अब चारधाम जाना होगा बेहद आसान, दिल्ली से ऋषिकेश सिर्फ 2.5 घंटे में! इस प्रोजेक्ट का 75% काम पूरा

Delhi To Rishikesh Namo Bharat: दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड और चारधाम जाने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा अपडेट आया है। आने वाले समय में दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सिर्फ 2.5 घंटे में पूरा हो सकेगा, जबकि कर्णप्रयाग तक का सफर जो सड़क मार्ग से 12-13 घंटे लेता है, वह महज 5 से 6 घंटे में पूरा हो जाएगा।

यह मुमकिन होने जा रहा है सरकार के दो बड़े रेल प्रोजेक्ट्स के कारण। पहला, प्रस्तावित मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत कॉरिडोर और दूसरा, निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन। आइए आपको बताते हैं कि यह पूरा प्रोजेक्ट क्या है, इसका काम कहां तक पहुंचा है और इससे श्रद्धालुओं को क्या-क्या सहूलियतें मिलेंगी।

सिर्फ 2.5 घंटे में दिल्ली से ऋषिकेश

दिल्ली से मेरठ तक नमो भारत (RRTS) ट्रेन की कनेक्टिविटी पहले से ही चालू है। अब सरकार इस कॉरिडोर को मेरठ से आगे हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के तहत पूरा होता है, तो दिल्ली-एनसीआर के लोग महज 2 से 2.5 घंटे में ऋषिकेश पहुंच जाएंगे। वीकेंड पर दिल्ली-देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर लगने वाले घंटों के ट्रैफिक जाम से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का 6 घंटे का सफर अब मात्र 2 घंटे में!

गढ़वाल के दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सफर को आसान बनाने के लिए 127 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट का लगभग 75% सिविल वर्क पूरा हो चुका है। हाल ही में 11 सितंबर को 10 किमी लंबी ‘एस्केप टनल-1’ का ब्रेकथ्रू सफलता पूर्वक हासिल किया गया। हिमालय के कठिन और संवेदनशील इलाकों से गुजरने के कारण 127 किमी लंबे इस रूट का 105 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा।

कब चालू होगी ट्रेन?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवपुरी-ब्यासी तक का सेक्शन 2028 तक चालू होने की उम्मीद है, जबकि कर्णप्रयाग तक की पूरी रेल लाइन 2029 तक शुरू हो जाएगी। बता दें कि वर्तमान में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग जाने में सड़क मार्ग से 6 से 7 घंटे लगते हैं, लेकिन ट्रेन शुरू होने के बाद यह दूरी सिर्फ 2 से 2.5 घंटे में तय हो जाएगी।

केदारनाथ और बद्रीनाथ के श्रद्धालुओं को कैसे मिलेगा फायदा?

यह रेलवे लाइन सीधे केदारनाथ या बद्रीनाथ मंदिर तक तो नहीं पहुंचेगी, लेकिन यह श्रद्धालुओं को मुख्य बेस कैंप के बहुत करीब पहुंचा देगी:

बद्रीनाथ जाने वालों के लिए: यात्री ट्रेन से सीधे कर्णप्रयाग उतरेंगे और वहां से सड़क मार्ग (बस या टैक्सी) के जरिए जोशीमठ होते हुए बेहद कम समय में बद्रीनाथ पहुंच सकेंगे।

केदारनाथ जाने वालों के लिए: ट्रेन से रुद्रप्रयाग या तिलणी स्टेशन उतरकर यात्री सीधे सोनप्रयाग/गौरीकुंड के लिए सड़क मार्ग ले सकेंगे, जो केदारनाथ पैदल यात्रा का मुख्य पड़ाव है।

बुजुर्गों के लिए वरदान: पहाड़ों के संकरे और घुमावदार रास्तों पर घंटों बस या कार में सफर करना बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए काफी तकलीफदेह होता था। ट्रेन चलने से उनका सफर बेहद आरामदायक और सुरक्षित हो जाएगा।

