UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

UP-Japan Investment Meet 2026 : जापानी तकनीक और यूपी की औद्योगिक ताकत से खुलेगा निवेश का नया रास्ता, हजारों नौकरियों की उम्मीद

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के उद्घाटन एवं दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जापान और भारत के प्रमुख उद्योग समूहों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बताया। समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन जापान और स्पार्क मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में अपने निवेश, साझेदारी के अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को साझा किया।
दोनों उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रदेश में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन, बड़े बाजार, निवेश-अनुकूल नीतियों और सरकार के सहयोग को औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।

 

कुबोटा ने कहा- यूपी में निवेश दीर्घकालिक विश्वास का प्रतीक

समारोह में कुबोटा कॉरपोरेशन, जापान के प्रेसिडेंट एवं सीईओ शिंगो हानाडा ने नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की ग्राउंड ब्रेकिंग को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन बताते हुए कहा कि इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में कुबोटा की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और साझेदारी को एक नया विस्तार मिल रहा है। उन्होंने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, इन्वेस्ट यूपी और उन सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके समर्थन और सहयोग से यह महत्वपूर्ण पड़ाव संभव हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश में कुबोटा का निवेश प्रदेश की क्षमता में कंपनी के दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की प्रगति और भारत को एक विकसित एवं मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों में उद्योग जगत भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है।

 

135 साल से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मिशन पर कुबोटा

कुबोटा सीईओ ने कहा कि 135 वर्षों से अधिक समय से कुबोटा लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज में योगदान देने के उद्देश्य से काम कर रहा है। कंपनी की फिलॉसफी के अनुरूप वह बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए लोगों के हित में काम करती रहेगी। उन्होंने भारत में कुबोटा की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कंपनी की मौजूदगी उसकी मजबूत साझेदारियों के कारण लगातार सुदृढ़ हुई है। उन्होंने नंदा परिवार और उनकी संस्था का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिवार ने दशकों से भारत की सेवा की है और देश में कृषि के मशीनीकरण में अग्रणी भूमिका निभाई है। नंदा परिवार के नेतृत्व के साथ कुबोटा की साझेदारी आगे भी और मजबूत होती रहेगी। कुबोटा और उसके भारतीय साझेदारों की साझी महत्वाकांक्षा भविष्य के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट बेस तैयार करना है। जापान की विश्वस्तरीय तकनीक और भारतीय साझेदारों की स्थानीय समझ एवं क्षमता मिलकर इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।

 

स्पार्क मिंडा की यूपी में 40 वर्षों से अधिक की मौजूदगी, अब बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी

समारोह में आकाश मिंडा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में कंपनी की मौजूदगी और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज संभावनाओं और नए अवसरों का प्रदेश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश उद्योग और निवेश को प्राथमिकता देने वाला राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि निवेशकों और उद्योग जगत के बीच इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और इंडस्ट्रियल कॉन्फिडेंस भी तैयार कर रहा है।

 

एक्सप्रेसवे, कॉरिडोर और वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक्स ने बदला औद्योगिक परिदृश्य

आकाश मिंडा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिकीकरण के लिए मजबूत फाउंडेशन तैयार हुआ है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, वर्ल्ड क्लास लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, स्किल्ड मैनपावर और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने हाल में संचालित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसी कई योजनाओं और परियोजनाओं को हकीकत में बदलते हुए देखा गया है, जो कुछ समय पहले तक केवल एक परिकल्पना मात्र थीं।

 

उत्तर प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

आकाश मिंडा ने बताया कि वह स्पार्क मिंडा ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कंपनी ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की उत्तर प्रदेश में 40 वर्षों से अधिक समय से मौजूदगी है और वर्तमान में प्रदेश में 9,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्पार्क मिंडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और कंपनी यहां अपनी मौजूदगी को कहीं बड़े स्तर पर विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

एडवांस टेक्नोलॉजी से ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ेगा निवेश

आकाश मिंडा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में एडवांस टेक्नोलॉजी, मोटर पार्ट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजाइन एवं डेवलपमेंट सेंटर जैसे क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी डीपर लोकलाइजेशन और बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है। निवेश विस्तार के साथ कंपनी प्रदेश में करीब 6,000 से 8,000 अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहती है।

