FD Calculator: 5 लाख रुपये का बैंक एफडी 5 साल के लिए करने पर पैसा कितना बढ़कर मिलेगा?

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में एक बार फिर से लोगों की दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है। इसकी वजह आरबीआई का इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला है। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्टूबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया। इसके बाद बैंक भी एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाएंगे।

अगर अभी आपको 5 लाख रुपये का एफडी 5 साल के लिए करना हो तो उस बैंक में करना ठीक रहेगा, जिसका इंटरेस्ट रेट ज्यादा है। इसके लिए स्मॉल फाइनेंस बैंक, सरकारी बैंक और प्राइवेट बैंकों के एफडी के इंटरेस्ट रेट के बारे में जान लेना जरूरी है। इससे फैसला लेना आसान हो जाएगा।

स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) के FD पर इंटरेस्ट रेट्स

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सरकारी बैंकों के एफडी पर इंटरेस्ट रेट्स

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प्राइवेट बैंकों के एफडी पर इंटरेस्ट रेट्स

एसबीएम बैंक इंडिया 7.65%
DCB बैंक7.50%
यस बैंक7.25%
कोटक महिंद्रा बैंक 6.65%
IDFC First Bank7.10%
IDBI Bank 6.55%
एक्सिस बैंक 6.50%
HDFC Bank 6.50%
ICICI Bank 6.50%

एक्सपर्ट का कहना है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक एफडी पर सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं। आप सूर्योंदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में 8.25 फीसदी सालाना इंटरेस्ट रेट पर 5 लाख रुपये का एफडी 5 साल के लिए कर सकते हैं। 5 साल बाद आपको कुल 7,52,132 रुपये मिलेंगे। इसमें इंटरेस्ट के 2,52,132 रुपये शामिल हैं।

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एफडी 5 लाख से ज्यादा तो अलग-अलग बैंक में करने में फायदा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग 5 लाख से ज्यादा रुपये का एफडी करना चाहते हैं, उन्हें एक बैंक में नहीं कर अलग-अलग बैंकों में करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि बैंक में एफडी पर मैक्सिम इंश्योरेंस कवर 5 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि किसी अनहोनी की स्थिति में बैंक डिपॉजिटर्स को मैक्सिमम 5 लाख रुपये तक वापस करता है। अगर किसी डिपॉजिटर के एफडी में 10 लाख हैं तो भी उसे 5 लाख का ही बीमा का पैसा मिलेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

हेल्थ पॉलिसी होने के बावजूद कई बार हॉस्पिटल के बिल का कुछ हिस्सा जेब से भरना पड़ता है। अगर हॉस्पिटल के बिल में से 3 लाख रुपये जेब से भरना हो तो फिर क्या करना चाहिए? क्या सेविंग्स के पैसा का इस्तेमाल करना चाहिए, बैंक एफडी को तोड़ देना चाहिए या पीएफ से पैसे निकालने चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा।

बीमारी को ध्यान में रखकर लेने होंगे फैसले

आरोग्य फाइनेंस के को-फाउंडर और सीईओ जोस पीटर ने कहा कि इस सवाल का जवाब कई बातों पर निर्भर है। इसमें बीमारी कौन सी है, बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा और कितने पैसे खर्च होंगे शामिल हैं। कई बार बीमारी का इलाज एक सर्जरी से हो जाता है, जबकि कुछ बीमारी में बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।

हॉस्पिटल बिल और इंश्योरेंस सेटलमेंट स्टेंटमेंट को चेक करें

उन्होंने कहा कि अगर हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी देखना होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से चार्ज इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ है।

कई हॉस्पिटल इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करते हैं

सबसे पहले हॉस्पिटल से यह पूछा जा सकता है कि क्या वह इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करता है। इसमें इंटरेस्ट का बोझ हॉस्पिटल उठाता है। अगर हॉस्पिटल यह सुविधा ऑफर करता है तो परिवार के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा। परिवार मंथली किस्त चुकाने के लिए अपने गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर सकता है। अगर यह सुविधा हॉस्पिटल ऑफर नहीं करता है तो ही बैंक एफडी तोड़ने या दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।

