एफसीआरए पर बनी जेपीसी की पहली बैठक

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नई दिल्ली। विदेशी चंदे के नियमन से जुड़े एफसीआरए कानून में संशोधन के लिए लाए गए बिल पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी की पहली बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति में 31 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा के 14 सांसद हैं। समिति में एनडीए का बहुमत है। इसलिए समिति का फैसला सरकार के बिल के खिलाफ नहीं होगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस विवादित बिल को मार्च में पेश किया था लेकिन केरल के विधानसभा चुनाव की वजह से इसे रोक दिया था। चुनाव नतीजों के बाद संसद के मानसून सत्र में बिल को जेपीसी में भेजा गया। जेपीसी को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा में रिपोर्ट देनी है।

विपक्ष का आरोप है कि एफसीआरए में संशोधन का बिल ईसाई एनजीए और अल्पसंख्यक संस्थानों की वैध फंडिंग रोक कर अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। सरकार ने इस आरोप खारिज करते हुए कहा है कि बिल धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि विदेशी और खास कर अमेरिका के दबाव में इस बिल को टाला जा रहा है।

यह बिल इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बाद इसे 12 अगस्त को जेपीसी को भेजा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बिल के कुछ प्रावधान बेहद आपत्तिजनक हैं, जिसमें विदेशी फंडिंग बंद होने या एफसीआरए लाइसेंस निरस्त होने पर एनजीओ की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी शामिल है। समिति अब बिल के सभी प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी। लोकसभा में बिल पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि कानून का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने कहा था कि इससे विदेश से मिले फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

Dengue Vaccine: जापान के ताकेदा फार्मा के साथ डील के बाद भारत में 2027 से बिकेगी डेंगू वैक्सीन, भारत के दवा नियामक ने जुलाई में दी थी मंजूरी

Dengue Vaccine: भारत में काफी समय से डेंगू के टीका की चर्चा हो रही है। लेकिन अब इस टीके के लिए लोगों को और इंतजार नहीं करना होगा। जापान के ताकेदा फार्मास्युटिकल के साथ करार के बाद मच्छरों के काटने से होने वाली इस बीमारी का टीका अगले साल से उपलब्ध होगा। ताकेदा की क्यूडेंगा डेंगू वैक्सीन जुलाई में भारत के दवा नियमक द्वारा मंजूर की गई पहला ऐसा टीका था। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह वैक्सीन भारत में 2027 के पहले छह महीनों में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने जापानी दवा बनाने वाली कंपनी ताकेदा फार्मास्युटिकल के साथ एक अहम करार किया है, जिसके तहत वह भारत में अपनी क्यूडेंगा डेंगू वैक्सीन का प्रचार और वितरण करेगी। ताकेदा फार्मास्युटिकल ने जुलाई में कहा, “हम 2030 तक हर साल 10 करोड़ डोज की वैश्विक विनिर्माण क्षमता तक पहुंचने के अपने लक्ष्य के बहुत करीब होंगे।” ताकेदा का कहना है कि पिछले दो दशकों में भारत में डेंगू के मामले 11 गुना बढ़ गए हैं।

क्या है क्यूडेंगा?

ताकेदा फार्मास्युटिकल के अनुसार, क्यूडेंगा को चार से 60 साल की उम्र के लोगों में डेंगू को रोकने के लिए दिया जाएगा। इसे सभी चार डेंगू वायरस सीरोटाइप से बचाने के लिए विकसित किया गया है। इस साल की शुरुआत में एक लेट-स्टेज ट्रायल में इस टीके की दूसरी डोज के एक साल बाद डेंगू से बचाव में 80.2% तक कारगर है। इसने 18 महीने बाद डेंगू से जुड़े हॉस्पिटलाइजेशन संबंधी खतरे के खिलाफ 90.4% असरदार साबित हुई है। क्यूडेंगा टीके की 0.5 मिली इंजेक्शन के तौर पर तीन महीने के अंतर पर दो डोज दर जाती है। यह टीका उन लोगों को भी लगाया जा सकता है, जिन्हें पहले डेंगू नहीं हुआ हो। इसस प्री-वैक्सीनेशन टेस्टिंग की जरूरत खत्म हो जाती है।

