नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी का रिवाइज्ड लेआउट प्लान मंजूर

Noida Sports City: नोएडा के सेक्टर-150 में लंबे समय से चर्चा में रहे स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। नोएडा अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट-02 के संशोधित मास्टर लेआउट प्लान को मंजूरी दे दी है। अथॉरिटी ने इस फैसले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे के जरिए दी है। इस मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट के विकास से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “नोएडा अथॉरिटी ने हलफनामा दाखिल किया है और संशोधित मास्टर लेआउट प्लान के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दी है। इस प्लान को 6 अप्रैल 2026 को अथॉरिटी की 222वीं बोर्ड बैठक में मंजूरी दी गई थी। इससे पहले आम लोगों की आपत्तियों पर विचार किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार पूरी की गई है। प्रोजेक्ट के डेवलपर, लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन्स ने 2 जनवरी, 2026 को तय फीस के साथ संशोधित मास्टर लेआउट प्लान जमा किया था। अथॉरिटी ने 6 अप्रैल को सैद्धांतिक मंजूरी दी और 6 मई, 2026 को औपचारिक मंजूरी पत्र जारी किया।”

अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, संशोधित योजना को मंजूरी देने से पहले, अथॉरिटी ने दो राष्ट्रीय अखबारों में आपत्तियां मंगाने के लिए नोटिस जारी किए और योजना को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया। उन्होंने कहा कि बाद में मिली आपत्तियों पर कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, संशोधित लेआउट में लगभग 300 एकड़ जमीन शामिल है और कुल क्षेत्र का 70% हिस्सा खेल सुविधाओं के लिए आरक्षित है।

अथॉरिटी ने यह भी बताया कि सेक्टर 150 में प्लॉट SC-02 के लिए बिल्डिंग प्लान को 9 जून को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने कहा कि संशोधित लेआउट स्काईलाइन आर्किटेक्चरल कंसल्टेंट द्वारा तैयार किया गया था और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा इसकी जांच की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि अथॉरिटी ने स्पोर्ट्स सिटी 02 में चार हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सशर्त ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किए हैं — जिन्हें ब्रिक राइज डेवलपर्स, ऐस इन्फ्रासिटी, लैंड कार्ट बिल्डर्स और समृद्धि इन्फ्रा स्क्वायर ने विकसित किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने, तीन और डेवलपर्स ने अपने स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए बदले हुए लेआउट प्लान जमा किए। लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स ने सेक्टर 150 के लिए, 3C ग्रीन डेवलपर्स ने सेक्टर 78-79 के लिए और ATS होम्स ने सेक्टर 152 के लिए प्लान जमा किए। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रस्तावों पर आगे कोई कदम उठाने से पहले अथॉरिटी ने जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान फैसला किया कि तीनों स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट मामलों की अलग-अलग सुनवाई की जाएगी, ताकि हर प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों पर ध्यान से विचार किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन तीनों मामलों में अगली सुनवाई क्रमशः 9 दिसंबर, 16 दिसंबर और 20 जनवरी को तय की गई है।

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: 798 एकड़ के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान कैसे रुका

स्पोर्ट्स सिटी का कॉन्सेप्ट 2004 का है, जब नोएडा अथॉरिटी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लान बनाया था। अधिकारियों के मुताबिक, 2010-11 और 2015-16 के बीच चार स्कीम शुरू की गईं, जिनमें 32.3 लाख वर्ग मीटर (798 एकड़) जमीन शामिल थी और इसका 70% हिस्सा स्पोर्ट्स सुविधाओं के लिए तय किया गया था।

हालांकि, CAG की एक रिपोर्ट में गड़बड़ियों का जिक्र किया गया, जिसमें जरूरी मंजूरी के बिना अलॉटमेंट भी शामिल थे। 18 जनवरी 2021 को अथॉरिटी ने डेवलपमेंट से जुड़े काम रोक दिए, जिनमें मैप की मंजूरी और ऑक्यूपेंसी से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं। बाद में, CAG रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के सामने रखी गई, जिसने 29 अगस्त 2024 को स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी CAG की टिप्पणियों का निपटारा कर दिया।

