Skipper Share Price: T&D प्रोजेक्ट्स के लिए मिला ₹1,305 करोड़ का ऑर्डर, शेयर 3% चढ़ा

Skipper  Share Price: कैपिटल गुड्स कंपनी Skipper के शेयरों में 27 अगस्त को 3 फीसदी से ज़्यादा की तेजी देखने को मिली। शेयरों में यह बढ़त कंपनी को मिले ऑर्डर के बाद आई। दरअसल, कंपनी ने घोषणा की कि उसे ₹1,305 करोड़ के कई ऑर्डर मिले हैं। 27 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि उसे ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स के लिए कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिले हैं।

इन प्रोजेक्ट्स में नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में T&D प्रोजेक्ट्स के लिए ट्रांसमिशन टावर और मोनोपोल की सप्लाई शामिल है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे एक घरेलू डेवलपर से दो 765 kV ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट्स मिले हैं।

ऑर्डर मिलने पर Skipper Limited के डायरेक्टर शरण बंसल ने कहा, “हम अपने एक्सपोर्ट बिज़नेस में आई नई तेज़ी से बहुत उत्साहित हैं, क्योंकि विकसित बाज़ारों से मिलने वाले ऑर्डर हमारी उम्मीदों के मुताबिक बढ़ रहे हैं। इन ऑर्डर्स की विविधता हमारे T&D पोर्टफोलियो को और मज़बूत बनाती है और अलग-अलग जगहों पर जटिल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर हमारी स्थिति को और मज़बूत करती है।”

इससे पहले, CNBC-TV18 से बात करते हुए शरण बंसल ने कहा था कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही में सिंगल-डिजिट ग्रोथ के बावजूद कंपनी ने FY27 के लिए 15% रेवेन्यू ग्रोथ और 30% प्रॉफिट ग्रोथ का अपना मौजूदा गाइडेंस बनाए रखा है, और कंपनी को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में एक्सपोर्ट शिपमेंट सामान्य हो जाएंगे।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पहली तिमाही में कमज़ोर परफॉर्मेंस का मुख्य कारण जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों के कारण एक्सपोर्ट शिपमेंट में आई रुकावट थी। उन्होंने कहा कि कंपनी मार्जिन में बढ़ोतरी देख रही है।

3% से ज़्यादा बढ़ने के बाद कंपनी के शेयरों में थोड़ी नरमी आई है। पिछले एक साल के कारोबार में इनमें 6% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। लगातार दो दिन गिरावट के बाद स्टॉक अब बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। पिछले 10 सेशन में से 7 बार स्टॉक बढ़त के साथ बंद हुआ है। ₹560 की स्टॉक कीमत ₹593 प्रति शेयर के 52-हफ़्ते के हाई से थोड़ी ही कम है।

GK Energy Share Price: ₹454.5 करोड़ के सोलर प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, शेयर 5% चढ़ा

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

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वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

Vadodara-Mumbai

अहमदाबाद-मुंबई के बीच शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन के पहले चरण से पहले ही वाहन चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त, 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की पूरी संभावना है। यह नया रूट शुरू होने से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच सड़क मार्ग ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक बन जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य के हिस्से में आने वाला 157 किलोमीटर का पूरा सेक्शन 31 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए खोलने की योजना है। लगभग ₹24,000 करोड़ की लागत से बन रहे इस सेक्शन के 7 में से 5 निर्माण पैकेज का काम पूरा हो चुका है और बाकी के दो पैकेज का काम अंतिम चरण में है।

सफर का समय घटकर आधा रह जाएगा : इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही वडोदरा से मुंबई के बीच की 403 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ 4 घंटे में तय की जा सकेगी। अब तक इसी दूरी को तय करने में यात्रियों को लगभग 8 घंटे का समय लगता था। यात्रा का समय आधा हो जाने से यात्रियों को न केवल आसानी होगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल की भी भारी बचत होगी।

प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट : 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, जो देश के 5 राज्यों को आपस में जोड़ता है। इस विशाल कॉरिडोर का अहम हिस्सा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे चालू होने से उत्तर और पश्चिम भारत के बीच व्यापार, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स बिजनेस को नई रफ्तार मिलेगी।

बिना बारिश कैसे बह गए पुल और गांव? नेपाल बाढ़ पर बड़ा खुलासा, जानिए चीन-नेपाल बॉर्डर पर क्या हुआ था!