बैंक एफडी तोड़ने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें 

अगर बैंक एफडी तोड़ना जरूरी हो तो पहले यह देखना होगा कि इंटरेस्ट के मामले में कितना लॉस होगा और तय समय से पहले एफडी तोड़ने पर कितनी पेनाल्टी चुकानी होगी। एफडी पर लोन लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर एफडी अगर लंबी अवधि का है तो उसे तोड़ना सस्ता पड़ेगा। परिवार दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद फैसला ले सकता है।

ईपीएफ में जमा पैसा निकालने का भी विकल्प

तीसरा विकल्प ईपीएफ से पैसे निकालना है। लेकिन, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ईपीएफ से पैसे निकालने का असर आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ता है। इस प्रोसेस में समय भी लगता है। यह विकल्प तब काम नहीं करेगा, जब पेशेंट हॉस्पिटल में है और उसे हॉस्पिटल से घर लाने से पहले बिल चुकाना जरूरी हो। ऐसी स्थिति में ईपीएफ से पैसे निकलने का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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जरूरत के हिसाब से कुछ विकल्पों का किया जा सकता है इस्तेमाल

उपर्युक्त विकल्पों पर विचार करने के बाद सबसे अच्छा यह होगा कि हॉस्पिटल का बिल चुकाने के लिए सेविंग्स के कुछ पैसे का इस्तेमाल किया जाए और बाकी पैसा का इंतजाम दूसरे स्रोतों से किया जाए। इससे अचानक हाथ खाली नहीं होगा और हॉस्पिटल से पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद भी उसकी देखभाल के लिए पैसे बचे रहेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SIP Calculator: 40 साल तक जीरो सेविंग के बाद भी 60 तक बना सकते हैं 3 करोड़ का रिटायरमेंट फंड, ये है मंथली एसआईपी कैलकुलेशन

SIP Calculator: कई लोगों को सेविंग्स और इनवेस्टमेंट का ख्याल देर से आता है। फिर उन्हें लगता है कि इसके लिए समय उनके हाथ से निकल गया है। लेकिन, यह पूरा सच नहीं है। जल्द सेविंग्स और निवेश शुरू करने के कई फायदे हैं। लेकिन, देर से निवेश शुरू करने पर भी रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड बन सकता है।

40 की उम्र में भी रिटायरमेंट के लिए शुरू कर सकते हैं निवेश

अगर आपकी उम्र 40 हो गई है तो भी आप रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। लेकिन, आपको हर महीने ज्यादा इनवेस्ट करना होगा। अगर कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू करता है तो उसके पास इसके लिए 20 साल बचते हैं। यह समय ज्यादा नहीं है तो बहुत कम भी नहीं है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन में इनफ्लेशन को ध्यान में रखना होगा

आम तौर पर यह माना जाता है कि आपका रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का 25 से 30 गुना होना चाहिए। मान लीजिए किसी व्यक्ति के परिवार का मंथली खर्च आज 30,000 रुपये है। अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी मान लिया जाए तो यह 20 साल बाद 96,000 रुपये हो जाएगा। इसका 25 गुना करीब 2.9 करोड़ रुपये होगा।

मंथली 15000 रुपये सिप निवेश से 1.5 करोड़ का फंड बन सकता है

अगर आप हर महीने सिप से 15,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं तो आप 20 साल में आप 36 लाख रुपये निवेश करेंगे। अगर आपके निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिलता है तो 20 साल बाद आपका पैसा बढ़कर 1.15 करोड़ हो जाएगा। अगर सालाना रिटर्न 12 फीसदी मान लिया जाए तो यह पैसा करीब 1.5 करोड़ रुपये होगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है। इक्विटी फंड में निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं होती है।

3 करोड़ रुपये के फंड के लिए बढ़ाना होगा मंथली सिप अमाउंट 

अगर आप 2.9 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड चाहते हैं तो आपको हर महीने करीब 29,000 रुपये इनवेस्ट करना होगा। इस कैलकुलेशन में सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना गया है। यह अमाउंट आपको ज्यादा लग सकता है। इसकी वजह यह है कि 40 साल के व्यक्ति पर परिवार सहित कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन, इसका एक दूसरा तरीका है।