इसके बाद 24 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी को 30-45 दिनों के अंदर बैन हटाने का निर्देश दिया। हालांकि, इस मामले पर जवाब देने के लिए लोटस ग्रीन्स उपलब्ध नहीं था।

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Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी है। उससे पहले कंपनी की सेहत काफी मजबूत हुई है और यह अधिक नगदी जेनेरेट कर रही है तो कर्ज पर इसकी अपनी निर्भरता भी कम हो रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लेवरेज रेश्यो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 0.36 गुना रह गया। इससे कंपनी को वित्तीय फैसले लेने में अधिक सहूलियत मिली है। जियो का लक्ष्य अपनी मुनाफे वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने का है। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी करके जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है, जब इसका फोकस नेटवर्क का विस्तार करने और नए ग्राहक जोड़ने से हटकर पिछले एक दशक में बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने पर है। इसका मतलब हुआ कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से कमाई बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे कारोबारों को भी डेवलप करने पर फोकस कर रही है।

एंबिट कैपिटल रिसर्च के एनालिस्ट विवेकानंद एस का कहना है कि आईपीओ से जियो की वित्तीय सेहत मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि इसके कैपिटल स्ट्रक्चर अधिक कंजर्वेटिव हो जाएगा। उनका कहना है कि अब अगले चरण की ग्रोथ में कंपनी का फोकस कमाई बढ़ाने पर होगा तो कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक कंट्रोल दिख सकता है।

कैसी है Jio Platforms की सेहत

जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबारी सेहत की बात करें तो ऑपरेशंस से इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹1.10 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹1.47 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी ₹21,423 करोड़ से बढ़कर ₹30,049 करोड़ हो गया। साथ ही अहम बात ये है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद कंपनी की नगदी वित्त वर्ष 2024 में ₹1,449 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹42,071 करोड़ हो गई, जिससे इसके सामने भविष्य में निवेश करने और कर्ज हल्का करने की गुंजाइश बढ़ी है।

इस दौरान कंपनी का ARPU यानी प्रति यूजर औसतन मंथली रेवेन्यू ₹181.7 से ₹214 पर पहुंच गया तो प्रति यूजर मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB हो गई। विवेकानंद का कहना है कि ग्राहक अनलिमिटेड डेटा और सस्ती सेवाओं का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी को कस्टमर सरप्लस के रूप में काफी फायदा मिल रहा है।

जियो ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश और आक्रामक प्राइसिंग के जरिए देश के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, जिससे कॉम्पिटिटर्स को भी ऐसा ही करना पड़ा। हालांकि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपनी सर्विस से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की जरूरत है। कंपनी ने मोबाइल सर्विस के अलावा एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक डेवलप किया है जिसमें कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रेडियो इक्विपमेंट और नेटवर्क सॉफ्टवेयर शामिल हैं। मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी यूनिट्स ने 6,817 पेटेंट एप्लीकेशन फाइल किए थे, जिनमें से 1,009 को वैश्विक मंजूरी मिल चुकी थी। जियो ने अपना प्री-6G स्टैक और Giga MIMO रेडियो भी डेवलप किया है, जिसे कंपनी ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखाया था।

जियो अपने होम ब्रॉडबैंड बिजनेस का भी विस्तार कर रही है। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक उसके पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 42.6% हो गया।

कंपनी की योजना पार्टनरशिप और मैनेज्ड-सर्विस अरेंजमेंट के जरिए अपनी खास नेटवर्क टेक्नोलॉजी को विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाने की भी है। इसके सफल होने पर भारतीय ऑपरेशन्स के अलावा कंपनी के लिए रेवेन्यू का एक और जरिया बन सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Fusion CX IPO: ₹702 करोड़ का एक और इश्यू 14 अक्टूबर से; रहेंगे ₹500 करोड़ के नए शेयर; चेक करें प्राइस बैंड