Nepal Flash Flood: नेपाल की भोटकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है। इस आपदा को लेकर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि तिब्बती क्षेत्र में आए भूकंप की वजह से संभवतः हिमस्खलन हुआ, जिसने आगे चलकर इस विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। शुरुआती जानकारियों के आधार पर माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों की वजह से पहले हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भोटकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया।

तिब्बत में आया था 4.4 तीव्रता का भूकंप

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित तिब्बती क्षेत्र में सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप, हिमस्खलन और नदी में आई अचानक बाढ़ के बीच के संबंधों को लेकर अब एक्सपर्ट अपनी जांच कर रहे हैं।

बर्फ गिरने से रुका था ल्हेन्दे नदी का प्रवाह

काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ के शुरुआती आकलन के मुताबिक एक बड़े हिमस्खलन की वजह से ल्हेन्दे नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे भारी मात्रा में पानी इकट्ठा होता गया और जैसे ही यह रुकावट या प्राकृतिक बांध टूटा, पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब नीचे की ओर बहा और भोटकोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। कायस्थ ने बताया कि नेपाल की ओर से गिरे बर्फ के पहाड़ ने ल्हेन्दे नदी को रोक दिया था जबकि उसी समय के आसपास तिब्बत की तरफ भूकंप भी महसूस किया गया था। अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या भूकंप ने ही इस हिमस्खलन को उकसाया था।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

भोटकोशी नदी में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी नदी में इसी तरह का अचानक उफान आया था। उस समय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की थी कि रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेन्दे नदी में हिमनद झील के फटने की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी।

31 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता और भारी तबाही

बागमती प्रांत की स्थानीय पुलिस के मुताबिक इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 31 हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। पानी के अचानक और तेज बहाव ने भोटकोशी नदी के किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

जलविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा बड़ा नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ की वजह से इस क्षेत्र की कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जारी राहत और बचाव कार्यों के बीच इस स्तर की तबाही ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों और अहम इंन्फ्रा स्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ चीन से किए गए एकतरफा प्यार का नतीजा! लोकल पत्रकार ने किया सनसनीखेज दावा

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तिब्बत की तरफ से आई इस अचानक बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा के बीच नेपाल के एक प्रमुख पत्रकार ने बीजिंग पर समय रहते अर्ली वार्निंग न देने का आरोप लगाते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर काठमांडू को चीन के साथ अपने संबंधों में इस एकतरफा प्यार का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है।

नेपाली पत्रकार का बीजिंग पर सीधा निशाना

विदेश और सामरिक मामलों के वरिष्ठ नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने बीजिंग द्वारा पूर्व चेतावनी न दिए जाने पर अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना उसे नेपाल का उत्तरी पड़ोसी कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि समय पर अलर्ट न भेजकर उसने नेपाल की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए काफ्ले ने लिखा कि ‘नेपाल अपने पड़ोसियों की जायज सुरक्षा चिंताओं का लगातार समाधान करता रहा है। हालांकि बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। इतनी बड़ी आपदा की समय पर पूर्व चेतावनी न देकर उन्होंने हमारे यहां बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि की वजह तैयार की।’

एकतरफा प्यार की कीमत अकेला नेपाल क्यों चुकाए?

अपनी पोस्ट में काफ्ले ने नेपाल और चीन के बीच के इस द्विपक्षीय रिश्ते के स्वरूप पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीनी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले संकटों का सामना नेपाल को बार-बार करना पड़ता है जबकि काठमांडू बीजिंग की हर छोटी-बड़ी मांग और चिंताओं का ख्याल रखता है। काफ्ले ने आगे लिखा कि ‘हम लगातार उनके क्षेत्र (चीन) से शुरू होने वाले संकटों का सामना करते आ रहे हैं जबकि हम उनकी सभी जरूरतों और अनावश्यक-आवश्यक चिंताओं को पूरा करते रहते हैं। आखिर इस एकतरफा प्यार की कीमत अकेले नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़े?’

