8th Pay Commission Update: क्या मई 2027 से पहले आएगी रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग की डेडलाइन पर सरकार ने संसद में दी सफाई

8th Pay Commission Report: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संसद के मानसून सत्र में सरकार ने साफ किया है कि आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय है। हालांकि, सरकार ने इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि आयोग अपनी रिपोर्ट तय डेडलाइन यानी मई 2027 से पहले जमा करेगा या नहीं।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग से जुड़ी हर एक बारीकी और संसद में वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को नीचे विस्तार से समझाया गया है।

18 महीने की डेडलाइन: संसद में सरकार ने क्या कहा?

लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की। 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को आधिकारिक संकल्प के माध्यम से किया गया था। सरकार के मुताबिक, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इसके हिसाब से रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा मई 2027 बैठती है।

जब सरकार से पूछा गया कि क्या आयोग मई 2027 से पहले रिपोर्ट सौंपेगा, तो मंत्री ने किसी भी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं की और केवल 18 महीने के नियम को दोहराया। हालांकि, मूल प्रस्ताव के अनुसार यदि आयोग किसी विषय पर सिफारिशें पहले तय कर लेता है, तो वह सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकता है।

कितने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर?

सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस नए वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर लगभग 70 लाख लोगों पर पड़ेगा:

सिविलियन कर्मचारी: 1 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार के तहत लगभग 35.77 लाख नागरिक कर्मचारी कार्यरत थे।

पेंशनभोगी: 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और फैमिली पेंशनर्स रजिस्टर्ड थे (इसमें रक्षा पेंशनभोगी शामिल नहीं हैं)।

आयोग के जनादेश में वेतन संशोधन, भत्ते, पेंशन, फैमिली पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े सभी अहम पहलू शामिल हैं।

वर्तमान में किस चरण में है आयोग का काम?

8वां वेतन आयोग फिलहाल हितधारकों के साथ परामर्श के चरण में है। आयोग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य हितधारकों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों को सुन रहा है। इसके लिए जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसी जगहों पर बैठकें प्रस्तावित हैं।

काम को तेजी से निपटाने के लिए आयोग ने 11 अगस्त को कंसल्टेंट्स के नियमों में संशोधन किया है। अब एचआर (HR), लीगल रिसर्च, आईटी, डेटा एनालिसिस और डेटा विजुअलाइजेशन के क्षेत्र में सीनियर कंसल्टेंट्स और यंग प्रोफेशनल्स को शामिल किया जा रहा है।

लागू होने की तारीख पर स्थिति

कर्मचारी और पेंशनभोगी इस बात का भी इंतजार कर रहे हैं कि नई सिफारिशें किस तारीख से लागू मानी जाएंगी। सरकार ने साफ किया है कि जब तक आयोग अपनी अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट नहीं सौंप देता और सरकार उस पर विचार नहीं कर लेती, तब तक नई दरों के लागू होने की तिथि पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

कुल मिलाकर केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी नई सैलरी, एरियर और पेंशन संशोधन के लिए आयोग की बैठकों के पूरा होने और मई 2027 तक रिपोर्ट आने का इंतजार करना होगा।

UP Heavy Rain Alert: UP में मानसून अभी और दिखाएगा रौद्र रूप! 13 अगस्त से पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश, आईएमडी ने जारी किया अलर्ट

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून एक्टिव होने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 13 से 18 अगस्त के बीच प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान कई इलाकों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज आंधी-तूफान देखने को मिल सकता है। लखनऊ मौसम केंद्र के मुताबिक, मध्य प्रदेश और बंगाल की खाड़ी के पास बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण बारिश बढ़ सकती है। 13 अगस्त से पूर्वी यूपी में बारिश शुरू होगी और 14 अगस्त तक इसका असर मध्य व पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं यूपी के किन राज्यों में होगी भारी बारिश

16 अगस्त तक होगी तेज बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, मानसूनी द्रोणी के उत्तर की ओर खिसकने से प्रदेश में मानसूनी प्रवाह मजबूत होगा। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र भी धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक, ये सिस्टम अगले 12 घंटों में स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र और उसके बाद 24 घंटे के दौरान अवदाब में बदल सकता है। 13 अगस्त को पूर्वी यूपी के कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। 14 अगस्त और 15 अगस्त को यूपी के कुछ इलाकों में भी बारिश हो सकती है। 16 अगस्त को पूर्वी यूपी के लगभग सभी इलाकों और पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है।

कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के मुताबिक, 13 अगस्त को सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। कई इलाकों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली का भी खतरा रहेगा। वहीं, 14 अगस्त को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, कानपुर, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत और आसपास के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

 

बारिश ने मिलेगी राहत

मौसम विभाग के मुताबिक, 15 अगस्त को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत और आसपास के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। 16 अगस्त को भी प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, अयोध्या और बरेली समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। 17 और 18 अगस्त को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों, खासकर गोरखपुर, बस्ती, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में भारी बारिश हो सकती है।

अभी भी बारिश की कमी

प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने वाली है, लेकिन इस मानसून में अब तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है। 12 अगस्त तक पूर्वी यूपी में 335.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 30 फीसदी कम है। पश्चिमी यूपी में 369.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 10 फीसदी कम है। पूरे प्रदेश में अब तक 349.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 22 फीसदी कम है। वहीं, मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में सामान्य से 60 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई है। एटा और फिरोजाबाद में भी सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि कई जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है।

बारिश के दौरान बरतनी होगी सावधानी

भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भर सकता है और कच्चे या कमजोर मकानों को नुकसान पहुंच सकता है। बिजली सप्लाई प्रभावित होने के साथ सड़कों पर फिसलन भी बढ़ सकती है। नदियों और नालों का पानी अचानक बढ़ने का खतरा है। ऐसे में लोगों को जलभराव और बाढ़ वाले इलाकों से दूर रहने, सुरक्षित पक्की जगह पर रहने और बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी गई है।

Retail Inflation : लगातार चौथे महीने महंगाई बढ़ी, रिटेल इंफ्लेशन जुलाई में 4.45% हुई; RBI के लिए बढ़ेगी मुश्किल

Retail Inflation : रिटेल महंगाई जुलाई में लगातार चौथे महीने बढ़ी है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 4.45% हो गई। जून में यह 4.38% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण रही।

जुलाई में महंगाई लगातार दूसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही। अप्रैल में महंगाई 3.48% थी। इसके बाद मई में 3.93%, जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% हो गई। यानी अप्रैल से अब तक महंगाई करीब 1 प्रतिशत अंक बढ़ चुकी है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जुलाई में Consumer Food Price Index (CFPI) आधारित महंगाई 5.52% रही। जून में यह 5.32% थी। ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की महंगाई ज्यादा रही। यहां यह 5.79% रही। शहरी इलाकों में यह 5.05% थी।

इसी वजह से आने वाले महीनों में भी महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ICRA के मुताबिक, अगस्त में रिटेल महंगाई 4.7% तक पहुंच सकती है।

गांवों में महंगाई का ज्यादा दबाव

ग्रामीण भारत में कुल रिटेल महंगाई जुलाई में 4.84% रही। जून में यह 4.74% थी। वहीं, शहरी महंगाई 3.93% से मामूली बढ़कर 3.96% हो गई। खाने-पीने की चीजों के अलावा कपड़े और जूते भी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा महंगे हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी महंगाई 3.97% रही। शहरी क्षेत्रों में यह 2.41% थी।

कुछ सेवाओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई। जुलाई में रेस्टोरेंट और होटल से जुड़ी सेवाओं की महंगाई 7.72% रही। ट्रांसपोर्ट की महंगाई 4.43% और पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन, अन्य सेवाओं की महंगाई 14.77% रही।

अदरक, लहसुन और प्याज ने रुलाया

रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें जुलाई में काफी महंगी हुईं। अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 83.62% की बढ़ोतरी हुई। जून में यह 50.41% थी। लहसुन की महंगाई भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई। प्याज की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं। प्याज की महंगाई जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54% हो गई।

हालांकि, कुछ सब्जियों ने राहत दी। जुलाई में टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 4.59% घटी। जून में टमाटर 31.92% महंगा था। आलू की कीमत 16.56% और भिंडी की कीमत 5.52% घटी।

सोना-चांदी भी महंगे

महंगाई के आंकड़ों में कीमती धातुओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दिखी। जुलाई में चांदी के आभूषणों की कीमत सालाना आधार पर 109.84% बढ़ी। सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषण भी महंगे हुए। इनकी कीमतों में क्रमशः 32.98% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आगे ब्याज दरों पर क्या होगा?