मेनबोर्ड सेगमेंट में फ्यूजन CX का ₹702 करोड़ का IPO 14 अक्टूबर को खुलने वाला है। प्राइस बैंड ₹275-₹289 प्रति शेयर और लॉट साइज 51 शेयर है। कंपनी वॉइस, ईमेल, चैट, सोशल मीडिया और मैसेजिंग के जरिए मल्टीचैनल कस्टमर सपोर्ट उपलब्ध कराती है। यह AI डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस भी देती है, जिसमें डेटा कलेक्शन, डेटा एनोटेशन, इमेज व वीडियो लेबलिंग, और रोबोटिक टेली-ऑपरेशंस शामिल हैं।

Fusion CX इंसानी विशेषज्ञता को टेक्नोलॉजी और अपने खास AI टूल्स के साथ कंबाइन करके कई भाषाओं में और कई चैनलों के जरिए कस्टमर एंगेजमेंट उपलब्ध कराती है, काम करने की क्षमता बेहतर बनाती है और कस्टमर के साथ बातचीत को ऑटोमेट करती है। 30 जून, 2026 तक Fusion CX के 13 देशों में 40 डिलीवरी सेंटर थे।

कंपनी के पब्लिक इश्यू में ₹500 करोड़ के 1.73 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹202 करोड़ के 69.90 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर्स P.N.S. बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और रसीश कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। एंकर निवेशक 13 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

कब होगी लि​स्टिंग

IPO 16 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 19 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 22 अक्टूबर को लिस्ट होंगे। इस इश्यू के लिए ‘नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड’ बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है। IPO में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

ग्रे मार्केट में Fusion CX का शेयर अभी से 19.03 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

Fusion CX का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹503.85 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा ₹55.70 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹238.13 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर ₹1,851.83 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 129 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹169.84 करोड़ रहा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने के लिए, स्टेप डाउन सब्सिडियरीज में निवेश के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Starlink Row In India: कमल हासन से लेकर कुणाल कपूर तक, भारत में स्टारलिंक विवाद पर बोले एक्टर्स

Starlink Row In India: कमल हासन के बाद बॉलीवुड एक्टर कुणाल कपूर ने SpaceX के फाउंडर और CEO एलन मस्क के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कुछ ताकतवर लोगों (ओलिगार्क्स) ने मार्केट पर अपना कब्जा बनाए रखने के लिए उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस, स्टारलिंक (Starlink) को “ब्लॉक” कर दिया है। कुणाल ने एलन की सोच को “औपनिवेशिक मानसिकता” (colonial mindset) बताया और टेक अरबपतियों की “मसीहा बनने की भावना” (saviour complex) की ओर इशारा किया।

कुणाल ने एलन मस्क की ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ पर सवाल उठाए

कुणाल ने लिखा- “इस वीक एलन मस्क की बातों को सुनकर लगा कि वह पश्चिमी टेक अरबपतियों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे हैं। वे आपके देश में आकर आपको भविष्य बेचते हैं। अगर आप उनका स्वागत करते हैं तो आप एक ऐसे देश माने जाते हैं जो तरक्की चाहता है। अगर आप उन्हें इंतजार करवाते हैं तो अचानक आपके लोग पीड़ित बन जाते हैं, जिन्हें किसी ‘चुने हुए व्यक्ति’ द्वारा उनके अपने ही संस्थानों से बचाने की जरूरत होती है।”

कुणाल ने अतीत की उन घटनाओं का जिक्र किया जब देशों ने एलन की मदद लेने से इनकार किया था। उन्होंने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। एक्टर ने 2018 में थाईलैंड में हुए बचाव अभियान का जिक्र किया, जब वाइल्ड बोअर्स सॉकर टीम के 11 से 16 साल की उम्र के 12 सदस्यों और उनके 25 साल के असिस्टेंट कोच को थाम लुआंग गुफा परिसर से बचाया गया था। बचाव दल ने उस मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया जो एलन ने ऑपरेशन के लिए दी थी, जिससे वे नाराज हो गए थे।

