Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹258 करोड़ के नए ऑर्डर, सोलर और रेलवे सेक्टर से मिला बड़ा कारोबार

Stock in Focus: इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की KP Green Engineering को कुल ₹258.02 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर सोलर, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, प्री इंजीनियर्ड बिल्डिंग और पावर ट्रांसमिशन कारोबार से जुड़े हैं। कंपनी ने शुक्रवार, 28 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी।

सोलर से मिले ₹114.53 करोड़ के ऑर्डर

नए ऑर्डर्स में सबसे बड़ा हिस्सा सोलर का है। कंपनी को ₹114.53 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इनमें फिक्स्ड टिल्ट मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर शामिल हैं। ट्रैकर टाइप मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर भी हैं। इसके अलावा दूसरे स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स की सप्लाई भी होगी।

रेलवे के लिए ₹92.38 करोड़ का काम

कंपनी को ₹92.38 करोड़ के क्रैश बैरियर के ऑर्डर मिले हैं। इनमें रेलवे ट्रैक फेंसिंग से जुड़े काम भी शामिल हैं।

सोलर और क्रैश बैरियर के ऑर्डर मिलाकर करीब ₹207 करोड़ के हैं। यानी नए ऑर्डर्स का करीब 80% कारोबार इन्हीं दो सेगमेंट से आया है।

बिल्डिंग और पावर ट्रांसमिशन से भी ऑर्डर

KP Green Engineering को ₹33.76 करोड़ के प्री इंजीनियर्ड बिल्डिंग स्ट्रक्चर के ऑर्डर मिले हैं। पावर ट्रांसमिशन कारोबार से कंपनी को ₹15.42 करोड़ के ऑर्डर मिले।

इसके अलावा पोल और हाईमास्ट प्रोडक्ट्स के लिए ₹0.97 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। 220 kV, 66 kV और 33 kV नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले आइसोलेटर्स के लिए ₹0.96 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

FY27 में अब तक ₹497.64 करोड़ के ऑर्डर

नए ऑर्डर के बाद चालू वित्त वर्ष में कंपनी का कुल कन्फर्म्ड ऑर्डर इनटेक ₹497.64 करोड़ हो गया है।

कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स से कैपेसिटी का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे आने वाले समय के रेवेन्यू की विजिबिलिटी भी बेहतर होगी। हालांकि, कंपनी ने अलग-अलग ऑर्डर के ग्राहकों और उन्हें पूरा करने की समयसीमा नहीं बताई है।

KP Green के शेयरों का हाल

KP Green Engineering का शेयर शुक्रवार को 0.33% गिरकर ₹260.05 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 20.67% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 53% क्रैश हो चुका है। कंपनी का मार्केट कैप

1.31 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Reforms in Public Examinations: सरकार ने शुरू की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, जनता से मांगा सुझाव

Reforms in Public Examinations: हाल के महीनों में आयोजित बड़ी और प्रमुख परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बीच सरकार देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव पर आम जनता 13 सितंबर 2026 तक सुझाव दे सकती है। इसके लिए पहले ही नंदन नीलकेणी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स (HPTF) बनाई गई है। यह फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षा समेत उसके आयोजन, सुरक्षा, डिजाइन और गवर्नेंस में बड़े सुधारों की जांच करेगी और सुझाव देगी।

टास्क फोर्स संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रिया को मजबूत करने, परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा में सुधार करने, सही तकनीक का इस्तेमाल करने और एग्जामिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के तरीकों की जांच कर रही है। यह परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुगमता और समावेश को बढ़ावा देने और छात्रों की सुरक्षा के तरीकों पर भी गौर कर रही है। इसका मकसद एक ऐसी सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था बनाना है जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, बराबर और भविष्य के लिए तैयार हो।

कौन सुझाव दे सकता है?

एचपीटीएफ ने छात्रों और उम्मीदवारों, अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों, परीक्षा आयोजित करने वाली और टेस्ट इंडेंट करने वाली संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों, औद्योगिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संस्थानों सहित कई स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। दूसरे इच्छुक स्टेकहोल्डर भी अपने इनपुट दे सकते हैं।

इन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है

सुझावों में सार्वजनिक परीक्षा का आयोजन और सुरक्षा, परीक्षा तंत्र का प्रारूप और मूल्यांकन का तरीका, गवर्नेंस और जवाबदेही, और संस्थागत व्यवस्था शामिल हो सकते हैं।स्टेकहोल्डर परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने, उनका पता लगाने और उन्हें ठीक करने के साथ-साथ सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग सहित टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी इनपुट दे सकते हैं।

टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था का ढांचा बनाने और उसे बढ़ाने और सोशल, इकोनॉमिक, रीजनल और भाषाई ग्रुप्स तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एक समावेशी परीक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने पर भी सुझाव मांग रही है। दूसरे बिंदुओं में पारदर्शिता, शिकायत का समाधान, स्टेकहोल्डर कम्युनिकेशन और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान छात्रों की भलाई को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। स्टेकहोल्डर कोई और उपाय भी सुझा सकते हैं जो परीक्षा व्यवस्था में वैल्यू ऐड कर सके।