सीमा पर भारी तबाही, भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब बुधवार सुबह तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। तिब्बती क्षेत्र से अचानक पानी के भारी सैलाब ने करीब सुबह 9 बजे नेपाल की भोटेकोशी नदी में प्रवेश किया। इस जल प्रलय के चलते सीमावर्ती टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में तबाही देखने को मिली। नदी के तेज बहाव ने कई रिहायशी बस्तियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, गाड़ियों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया और भारी नुकसान पहुंचाया।

सेना और पुलिस के साथ युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत कार्य चलाने और खोज अभियान को गति देने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक बयानों के मुताबिक प्रभावित बस्तियों में राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है और हताहतों व मौतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट होना बाकी है।

क्रॉस-बॉर्डर अर्ली वार्निंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस भीषण बाढ़ ने दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार सूचना साझा करने के तंत्रकी पोल खोलकर रख दी है। संवेदनशील और आपदा-संभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी आपदाओं की जानकारी साझा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस घटना ने काठमांडू और बीजिंग के बीच कूटनीतिक और सामरिक विश्वास पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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UP Expressway Projects: यूपी में ₹24,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट! दो नए एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी बड़ा दांव

UP Expressway Projects: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सुल्तानपुर में मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और राज्य के अलग-अलग जिलों में 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। योगी सरकार का फोकस अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। नए फैसलों के जरिए उभरते औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है।

‘गंगा एक्सप्रेसवे’ पहुंचेगा हरिद्वार, 10,761 करोड़ होंगे खर्च

कैबिनेट ने 10,761 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान होगा। इस परियोजना का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। इसमें केंद्र की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

इस एक्सप्रेसवे से बिजनौर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी काफी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल बिजनौर से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 यानी मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार हाईवे पर निर्भरता है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद बिजनौर की लखनऊ से कनेक्टिविटी भी गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए और मजबूत होगी।

प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा तेज कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार केवल सड़क परियोजना नहीं। बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरिद्वार जुड़ने के बाद एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रयागराज और हरिद्वार जैसे गंगा तट पर बसे दो प्रमुख कुंभ शहरों को एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ देगा।

यूपी सरकार को उम्मीद है कि इससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसका फायदा बिजनौर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों को मिलने की उम्मीद है। अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पर 7,968 करोड़

योगी कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी BIDA क्षेत्र और झांसी के आसपास के डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना का पूरा खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र से किसी वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव नहीं है। ॉ

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुंदेलखंड के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के अन्य क्षेत्रों तक सड़क संपर्क तेज होगा। निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272 करोड़ का इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

कैबिनेट ने सुल्तानपुर में 272.25 करोड़ रुपये के निवेश से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर यानी IMLC के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी मंजूरी दी है। यह क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित किया जाएगा। इससे यहां आने वाली औद्योगिक इकाइयों को पहले से मौजूद तेज सड़क नेटवर्क का सीधा फायदा मिलेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी और निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि यह क्लस्टर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगा तथा सुल्तानपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार पैदा करेगा।

11 बड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कैबिनेट ने 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश 5,500 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से आठ परियोजनाओं के लिए करीब 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का विस्तार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों तक है।

इनमें प्रमुख निवेश इस प्रकार हैं:-

  • सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लेक्सिफिल्म्स, गौतम बुद्ध नगर- 605.37 करोड़ रुपये
  • शाल्विस स्पेशियलिटीज, हमीरपुर- 297.30 करोड़ रुपये
  • साउंड कास्टिंग्स, हाथरस – 225 करोड़ रुपये
  • वृंदावन बॉटलर्स, बाराबंकी – 436.12 करोड़ रुपये
  • जुआरी एनविएन बायोएनर्जी, लखीमपुर खीरी- 294.72 करोड़ रुपये
  • पसवारा पेपर्स, हाथरस- 315 करोड़ रुपये
  • CRD फूड्स एंड बेवरेजेज, मथुरा- 363.94 करोड़ रुपये
  • माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज, उन्नाव- 363.52 करोड़ रुपये

(नोट- इन परियोजनाओं को पात्रता के आधार पर नीति के तहत नेट SGST और कैपिटल सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन मिल सकेंगे।)

तीन और प्रोजेक्ट्स में 2,606 करोड़ का निवेश

कैबिनेट ने तीन और परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी है। इनका कुल प्रस्तावित निवेश 2,606.04 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में लगाई जाएंगी।

उन्नाव में एल्युमिनियम कैन फैक्ट्री

Canpack India उन्नाव में करीब 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी। यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में UPEIDA द्वारा विकसित IMLC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

बिजनौर में फ्रेंच फ्राइज प्लांट

इसके अलावा Agristo Masa बिजनौर में 794.27 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह कंपनी मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स कारोबार का विस्तार करने के साथ फ्रेंच फ्राइज बनाने की यूनिट स्थापित करेगी। प्रस्तावित प्लांट की अधिकतम स्थापित क्षमता हर साल 75,000 टन होगी। इसके मुकाबले कंपनी की मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन क्षमता करीब 7,332 टन सालाना बताई गई है।

