम आतंकी हो, बांग्लादेश में हजारों लोगों को मारा…’; न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बेइज्जत हुए मोहम्मद यूनुस, देखें नारेबाजी का वीडियो

Muhammad Yunus Video: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सोमवार (12 अक्टूबर) को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित जॉन एफ. कैनेडी (JFK) इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बांग्लादेशी मूल के कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर तीखे सवाल पूछे और उन पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान लोगों ने उन्हें आतंकवादी तक बता दिया। उनके खिलाफ हुए इस नारेबाजी का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कुछ लोग यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन पर बांग्लादेश में लोगों की मौत और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए। इस घटना के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। दूसरी ओर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं संचार सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ ढाका कानूनी कार्रवाई करेगा।

‘तुम आतंकवादी हो, बांग्लादेश में लोगों को मारा’

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मोहम्मद यूनुस से कहता सुनाई देता है, “तुम आतंकवादी हो। तुमने बांग्लादेश में लोगों को मारा है। यहां क्यों आए हो? हमें बताओ, यहां क्यों आए हो?” कुछ अन्य लोग भी बांग्लादेश सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें वापस जाने के लिए भी कहा। आरोप लगाने वाले लोगों ने दावा किया कि बांग्लादेश में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया।

व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट से बाहर जा रहे थे यूनुस

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस दोहा से कतर एयरवेज की फ्लाइट के जरिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। बताया गया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल-8 पर पहुंचने के बाद जब उन्हें व्हीलचेयर पर बाहर ले जाया जा रहा था, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर सवाल पूछने शुरू कर दिए।

बिगड़ते हालात को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने यूनुस को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिश की। ढाका के अखबार ‘डेली सन’ ने एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों के हवाले से बताया कि विरोध के दौरान यूनुस और उनके साथ मौजूद सहयोगी लामिया मोर्शेद तेजी से वापस एयरपोर्ट के अंदर चले गए।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से विवादों में रहा अंतरिम सरकार का कार्यकाल

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में पूर्व पीएम शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल राजनीतिक उथल-पुथल, हिंसा, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों के बीच गुजरा। यूनुस की अंतरिम सरकार को लेकर उनके राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन हिंसक घटनाओं को रोकने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहा।

अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों ने भी दावा किया कि अंतरिम प्रशासन के दौरान पार्टी के सदस्यों और उससे जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। हिंदू समुदाय और धार्मिक स्थलों पर कथित हमलों, मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौतों तथा राजनीतिक समर्थकों के साथ व्यवहार को लेकर चिंताएं जताई गईं।

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आलोचकों ने सरकार से हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, इन मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित घटनाओं की जांच, विश्वसनीय रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में पुलिसकर्मियों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों का मुद्दा भी उठाया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद बना रहा।

Gujarat Civic Polls Result: गुजरात के निकाय चुनाव में BJP का दबदबा बरकरार, तीनों शहरी निकायों पर जमाया कब्जा, कांग्रेस-AAP के खाते क्या आया?

Gujarat civic polls: गुजरात के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीनों निकायों में जबरदस्त जीत हासिल कर अपना कब्जा बरकरार रखा है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मंगलवार (13 अक्टूबर) को घोषित नतीजों के मुताबिक, BJP को गांधीनगर नगर निगम (GMC) चुनाव में 44 में से 38 सीटों पर कब्जा कर बड़ी जीत हासिल की। इसके अलावा भगवा पार्टी ने थारा और ओखा नगरपालिकाओं में भी अपनी सत्ता बरकरार रखी है। गुजरात निकाय चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा है।

गांधीनगर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पांच सीट के साथ दूसरे नंबर पर रही। जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती। आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। उसने पिछले जीएसमी चुनाव में एक सीट जीती थी। पिछला जीएमसी चुनाव अक्टूबर 2021 में हुआ था जिसमें BJP ने 44 में से 41 सीट जीती थीं। जबकि कांग्रेस को दो और आप को एक सीट मिली थी।