गढ़वाल के 5 जिलों की बदलेगी तस्वीर

यह रेल लाइन उत्तराखंड के 5 प्रमुख पहाड़ी जिलों से होकर गुजरेगी: देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली।

12 नए रेलवे स्टेशन: इस रूट पर 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिनमें ऋषिकेश, मुनि की रेती, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर गढ़वाल, तिलणी, गौचर और कर्णप्रयाग शामिल हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यात्रा और पर्यटन के अलावा, इस रेल नेटवर्क से स्थानीय निवासियों, किसानों, व्यापारियों और सेब-फल उत्पादकों को अपनी उपज बड़े शहरों के बाजारों तक आसानी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

Namo Bharat: 3 घंटे नहीं अब 90 मिनट में पूरा होगा दिल्ली-करनाल का सफर! नमो भारत के नए रूट पर बड़ा अपडेट

चारधाम यात्रा के लिए रेलवे का यह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट उत्तराखंड के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। जब दिल्ली से कर्णप्रयाग का पूरा सफर 12 घंटे से घटकर महज 5-6 घंटे रह जाएगा, तो इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं का समय और पैसा बचेगा, बल्कि मानसून और भूस्खलन के समय होने वाली दुर्घटनाओं में भी काफी कमी आएगी।

‘₹30,500 करोड़ खर्च वाला ये सिस्टम बंद कर दो…’, अश्नीर ग्रोवर ने UPI पर चार्ज लगाने के बीच समझाया ये गणित

Ashneer Grover On UPI MDR Charge: भारतपे के सह-संस्थापक और अपनी किताब ‘दोगलापन’ के लिए मशहूर अश्नीर ग्रोवर ने UPI के नए नियमों पर एक गजब का फार्मूला बताया है। सरकार के ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने की अटकलों के बीच उन्होंने सरकार और बैंकिंग सिस्टम को आड़े हाथों लिया है।

हाल ही में सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर साफ किया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांसजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। हालांकि, इस नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतानों पर चार्ज लगाने या न लगाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इसी को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया (X) पर आंकड़ों के साथ पूरा गणित समझाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

आइए आपको बताते हैं कि अश्नीर ग्रोवर ने क्या गणित बिठाया है और सरकार आखिर UPI पर चार्ज का फ्रेमवर्क क्यों ला रही है।

बंद करो ATM, UPI पर टैक्स की बलि क्यों?

अश्नीर ग्रोवर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना सिर्फ टैक्स वसूली जैसा है। उन्होंने कहा, ‘UPI भारत की एक ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि है जिसे पूरी दुनिया मानती है, पर अब यह टैक्स की बलि चढ़ेगी।’

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, देश में कैश और ATM इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का सालाना खर्च करीब ₹30,500 करोड़ आता है। ग्रोवर की सलाह है कि अगर सरकार को खर्च कम ही करना है, तो एटीएम बंद कर दे और यूपीआई को बढ़ावा दे। ग्रोवर ने याद दिलाया कि RBI ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया है, सभी लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ है और NPCI के पास टैक्स से पहले ₹1,888 करोड़ का सरप्लस है।

‘जब बैंक और आरबीआई इतना भारी मुनाफा कमा रहे हैं, तो फिर यूपीआई की वजह से किसका नुकसान हो रहा है? सरकार ऐसी कौन सी सब्सिडी दे रही है जिससे नुकसान हो रहा है?’

सरकार का नया नियम: ₹2,000 की लिमिट और MDR

14 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI या RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट ऐप कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं वसूल सकते।

संसद के मानसून सत्र (जो 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुआ) में पेमेंट एक्ट की धारा 10A में संशोधन किया गया। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर MDR लगाने का एक रास्ता तैयार हो गया है।

NPCI के नेतृत्व वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ अब यह तय करेगी कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर कितना MDR चार्ज लगाया जाएगा।

सरकार क्यों लाना चाहती है MDR फ्रेमवर्क?