उन्होंने अगस्त 2024 में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट द्वारा X (पहले ट्विटर) को देश भर में सस्पेंड करने का भी जिक्र किया, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म कोर्ट के आदेशों का पालन करने में विफल रहा था। कुणाल ने लिखा, “यह एक पैटर्न है। जब थाई बचाव दल ने फंसे हुए लड़कों के लिए मस्क द्वारा भेजी गई मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया और गोताखोर वर्नोन अनस्वर्थ ने इस विचार को अव्यावहारिक बताया, तो मस्क ने उन पर ‘पेडो गाइ’ (बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति) होने का आरोप लगाया।

जब ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने X को अपने फैसलों का पालन करने का आदेश दिया, तो मस्क ने जज को ‘तानाशाह’ कहा। स्क्रिप्ट शायद ही कभी बदलती है। बस देश बदलता है। औपनिवेशिक मानसिकता का मतलब हमेशा किसी देश पर राज करना नहीं होता। कभी-कभी यह सोच होती है कि आप वहां एक मसीहा बनकर आए हैं और अगर देश तुरंत आपको ऐसा नहीं मानता, तो जरूर देश में ही कुछ गड़बड़ है।”

एलन मस्क ने क्या कहा था?

एलन ने भारत में स्टारलिंक की संभावनाओं के बारे में कई ट्वीट किए हैं, जिनमें अंबानी परिवार का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने लिखा, “स्टारलिंक के पास 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?”

क्या बोले कमल हासन

टेक अरबपति की चौंकाने वाली बातों के तुरंत बाद एक्टर और नेता कमल हासन ने उन पर सवाल उठाते हुए कहा, “किसी भी अरबपति को देश की पॉलिसी तय नहीं करनी चाहिए – चाहे वह भारत हो या अमेरिका।” शुक्रवार को हासन ने मस्क की पहली पोस्ट को री-शेयर किया और स्टारलिंक-भारत विवाद पर अपनी राय रखी। एक्टर ने कहा कि, “भारत जानता है कि हमारे नेटवर्क और स्पेक्ट्रम रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर हैं न कि सिर्फ कमर्शियल एसेट्स। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

एक कड़े बयान में हासन ने कहा कि भारत को भारतीय और ग्लोबल, दोनों तरह के प्रोवाइडर्स का स्वागत करना चाहिए, जो भी दूर-दराज के इलाकों के लिए सबसे प्रैक्टिकल और किफायती ‘लास्ट-माइल सॉल्यूशन’ दे सके।

भारत के संचार मंत्रालय ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि देश का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण है। गुरुवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा, “सोशल मीडिया पर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता के बारे में एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है। सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं सहित सभी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के लिए एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क लागू किया है।”

क्या है भारत की आर्थिकी का इंजन?

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बेसिक सवाल है! इस सप्ताह रिजर्व बैंक के ब्याज दर फैसले, शेयर बाजार, जीडीपी की हवाबाजी, लुढ़कते रुपए, भारत से भागती पूंजी जैसे तथ्यों से बेसिक सवाल है कि तब देश की आर्थिकी भला चल कैसे रही है? वह प्लेटफॉर्म पर खड़ी है या वह उस छुक-छुक इंजन से बंधी है जो भाप छोड़ रहा है पर न कोयला है न बॉयलर में भभकती आग है?

आप भी सोचें, भारत के हर बंदे को सोचना चाहिए कि आखिर भारत की आर्थिकी के पहियों का मौजूदा इंजन है क्या?

