भारत में एक दशक का सबसे असमान मानसून! CRISIL ने चेताया- फसलों की पैदावार, रबी बुआई पर भी खतरा

देश में इस साल मानसून की असमान चाल ने कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट में रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि 2026 में भारत को पिछले एक दशक के सबसे अधिक असमान और विषमतापूर्ण मानसून का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि मानसूनी बारिश में 14 प्रतिशत की कमी के बावजूद किसानों ने बुआई का रकबा घटने नहीं दिया लेकिन अब असली खतरा फसलों की पैदावार और आगामी रबी (सर्दियों की) फसल की बुआई पर मंडरा रहा है।

10 साल में सबसे असमान मानसून: बारिश में 14% की भारी कमी

क्रिसिल के रेनफॉल्स डिस्टॉर्शन इंडेक्स (RDI) के मुताबिक इस साल यह इंडेक्स 14.4 पर पहुंच गया है। ये बीते 10 वर्षों में मानसून की सबसे असमान चाल की ओर इशारा कर रहा है। 7 सितंबर तक देश में सामान्य के मुकाबले बारिश की कमी 14 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा सितंबर महीने में भी सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है।

देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश की असमानता बेहद गंभीर रही है। दक्षिण प्रायद्वीप में सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसी तरह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश देखने को मिली है।

बुआई का रकबा तो बच गया पर कैसे?

रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश की भारी कमी और देरी के बावजूद किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों, रुक-रुक कर हुई बारिश और राज्य सरकारों की सलाह के मुताबिक अपनी बुआई योजनाओं में बदलाव किया है। 4 सितंबर तक कुल बुआई का स्तर सामान्य रकबे के 98 प्रतिशत और पिछले साल के स्तर के 96 प्रतिशत पर पहुंच गया है। चावल, तुअर (अरहर), मक्का, मूंगफली और गन्ना की बुआई सामान्य स्तर को पार कर चुकी है। कपास (कॉटन), बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द और सोयाबीन की बुआई का प्रदर्शन अभी भी कमजोर बना हुआ है।

जून के महीने में मूंगफली की बुआई पिछले साल से 42 प्रतिशत पीछे चल रही थी। लेकिन जुलाई और अगस्त में गुजरात में बारिश की स्थिति में हुए सुधार से इसका रकबा सुधरा और अंततः पिछले साल के आंकड़े को पार कर गया।

अब असली खतरा: फसलों की पैदावार पर संकट

क्रिसिल का कहना है कि फिलहाल कमजोर बारिश से पैदा होने वाले कृषि संकट की पहली कड़ी यानी कम बुआई तो टल गई है लेकिन अब सारा खतरा फसलों की पैदावार पर आ गया है। सीमित सिंचाई सुविधाओं वाली फसलें बारिश न होने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। क्रिसिल के डेफिसिएंट रेनफॉल इम्पैक्ट पैरामीटर (DRIP) ने कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंगफली और सोयाबीन में बड़े जोखिम की ओर इशारा किया है।

इसे गुजरात की ही उदाहरण से समझा जा सकता है। यहां मूंगफली की बुआई तो अच्छी हुई है लेकिन 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक इसके कुल कृषि क्षेत्र का केवल 49.3 प्रतिशत हिस्सा ही सिंचित है। अगस्त के अंत और सितंबर में बारिश सुस्त पड़ने से इस फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है। क्रिसिल के मुताबिक खरीफ फसलों से होने वाली किसानों की आय पर मध्यम असर पड़ेगा। हालांकि ग्रामीण मांग पर इसका तुरंत बड़ा झटका लगने की संभावना कम है।

क्या झटके को झेल पाएगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था?

रिपोर्ट के मुताबिक बीते वर्षों की तुलना में ग्रामीण भारत की स्थिति अब अधिक मजबूत हुई है। ग्रामीण परिवार अब सिर्फ फसल की आय पर निर्भर नहीं हैं। पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी अब कृषि व संबद्ध क्षेत्र के कुल उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं। शुद्ध बोए गए क्षेत्र में सिंचाई का दायरा 2015-16 के 48.8 प्रतिशत के स्तर से बढ़कर 2024-25 में करीब 60 फीसदी हो गया है।

पिछले 4 वर्षों का बेहतर मानसून, अच्छा उत्पादन, कम महंगाई और सरकारी सहायता योजनाओं से ग्रामीणों की वित्तीय स्थिति सुधरी है। पीएम-किसानके तहत मिलने वाले 6000 रुपये, 17 राज्यों में जारी कैश-ट्रांसफर योजनाएं और खाद्यान्न सहायता इस दबाव को कम करने में मदद करेंगे।

रबी की फसल के लिए सबसे बड़ी चिंता क्यों?