कानपुर देहात में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का होगा उत्पादन

एक बयान के मुताबिक, Supreme Industries कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यहां वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पाद बनाए जाएंगे। कंपनी की स्थापना 1942 में हुई थी। यह भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों में शामिल है।

एक्सप्रेसवे और उद्योग को एक साथ जोड़ने की रणनीति

यूपी सरकार के इन फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश अब एक्सप्रेसवे नेटवर्क को सीधे औद्योगिक विकास से जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। जबकि सुल्तानपुर का IMLC पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का फायदा उठाएगा। वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कैबिनेट के फैसले एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश को दिखाते हैं। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इन प्रस्तावों को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक नक्शे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इसका असर सिर्फ लखनऊ, नोएडा या दूसरे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित न रहकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक पहुंचने की उम्मीद है।

Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा

Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।

सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।

टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।

फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।

प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।

कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन’ (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।

इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।

बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।

सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला

25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।

यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।

Advait Energy Share Price: मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी से मिला ऑर्डर, शेयर को लगे पंख, 8% उछला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाकिस्तान ने LoC पर तैनात किए तुर्की के ‘घातक’ Bayraktar TB2 ड्रोन, जानें कितने खतरनाक है ये

Pak Bayraktar Drones Near LoC: भारत और पाकिस्तान के बीच एलओसी पर एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि पाकिस्तानी सेना ने भारत से सटी अपनी पश्चिमी सीमा पर तुर्की में बने Bayraktar TB2 ड्रोन की गश्त काफी बढ़ा दी है।

मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सैन्य संघर्ष के बाद से ही दोनों देश अपनी सीमाओं पर ड्रोन और UAV का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। लेकिन एलओसी के बेहद करीब तुर्की के इस कॉम्बैट-प्रूवन ड्रोन का देखा जाना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

क्यों खतरनाक है तुर्की का Bayraktar TB2 Drone?

बायराकतार टीबी2 केवल एक सामान्य जासूसी ड्रोन नहीं है, बल्कि यह एक मीडियम-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस स्ट्राइक-सक्षम यूएवी है। इसमें लगे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर पैकेजेस रियल-टाइम इमेजरी भेजते हैं। इससे पाकिस्तानी ऑपरेटर्स भारतीय सीमा के दुर्गम इलाकों, सैन्य हलचल और पोस्टों की विस्तृत मैपिंग कर सकते हैं।

यह ड्रोन सिर्फ रेकी नहीं करता, बल्कि प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों से हमला करने में भी सक्षम है। यानी जासूसी के लिए उड़ने वाला ड्रोन जरूरत पड़ने पर तुरंत स्ट्राइक मिशन में बदला जा सकता है।

मुरीद एयरबेस बना ड्रोन ऑपरेशन्स का मुख्य अड्डा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान अपने ड्रोन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 3 प्रमुख ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा है:

मुरीद एयरबेस (चकवाल): यह पाकिस्तान का मुख्य यूएवी हब बन चुका है, जहां से TB2 ड्रोन संचालित हो रहे हैं।

नूर खान एयरबेस (चकाला, रावलपिंडी): यह रावलपिंडी के पास पाकिस्तान का प्रमुख सैन्य विमानन केंद्र है।

रहीम यार खान एयरबेस: यह पाकिस्तान के दक्षिणी सेक्टर में फॉरवर्ड ऑपरेशन्स बेस के रूप में काम करता है।

खुफिया इनपुट यह भी बताते हैं कि पाकिस्तान ने मुजफ्फराबाद और कोटली (PoJK) के आसपास ग्राउंड-कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल लॉन्च सिस्टम तैनात किए हैं। इससे ड्रोन का ट्रांजिट टाइम घट जाता है और वे भारतीय सीमा के पास ज्यादा देर तक मंडरा सकते हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बदला सीमा का माहौल

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान भी पाकिस्तान ने टोही, आत्मघाती ड्रोन और सशस्त्र यूएवी का भारी इस्तेमाल किया था। उस दौरान भारतीय सेना ने मुरीद, चकाला और रहीम यार खान समेत कई पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाकर उनके ड्रोन नेटवर्क को करारा जवाब दिया था।

भारत का ‘काउंटर-ड्रोन’ सुरक्षा कवच तैयार

पाकिस्तानी ड्रोनों की इस नई हलचल का मुकाबला करने के लिए भारतीय रक्षा बलों ने सीमा पर अपनी सुरक्षा ग्रिड को बेहद मजबूत कर लिया है। एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील इलाकों में स्वदेशी और आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात की गई है। रात और खराब मौसम में भी सीमा पार की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोनों को हवा में ही जाम करने या मार गिराने के लिए त्वरित एक्शन ग्रिड सक्रिय है।

Stocks to Watch: 20 स्टॉक्स; तीन लिस्टिंग और Groww, Cipla, Rama Steel समेत ये शेयर धमाल मचाने को तैयार!