महंगाई बढ़ने से RBI के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला थोड़ा मुश्किल हो सकता है। RBI ने हाल में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज के मुताबिक, बारिश, कच्चे तेल की कीमत और इनपुट लागत पर नजर रखना जरूरी होगा। उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही से महंगाई 5% के ऊपर जा सकती है।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में औसत CPI महंगाई करीब 5% रह सकती है। पश्चिम एशिया में तनाव और मानसून इसके लिए बड़े जोखिम हैं। अगर महंगाई का दबाव दूसरी चीजों तक भी फैलता है, तो दिसंबर 2026 की बैठक में RBI ब्याज दर बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

तेलंगाना में सबसे ज्यादा महंगाई

राज्यों की बात करें तो जुलाई में तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 6.32% रही। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 5.72% और तमिलनाडु में 5.44% रही। वहीं, मिजोरम में महंगाई सबसे कम 1.84% रही। मेघालय में यह 2.31% और त्रिपुरा में 2.32% रही। दिल्ली में भी महंगाई अपेक्षाकृत कम 2.68% रही।

कुल मिलाकर, जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभी इसकी बड़ी वजह खाने-पीने की चीजें और कुछ सप्लाई से जुड़ी समस्याएं हैं। अगर यह दबाव आगे भी बना रहता है, तो इसका असर RBI की ब्याज दरों की अगली रणनीति पर पड़ सकता है।

Lenskart Q1 Results: आईवियर कंपनी का मुनाफा 270% बढ़ा, रेवेन्यू ₹2714 करोड़ पहुंचा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कल का मौसम: 13 अगस्त को यूपी समेत 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट! इन 2 इलाकों में IMD ने जारी की रेड कलर वॉर्निंग

Weather Update 13 August: दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के बड़े हिस्से में सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बीच आईएमडी ने 13 अगस्त के मौसम को लेकर भी एक विस्तृत चेतावनी बुलेटिन जारी किया है। इसके मुताबिक देश के उत्तरी, पूर्वी, मध्य, पश्चिमी और दक्षिण-प्रायद्वीपीय हिस्सों में बादलों की तगड़ी आवाजाही के बीच मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार देश के 20 से अधिक राज्यों में तेज से बहुत तेज बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है। इस मानसूनी बारिश के बीच सबसे गंभीर स्थिति पूर्वी भारत के दो राज्यों में देखने को मिल सकती है। इन राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने रेड कलर वार्निंग जारी की है।

गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लिए रेड वार्निंग

मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार 13 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से भी बेहद भारी बारिश यानी अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। इसी परिस्थिति को देखते हुए इन दोनों इलाकों के लिए रेड कलर वार्निंग जारी की गई है। इसका सीधा मतलब है कि स्थानीय प्रशासन और नागरिक स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें और आवश्यक कदम उठाएं। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम प्रणालियों के प्रभाव से तटीय इलाकों में तेज बारिश के साथ-साथ निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या पैदा हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में बहुत भारी बारिश का अनुमान

मध्य भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के मौसम में भी 13 अगस्त को खासा असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इसके साथ ही राज्य के कई इलाकों में मेघगर्जन और बिजली चमकने का अंदेशा भी जताया गया है, जिससे नदी-नालों में उफान और ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश और पहाड़ी राज्यों समेत 20 से अधिक राज्यों में भारी बारिश

देश के एक बड़े हिस्से में 13 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के कई स्थानों पर भारी बारिश की प्रबल संभावना है। पश्चिमी भारत और उससे सटे क्षेत्रों में राजस्थान, गुजरात क्षेत्र, कोंकण एवं गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र के इलाकों में भी तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

मध्य और पूर्वी भारत की बात करें तो पश्चिम मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान है। पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के इलाकों में भी भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है।

तेज आंधी, बिजली चमकने और हवाओं की रफ्तार का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। आंध्र प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है।

Clipboard01;;;;