दक्षिण-पश्चिम मानसून न सिर्फ खरीफ की फसल तय करता है, बल्कि यह मिट्टी की नमी, भूजल स्तर और जलाशयों को भरता है जो रबी (गेहूं, सरसों आदि) की बुआई के लिए बेहद जरूरी हैं। अब इससे जुड़े शुरुआती आंकड़े चिंता को और बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 7 सितंबर तक देश के करीब 45 फीसदी जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है जबकि पिछले चार सालों में यह आंकड़ा 20-30 फीसदी के बीच था। अगस्त 1901 के बाद से इस साल का अगस्त महीना सबसे गर्म दर्ज किया गया और आईएमडी ने सितंबर में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान जताया है।

आईआईटी गांधीनगर के कंबाइंड ड्रॉट इंडेक्स के मुताबिक देश में सूखा प्रभावित क्षेत्र जुलाई के अंत में 35.1 प्रतिशत से बढ़कर 2 सितंबर तक 42 प्रतिशत पर पहुंच गया है। 3 सितंबर तक देश के 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण लॉन्ग-पीरियड एवरेज से 3 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी कम था। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे प्रमुख रबी उत्पादक राज्यों में जलाशयों का स्तर विशेष रूप से कम है।

सितंबर महीना तय करेगा दिशा

रबी की फसल देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा होती है। इसमें अकेले गेहूं का योगदान रबी उत्पादन में करीब 70 फीसदी है। क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि अगर सितंबर में भी बारिश की कमी बनी रहती है और मौसम की यह विषमता सर्दियों के मौसम में फैलती है तो इसका दबाव ग्रामीण मांग, खाद्य पदार्थों की कीमतों और देश की कुल कृषि विकास दर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

कल का मौसम: 9 सितंबर को बिहार-झारखंड संग 9 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने का खतरा! IMD ने दी ये चेतावनी

IMD Heavy Rain Alert: देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसूनी बारिश अपना पूरा रंग दिखा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9 सितंबरके मौसम को लेकर ताजा चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत देश के 9 प्रमुख राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। इसके साथ ही कई तटीय व मैदानी राज्यों में तेज तूफानी हवाएं चलने और बादलों की कड़क के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत 9 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 सितंबर को पूर्वी भारत से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। आईएमडी के मुताबिक 9 सितंबर को बिहार, झारखंड, ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश की आशंका है।

बिजली कड़कने और 30 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज हवाओं और बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है।

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बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और उप-हिमालयी व गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 से 40 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने का अनुमान है। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में बादलों की जोरदार गर्जना के साथ बिजली गिरने का खतरा जताया गया है।

आंध्र प्रदेश में तेज सतही हवाएं, केरल में उमस और गर्मी

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में दिनभर तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में 9 सितंबर को मौसम काफी गर्म और अत्यधिक उमस भरा बना रहेगा।

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इसके अलावा मौसम विभाग ने अरब सागर के तटीय और खुले समुद्री क्षेत्रों में मौसम का मिजाज काफी खराब रहने की आशंका जताई गई है। सोमालिया और ओमान के तटवर्ती क्षेत्रों तथा उससे सटे पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएंचल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। IMD ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी है।

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी! फिर बन रहा नया वेदर सिस्टम, MP, छत्तीसगढ़, यूपी समेत 10 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश भर में मानसूनी बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 सितंबर को जारी ताजा वेदर बुलेटिन में एक नए और ताकतवर वेदर सिस्टम के एक्टिव होने की बड़ी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर के आसपास पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से सटे उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तटों पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की पूरी संभावना है।

इस नए सिस्टम और देश के अलग-अलग हिस्सों में एक्टिव साइक्लॉनिक सर्कुलेशन की वजह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र समेत 10 से अधिक राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है।

बीते 24 घंटों का हाल: अंडमान और असम में रिकॉर्ड 20 सेमी तक बारिश

बीते 24 घंटों में देखें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और असम में अलग-अलग जगहों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मिजोरम में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

एक्टिव वेदर सिस्टम: उत्तर प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक बने कई सिस्टम

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर है, जबकि पूर्वी सिरा सामान्य स्थिति के करीब बना हुआ है। निचले ट्रोपोस्फीयर में पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के इस सिस्टम तक एक ट्रफ लाइन गुजर रही है।

दक्षिण तेलंगाना से मन्नार की खाड़ी तक और उत्तरी हरियाणा के ऊपर भी अलग-अलग ट्रोपोस्फेरिक स्तरों पर साइक्लॉनिक सर्कुलेशन एक्टिव हैं। इन मौसमी प्रणालियों के बीच 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया लो-प्रेशर सिस्टम मानसूनी हवाओं को और अधिक बल देगा।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 10 से 14 सितंबर तक भारी बारिश

IMD के मुताबिक मध्य भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश में काफी तेजी देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 10 से 14 सितंबर तक अधिकांश जगहों पर बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ झमाझम बारिश होगी। इस दौरान छत्तीसगढ़ में 10 से 14 सितंबर के बीच और पूर्वी मध्य प्रदेश में 12 व 13 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 से 14 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी, जिसमें 12 और 13 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 12 सितंबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है जबकि 8 से 14 सितंबर तक छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा में 10 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वी भारत के राज्यों में 8 से 14 सितंबर के दौरान भारी बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। ओडिशा में 10 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद 11 और 12 सितंबर को भी भारी बारिश जारी रहेगी। 8 सितंबर को ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में तेज आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है। बिहार में 8 से 10 सितंबर और 14 सितंबर को भारी बारिश दर्ज हो सकती है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 8 सितंबर को और फिर 11 से 13 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड में 9 से 11 सितंबर तक और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 8 और 12 से 14 सितंबर के बीच मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 12 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है जबकि 8, 9, 11, 13 और 14 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 8 से 12 सितंबर के बीच लगातार भारी बारिश और बिजली गिरने का सिलसिला बना रहेगा।