भारत में डेंगू का संकट

भारत में डेंगू के मामले आमतौर पर मानसून के दौरान और उसके बाद ज्यादा होते हैं। जमा हुआ पानी एडीज मच्छरों के पनपने की जगह बनाता है। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (NCVBDC) के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2025 में डेंगू के 1,13,450 मामले और 95 मौतें दर्ज की गईं।

अंडमान से उठ रहा नया चक्रवाती सिस्टम, एमपी से दिल्ली-यूपी, बिहार 24 सितंबर तक इन राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट

IMD Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 सितंबर को देश के मौसम को लेकर एक विस्तृत बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के ऊपर एक नया मौसमी सिस्टम आकार ले रहा है। इसके से 24 सितंबर तक देश के अधिकांश राज्यों में आंधी-तूफान, बिजली चमकने और भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने ये भी बताया है कि 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बनती जा रही हैं।

अंडमान सागर में बनेगा लो प्रेशर, ओडिसा-आंध्र की तरफ बढ़ेगा सिस्टम

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरी थाईलैंड के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तरी अंडमान सागर में उभरने की संभावना है। इसके असर से 19 सितंबर की शाम तक इसी क्षेत्र में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की उम्मीद है। इसके बाद यह धीरे-धीरे और मजबूत होकर अगले 3-4 दिनों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों की ओर रुख करेगा। इसके अलावा उत्तरी गुजरात, सिक्किम और पूर्वी बांग्लादेश पर चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र सक्रिय हैं। वहीं, सिक्किम से उत्तरी बंगाल की खाड़ी तक और मराठवाड़ा से दक्षिण-पूर्वी अरब सागर तक ट्रफ रेखाएं गुजर रही हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली-एनसीआर का मौसम (18 से 24 सितंबर)

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18 से 19 सितंबर के दौरान छिटपुट बारिश और गरज-चमक की संभावना है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 20 सितंबर तक हल्की से छिटपुट बारिश के आसार हैं। पूर्वी राजस्थान में 18 सितंबर को व्यापक बारिश होगी और बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। 19 सितंबर को भी यहां भारी बारिश हो सकती है जबकि 19 से 22 सितंबर के बीच छिटपुट बारिश जारी रहने की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 18 सितंबर और 23-24 सितंबर को छिटपुट बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 18 से 24 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।

मध्य और पूर्वी भारत: एमपी, बिहार और ओडिशा का हाल

पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 से 19 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। 18 और 24 सितंबर को पश्चिम मध्य प्रदेश में तथा 24 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट है। विदर्भ में 18-19 सितंबर और 21-24 सितंबर तक जबकि छत्तीसगढ़ में 19 से 24 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी। छत्तीसगढ़ में 22 से 24 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

बिहार में 18 से 24 सितंबर के बीच छिटपुट बारिश का अनुमान है जिसमें 18 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 19 व 24 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 23-24 सितंबर को भारी बारिश होगी। ओडिशा में 18-19 सितंबर और 22 सितंबर को भारी बारिश तथा 23-24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है।

18 सितंबर को ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 20 और 24 सितंबर को तथा अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय में 24 सितंबर को व्यापक बारिश होगी। 18 सितंबर को असम-मेघालय में और 19-20 सितंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में भारी बारिश का अलर्ट है। कोंकण और गोवा में 18 सितंबर तथा 21 से 24 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी। गुजरात क्षेत्र में 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र में 18 सितंबर को तथा 20 से 22 सितंबर तक भारी वर्षा हो सकती है।