हर साल सिप 10 फीसदी बढ़ाने से मिल सकती है काफी मदद  

अगर आप मंथली 15,000 रुपये के सिप को हर साल 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो निवेश पर 12 फीसदी रिटर्न से आपके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। आपको हर साल इनकम बढ़ने के साथ सिप का अमाउंट बढ़ाना होगा। आपको गैरजरूरी खर्चों में कटौती करनी होगी। जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट की उम्र 62 या 63 साल मान सकते हैं।

पीपीएफ में भी निवेश करने से रिटायरमें फंड बनाना होगा आसान

अगर आप नौकरी करते हैं तो ईपीएफ में रेगुलर कंट्रिब्यूशन से भी बड़ा फंड बनेगा। सबसे पहले आपको यह चेक कर लेना चाहिए कि इससे कितना बड़ा फंड बनेगा। दूसरा, आप पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश शुरू कर सकते हैं। पीपीएफ 15 साल में मैच्योर हो जाता है। दिसंबर तिमाही में पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी है। सरकार हर तिमाही पीपीएफ सहित स्मॉल सेविंग्स स्कीम के इंटरेस्ट रेट की समीक्षा करती है।

NPS भी हालिया बदलाव के बाद सब्सक्राइबर्स के लिए काफी अट्रैक्टिव

NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम भी अब काफी अट्रैक्टिव हो गया है। हाल में पीएफआरडीए ने इसमें कई बदलाव किए हैं। अगर आपके एनपीएस में 12 लाख या इससे ज्यादा हैं तो आप 60 साल की उम्र में एकमुश्त 80 फीसदी पैसे निकाल सकते हैं। सिर्फ 20 फीसदी पैसे का इस्तेमाल एन्युटी के लिए होगा। दूसरा, सब्सक्राइबर्स 85 साल की उम्र तक इनवेस्टमेंट बनाए रख सकते हैं।

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हर महीने निवेश करने में इन बातों का रखना होगा खास ख्याल 

40 की उम्र में निवेश शुरू करने पर आपको ज्यादातर पैसा इंडेक्स या फ्लेक्सीकैप फंड जैसे डायवर्सिफायड इक्विटी फंड में लगाना होगा। आपको निवेश सिप के जरिए करना होगा। रिटायरमेंट नजदीक आने पर कई एक्सपर्ट्स पैसा इक्विटी फंड से निकालकर धीरे-धीरे हाइब्रिड या डेट फंड्स में लगाने की सलाह देते हैं। इससे अचानक बाजार में गिरावट आने पर आपके रिटायरमेंट फंड पर खराब असर नहीं पड़ेगा।

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Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश से पहले ये 6 सबसे जरूरी बातें जान लीजिए

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ जल्द आ रहा है। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। यह रिलायंस समूह की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा है। जियो प्लेफॉर्म्स का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

आईपीओ में कंपनी 27 करोड़ तक नए शेयर इश्यू करेगी

जियो प्लेटफॉर्म्स के डीआरएचपी के मुताबिक, कंपनी आईपीओ में 27 करोड़ तक नए शेयर जारी रहेगी। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर इस आईपीओ में नहीं बेचेंगे। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट होंगे।

यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 30,200 करोड़ रुपये का हो सकता है। इस तरह यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने के रिकॉर्ड ऑटो कंपनी ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। इसने 2024 में 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। NSE ने पिछले महीने 22,562 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।

10 लाख करोड़ एम-कैप वाली क्लब में होगी शामिल

शेयरों की लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं। रिलांयस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 15,68,421 करोड़ रुपये है।

21 अक्तूबर को निवेश के लिए खुल सकता है आईपीओ

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के 21 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी कंपनी ने इस बारे में औपचारिक ऐलान नहीं किया है। यह इश्यू तीन दिन के लिए खुला रहेगा। इस महीने के आखिरी हफ्तों में शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब शेयर बाजारों पर बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए होगा