सरकार का तर्क है कि UPI अब काफी बड़ा हो चुका है और इसके सुरक्षित संचालन के लिए पैसों की जरूरत है। लेनदेन की भारी मात्रा को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत है। सरकार का मानना है कि UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना मुमकिन नहीं है।

जब डिजिटल पेमेंट कंपनियों को कमाई (MDR) का जरिया मिलेगा, तो इस सेक्टर में नई कंपनियां आएंगी, जिससे कॉम्पिटिशन और इनोवेशन बढ़ेगा।

कितना बड़ा हो चुका है देश का UPI का नेटवर्क?

NPCI द्वारा संचालित UPI ने पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी है। वित्त वर्ष 2017 में जहां UPI के जरिए ₹0.07 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2026 (FY26) में यह बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया। यानी 10 सालों में 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।

UPI अब भारत के अलावा दुनिया के 11 देशों में इस्तेमाल हो रहा है। उज्बेकिस्तान इस लिस्ट में शामिल होने वाला नया देश बना है। इसके अलावा सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में भी यूपीआई स्वीकार किया जाता है।

Weather Alert: गुजरात में बेहद भारी बारिश का खतरा, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भी IMD का अलर्ट! 19 सितंबर से मानसून की वापसी

IMD Rain Alert: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश भर के मौसम को लेकर लेटेस्ट वेदर बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। मानसून की वापसी की आहट के बीच देश के कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, उससे सटे कच्छ क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से 15 सितंबर को सौराष्ट्र और कच्छ के अलग-अलग इलाकों में बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

जानिए देशभर में पिछले 24 घंटों का मौसम

मौसम विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिम मध्य प्रदेश, गुजरात राज्य और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज की गई है। पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश (7-11 सेमी) रिकॉर्ड की गई है।

गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमी भारत में 15 सितंबर को बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। IMD ने सौराष्ट्र एवं कच्छ में 15 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 15 सितंबर को गुजरात रीजन और सौराष्ट्र व कच्छ में व्यापक बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। कोंकण और गोवा में 15-16 सितंबर तथा 19-21 सितंबर के दौरान भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत का हाल

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के असर से बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 16 और 17 सितंबर को अधिकांश जगहों पर गरज-चमक और बिजली कड़कने के साथ बारिश होगी। 15 से 17 सितंबर के दौरान हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 17 सितंबर को व्यापक बारिश होने का अनुमान है जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है।

बिहार में गंभीर बिजली कड़कने की चेतावनी, बंगाल और ओडिशा का मौसम

पूर्वी भारत में 15 सितंबर को बिहार में मध्यम से तेज आकाशीय बिजली गिरने की विशेष चेतावनी दी गई है। बिहार में 17 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 15 से 20 सितंबर तक तथा गांगेय पश्चिम बंगाल में 16 से 20 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 15 से 21 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा, जहां 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है। ओडिशा में 15 सितंबर और 18 से 21 सितंबर तक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

मध्य भारत में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 से 17 सितंबर और पश्चिम मध्य प्रदेश में 17 से 19 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश और गरज-चमक के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में 19 से 21 सितंबर के बीच भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। विदर्भ में 20 और 21 सितंबर को बारिश का दायरा बढ़ेगा।

पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश तथा असम व मेघालय में 15 से 17 सितंबर के दौरान भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 15 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत: तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना में तेज हवाओं का अलर्ट

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में केरल व माहे और लक्षद्वीप में 15 से 21 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। तेलंगाना में 17 से 21 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 15 से 21 सितंबर तक, केरल व माहे में 15-16 और 19-21 सितंबर को तथा तेलंगाना में 19 से 21 सितंबर के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है।

इसके अलावा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं और सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

समंदर में तूफानी स्थिति: मछुआरों के लिए चेतावनी जारी

तटीय और समुद्री इलाकों में प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को सतर्क किया है। गुजरात तटों से सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर में 15 और 16 सितंबर को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। सोमालिया तट और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर में 19 सितंबर तक तूफानी हवाएं जारी रहेंगी। दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 18 से 20 सितंबर तक तथा अंडमान सागर में 16 से 20 सितंबर के बीच खराब मौसम और चक्रवाती हवाओं के कारण मछुआरों को गहरे समुद्र में न उतरने की सलाह दी गई है।