पहले देश विशेष की ताक़त उसकी फ़ौज, कारखानों और खेतों से मापी जाती थी। अब पैसे से है। मतलब पूंजी, कमाई, बचत, श्रीवृद्धि, लक्ष्मी की चंचलता प्राथमिक कसौटी (वैश्विक भी) है। इस मायने में भारत की रियलिटी क्या है? क्या यह रियलिटी नहीं है कि देश के अमीर, देश की बुद्धि भारत छोड़ विदेश जा बस रही है? क्या यह खबर नहीं है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल कर दूसरे देशों के बाजारों में निवेश कर रहे हैं? मतलब भारत का शेयर बाजार जोखिम भरा, कम कमाई का है वही इंडोनेशिया हो या तुर्किये, आसियान देश वैश्विक पूंजी के लिए इसलिए कमाई वाले हैं क्योंकि इन देशों की इकोनॉमी सचमुच तेजी से बढ़ती हुई है।

सोचें, सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में अप्रैल-जून 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत थी, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA) की बढ़ोतरी 8.2 प्रतिशत। सात अक्टूबर को रिज़र्व बैंक ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 की विकास दर का अनुमान बढ़ा कर 7.1 प्रतिशत किया। अब यदि भारत की वास्तविक अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत बढ़ रही है, तो उसकी करेंसी, रुपया और शेयर बाज़ार क्यों लगातार कमजोर होता हुआ है? गुरूवार को सेंसेक्स फिर भारी गिरा। तथ्य है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने वर्ष 2026 में अब तक लगभग 30.4 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे है। अकेले अक्टूबर के शुरुआती नौ दिनों में लगभग 47,000 करोड़ रुपए के भारतीय शेयरों को विदेशियों ने बेचा।

दुनिया के किसी भी पैमाने पर यह मामूली उतार-चढ़ाव नहीं है। सो, सीधा सवाल है एक तरफ भारत में उत्पादन बढ़ने के सरकारी आंकड़े हैं, वहीं विदेशी निवेशक भारत की कंपनियों के भविष्य को लेकर घबराए हुए हैं, उनके शेयर बेच भाग रहे हैं? ऐसे ही भारत की करेंसी विदेशी बाजार में कौड़ियों वाली हैसियत में है। इस वर्ष डॉलर के मुक़ाबले रुपए का मूल्य सात प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

सरकारी दावा है कि आर्थिकी की रेलगाड़ी तेज़ विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह, कंक्रीटों में नजर आते बुनियादी ढांचे से दुनिया की सर्वाधिक तेज़ बुलेट ट्रेन है। वहीं रियलिटी में गाड़ी प्लेटफॉर्म पर छुक-छुक करते हुए है। बाज़ार की हकीकत, भारतीय करेंसी के घटते भाव, विदेशी पूंजी के भागने, अब नई ऊंची ब्याज दर, महंगा तेल-ईंधन, महंगे कर्ज व व्यापारियों, अमीरों का भागना या हाथ पर हाथ धरे बैठे होना है।

कह सकते हैं कि खेती, आईटी कंपनियां, सेवा क्षेत्र, मेक इन इंडिया के कारखानों की भाप से आर्थिकी का इंजन सरपट भागता हुआ है। पर खेती यदि खुशहाल होती तो किसानों के पेट नहीं भरे होते! किसान तब दो-दो हजार रुपए की प्रधानमंत्री की रेवड़ी पर टकटकी लगाए उसका इंतजार क्या करते हुए होते? सब्जी बाजार, आटे-तेल के दाम क्या आम आदमी का जीना हराम ऐसा किए हुए होते जो रिजर्व बैंक को महंगाई के हवाले ब्याज दर बढ़ाने का फैसला करना पड़ता? ऐसी ही आईटी कंपनियों, सेवा क्षेत्र की कंपनियों के शेयर बाजार में लुढ़कने का औसत है। भारत की आईटी कंपनियों की अमेरिका में हुई एआई क्रांति से लुटिया डूबती हुई है। इन कंपनियों में ही निवेशित पूंजी सर्वाधिक भाग रही है। और मेक इन इंडिया या इंफ्रास्ट्रक्चर की तो बात ही नहीं होनी चाहिए। अंबानी हो, अडानी हो, एयरलाइंस सेक्टर हो या टेक्सटाइल सेक्टर या बैंकिंग सब महंगाई बढ़ा रहे हैं या बांग्लादेश, वियतनाम, आसियान देशों से पिट रहे हैं या आर्थिकी का कर्जा बढ़ा रहे हैं। बट्टेखाते में भारत की पूंजी, बचत वैसे ही जा रही है जैसे शेयर बाजार के चक्कर में मध्यवर्गीय नौकरीपेशा नौजवानों ने म्यूचुअल फंड (एसआईपी) के जरिए अपनी बचत को शेयर बाज़ार में उड़ेला, जबकि खर्चों के लिए कर्ज लेकर अपने आपको ब्याज (जो महंगा होना ही है) के चक्रव्यूह में फंसाया।