उत्तर-पश्चिम भारत: उत्तराखंड में लगातार बारिश, मैदानी इलाकों में छिटपुट बौछारें

उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तराखंड में 10 से 14 सितंबर के दौरान अधिकांश जगहों पर बारिश होगी और इस पूरे अंतराल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बाकी हिस्सों में 14 सितंबर तक छिटपुट स्थानों पर बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने के साथ हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी।

पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण, गुजरात और तटीय आंध्र प्रदेश में बिगड़ेगा मौसम

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 8 से 14 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहेगी जहां 12 और 13 सितंबर को भारी बारिश होने का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र में 12 और 13 सितंबर को और मध्य महाराष्ट्र में 13 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बंगाल की खाड़ी के नए सिस्टम का सीधा असर दिखेगा।

तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11 से 14 सितंबर के बीच तथा तेलंगाना में 11 से 13 सितंबर के बीच भारी बारिश होगी। केरल, माहे और तटीय कर्नाटक में 10 से 12 सितंबर के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु में 8 से 12 सितंबर तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही और झोंकेदार हवाएं चलेंगी।

गर्मी व उमस और मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

मौसम विभाग ने 8 और 9 सितंबर को केरल व माहे में और 8 से 10 सितंबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश व यनम में मौसम के बेहद गर्म और उमस भरा रहने की संभावना जताई है। समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए IMD ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है।

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सोमालिया तट के पास और अरब सागर के हिस्सों में 13 सितंबर तक तथा ओमान तट के पास 11 सितंबर तक तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। वहीं अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के आसपास 10 से 13 सितंबर के दौरान स्थिति खराब रहेगी, इसलिए मछुआरों को इन क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

Delhi Power Cut 9 Sept 2026: कल दिल्ली के कई इलाकों में बिजली रहेगी गुल, देखें पूरी लिस्ट

Delhi Power Cut 9 Sept 2026: दिल्ली के कई इलाकों में कल यानी बुधवार, 9 सितंबर को बिजली कटौती रहेगी। बिजली विभाग के अनुसार, यह शटडाउन ग्रिड को अपग्रेड करने और मानसून के दौरान जरूरी मेंटेनेंस के लिए किया जा रहा है। बता दें कि बारिश और उमस के मौसम में बिजली नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव रहता है। ऐसे में पहले से किए जा रहे इन कामों का मकसद अचानक होने वाली बिजली की खराबी और बड़े फॉल्ट से बचना है।

अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं, तो अपने इलाके में बिजली कटौती का समय पहले से चेक कर लें, ताकि जरूरी काम या ऑफिस के काम में अचानक रुकावट न आए। इसके अलावा, दिन की प्लानिंग पहले से कर लेने पर बिजली कटौती के दौरान होने वाली परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बता दें कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बिजली कटौती डिस्कॉम कंपनी BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) के द्वारा की जाएगी। संबंधित डिस्कॉम की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जाकर आप अपने इलाके में बिजली कटौती का समय चेक कर सकते हैं।

9 सितंबर को दिल्ली में बिजली कटौती से प्रभावित इलाके और समय:

मोहन गार्डन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 13:00 बजे तक ब्लॉक D मनसा राम पार्क उत्तम नगर, में बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी।

मोहन गार्डन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक ब्लॉक M जैलदार एन्क्लेव हस्तसाल, में पावर कट की समस्या रहेगी।

अलकनंदा: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 14:00 बजे तक L 1-ब्लॉक लिग कालका जी, में बिजली आपूर्ति बंद हो सकती है।

खानपुर: सुबह 11:09 बजे से 13:09 बजे तक ब्लॉक डी विश्वकर्मा कॉलोनी पुलपेह्लादपुर, में बिजली कट की समस्या रह सकती है।

खानपुर: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 14:00 बजे तक ब्लॉक G-1 तालीमाबाद संगम विहार, खानपुर एक्सटेंशन संगम विहार में बिजली की समस्या हो सकती है।

साकेत: दोपहर 12:00 बजे से शाम 15:00 बजे तक मधुमक्खी सूत्री हरिजन बस्ती सैनिक फार्म, में पावर कट की जा सकती है।

पंजाबी बाग: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक पंजाबी बाग नंबर-2 में पावर कट हो सकता है।

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 14:00 बजे तक ब्लॉक B- तैमूर नगर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, में बिजली सप्लाई नहीं होने से लोगों को समस्या झेलनी पड़ सकती है।

मुंडका: सुबह 13:00 बजे से शाम 16:00 बजे तक जय विहार कमरुद्दीन नगर, में बिजली कनेक्शन में कुछ देर के लिए रुकावट आ सकती है।

