Judge Ravi Kumar Diwakar: यूपी के जज रवि कुमार दिवाकर ने 5 महीनों में 23 को सुनाई फांसी की सजा! उन सभी की पूरी लिस्ट जिन्हें अब तक वो दे चुके डेथ सेंटेंस

Judge Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सिर्फ पांच महीने में 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके कोर्ट में लंबित हत्या और गंभीर अपराधों से जुड़े करीब 100 मामलों को अब दूसरे कोर्ट में भेज दिया गया है। इनमें ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें मौत की सजा या उम्रकैद का प्रावधान है। न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई’ के मुताबिक, मुजफ्फरनगर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले पांच महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद उनके कोर्ट में लंबित करीब 100 गंभीर आपराधिक मामलों को प्रशासनिक आदेश के जरिए दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार के मुताबिक, ये मामले अब डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में जाएंगे। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में प्रशासनिक आदेश में 97 मामलों को ‘रिकॉल्ड (recalled)’ किए जाने की बात सामने आई है। यानी शुरुआती खबरों में बताए गए करीब 100 मामलों की संख्या प्रशासनिक रिकॉर्ड में 97 है।

आखिर क्यों ट्रांसफर किए गए इतने मामले?

मुजफ्फरनगर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी के अनुसार, वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों के बीच यह आशंका थी कि जज दिवाकर के सामने लंबित गंभीर मामलों में भी मौत की सजा सुनाई जा सकती है। इसके बाद जिला जज ने प्रशासनिक आदेश के जरिए मामलों को अपने कोर्ट में वापस बुला लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केस ट्रांसफर करना जिला जज के अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकारी वकील के मुताबिक, ट्रांसफर किए गए मामलों में हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, जिनमें कानून के तहत मौत या उम्रकैद जैसी सजा हो सकती है।

दहेज हत्या के दोषी नदीम को फांसी की सजा सुनाई

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को सोमवार (7 सितंबर) को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने ‘पीटीआई’ को बताया कि अपर जिला एवं सत्र जज रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी नदीम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 302 और 504 के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

8 साल पुराना है केस

उन्होंने बताया कि यह मामला आठ साल पुराना है। इसमें नदीम पर आरोप था कि उसने 23 जुलाई 2018 को मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी शहजादी (23) को आग लगा दी थी। कुमार ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मौत से पहले शहजादी का बयान दर्ज किया गया था। इसमें उसने कथित रूप से अपने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को नदीम, उसकी मां शमशिदा और बहन सोनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। कुमार ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में सोनी को बरी कर दिया गया। जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान शमशिदा की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि शहजादी और नदीम का विवाह 10 जनवरी 2015 को हुआ था।

23 लोगों को मौत की सजा के बाद एक्शन

सरकारी वकील के मुताबिक, सोमवार के फैसले के बाद जज दिवाकर की अदालत ने पिछले पांच-छह महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। इससे पहले, अगस्त में जज दिवाकर की अदालत में लंबित करीब 100 हत्या के मामलों को प्रशासनिक आदेश के तहत डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था।

कुलदीप कुमार ने बताया था कि मौत की सजा या उम्रकैद से जुड़े अपराधों वाले इन मामलों को दिवाकर की अध्यक्षता वाली फास्ट ट्रैक अदालत से डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज सिंह की अदालत में भेजा गया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया था कि यह ट्रांसफर वकीलों और वादकारियों के बीच अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने की आशंकाओं के बीच किया गया था।

कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

रवि कुमार दिवाकर का जन्म जुलाई 1980 में हुआ था। वह मूल रूप से यूपी की राजधानी लखनऊ के रहने वाले बताए जाते हैं। उन्होंने B.Com और LLM की पढ़ाई की है। वर्ष 2009 में वह अतिरिक्त सिविल जज के तौर पर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया।

इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में न्यायिक जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी पोस्टिंग सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली समेत कई जगहों पर रही। नवंबर 2025 से वह मुजफ्फरनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) के तौर पर तैनात हैं।

2022 में ज्ञानवापी मामले से देशभर में चर्चा में आए

जज रवि कुमार दिवाकर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान साल 2022 में मिली थी। उस समय वह वाराणसी में सिविल जज के पद पर तैनात थे। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वीडियोग्राफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था। यह मामला देश के सबसे चर्चित कानूनी और धार्मिक विवादों में शामिल हो गया और उनके आदेश की व्यापक चर्चा हुई।