कंपनी आईपीओ से आए पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स पर FY26 में 70,781 करोड़ रुपये का कर्ज था। कर्ज का बोझ घटने से कंपनी की बैलेंशशीट मजबूत होगी। जियो प्लेटफॉर्म्स मोबाइल एंड फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, एंटरटेनमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, क्लाउड गेमिंग, स्टोरेज, स्मार्ट होम सॉल्यूशंस और आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रोडक्ट्स में मौजूद है।

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रिलायंस जियो के कस्टमर्स की संख्या 53 करोड़ के पार 

जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी जियो के इस साल जून के अंत में 53.33 करोड़ कस्टमर्स थे। इसमें 28.5 करोड़ 5जी यूजर्स शामिल हैं। कंपनी के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शंस की संख्या 2.86 करोड़ थी। कंपनी का औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) जून तिमाही में बढ़कर 215.6 रुपये पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 13 अक्टूबर को 0.67 फीसदी चढ़कर 1,166.70 रुपये पर बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Nifty 4-5 महीने में 26000-26500 पर होगा, एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा

आप क्या शेयरों से निवेश निकालने या सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं? यह गलती आपको जोरदार मुनाफा कमाने से रोक सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी के लिए 26,000-26,500 का टारगेट दिया है। उसका कहना है कि अगले 4-5 महीनों में निफ्टी नया ऑल-टाइम हाई बना सकता है। 13 अक्टूबर को निफ्टी 1.60 फीसदी चढ़कर 22,721 पर बंद हुआ।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलेगा

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के सीईओ गौरव भंडारी को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक स्थितियां जल्द बदलेंगी। इसके बाद बाजार में रिकवरी शुरू होगी। उन्होंने अमेरिका में बॉन्ड यील्ड घटने, डॉलर में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी की उम्मीद जताई। इससे भारतीय बाजार में तेजी आएगी। ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए जो टारगेट दिया है, उसका मतलब है कि सूचकांक करीब 17 फीसदी चढ़ सकता है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड जल्द घटने की उम्मीद 

भंडारी का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा लेवल पर लंबे समय तक नहीं रह सकती। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.35 फीसदी तक पहुंच गई है। इस साल यील्ड 110 बेसिस प्वाइंट्स उछली है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी यील्ड में गिरावट आने पर विदेशी निवेश भारतीय बाजार में आएगा। डॉलर के भी कमजोर होने की उम्मीद है। इन दोनों वजहों से विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव आएगा।

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजीशन

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स में काफी शॉर्ट पोजीशन बनाई है। वैश्विक स्थितियां बदलते ही उन्हें शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ सकती है। उन्होंने निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने की जगह अच्छी क्वालिटी के शेयरों में निवेश की सलाह दी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी खरीदारी से बाजार को काफी सहारा दिया है। अगर आगे भारतीय बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है तो बाजार में बड़ी तेजी दिख सकती है।

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बीते एक साल में निफ्टी करीब 10 फीसदी गिरा है

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इससे शेयरों में निवेश करने वाले लोग निराश हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में निवेश करने वाले लोग भी मायूस हैं, क्योंकि उनका पैसा इस दौरान बढ़ने की जगह घटा है। बाजार में रिकवरी आने पर उन निवेशकों को बड़ा फायदा होगा, जिन्होंने गिरावट के बीच भी सिप से अपना निवेश जारी रखा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Retirement Planning: ₹50000 मंथली सिप से बन जाएगा 8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड, जानिए कैसे

रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल चलते रहते हैं। इसमें से एक सवाल है कि 35 साल का एक व्यक्ति जिसकी मंथली सैलरी 2 लाख रुपये है क्या वह मंथली 50,000 रुपये के निवेश से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकता है?