सो, पूंजी देशी (कभी भारत में घर-परिवार रिकॉर्ड बचत किया करते थे) हो या विदेशी वह भारत की इकोनॉमी को दौड़ाती हुई नहीं है। न ही भारत की उत्पादकता (यदि होती तो चीन के आयातों पर क्या खतरनाक स्तर पर आश्रित होते?) का इंजन है। तो ले देकर पैसे की मालिक या तो सरकार, उसके खर्च और बाबुओं का भ्रष्टाचार है या सरकारी कृपाओं के क्रोनी खरबपति याकि अडानी-अंबानी जैसे देशी जगत सेठ हैं। इन सबकी ऊर्जा के इंजन का नाम क्या है? 140 करोड़ लोगों का पेट! हां, भारत के 140 करोड़ लोगों की बुनियादी भूख, जीने का संघर्ष ही 2026 की इंडियन इकोनॉमी की वह छुक-छुक रेलगाड़ी है, जिसमें फर्स्ट क्लास, मिडिल क्लास के कुछ डिब्बे हैं बाकी तो भूखे पेटों की आग, उसके हाथ-पांव मार कर जीने की जिजीविषा है!

क्या नहीं?

Stock in Focus: IRB इंफ्रास्ट्रक्चर का टोल रेवेन्यू 24% बढ़कर ₹773 करोड़, ट्रैफिक ग्रोथ से मिला सपोर्ट

Stock in Focus: IRB इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स ने सितंबर 2026 का टोल रेवेन्यू अपडेट जारी किया है। कंपनी का ग्रॉस टोल रेवेन्यू 24% बढ़कर 773 करोड़ रुपये हो गया। सितंबर 2025 में यह 622 करोड़ रुपये था। कंपनी की 100% सब्सिडियरी कंपनियों का टोल रेवेन्यू भी लाइक-फॉर-लाइक आधार पर 17% बढ़ा है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से 162.1 करोड़ रुपये का टोल

IRB MP Expressway ने सितंबर में 162.1 करोड़ रुपये का टोल रेवेन्यू दर्ज किया। एक साल पहले यह 139.6 करोड़ रुपये था। यह प्रोजेक्ट मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई-पुणे हाईवे का संचालन करता है। वहीं, IRB Ahmedabad Vadodara Super Express Tollway का रेवेन्यू 79.5 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 66.6 करोड़ रुपये था।

गोलकोंडा और ललितपुर प्रोजेक्ट का भी कलेक्शन बढ़ा

IRB Golconda Expressway का सितंबर में टोल रेवेन्यू 81.2 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी महीने में यह 70.4 करोड़ रुपये था। IRB Lalitpur Tollway ने 42.5 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन किया। एक साल पहले यह 37.1 करोड़ रुपये था।

नए प्रोजेक्ट्स से भी टोल कलेक्शन शुरू

IRB Harihara Corridors Tollway ने सितंबर में 49.3 करोड़ रुपये का टोल रेवेन्यू दर्ज किया। IRB Chandibhadra Tollway से 20.4 करोड़ रुपये और Meerut Budaun Expressway से 13.1 करोड़ रुपये मिले। इन तीनों प्रोजेक्ट्स पर 2026 में टोल कलेक्शन शुरू हुआ है।

IRB Infrastructure Developers ने बताया कि 2026 में कुछ प्रोजेक्ट्स से पहली बार टोल रेवेन्यू मिला है। IRB Harihara Corridors पर 23 जनवरी से टोल कलेक्शन शुरू हुआ। IRB Chandibhadra Tollway पर 1 अप्रैल से और Meerut Budaun Expressway पर 17 मई से टोल कलेक्शन शुरू हुआ।

कंपनी ने ट्रैफिक ग्रोथ पर क्या कहा?