दक्षिण भारत: 40-50 kmph की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

केरल व माहे और लक्षद्वीप में 18 से 24 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। तटीय कर्नाटक में 20 से 24 सितंबर, आंतरिक कर्नाटक व तेलंगाना में 19 से 24 सितंबर तक व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 18 से 22 सितंबर तक, केरल-माहे में 18-20 सितंबर व 24 सितंबर, तटीय व आंतरिक कर्नाटक में 20-24 सितंबर, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 18-24 सितंबर, तटीय आंध्र प्रदेश में 18-20 सितंबर व 23-24 सितंबर और तेलंगाना में 19 से 24 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है।

तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 18 से 22 सितंबर के बीच 40 से 50 किमी/घंटे की गति से (झोंके 60 किमी/घंटे तक) तेज हवाएं चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश व रायलसीमा में 18 से 22 सितंबर तक तेज सतही हवाएं चलेंगी। केरल और माहे में 18 सितंबर को मौसम गर्म और उमस भरा बना रहने का अनुमान है।

मछुआरों के लिए अलर्ट और समुद्री स्थिति

सोमालिया तट के पास और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 23 सितंबर तक तथा पश्चिम-मध्य अरब सागर में 18 सितंबर को मछुआरों को न जाने की सलाह दी गई है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के इलाकों में 23 सितंबर तक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 19 से 23 सितंबर तक और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी व म्यांमार तट के पास 21-22 सितंबर को तूफानी मौसम रहेगा।

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यूपी के इस गांव में बरसों से नहीं उठी कोई डोली और न आई बारात, जानिए क्यों यहां शादी करने से कतराते हैं लोग

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक गांव में शादी करना मुश्किल हो गया है। गांव का नाम सुनते ही शादी का इच्छुक वर या कन्या पक्ष दूर चले जाते हैं। लेकिन इसका शादी से कोई खास लेना-देना नहीं है। यहां न तो कई अपनी बेटी देना चाहता है और न यहां की लड़की से शादी करना चाहता है। इसकी वजह एक सड़क है, जिसके बारे में गांव वालों का कहना है कि वह दशकों से खराब हालत में है। सालों से सड़क बनने का इंतजार कर रहे ग्रामीण अब सड़क बनवाने की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए हैं।

लोगों के मुताबिक, मिर्जापुर के दांती और गौरा विसेन गांवों को जोड़ने वाली सड़क को सालों से बनाने की मांग की जा रही है। खस्ताहाल सड़क की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बच्चों के स्कूल जाने से लेकर मरीजों को मेडिकल सेंटर ले जाने की कोशिश करने वाले परिवारों तक, सभी मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

खरंजा फॉल्स और दांती के बीच की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। लेकिन लोगों को रास्ते की खराब हालत की वजह से वे यह दूरी 200 किमी जैसी लगती है। गांववालों का कहना है कि सड़क पथरीली है और उस पर आना-जाना मुश्किल हो जाता है। मानसून में हालत और खराब हो जाती है। गांववालों के लिए, जो सफर छोटा होना चाहिए, वह एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। सड़क की समस्या ने जरूरी सेवाओं तक पहुंच पर भी असर डाला है।

‘कोई भी अपनी बेटी इस गांव में नहीं देना चाहता’

गांववालों का कहना है कि सड़क की समस्या अब शादियों पर भी असर डालने लगी है। यहां रहने वाले धीरज मौर्य ने कहा कि बार-बार मरम्मत की मांग के बावजूद सड़क सालों से खराब हालत में है। मौर्य के मुताबिक, सड़क की हालत ने इतनी मुश्किलें पैदा कर दी हैं कि गांव के युवाओं को शादी के लिए साथी ढूंढने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा, “कोई भी अपनी बेटी इस गांव में नहीं देना चाहता।” उन्होंने कहा, “हम सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसीलिए अब हम धरना दे रहे हैं।” इसलिए यह मुद्दा सिर्फ़ ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से कहीं ज्यादा हो गया है।