मुंडका: सुबह 08:09 बजे से 09:39 बजे तक मुंडका एक्सटेंशन, मुंडका में बिजली कुछ घंटे के लिए प्रभावित रहेगी।

सरिता विहार: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 13:09 बजे तक मोहन बाबा नगर ताजपुर पहाड़ी गांव बदरपुर, में मेंटेनेंस कार्य के कारण बिजली सप्लाई बंद कर सकती है।

टैगोर गार्डन: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 13:09 बजे तक ख्याला विष्णु गार्डन, में पावर कट रहेगा।

छतरपुर: सुबह 11:00 बजे से दोपहर दोपहर 12:00 बजे तक डेरा भाटी में लोगों को कुछ घंटे पावर कट की समस्या झेलनी पड़ सकती है।

छतरपुर: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक असोला, असोला वन्य जीवन अभयारण्य असोला, में लाइट की समस्या हो सकती है।

छतरपुर: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 13:00 बजे तक सुल्तानपुर, में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

छतरपुर: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 14:00 बजे तक ब्लॉक A1 छतरपुर गांव छतरपुर, में बिजली आपूर्ति की समस्या हो सकती है।

 

नजफगढ़: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 13:00 बजे तक प्रेम नगर नजफगढ़, ब्लॉक बी नंदा एन्क्लेव न्यू गोपाल नगर, झरोदा कलां, सुल्तान गार्डन, शिव एन्क्लेव, न्यू हीरा पार्क, सैनिक निकेतन, आनंद विहार नंगली सकरावती, अर्जुन पार्क नंगली सकरावती, मेसर्स सुरशा किसान ट्रस्ट फीडर नंबर 1, झटीकरा, बदुसराय, पपरावत गांव, शिकारपुर गांव, पिंड वाला खुर्द गांव, प्रेम नगर पपरावत गांव, दौलतपुर गांव, असालतपुर खावद, कांगनहेड़ी गांव,रेवला खानपुर गांव, में बिजली आपूर्ति बंद रहेगी।

पालम: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक पालम एक्सटेंशन, ब्लॉक G राज नगर 2 राज नगर, में पावन कनेक्शन कट रहेगा।

जनकपुरी: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 13:09 बजे तक ब्लॉक VB वीरेंद्र नगर जनक पुरी, में बिजली कटेगी।

जनकपुरी: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 13:00 बजे तक पॉकेट जी हरि नगर, जनक पुरी में ट्रांसफर रखरखाव के कारण बिजली कट रहेगी।

नांगलोई: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 14:09 बजे तक ब्लॉक A-3 मियांवाली नगर पश्चिम विहार, में पावर कनेक्शन बाधित हो सकता है।

नांगलोई: सुबह 11:00 बेज से दोपहर 14:00 बजे तक उन्नयन जय विहार PH-1, PH-3, ब्लॉक D दिल्ली राज्य औद्योगिक विकास निगम नांगलोई, ब्लॉक ए ज्वालापुरी पश्चिम विहार, में मेंटेनेंस कार्य के चलते बिजली आने में रुकावट आ सकती है।

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नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का ‘सदी का बांध’ बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?

नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का 'सदी का बांध' बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?

China Brahmaputra Dam

China Brahmaputra Dam: तिब्बत के 'ग्रेट बैंड' (Great Bend) क्षेत्र में यारलुंग ज़ंगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले प्रवाह पर चीन द्वारा 60 गीगावाट (GW) क्षमता की 'यारलुंग ज़ंगबो लोअर रीचेस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट' का निर्माण भारत की सामरिक और जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

14 लाख करोड़ (1.2 ट्रिलियन युआन) की लागत से बनने वाली यह परियोजना न केवल दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत ढांचा (विश्व प्रसिद्ध 'थ्री गॉर्जियस डैम' से तीन गुना बड़ा) है, बल्कि यह सीधे भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम की जीवन रेखा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
परियोजना की पूरी इनसाइड स्टोरी

 

China Brahmaputra Dam

 

 'ग्रेट बैंड' (बड़ा मोड़) पर इंजीनियरिंग की बिसात

यह विशाल बांध ब्रह्मपुत्र नदी के उस हिस्से पर बनाया जा रहा है जिसे “ग्रेट बैंड” (Great Bend) कहा जाता है। यहाँ से नदी एक तीखा मोड़ लेते हुए तेजी से भारत के अरुणाचल प्रदेश की ओर गिरती है।

  • रन-ऑफ-द-रिवर का दावा : यद्यपि चीन इसे 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना बता रहा है, लेकिन इसमें न्यिंगची के ऊपरी क्षेत्र मेनलिंग में एक विशाल जलाशय (Reservoir) का निर्माण शामिल है।
  • 40 किमी लंबी सुरंग : नदी के पानी को लगभग 40 किलोमीटर लंबी विशाल सुरंग के माध्यम से मोड़कर 5 पावरहाउस संचालित किए जाएंगे, जिसके बाद पानी पुनः निचले प्रवाह में मिल जाएगा।
  • जांगमू बांध का अनुभव : चीन पहले ही मध्य प्रवाह पर जांगमू बांध बना चुका है, जिससे तिब्बत की 26% बिजली मांग पूरी होती है।

