मुजफ्फरनगर में 97 केस की फाइलों पर फिर उठे सवाल, जज रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में क्या लिखा?

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 97 हत्या के मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने NDPS Act के एक पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए इन फाइलों को वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। रवि कुमार दिवाकर मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका जन्म जुलाई 1980 में हुआ था। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने B.Com और LLM की पढ़ाई की है। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने अतिरिक्त सिविल जज के तौर पर उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कदम रखा। तब से अब तक उन्होंने न्यायिक सेवा में करीब 17 साल पूरे किए हैं। इस दौरान उनकी तैनाती उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रही और उन्होंने सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। फिलहाल वह मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं।

दरअसल, जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हत्या के 97 लंबित मामलों की पत्रावलियां अगस्त में जिला एवं सत्र न्यायालय में वापस ली गई थीं। इससे पहले उनकी अदालत में हत्या से जुड़े कई मामलों में फैसले हुए थे। अब एक एनडीपीएस मामले के फैसले में जज ने इन पत्रावलियों को वापस लेने के आदेश और उसकी कानूनी प्रक्रिया पर अपनी टिप्पणी दर्ज की है।

रिटायरमेंट से 13 दिन पहले लिया गया था फैसला

फैसले में दर्ज जज की टिप्पणी के मुताबिक, 97 पत्रावलियों को वापस लेने का आदेश तत्कालीन जिला जज के रिटायरमेंट से करीब 13 दिन पहले जारी हुआ था। जज ने सवाल उठाया कि इन मामलों को वापस लेने के आदेश में इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, इन 97 मामलों में ऐसे मुकदमे भी शामिल थे जिनकी सुनवाई उनकी अदालत में आगे बढ़ चुकी थी। जज दिवाकर ने अपने फैसले में ऐसे मामलों को वापस लेने की कानूनी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की।

‘पार्ट-हर्ड’ मामलों को लेकर क्या है सवाल?

मामले का अहम हिस्सा ‘पार्ट-हर्ड’ यानी ऐसे मुकदमों से जुड़ा है जिनकी सुनवाई शुरू हो चुकी है। जज दिवाकर ने अपने फैसले में दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं का हवाला दिया।

उनकी टिप्पणी के मुताबिक, ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी प्रशासनिक आदेश में कारण स्पष्ट नहीं किया गया है तो उसकी वैधानिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

किस मामले में सुनाया गया फैसला?

यह टिप्पणी मुजफ्फरनगर के अशोक भारती से जुड़े पुराने NDPS मामले में फैसला सुनाते समय सामने आई। मामला वर्ष 2015 का था और आरोपी पर 150 ग्राम चरस रखने का आरोप था।

अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों में कमियां पाईं। रिपोर्ट के अनुसार, बरामदगी के दौरान स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी, साक्ष्यों में अंतर और NDPS कानून के जरूरी प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल सामने आए। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

पहले भी 97 फाइलें चर्चा में आई थीं

97 पत्रावलियों का मामला पहली बार अगस्त में सामने आया था। उस समय रिपोर्टों में बताया गया था कि जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हत्या के मामलों की 100 के आसपास लंबित फाइलें जिला जज की अदालत में वापस ली गई थीं। बाद की रिपोर्टों में संख्या 97 बताई गई।

रवि कुमार दिवाकर की अदालत इस साल हत्या के कई मामलों में मृत्युदंड सुनाने को लेकर भी चर्चा में रही है। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर के बीच उनकी अदालत ने हत्या के मामलों में कई दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

जज ने फैसले में न्याय व्यवस्था पर भी टिप्पणी की

NDPS मामले के फैसले में जज ने न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक व्यवस्था में अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी सीमाओं के भीतर होना चाहिए।

इस तरह 97 मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। जज रवि कुमार दिवाकर की हालिया टिप्पणी के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े सवालों के संदर्भ में फिर चर्चा में आ गया है।

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी! फिर बन रहा नया वेदर सिस्टम, MP, छत्तीसगढ़, यूपी समेत 10 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश भर में मानसूनी बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 सितंबर को जारी ताजा वेदर बुलेटिन में एक नए और ताकतवर वेदर सिस्टम के एक्टिव होने की बड़ी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर के आसपास पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से सटे उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तटों पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की पूरी संभावना है।

