मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

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Health Tips: देशभर में 6 अगस्त को झमाझम बारिश के साथ मौसम का मिजाज बदल चुका है। लेकिन इस सुहावने मौसम के साथ उमस, स्किन इंफेक्शन, हेयर फॉल और प्लेटलेट्स गिरने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। यदि आप इन समस्याओं से बचना चाहते हैं तो अपनाएं ये 5 आसान और असरदार टिप्स।

 

  • बारिश के मौसम में नमी की वजह से स्किन और बालों का नेचुरल ऑयल बैलेंस बिगड़ जाता है।
  • इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए रोजाना डाइट में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और ताजे फलों को शामिल करें।
  • डेंगू और मानसून इंफेक्शन से बचने के लिए शरीर को ढंककर रखें और बासी खाने से परहेज करें।

1. मानसून का बदलता ट्रेंड और सेहत की चुनौतियां:

  • 6 अगस्त को आईएमडी (IMD) ने देश के कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश गर्मी से राहत जरूर दिलाती है, लेकिन इसके साथ ही हवा में नमी (Humidity) का स्तर 90% तक पहुंच जाता है।
  • इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, चेहरे पर मुंहासे (Acne), तेजी से बाल झड़ना और डेंगू जैसे मच्छरों के काटने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। अगर आप इस मौसम में अपने डेली केयर रूटीन पर ध्यान नहीं देंगे, तो इंफेक्शन आपको आसानी से अपना शिकार बना सकता है।

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2. मानसून में स्किन और सेहत को फिट रखने के 5 आसान टिप्स:

सेलिसिलिक एसिड बेस्ड फेसवॉश का इस्तेमाल करें: हफ्ते में 3 से 4 बार यह वॉश चेहरे के एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) को हटाता है और पसीने से होने वाले मुंहासों को रोकता है।

एंटी-फंगल पाउडर का इस्तेमाल: बारिश में भीगे कपड़ों या जूतों की वजह से फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है। नहाने के बाद टॉवल से शरीर पूरी तरह सुखाकर पाउडर लगाएं।

हल्का और गर्म खाना खाएं: बारिश के दिनों में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। स्ट्रीट फूड और बासी खाने से बचें; सूप, हर्बल टी और घर का ताजा खाना ही लें।

बालों को गीला न छोड़ें: बारिश के पानी में एसिडिक तत्व होते हैं। अगर बाल भीग जाएं तो तुरंत माइल्ड शैम्पू से धोकर ड्राई कर लें।

हाइड्रेशन का रखें ध्यान: ठंडक महसूस होने पर भी दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीएं ताकि बॉडी डिटॉक्स होती रहे।

एक्सपर्ट की राय:-

“मानसून के दिनों में हवा में नमी की वजह से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। अपने स्कैल्प को सूखा रखना, गीले कपड़े न पहनना और प्लेटलेट्स का ध्यान रखने के लिए विटामिन-C रिच डाइट लेना इस मौसम में सबसे जरूरी है।”- डॉक्टर राजेंद्र बिस्वारी (स्किन केयर विशेषज्ञ)

 

3. मानसून में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां:

गीले बाल बांधना: गीले बालों को बांधने से स्कैल्प में फंगस और डैंड्रफ की समस्या दोगुनी तेजी से फैलती है।

भारी मॉइस्चराइजर लगाना: मानसून में जेल-बेस्ड (Gel-based) या ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का ही इस्तेमाल करें; हैवी क्रीम्स पोर्स को ब्लॉक कर देती हैं।

ठहरा हुआ पानी नजरअंदाज करना: घर के आसपास 24 घंटे से ज्यादा पानी जमा न होने दें, यह डेंगू के मच्छरों का मुख्य ब्रीडिंग ग्राउंड बनता है।

सनस्क्रीन स्किप करना: बादलों के पीछे भी यूवी (UV) किरणें मौजूद रहती हैं, इसलिए बिना सनस्क्रीन लगाए बाहर न निकलें।

 

बारिश का मौसम का आनंद लेने के साथ-साथ अपनी सेहत और स्किन की सही देखभाल करना बेहद आसान है। बस अपने डेली रूटीन में ये छोटे-छोटे बदलाव करें और इस मानसून को पूरी तरह सुरक्षित और झंझट-फ्री बनाएं!क्या आपने इस मानसून में अपना नया स्किनकेयर या फिटनेस रूटीन शुरू किया है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं!