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₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने बैंकों को दिया निर्देश

Digital payments News: डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि ₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI लेनदेन पर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह रोक सीधे तौर पर ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत लिया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे RuPay डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करने या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कोई शुल्क न वसूलें।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (2007 का 51) की धारा 10A के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड और UPI के जरिए 2,000 रुपये तक के पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी चार्ज लगाने से रोक दिया है।”

UPI ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम

सरकार का यह प्रावधान ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर भी लागू है। यानी इस लिमिट तक UPI के जरिए पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर किसी प्रकार का चार्ज नहीं लगाया जा सकता।

इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना। साथ ही छोटे मूल्य के लेनदेन को लोगों के लिए आसान और कम लागत वाला बनाए रखना है। खास तौर पर दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटी रकम के डिजिटल भुगतान में एक्स्ट्रा चार्ज लगने से लोग कैश का इस्तेमाल करने की ओर वापस जा सकते हैं।

सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज लेने पर भी रोक

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चार्ज पर रोक केवल सीधे तौर पर लगाए जाने वाले शुल्क तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी तरीके से शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि बैंक या संबंधित सिस्टम प्रोवाइडर किसी अन्य चार्ज के नाम पर भी इस तरह के भुगतान की लागत ग्राहक पर डालने की कोशिश नहीं कर सकते।

छोटे डिजिटल पेमेंट को मिलेगा बढ़ावा

भारत में UPI और कार्ड के जरिए डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। खासकर छोटी दुकानों, किराना स्टोर, रेहड़ी-पटरी और रोजमर्रा की खरीदारी में UPI का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है। ऐसे में ₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं होने से डिजिटल लेनदेन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार की यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान को सस्ता, सुविधाजनक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्राहकों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी फायदा हो सकता है और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

भारत में कितना होता डिजीटल ट्रांजेक्शन?

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के जरिए डिजिटल ट्रांजैक्शन हर रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है। NPCI (National Payments Corporation of India) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक भारत में अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। यानी औसतन करीब 79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन रोज हुए। इनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रही। आपको जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल पेमेंट सिर्फ UPI नहीं होदा है। इसमें IMPS, NEFT, RTGS, कार्ड, FASTag आदि भी शामिल होते हैं।

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जेब पर भारी महंगाई की मार

नई दिल्ली। आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार का सिलसिला जारी है। इस साल के पहले आठ महीने में लगातार महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को अगस्त महीने का महंगाई का आंकड़ा जारी किया, जिसके मुताबिक थोक और खुदरा दोनों महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुदरा महंगाई पर पड़ा है। गौरतलब है कि खाने, पीने की चीजों के दाम बढ़ने से ही पिछले आठ महीने से लगातार महंगाई बढ़ रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई बढ़ कर 4.82 फीसदी हो गई। जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। जुलाई में भी महंगाई की दर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय की गई औसत सीमा से ऊपर रही। रिजर्व बैंक ने चार फीसदी की औसत सीमा तय की है। लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई इस सीमा से ऊपर रही है। बहरहाल, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में खाने, पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर 5.95 फीसदी रही।

खुदरा महंगाई दर पर सबसे ज्यादा असर खाने, पीने की चीजों की कीमतों का पड़ा है। खाद्य पदार्थों की महंगाई जुलाई के 5.52 से बढ़कर अगस्त में 5.95 फीसदी हो गई। माना जा रहा है कि मानसून की कमजोरी और अनियमितता की वजह से कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में प्याज की महंगाई 48.27 फीसदी, लहसुन की 43.60 फीसदी और अदरक की 73.82 फीसदी।

मानसून के अलावा पश्चिम एशिया के संकट का असर भी महंगाई पर पड़ा है। होर्मुज की खाड़ी बाधित होने से कच्चा तेल महंगा हुआ है, जिससे देश में माल ढुलाई महंगी हो गई है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है। फरवरी के आखिरी दिन ईरान पर हुए हमले के बाद से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