सुझाव देने की आखिरी तारीख

एचपीटीएफ ने स्टेकहोल्डर्स से 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव देने को कहा है। सुझाव आधिकारिक वेबसाइट, फोन, WhatsApp या ईमेल से इंग्लिश, हिंदी और दूसरी रीजनल भाषाओं में दिए जा सकते हैं।

वेबसाइट: examreforms-taskforce.dopt.gov.in

फोन: 1800-180-4747

WhatsApp: “hptf” लिखकर +91 78270 42830 पर भेजें।

ईमेल: ExamReformsTaskforce@dopt.gov.in

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CM Yogi News: मुख्यमंत्री से बेझिझक सवाल पूछने लगीं बेटियां, योगी बोले- यही तो 2017 के बाद आया बदलाव है

CM Yogi News: मुख्यमंत्री से बेझिझक सवाल पूछने लगीं बेटियां, योगी बोले- यही तो 2017 के बाद आया बदलाव है

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उत्तर प्रदेश की बेटियों को मंच मिला तो उनकी भावनाएं शब्दों में उतर आईं। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सामने बेटियां आत्मिक भाव से अपने हृदय के उद्गार व्यक्त करती रहीं, जिसे मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए बड़े ही उत्साह से सुना। उन्होंने बेटियों से संवाद किया, उन्हें सफल जीवन का 'आशीष' दिया और हर कदम पर सरकार के साथ होने का विश्वास भी दिलाया। 

 

रक्षाबंधन पर स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक लगाकर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बच्चियों को उपहार स्वरूप चॉकलेट और ओडीओपी बैग भेंट किए। एक छात्रा के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने उसकी पॉकेट डायरी पर संदेश भी लिखा। छात्राओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहां जो दृश्य देखने को मिला है, यही उत्तर प्रदेश में आए परिवर्तन को दिखा रहा है। 

 

उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बेटियां इस तरह सुरक्षित और उन्मुक्त वातावरण में मुख्यमंत्री से न तो मिल सकती थीं और न ही सीधे संवाद कर सकती थीं। आज बड़ी संख्या में बेटियां मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर बिना किसी भय के सवाल और बातचीत कर अनुभव साझा कर रही हैं। आज न असुरक्षा का भय है और न ही किसी प्रोटोकॉल का डर है।

 

2017 से पहले स्कूल भेजने में अभिभावकों को होती थी चिंता

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बड़ा संकट यह था कि बेटियां स्कूल तक नहीं जा पाती थीं। कई अभिभावक बेटियों की पढ़ाई बंद कर देते थे या उन्हें घर से दूर दूसरे प्रदेशों के हॉस्टल में रखने को मजबूर होते थे। जिस समय बेटी को अपने माता-पिता का सबसे अधिक संरक्षण मिलना चाहिए, उस समय उसका दूर रहना मजबूरी बन जाता था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और बेटियां सुरक्षित वातावरण में शिक्षा हासिल कर रही हैं।

 

जन्म से लेकर स्नातक तक बेटियों के लिए योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी स्नातक तक की पढ़ाई के लिए योजनाबद्ध तरीके से व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बेटियों को सहायता दी जा रही है। शादी योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के जरिए मदद उपलब्ध कराई जा रही है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली बेटियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। मेधावी छात्राओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए स्नातक स्तर की 50 हजार मेधावी बेटियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है। 

 

यूपी पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 45 हजार हुई

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बेटी किसी से कम नहीं है।  2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या महज करीब 10 हजार थी। आज यह संख्या बढ़कर 45 हजार हो चुकी है और जल्द ही यह आंकड़ा 50 हजार तक पहुंचने वाला है। इसका परिणाम है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

 

यूपी अब 'बीमारू' नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का सीधा संबंध प्रदेश के विकास से है। आज उत्तर प्रदेश की बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़कर प्रदेश और देश को आगे ले जाने में योगदान दे रही हैं। यह बदलाव केवल योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है। कभी बीमारू राज्य के रूप में पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारतीय अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और स्वावलंबन इसी परिवर्तन की महत्वपूर्ण तस्वीर है।

 

75 जनपदों की छात्राओं ने दी रक्षाबंधन की बधाई

इस दौरान 75 जनपदों की छात्राओं की वीडियो क्लिप भी प्रदर्शित की गई। इसमें छात्राओं ने अपना परिचय देते हुए मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की बधाई दी और उन्हें राखी भेजने की बात कही। इस दौरान कई छात्राओं ने अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री के सामने अपनी आकांक्षाएं और सवाल भी रखे। कक्षा आठ की शैल कुमारी ने कहा कि उनके स्कूल में कंप्यूटर लैब की सुविधा है और वह कंप्यूटर चलाना भी सीख चुकी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार की ओर से विद्यार्थियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

 