थारा नगरपालिका में बीजेपी ने 19 सीटें जीतीं

बनासकांठा जिले की थारा नगरपालिका में भाजपा ने 24 में से 19 सीटें जीतीं। जबकि कांग्रेस को बाकी पांच सीटों पर जीत मिलीं। थारा नगरपालिका चुनाव का परिणाम भी आज ही घोषित हुआ। देवभूमि द्वारका जिले की ओखा नगरपालिका में 32 सीट के लिए मतदान हुआ था। इनमें से भारतीय जनता पार्टी ने 29 जीतीं। जबकि कांग्रेस को तीन सीट मिलीं।

ओखा में बीजेपी को 29 सीटें, 4 पर निर्विरोध जीत

ओखा में चार सीट पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए क्योंकि इन सीट पर चुनाव मैदान में सिर्फ BJP के उम्मीदवार ही बचे थे। इन चार सीटों को मिलाकर भगवा पार्टी ने नगरपालिका की कुल 36 में से 33 सीट हासिल कीं। इन चुनाव नतीजों के साथ, बीजेपी ने रविवार को हुए चुनावों में तीनों शहरी स्थानीय निकायों पर अपना कब्जा बनाए रखा है। तीनों शहरी निकायों के लिए वोटों की गिनती मंगलवार सुबह 9 बजे शुरू हुई थी।

तीनों निकायों में बीजेपी ने बरकरार रखा कंट्रोल

गुजरात के इन तीनों शहरी निकायों के नतीजों से स्पष्ट है कि बीजेपी गांधीनगर नगर निगम, थारा नगरपालिका और ओखा नगरपालिका में अपना नियंत्रण बनाए रखने में सफल रही। वहीं, कांग्रेस ने गांधीनगर में पिछली बार की तुलना में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई और थारा तथा ओखा में भी सीटें हासिल कीं। गांधीनगर में बीजेपी की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस की सीटें दो से बढ़कर पांच हो गईं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी को इस बार गांधीनगर में कोई सीट नहीं मिली।

EVM से कराए गए चुनाव, गांधीनगर में 59.25% मतदान

गुजरात निर्वाचन आयोग के अनुसार, तीनों निकायों में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए कराए गए थे। गांधीनगर में 59.25 प्रतिशत, थारा में 81.18% और ओखा में 63.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। रविवार को वोटिंग के बाद मंगलवार सुबह मतगणना शुरू हुई। नतीजों के साथ ही तीनों शहरी निकायों में नई स्थानीय राजनीतिक स्थिति स्पष्ट हो गई है। बीजेपी ने तीनों जगह अपना कंट्रोल बरकरार रखा। जबकि गांधीनगर में कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

IMD Weather Update: दक्षिण भारत में दस्तक दे रहा पूर्वोत्तर मानसून, 14 से 19 अक्टूबर तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

North-East Monsoon 2026: देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा और मौसमी बदलाव दर्ज किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक देश के शेष हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले दो दिनों के दौरान इसके पूरी तरह पीछे हटने के साथ ही दक्षिण प्रायद्वीप में पूर्वोत्तर मानसून की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का एक लंबा और व्यापक दौर शुरू होने वाला है।

पिछले 24 घंटों के मौसम की बात करें तो तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश हुई है जबकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट जगहों पर ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं।

दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

दक्षिण प्रायद्वीप में मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का जोर काफी बढ़ गया है। श्रीलंका तट के पास दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है जिससे जुड़ी एक ट्रफ रेखा मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली है। इसके अलावा दक्षिण अंडमान सागर पर भी एक चक्रवाती सिस्टम मौजूद है। इन प्रणालियों के असर से दक्षिण भारत के अलग अलग राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश का कड़ा पहरा रहेगाय़ तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान व्यापक बारिश होगी और कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

केरल और माहे में 15 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 15 से 18 अक्टूबर के दौरान और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के बीच भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा रायलसीमा के कुछ हिस्सों में 14 से 18 अक्टूबर तक भारी बारिश का दौर चलेगा। तेलंगाना में भी 17 अक्टूबर को भारी वर्षा का अनुमान है। तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के तटीय इलाकों में 15 से 17 अक्टूबर के दौरान 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और आकाशीय बिजली चमकने की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