बहरहाल, अगस्त में खुदरा महंगाई के साथ साथ थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक महंगाई बढ़ कर 9.92 फीसदी हो गई। जुलाई में यह 9.78 फीसदी थी। बताया जा रहा है कि खाने, पीने की चीजें, ईंधन, पावर और विनिर्मित उत्पाद महंगे होने की वजह से यह बढ़ोतरी दर्ज की गई। गौरतलब है कि थोक मूल्य सूचकांक में फूड इंडेक्स की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी होती है। अगस्त 2026 में खाने, पीने की चीजों की थोक महंगाई बढ़कर 7.05 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई में 6.65 फीसदी थी।

कल का मौसम: 15 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा समेत 10 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की ये चेतावनी

IMD Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 सितंबर के लिए देश भर का ताजा मौसम पूर्वानुमान और बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक उत्तर भारत के मैदानी इलाकों दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा समेत देश के 10 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की आशंका है। मानसून की विदाई चरण के बीच कई मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से उत्तर, दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के हिस्सों में आंधी-तूफान, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा समेत इन 10 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के 15 सितंबर के बुलेटिन के मुताबिक देश के 10 प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तर भारत में हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली और पंजाब में बारिश का दौर तेज रहने वाला है, जहां अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार पानी बरस सकता है।

पश्चिम भारत में गुजरात के सौराष्ट्र एवं कच्छ क्षेत्र में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। दक्षिण भारत में केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश के आसार हैं। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

राजस्थान, बिहार और जम्मू-कश्मीर में आंधी के साथ बिजली कड़कने का अनुमान

देश के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में थंडरस्टॉर्म के साथ 30-40 किमी/घंटे की गति से आंधी चलने का अलर्ट है।

यूपी, एमपी समेत 16 से अधिक राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने की आशंका

मौसम विभाग ने कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली चमकने को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गुजरात रीजन, हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल व माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में अलग-अलग स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।

समुद्र में तूफानी हवाएं: गुजरात तट और बंगाल की खाड़ी के लिए अलर्ट

समुद्र और तटीय क्षेत्रों में चक्रवाती हवाओं के असर से समुद्री स्थिति प्रतिकूल बनी रहेगी। सोमालिया तट के साथ और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

उत्तर-पूर्वी अरब सागर से सटे गुजरात तटों पर 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी मौसम बना रहेगा, जहां हवा की गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है, जो बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती हैं। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों और गहरे समुद्र में जाने वाले मछुआरों को खराब मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है।

भारत नेपाल को रोज 18 घंटे 654 MW बिजली देगा:यह 28 लाख घरों की जरूरत के बराबर; बाढ़ से नेपाल में बिजली उत्पादन घटा

भारत ने नेपाल को 654 मेगावाट बिजली देने की मंजूरी दी है। भारत के बिजली मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2026 तक रोज 18 घंटे, यानी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है। इतनी बिजली लगातार मिलने पर लगभग 28 लाख घरों की सालभर की बिजली जरूरत पूरी हो सकती है। दरअसल, हाल ही में आई बाढ़ से नेपाल के हाइड्रोपावर ढांचे को काफी नुकसान हुआ है। इससे वहां करीब 550 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के नुकसान का अनुमान है। नेपाल को अतिरिक्त बिजली की जरूरत पैदा हुई है। नेपाल ने साल 2023-24 में भारत को ज्यादा बिजली बेची थी भारत इससे पहले भी नेपाल को बिजली देता रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत ने नेपाल को करीब 18ा0 मिलियन यूनिट बिजली दी थी। यह औसतन करीब 206 MW लगातार बिजली के बराबर बैठती है। हालांकि नेपाल सर्दियों के मौसम में भारत से बिजली आयात करता है, लेकिन मानसून के महीनों में वह भारत को भारी मात्रा में बिजली बेचता भी है। वर्ष 2023-24 में नेपाल ने भारत से जितनी बिजली खरीदी, उससे ज्यादा मूल्य की बिजली भारत को बेची थी। लेकिन 26 अगस्त को आई बाढ़ की वजह से नेपाल कम बिजली बना रहा है, जिसके चलते उसकी भारत पर निर्भरता बढ़ी है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Monsoon Update: मानसून की विदाई के संकेत के बीच यूपी से गुजरात तक भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की ये चेतावनी