दशकों पुरानी है सड़क की मांग

लोगों का दावा है कि आजादी के बाद से ही सड़क बनाने की मांग बार-बार उठाई जाती रही है। ग्रामीणों का दावा है कि वन विभाग ने जमीन से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए सड़क बनाने के लिए जरूरी जमीन नहीं दी है। इससे सड़क प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है और उन्हें मौजूदा रास्ते से ही जूझना पड़ रहा है।

‘यह सड़क जरूर बननी चाहिए’

स्थानीय निवासी रोहित शुक्ला ने कहा कि गांव वालों की मांग सही है। उन्होंने कहा, “हम सभी इस मांग का समर्थन करते हैं। यह सड़क जरूर बननी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि रास्ते की खराब हालत की वजह से, गांव वालों को कभी-कभी कई किलोमीटर ज्यादा सफर करना पड़ता है।

गांव वालों ने किया चुनाव का बॉयकॉट

सुनील कुमार पाल ने कहा कि लोगों ने पहले भी सड़क के मुद्दे पर कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा, “हमने पिछले साल भी वोट का बॉयकॉट किया था। हमें भरोसा दिलाया गया था कि सड़क ठीक कर दी जाएगी, लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुई है।”

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Rate Hike: त्योहारी सीजन में RBI दे सकता है झटका! बढ़ जाएगी आपकी EMI, बैंक FD पर भी पड़ेगा बड़ा असर

RBI Repo Rate Hike Expectations: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के बाद अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। देश में बढ़ती रिटेल इंफ्लेशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई भी अक्टूबर 2026 की MPC समीक्षा बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अगर दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.50% से बढ़कर 5.75% हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आरबीआई यह कदम क्यों उठा सकता है और इसका आपकी होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों पर क्या असर पड़ेगा।

आरबीआई क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट?

अमेरिकी फेड के फैसले के अलावा भारत के आंतरिक आर्थिक हालात भी आरबीआई को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई जो जुलाई में 4.45% थी। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, खाद्य वस्तुओं के दाम और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई 6% के ऊपरी दायरे को पार कर सकती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट का बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी।

एसबीआई, एचएसबीसी, डॉयचे बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बीपीएस की दो किश्तों में रेपो रेट बढ़ा सकता है।

होम लोन ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आरबीआई अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर आपके रिटेल लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक आपके लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे।इससे अगली रीसेट डेट पर या तो आपकी मासिक EMI बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।

इसे उदाहरण से समझे तो अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई में हर महीने ₹400 से ₹500 तक का एक्स्ट्रा इजाफा हो सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने पर अमूमन बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन लोन की तरह यह तुरंत लागू नहीं होता। बैंक बाजार में लिक्विडिटी, अपने एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) और फंड की जरूरतों के आधार पर ही एफडी दरों में रिवीजन करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक विशेष मैच्योरिटी वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे नए एफडी निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आज का मौसम: बिहार से बंगाल तक भारी बारिश और 50 kmph स्पीड तक आंधी! 17 सितंबर को इन राज्यों में बिगड़ेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट

IMD Weather Updates: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 17 सितंबर के लिए देश भर का मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में सुबह से दोपहर के दौरान हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। पूर्वानुमान के मुताबिक, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, गुजरात, तमिलनाडु और केरल के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश होगी। इसके साथ ही कई राज्यों में थंडरस्टॉर्म, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।

बिहार, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश का दायरा काफी व्यापक रहेगा। बिहार में 17 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, गांगेय पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश का अनुमान जताया गया है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पृथक क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में व्यापक बारिश की संभावना है, जबकि अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं। IMD ने 17 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी व्यापक बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार हैं।

उत्तर और पश्चिम भारत: आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट

उत्तर और पश्चिमी भारत के हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी रहेंगी। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में गरज-चमक और बिजली कड़कने के साथ व्यापक बारिश होने का अनुमान है। गुजरात के सौराष्ट्र एवं कच्छ के क्षेत्रों में व्यापक बारिश की संभावना है। यहां आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है।