उत्तर-पश्चिम भारत और पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ का असर

उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम पर नजर डालें तो उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर पर तथा उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान पर भी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन प्रणालियों के असर से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 13 से 15 अक्टूबर के दौरान व्यापक रूप से बारिश और बर्फबारी होगी।

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 14 और 15 अक्टूबर को झमाझम बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किमी/घंटे की गति से तेज आंधी और ओलावृष्टि होने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी 13 से 19 अक्टूबर के बीच रुक-रुक कर बारिश और 15 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि व आंधी का दौर रहेगा। राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 से 16 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बौछारें और तेज हवाएं चल सकती हैं।

मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का मौसम हाल

मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में 13 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 13 और 14 अक्टूबर को व्यापक बारिश होगी, जबकि ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 से 17 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा। पश्चिम भारत के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की बारिश के साथ-साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

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CJI के खिलाफ विवादित पोस्ट को लेकर घिरी केरल कांग्रेस, आलोचना के बाद कर्मचारी को पद से हटाया, बीजेपी ने बताया शर्मनाक

Kerala Congress: कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अकाउंट से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के खिलाफ की गई एक विवादित पोस्ट सोमवार को व्यापक रूप से वायरल हुई। लेकिन सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने के बाद इसे हटा दिया गया। पार्टी ने पोस्ट करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी पद से हटा दिया। केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने एक बयान में कहा कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ विवादित पोस्ट करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है।

जोसेफ ने कहा कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या परामर्श के बिना की गई थी। उन्होंने कहा, “केपीसीसी इस बात की जांच करेगी कि ऐसी पोस्ट किन परिस्थितियों में की गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस पार्टी को कोई असहमति नहीं है। जोसेफ ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस रुख के विपरीत व्यक्त किए गए विचार केपीसीसी नेतृत्व का आधिकारिक रुख नहीं है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हटाई जा चुकी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि न्यायपालिका पार्टी का अगला निशाना होगी। रीजीजू ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस भारत के सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है। सभी भारत-विरोधी गिरोह एकजुट हो रहे हैं। सभी देशभक्त भारतीय भी एकजुट होंगे।”

BJP ने बताया शर्मनाक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि पार्टी अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है जो बेहद शर्मनाक है। BJP के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दल पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस में पूरी तरह बदल चुकी और चरम ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता अपना चुकी कांग्रेस अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है, जो शर्मनाक है।”

BJP प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी मानसिकता पूरी तरह अराजकतावादी हो गई है। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, “अब कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल से CJI के इस्तीफे की मांग की जा रही है।” उन्होंने सवाल किया, “संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने और साथ ही संविधान की दुहाई देने से बड़ी राजनीतिक पाखंड की मिसाल क्या हो सकती है?”

उन्होंने कहा, “अगर चुनाव हारते हैं, तो निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं। अगर फैसला उनके खिलाफ आता है, तो न्यायपालिका को निशाना बनाते हैं।” BJP सांसद निशिकांत दुबे ने भी केरल कांग्रेस की ओर से प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी पर हमला बोला।

दुबे ने X पर कहा, “राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने के बाद ‘महाराजा’ राहुल गांधी ने अब उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।” BJP सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे, शरजील इमाम राष्ट्रपति बनेंगे, अभिजीत दीपके उपराष्ट्रपति बनेंगे, प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी और खालिस्तानी पन्नून को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “इस बीच, (जॉर्ज) सोरोस भारत के अमेरिका में राजदूत होंगे।” BJP के एक अन्य प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि CJI द्वारा गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने से यह महत्वपूर्ण संदेश गया है कि न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए।

कब शुरू हुआ विवाद?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी पाबंदियों के मद्देनजर स्थिति के बारे में पूछे जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “ये कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” CJI राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की स्थापना की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या कानून बनाने वाला कोई व्यक्ति। उनसे पूछा गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेता अपनी शिकायतें उनके सामने कैसे रख सकते हैं।