IMD Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और देश भर में जारी मौसमी हलचलों को लेकर ताजा वेदर बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बनती जा रही हैं। हालांकि मानसून की विदाई के इन संकेतों के बीच देश के कई हिस्सों में झमाझम और आफत की बारिश का दौर जारी है।

दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उससे सटे उत्तरी गुजरात के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से 14 सितंबर को सौराष्ट्र और कच्छ में अत्यंत भारी बारिश और गुजरात रीजन में बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

पिछले 24 घंटों का हाल और सक्रिय मौसमी प्रणालियां

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान हरियाणा, तेलंगाना और पश्चिम मध्य प्रदेश में 12 से 20 सेमी तक की बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा कोंकण, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़, सौराष्ट्र, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात रीजन, उत्तराखंड, तमिलनाडु, ओडिशा और असम के कई हिस्सों में भारी बारिश (7 से 11 सेमी) हुई है।

गुजरात, सौराष्ट्र और कोंकण-गोवा में अत्यंत भारी बारिश का संकट

पश्चिमी भारत में 14 सितंबर को बारिश का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने सौराष्ट्र एवं कच्छ के अलग-अलग इलाकों में 14 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुजरात रीजन में 14 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की आशंका है जबकि सौराष्ट्र और कच्छ में 15 सितंबर को भी भारी बारिश जारी रहेगी।

मध्य महाराष्ट्र में 14 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कोंकण और गोवा संग गुजरात रीजन व सौराष्ट्र-कच्छ में 14 और 15 सितंबर के दौरान अधिकांश जगहों पर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रहेंगी।

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी, दिल्ली-NCR, राजस्थान और पंजाब में बारिश का पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला चलेगा। उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में 14 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 15 से 17 सितंबर के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर भारी बारिश हो सकती है।

उत्तर प्रदेश के मौसम की बात करें तो पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 और 15 सितंबर को गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है। इस दौरान दोनों हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। राजस्थान में 14 से 16 सितंबर के बीच 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अनुमान जताया गया है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम

मध्य भारत के राज्यों में 14 सितंबर को व्यापक बारिश का असर दिखेगा। पश्चिम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 14 सितंबर को कई जगहों पर बारिश होगी। इसमें पश्चिम मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट शामिल है। विदर्भ में 14 और 15 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। 15 से 20 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में छिटपुट बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने के आसार हैं।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: बंगाल, बिहार और ओडिशा में बदलेगा मौसम

पूर्वी भारत में 14 से 20 सितंबर के बीच उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है। 16 सितंबर को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत भारी बारिश हो सकती है। बिहार में 16 और 17 सितंबर को और ओडिशा में 14 सितंबर और 18 से 20 सितंबर के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 14 से 18 सितंबर के दौरान तेज आंधी और हवाएं चल सकती हैं।

पूर्वोत्तर के राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 15 से 18 सितंबर के बीच अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश का अलर्ट दिया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 14 से 20 सितंबर तक बारिश और बिजली चमकने का अनुमान है।

दक्षिण भारत: तेलंगाना और कर्नाटक में आंधी-तूफान का अलर्ट

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में केरल, माहे और लक्षद्वीप में 14 से 20 सितंबर तक अधिकांश जगहों पर बारिश जारी रहेगी। तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 14 सितंबर को 40 से 50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 14 से 20 सितंबर तक, केरल व माहे में 14-16 और 19-20 सितंबर को, तथा तटीय आंध्र प्रदेश, यानम व रायलसीमा में 19 और 20 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

समुद्र में तेज हवाएं: मछुआरों के लिए रेड अलर्ट जारी

समुद्री इलाकों में हवाओं के कड़े रुख को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को चेतावनी दी है। गुजरात तटों से सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर में 16 सितंबर तक मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। उत्तरी महाराष्ट्र तट, पूर्व-मध्य अरब सागर और दक्षिण केरल तट से सटे कोमोरिन क्षेत्र में 14 सितंबर को खराब समुद्री स्थिति रहेगी।