5 महीने में 23 मौत की सजाएं

मुजफ्फरनगर में उनकी अदालत के फैसलों ने हाल के महीनों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच उन्होंने 11 मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। इनमें हत्या, अपहरण और लूट के दौरान हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। कई मामलों में अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ यानी दुर्लभतम से दुर्लभ कैटेगरी का माना।

कुछ चर्चित प्रमुख मामलों की लिस्ट

  • 6 अप्रैल: वकील मोहम्मद समीर की 2019 में हत्या के मामले में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। मामला कथित तौर पर ₹45 लाख के आर्थिक विवाद से जुड़ा था।
  • 28 अप्रैल: 2019 के एक हत्या मामले में एक महिला और उसके तीन बेटों समेत चार लोगों को मौत की सजा दी गई।
  • 30 मई: 2011 में एक महिला और उसके छह वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में रहिस को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 20 जून: राजेंद्र सैनी हत्याकांड में गजेंद्र और रामकिरण को फांसी की सजा सुनाई गई।
  • 2 जुलाई: ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड रतिराम की हत्या के मामले में दीपक को मौत की सजा दी गई।
  • 6 जुलाई: 2010 में राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उसके सहयोगी सहदेव को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 17 जुलाई: 2011 में लूट की कोशिश के दौरान किसान राज सिंह की हत्या के मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई।
  • 12 अगस्त: 1999 में ₹5 लाख की फिरौती के लिए लकड़ी व्यापारी सलीम के अपहरण और हत्या के मामले में शाहनवाज को मौत की सजा दी गई।
  • 13 अगस्त: शामली में पुरानी रंजिश से जुड़े 2014 के हत्या मामले में रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को मौत की सजा सुनाई गई।
  • 7 सितंबर: जज रवि की अदालत ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को 7 सितंबर को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

क्या इन सभी को फांसी दे दी जाएगी?

ऐसा नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है। सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। उसे हाई कोर्ट की पुष्टि की आवश्यकता होती है। इसलिए जज दिवाकर द्वारा सुनाई गई 22 मौत की सजाओं का मतलब यह नहीं है कि सभी दोषियों को तत्काल फांसी दी जाएगी।

1 साल में पूरे UP की तुलना में कितना बड़ा आंकड़ा?

इस फैसलों की संख्या इसलिए भी असामान्य मानी गई क्योंकि पूरे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान ट्रायल कोर्ट ने 20 मामलों में कुल 28 मौत की सजाएं सुनाई थीं। इसके मुकाबले मुजफ्फरनगर की एक फास्ट-ट्रैक अदालत से कुछ ही महीनों में 22 मौत की सजाएं सामने आईं। जज रवि दिवाकर ने अकेले मुजफ्फरनगर में ही 23वीं फांसी की सजा सुनाते हुए फैसले में लिखा, “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना पसंद नहीं करूंगा।”

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उन्होंने अपने फैसले में आगे लिखा है, “जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चलता हूं, तब तक सर्विस करूंगा, अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा होगा। मुझे पश्चिम के एक माफिया/गैंगस्टर द्वारा यह संदेश भी भिजवाया गया कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां हटवाई गई हैं, अगर मेरे पीछे पड़े तो जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे।”

Rohit Yadav: उम्र में हेरफेर के आरोप के बाद BCCI का बड़ा एक्शन! ऑस्ट्रेलिया सीरीज से हटाए गए रोहित यादव, U-19 टीम में हुए बदलाव

Who is UP cricketer Rohit Yadav: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार (8 सितंबर) को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी अंडर-19 सीरीज के लिए भारत की U-19 टीम में बदलाव का ऐलान किया है। यह बदलाव बंगाल के क्रिकेटर रोहित यादव को उम्र संबंधी कथित हेरफेर के चलते टीम से हटाए जाने के बाद किया गया है। रोहित को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले वनडे और मल्टी-डे दोनों मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में चुना गया था।

BCCI ने आधिकारिक बयान में कहा कि ऑस्ट्रेलिया U-19 के खिलाफ राजकोट और अहमदाबाद में होने वाले आगामी मुकाबलों के लिए चुने गए रोहित यादव को उम्र संबंधी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के कारण टीम से वापस लिया गया है। रोहित की जगह सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के आर्यन सावसानी को भारत की U-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है। वहीं, हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन के तन्मय बालोदा को मल्टी-डे टीम में जगह दी गई है।