दक्षिण भारत: तमिलनाडु और केरल में 40-50 kmph की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाओं का प्रकोप देखने को मिलेगा। केरल और माहे में व्यापक बारिश की संभावना है जबकि तटीय आंध्र प्रदेश व यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और केरल व माहे में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

दिल्ली-NCR का मौसम: हल्की बारिश और तापमान का हाल

दिल्ली-एनसीआर में 17 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। सुबह से दोपहर से पहले के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बहुत हल्की बारिश हो सकती है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 32°C से 34°C और न्यूनतम तापमान 23°C से 25°C के बीच रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6°C से 3°C तक कम रह सकता है, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा। उत्तर-पश्चिमी हवाएं सुबह के समय 10 किमी/घंटे और दोपहर में 15 किमी/घंटे की गति तक पहुंच सकती हैं। बाद में शाम के समय शांत हो जाएंगी।

17 सितंबर के बाद कैसा रहेगा देश का मौसम?

IMD के मुताबिक 17 सितंबर के बाद भी देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। पश्चिम मध्य प्रदेश में 18 और 19 सितंबर को व्यापक बारिश होने की संभावना है। ओडिशा में 19 सितंबर से व्यापक वर्षा की शुरुआत हो सकती है। 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

उत्तरी थाईलैंड के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर के आसपास उत्तरी अंडमान सागर में उभरेगा। इसके प्रभाव से 19 सितंबर को उसी क्षेत्र में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो अगले 3 से 4 दिनों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश तटों की ओर बढ़ेगा।

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कल का मौसम 17 सितंबर: दिल्ली-NCR से बिहार तक आंधी-बारिश का अलर्ट, जानिए कैसा रहेगा आपके शहर का मौसम

Weather forecast for September 17: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 17 सितंबर के लिए देश भर का मौसम पूर्वानुमान और अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के मुताबिक देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों और मौसमी प्रणालियों के असर से झमाझम बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका बनी हुई है। उत्तर भारत में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा से लेकर पूर्व में बिहार, पश्चिम बंगाल और दक्षिण में तमिलनाडु व केरल तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा।

बिहार, बंगाल और केरल समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के 17 सितंबर के बुलेटिन के मुताबिक देश के 8 प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय में अलग अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कई हिस्सों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और झारखंड में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी की चेतावनी

उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों में तेज हवाओं और आंधी-तूफान के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर थंडरस्टॉर्म के साथ आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। झारखंड, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में भी अलग-अलग जगहों पर 40-50 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाओं के साथ बिजली कड़कने के आसार हैं।

राजस्थान, बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 30-40 किमी/घंटे की गति से चलेंगी हवाएं

देश के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, गांगेय पश्चिम बंगाल, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में थंडरस्टॉर्म, बिजली चमकने और 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक मेंतेज सतही हवाएं चलने का भी अनुमान जताया गया है।

यूपी, एमपी, राजस्थान और बिहार में बिजली चमकने की आशंका

मौसम विभाग ने देश के 13 से अधिक राज्यों में आकाशीय बिजली कड़कने लेकर विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। बिहार, उत्तर प्रदेश (पश्चिम राजस्थान व पूर्वी राजस्थान), मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य और लक्षद्वीप में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली चमकने की आशंका है।

समुद्र में तूफानी हलचल: मछुआरों के लिए चेतावनी

समुद्री क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तरी सोमालिया तट के साथ और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर के इलाकों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 65 किमी/घंटे तक पहुंच सकते हैं।

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दक्षिण-पूर्व और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, दक्षिणी श्रीलंका तटों से लगे इलाकों तथा दक्षिणी अंडमान सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी/घंटे (झोंके 65 किमी/घंटे तक) की गति से तूफानी मौसम बना रहेगा। इसके अलावा अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्वी व दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में 40 से 50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है।