भारत की 3 मुख्य चिंताएं और सामरिक कोण

चीन की इस ज़िद से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और असम) के लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है:

  1. जल प्रवाह और जलाशय का नियंत्रण : ऊपरी इलाके मेनलिंग में जलाशय बनने से चीन के पास ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने या अचानक छोड़ने की चाबी आ जाएगी। सूखे के मौसम में पानी रोका जा सकता है और मानसून में अचानक छोड़कर निचले इलाकों में कृत्रिम बाढ़ लाई जा सकती है।
  2. पारिस्थितिकी व भूकंपीय जोखिम: यह पूरा हिमालयी बेल्ट अत्यधिक संवेदनशील टेकटोनिक प्लेट्स (Seismic Zone V) पर स्थित है। हाल ही में नेपाल-चीन सीमा पर आए हिमस्खलन इस बात का प्रमाण हैं। इतने बड़े पैमाने पर टनलिंग और निर्माण से भूस्खलन व बांध टूटने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
  3. डेटा साझाकरण में अनिश्चितता: यद्यपि दोनों देशों के बीच 'विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र' (Expert-Level Mechanism) मौजूद है, लेकिन सीमा तनाव के दौरान चीन द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा (जल-विज्ञान आंकड़े) देना निलंबित कर दिया जाता है, जिससे भारत समय पर बाढ़ की अग्रिम चेतावनी जारी करने में असमर्थ हो जाता है।

भारत की जल सुरक्षा पर मुख्य प्रभाव (Water Security Impact)

(A) 'वाटर वेपन' (Water Weapon) या कृत्रिम नियंत्रण का खतरा
यद्यपि बीजिंग इसे पर्यावरण-अनुकूल 'रन-ऑफ-द-रिवर' (Run-of-the-river) परियोजना बताता है, लेकिन इसमें तिब्बत के न्यिंगची स्थित मेनलिंग में एक विशाल जलाशय (Reservoir) और 40 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल है।

  • सूखे के मौसम में पानी का कम होना : शीत ऋतु या शुष्क मौसम (Lean Season) में चीन यदि जलाशय में पानी रोकता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह 20% से 30% तक घट सकता है, जिससे कृषि, पेयजल और मत्स्य पालन संकट में आ जाएंगे।
  • आकस्मिक डिस्चार्ज और कृत्रिम बाढ़ : मानसून के दौरान चीन द्वारा बिना पूर्व चेतावनी भारी मात्रा में पानी छोड़ने पर असम के मैदानी इलाकों में अचानक विनाशकारी बाढ़ (Flash Floods) आ सकती है।

(B) हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझाकरण में अनिश्चितता
भारत और चीन के बीच जल-विज्ञान संबंधी डेटा (पानी का बहाव और स्तर) साझा करने का समझौता है। लेकिन पूर्व के अनुभवों (जैसे 2017 के डोकलाम विवाद) में देखा गया है कि सीमा पर राजनीतिक या सैन्य तनाव के दौरान चीन अचानक डेटा रोक देता है। विश्वसनीय पूर्व चेतावनी के अभाव में भारत की आपदा प्रबंधन एजेंसियां समय पर कार्रवाई करने में असमर्थ हो जाती हैं।

China Brahmaputra Dam

(A) अरुणाचल प्रदेश : सियांग नदी का बिगड़ता स्वरूप

  • ब्रह्मपुत्र जब अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग (Siang) कहा जाता है।
  • ऊपरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टनलिंग और ब्लास्टिंग के कारण नदी के पानी में अत्यधिक गाद (Silt/Sediment) और मलबे की मात्रा बढ़ जाएगी, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रहेगा और स्थानीय जलीय जीव नष्ट हो जाएंगे।
  • चीन के नियंत्रण से सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर के उतार-चढ़ाव से नदी तटबंधों का कटाव (Soil Erosion) तेज होगा।

(B) असम : ब्रह्मपुत्र घाटी की जैव-विविधता पर प्रहार

  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर खतरा : काजीरंगा का अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र ब्रह्मपुत्र के प्राकृतिक जल चक्र और बाढ़ पर निर्भर है। पानी के अप्राकृतिक प्रवाह से एक-सींग वाले गैंडों और दुर्लभ वनस्पतियों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा।
  • माजुली द्वीप का अस्तित्व संकट में: दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप 'माजुली' (Majuli) का क्षेत्र पहले से ही कटाव के कारण घट रहा है। बांध से होने वाले अनियमित प्रवाह से माजुली का बचा हुआ हिस्सा भी जलमग्न होने या कटने के कगार पर पहुंच सकता है।

पारिस्थितिकीय और भूगर्भीय जोखिम (Ecological & Seismic Hazards)