रिटायरमेंट फंड का टारगेट और मंथली इनवेस्टमेंट की जानकारी अहम

मनीकंट्रोल ने बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन एवं एमडी संजीव बजाज से इस सवाल का जवाब पूछा। उन्होंने कहा कि इस मामले में दो चीजें बिल्कुल साफ हैं। पहला, व्यक्ति कितना बड़ा रिटायरमेंट फंड जुटाना चाहता है। दूसरा, वह मंथली कितना इनवेस्ट कर सकता है। अब यह देखना है कि क्या इन दोनों इनपुट्स से टारगेट हासिल किया जा सकता है।

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर मिलेगा 25 साल का वक्त

मान लीजिए आप हर महीने 50,000 रुपये का निवेश तब तक करते हैं, जब तक आपकी उम्र 60 साल की नहीं हो जाती। इसका मतलब है कि अगर 35 साल की उम्र में आप निवेश शुरू करते हैं तो आपके पास निवेश के लिए करीब 25 साल का समय होगा। रिटायरमेंट फंड मार्केट के रिटर्न पर निर्भर करेगा।

सालाना रिटर्न के हिसाब से रिटायरमेंट फंड का आकार बदल जाएगा

अब हम तीन तरह की स्थितियों को लेकर चलते हैं। पहले में हम सालाना रिटर्न अगर 8 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड करीब 4.6 करोड़ रुपये का होगा। अगर हम सालाना रिटर्न 10 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड 6.2 करोड़ रुपये का होगा। 12 फीसदी रिटर्न पर यह करीब 8.5 करोड़ रुपये होगा।

रिटायरमेंट फंड पर इनफ्लेशन के पड़ने वाले असर का ध्यान रखना होगा

इसका मतलब है कि कैलकुलेशन के आधार पर अलग-अलग रिटर्न के हिसाब से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है। लेकिन, अब एक बड़ा सवाल है कि आज से 25 साल बाद 5-8 करोड़ रुपये की असल वैल्यू कितनी रह जाएगी? अगर हम 6 फीसदी इनफ्लेशन मान लें तो 25 साल बाद 5 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर करीब 1.2 करोड़ रुपये रह जाएगी।

इनफ्लेशन की वजह से लंबी अवधि में धीरे-धीरे घटती जाती है पैसे की वैल्यू

8 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर 1.9 करोड़ रुपये रह जाएगी। इसका मतलब है कि 25 साल बाद हम 8 करोड़ रुपये से उतनी चीजें खरीद पाएंगे जितनी आज हम 1.9 करोड़ रुपये से खरीद सकते हैं। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग करने में अपने लाइफ स्टाइल को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने पर लंबी अवधि में बड़ा फर्क पड़ता है

रिटायरमेंट प्लानिंग में धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने से बड़ा फर्क पड़ता है। अगर आप आज 35 साल की उम्र में हर महीने 50,000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं तो पूरे करियर के दौरान आपका मंथली निवेश सिर्फ 50,000 नहीं रहेगा। इनकम बढ़ने के साथ आप अपना मंथली इनवेस्टमेंट बढा सकते हैं। अगर हर साल आप इसे 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो काफी ज्यादा फर्क देखने को मिलेगा।

इनवेस्टमेंट में डायवर्सिफिकेशन का भी ध्यान रखना सबसे जरूरी

जब आप लंबी अवधि का निवेश करते हैं तो आप शेयरों से जुड़े इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में निवेश के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन, इसमें डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखना जरूरी है। आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ या एनपीएस का कंट्रिब्यूशन शामिल हो सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट की तरफ बढ़ते हैं आपका फोकस वेल्थ क्रिएशन की जगह वेल्थ प्रोटेक्शन पर होना चाहिए।

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निवेश के दौरान इन तीन चीजों का भी जरूर रखें ध्यान 

इस दौरान आपको हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस और इमर्जेंसी फंड को भी बनाए रखना होगा। इसका फायदा यह है कि किसी अनहोनी की स्थिति में आपके इनवेस्टमेंट पर खराब असर नहीं पड़ेगा। साथ ही आपको अपने इनवेस्टमेंट प्लान को साल में एक बार रिव्यू करना होगा। जरूरत पड़ने पर आप इस प्लान में बदलाव कर सकते है। इस तरह से आप अपने लिए एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Crude Oil: महंगे क्रूड के लिए रहें तैयार, कीमतें जल्द नीचे आने की उम्मीद नहीं