इसी तरह अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, तटीय कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम और तेलंगाना में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली हवाओं के साथ बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और विदर्भ में भी बिजली चमकने के साथ वज्रपात का अलर्ट दिया गया है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में सतह पर तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

समंदर में तूफानी हलचल और मछुआरों के लिए चेतावनी

अरब सागर में मानसूनी हवाओं के प्रभाव से मौसम काफी उग्र रहने की संभावना है। सोमालिया और ओमान तट के पास और उससे दूर, पश्चिमी-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों तथा दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार रफ्तार तक पहुंच सकती हैं। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को इन क्षेत्रों तथा गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है।

Kalanamak Rice: ₹40 से ₹150 पहुंचा कालानमक चावल का भाव! 5 गुना बढ़ा उत्पादन, ‘बुद्ध राइस’ ने किसानों की बल्ले-बल्ले कर दी

Kalanamak Rice: अपनी खास सुगंध और गुणों के लिए फेमस कालानमक चावल की खेती और इसकी बिक्री ने उत्तर प्रदेश के किसानों की किस्मत बदल दी है। हाल के वर्षों में कालानमक चावल के खेती के क्षेत्रफल और प्रोडक्शन दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इससे किसानों की इनकम भी बढ़ी है। साल 2018 में जहां कालानमक चावल का बिक्री मूल्य ₹40 प्रति किलोग्राम था। वहीं, साल 2026 में यह बढ़कर ₹150 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसी का असर है कि सामान्य चावल की तुलना में इसकी खेती करने वाले किसानों के लाभ में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान काला नमक चावल को लेकर अहम जानकारियां शेयर की हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों में आए इस भारी उछाल और बेहतर वित्तीय लाभ की वजह से इस धान को उगाने वाले किसानों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सिद्धार्थनगर जिले में साल 2018 में जहां सिर्फ 2915 किसान कालानमक धान की खेती करते थे। वहीं, 2024 तक यह संख्या बढ़कर 23000 पहुंच गई है। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर में 2018 से 2025 के दौरान इसका उत्पादन 5 गुना से अधिक बढ़ा है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली मदद के बारे में जानिए

कालानमक चावल की खेती करने वाले किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग से जुड़ी मदद दी जा रही है। पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कालानमक प्रसंस्करण और मिलिंग यूनिट्स बनाने पर 35 फीसदी (अधिकतम ₹10 लाख) तक क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी दी जाती है।

इसके अलावा सरकार कालानमक महोत्सव का आयोजन कर इस चावल के ब्रांड का प्रचार-प्रसार कर रही है। स्थानीय किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिद्धार्थनगर में ओडीओपी योजना के तहत एक सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कालानमक चावल के प्रचार, उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए विशेष प्रोजेक्ट फंडिंग भी निर्धारित की है।

6 नई उन्नत किस्में विकसित, उत्पादकता हुई लगभग दोगुनी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली कालानमक चावल की नई किस्मों के विकास और पारंपरिक किस्मों के संरक्षण में लगी हुई है। पारंपरिक किस्मों के अलावा कालानमक की छह नई और उन्नत किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें कालानमक KN3, बौना कालानमक 101, बौना कालानमक 102, कालानमक किरण, पूसा नरेंद्र कालानमक 1 और पूसा सीआरडी कालानमक 2 शामिल हैं।

Clipboard14HJL

नई बौनी और अधिक उपज देने वाली ये किस्में बेहद असरदार साबित हो रही हैं। जहां पारंपरिक किस्मों की औसत उपज 2.5 टन प्रति हेक्टेयर होती है, वहीं इन नई किस्मों की औसत उपज 4.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलती है। बीज कार्यक्रम के तहत पिछले 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण कालानमक बीज का उत्पादन कर किसानों को बांटे गए हैं। हर साल 15-20 क्विंटल ब्रीडर बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है।

‘बुद्ध राइस’ के नाम से वैश्विक पहचान, सिंगापुर से नेपाल तक निर्यात

सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के माध्यम से कालानमक चावल के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है। APEDA क्षेत्रीय किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में निर्यात शिपमेंट की सुविधा प्रदान कर रहा है। जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बौद्ध बहुल देशों के हाई प्राइज मार्केट को टारगेट करने के लिए कालानमक चावल को बुद्ध राइस (Buddha Rice) के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें- El Nino impact: मजबूत हो रहा अल नीनो! अगले 2 हफ्तों में मानसून को लेकर सामने आई टेंशन वाली बात, इन चीजों को लेकर रिस्क बढ़ा