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इसके साथ ही सोमालिया तट और उससे लगे अरब सागर में 19 सितंबर तक और बंगाल की खाड़ी व अंडमान सागर के इलाकों में 15 से 19 सितंबर के दौरान तूफानी हवाएं चलने के कारण समुद्री गतिविधियों पर रोक लगाने की सलाह दी गई है।

24 घंटे में उत्तर गुजरात-राजस्थान की तरफ बढ़ेगा वेदर सिस्टम, 14 सितंबर तक इन राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

IMD Heavy Rain Forecast: देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर से बेहद तेज हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी विदर्भ के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह मौसमी सिस्टम अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उससे सटे उत्तरी गुजरात के इलाकों की तरफ खिसकेगा। इसके असर से अगले 24 से 48 घंटों में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और कोंकण-गोवा सहित देश के कई राज्यों में अत्यंत भारी से मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है।

मानसून ट्रफ इस समय अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर सक्रिय बनी हुई है। इसके साथ ही अरब सागर और मध्य प्रदेश से लेकर मन्नार की खाड़ी तक फैली ऊपरी हवाओं के चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ के असर से पूरे मध्य, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत में तेज हवाओं और बिजली चमकने के साथ झमाझम बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

गुजरात और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में अत्यंत भारी बारिश का संकट

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक गुजरात क्षेत्र और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में कुदरत का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिल सकता है। 13 सितंबर को गुजरात रीजन और उत्तर मध्य महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान भी गुजरात में 30 सेंटीमीटर से अधिक बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है।

इसके अलावा 14 सितंबर को गुजरात रीजन में और 13 से 14 सितंबर के दौरान सौराष्ट्र व कच्छ के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला बना रहेगा। कोंकण और गोवा के साथ मध्य महाराष्ट्र के इलाकों में भी 13 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। सौराष्ट्र व कच्छ में 15 सितंबर को भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत और राजस्थान में कैसा रहेगा मौसम

कम दबाव के क्षेत्र का रुख दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उत्तर गुजरात की तरफ होने की वजह से पूर्वी राजस्थान में 13 और 14 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा एक पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडल में 73 डिग्री पूर्व देशांतर और 30 डिग्री उत्तर अक्षांश के उत्तर में ट्रफ के रूप में सक्रिय है। इसके असर से पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 13 से 17 सितंबर तक छिटपुट से लेकर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

हालांकि, इन मैदानी इलाकों में 16 और 17 सितंबर को व्यापक रूप से तेज बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ेंगी। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 13 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट है जबकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 15 से 17 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मध्य भारत और विदर्भ में बारिश का जोर

मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में मानसूनी सिस्टम पूरी तरह मेहरबान है। पश्चिम मध्य प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, जबकि 15 से 19 सितंबर के बीच हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 13 सितंबर को तेज बारिश के आसार हैं।

विदर्भ में 13 से 15 सितंबर और छत्तीसगढ़ में 13 से 16 सितंबर तक अधिकांश स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है। विदर्भ के अलग-अलग हिस्सों में 13 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है, जिसके बाद 16 से 19 सितंबर के दौरान बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आएगी।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी बरसेंगे बादल

पूर्वी भारत में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 13 से 19 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में 15 से 17 सितंबर के बीच और ओडिशा में 14 से 17 सितंबर के दौरान भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 16 से 19 सितंबर तक मूसलाधार बारिश देखने को मिल सकती है।

पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम में बने ऊपरी हवा के चक्रवाती तंत्र के कारण अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 से 17 सितंबर तक अधिकांश जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 13 से 17 सितंबर और असम व मेघालय में 13 से 16 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