El Nino Impact: अल नीनो और युद्ध के बीच भारत के मानसून से दुनिया को क्यों हो रही टेंशन? नए संकट की आहट!

El Nino Impact On Monsoon: वैश्विक स्तर पर खाद्य महंगाई की मार झेल चुकी दुनिया के सामने साल 2026 के अंत तक एक बार फिर से भोजन महंगा होने का नया संकट मंडराने लगा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्ध की वजह से फ्यूल और फर्टीलाइजर की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही है।इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश भारत में मानसून की धीमी और देर से हुई शुरुआत ने वैश्विक चावल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को लेकर दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल के ऊंचे दाम, खाद आपूर्ति में रुकावट और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम कृषि उत्पादन व उसके परिवहन की लागत को लगातार बढ़ा रहे हैं। इस वजह से दुनिया भर के उपभोक्ताओं को इस साल के अंत और वर्ष 2027 के दौरान खाद्य महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में राहत की खबर यह है कि घरेलू स्तर पर सुधरती बारिश और पर्याप्त अनाज भंडार के दम पर भारत पर इसका असर सीमित रहने का अनुमान है।

संयुक्त राष्ट्र ने दिए संकेत: साल के अंत से फिर बढ़ेंगे खाने-पीने के सामान के दाम

साल 2022 में ग्लोबल महंगाई को बढ़ाने में खाद्य कीमतों ने मुख्य भूमिका निभाई थी लेकिन चालू वर्ष में ऊर्जा लागत अधिक रहने के बावजूद खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रही हैं। हालांकि यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतें अब ज्यादा तेजी से बढ़ेंगी और साल के अंत तक खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने शुरू हो जाएंगे।

इसका असर अगले साल यानी 2027 में और अधिक देखने को मिलेगा। टोरेरो के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतों का असर रिटेल यानी खुदरा बाजार में दिखने में तीन से छह महीने का समय लगता है।

हालांकि हाल के महीनों में गेहूं, मक्का और चावल जैसी प्रमुख फसलों की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन यह मौजूदा समय की ठीक-ठाक पैदावार दिखा रही है। असली चुनौती अगली बुवाई के सीजन में उत्पादन लागत बढ़ने से सामने आएगी।

युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर बढ़ा भारी दबाव

ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा की है। ये दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। मैक्सिमो टोरेरो के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह का अवरोध कृषि प्रणालियों और उसके इनपुट्स पर सीधा असर डालता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची दरें सिंचाई, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा देती हैं। इसके अलावा नेचुरल गैस के दाम बढ़ने से खाद बनाना भी काफी महंगा हो जाता है।

इसी तरह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने डीजल और नेचुरल गैस के निर्यात पर असर डाला है। इससे दुनिया भर में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यूरोप, अमेरिका, ब्राजील और एशिया के किसान इस दबाव को महसूस कर रहे हैं और कम मुनाफे की वजह से फसलें उगाएं या न उगाएं, इस सवाल से जूझ रहे हैं।

भारत का मानसून बना दुनिया के लिए अहम वॉचपॉइंट

दुनिया में चावल के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और सबसे बड़े निर्यातक देश भारत का मानसून अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजारों के लिए एक प्रमुख वॉचपॉइंट बना हुआ है। भारत में मानसून की देरी से शुरुआत और औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। अगर भारत के चावल उत्पादन में कोई बड़ी बाधा आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई टाइट हो सकती है। इससे कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर सीमित: बजाज एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट

बजाज एसेट मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में देर से आए मानसून का देश की इकॉनमी पर बड़ा निगेटिव असर पड़ने की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जून के आखिरी हफ्ते में बारिश काफी बेहतर हुई है। जुलाई में भी मानसूनी बारिश मजबूत रही। देश के प्रमुख नदी घाटियों और जलाशयों में पानी का स्तर बेहतर स्थिति में है। भारत के पास सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार तय बफर नॉर्म्स से लगभग 5 गुना अधिक है। ये खाद्य कीमतों में उछाल को रोकने में एक मजबूत कवच का काम करेगा।

वित्त वर्ष 2027 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर औसतन 5 से 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये खाद्य आपूर्ति के अस्थाई दबावों की वजह से होगी। हालांकि कोर इन्फ्लेशन दर कंट्रोल में है। भारत की रूरल इकॉनमी मजबूत बनी हुई है। मई में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह एग्रीकल्चर क्रेडिट करीब 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा। गैर-कृषि आय के मजबूत रहने से बुवाई में देरी के बावजूद ग्रामीण खपत बनी हुई है।