इस नए सिस्टम और देश के अलग-अलग हिस्सों में एक्टिव साइक्लॉनिक सर्कुलेशन की वजह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र समेत 10 से अधिक राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है।

बीते 24 घंटों का हाल: अंडमान और असम में रिकॉर्ड 20 सेमी तक बारिश

बीते 24 घंटों में देखें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और असम में अलग-अलग जगहों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मिजोरम में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

एक्टिव वेदर सिस्टम: उत्तर प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक बने कई सिस्टम

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर है, जबकि पूर्वी सिरा सामान्य स्थिति के करीब बना हुआ है। निचले ट्रोपोस्फीयर में पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के इस सिस्टम तक एक ट्रफ लाइन गुजर रही है।

दक्षिण तेलंगाना से मन्नार की खाड़ी तक और उत्तरी हरियाणा के ऊपर भी अलग-अलग ट्रोपोस्फेरिक स्तरों पर साइक्लॉनिक सर्कुलेशन एक्टिव हैं। इन मौसमी प्रणालियों के बीच 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया लो-प्रेशर सिस्टम मानसूनी हवाओं को और अधिक बल देगा।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 10 से 14 सितंबर तक भारी बारिश

IMD के मुताबिक मध्य भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश में काफी तेजी देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 10 से 14 सितंबर तक अधिकांश जगहों पर बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ झमाझम बारिश होगी। इस दौरान छत्तीसगढ़ में 10 से 14 सितंबर के बीच और पूर्वी मध्य प्रदेश में 12 व 13 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 से 14 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी, जिसमें 12 और 13 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 12 सितंबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है जबकि 8 से 14 सितंबर तक छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा में 10 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वी भारत के राज्यों में 8 से 14 सितंबर के दौरान भारी बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। ओडिशा में 10 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद 11 और 12 सितंबर को भी भारी बारिश जारी रहेगी। 8 सितंबर को ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में तेज आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है। बिहार में 8 से 10 सितंबर और 14 सितंबर को भारी बारिश दर्ज हो सकती है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 8 सितंबर को और फिर 11 से 13 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड में 9 से 11 सितंबर तक और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 8 और 12 से 14 सितंबर के बीच मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 12 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है जबकि 8, 9, 11, 13 और 14 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 8 से 12 सितंबर के बीच लगातार भारी बारिश और बिजली गिरने का सिलसिला बना रहेगा।

उत्तर-पश्चिम भारत: उत्तराखंड में लगातार बारिश, मैदानी इलाकों में छिटपुट बौछारें

उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तराखंड में 10 से 14 सितंबर के दौरान अधिकांश जगहों पर बारिश होगी और इस पूरे अंतराल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बाकी हिस्सों में 14 सितंबर तक छिटपुट स्थानों पर बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने के साथ हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी।

पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण, गुजरात और तटीय आंध्र प्रदेश में बिगड़ेगा मौसम

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 8 से 14 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहेगी जहां 12 और 13 सितंबर को भारी बारिश होने का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र में 12 और 13 सितंबर को और मध्य महाराष्ट्र में 13 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बंगाल की खाड़ी के नए सिस्टम का सीधा असर दिखेगा।

तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11 से 14 सितंबर के बीच तथा तेलंगाना में 11 से 13 सितंबर के बीच भारी बारिश होगी। केरल, माहे और तटीय कर्नाटक में 10 से 12 सितंबर के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु में 8 से 12 सितंबर तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही और झोंकेदार हवाएं चलेंगी।

गर्मी व उमस और मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

मौसम विभाग ने 8 और 9 सितंबर को केरल व माहे में और 8 से 10 सितंबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश व यनम में मौसम के बेहद गर्म और उमस भरा रहने की संभावना जताई है। समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए IMD ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है।

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सोमालिया तट के पास और अरब सागर के हिस्सों में 13 सितंबर तक तथा ओमान तट के पास 11 सितंबर तक तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। वहीं अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के आसपास 10 से 13 सितंबर के दौरान स्थिति खराब रहेगी, इसलिए मछुआरों को इन क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