दो साल के बैन की भी रिपोर्ट

इस पूरे मामले में Sportstar की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई ने उम्र को लेकर कथित गलत जानकारी देने के मामले में बंगाल के लेग स्पिनर रोहित यादव पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खास बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए भारत की अंडर-19 टीम में चुना गया था। हालांकि, BCCI की ओर से जारी आधिकारिक बयान में प्रतिबंध का जिक्र नहीं किया गया है। रोहित कुछ समय पहले ही जूनियर भारतीय टीम का हिस्सा बने थे। वह भारतीय U-19 टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर भी गए थे। वहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था।

रोहित लेग स्पिनर हैं और श्रीलंका U-19 के खिलाफ यूथ टेस्ट मैच में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए छह विकेट हासिल किए थे। उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए भी टीम में चुना गया था। उत्तर प्रदेश के रहने वाले रोहित ने जुलाई में भारत की अंडर-19 टीम के साथ श्रीलंका का दौरा किया था। उन्होंने वहां छह विकेट लिए थे और टीम को अंतिम टेस्ट जीतने में अहम योगदान दिया था।

आधार रिकॉर्ड में सामने आई जन्मतिथि को लेकर गलतियां!

रिपोर्ट के अनुसार, उम्र सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान रोहित के आधार रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आईं। रिकॉर्ड में अलग-अलग वर्षों में उनकी जन्मतिथि में बदलाव दिखाई दिया। Sportstar की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका दौरे के दौरान दस्तावेजों की जांच में उनकी उम्र को लेकर गड़बड़ियां सामने आईं। रोहित के पास जन्म के तीन अलग-अलग प्रमाणपत्र मिले, जिनमें जन्म वर्ष 2007, 2009 और 2010 दर्ज है।

इसके अलावा उनके आधार रिकॉर्ड में भी अलग-अलग जन्म वर्ष पाए गए। बंगाल क्रिकेट एसोसिएसन (सीएबी) में उनका जन्म वर्ष 2007 दर्ज था। जबकि आधार रिकॉर्ड में 2017 और 2020 के अपडेट में 2006 और 2021 में इसे बदलकर 2009 किया गया। इन गलतियों के कारण वह आयु वर्ग की क्रिकेट खेलने के लिए अयोग्य पाए गए।

सीएबी ने इन गड़बड़ियों के चलते पहले ही रोहित को अपनी जूनियर टीमों से बाहर कर दिया था। बाद में बीसीसीआई को इसकी जानकारी दी। अब बोर्ड ने उन्हें दो साल तक घरेलू क्रिकेट खेलने से भी रोक दिया है और सभी संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों को इसकी सूचना दे दी है।

एड्रेस को लेकर भी बवाल

रिपोर्ट में उनके पते में भी कई बदलाव का जिक्र किया गया है। रिकॉर्ड में पता उत्तर प्रदेश से हावड़ा और बाद में लिलुआह का दर्ज किया गया। इन अलग-अलग रिकॉर्ड के सामने आने के बाद उनकी उम्र को लेकर सवाल उठे और BCCI ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोनों सीरीज से वापस लेने का फैसला किया। रोहित को इस महीने के अंत में राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ होने वाले भारत के घरेलू वनडे और बहुदिवसीय मुकाबलों के लिए भी टीम में शामिल किया गया था।

ऑस्ट्रेलिया सीरीज के लिए भारत U-19 की अपडेटेड वनडे टीम

लक्ष्य रायचंदानी (कप्तान), यशवर्धन चौहान (उप-कप्तान), रजत बघेल (विकेटकीपर), आर्यवीर सहवाग, वी.के. विनीत, कुशाग्र ओझा, अर्जुन राजपूत, मनाल चौहान, अन्वय द्रविड़ (विकेटकीपर), वी. यशवीर, शाविन विनोद, मोहित उलवा, चिगुरुपति वेंकटा, काव्या पटेल और आर्यन सावसानी।

भारत U-19 की अपडेटेड मल्टी-डे टीम

यशवर्धन चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी (उप-कप्तान), सागर वीरक, कुशाग्र ओझा, मनाल चौहान, कुश पटेल, मानव कृष्णा (विकेटकीपर), अभिप्राय बिस्वास (विकेटकीपर), ईशान ओम, अयान अकरम, प्रणव राघवेंद्र, प्रियंशु सिंह, मोहित उलवा, आर्यन यादव और तन्मय बालोदा।

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी फाइनल में हराने उतरेंगे नदीम को

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ियों ने भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश पा लिया है। कुल 20 प्रतियोगियों में से 12 प्रतियोगी को फाइनल में प्रवेश मिला। भारत के 3 खिलाड़ियों का इस स्पर्धा में भाग लेना मायने रखता है। हालांकि ग्लास आधा भरा और आधा खाली जैसी स्थिति है।