रिपोर्ट में ऐतिहासिक तथ्यों के हवाले से कहा गया कि जून 2026 पिछले एक सदी में सबसे शुष्क महीनों में से एक रहा लेकिन पूरे मानसून का नतीजा जून से तय नहीं होता। अगर अगस्त और सितंबर में बारिश का सिलसिला बेहतर बना रहता है तो मानसून घाटे की चिंताएं दूर हो जाएंगी और 2026 को एक रिकवरिंग मानसून वर्ष के रूप में देखा जाएगा।

बढ़ती लागत से किसानों ने घटाई बुवाई: अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक संकट

बढ़ती उत्पादन लागत के कारण दुनिया भर के किसानों ने फसलों का रकबा घटाना शुरू कर दिया है। ईरान संघर्ष के शुरुआती तीन महीनों में वैश्विक स्तर पर गेहूं और मक्के की बुवाई में गिरावट आई है। कई अमेरिकी किसानों ने सोयाबीन की ओर रुख किया है क्योंकि इसमें खाद की जरूरत कम होती है। अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्‍त सरकारी मदद के बिना 2027 में 9 प्रमुख फसलें उगाने वाले अमेरिकी किसानों को कुल मिलाकर 32 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

दुनिया के बड़े कृषि निर्यातक देशों में शामिल ऑस्ट्रेलिया ने अनुमान लगाया है कि फ्यूल और खाद की अत्यधिक ऊंची कीमतों के साथ इनपुट्स की अनिश्चितता के चलते उसकी सर्दियों की फसल उत्पादन में 21 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

अल नीनो की आहट से खाद्य सुरक्षा पर मंडराया ‘परफेक्ट स्टॉर्म’

भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ अल नीनो मौसम पैटर्न के मजबूत होने की आशंका ने संकट को और गहरा कर दिया है। एफएओ ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की वजह से मौसम पर पड़ने वाला असर फसलों की पैदावार घट सकती है। ऐसा हुआ तो खाद्य आपूर्ति में कमी आएगी और दुनिया भर में करोड़ों लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं।

जलवायु का झटका, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और फ्यूल-खाद की आपूर्ति में आ रही बाधा, ये सारी बातें मिलकर वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए एक परफेक्ट स्टॉर्म यानी चौतरफा संकट पैदा कर रही हैं। हालांकि कमोडिटी बाजार अब तक कुछ हद तक टिकाऊ बने रहे हैं लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत का पूरा असर आने वाले महीनों में सुपरमार्केट और खुदरा दुकानों में सामानों के दामों में दिखाई देगा।

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इससे दुनिया भर के लोगों के लिए महंगाई का खतरा एक बार फिर बढ़ सकता है। दूसरी ओर भारत में सुधरती मानसूनी बारिश, प्रचुर अन्न भंडार और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के चलते देश के भीतर इसका व्यापक आर्थिक असर सीमित रहने की उम्मीद है।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर : 184 संदिग्ध मामले, 22 बच्चों की मौत से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र में दहशत

Chandipura virus in Gujarat

Chandipura Virus Outbreak: मानसूनी मौसम के बीच गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) का आतंक चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। राज्यभर से अब तक 184 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 से अधिक मरीजों में इस वायरस की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इस जानलेवा संक्रमण के कारण 15 वर्ष से कम उम्र के लगभग 22 मासूम बच्चों की मौत होने की खबर है। इससे विशेष रूप से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों में भारी डर और दहशत का माहौल है।

अस्पतालों की स्थिति और वायरस के मुख्य लक्षण

वेबदुनिया संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, हिम्मतनगर, गांधीनगर, राजकोट, पाटन और भावनगर के सिविल अस्पतालों के बाल रोग विभाग (Pediatric Wards) चिंतित माता-पिता से भरे नजर आ रहे हैं। बच्चों में अचानक तेज बुखार, उल्टी, चक्कर आना, ऐंठन (दौरे पड़ना) और अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखने पर परिजन तुरंत अस्पताल की ओर भाग रहे हैं। सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलने वाले इस वायरस के लक्षण दिखने के बाद बच्चे की हालत बहुत तेजी से गंभीर हो जाती है, जिससे पूरे राज्य में चिंता का माहौल बना हुआ है।

15 साल से कम उम्र के बच्चों में ही क्यों फैलता है यह वायरस?