El Nino impact: मजबूत हो रहा अल नीनो! अगले 2 हफ्तों में मानसून को लेकर सामने आई टेंशन वाली बात, इन चीजों को लेकर रिस्क बढ़ा

Monsoon & El Nino update: भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मौसम विभाग (IMD) के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, मजबूत हो रहे अल नीनो (El Nino) के असर की वजह से अगले दो हफ्तों के दौरान देश के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में औसतन से कम बारिश होने की संभावना है। ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून में आने वाली इस सुस्ती और शुष्क मौसम के लंबे खिंचने से हाल ही में बोई गई कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों (दलहन) की फसलों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

मानसून में कमी से सिंचाई और कृषि आजीविका पर बड़ा असर

भारत में वार्षिक वर्षा का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसूनी बारिश से ही आता है। ये देश के महत्वपूर्ण जल स्रोतों को रीचार्ज करने के लिए बेहद जरूरी है। भारत में कृषि भूमि का लगभग आधा हिस्सा आज भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है और देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है।

न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगले दो हफ्तों के दौरान देश के कुछ पूर्वी और उत्तरी राज्यों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसदौरान देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में बारिश की कमी काफी महत्वपूर्ण या गंभीर हो सकती है।

1 जून से अब तक 12 प्रतिशत कम हुई बारिश और बढ़ा तापमान का खतरा

चालू मानसून सीजन में 1 जून से लेकर अब तक भारत में औसत से 12 फीसदी कम बारिश हुई है। देश के कुछ राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक है। उदाहरण के लिए दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी का आंकड़ा 34 फीसदी तक पहुंच गया है।

मौसम विभाग के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि मजबूत होते अल नीनो की वजह से आने वाले हफ्तों में बारिश और कम होगी। इससे महीने के अंत तक बारिश की कमी का यह अंतर और अधिक बढ़ सकता है। इसके साथ ही आने वाले सप्ताहों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होने और इसके सामान्य से ऊपर बने रहने की संभावना जताई गई है।

नई बोई गई सोयाबीन, कपास और मक्का की फसलों पर मंडराया जोखिम

जुलाई महीने में हुई सामान्य के करीब बारिश की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ गई थी। इसके बाद किसानों ने सोयाबीन, कपास, मक्का, दालें और धान जैसी खरीफ की फसलों की बुवाई में तेजी दिखाई थी। मुंबई बेस्ड एक ग्लोबल ट्रेड हाउस के डीलर के मुताबिक नई बोई गई इन फसलों की जड़ें अभी तक मिट्टी में गहराई तक नहीं पहुंची हैं। ऐसी स्थिति में, बारिश के बिना लंबा शुष्क दौर चलने से ये फसलें बेहद संवेदनशील हो जाती हैं और इन्हें भारी नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ जाता है।

ये भी पढ़ें- कल का मौसम: 12 अगस्त को ओडिशा-बंगाल-महाराष्ट्र, राजस्थान संग इन 20 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट! यहां होगी मूसलाधार

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अगस्त तक किसानों ने 96.8 मिलियन (9.68 करोड़) हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई कर ली थी। ये एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में करीब 2 प्रतिशत कम है। अब अल नीनो के मजबूत होने और मानसून के कमजोर पड़ने से इन फसलों के उत्पादन को लेकर जोखिम काफी बढ़ गया है।

VB-G RAM G के तहत रोजगार में 50 फीसदी गिरावट, जानिए क्या है इसकी वजह

ग्रामीण इलाकों में रोजगार की नई गारंटी स्कीम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM-G) के तहत रोजगार में गिरावट आई है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई, 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी-राम-जी स्कीम लागू की है। इस स्कीम के फंडिंग सिस्टम में भी बदलाव किया गया है।