टीवी पर देखते थे सीएम सर को, आज सामने हैं

पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज की कक्षा आठ की छात्रा समृद्धि वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी से आमने-सामने मिलना मेरे लिए गोल्डेन अपॉर्च्युनिटी रहा। बचपन से सीएम सर को टीवी पर देखती थी। उनसे आमने-सामने मिलने की इच्छा रक्षाबंधन पर पूरी हो गई। श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज की कक्षा सात की छात्रा आयशा बानो ने सीएम से कहा कि आपसे मिलकर और आपका आशीर्वाद पाकर बेहद खुशी हुई। आपका आशीर्वाद हमेशा बच्चों पर बना रहे।

 

मुझे भी आपके जैसा नेता बनना है

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मलिहाबाद की कक्षा नौ की छात्रा वैष्णवी पाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को जीवन का बेहद खास अवसर बताया। उसने कहा कि टीवी पर मुख्यमंत्री को देखकर मेरे मन में भी उनकी तरह नेता बनने की इच्छा पैदा हुई। मुख्यमंत्री से मिलने की जानकारी मिलने के बाद वह इस दिन का इंतजार कर रही थी। वैष्णवी ने बताया कि वह हॉकी खिलाड़ी है और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुई है। कस्तूरबा गांधी विद्यालय में मिली सुविधाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया।

 

इसी विद्यालय की छात्रा दिव्या ने बताया कि पहले उसका स्कूल कक्षा आठ तक था, लेकिन अब कक्षा नौ से 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा मिलने से वह बेहद खुश है। वह फुटबॉल खेलती है और राज्य स्तर तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है। कक्षा सात की छात्रा अंजावती सिंह ने भी मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि वह हॉकी और कराटे खिलाड़ी है। हॉकी में उनका राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है, जबकि कराटे में उसने राज्य स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया है।

 

सोशल मीडिया के दौर में चुनौतियों पर सवाल

द संस्कृति स्कूल लखनऊ की छात्राओं ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। एक छात्रा ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। कक्षा आठ की श्रेयशी सिंह ने मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर सवाल किया। उसने पूछा कि सोशल मीडिया के दौर में जब कुछ खराब चीजें भी सामने आती हैं, तो विद्यार्थी उनसे दूर रहकर अपना ध्यान पढ़ाई और लक्ष्य पर कैसे केंद्रित रख सकते हैं।

 

स्मार्ट फोन से दूरी और अच्छी पुस्तकों की आदत

छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले अच्छी सोच विकसित करनी होगी और अपने लक्ष्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। आज के दौर में तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी भी सीमा और आवश्यकता है। तकनीक का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। स्मार्टफोन आज की पीढ़ी का बहुत अधिक समय खर्च कर रहा है। अगर किसी मशीन या तकनीक पर हमारी निर्भरता इतनी बढ़ जाए कि वह हमारी सोचने-समझने की क्षमता और रचनात्मकता को कमजोर करने लगे, तो उससे दूरी बनाना जरूरी है।

 

मुख्यमंत्री ने उदाहरण दिया कि एक समय लोग बिना कैलकुलेटर के गिनती और पहाड़े याद रखते थे तथा गणित के सवालों का तत्काल जवाब दे देते थे। कैलकुलेटर पर निर्भरता बढ़ने के साथ लोगों की याददाश्त पर भी इसका असर पड़ा। स्मार्टफोन डिजिटल लाइब्रेरी, अच्छे शैक्षिक कंटेंट और ऑनलाइन शिक्षा के लिए उपयोगी माध्यम हो सकता है। पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन इसमें उपलब्ध हर सामग्री हमारे हित में हो, यह जरूरी नहीं है। अनावश्यक कंटेंट से दूरी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अत्यधिक स्मार्टफोन इस्तेमाल के दुष्परिणामों के प्रति भी आगाह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक स्मार्टफोन देखने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और सोचने-समझने की क्षमता भी कमजोर हो सकती है। जो बच्चे चार से छह घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं, उन्हें धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने का प्रयास करना चाहिए।

 

सोशल मीडिया पर अच्छे-बुरे दोनों कंटेंट

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अच्छे और बुरे, दोनों कंटेंट मौजूद हैं। इसलिए केवल आवश्यकता, पाठ्यक्रम व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी सामग्री ही देखनी चाहिए। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की भी सीमा निर्धारित होनी चाहिए। सीएम योगी ने प्रदेश के बच्चों से स्मार्टफोन पर अनावश्यक समय खर्च करने के बजाय अच्छी और प्रेरणादायी पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के अलावा भी अच्छी किताबें पढ़ना और लिखने की आदत डालना आपके व्यक्तित्व और ज्ञान के विकास में लाभदायक होगा।

 

“मैं स्वयं मुश्किल से आधा घंटा स्मार्टफोन इस्तेमाल करता हूं”

मुख्यमंत्री ने छात्रा से अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं बहुत कम बमुश्किल आधा घंटा स्मार्टफोन का उपयोग करता हूं और वह भी राज्य से जुड़े किसी महत्वपूर्ण विषय या मुद्दे के लिए। अन्यथा स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करता। मुझे मालूम है कि स्मार्टफोन मेरा अधिक समय खराब कर सकता है और इससे प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर काम करने के लिए जरूरी समय प्रभावित हो सकता है। सीएम ने छात्राओं से कहा कि आपको भी स्मार्टफोन से दूरी बनानी चाहिए। 