GCS मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ही निशाना बनाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पूरी तरह विकसित नहीं होती है और मस्तिष्क को सुरक्षा देने वाला 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' कवच कमजोर होने के कारण यह न्यूरोट्रॉपिक वायरस खून से सीधे दिमाग तक पहुंचकर सूजन (Encephalitis) पैदा कर देता है। इसके अलावा, जमीन से कम ऊंचाई पर उड़ने वाली सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) जमीन पर खेलते या नीचे सोए मासूम बच्चों को आसानी से काट लेती है और बच्चों का छोटा शरीर वायरस के हमले के बाद तेज बुखार तथा ऐंठन (दौरे) जैसे गंभीर लक्षणों को तेजी से सहन नहीं कर पाता है।

स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह मुस्तैद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सीधे मार्गदर्शन में राज्य सरकार का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह से मुस्तैद होकर काम कर रहा है। सिविल अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को बिना किसी देरी के ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू (ICU) में भर्ती किया जाए। इसके साथ ही पशुपालन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सैंडफ्लाई के नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री?

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस के खिलाफ कोई विशेष वैक्सीन (टीका) या निश्चित दवा उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों और शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम द्वारा वैज्ञानिक तरीके से इस वायरस के खिलाफ प्रभावी दवा की खोज और नई वैक्सीन विकसित करने के लिए गहन शोध (Research) शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में बच्चों को इस खतरे से बचाया जा सके।

नागरिकों के लिए सावधानी के उपाय और अपील

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन का सहयोग करने की विनम्र अपील की है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि कच्चे मकानों या मिट्टी की दीवारों की दरारों को तुरंत भरवाएं और बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं। यदि बच्चे में बुखार या ऐंठन जैसे कोई भी प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करने का अनुरोध किया गया है।

कल बेहद भारी बारिश का अलर्ट: दिल्ली-यूपी से बिहार तक मूसलाधार बरसेंगे बादल! IMD ने इन 25+ राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

Heavy Rain Alert: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 अगस्त के लिए देशभर के मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक मानसूनी गतिविधियों के चलते मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है। आईएमडी ने देश के 25 से भी अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

इन राज्यों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 6 अगस्त को देश के कई इलाकों में अत्यधिक तेज बारिश हो सकती है। मैदानी और तटीय इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भारी जलभराव और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से गंगातटीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड, कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र तथा केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन राज्यों के प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार समेत मैदानी राज्यों का हाल

उत्तर और मध्य भारत के मैदानी भागों में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बादलों की आवाजाही के साथ मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

IMD Weather

अंडमान-निकोबार में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल का खतरा

तटीय और द्वीप क्षेत्रों में समुद्री मौसम काफी आक्रामक रहने वाला है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने द्वीप क्षेत्र में रहने वाले लोगों और मछुआरों को समुद्र तटों और खुले इलाकों से दूर रहने तथा विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है।

40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

दक्षिण भारत और द्वीपीय क्षेत्रों में बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। आंध्र प्रदेश, केरल व माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के अलग-अलग हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

कई राज्यों में 30 से 40 किमी/घंटे की हवाओं के साथ बिजली चमकने का अलर्ट

देश के मध्य, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम के कई अन्य हिस्सों में भी आंधी-तूफान का असर देखने को मिलेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में आकाशीय बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।

इन पहाड़ी व पूर्वोत्तर राज्यों में वज्रपात की चेतावनी

मौसम विभाग ने पहाड़ी और पूर्वोत्तर के राज्यों में केवल आकाशीय बिजली गिरने को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के अलग अलग क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है। आईएमडी ने इन सभी राज्यों के नागरिकों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

Heavy Rain Alerts: उत्तराखंड में अगले 24 घंटे बेहद भारी! स्कूल बंद…इन जिलों में हाई अलर्ट, जान लें IMD का लेटेस्ट अपडेट

Heavy Rain Alerts: राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय मानसून की बारिश देखने को मिल रही है। वहीं देश के पहाड़ी राज्यों में बारिश ने अपना रौद्र रूप भी दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में अगले 24 घंटे भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश की गतिविधियां रात के समय और तेज हो सकती हैं और अगले दो दिनों तक इसका असर बना रह सकता है। 6 अगस्त को चमोली, बागेश्वर और देहरादून जिलों के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इन जिलों के लिए जारी हुआ अलर्ट

मौसम विभाग ने 5 और 6 अगस्त के लिए कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि 7 से 10 अगस्त के बीच भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 5 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, अन्य पहाड़ी जिलों और ऊधम सिंह नगर में भी कई जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