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में भी ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 73.50 प्वाइंट्स यानी 0.30% की बढ़त के साथ 24,553.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 25 अगस्त को अगस्त सीरीज में निफ्टी की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 286.98 प्वाइंट्स यानी 0.37% के उछाल के साथ 77,656.09 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 115.50 प्वाइंट्स यानी 0.48% की मजबूती के साथ 24,334.55 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स में रिबिट कैपिटल 1.6% हिस्सेदारी बेच सकती है। ₹1914 करोड़ की इस ब्लॉक डील के फ्लोर प्राइस ₹195 तय किया गया है।

Welspun Corp

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वेलस्पन कॉर्प में वेलस्पन इंवेस्टमेंट्स एंड कमर्शियल्स और एमडी-सीईओ विपुल माथुर कुल 63 लाख शेयर (2.4% हिस्सेदारी बेच सकते हैं। ₹1417 करोड़ की इस ब्लॉक डील के फ्लोर प्राइस ₹2250 तय किया गया है।

Honasa Consumer

होनासा कंज्यूमर ने शेयर खरीद सौदे के तहत तय शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण फ्लूएंस फार्मा में 58% हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है।

Cipla

अमेरिकी दवा नियामक एफडी ने 17 से 25 अगस्त, 2026 के बीच पीथमपुर में सिप्ला की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में cGMP (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) का फॉलो-अप इंस्पेक्शन किया, जिसके बाद कंपनी को फॉर्म 483 में सात इंस्पेक्शन ऑब्जर्वेशन मिला।

UCO Bank

यूके बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेंद्र कुमार साबू को बैंक के एमडी और सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

ARSS Infrastructure Projects

एआरएसएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ईस्ट कोस्ट रेलवे से ₹104.06 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है।

Advait Energy Transitions

अद्वैत एनर्जी ट्रांजिशन्स को मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड से ₹134.63 करोड़ का टर्न्की कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट 400kV, 220kV और 132kV वोल्टेज-क्लास EHV लाइनों के लिए सभी जरूरी एक्सेसरीज के साथ ‘इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम’ (ERS) के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए है।

NBCC (India)

एनबीसीसी को राजस्थान काउंसिल ऑफ स्कूल एजुकेशन से 170 नई स्कूल बिल्डिंग बनाने के लिए ₹121.74 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

Sai Parenterals

साई पैरेंटरल्स की ऑस्ट्रेलियाई सब्सिडियरी नोमेड फार्मा ने ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी मल्टी-बिलियन-डॉलर फार्मेसी चेन के साथ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) दवाओं की सप्लाई का एग्रीमेंट रिन्यू किया है। इसमें प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाया गया है, एग्रीमेंट और लंबा हुआ और इसकी वैल्यू बढ़ी है। तीन साल के लिए इस डील की वैल्यू AUD 3 करोड़ (लगभग ₹204 करोड़) होने का अनुमान है, जो तुरंत लागू होगी।

United Breweries

यूनाइटेड ब्रुअरीज ने प्रीमियमाइजेशन की स्पीड तेज करने के लिए केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में हेनेकेन सिल्वर के विस्तार का ऐलान किया है।

Varun Beverages

वरुण बेवरेजेज ने रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) एल्कोहलिक बेवरेजेज और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का बिजनेस करने के लिए एक नई सब्सिडियरी KIVA स्पिरिट्स एंड कंपनी बनाने का ऐलान किया है। बोर्ड ने इसका सीईओ और एमडी प्रथमेश मिश्रा को बनाया है। इसके अलावा वरुण बेवरेजेज ट्यूनीशिया में बेवरेजेज के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनेस करने के लिए एक जॉइंट वेंचर कंपनी बनाएगी, जिस पर अभी जरूरी मंजूरी लेनी है।

Rainbow Children’s Hospital

विकास माहेश्वरी ने निजी कारणों से रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के सीएफओ पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 31 अगस्त, 2026 से लागू होगा।

