Weather Alert: गुजरात में बेहद भारी बारिश का खतरा, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भी IMD का अलर्ट! 19 सितंबर से मानसून की वापसी

IMD Rain Alert: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश भर के मौसम को लेकर लेटेस्ट वेदर बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। मानसून की वापसी की आहट के बीच देश के कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, उससे सटे कच्छ क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से 15 सितंबर को सौराष्ट्र और कच्छ के अलग-अलग इलाकों में बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

जानिए देशभर में पिछले 24 घंटों का मौसम

मौसम विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिम मध्य प्रदेश, गुजरात राज्य और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज की गई है। पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश (7-11 सेमी) रिकॉर्ड की गई है।

गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमी भारत में 15 सितंबर को बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। IMD ने सौराष्ट्र एवं कच्छ में 15 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 15 सितंबर को गुजरात रीजन और सौराष्ट्र व कच्छ में व्यापक बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। कोंकण और गोवा में 15-16 सितंबर तथा 19-21 सितंबर के दौरान भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत का हाल

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के असर से बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 16 और 17 सितंबर को अधिकांश जगहों पर गरज-चमक और बिजली कड़कने के साथ बारिश होगी। 15 से 17 सितंबर के दौरान हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 17 सितंबर को व्यापक बारिश होने का अनुमान है जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है।

बिहार में गंभीर बिजली कड़कने की चेतावनी, बंगाल और ओडिशा का मौसम

पूर्वी भारत में 15 सितंबर को बिहार में मध्यम से तेज आकाशीय बिजली गिरने की विशेष चेतावनी दी गई है। बिहार में 17 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 15 से 20 सितंबर तक तथा गांगेय पश्चिम बंगाल में 16 से 20 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 15 से 21 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा, जहां 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है। ओडिशा में 15 सितंबर और 18 से 21 सितंबर तक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

मध्य भारत में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 से 17 सितंबर और पश्चिम मध्य प्रदेश में 17 से 19 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश और गरज-चमक के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में 19 से 21 सितंबर के बीच भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। विदर्भ में 20 और 21 सितंबर को बारिश का दायरा बढ़ेगा।

पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश तथा असम व मेघालय में 15 से 17 सितंबर के दौरान भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 15 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत: तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना में तेज हवाओं का अलर्ट

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में केरल व माहे और लक्षद्वीप में 15 से 21 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। तेलंगाना में 17 से 21 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 15 से 21 सितंबर तक, केरल व माहे में 15-16 और 19-21 सितंबर को तथा तेलंगाना में 19 से 21 सितंबर के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है।

इसके अलावा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं और सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

समंदर में तूफानी स्थिति: मछुआरों के लिए चेतावनी जारी

तटीय और समुद्री इलाकों में प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को सतर्क किया है। गुजरात तटों से सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर में 15 और 16 सितंबर को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। सोमालिया तट और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर में 19 सितंबर तक तूफानी हवाएं जारी रहेंगी। दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 18 से 20 सितंबर तक तथा अंडमान सागर में 16 से 20 सितंबर के बीच खराब मौसम और चक्रवाती हवाओं के कारण मछुआरों को गहरे समुद्र में न उतरने की सलाह दी गई है।

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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।