यूपीआई पेमेंट पर लगेगा शुल्क

नई दिल्ली। आखिरकार केंद्र सरकार ने यूपीआई से पेमेंट करने पर शुल्क लगाने का फैसला कर लिया। लंबे समय से चल रही अटकलों को समाप्त करते हुए सरकार ने ऐलान किया है कि अब किसी भी वस्तु या सेवा के लिए यूपीआई से दो हजार रुपए से ज्यादा का भुगतान करने पर 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा। हालांकि सरकार ने यह भी तय किया है कि शुल्क की अधिकतम सीमा तीन सौ रुपए होगी। यानी कितने रुपए का भुगतान हो, अधिकतम शुल्क तीन सौ रुपए होगा।

सरकार की ओर से बताया गया है कि 0.4 फीसदी शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि व्यापारी से लिया जाएगा। दो हजार रुपए तक के भुगतान पर ग्राहक या व्यापारी किसी को कोई शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है। रूपे डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकार ने रेलवे, संचार आदि कई सेवाओं के लिए पांच रुपए का फिक्स्ड चार्ज तय किया है।

गौरतलब है कि अगस्त में संसद के मानसून सत्र में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास हुआ था। उसके बाद से यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने चर्चा शुरू हो गई थी। बहरहाल, वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को बिना किसी शुल्क के पैसा भेज सकता है।

इसे लेकर भी सवाल उठाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी को एक लाख रुपए भेजे तब भी उसका पर कोई शुल्क नहीं लगेगा लेकिन दो हजार रुपए से ज्यादा का भुगतान किसी वस्तु या सेवा के लिए करने पर शुल्क देना होगा। सरकार ने तीन सौ रुपए के अधिकतम शुल्क की जो सीमा लगाई है उसके मुताबिक 75 हजार या उससे ज्यादा के हर लेन देन पर तीन सौ रुपए का ही शुल्क लगेगा।

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक रेलवे, संचार सेवाओं, इंश्योरेंस और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों में दो हजार रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर पांच रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने यूपीआई को प्रमोट करने की योजना 2021 में शुरू की थी और तब कहा गया था कि इसे फ्री रखा जाएगा। इसके तहत ग्राहक से छोटे दुकानदार को होने वाले दो हजार रुपए तक के यूपीआई पेमेंट पर 0.15 फीसदी इंसेंटिव दिया जाता था। 2024-25 तक इस पर 8,276 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया।

बहरहाल, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में जून 2026 तक करीब 55.5 करोड़ यूपीआई यूजर्स थे। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को 198 लाख करोड़ रुपए का भुगतान यूपीआई के जरिए हुआ। इनमें दो हजार रुपए से ज्यादा की लेनदेन सिर्फ चार फीसदी हुई, लेकिन इनका कुल मूल्य 131 लाख करोड़ रुपए था, जो यूपीआई के कुल भुगतान का 66 फीसदी है।

अब चारधाम जाना होगा बेहद आसान, दिल्ली से ऋषिकेश सिर्फ 2.5 घंटे में! इस प्रोजेक्ट का 75% काम पूरा

Delhi To Rishikesh Namo Bharat: दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड और चारधाम जाने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा अपडेट आया है। आने वाले समय में दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सिर्फ 2.5 घंटे में पूरा हो सकेगा, जबकि कर्णप्रयाग तक का सफर जो सड़क मार्ग से 12-13 घंटे लेता है, वह महज 5 से 6 घंटे में पूरा हो जाएगा।

यह मुमकिन होने जा रहा है सरकार के दो बड़े रेल प्रोजेक्ट्स के कारण। पहला, प्रस्तावित मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत कॉरिडोर और दूसरा, निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन। आइए आपको बताते हैं कि यह पूरा प्रोजेक्ट क्या है, इसका काम कहां तक पहुंचा है और इससे श्रद्धालुओं को क्या-क्या सहूलियतें मिलेंगी।

सिर्फ 2.5 घंटे में दिल्ली से ऋषिकेश

दिल्ली से मेरठ तक नमो भारत (RRTS) ट्रेन की कनेक्टिविटी पहले से ही चालू है। अब सरकार इस कॉरिडोर को मेरठ से आगे हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के तहत पूरा होता है, तो दिल्ली-एनसीआर के लोग महज 2 से 2.5 घंटे में ऋषिकेश पहुंच जाएंगे। वीकेंड पर दिल्ली-देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर लगने वाले घंटों के ट्रैफिक जाम से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का 6 घंटे का सफर अब मात्र 2 घंटे में!