Tata Motors Passenger Vehicles

टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स ने हाल ही में लॉन्च हुई Sierra.ev को बिल्ट-इन 5G सेल्युलर कनेक्टिविटी से लैस करने के लिए टाटा कम्युनिकेशंस के साथ सहयोग की ऐलान किया, जिससे आने वाले समय में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड गाड़ियों (SDVs) का रास्ता साफ हो गया है।

Hindustan Copper

हिंदुस्तान कॉपर के ऑफर फॉर सेल इश्यू के तहत सरकार ने 2.90 करोड़ शेयरों के बेस इश्यू के बाद अब 2.90 करोड़ शेयरों (3% इक्विटी) के ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह इश्यू आज बंद होगा।

Shankesh Jewellers

पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वैलरी के प्रमोटर गाडगिल रेणु गोविंद और पीएन गाडगिल एंड संस ने शंकेश ज्वैलर्स में प्रति शेयर ₹101.05 के भाव पर ₹23.44 करोड़ में 23.2 लाख शेयर (1.57% हिस्सेदारी) खरीद लिए। लिस्टिंग के दिन नीरज रजनीकांत शाह ने ₹22.96 करोड़ में 23 लाख शेयर ₹99.86 के भाव पर, राजस्थान ग्लोबल सिक्योरिटीज ने ₹7.3 करोड़ में 7.3 लाख शेयर ₹100.03 के भाव पर तो एनके सिक्योरिटीज रिसर्च ने ₹35.68 करोड़ में 35.14 लाख शेयर ₹101.55 के भाव पर खरीद लिए। इस बीच नोमुरा सिंगापुर ने शंकेश ज्वैलर्स से अपनी पूरी हिस्सेदारी (16.17 लाख शेयर) ₹15.63 करोड़ में ₹96.66 के भाव पर बेचकर बाहर निकलने का फैसला किया।

Medi Assist Healthcare Services

इन्वेस्टमेंट मैनेजर एनटीएसेट केमैन की एनटीएशियन डिस्कवरी मास्टर फंड ने मेडी असिस्ट हेल्थकेयर सर्विसेज के 4 लाख शेयर और ₹14.27 करोड़ में प्रति शेयर ₹356.76 के भाव पर खरीदे हैं। एनटीएशियन डिस्कवरी मास्टर फंड के पास जून 2026 तक मेडी असिस्ट में पहले से ही 1.39% हिस्सेदारी (10.41 लाख शेयर) थी।

Rama Steel Tubes

मॉरीशस की इंवेस्टमेंट वेईकल मिनर्वा वेंचर्स फंड ने रामा स्टील ट्यूब्स के 1.72 करोड़ शेयर और ₹7.18 करोड़ में प्रति शेयर ₹4.16 के भाव पर खरीदे हैं। इससे पिछले कारोबारी सत्र में फंड ने ₹4.08 के भाव पर 2.25 करोड़ शेयर ₹9.18 करोड़ में खरीदे थे।

Gaja Alternative Asset Management

आईपीओ को करीब 33 गुना बोली मिलने के बाद गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के शेयरों की आज बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

Dhanwel Hybrid Seeds, Mopshop Distribution

धनवेल हाइब्रिड सीड्स और मॉपशॉप डिस्ट्रीब्यूशन के शेयर आज बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में यूपी देश में तीसरे स्थान पर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में यूपी देश में तीसरे स्थान पर

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में उत्तर प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता भी लगातार बढ़ रही है। अब तक 17.67 लाख इलेक्ट्रिक वाहन उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हो चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि प्रदेश में लोग पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपना रहे हैं।

 

पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक दोपहिया और चार पहिया वाहनों के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अलग ऊर्जा व्यवस्था पर आधारित होने के कारण जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने में सहायक है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में वैकल्पिक एवं टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा मिल रहा है।

 

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार हो रहा विस्तार

यूपी नेडा के डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चार्जिंग की सुविधा मिल रही है और ईवी अपनाने को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार विशेष रूप से प्रमुख शहरों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तथा महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

 

स्वच्छ और हरित परिवहन को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या प्रदेश में स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश सरकार की नीतियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के प्रयासों से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को भी मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में चार्जिंग सुविधाओं के और विस्तार तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता से प्रदेश में ग्रीन मोबिलिटी का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

 

ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में बढ़ता यूपी

उत्तर प्रदेश का पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में देश में तीसरे स्थान पर पहुंचना और प्रदेश में 17.67 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। यह बदलाव न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने में सहायक है, बल्कि स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।