रेलवे का बड़ा मास्टरप्लान! गुजरात-MP के बीच दौड़ेंगी ज्यादा ट्रेनें, इस बिजी रूट का होने जा रहा कायाकल्प

Gujarat Rail Connectivity: गुजरात में रेल कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलने वाला है, क्योंकि इंडियन रेलवे वडोदरा और रतलाम के बीच लगभग 259 किलोमीटर की दूरी में दो और रेलवे लाइनें जोड़ने की योजना बना रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम रेलवे (WR) इस व्यस्त रेल रूट पर तीसरी और चौथी लाइन बनाएगा। यह रूट गुजरात को मध्य प्रदेश और आगे उत्तर भारत से जोड़ता है। नई रेल लाइनों के बनने से इस रूट पर ट्रेनों का दबाव कम होने की उम्मीद है। बता दें कि इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां चलती हैं। ऐसे में दो नई लाइनें बनने से ट्रेनों की आवाजाही आसान और बेहतर हो सकती है।

वडोदरा-रतलाम सेक्शन ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’ रेल नेटवर्क का हिस्सा है और दिल्ली-मुंबई के बीच चलने वाली ट्रेनों के लिए एक अहम कड़ी है। दो और लाइनें बनने से, इंडियन रेलवे के पास इस कॉरिडोर पर ट्रेनें चलाने की ज्यादा क्षमता होगी। इससे भीड़ कम होने और पैसेंजर व मालगाड़ी सेवाओं का शेड्यूल तय करने में रेलवे अधिकारियों को ज्यादा आसानी होने की उम्मीद है।

यात्रियों के लिए, ज्यादा क्षमता का मतलब ट्रेन का बेहतर और ज्यादा भरोसेमंद संचालन हो सकता है, खासकर उस रूट पर जहां अभी पैसेंजर और मालगाड़ियां सीमित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं।

वेस्टर्न रेलवे ने कहा कि इस अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर से ट्रेनों का संचालन तेज, बेहतर, सुरक्षित और समय पर होने की उम्मीद है।

यह प्रोजेक्ट गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकता है और साथ ही इस रूट पर औद्योगिक और कमर्शियल गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है।

विश्वामित्री-डभोई रेलवे लाइन पर बनेगा दूसरा ट्रैक

वडोदरा क्षेत्र में एक और बड़ा रेलवे अपग्रेड होने जा रहा है। 33 किलोमीटर लंबी विश्वामित्री-डभोई रेलवे लाइन को लगभग 394 करोड़ रुपये की लागत से डबल किया जाएगा।

इस रूट पर अभी सिर्फ एक ही रेलवे लाइन है, जिससे इस सेक्शन पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या सीमित हो जाती है। ट्रैक को डबल करने से क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनें ज्यादा आसानी से चल पाएंगी।

गौरतलब है कि इस अपग्रेड से ट्रेनों के संचालन में ज्यादा लचीलापन आएगा, जिससे इस इलाके में रेल सेवाओं की समय-पाबंदी और कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी

विश्वामित्री-डभोई रूट खास तौर पर अहम है क्योंकि यह गुजरात के प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक कनेक्टिविटी देता है। इसलिए, इस डबलिंग प्रोजेक्ट से न सिर्फ रेगुलर रेल यात्रियों को, बल्कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जाने वाले टूरिस्ट्स को भी फायदा होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, एक अतिरिक्त ट्रैक होने से ट्रेनों के ऑपरेशन में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जिससे इस रूट पर यात्रा ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है और इस लोकप्रिय डेस्टिनेशन के लिए कुल रेल कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।

यात्रियों के लिए इन प्रोजेक्ट्स का क्या मतलब है?