गढ़वाल के दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सफर को आसान बनाने के लिए 127 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट का लगभग 75% सिविल वर्क पूरा हो चुका है। हाल ही में 11 सितंबर को 10 किमी लंबी ‘एस्केप टनल-1’ का ब्रेकथ्रू सफलता पूर्वक हासिल किया गया। हिमालय के कठिन और संवेदनशील इलाकों से गुजरने के कारण 127 किमी लंबे इस रूट का 105 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा।

कब चालू होगी ट्रेन?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवपुरी-ब्यासी तक का सेक्शन 2028 तक चालू होने की उम्मीद है, जबकि कर्णप्रयाग तक की पूरी रेल लाइन 2029 तक शुरू हो जाएगी। बता दें कि वर्तमान में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग जाने में सड़क मार्ग से 6 से 7 घंटे लगते हैं, लेकिन ट्रेन शुरू होने के बाद यह दूरी सिर्फ 2 से 2.5 घंटे में तय हो जाएगी।

केदारनाथ और बद्रीनाथ के श्रद्धालुओं को कैसे मिलेगा फायदा?

यह रेलवे लाइन सीधे केदारनाथ या बद्रीनाथ मंदिर तक तो नहीं पहुंचेगी, लेकिन यह श्रद्धालुओं को मुख्य बेस कैंप के बहुत करीब पहुंचा देगी:

बद्रीनाथ जाने वालों के लिए: यात्री ट्रेन से सीधे कर्णप्रयाग उतरेंगे और वहां से सड़क मार्ग (बस या टैक्सी) के जरिए जोशीमठ होते हुए बेहद कम समय में बद्रीनाथ पहुंच सकेंगे।

केदारनाथ जाने वालों के लिए: ट्रेन से रुद्रप्रयाग या तिलणी स्टेशन उतरकर यात्री सीधे सोनप्रयाग/गौरीकुंड के लिए सड़क मार्ग ले सकेंगे, जो केदारनाथ पैदल यात्रा का मुख्य पड़ाव है।

बुजुर्गों के लिए वरदान: पहाड़ों के संकरे और घुमावदार रास्तों पर घंटों बस या कार में सफर करना बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए काफी तकलीफदेह होता था। ट्रेन चलने से उनका सफर बेहद आरामदायक और सुरक्षित हो जाएगा।

गढ़वाल के 5 जिलों की बदलेगी तस्वीर

यह रेल लाइन उत्तराखंड के 5 प्रमुख पहाड़ी जिलों से होकर गुजरेगी: देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली।

12 नए रेलवे स्टेशन: इस रूट पर 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिनमें ऋषिकेश, मुनि की रेती, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर गढ़वाल, तिलणी, गौचर और कर्णप्रयाग शामिल हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यात्रा और पर्यटन के अलावा, इस रेल नेटवर्क से स्थानीय निवासियों, किसानों, व्यापारियों और सेब-फल उत्पादकों को अपनी उपज बड़े शहरों के बाजारों तक आसानी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

Namo Bharat: 3 घंटे नहीं अब 90 मिनट में पूरा होगा दिल्ली-करनाल का सफर! नमो भारत के नए रूट पर बड़ा अपडेट

चारधाम यात्रा के लिए रेलवे का यह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट उत्तराखंड के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। जब दिल्ली से कर्णप्रयाग का पूरा सफर 12 घंटे से घटकर महज 5-6 घंटे रह जाएगा, तो इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं का समय और पैसा बचेगा, बल्कि मानसून और भूस्खलन के समय होने वाली दुर्घटनाओं में भी काफी कमी आएगी।