 

छात्रा ने पूछा, कैसे संभालते हैं सर्वाधिक आबादी वाला प्रदेश

संवाद के दौरान संस्कृति विद्यालय की छात्रा श्रेजा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि देश में सबसे अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश को वह कैसे संभालते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ से अधिक आबादी रहती है, लेकिन यह आबादी चुनौती नहीं बल्कि प्रदेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जो लोग आबादी को चुनौती मानते थे, उन्होंने यूपी को बीमारू बना दिया था। हमारी सरकार ने इसी आबादी को डेमोग्राफिक डिविडेंड से जोड़ते हुए युवाओं की स्किलिंग, रोजगार और प्रदेश के विकास से जोड़ने का काम किया।

 

25 करोड़ लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ा यूपी

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्केल के अनुरूप स्किलिंग के लिए प्लेटफॉर्म तैयार किए गए और स्किलिंग को रोजगार से जोड़ने का प्रयास हुआ है। रोजगार को प्रदेश के विकास और विकास को मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया। जब इतनी बड़ी आबादी एक साथ आगे बढ़ती है और एक साथ सोचती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी बीमारू प्रदेश नहीं है, बल्कि देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। नौ वर्ष पहले प्रदेश की गिनती देश के पिछड़े राज्यों में होती थी, लेकिन आज सबसे प्रगतिशील राज्यों में यूपी की गिनती होती है। 25 करोड़ लोगों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को शुद्ध नीयत और स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ाने का परिणाम प्रदेश के सामने है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में नीयत शुद्ध और लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिणाम जरूर प्राप्त होता है।

 

अटल आवासीय विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा

अटल आवासीय विद्यालय की कक्षा छह की छात्रा अग्रिमा ने मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके साथ अपने ग्रुप की फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने खुशी से फोटो खिंचवाने के लिए सहमति दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए इन विद्यालयों की शुरुआत की है। निर्माण श्रमिकों के माता-पिता काम के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर जाते रहते हैं, जिसके कारण उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 18 अटल आवासीय विद्यालय शुरू किए गए हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं तथा यहां पढ़ने वाले बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

टीवी पर देखा, आज आमने-सामने मिलने की खुशी

कार्यक्रम में एनएस पब्लिक स्कूल की छात्रा सौम्या ने मुख्यमंत्री से मिलकर खुशी जताई। सौम्या ने कहा कि वह मुख्यमंत्री को अब तक टीवी पर देखती थी, लेकिन आज उनसे वास्तविक रूप से मिलकर उसे बहुत अच्छा लग रहा है। कक्षा तीन की छात्रा याशिका सोनकर ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। छात्रा ने अपना परिचय देते हुए बताया कि मैंने आपको कई बार टीवी पर देखा है और आज मैं आपसे आमने-सामने बात कर रही हूं। याशिका ने भी मुख्यमंत्री से अपने ग्रुप के साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई और 'जय हिंद-जय भारत' नारे के साथ अपनी बात पूरी की।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 331 अंक या 0.43 फीसदी बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 85 अंक या 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ। चौतरफा खरीदारी के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी तेजी आई। BSE 150 मिडकैप 0.16% चढ़ा,जबकि 250 स्मॉलकैप में 0.33% की बढ़त हुई।

बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह चुनिंदा IT और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई जोरदार खरीदारी रही। सेंसेक्स की बढ़त में इन्फोसिस और HDFC बैंक का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि,ICICI बैंक ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

TCS,इन्फोसिस,टेक महिंद्रा,HCL टेक और टाइटन सेंसेक्स की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं। दूसरी ओर ICICI बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट,एशियन पेंट्स और ITC इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि IT शेयरों में जबरदस्त तेजी की वजह से आज भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। इस सेक्टर को Nvidia की शानदार कमाई और बेहतर आउटलुक से सहारा मिला। इससे AI से जुड़े निवेश के जारी रहने को लेकर भरोसा बढ़ा और एंटरप्राइज़ AI डिप्लॉयमेंट और वर्कफ़्लो इंटीग्रेशन से जुड़ी कंपनियों को फायदा हुआ। हालांकि,निवेशकों की भागीदारी चुनिंदा शेयरों में रही क्योंकि बाजार जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर की टिप्पणियों पर नजरें बनाए हुए हैं। इससे US में ब्याज दरों के आउटलुक और ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के बारे में ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर, Q1FY27 के नतीजों का दौर काफी हद तक अच्छे नतीजों के साथ खत्म हो रहा है,इसलिए अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे बदलती ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के बीच अर्निंग ग्रोथ पर रहेगा।