 

जापान की तकनीक और यूपी की क्षमता का संयोजन बनेगा ताकत

स्पार्क मिंडा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने जापान और दुनिया भर के उद्योगों को उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।।जापान वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी, ग्लोबल क्वालिटी और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग लेकर आता है, जबकि उत्तर प्रदेश स्केल, टैलेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी सपोर्ट, बड़ा मार्केट और बिजनेस फ्रेंडली इनवॉयरमेंट उपलब्ध कराता है। भारतीय कंपनियां स्थानीय क्षमताओं, ग्राहकों की जरूरतों की बेहतर समझ और आगे बढ़ने की इच्छा लेकर आती हैं। इन सभी क्षमताओं का संयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

 

कारोबार के साथ रोजगार और विकसित भारत में योगदान है लक्ष्य

आकाश मिंडा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश का उद्देश्य केवल बिजनेस ग्रोथ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। कंपनी का लक्ष्य प्रदेश में अपनी औद्योगिक उपस्थिति का विस्तार करने के साथ रोजगार सृजन और विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देना है।  

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

जापान और उत्तरप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की निवेश संभावनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध लंबे समय से विश्वास पर आधारित रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा जापान के बीच बढ़ती साझेदारी इस विश्वास को और मजबूत करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया और कहा कि जापान के उद्योग जगत के लिए उत्तर प्रदेश में तेजी से अवसर खुल रहे हैं।

 

भारत की आर्थिक सोच को चार स्तंभों में समझाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर समझा जा सकता है। इनमें सोशल, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, समावेशी विकास, मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन और कानूनों तथा नियमों का सरलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से लगभग 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि के दौर में है। इसके साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। इससे भारत को आने वाले वर्षों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास की मजबूत क्षमता मिली है।

 

जापान के निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। इस विकास यात्रा में रेलवे, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृषि समेत लगभग हर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जापान के उद्योग जगत से भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से बदल रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है- भारत में निवेश करें, उत्तर प्रदेश में निवेश करें। सरकार निवेशकों की सहायता और सुविधा के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेशकों की सफलता ही भारत और उत्तर प्रदेश की सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

Bank Holidays: आज बुधवार को इस राज्य के बैंकों में छुट्टी, जानिए क्यों दिया गया हॉलिडे, अगस्त में कितने दिन बंद रहेंगे बैंक?

Bank Holidays August 19, 2026: अगर आप आज यानी बुधवार, 19 अगस्त को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने घर से निकलने की सोच रहे हैं, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, आज देश के एक राज्य में सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

यह छुट्टी किसी राष्ट्रीय पर्व के कारण नहीं, बल्कि एक विशेष राज्य दिवस और ऐतिहासिक राजा की जयंती के उपलक्ष्य में दी गई है। आइए जानते हैं कि आज किस राज्य में बैंक बंद हैं और इस महीने आगे छुट्टियों का क्या शेड्यूल रहने वाला है।

आज 19 अगस्त (बुधवार) को कहां बंद रहेंगे बैंक?

आज 19 अगस्त को त्रिपुरा राज्य में सभी बैंक बंद रहेंगे। त्रिपुरा में आज महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर जयंती मनाई जा रही है। महाराजा बीर बिक्रम को आधुनिक त्रिपुरा का निर्माता माना जाता है। उन्होंने राज्य में शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक बैंकिंग प्रणाली के विकास में अहम योगदान दिया था। उनके सम्मान में राज्य सरकार और आरबीआई ने आज के दिन बैंक अवकाश घोषित किया है।

अगस्त 2026 में आगे कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

अगस्त के बचे हुए दिनों में त्यौहारों और वीकेंड्स के कारण कई दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। देखिए पूरी लिस्ट:

  • 22 अगस्त (चौथा शनिवार): महीने के चौथे शनिवार के कारण पूरे देश में सभी बैंक बंद रहेंगे।
  • 23 अगस्त (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (देशभर में छुट्टी)।
  • 25 अगस्त (मंगलवार): मिलाद-उन-नबी / पहला ओणम के मौके पर केरल और आंध्र प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।
  • 26 अगस्त (बुधवार): मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) / तिरुवोनम के चलते दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत देश के अधिकांश राज्यों में बैंकों में ताले लटके रहेंगे।
  • 28 अगस्त (शुक्रवार): रक्षाबंधन के त्यौहार पर उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।
  • 30 अगस्त (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (देशभर में छुट्टी)।