‘₹30,500 करोड़ खर्च वाला ये सिस्टम बंद कर दो…’, अश्नीर ग्रोवर ने UPI पर चार्ज लगाने के बीच समझाया ये गणित

Ashneer Grover On UPI MDR Charge: भारतपे के सह-संस्थापक और अपनी किताब ‘दोगलापन’ के लिए मशहूर अश्नीर ग्रोवर ने UPI के नए नियमों पर एक गजब का फार्मूला बताया है। सरकार के ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने की अटकलों के बीच उन्होंने सरकार और बैंकिंग सिस्टम को आड़े हाथों लिया है।

हाल ही में सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर साफ किया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांसजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। हालांकि, इस नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतानों पर चार्ज लगाने या न लगाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इसी को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया (X) पर आंकड़ों के साथ पूरा गणित समझाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

आइए आपको बताते हैं कि अश्नीर ग्रोवर ने क्या गणित बिठाया है और सरकार आखिर UPI पर चार्ज का फ्रेमवर्क क्यों ला रही है।

बंद करो ATM, UPI पर टैक्स की बलि क्यों?

अश्नीर ग्रोवर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना सिर्फ टैक्स वसूली जैसा है। उन्होंने कहा, ‘UPI भारत की एक ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि है जिसे पूरी दुनिया मानती है, पर अब यह टैक्स की बलि चढ़ेगी।’

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, देश में कैश और ATM इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का सालाना खर्च करीब ₹30,500 करोड़ आता है। ग्रोवर की सलाह है कि अगर सरकार को खर्च कम ही करना है, तो एटीएम बंद कर दे और यूपीआई को बढ़ावा दे। ग्रोवर ने याद दिलाया कि RBI ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया है, सभी लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ है और NPCI के पास टैक्स से पहले ₹1,888 करोड़ का सरप्लस है।

‘जब बैंक और आरबीआई इतना भारी मुनाफा कमा रहे हैं, तो फिर यूपीआई की वजह से किसका नुकसान हो रहा है? सरकार ऐसी कौन सी सब्सिडी दे रही है जिससे नुकसान हो रहा है?’

सरकार का नया नियम: ₹2,000 की लिमिट और MDR

14 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI या RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट ऐप कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं वसूल सकते।

संसद के मानसून सत्र (जो 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुआ) में पेमेंट एक्ट की धारा 10A में संशोधन किया गया। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर MDR लगाने का एक रास्ता तैयार हो गया है।

NPCI के नेतृत्व वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ अब यह तय करेगी कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर कितना MDR चार्ज लगाया जाएगा।

सरकार क्यों लाना चाहती है MDR फ्रेमवर्क?

सरकार का तर्क है कि UPI अब काफी बड़ा हो चुका है और इसके सुरक्षित संचालन के लिए पैसों की जरूरत है। लेनदेन की भारी मात्रा को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत है। सरकार का मानना है कि UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना मुमकिन नहीं है।

जब डिजिटल पेमेंट कंपनियों को कमाई (MDR) का जरिया मिलेगा, तो इस सेक्टर में नई कंपनियां आएंगी, जिससे कॉम्पिटिशन और इनोवेशन बढ़ेगा।

कितना बड़ा हो चुका है देश का UPI का नेटवर्क?

NPCI द्वारा संचालित UPI ने पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी है। वित्त वर्ष 2017 में जहां UPI के जरिए ₹0.07 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2026 (FY26) में यह बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया। यानी 10 सालों में 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।

UPI अब भारत के अलावा दुनिया के 11 देशों में इस्तेमाल हो रहा है। उज्बेकिस्तान इस लिस्ट में शामिल होने वाला नया देश बना है। इसके अलावा सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में भी यूपीआई स्वीकार किया जाता है।