हालांकि घरेलू लिक्विडिटी की अच्छी स्थिति बाजार को स्थिरता दे रही है,लेकिन वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता के विषय हैं,जिससे निवेशक ग्रोथ और कॉर्पोरेट मुनाफे से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर,अश्विनी शमी ने कहा कि अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड के 4.6%–4.7% के 1-साल के हाई के करीब रहने के बावजूद,हाल के हफ्तों में FII का निवेश थोड़ा पॉजिटिव रहा है। हालांकि US में रिस्क-फ्री रेट्स बढ़ने से आमतौर पर उभरते बाजारों में निवेश पर असर पड़ता है। लेकिन निवेश में यह बढ़ोतरी 2 साल से ज्यादा समय तक बाजार के कंसोलिडेशन के बाद भारतीय इक्विटी की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाती है। घरेलू रिटेल और DII का मजबूत निवेश बाजार में गिरावट को संभालने में मदद कर रहा है।

बेंचमार्क इंडेक्स एक दायरे में बने हुए हैं। लार्ज-कैप निफ्टी 100 (~20x P/E) की तुलना में स्मॉल और मिड-कैप इंडेक्स (~34x और 30x P/E) का वैल्यूएशन प्रीमियम काफी ज्यादा है,जो अच्छे बॉटम-अप मौके देता है। निकट भविष्य में बाजार का फोकस दूसरी छमाही (H2) की अर्निंग, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI के लिक्विडिटी रुख पर रहने की उम्मीद है। अच्छे वैल्यूएशन के कारण BFSI और फाइनेंशियल सर्विसेज के चुनिंदा शेयरों निवेश के मौके हैं। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर,पावर और बिजनेस सर्विसेज में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं, जिन्हें कैपेक्स (capex) में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि लगातार दो सेशन में गिरावट के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले लेकिन पॉजिटिव संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर करते दिखे। हालांकि,कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,US बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है।

कल मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान दिखी भारी उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल को लेकर और सतर्क कर दिया।

आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP,रिसर्च,अजीत मिश्रा ने कहा कि आज शुक्रवार को बाजार में सुस्ती रही और मिले-जुले संकेतों के बीच मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। सपाट शुरुआत के बाद,निफ्टी पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में घूमता रहा और आखिर में 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 0.43% ऊपर 77,264.51 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के शानदार तिमाही नतीजों और रेवेन्यू के अच्छे आउटलुक के बाद ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के दम पर IT सेक्टर सबसे आगे रहा। फार्मा और मेटल सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।

ग्लोबल बाजार से मिले-जुले संकेतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। अब सबकी नजरें जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर टिकी हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी के लिए 24,100-24,000 के जोन के आसपास की खींचतान बनी हुई है। अगर यह लेवल टूटता है और गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स 23,800–23,650 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 24,200 का लेवल तत्काल रुकावट का काम कर सकता है और उसके बाद 24,300–24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस लेवल होगा।

मौजूदा अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ट्रेडरों को सलाह है कि इंडेक्स को लेकर सतर्क रुख अपनाएं और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करें। निवेशकों को मज़बूत शेयरों और सेक्टर को प्राथमिकता देनी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

TCS से ₹1537 करोड़ के ऑर्डर पर बनी बात, 13% उछल पड़े Tejas Networks के शेयर

Tejas Networks Share Price: तेजस नेटवर्क्स को टीसीएस (TCS) से एक LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला तो शेयर रॉकेट बन गए। तूफानी स्पीड से इसके शेयर करीब 13% उछल पड़े। टीसीएस ने इसे BSNL के 4जी मोबाइल नेटवर्क के लिए इक्विपमेंट्स की सप्लाई का इतना बड़ा ऑर्डर दिया है कि अकेले यह तेजस नेटवर्क के मौजूदा ऑर्डर बुक से अधिक है। इसने तेजस नेटवर्क्स के शेयरों में जोश भर दिया। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया, जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 8.58% की बढ़त के साथ ₹554.70 पर है। इंट्रा-डे में यह 12.91% उछलकर ₹576.80 तक पहुंच गया था।

BSNL के लिए Tejas Networks को TCS से मिला तगड़ा LoI

तेजस नेटवर्क्स को 18,685 साइट्स पर बीएसएनएल (BSNL) के 4जी नेटवर्क के लिए RAN (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) इक्विपमेंट, एक्सेसरीज और इंस्टॉलेशन मैटेरियल्स की सप्लाई को लेकर टीसीएस से लेटर ऑफ इंटेंट मिला है। यह ऑर्डर 1,537 करोड़ का है जोकि तेजस नेटवर्क्स के पूरे मौजूदा ऑर्डर बुक से अधिक है। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹1529 करोड़ का था। तेजस नेटवर्क्स का कहना है कि टीसीएस की तरफ से जल्द ही एक डिटेल्ड परचेज ऑर्डर जारी किया जाएगा।

यह नया ऑर्डर बीएसएनएल के 4G नेटवर्क के विस्तार से जुड़ा है, जिस पर एक साल से अधिक समय से काम चल रहा है। मई 2025 में टीसीएस को बीएसएनएल से 18,685 साइट्स पर 4G नेटवर्क की प्लानिंग, इंजीनियरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, कमीशनिंग और सालाना मेंटेनेंस के लिए ₹2,903 करोड़ का एक एड-ऑन एडवांस पर्चेज ऑर्डर मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए RAN इक्विपमेंट सप्लाई करने वाली तेजस नेटवर्क्स ने बाद में इससे जुड़ा करीब ₹1526 करोड़ का पर्चेज ऑर्डर मिलने की उम्मीद जताई थी।