Crude Oil: क्रूड ऑयल की कीमतों में 9 अक्टूबर को नरमी दिखी। ब्रेंट क्रूड गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एक दिन पहले यह 105 डॉलर के पार चला गया था। पिछले कई हफ्तों से ब्रेंट क्रूड का प्राइस ज्यादातर 100 डॉलर के ऊपर बना रहा है। इसके हाई लेवल पर बने रहने का अनुमान है।

दिसंबर तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती हैं

कई ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतें दिसंबर तक हाई लेवल पर बनी रह सकती हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को हमले का डर सता रहा है। मैक्सिको की खाड़ी में उत्पादन में बाधा आ रही है। इसका असर सप्लाई पर पड़ रहा है।

ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद थोड़ा नरम

8 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड में 5.5 डॉलर का उछाल आया था। इससे प्राइस कुछ समय के लिए 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चल गया था। हालांकि, कुछ समय बाद यह 103-104 डॉलर तक आ गया। क्रूड में नरमी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान है कि अमेरिका ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस से पहले अमेरिका ईरान पर हमले नहीं करेगा।

नए प्रतिबंधों से ईरान की ऑयल एक्सपोर्ट क्षमता पर असर 

इस बीच, अमेरिका ने कुछ ईरानी नागरिकों, कंपनियों, पेट्रोकेमिकल्स और दूसरे प्रोडक्ट्स पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसका असर क्रूड एक्सपोर्ट करने की ईरान की क्षमता पर पड़ा है। कुछ बैंकों और ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि दिसंबर तिमाही में ब्रेंट क्रूड का प्राइस 89 से 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। हालांकि, अगले साल यह 80-90 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।

मैक्सिको की खाड़ी में क्रूड और गैस का उत्पादन प्रभावित

मैक्सिको की खाड़ी में फिलहाल 25 फीसदी क्रूड ऑयल और 16 फीसदी नेचुरल गैस का प्रोडक्शन ठप पड़ा हुआ है। प्रोडक्शन में रुकावट के बीच कमोडिटी ट्रेडर वितोल (Vitol) ने कहा है कि अगर सऊदी अरब या ईरान शिप-टू-शिप ट्रांसफर में बाधा आती है तो क्रूड ऑयल का भाव दोगुना यानी 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि फ्रेट कॉस्ट पहले ही 2 डॉलर से बढ़कर 35 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है।

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क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से बढ़ेगी भारत की मुश्किल

क्रूड प्राइस का हाई लेवल पर बने रहना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतें बढ़ने पर भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। पहले से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कॉस्ट से कम प्राइस पर पेट्रोल और डीजल बेचने से रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पहले ही चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Nifty फिर से 22500 लेवल के पार, एनालिस्ट्स से जानिए बाजार में इस तेजी के जारी रहने की कितनी संभावना है

शेयर बाजारों में 9 अक्टूबर को जोरदार रिकवरी आई। इससे निफ्टी ने फिर से 22,500 का हासिल कर लिया। इस रिकवरी में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी, आईटी शेयरों में तेजी और सस्ते भाव पर शेयरों की खरीदारी का हाथ है। 1 बजे निफ्टी 1.23 फीसदी यानी 272 अंक चढ़कर 22,504 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 836 अंक के उछाल के साथ 72,437 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 1.22 फीसदी की तेजी दिखी। सवाल है कि क्या तेजी टिकाऊ हैं?

निफ्टी के लिए 22,600 के लेवल पर रेसिस्टेंस

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “निफ्टी अगर 8 अक्टूबर के 22,180 के ऊपर बना रहता है तो इसकी रेंज 22,180-22,600 होगी। 22,600 पर इसे रेसिस्टेंस का सामना करना होगा। गिरावट की स्थिति में यह 22,000 की तरफ बढ़ेगा और 2025 के 21,750 के निचले स्तर तक जा सकता है।”