IRB Infrastructure Developers के डिप्टी CEO अमिताभ मुरारका ने कहा कि सितंबर का टोल रेवेन्यू देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक ग्रोथ को दिखाता है। फेस्टिव सीजन शुरू होने से भी ट्रैफिक को सपोर्ट मिला है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में बनी मजबूती के साथ नवरात्रि, दिवाली और छुट्टियों का सीजन आने वाले महीनों में ट्रैफिक ग्रोथ को और बढ़ा सकता है। इससे कंपनी के पोर्टफोलियो में टोल रेवेन्यू को भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

IRB Infrastructure Developers के शेयर गुरुवार को BSE पर 0.69% की बढ़त के साथ 17.56 रुपये पर बंद हुए।

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Digital India: 35,000 गांवों में हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान! खर्च होंगे ₹15,000 करोड़

Govt To Spend ₹15000 Crore Telecom Connectivity: दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026’ में घोषणा की कि सरकार देश के लगभग 35,000 गांवों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच खर्च कर रही है।

संचार मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदे का सौदा नहीं है, वहां सरकार को खुद आगे आकर निवेश करना पड़ रहा है ताकि कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से अछूता न रहे।

जहां फायदा नहीं, वहां सरकार खुद करेगी निवेश

मंत्री सिंधिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और इंटर-ऑपरेबिलिटी पर जोर देते हुए कहा, ‘हर क्षेत्र रिटर्न या मुनाफा देने वाला नहीं हो सकता। कई दूरदराज के इलाकों में पहुंच एक बड़ी चुनौती है, जहां निजी कंपनियां मुनाफा न होने के कारण नेटवर्क नहीं लगा पातीं। ऐसे क्षेत्रों में सरकार का आगे आना अनिवार्य है और हमने यही काम किया है।’

ग्राहकों को ध्यान में रखकर स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग

संचार मंत्री ने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम के बेहतर और सही इस्तेमाल के लिए ‘स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग’ पर काम कर रही है। इससे मौजूदा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

हाईवे की तरह बनेगा टेलीकॉम नेटवर्क

नेविगेशन और नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ‘मिडिल माइल’ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया गया। सिंधिया ने सरकार की भूमिका की तुलना हाईवे निर्माण से करते हुए कहा, ‘जैसे सरकार का काम हाईवे बनाना है, वैसे ही टेलीकॉम में हमारा काम ‘मिडिल माइल’ तैयार करना है। इसके बाद हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि लोग इस नेटवर्क हाईवे का सही और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।’

भारतनेट और 4G सैचुरेशन स्कीम का विस्तार

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने ₹1.40 लाख करोड़ का बजट तय किया है। इसका मकसद केवल ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि सीधे गांवों और घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है।

इससे पहले सरकार ने ‘4G सैचुरेशन स्कीम’ के तहत करीब 30,000 गांवों की पहचान की थी, जहां 21,000 टेलीकॉम टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 17,000 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुरक्षा के नियम

इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और AI के प्रभाव पर बात करते हुए सिंधिया ने 2000 के दशक से पहले के आईटी दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अपने आप में एक जरिया है, लेकिन आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, उसी से आपकी उत्पादकता तय होती है।

सिंधिया ने सचेत करते हुए कहा कि AI के विस्तार से कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इसके लिए एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की जरूरत है ताकि लोगों को टेक्नोलॉजी के गलत प्रभावों से बचाया और सुरक्षित रखा जा सके।

देश में 4G और 5G की मौजूदा स्थिति

IMC 2026 में डेटा साझा करते हुए सिंधिया ने बताया, भारत के 99% से अधिक गांवों में अब 4G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। वहीं देश के 99.9% जिलों को 5G नेटवर्क से कवर कर लिया गया है। अब भारत का मुख्य फोकस केवल बुनियादी नेटवर्क देने तक सीमित नहीं है, बल्कि 5G, 6G और AI-सक्षम सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।