तेजस नेटवर्क्स ने बीएसएनएल के स्वदेशी 4G रोलआउट के लिए बेस स्टेशन और रेडियो इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई किए हैं तो टीसीएस ने उस कंसोर्टियम में ओवरऑल डिप्लॉयमेंट की कमान संभाली जिसमें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) भी शामिल है। शुरुआत में इसमें 1 लाख से अधिक साइट्स थीं और तेजस नेटवर्क्स को 4G RAN इक्विपमेंट सप्लाई के लिए करीब ₹7492 करोड़ का ऑर्डर मिला था।

कैसी है सेहत

कंपनी के कारोबारी सेहत की बात करें तो जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर तेजस नेटवर्क्स का रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग दोगुना होकर ₹202 करोड़ से ₹404 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन नेट लॉस भी इस दौरान ₹194 करोड़ से ₹202 करोड़ पर पहुंच गया। जून तिमाही में 5G रेडियो के इंटरनेशनल शिपमेंट और 100G/400G ऑप्टिकल और फाइबर-टू-द-x प्रोडक्ट्स के घरेलू शिपमेंट से इसके रेवेन्यू को सपोर्ट मिला। जून तिमाही के आखिर में कंपनी पर कुल कर्ज ₹4,866 करोड़, कैश ₹589 करोड़ और नेट कर्ज ₹4,277 करोड़ था।

अब इसके शेयरों की बात करें तो 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹294.10 पर था। इस निचले स्तर से 5 ही महीने में यह 119.23% उछलकर 19 जून 2026 को एक साल के हाई ₹644.75 पर पहुंच गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Outlook: क्या सोना और चांदी खरीदने का यह सही समय है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Outlook: सोने की कीमत में $4,600 प्रति औंस से ऊपर की तेजी ने निवेशकों के मन में फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हालिया गिरावट (करेक्शन) के बाद सोना और चांदी में दोबारा निवेश करने का यह सही समय है? ऐसा करने के पक्ष में राय मजबूत हो रही है। वैलम कैपिटल की अगस्त मैक्रो ग्रिड चार्टबुक के अनुसार, अगस्त में सोने से 9% रिटर्न मिला, जो व्यापक इक्विटी मार्केट के रिटर्न का लगभग 5 गुना है, जबकि गोल्ड माइनर्स (सोना निकालने वाली कंपनियों) को 21% का फ़ायदा हुआ। वैलम कैपिटल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सोना और चांदी “फिर से खरीदने” (reload) का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि कीमतों में आई गिरावट से कीमती धातुओं के प्रति सकारात्मक नजरिए (थीसिस) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस हालिया तेजी में US ट्रेज़री यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से मदद मिली है। ऐसा तब हुआ जब US ट्रेज़री ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की ज़्यादा खरीद की घोषणा की। कम यील्ड से सोना रखने की ‘अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है, जबकि राजकोषीय चिंताओं के कारण करेंसी की वैल्यू घटने (करेंसी-डिबेसमेंट) की बहस फिर से शुरू हो गई है।

वैलम कैपिटल का नजरिया सकारात्मक क्यों है?

फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सेंट्रल बैंकों की मांग में भारी बढ़ोतरी की ओर इशारा किया है। सेंट्रल बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 411% ज़्यादा है। यह तब हुआ जब वेस्टर्न ETF से 44.8 टन सोने की निकासी हुई और ज्वेलरी की मांग में 17% की गिरावट आई।

वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। वैलम के अनुसार, माइन प्रोडक्शन (खदानों से उत्पादन) में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी हुई, रीसाइकल किए गए सोने में 6% की गिरावट आई और कुल सप्लाई स्थिर रही।

फर्म का यह भी तर्क है कि जैसे-जैसे ग्लोबल डेट (वैश्विक कर्ज) बढ़ रहा है, करेंसी की वैल्यू घटने के खिलाफ बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका अनुमान है कि जमीन के ऊपर मौजूद सोने की कुल कीमत लगभग $31 ट्रिलियन है, जबकि प्रमुख सेंट्रल बैंकों की मनी सप्लाई $102 ट्रिलियन और ग्लोबल डेट लगभग $350 ट्रिलियन है।

फर्म का कहना है कि चांदी भी इस सकारात्मक नजरिए को और मजबूत करती है। 2021 से 2026 के बीच, चांदी में 263% और सोने में 164% की की बढ़ोतरी हुई। फिर भी, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो लगभग 69 गुना बना हुआ है, जो इसके लंबे समय के औसत (मीडियन) 45-50 गुना से ज़्यादा है।

सोने-चांदी के तेजी के पीछे आंख बंद कर ना करें भरोसा

लेकिन हर कोई इस स्थिति को एक ही नजरिए से नहीं देखता। YES सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ रिसर्च के स्ट्रैटेजिस्ट हितेश जैन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है कि वे इस नए कदम को अलग नजरिए से देखते हैं। वे इसे सोने के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय एक टैक्टिकल राहत मानते हैं।