दक्षिण भारत में तेज हवाओं का अलर्ट, केरल में उमस भरा मौसम

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों, यानम और तेलंगाना में 13 सितंबर को व्यापक वर्षा और भारी बारिश होने के आसार हैं। केरल और माहे में 14 और 15 सितंबर को बारिश का दायरा बढ़ेगा, जबकि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 13 से 16 सितंबर के दौरान भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और तेलंगाना में 13 से 17 सितंबर के बीच 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट दिया है। वहीं केरल और माहे में 13 सितंबर को गर्म और बेहद उमस भरा मौसम रहने की संभावना जताई गई है।

मछुआरों के लिए समंदर में जाने पर चेतावनी

समुद्र में उठती ऊंची लहरों और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। उत्तर महाराष्ट्र तट से सटे अरब सागर में 13 सितंबर को और उत्तर-पूर्वी अरब सागर से सटे गुजरात तटों पर 16 सितंबर तक मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

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इसके अलावा सोमालिया तट और दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर के इलाकों में 18 सितंबर तक स्थिति खतरनाक रह सकती है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्सों, अंडमान सागर और उससे सटे इलाकों में भी 15 से 18 सितंबर के दौरान मछुआरों को सतर्क रहने और गहरे समुद्र में जाने से बचने का निर्देश दिया गया है।

SML का भी आएगा IPO! अगले 2 से 3 साल में लिस्ट होने पर कर रही विचार

एग्री इनपुट्स बनाने वाली SML Ltd अगले 2 से 3 साल में शेयर बाजार में लिस्ट होने पर विचार कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नई केमिकल एंटिटीज (NCE) के विकास के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना है। कंपनी का पुराना नाम सल्फर इंडिया लिमिटेड था। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक इंटरव्यू में SML के मैनेजिंग डायरेक्टर बिमल शाह ने कहा कि लिस्टिंग को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अभी इसका आकलन किया जा रहा है। कंपनी को अगले एक-दो साल में इस दिशा में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

SML उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो नई केमिकल एंटिटीज के विकास पर काम कर रही हैं। शाह ने कहा कि कंपनी पिछले करीब 3 वर्षों से NCEs पर काम कर रही है और यह उसके कारोबार का एक महत्वपूर्ण फोकस एरिया बन चुका है। कंपनी का एक नया मॉलिक्यूल जल्द आने वाला है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के विकास में बड़े निवेश की जरूरत होती है। SML का अनुमान है कि एक NCE को बाजार में लाने में करीब 7-8 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकते हैं। अभी तक कंपनी ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट वर्क का खर्च खुद उठाया है।

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी है और कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त स्थिति में है। मैनेजमेंट इस रकम का इस्तेमाल भविष्य में अधिग्रहण, रेगुलेटरी एसेट्स या रणनीतिक साझेदारियों के साथ NCE प्रोग्राम में कर सकता है। शाह ने कहा कि कंपनी ने सालों से अपने बही-खाते को मजबूत रखा है और जमा पूंजी का इस्तेमाल सही अवसर मिलने पर किया जाएगा।

कंपनी अपने पारंपरिक सल्फर फर्टिलाइजर कारोबार से आगे बढ़ते हुए फसल पोषण, फसल संरक्षण और जैविक उत्पादों पर भी ध्यान दे रही है। शाह के अनुसार, अगले 3 सालों में इन 3 क्षेत्रों में से फसल पोषण (Crop Nutrition) भारत में और वैश्विक स्तर पर कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार हो सकता है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी संतुलित और पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल वाले उत्पादों को बढ़ावा दे रही है।

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कंपनी ने घटाया रेवेन्यू टारगेट

SML ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना रेवेन्यू टारगेट घटाकर करीब 1,600 करोड़ रुपये कर दिया है। इसके पीछे कमजोर मानसून, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के कारण परिवहन में आ रही बाधाएं हैं। इससे पहले कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा था। हालांकि, नया रेवेन्यू टारगेट पिछले वित्त वर्ष के करीब 1,200-1,300 करोड़ रुपये के कारोबार से अधिक है। कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।

कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में इससे करीब 600-700 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था। इस वित्त वर्ष कंपनी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 700-800 करोड़ रुपये और अगले 2 वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।