  1. अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र (Seismic Zone V): 'ग्रेट बैंड' हिमालयन सिंटैक्सिस (Himalayan Syntaxis) पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। यहां 7+ तीव्रता के भूकंप आने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
  2. बांध टूटने (Dam Failure) का भयानक खतरा : यदि भूकंप या लैंडस्लाइड के कारण चीन का यह विशाल बांध या जलाशय क्षतिग्रस्त होता है, तो लाखों क्यूसेक पानी अरुणाचल और असम को जलमग्न कर देगा, जिससे लाखों इंसानी जानें जा सकती हैं।

भारत का जवाबी और रणनीतिक एक्शन प्लान

चीन के इस 'जल-घेराबंदी' (Water Encirclement) का मुकाबला करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति तेज कर दी है:

  • अरुणाचल प्रदेश में 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (Siang Upper Multipurpose Project): भारत सरकार अरुणाचल में 11 GW क्षमता वाले विशाल बांध के निर्माण की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली बनाना नहीं, बल्कि चीन द्वारा अचानक छोड़े गए पानी को बफर के रूप में स्टोर करना और सूखे के दौरान पानी का प्रवाह बनाए रखना है।
  • अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव : भारत, बांग्लादेश के साथ मिलकर (जो ब्रह्मपुत्र का तीसरा सबसे बड़ा प्रभावित देश है) ट्रांस-बाउंड्री नदियों पर बहुपक्षीय संधि और तीसरे पक्ष की निगरानी (Third-party inspection) के लिए वैश्विक कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।
  • सैटेलाइट आधारित निगरानी : भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) और सैन्य उपग्रह तिब्बत में यारलुंग ज़ंगबो के प्रवाह, टनल निर्माण और जलाशयों में पानी के स्तर पर 24×7 रियल-टाइम निगरानी रख रहे हैं।

चीन का आधिकारिक पक्ष

दूसरी ओर, चीनी विदेश मंत्रालय का दावा है कि बीजिंग एक ज़िम्मेदार रुख अपना रहा है। चीन का तर्क है कि यह परियोजना पूरी नदी घाटी में बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होगी तथा इससे भारत या बांग्लादेश जैसे निचले प्रवाह वाले देशों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

कल का मौसम: 8 सितंबर को फिर बिगड़ेगा मौसम! UP-बिहार से लेकर ओडिशा तक भारी बारिश का अलर्ट, देखें IMD की चेतावनी

Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 सितंबर के मौसम को लेकर ताजा अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के नए बुलेटिन के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वी मध्य प्रदेश और ओडिशा समेत देश के कम से कम 10 से अधिक राज्यों में झमाझम बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज तूफानी हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

यूपी, बिहार और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी

उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में 8 सितंबर को मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह से एक्टिव रहेंगी। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार यानी भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश के विभिन्न इलाकों में भी कल भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दिनभर बादलों की गर्जना के साथ बिजली चमकने की आशंका बनी रहेगी।

ओडिशा, बंगाल और झारखंड में बिगड़ेगा मौसम

पूर्वी भारत के मैदानी व तटीय राज्यों में 8 सितंबर को तेज बारिश और आंधी का असर देखने को मिलेगा। ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। इसके साथ ही ओडिशा, बिहार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने, गरज-चमक होने और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है।

Weather Update

गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलग-अलग इलाकों में भी कल बादलों की कड़क और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत में जारी रहेगा मूसलाधार बारिश का सिलसिला

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का असर काफी मजबूत बना हुआ है। 8 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के दौरान बिजली गिरने और आंधी-तूफान चलने की चेतावनी दी है।

दक्षिण भारत: तेलंगाना में तेज हवाएं, केरल में उमस और गर्मी का अलर्ट

दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां थोड़ी सुस्त रहेंगी, लेकिन तूफानी हवाओं का जोर देखने को मिलेगा। तेलंगाना में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और दिनभर तेज सतही हवाएं रहने का अनुमान है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। वहीं, केरल और माहे के अलग-अलग इलाकों में कल मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

समुद्र में मौसम रहेगा प्रतिकूल, मछुआरों को हिदायत

समुद्री सीमाओं पर मौसम का मिजाज खराब रहने का अंदेशा जताया गया है। सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों तथा उससे सटे पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

बिहार में बाढ़ का तांडव: गंगा समेत 7 नदियां उफान पर, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा प्रभावित

बिहार में बाढ़ का तांडव: गंगा समेत 7 नदियां उफान पर, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा प्रभावित

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बिहार में मानसून की सक्रियता और नदियों के उफान ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ से भीषण तबाही मची हुई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, इन जिलों के 70 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 368 ग्राम पंचायतों की करीब 22.42 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है। ALSO READ: बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता मिले, फसल और मकान क्षति का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दें : योगी आदित्यनाथ

 

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, राज्य की प्रमुख नदियां—गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा—विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते गांधीघाट, पंडारक, दानापुर और बांका घाट जैसे इलाकों में गंगा उफान पर है।

 

इन 12 जिलों में सबसे बुरे हालात

बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रमुख 12 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल शामिल हैं। भागलपुर में एनएच-80 पर लगभग 2 फीट पानी बहने के कारण भागलपुर-अकबरनगर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। मुंगेर में महाने नदी के उफान से टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा गांव के पास सड़क का डायवर्जन बह गया है, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया है। ALSO READ: चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