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CJI की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की केरल इकाई ने C पर एक पोस्ट में कहा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका स्थान लेने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया।

Rahul Gandhi SC Petition: राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट याचिका में 14 खामियां! दस्तावेज अधूरे, खड़गे के ID कार्ड की कॉपी धुंधली, कोर्ट फीस भी ₹220 कम

Rahul Gandhi SC Petition: सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों की ओर से वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर दायर याचिका में 14 से ज्यादा खामियां बताईं। सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वह मामले में सह-याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की साफ कॉपी जमा करे।

सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ ऐसे पन्नों की ओर भी इशारा किया जो पढ़े जाने योग्य नहीं थे या गायब थे। इसके अलावा, रजिस्ट्री ने अदालत शुल्क में 200 रुपये से अधिक की कमी की बात भी बताई। इससे पहले दिन में, गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता याचिका दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके गए।

इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। जबकि तकनीकी विशेषज्ञ एवं गणमान्य नागरिक उनकी मदद करेंगे।

खामियों को करना होगा दूर

रजिस्ट्री की ओर से इन आपत्तियों को दर्ज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं को पहले सभी खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद ही मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा। इस घटनाक्रम से चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की कानूनी लड़ाई में एक प्रक्रियागत बाधा सामने आई है। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने याचिका में उठाए गए आरोपों या मांगों पर कोई फैसला सुना दिया है।

याचिका में क्या-क्या खामियां मिलीं?

न्यूज 18 के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका की प्रारंभिक जांच के दौरान कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा नौ याचिकाकर्ताओं के प्राधिकरण से जुड़े कागजात भी अधूरे पाए गए। याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी भी स्पष्ट नहीं थी। दस्तावेज की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसके साथ ही कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी पाई गई। इन कमियों को दूर करने के लिए याचिकाकर्ताओं को जरूरी दस्तावेज पूरे करने, प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित कोर्ट फीस जमा करने सहित रजिस्ट्री की आपत्तियों का समाधान करना होगा।

SIR पर रोक और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कुल 10 तरह की राहत मांगी हैं। इन मांगों का संबंध SIR की प्रक्रिया और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से लिए गए फैसलों से है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और याचिका में की गई मांगों पर फैसला अदालत को सुनवाई के दौरान करना होगा।

राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग के नाम से दर्ज है मामला

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस मामले को Rahul Gandhi v. Election Commission of India के नाम से दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की कानूनी टीम ने याचिका राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले दाखिल की थी। राहुल गांधी सोमवार शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में वकील एस. प्रसन्ना ने उनकी ओर से याचिका दाखिल की। इसके बाद राहुल गांधी सैकड़ों समर्थकों के साथ INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष की आवाज पहुंचाना था।

INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता मार्च में हुए शामिल

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने भी यह याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।

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OTT Crime Thrillers: अगर आप भी हैं डिजिटल क्राइम थ्रिलर्स के दीवाने, ओटीटी पर इन फिल्मों और सीरीज का उठा सकते हैं लुत्फ

OTT Crime Thrillers: इन्फ्लुएंसर अंकुश बहुगुणा के 40 घंटे के ‘डिजिटल-अरेस्ट’ के बुरे अनुभव से लेकर हाल ही में जाह्नवी कपूर के AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तक, भारत में डिजिटल धोखाधड़ी एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जहां एक घटना साइबर फ्रॉड और आर्थिक शोषण के खतरे को उजागर करती है, वहीं दूसरी यह दिखाती है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल करके तस्वीरों में हेरफेर की जा सकती है और लोगों की प्राइवेसी का उल्लंघन किया जा सकता है।

ऐसी घटनाएं टेक्नोलॉजी के बुरे पहलुओं को सामने लाती हैं। इसलिए भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी दिलचस्प ड्रामा, थ्रिलर और डॉक्युसीरीज के जरिए इन विषयों को दिखा रही है। फिशिंग नेटवर्क से लेकर फाइनेंशियल स्कैम और AI-आधारित हेरफेर तक, यहा कुछ ऐसे भारतीय शो और फिल्में हैं, जो डिजिटल धोखाधड़ी के कई रूपों पर रोशनी डालते हैं।