ब्रांच बंद रहने पर भी काम आएंगी ये सेवाएं

बैंक शाखाएं बंद होने के बावजूद आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऑनलाइन डिजिटल सेवाएं 24×7 काम करती रहेंगी। मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए आप तुरंत फंड ट्रांसफर (NEFT/RTGS/IMPS/UPI) कर सकते हैं। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम की सेवाएं बिना रुकावट जारी रहेंगी। चेक क्लीयरेंस, पासबुक प्रिंटिंग या ड्राफ्ट बनवाने के लिए आपको बैंक खुलने का इंतजार करना होगा।

Stocks to Watch: 19 अगस्त को इन 12 शेयरों पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 19 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों ने बड़े फैसलों और ऑर्डर की जानकारी दी है। इनमें फंड जुटाने, नए कॉन्ट्रैक्ट, ग्रीन एनर्जी निवेश और रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने जैसे अपडेट शामिल हैं। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Bharat Petroleum

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी Bharat Petroleum (BPCL) ने ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कंपनी अपनी फंडिंग जरूरतें पूरी करेगी।

RailTel

सरकारी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RailTel को EPFO से ₹166.8 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर टैक्स समेत है। इससे कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिल सकती है।

Aster DM Quality Care

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM Quality Care में 7.2% हिस्सेदारी करीब ₹4,780 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए बिक सकती है। यह हिस्सेदारी TPG Inc. से जुड़ी Centella Mauritius Holdings बेच सकती है। डील का फ्लोर प्राइस ₹766.10 प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछले NSE क्लोजिंग प्राइस से करीब 6.3% कम है।

Krystal Integrated Services

फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी Krystal Integrated Services को MSRTC से करीब ₹134 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के तय क्षेत्रों में तीन साल तक इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देगी। यह ऑर्डर 18 अगस्त को सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया।

Atlanta Electricals

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी Atlanta Electricals को आंध्र प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (APTRANSCO) से ₹193.92 करोड़ का LOI मिला है। कंपनी 160 MVA क्षमता वाले 12 ऑटो ट्रांसफॉर्मर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई करेगी।

Exide Industries

बैटरी बनाने वाली कंपनी Exide Industries ने अपनी सहायक कंपनी Exide Energy Solutions में ₹200 करोड़ का निवेश किया है। यह रकम भारत में बन रहे मल्टी-गीगावॉट लिथियम-आयन सेल प्लांट के लिए लगाई गई है। निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया गया।

Highway Infrastructure

इंफ्रा कंपनी Highway Infrastructure को NHAI से ₹80.17 करोड़ का टोल ऑपरेशन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza के लिए है। इसकी अवधि 90 दिन होगी।

Jubilant Ingrevia

स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी Jubilant Ingrevia ने Zettaone Technologies India में 40% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा ₹189.2 करोड़ में होगा। इससे कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कदम बढ़ाएगी।

Hindustan Zinc

माइनिंग और मेटल कंपनी Hindustan Zinc ने बताया कि उसकी बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 22% हो गई है। FY26 में यह करीब 18% थी। कंपनी FY28 तक इसे 70% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

ONGC

सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC ने असम के गोलाघाट जिले में Khoraghat GGS-1 गैस इवैक्युएशन फैसिलिटी शुरू कर दी है। इससे अपर असम शेल्फ की अतिरिक्त गैस को North East Gas Grid के जरिए प्रोसेस और सप्लाई किया जा सकेगा।

Balkrishna Industries

ऑफ-हाईवे टायर बनाने वाली कंपनी Balkrishna Industries ने ₹550 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए NCD जारी करके जुटाएगी।

Shilpa Medicare

फार्मा कंपनी Shilpa Medicare ने अमेरिका में Pemetrexed Injection की 27,923 वायल्स को स्वेच्छा से वापस मंगाने का फैसला किया है। कंपनी ने दवा के रंग में असामान्य बदलाव के कारण यह रिकॉल शुरू किया है।