US ट्रेजरी के लॉन्ग-एंड बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम दोगुना करके $4 बिलियन करने के फैसले से लॉन्ग-टर्म यील्ड कम हुई है, जिससे सोने को थोड़े समय के लिए बढ़ावा मिला है। लेकिन जैन का तर्क है कि इस दखल से US की मूल फिस्कल समस्या हल नहीं होती क्योंकि बायबैक की गई सिक्योरिटीज की जगह नए इश्यू ले लेंगे।

उनकी बड़ी चिंता ग्लोबल कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल है। सरकारें और कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और रीशोरिंग के लिए कैपिटल जुटाने की होड़ में हैं, जिससे कैपिटल की लागत स्ट्रक्चरल रूप से ज़्यादा बनी रह सकती है। जैन ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में , हमें उम्मीद है कि सोना इक्विटी और इंडस्ट्रियल मेटल्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करेगा।”

सतर्क हैं भारतीय निवेशक

घरेलू निवेश का ट्रेंड भी बताता है कि निवेशक आंख बंद करके सोने की तेजी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वैलम (Vallum) के अनुसार, जुलाई में प्रेशियस-मेटल फंड में निवेश घटकर ₹4,084 करोड़ रह गया, जो जून में ₹8,680 करोड़ था। वहीं, जून में ₹65,530 करोड़ की निकासी के बाद जुलाई में मनी-मार्केट फंड में ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश हुआ। जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों ने गोल्ड फंड और ETF में लगभग ₹93,000 करोड़ का निवेश किया, जिसमें अकेले जनवरी में रिकॉर्ड ₹33,837 करोड़ का निवेश हुआ।

जो निवेशक फिर से निवेश करना चाहते हैं। उनके लिए एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रियल यील्ड, डॉलर, फिस्कल पॉलिसी और सेंट्रल बैंक की खरीदारी मुख्य संकेतक बने रहेंगे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: 28 अगस्त को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शुक्रवार, 28 अगस्त के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं AI से जुड़ा बड़ा अपडेट है। कहीं ब्लॉक डील और ऑर्डर की खबर है। वहीं कुछ कंपनियों में निवेश और मैनेजमेंट से जुड़े अहम अपडेट आए हैं।

Adani Power

पावर कंपनी Adani Power ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Chandenvalle Infra Park में पूरी हिस्सेदारी बेचने का समझौता किया है। यह हिस्सेदारी AdaniConneX Private Limited को बेची जाएगी। डील की वैल्यू करीब ₹535.69 करोड़ है। अंतिम रकम क्लोजिंग डेट के बदलावों पर निर्भर करेगी।

New India Assurance Company

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी New India Assurance Company को ₹781.39 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला है। इसमें ₹59.63 करोड़ का ब्याज भी शामिल है। यह रिफंड असेसमेंट ईयर 2022-23 से जुड़ा है। इनकम टैक्स विभाग ने शिकायत के समाधान के बाद यह रकम जारी की है।

Lenskart

आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक Alphawave करीब 1.2% हिस्सेदारी बेच सकता है। डील का आकार करीब ₹1,313 करोड़ है। फ्लोर प्राइस ₹630 प्रति शेयर रखा गया है, जो मौजूदा भाव से करीब 1.7% कम है।

NBCC (India)

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC को पांच नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल वैल्यू ₹134.27 करोड़ है। इसमें स्कूल कैंपस, एजुकेशन सेंटर और Canara Bank की बिल्डिंग से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। ऑर्डर में तीन केंद्रीय विद्यालयों के प्रोजेक्ट भी हैं।

Wipro

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने Google Cloud के साथ अपनी पार्टनरशिप बढ़ाई है। इसका मकसद Gemini Enterprise और AI को बड़े स्तर पर अपनाना है। Wipro अपने कारोबार में भी Gemini Enterprise का इस्तेमाल करेगी। साथ ही 10,000 से ज्यादा AI सर्टिफाइड विशेषज्ञों को इस टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जाएगा।

Life Insurance Corporation of India

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी LIC ने Bajaj Finance के NCD में ₹5,000 करोड़ का निवेश किया है। LIC ने ₹1 लाख फेस वैल्यू वाले 5 लाख NCD खरीदे हैं। यह निवेश कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया है। NCD यानी नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट है।

RPP Infra Projects

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RPP Infra Projects को बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई में प्रस्तावित Global Sports City प्रोजेक्ट को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया है। इसके चलते कंपनी का ₹205.89 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया है।

Bharat Petroleum Corporation

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी Bharat Petroleum Corporation (BPCL) के चेयरमैन और MD संजय खन्ना ने कहा कि एनर्जी सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को E10 पेट्रोल का विकल्प दिया जा सकता है। लेकिन, E20 को बंद नहीं किया जाएगा।

Zee Entertainment Enterprises

मीडिया कंपनी Zee Entertainment Enterprises से जुड़ा अहम अपडेट आया है। NCLT ने सुभाष चंद्रा की पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में प्रस्तावित रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। HDFC Bank इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL ने राकेश भल्ला को दोबारा Additional Director नियुक्त किया है। उन्हें इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी दोबारा नियुक्ति 25 अगस्त 2026 से प्रभावी है। इससे पहले उन्हें 13 अगस्त को इस पद पर नियुक्त किया गया था।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच पुराने गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने पर विचार हो रहा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय खन्ना ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि E20 को हटाकर दोबारा E10 लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

E10 और E20 में क्या अंतर है?