1. स्कैम 1992 द हर्षद मेहता स्टोरी-Sony LIV

1992 के सिक्योरिटीज स्कैम पर आधारित, ‘स्कैम 1992’ स्टॉकब्रोकर हर्षद मेहता के उत्थान और पतन की कहानी है। हर्षद मेहता मुंबई के स्टॉक मार्केट में मशहूर हुए थे, लेकिन बाद में भारत के सबसे कुख्यात फाइनेंशियल स्कैम में फंस गए। प्रतीक गांधी अभिनीत और हंसल मेहता द्वारा निर्देशित यह सीरीज बैंकिंग की कमियों, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और उन मीडिया इन्वेस्टिगेशन को दिखाती है, जिनकी वजह से यह स्कैम सबके सामने आया। पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष बसु की किताब ‘द स्कैम हू वॉन, हू लॉस्ट, हू गॉट अवे’ पर आधारित यह सीरीज फाइनेंशियल मार्केट की जटिलताओं और सिस्टम की कमियों का फायदा उठाने के नतीजों की झलक दिखाती है। यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि स्कैम तब पनपते हैं जब लोग और संस्थाएँ उन सिस्टम पर सवाल नहीं उठाते जिन पर वे भरोसा करते हैं।

2. CTRL- Netflix

अनन्या पांडे और विहान सामत अभिनीत, ‘CTRL’ एक इन्फ्लुएंसर की कहानी है, जो अपनी डिजिटल जिंदगी से अपने एक्स-बॉयफ्रेंड की यादें मिटाने के लिए एक AI ऐप का सहारा लेती है। लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि उस टेक्नोलॉजी का मकसद बहुत खतरनाक है। विक्रमादित्य मोटवाने द्वारा निर्देशित यह नेटफ्लिक्स थ्रिलर दिखाती है कि कैसे पर्सनल डेटा, AI टूल्स और टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता का इस्तेमाल लोगों को मैनिपुलेट करने के लिए किया जा सकता है।

3. स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी- Sony LIV

स्टॉक मार्केट से नकली कागजात के मामले की ओर बढ़ते हुए, ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ अब्दुल करीम तेलगी के स्टाम्प पेपर के नकली कारोबार की कहानी दिखाती है। गगन देव रियार की मुख्य भूमिका वाली यह सीरीज दिखाती है कि कैसे स्टाम्प पेपर सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर यह रैकेट एक बड़े नेटवर्क में बदल गया। पत्रकार संजय सिंह की किताब ‘तेलगी स्कैम: रिपोर्टर्स डायरी’ पर आधारित यह शो इस कारोबार के दायरे और उस नेटवर्क के बारे में बताता है जिसने इसे एक बड़े फाइनेंशियल स्कैम में बदल दिया।

4. जामताड़ा सबका नंबर आएगा-Netflix

बड़े फाइनेंशियल संस्थानों से हटकर आम फोन यूजर्स पर फोकस करते हुए, ‘जामताड़ा सबका नंबर आएगा’ झारखंड के जामताड़ा शहर से जुड़े फिशिंग स्कैम की कहानी दिखाती है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए बदनाम है। यह क्राइम ड्रामा उन युवा लड़कों की कहानी है जो फोन कॉल के जरिए अनजान लोगों को धोखा देकर उनकी जरूरी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।

5. बैड बॉय बिलियनेयर्स इंडिया-Netflix

यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज विजय माल्या, नीरव मोदी और सुब्रत रॉय जैसे मशहूर भारतीय बिजनेस दिग्गजों से जुड़े विवादों और आरोपों की पड़ताल करती है। आर्काइवल फ़ुटेज, इंटरव्यू और इन्वेस्टिगेटिव स्टोरीटेलिंग के जरिए, यह ताकतवर बिजनेस एम्पायर के बनने और उसके बाद हुए कानूनी और फाइनेंशियल विवादों को दिखाती है।

MP News: ‘मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’; अपनी ही सरकार पर क्यों बरसे शिवराज सिंह चौहान?