 

हादसों में 5 लोगों की मौत

बाढ़ के पानी के बीच हुए हादसों और डूबने से जनहानि की भी खबर है। सारण जिले में एक महिला समेत दो लोगों की, वैशाली जिले में दो लोगों की और खगड़िया सदर प्रखंड के रहीमपुर में एक बच्चे की बाढ़ के पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई है।

 

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी

स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए कुल 1,429 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, राहत शिविरों और 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से लगभग 2.5 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी

आपदा की इस मार के बीच बिहार मौसम सेवा केंद्र ने चिंता और बढ़ा दी है। केंद्र के मुताबिक, अगले दो दिनों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ खास इलाकों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में और अधिक वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।

Kal Ka Mausam: 7 सितंबर को कैसा रहेगा मौसम? बिहार, यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश, कई राज्यों में आंधी-तूफान

Kal Ka Mausam:  देश भर में मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 सितंबर के मौसम को लेकर ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के नए बुलेटिन के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है। वहीं दक्षिण भारत के तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से सटे इलाकों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी

उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में 7 सितंबर को मानसूनी बारिश का असर काफी मजबूत दिखाई देगा। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इसके साथ ही पूर्वी मध्य प्रदेश में भी कल मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तराखंड में बारिश के साथ-साथ बादलों की गर्जना और बिजली चमकने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश और विदर्भ के अलग-अलग हिस्सों में भी कल बिजली कड़कने और आंधी की संभावना जताई गई है।

आंध्र प्रदेश में तेज आंधी और झोंकेदार हवाओं का अलर्ट

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, आंध्र प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर तेज गर्जना और बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और तूफानी झोंके आने की चेतावनी जारी की गई है।

इसके साथ ही आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में दिनभर तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, तटीय आंध्र प्रदेश, केरल और माहे के अलग-अलग इलाकों में कल मौसम गर्म और बेहद उमस भरा बना रहेगा।

बंगाल, झारखंड और ओडिशा में कैसा रहेगा मौसम?

पूर्वी भारत में भी मानसूनी बारिश और तूफानी गतिविधियों का दौर देखने को मिलेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है।

गांगेय पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में बादलों की गर्जना के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का दौर जारी

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसून पूरी तरह मेहरबान है। 7 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न इलाकों में मूसलाधार यानी भारी बारिश होने का अनुमान है। इन सभी राज्यों में बारिश के दौरान बिजली चमकने और आंधी-तूफान देखने को मिलेगा

समुद्र में खराब रहेगा मौसम, मछुआरों को चेतावनी

समुद्री तटीय इलाकों में मौसम प्रतिकूल रहने की आशंका जताई गई है। सोमालिया तट के पास, ओमान के तटवर्ती क्षेत्रों और उससे सटे पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी है।

‘बाय-बाय, पापा…’ ये कहकर युवती ने लगा दी चिनाब नदी में छलांग, जम्मू की ये घटना आपको कर देगी हैरान

McDonald’s India पर गंभीर आरोप! इंटर्न का महीनों तक बिना सैलरी काम कराने का दावा, कहा- दो और नौकरियां करनी पड़ीं

सोशल मीडिया पर मैकडॉनल्ड्स इंडिया (McDonald’s India) से जुड़ा एक पोस्ट इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल पोस्ट में एक कथित इंटर्न ने आरोप लगाया है कि उसे कई महीनों तक किए गए काम का भुगतान नहीं किया गया और आर्थिक मजबूरी के चलते उसे दो अतिरिक्त नौकरियां तक करनी पड़ीं। हैरानी की बात यह है कि यह दावा McDonald’s India के आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए किया गया। हालांकि, McDonald’s India ने इस पोस्ट को कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

क्या है वायरल पोस्ट में दावा?

वायरल स्क्रीनशॉट में एक कथित इंटर्न ने McDonald’s India के सोशल मीडिया अकाउंट से ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई है। पोस्ट में दावा किया गया है कि वह कंपनी में इंटर्न के तौर पर काम कर रहा था। लेकिन दिसंबर 2025 से उसका भुगतान नहीं किया गया। कथित इंटर्न ने यह भी दावा किया कि वह McDonald’s के कई एशियाई अकाउंट संभाल रहा था।

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लेकिन इसके बावजूद उसके काम का भुगतान नहीं किया गया। आर्थिक स्थिति संभालने के लिए उसे दो अतिरिक्त नौकरियां करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही दावा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसे लेकर इंटर्नशिप, स्टाइपेंड और कंपनियों में युवाओं के साथ होने वाले व्यवहार पर बहस शुरू हो गई है।

इंटर्नशिप या बिना भुगतान के काम?

इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अगर किसी इंटर्न से नियमित कर्मचारी की तरह काम लिया जा रहा है, जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और लंबे समय तक काम कराया जा रहा है, तो क्या उसे उचित स्टाइपेंड या भुगतान नहीं मिलना चाहिए? भारत में इंटर्नशिप को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर बहस होती रही है। LinkedIn पर युवाओं की कई पोस्ट में ऐसे अनुभव शेयर किए गए हैं, जिनमें लंबे समय तक बिना भुगतान काम, फुल-टाइम उपलब्धता और वास्तविक सीखने के बजाय नियमित काम करवाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

यूजर्स ने क्या कहा?

वायरल दावे के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं मुख्य रूप से दो हिस्सों में नजर आती हैं। एक वर्ग ने कथित इंटर्न का समर्थन करते हुए कहा कि बड़ी कंपनियों से युवाओं को बेहतर कार्य-संस्कृति और भुगतान की उम्मीद होती है। यूजर्स का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो कंपनी को मामले की जांच कर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

वहीं, कुछ यूजर्स ने बिना पूरी जानकारी के कंपनी को दोषी ठहराने से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी स्क्रीनशॉट या पोस्ट को आखिरी सच मानने से पहले संबंधित कंपनी और कथित इंटर्न दोनों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

McDonald’s के लिए क्यों अहम है मामला?

यह मामला ऐसे समय में चर्चा में आया है जब कंपनियों में इंटर्नशिप को लेकर युवाओं की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। किसी बड़े ब्रांड के साथ इंटर्नशिप को छात्र और युवा अक्सर अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। McDonald’s India से जुड़ी इंटर्नशिप के पुराने रिकॉर्ड भी बताते हैं कि कंपनी के साथ विभिन्न समय पर इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध रहे हैं।

कुछ भूमिकाओं में स्टाइपेंड भी दिया गया था। उदाहरण के तौर पर 2017 के एक Internshala रिकॉर्ड में McDonald’s India (South & West) की HR इंटर्नशिप के लिए ₹7,500-15,000 मासिक स्टाइपेंड का उल्लेख था। इसलिए वायरल पोस्ट में लगाए गए वर्तमान आरोपों और कंपनी की सामान्य इंटर्नशिप नीतियों को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा।

क्या कंपनी की ओर से कोई जवाब आया?

फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों में इस वायरल आरोप पर McDonald’s India का स्पष्ट आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि कथित इंटर्न को वास्तव में महीनों तक भुगतान नहीं किया गया या कंपनी ने जानबूझकर ऐसा किया। पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए कथित इंटर्न की पहचान, उसका ऑफर/इंटर्नशिप दस्तावेज, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

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दिल्ली-UP समेत 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, MP, राजस्थान में भी जोरदार बारिश

दिल्ली-UP समेत 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, MP, राजस्थान में भी जोरदार बारिश

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देश के बड़े हिस्से में रविवार को मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।

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पिछले दो दिनों में हुई तेज बारिश के कारण दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली थी। ऐसे में रविवार को एक बार फिर बारिश होने की संभावना ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए IMD ने फिलहाल कोई कलर-कोडेड वेदर वार्निंग जारी नहीं की है। दूसरी ओर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

 

दिल्ली में सुबह से शाम तक बारिश के आसार

 

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली में रविवार को आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रह सकता है। सुबह हल्की बारिश होने और दोपहर से शाम के बीच बारिश का एक और दौर आने की संभावना है। राजधानी के कुछ इलाकों में मध्यम बारिश भी हो सकती है। पिछले दिनों हुई बारिश के चलते दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में सड़कें जलमग्न हुई थीं। ऐसे में आज होने वाली बारिश के कारण कुछ निचले इलाकों में फिर जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

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उत्तर भारत के इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

 

उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना है। उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। हरियाणा और पंजाब में भी भारी बारिश के आसार हैं। बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

 

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी बरसेंगे बादल

 

मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को भारी बारिश का अनुमान है। IMD ने मध्य प्रदेश में गरज-चमक, बिजली और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई है। पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश भी हो सकती है।

 

बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भी बारिश

 

पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक हो सकती है। बिहार में भारी बारिश के साथ बिजली चमकने और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी-तूफान जैसी स्थिति के साथ बिजली चमकने की संभावना है।

 

पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश

 

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का असर बना रहने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इन राज्यों में कई जगहों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर भूस्खलन या अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

 

गुजरात और महाराष्ट्र में छिटपुट बारिश

 

कोंकण और गोवा में व्यापक स्तर पर बारिश होने की संभावना है। गुजरात, महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों में भी छिटपुट बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। यहां तेज सतही हवाओं को लेकर भी चेतावनी दी गई है।

 

कर्नाटक में भी आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट

 

आंतरिक कर्नाटक में गरज-चमक के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में तेज सतही हवाओं को लेकर भी चेतावनी दी है।

 

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम बदलेगा

 

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और मुजफ्फराबाद में गरज-चमक के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

 

अंडमान-निकोबार में भी आंधी का असर

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी गरज-चमक और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

 

अरब सागर में तेज हवाओं का अलर्ट

मौसम विभाग ने अरब सागर में भी तेज हवाओं को लेकर चेतावनी दी है। सोमालिया के आसपास और ओमान तट के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इनकी रफ्तार झोंकों के साथ 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।