भारी बारिश का अलर्ट, स्कूलों की छुट्टी

देहरादून में रातभर हुई तेज बारिश के कारण टोंस नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बुधवार को सभी स्कूल बंद रखने का फैसला किया है। देहरादून जिला प्रशासन ने बुधवार को सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में एक दिन की छुट्टी घोषित कर दी है। यह आदेश पहली से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू रहेगा।

अलर्ट पर रखे गए सभी विभाग

वहीं, उत्तराखंड सरकार ने सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सभी जिला प्रशासन को अलर्ट रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उन्होंने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के यात्रा न करें और मौसम विभाग व प्रशासन की ओर से जारी सलाह का पालन करें।

इन इलाकों में मौसम ने दिखाया रौद्र रूप

लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग जिले में मदमहेश्वर धाम जाने वाले रास्ते पर मारकंडा नदी का अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे यात्रा प्रभावित हो गई है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, इसलिए फिलहाल लोग और स्थानीय निवासी नदी पार करने के लिए ट्रॉली की मदद ले रहे हैं। वहीं, मंगलवार रात हुई भारी बारिश के कारण कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी भी प्रभावित हुई। तेज बहाव वाली नदियों में कई वाहन फंस गए थे। हालांकि, सभी 20 पर्यटकों, गाइड और ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एहतियात के तौर पर ढेला और झिरना सफारी जोन को फिलहाल बंद कर दिया गया है।

राहुल-रिजिजू मुलाकात बेनतीजा: ‘गृह मंत्री दें जवाब, पीएम मांगे माफी… तभी होगी बात’, परिसीमन बिल पर संसद में फंसा पेच!

kiren rijiju and rahul gandhi

संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध टूटने का नाम नहीं ले रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में जारी हंगामे के बीच बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद भवन स्थित चेंबर में जाकर उनसे मुलाकात की। लगभग 50 मिनट तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं।ALSO READ: Fact-Check: क्या दतिया उपचुनाव हारने के बाद BJP ने हजारों नेताओं को बाहर निकाला?

हालांकि, परिसीमन बिल (Delimitation Bill) पर विपक्ष का समर्थन जुटाने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की सरकारी कोशिशें इस बैठक के बाद भी बेनतीजा ही रहीं। 

 

1. मुलाकात में क्या हुआ और कहां अटका पेच?

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का रुख जानना चाहा और संसद की कार्यवाही में सहयोग की अपील की। लेकिन राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार विपक्ष की मुख्य मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक किसी भी विधायी कार्य पर सहमति बनना संभव नहीं है। ALSO READ: यूसुफ पठान समेत 3 मुस्लिम सांसदों ने क्यों बनाई NDA से दूरी! क्या 'खेला' हो गया?
 

2. राहुल गांधी की 3 मुख्य शर्तें

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं: 

1. गृह मंत्री अमित शाह का सदन में वक्तव्य: विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुए पुलिस एक्शन और पेलेट गन/लाठीचार्ज के मुद्दे पर विस्तृत बयान दें। 

2. प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी और माफी: विपक्ष का कहना है कि उत्पन्न हुई समस्याओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 

3. मुद्दों पर सीधी चर्चा: जब तक इन गंभीर विषयों पर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का जवाब नहीं आता, तब तक विपक्ष किसी भी नए बिल या विधायी प्रक्रिया का समर्थन नहीं करेगा। ALSO READ: संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का मार्च, अमित शाह से मांगा जवाब

 

 

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच हुई यह बैठक भले ही गतिरोध को समाप्त न कर सकी हो, लेकिन इसने दोनों पक्षों के कड़े रुख को स्पष्ट कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांगों को मानते हुए गृह मंत्री के बयान के लिए तैयार होती है या फिर मानसून सत्र के बाकी बचे दिनों में भी हंगामे का दौर इसी तरह जारी रहता है। 

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

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RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का मार्च, अमित शाह से मांगा जवाब

opposition protest in parliment

छात्रों पर लाठीचार्ज और चढ़ावा चोरी मामले में प्रेरणा स्थल से मकर द्वार तक विपक्षी सांसदों ने बुधवार को मार्च किया। प्रदर्शन में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत सभी विपक्षी दलों के सांसद शामिल थे। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था, इस पर लिखा था 'अमित शाह जवाब दो'। भाजपा ने राहुल गांधी पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाया। ALSO READ: सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर गरमाई महाराष्ट्र की सियासत, CM फडणवीस का कांग्रेस पर तीखा हमला