इन वजहों से घटा स्कीम में रोजगार

VB-G RAM-G में रोजगार घटने की कई वजहें हैं। मानसून के सीजन में इस स्कीम के तहत होने वाले काम रुक जाते हैं। मनरेगा की जगह नई योजना लागू करने के दौरान कुछ दिक्कतें आई होंगी। इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से मजदूरों के पलायन की रफ्तार सुस्त हुई है। केंद्र सरकार के दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला

राज्य सरकार के एक सूत्र ने कहा कि राज्यों की खराब वित्तीय हालत भी इस स्कीम में रोजगार में कमी की वजह हो सकती है। नई स्कीम में फंडिंग का तरीका बदला है। ज्यादातर राज्यों को इस स्कीम पर आने वाले खर्च का 40 फीसदी बोझ उठाना पड़ता है। बाकी 60 फीसदी बोझ केंद्र सरकार उठाती है।

ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब

एक राज्य सरकार के प्रतिनिधि ने मनीकंट्रोल को बताया कि ज्यादातर राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब है। कई राज्यों ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिन पर काफी ज्यादा पैसे खर्च होते हैं। इस वजह से उनके पास VB-G RAM-G पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं बचते हैं। आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है।

VB-G RAM-G में 125 दिन रोजगार की गारंटी

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों का कंसॉलिडेटेड फिस्कल डेफिसिट बढ़कर FY25 में जीडीपी का 3.3 फीसदी हो गया। 2021-22 से 2023-24 के बीच यह जीडीपी के 3 फीसदी से कम था। VB-G RAM-G में रोजगार की गारंटी वाले दिन की संख्या बढ़ाकर 125 दिन कर दी दी गई है। मनरेगा में यह 100 दिन थी।

बुआई और कटाई के पीक सीजन में काम रुक जाता है

गारंटी वाले रोजगार के दिन की संख्या बढ़ाने से भी राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। इस स्कीम में बुआई और कटाई के पीक सीजन में कुल 60 दिन तक काम रुक जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कृषि कार्य के लिए मजदूरों की कमी नहीं हो।

यह भी पढ़ें: जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी घटी, नोएडा – गाजियाबाद ने मारी बाजी! NCR में बदल रही है आर्थिक ताकत की तस्वीर

जुलाई 2025 के मुकाबले रोजगार में 50 फीसदी कमी

केंद्र सरकार के VB-G RAM-G डैशबोर्ड (10 अगस्त को अपडेटेड) के मुताबिक, जुलाई 2026 में पर्सन-डेज गारंटीड की संख्या जुलाई 2025 में मनरेगा के मुकाबले 50 फीसदी से ज्यादा कम रही। केंद्र सरकार के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पर्सन-डेज की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव है।

Jharkhand Bandh Today: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में BJP का राज्यव्यापी बंद, छात्रों ने की CBI जांच की मांग

Jharkhand Bandh Today: रांची में JPSC और JSSC के उम्मीदवारों के मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में झारखंड BJP ने मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया है कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल से सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह बंद सुबह 8 बजे से आधी रात तक रहेगा।

आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बंद छात्रों के साथ हुए “अन्याय और अत्याचार” के विरोध में किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को नौकरी से जुड़ी कथित धांधली और परीक्षा के पेपर पहले ही लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।

साहू ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले और दूसरी चीजें चलाई गईं, जिससे सैंकड़ों छात्र घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे और राज्य में कामकाज ठप कर देंगे।

वहीं, झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने के दौरान उन्हें और अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया और सवाल उठाया कि सरकार ने कथित अनियमितताओं की CBI जांच के आदेश क्यों नहीं दिए।

मरांडी ने कहा कि छात्र 15 दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे और तर्क दिया कि यह आंदोलन सोमवार की झड़प से कहीं ज्यादा समय से चल रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय सरकार ने उन पर लाठीचार्ज किया।

छात्रों का विधानसभा की ओर मार्च

यह टकराव तब हुआ जब JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में उम्मीदवार ‘विधानसभा घेराव’ मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को झारखंड विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी के हजारों उम्मीदवार विधानसभा की ओर मार्च करते हुए कई बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए, जहां मानसून सत्र चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महिलाओं समेत कई छात्र घायल हुए हैं।

हालांकि, रांची के SSP राकेश रंजन ने कहा कि पत्थरबाजी में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने वालों की पहचान के लिए CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