क्वालिफाय करने वाले तीनों खिलाड़ियों में से एक ने भी पहली तीन में से एक भी स्थान नहीं पाया। 79.61 मीटर के थ्रो के साथ नीरज चोपड़ा पांचवे स्थान पर रहे। वहीं रोहित यादव 78.37 की थ्रो के साथ नवें स्थान पर रहे। 78.36 मीटर थ्रो के साथ यशवीर सिंह दसवें स्थान पर रहे।

श्रीलंका के रुमेश थरंगा 82.84 मीटर के थ्रो के कारण शीर्ष पर रहे। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 81.29 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट 80.64  मीटर की थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इंग्लैंड के बेन इस्ट 80.38  मीटर की थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे।

ऑस्ट्रेलिया के कैमरून मेकेन्ट्री 78.91 मीटर के साथ छठवें स्थान पर रहे। सातवें स्थान पर रहे पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अर्शद नदीम जिन्होंने  78.63 मीटर दूर भाला फेंका।

बहरीन के केशुआन स्ट्रेचन ने 78.60 मीटर दूर भाला फेंका और वह आठवें स्थआन पर रहे। ट्रिनिडैड और टोबेगो के केशरोन वेलकॉट 78.26 मीटर दूर भाला फेंककर 9वें स्थान पर रहे। दसवें स्थान पर नाइजिरिया के शिनचिरीम नमादी रहे जिन्होंने  75.27 मीटर दूर भाला फेंका।भाला फेंक स्पर्धा का फाइनल शुक्रवार देर रात खेला जाएगा।

Commonwealth Games 2026: जैवलिन थ्रो के फाइनल में आमने-सामने होंगे नीरज चोपड़ा-अरशद नदीम, जानें कब होगा मुकाबला

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा पुरुष जैवलिन थ्रो के फाइनल में अपनी जगह बना ली है। क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज ने 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया और आसानी से फाइनल में पहुंच गए। वहीं नीरज के अलावा भारत के रोहित यादव ने 78.37 मीटर और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर का थ्रो कर क्रमशः नौवां और दसवां स्थान हासिल किया। इस तरह तीनों भारतीय खिलाड़ियों ने फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। अब तीनों भारतीय खिलाड़ी पदक जीतने के इरादे से फाइनल में उतरेंगे।

वहीं पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम ने भी फाइनल में अपनी जगह बना ली है। नदीम ने क्वालिफिकेशन राउंड में 78.63 मीटर के साथ सातवें स्थान हासिल किया। कुल 12 खिलाड़ियों ने पुरुष जैवलिन थ्रो के फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल मुकाबला शुक्रवार देर रात 12:45 बजे से खेला जाएगा।

दूसरे प्रयास में फाइनल में पहुंचे नीरज

इस सीजन में शानदार फॉर्म में चल रहे श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 82.84 मीटर का थ्रो कर क्वालिफिकेशन राउंड में पहला स्थान हासिल किया। वहीं, ग्लासगो के ठंडे मौसम में नीरज चोपड़ा ने भी संयम के साथ अपना प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले प्रयास में 76.28 मीटर और दूसरे प्रयास में 79.61 मीटर तक भाला फेंककर पांचवां स्थान हासिल किया। दूसरे थ्रो के बाद उनका फाइनल में पहुंचना तय हो गया, इसलिए उन्होंने तीसरा और आखिरी प्रयास नहीं किया।

यशवीर-रोहित भी फाइनल में

भारत के दोनों युवा भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह और रोहित यादव ने भी क्वालिफिकेशन राउंड में दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह बना ली। 24 वर्षीय यशवीर ने पहले दो प्रयासों के बाद तीसरे थ्रो में 78.36 मीटर की दूरी हासिल कर शीर्ष 12 में जगह बनाई। वहीं, रोहित यादव ने दूसरे प्रयास में 78.37 मीटर का थ्रो कर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। इसके बाद उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं किया। अब नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों भारतीय खिलाड़ी फाइनल में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे।

फाइनल में पहुंचे नदीम

क्वालिफिकेशन राउंड में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 82.84 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान हासिल किया। उनके अलावा ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स (81.29 मीटर), दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट (80.64 मीटर) और इंग्लैंड के बेन ईस्ट (80.38 मीटर) ने भी नीरज चोपड़ा से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, पाकिस्तान के अरशद नदीम अपने पहले प्रयास के 78.63 मीटर के थ्रो में सुधार नहीं कर सके, लेकिन इसी प्रदर्शन के दम पर सातवें स्थान पर रहते हुए उन्होंने फाइनल में जगह बना ली।