 

 

कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में प्रोटेस्ट का वीडियो शेयर करते हुए कहा कि छात्रों पर हुई बर्बरता और चढ़ावा चोरी के खिलाफ विपक्ष के सांसदों का पैदल मार्च। मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सदन में आकर जवाब देना ही होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हमारी मांग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा। सदन शुरु हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्हें आना चाहिए, सदन में न आकर वो संसद का अपमान कर रहे हैं। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

राहुल गांधी पर भाजपा का बड़ा आरोप

भाजपा नेता गौरव भाटिया ने कहा कि ऐसा क्यों है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद को चलने नहीं दे रहे हैं? हमने हमेशा कहा है कि ये 2 विचार धाराओं की लड़ाई है। एक तरफ नरेंद्र मोदी राष्ट्र की बात करते हैं राष्ट्र हित सर्वोपरि है। दूसरी तरफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी केवल देश को बांटने का काम करते हैं। अराजक तत्वों के साथ खड़े होना खुद, अराजक हो जाना। नरेंद्र मोदी की सरकार में जीरो टॉलरेंस की नीति है, 2019-2026 तक 36 देशों से 274 भगोडे भारत वापस लाए गए हैं।'

 

गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस वजह से संसद की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने आज भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बैठक की।

Best Agrolife Share: 3 दिन में 36% उछला एग्रोकेमिकल स्टॉक, दमदार रिजल्ट से निवेशकों में खरीदने की होड़

Best Agrolife Share: एग्रोकेमिकल कंपनी बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयरों में जून तिमाही के नतीजों के बाद जोरदार तेजी आई है। यह स्टॉक रिजल्ट के बाद तीन कारोबारी सत्र में करीब 36% चढ़ चुका है। वहीं, बीते 5 दिनों में इसने 46% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

मंगलवार को भी स्टॉक 20% के अपर सर्किट के साथ 22.66 रुपये पर बंद हुआ। इसकी वजह जून तिमाही में मुनाफे का डबल होना और मैनेजमेंट का आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक रुख है।

मार्जिन और मुनाफे में जोरदार उछाल

जून तिमाही में Best Agrolife का मुनाफा तेजी से बढ़ा। कंपनी का रेवेन्यू 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रहा। लेकिन असली मजबूती मुनाफे में दिखी। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये पहुंच गया और EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% हो गया।

शुद्ध मुनाफा (PAT) भी दोगुना होकर 41 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में चुनिंदा बढ़ोतरी और लागत पर नियंत्रण की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

पेटेंटेड प्रोडक्ट्स पर बढ़ा फोकस

बेस्ट एग्रोलाइफ का पेटेंटेड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो लगातार मजबूत हो रहा है। इस तिमाही में इसकी वॉल्यूम 37% बढ़ी। वहीं, ब्रांडेड बिक्री में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 45% से बढ़कर 64% हो गई। डीलरों को ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की बिक्री भी 13% बढ़ी। कंपनी ने तीन नए पेटेंटेड प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, जिससे कुल पोर्टफोलियो 12 प्रोडक्ट्स का हो गया है।

मैनेजमेंट का कहना है कि किसानों से अच्छा फीडबैक मिल रहा है और रिपीट ऑर्डर भी बढ़ रहे हैं। मानसून में देरी और फसल की धीमी शुरुआती बढ़त से खरीफ सीजन की शुरुआत कमजोर रही। लेकिन अब दूसरी तिमाही से मांग में सुधार की उम्मीद है।

कंपनी की रणनीति आगे क्या है?

मैनेजमेंट का फोकस फिलहाल कारोबार को स्थिर करने और मुनाफा बढ़ाने पर है। इसी वजह से CAPEX योजना को अभी टाल दिया गया है। कंपनी ने 60 करोड़ रुपये का सेल्स रिटर्न प्रावधान भी किया है। साथ ही वर्किंग कैपिटल सुधारने के लिए इन्वेंट्री घटाकर 764 करोड़ रुपये कर दी गई है।

कंपनी को आगे 10% से 15% की CAGR रेवेन्यू ग्रोथ और 13% से 14% के टिकाऊ EBITDA मार्जिन की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी विस्तार जारी है। नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम और मेक्सिको में नए प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन मिले हैं, जबकि श्रीलंका में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स को फास्ट-ट्रैक मंजूरी मिली है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।