बता दें कि जब प्रदर्शनकारी विधानसभा से करीब 200 मीटर दूर पहुंचे, तो जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आखिरी बैरिकेड भी पार कर लिया और विधानसभा के गेट नंबर 1 तक पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने एक बार फिर लाठीचार्ज किया।

छात्रों की मांग: CBI जांच हो और परीक्षा रद्द की जाए

गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र 25 जुलाई से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगों में CBI जांच, JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कामकाज में व्यापक सुधार शामिल हैं।

वे 14वीं झारखंड PSC सिविल सेवा परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही, वे CBI या राज्य के बाहर के रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग भी कर रहे हैं।

इस बीच, JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो इस मुद्दे पर नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे, खराब सेहत के बावजूद सोमवार को एम्बुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए।

बाद में, ब्लड शुगर लेवल में “भारी गिरावट” आने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई है।

बता दें कि प्रोटेस्ट के दौरान महतो ने स्ट्रेचर पर खड़े होकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग की आलोचना की।

हेमंत सोरेन ने बातचीत की अपील की

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विरोध कर रहे छात्रों से अपील की कि वे बातचीत और भरोसे के जरिए अपनी शिकायतों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी चिंताएं जाहिर करने का लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर “पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता” के साथ विचार करेगी।

सोरेन ने विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी राजनीतिक जाल में न फंसें।

उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी, टेक्नोलॉजी-आधारित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की इच्छुक है।

बता दें कि राज्य सरकार 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 व 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई है। उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिलने के बाद सरकार ED जांच के लिए भी सहमत हो गई है।

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर कुमार ने कहा कि सरकार इसे रद्द करने का आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि यह परीक्षा अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी।

सरकार ने CID जांच की निगरानी के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इसके अलावा JPSC और JSSC की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इन सुधारों के लिए IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर से सुझाव लिए जाएंगे।

ED की जांच और CID की गिरफ्तारी से विवाद और बढ़ा

सोमवार को विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गया, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी।

वहीं, झारखंड CID ने कथित अनियमितताओं के मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में CID की ओर से गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

इससे पहले जांच एजेंसी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कुल 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

यह भी पढ़ें: कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी? जिन्हें बनाया गया देश का नया उच्च शिक्षा सचिव, जानें रातों-रात क्यों लिया गया ये फैसला

Weather Alert: अगले सात दिन नहीं थमेगी बारिश! दिल्ली-UP समेत 20+ राज्यों में अलर्ट, इन दो राज्यों में भारी बारिश का खतरा

देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले सात दिनों यानी 10 से 16 अगस्त तक कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। खास तौर पर पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 10 अगस्त को मौसम ज्यादा खराब रहने की आशंका है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश का खतरा

IMD के मुताबिक, 10 अगस्त को पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश भी हो सकती है। इसके अलावा गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पहले ही तेज बारिश हो चुकी है। बीते 24 घंटे में पश्चिमी मध्य प्रदेश के श्यामपुर में 21 सेंटीमीटर, भोपाल के नवीबाग में 20 सेंटीमीटर और राजगढ़ के सारंगपुर में 19 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्य प्रदेश के मोहगांव में 19 सेंटीमीटर और सिहोरा में 16 सेंटीमीटर बारिश हुई।

11 अगस्त को भी कई राज्यों में बारिश

11 अगस्त को पूर्वी राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अनुमान है। कई राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।

12 अगस्त से ओडिशा पर ज्यादा असर

12 अगस्त को ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। 13 और 14 अगस्त को भी ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है।

15 और 16 अगस्त तक बारिश से राहत नहीं

IMD के सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी बारिश की संभावना है। 16 अगस्त को भी अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है।

दिल्ली-UP समेत इन राज्यों में भी बारिश

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 10-11 अगस्त और 13 अगस्त को कई जगहों पर बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 अगस्त को बारिश का दौर बढ़ सकता है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 और 14-15 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 से 15 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

फ्लैश फ्लड का भी खतरा

तेज बारिश के कारण कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। 11 अगस्त की सुबह तक पूर्वी राजस्थान के बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश के अगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी जिलों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड का जोखिम बताया गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन तथा उत्तराखंड के कई जिलों में भी कम से मध्यम फ्लैश फ्लड का खतरा है। निचले इलाकों में जलभराव और पानी भरने की स्थिति बन सकती है।

बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली का खतरा

कई राज्यों में बारिश के साथ आंधी, बिजली और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। 10 अगस्त को कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं अंडमान-निकोबार में कुछ जगहों पर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के साथ थंडरस्क्वॉल की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज बारिश और बिजली चमकने के समय खुले इलाकों में जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। भारी बारिश के कारण जलभराव, बाढ़, भूस्खलन, सड़क और रेल यातायात में परेशानी जैसी स्थिति भी बन सकती है।

कल का मौसम: दिल्ली-NCR समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, हिमाचल में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी, IMD ने बताया मौसम का हाल

Weather Update 11 August: देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। दिल्ली-NCR, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, उत्तराखंड में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR की बात करें तो यहां अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की बारिश होने की आशंका है। हालांकि, बारिश के बावजूद उमस से राहत पूरी तरह मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।

दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में, 13, 14 और 15 अगस्त को कई इलाकों में हल्की से बहुत हल्की बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। 14 अगस्त को पश्चिमी हवाएं भी चल सकती हैं। जबकि 15 अगस्त को उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव रहने का अनुमान है।

IMD के मुताबिक, पूरे सप्ताह दिल्ली में मौसम मुख्य रूप से बादल छाए रहने वाला रहेगा। इस दौरान बीच-बीच में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, इन बारिश की बौछारों से उमस में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले सात दिनों के दौरान दिल्ली के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ऐसे में बारिश के बीच भी गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है।

उत्तराखंड में अधिकांश जगह बारिश और गरज-चमक

उत्तराखंड में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता लगातार बनी रह सकती है। वहीं, मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में बारिश कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रहने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर फिसलन, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

तमिलनाडु में इन इलाकों में होगी मूसलाधार बारिश

तमिलनाडु के मौसम पर उत्तर तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र के ऊपर बने वायुमंडलीय परिसंचरण का असर पड़ने की आशंका है। 12 और 13 अगस्त को पश्चिमी घाट से लगे इलाकों और उत्तरी तटीय जिलों में बारिश की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय रह सकती हैं। इन क्षेत्रों में मध्यम बारिश होने की संभावना है। नमी से भरी हवाओं और मौजूदा वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बारिश वाले बादल बनने के लिए अनुकूल स्थिति रह सकती है।

तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में भी कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश की तीव्रता अलग-अलग इलाकों में अलग रह सकता है। दूसरी ओर, राज्य के उत्तरी आंतरिक हिस्सों में बारिश के बावजूद गर्मी बनी रह सकती है। यहां 13 अगस्त तक अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना है।

राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

राजस्थान में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश का दौर तेज रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। राज्य में बारिश की गतिविधियां 13 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद पश्चिमी राजस्थान में 14 अगस्त से मौसम में सुधार शुरू हो सकता है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में 15 अगस्त से कमी आने का अनुमान है।

उत्तर-पूर्वी राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से 11 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी होने की संभावना है। इसके बाद 13 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। 14 अगस्त से पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने की संभावना है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधि 15 अगस्त से कमजोर पड़ सकती है।

हिमाचल प्रदेश में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को राज्य के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। खास तौर पर कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

IMD ने राज्य में बारिश का दौर 15 अगस्त तक जारी रहने का पूर्वानुमान लगाया है। पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदियों-नालों के जलस्तर बढ़ने और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

उत्तर और दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय

IMD के ताजा पूर्वानुमान से साफ है कि देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां फिलहाल सक्रिय बनी हुई हैं। उत्तर भारत में उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश, जबकि दक्षिण भारत में तमिलनाडु के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की आशंका है। वहीं, दिल्ली में लगातार बारिश भले ही तापमान को कुछ हद तक कंट्रोल कर रही हो। लेकिन उमस और अपेक्षाकृत अधिक तापमान के कारण लोगों को पूरी तरह आराम मिलने की उम्मीद नहीं है।

ये भी पढ़ें- Vande Bharat Sleeper Trains: अब 24 की जगह सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर, इस रूट पर ‘वंदे भारत’ स्लीपर ट्रेन की घोषणा