इन दोनों प्रोजेक्ट्स का मकसद गुजरात के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क में ट्रेनों की क्षमता बढ़ाना है। वडोदरा-रतलाम के बीच 259 किलोमीटर लंबे रेल रूट पर नई लाइनें बनने से मध्य प्रदेश, उत्तर भारत और दिल्ली-मुंबई रूट की ओर जाने वाले यात्री और माल परिवहन को मजबूती मिलेगी। वहीं, 33 किलोमीटर लंबे विश्वामित्री-दभोई रूट पर दूसरी लाइन बनने से वडोदरा और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा व्यस्त रूटों पर ज्यादा क्षमता का होना है, जिससे इंडियन रेलवे को ट्रेनें चलाने, माल की ढुलाई को मैनेज करने और भीड़-भाड़ कम करने में ज्यादा आसानी होगी।

कारोबारियों के लिए, अतिरिक्त रेल क्षमता से बड़े औद्योगिक और कमर्शियल सेंटर्स को जोड़ने वाले कॉरिडोर पर माल की ढुलाई ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकेगी।

इसलिए, ये प्रोजेक्ट्स गुजरात में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विस्तार को दिखाते हैं, जिनमें रोजाना यात्रियों के सफर और लंबी दूरी तक माल की ढुलाई, दोनों को बेहतर बनाने की क्षमता है।

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Judge Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सिर्फ पांच महीने में 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके कोर्ट में लंबित हत्या और गंभीर अपराधों से जुड़े करीब 100 मामलों को अब दूसरे कोर्ट में भेज दिया गया है। इनमें ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें मौत की सजा या उम्रकैद का प्रावधान है। न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई’ के मुताबिक, मुजफ्फरनगर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले पांच महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद उनके कोर्ट में लंबित करीब 100 गंभीर आपराधिक मामलों को प्रशासनिक आदेश के जरिए दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार के मुताबिक, ये मामले अब डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में जाएंगे। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में प्रशासनिक आदेश में 97 मामलों को ‘रिकॉल्ड (recalled)’ किए जाने की बात सामने आई है। यानी शुरुआती खबरों में बताए गए करीब 100 मामलों की संख्या प्रशासनिक रिकॉर्ड में 97 है।

आखिर क्यों ट्रांसफर किए गए इतने मामले?

मुजफ्फरनगर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी के अनुसार, वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों के बीच यह आशंका थी कि जज दिवाकर के सामने लंबित गंभीर मामलों में भी मौत की सजा सुनाई जा सकती है। इसके बाद जिला जज ने प्रशासनिक आदेश के जरिए मामलों को अपने कोर्ट में वापस बुला लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केस ट्रांसफर करना जिला जज के अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकारी वकील के मुताबिक, ट्रांसफर किए गए मामलों में हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, जिनमें कानून के तहत मौत या उम्रकैद जैसी सजा हो सकती है।

दहेज हत्या के दोषी नदीम को फांसी की सजा सुनाई

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को सोमवार (7 सितंबर) को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने ‘पीटीआई’ को बताया कि अपर जिला एवं सत्र जज रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी नदीम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 302 और 504 के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

8 साल पुराना है केस

उन्होंने बताया कि यह मामला आठ साल पुराना है। इसमें नदीम पर आरोप था कि उसने 23 जुलाई 2018 को मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी शहजादी (23) को आग लगा दी थी। कुमार ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मौत से पहले शहजादी का बयान दर्ज किया गया था। इसमें उसने कथित रूप से अपने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को नदीम, उसकी मां शमशिदा और बहन सोनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। कुमार ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में सोनी को बरी कर दिया गया। जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान शमशिदा की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि शहजादी और नदीम का विवाह 10 जनवरी 2015 को हुआ था।

23 लोगों को मौत की सजा के बाद एक्शन

सरकारी वकील के मुताबिक, सोमवार के फैसले के बाद जज दिवाकर की अदालत ने पिछले पांच-छह महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। इससे पहले, अगस्त में जज दिवाकर की अदालत में लंबित करीब 100 हत्या के मामलों को प्रशासनिक आदेश के तहत डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था।

कुलदीप कुमार ने बताया था कि मौत की सजा या उम्रकैद से जुड़े अपराधों वाले इन मामलों को दिवाकर की अध्यक्षता वाली फास्ट ट्रैक अदालत से डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज सिंह की अदालत में भेजा गया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया था कि यह ट्रांसफर वकीलों और वादकारियों के बीच अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने की आशंकाओं के बीच किया गया था।

कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

रवि कुमार दिवाकर का जन्म जुलाई 1980 में हुआ था। वह मूल रूप से यूपी की राजधानी लखनऊ के रहने वाले बताए जाते हैं। उन्होंने B.Com और LLM की पढ़ाई की है। वर्ष 2009 में वह अतिरिक्त सिविल जज के तौर पर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया।

इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में न्यायिक जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी पोस्टिंग सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली समेत कई जगहों पर रही। नवंबर 2025 से वह मुजफ्फरनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) के तौर पर तैनात हैं।

2022 में ज्ञानवापी मामले से देशभर में चर्चा में आए

जज रवि कुमार दिवाकर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान साल 2022 में मिली थी। उस समय वह वाराणसी में सिविल जज के पद पर तैनात थे। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वीडियोग्राफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था। यह मामला देश के सबसे चर्चित कानूनी और धार्मिक विवादों में शामिल हो गया और उनके आदेश की व्यापक चर्चा हुई।

5 महीने में 23 मौत की सजाएं

मुजफ्फरनगर में उनकी अदालत के फैसलों ने हाल के महीनों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच उन्होंने 11 मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। इनमें हत्या, अपहरण और लूट के दौरान हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। कई मामलों में अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ यानी दुर्लभतम से दुर्लभ कैटेगरी का माना।

कुछ चर्चित प्रमुख मामलों की लिस्ट

  • 6 अप्रैल: वकील मोहम्मद समीर की 2019 में हत्या के मामले में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। मामला कथित तौर पर ₹45 लाख के आर्थिक विवाद से जुड़ा था।
  • 28 अप्रैल: 2019 के एक हत्या मामले में एक महिला और उसके तीन बेटों समेत चार लोगों को मौत की सजा दी गई।
  • 30 मई: 2011 में एक महिला और उसके छह वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में रहिस को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 20 जून: राजेंद्र सैनी हत्याकांड में गजेंद्र और रामकिरण को फांसी की सजा सुनाई गई।
  • 2 जुलाई: ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड रतिराम की हत्या के मामले में दीपक को मौत की सजा दी गई।
  • 6 जुलाई: 2010 में राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उसके सहयोगी सहदेव को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 17 जुलाई: 2011 में लूट की कोशिश के दौरान किसान राज सिंह की हत्या के मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई।
  • 12 अगस्त: 1999 में ₹5 लाख की फिरौती के लिए लकड़ी व्यापारी सलीम के अपहरण और हत्या के मामले में शाहनवाज को मौत की सजा दी गई।
  • 13 अगस्त: शामली में पुरानी रंजिश से जुड़े 2014 के हत्या मामले में रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 7 सितंबर: जज रवि की अदालत ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को 7 सितंबर को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

क्या इन सभी को फांसी दे दी जाएगी?

ऐसा नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है। सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। उसे हाई कोर्ट की पुष्टि की आवश्यकता होती है। इसलिए जज दिवाकर द्वारा सुनाई गई 22 मौत की सजाओं का मतलब यह नहीं है कि सभी दोषियों को तत्काल फांसी दी जाएगी।

1 साल में पूरे UP की तुलना में कितना बड़ा आंकड़ा?

इस फैसलों की संख्या इसलिए भी असामान्य मानी गई क्योंकि पूरे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान ट्रायल कोर्ट ने 20 मामलों में कुल 28 मौत की सजाएं सुनाई थीं। इसके मुकाबले मुजफ्फरनगर की एक फास्ट-ट्रैक अदालत से कुछ ही महीनों में 22 मौत की सजाएं सामने आईं। जज रवि दिवाकर ने अकेले मुजफ्फरनगर में ही 23वीं फांसी की सजा सुनाते हुए फैसले में लिखा, “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना पसंद नहीं करूंगा।”

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उन्होंने अपने फैसले में आगे लिखा है, “जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चलता हूं, तब तक सर्विस करूंगा, अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा होगा। मुझे पश्चिम के एक माफिया/गैंगस्टर द्वारा यह संदेश भी भिजवाया गया कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां हटवाई गई हैं, अगर मेरे पीछे पड़े तो जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे।”