Patanjali Foods: 59% रिटर्न दे सकता है ये FMCG स्टॉक, जेफरीज ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को ₹80 करोड़ का टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Highway Infrastructure को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ₹80.17 करोड़ का नया टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी को तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza पर यूजर फीस कलेक्शन के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) जारी हुआ है।

कॉन्ट्रैक्ट 90 दिन का है

यह कॉन्ट्रैक्ट NH-44 पर कृष्णागिरि से थुंबीपाड़ी (Km 94 से Km 180) सेक्शन के लिए मिला है। Palayam Fee Plaza Km 154+500 पर स्थित है। यह प्रोजेक्ट Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल के तहत 90 दिनों के लिए चलेगा।

कंपनी के मुताबिक, यह हाईवे बेंगलुरु, होसुर और धर्मपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक इलाकों को जोड़ता है। इस वजह से इस रूट पर यात्री यातायात, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। इससे टोल कलेक्शन की अच्छी संभावना बनती है।

इस साल लगातार मिल रहे हैं बड़े ऑर्डर

Highway Infrastructure को इस साल NHAI से कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल चुके हैं। फरवरी में कंपनी को गुजरात के Moti Naroli Fee Plaza समेत वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के कई टोल प्लाजा के संचालन के लिए ₹154.6 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके अलावा हाल ही में कंपनी ने आंध्र प्रदेश में ₹329 करोड़ का टोलिंग कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया था।

मंगलवार को Highway Infrastructure का शेयर 4.06% चढ़कर ₹46.40 पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.01% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह लगभग 60% टूट चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 331.71 हजार करोड़ रुपये है।

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भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

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MBBS Seats: दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी 408 नई मेडिकल सीटें, जानें किस कोर्स में बढ़ने जा रही हैं कितनी सीटें

MBBS Seats: दिल्ली सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत सरकार ने मेडिकल शिक्षा क्षमता विस्तार के लिए रोडमैप तैयार किया है। साथ ही सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, पीजी और डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना है। साथ ही राजधानी की स्वास्थ्य सेवा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत चिकित्सा कार्यबल का निर्माण करना है। दिल्ली सरकार की योजना के तहत, नए और मौजूदा मेडिकल संस्थानों में 300 एमबीबीएस सीटें और 103 पीजी/डीएनबी सीटें जोड़ी जाएंगी। पांच फेलोशिप सीटों का भी प्रस्ताव है, जिससे नई मेडिकल सीटों की कुल संख्या 408 हो जाएगी।

अस्पताल-वार सीट विस्तार का प्रस्ताव

ग्रीनफील्ड मॉडल के तहत, इंदिरा गांधी अस्पताल (IGH) और द्वारका के गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में विकसित किए जा रहे मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 150 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव है मेडिकल कॉलेज में PG सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) में बीडीएस सीटों की संख्या भी 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में पीजी सीटों को 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है, जबकि एमएआईडीएस में पीजी सीटें 22 से बढ़कर 42 हो जाएंगी। बीएसए मेडिकल कॉलेज में भी 24 सीटों के साथ नए पीजी कोर्स शुरू होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सरकार के रोडमैप में अलग-अलग सरकारी मेडिकल संस्थानों में 103 नई पीजी/डीएनबी सीटों का प्रावधान है, जिसमें 67 एमडी/एमएस और 36 डीएनबी सीटें शामिल हैं। इसके अलावा, पांच फेलोशिप सीटों का प्रस्ताव है—तीन जीटीबी हॉस्पिटल में और दो दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में। इससे पीजी, डीएनबी और फेलोशिप लेवल पर नई सीटों की कुल संख्या 108 हो जाएगी।

डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद ज्यादा ट्रेंड डॉक्टर, स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट तैयार करना है जो दिल्ली के लोगों को बेहतर हेल्थकेयर दे सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की लीडरशिप में, सरकार लगातार चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ा रही है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और पेशेंट-केयर सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है।

सरकार डीएम/एमसीएच और स्ट्रक्चर्ड पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप जैसे सुपर-स्पेशियलिटी प्रोग्राम को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। प्रस्तावित रोडमैप को लागू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) समेत सक्षम अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लेने का प्रोसेस अभी चल रहा है।

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