MP News: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार (11 अक्टूबर) को वन विभाग और जिला प्रशासन पर अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के आदिवासी बहुल कोसमी गांव में गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ने, फसलें नष्ट करने और कुएं को मिट्टी से भरने का आरोप लगाया। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के इस गांव में हुई इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कोसमी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पूरे मामले पर कड़ा आक्रोश जताया। चौहान ने कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। सीहोर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री अपनी ही सरकार पर हमलावर नजर आए।

‘अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थी, वहां बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए। उनके घर के नीचे उनकी फसल दबा दी गई। उनकी मेहनत कुचल दी गई। उनके वर्षों पुराने घर थे, आज तबाह कर दिए गए। जिन्होंने ऐसा किया वे हृदयहीन हैं, संवेदनशून्य हैं… ये अन्याय की अति है। उन्हें भगवान भी माफ नहीं करेगा। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की हर संभव प्रयास करेंगे। मैं मुख्यमंत्री के सामने भी ये सारी स्थिति रखूंगा।”

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, “आदिवासियों की मेहनत तबाह कर दी गई, उन्हें बेघर कर दिया गया। इनके पास कुछ नहीं बचा। जमीन के टुकड़े के अलावा इनके पास कुछ नहीं था। वन विभाग के लोगों ने भी ये किया है, ये जुल्म की पराकाष्ठा है। अगर उनके अपने बच्चे, मां और पत्नी को इस तरह रोना पड़े, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा?” उन्होंने कहा कि हम ये सभी बातें मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। इनके हितों के लिए, इन्हें न्याय दिलाने के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कोसमी चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत आता है। शिवराज जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब वह विधानसभा में बुधनी का प्रतिनिधित्व करते थे। वन विभाग और जिला प्रशासन ने कुछ महीने पहले भी इस प्रकार की कार्रवाई की कोशिश की थी तब चौहान ने अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रविवार को यह कार्रवाई की गई। शिवराज के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी दी जानकारी

उन्होंने प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे। बयान के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। साथ ही, जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।” शिवराज ने गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ने, उनकी फसलें नष्ट होने और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

अधिकारियों पर भड़के

चौहान ने मौके पर वन विभाग और प्रशासन के किसी भी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई में केवल घर ही नहीं टूटे, बल्कि पीड़ित परिवारों की आजीविका पर भी चोट पहुंची है। मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस प्रकरण को शिवराज और मोहन यादव की आपसी खींचतान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चक्कर में गांव के गरीब पिस रहे हैं।

कांग्रेस का रिएक्शन

कांग्रेस नेता सिंघार ने कोसमी में की गई कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए X पर एक पोस्ट में कहा, “मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र सीहोर के ग्राम कोसमी में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं। सिंघार ने आरोप लगाया, “BJP सरकार की आपसी खींचतान के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।”

वहीं, मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने X पर लिखा, “श्री शिवराज जी! आपके शब्द ‘शपथ-पत्र’ हैं! सबूत हैं कि मप्र ‘बेलगाम’ हो गया है! लेकिन, बयान ही काफी नहीं है! जनता के सामने आना चाहिए कि आदिवासी परिवारों को उजाड़ने वाला ‘नरपिशाच’ कौन है? ये सरकारी अत्याचारी कहां से नियंत्रित एवं संचालित हो रहे हैं?”

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कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, “मप्र यह भी जानना चाहता है, क्या भाजपा की आंतरिक सियासत में इतनी अदावत हो चुकी है कि पूर्व मुख्यमंत्री की हर बात को नजरअंदाज करना, मौजूदा मुख्यमंत्री का धर्म बन गया है? बहरहाल, पीड़ित परिवारों को BJP नेताओं की बात, बयान, बवाल से कोई लेना देना नहीं! उन्हें पुनर्वास मिले, मुआवजा मिले! यह विश्वास भी मिले, दोषी को दंड जरूर मिलेगा!”