E10 पेट्रोल में 10% इथेनॉल और 90% पेट्रोल होता है। वहीं E20 में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता रही है। इसमें माइलेज, फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स और मरम्मत से जुड़े सवाल उठे हैं।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पर विचार

ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के लिए अलग से E10 उपलब्ध कराने का विकल्प देखा जा रहा है। संजय खन्ना ने कहा कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से E10 की सप्लाई करना संभव है। हालांकि, E10 और E20 को एक साथ उपलब्ध कराने के तरीके पर अभी चर्चा चल रही है।

E10 की सप्लाई में क्या दिक्कत है?

ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL को E10 की सप्लाई में कोई बड़ी लॉजिस्टिक दिक्कत नजर नहीं आती। लेकिन अगर E10 और E20 दोनों को एक साथ बेचना है, तो अलग ग्रेड के पेट्रोल की सप्लाई संभालनी होगी। इसी वजह से सरकार और कंपनियां इसके तौर-तरीकों पर काम कर रही हैं।

E20 को वापस लेने का प्लान नहीं

सरकार पहले ही कह चुकी है कि E20 से वापस E10 या E0 पर जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में कहा था कि देशभर के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 की अलग-अलग सप्लाई रखने से लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की लागत बढ़ेगी।

हालांकि, BPCL के ताजा बयान से साफ है कि E10 को E20 के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि पुरानी गाड़ियों के लिए एक अलग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

E10 की मांग क्यों उठी?

E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता बढ़ी है। लोगों का कहना है कि ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल से माइलेज पर असर पड़ सकता है। कुछ पुरानी गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स की अनुकूलता को लेकर भी सवाल हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी 17 अगस्त को एक लेख में सुझाव दिया था कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों की परेशानी दूर करने के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 के साथ E20 भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

E20 की शुरुआत कैसे हुई?

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से ऑयल कंपनियों को 20% तक इथेनॉल मिला पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया था। इस पेट्रोल का न्यूनतम Research Octane Number यानी RON 95 होना भी जरूरी किया गया। इसके बाद पुरानी गाड़ियों के मालिकों में माइलेज और गाड़ी की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी।

फिलहाल तस्वीर यही है कि E20 की व्यवस्था जारी रहेगी। पुरानी गाड़ियों के लिए E10 उपलब्ध कराने का विकल्प जरूर सरकार और ऑयल कंपनियों की चर्चा में है।

2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है EV मार्केट, 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी: नितिन गडकरी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हथियार बनाने में भारत की लंबी छलांग! प्रोडक्शन ₹1.80 लाख करोड़ और एक्सपोर्ट ₹39,000 करोड़ के पार

India Defence Sector Growth: भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़कर लगभग ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़कर ₹39,000 करोड़ के करीब हो गया है।

रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-सीरीज के मेन बैटल टैंक्स के ओवरहॉलिंग के लिए बनने वाले ₹472 करोड़ के नए प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे।

2014 से 2026: रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

राजनाथ सिंह ने 2014 के मुकाबले रक्षा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का ब्योरा पेश किया। साल 2014 में देश का हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ ₹1,000 करोड़ का था, जो अब ₹39,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

जबलपुर VFJ में ₹472 करोड़ का प्रोजेक्ट

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में बनने वाला नया प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह नया प्लांट सालाना 80 T-72 और T-90 टैंकों का ओवरहॉल यानी मरम्मत व अपग्रेडेशन करने में सक्षम होगा। भारतीय सेना को हर साल करीब 230 T-सीरीज टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत होती है।

अब तक चेन्नई के आवडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। जबलपुर का नया प्लांट शुरू होने के बाद सेना की यह कमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

‘अब केवल हथियार बना ही नहीं रहे, मेंटेन भी कर रहे हैं’

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल चुका है और इसके पीछे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन है। भारत अब न सिर्फ अपनी धरती पर आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि उनका रखरखाव, ओवरहॉलिंग और अपग्रेडेशन करने की पूरी क्षमता हासिल कर चुका है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह भारतीय सेना के टैंकों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने में ‘वरदान’ साबित होगा।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का ऐतिहासिक सफर

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर(VFJ) की स्थापना 1969 में हुई थी, जो वर्तमान में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के तहत काम करती है। शुरुआत में इस फैक्ट्री में जर्मनी की MAN कंपनी के सहयोग से ‘शक्तिमान 3-टन’ ट्रक और जापान की निसान के सहयोग से ‘निसान 1T’ व ‘जोन्गा’ गाड़ियां बनाई जाती थीं। यह फैक्ट्री 330 एकड़ में फैली है और इसका संलग्न एस्टेट 600 एकड़ का है।

नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।