रेसिस्टेंस लेवल के ऊपर टिके रहने पर आएगी तेजी

उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर को मजबूत शुरुआत के बावजूद मार्केट का स्ट्रक्चर सावधानी वाला है। रिकवरी के लिए निफ्टी का रेसिस्टेंस लेवल से ऊपर टिके रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तब तक तेजी पर बिकवाली का एप्रोच सही रहेगा। रेसिस्टेंस लेवल के करीब बाजार पर सेलिंग प्रेशर दिख सकता है।

22,500 के बाद सेंटीमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के गौरव उदानी ने कहा कि अगर तेजी में निफ्टी 22,500 को पार कर जाता है तो बाजार के सेंटिमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है, जिससे शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिल सकती है। लेकिन, गिरावट की स्थिति में निफ्टी के 22,100 के नीचे जाने पर फिर से कमजोरी दिख सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स को सावधान रहने की जरूरत है। ओपनिंग गैप के पीछे भागने से बचना ठीक रहेगा। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

डे ट्रेडर्स को इस सपोर्ट जोन का ध्यान रखने की सलाह

कोटक नियो के हेड (इक्विटी रिसर्च) श्रीकांत चौहान ने कहा, “डे ट्रेडर्स के लिए 22,200/71,500 और 22,150/71,300 अगले सपोर्ट जोन होंगे। इन लेवल से नीचे जाने पर सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में निफ्टी गिरकर 22,000-21,750 तक आ सकता है। सेंसेक्स 70,800-70,000 तक गिर सकता है।”

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सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है

उन्होंने कहा कि तेजी की स्थिति में 22,300-22,400/71,800-72,100 अगले रेसिस्टेंस जोन होंगे। इस रेंज के ऊपर तेजी जारी रहने पर 22,500/72,500 की तरफ इंट्राडे पुलबैक दिख सकता है। सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली के लिए रास्ता खुल सकता है।

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शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

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रॉकेट बन सकता है इस आईटी बीपीओ हेल्थकेयर कंपनी का शेयर, नुवामा ने दी खरीदने की सलाह

सैजिलिटी का शेयर रॉकेट बन सकता है। यह कंपनी आईटी बीपीओ हेल्थकेयर सर्विस ऑफर करती है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग यानी खरीदने की सलाह के साथ इस शेयर को कवर करना शुरू किया है। 8 अक्टूबर को यह शेयर 1.86 फीसदी चढ़कर 43.90 रुपये चल रहा था।

करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है शेयर 

Nuvama ने Sagility के शेयर के लिए 60 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने 8 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में कंपनी के बारे में कई बातें बताई हैं। उसने कहा है कि हेल्थकेयर बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) एआई आधारित बदलाव के युग में प्रवेश कर रहा है। अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में इस बिजनेस के लिए बड़े मौके हैं।

अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनी के लिए बड़े मौके

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि अमेरिका में हेल्थकेयर ऑपरेशंस पर खर्च बढ़कर 2028 के अंत तक 259 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है। 2023 में यह 201 अरब डॉलर था। नुवामा का मानना है कि आउटसोर्स्ड स्पेंड के इन-हाउस ऑपरेशंस से आगे निकल जाने का अनुमान है। नुवामा ने सैजिलिटी की वैल्यूएशंस FY28-29 के अनुमानित ईपीएस का 18 गुना बताया है। कंपनी के पास क्रॉस-सेल के बड़े मौके हैं।

कर्ज के रीपमेंट से बैलेंसशीट को मिलेगी मजबूती

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्री कैश फ्लो जेनरेशन और डेट रीपेमेंट से सैजिलिटी की बैलेंशशीट को मजबूती मिलेगी। उसका मानना है कि इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक सैजिलिटी नेट कैश कंपनी बन जाएगी। FY26-29 के बीच डॉलर में सैजिलिटी के रेवेन्यू का CAGR 13 फीसदी से ज्यादा रह सकता है। इस दौरान एडजस्टेड EPS का सीएजीआर 19 फीसदी रह सकता है। EBITDA मार्जिन 24-25 फीसदी रह सकता है।

ग्रोथ का गाइडेंस डबल डिजिट में बना रहेगा

सैजिलिटी ग्रुप के सीईओ एवं एमडी रमेश गोपालन ने पिछले महीने बताया था कि अमेरिका में हेल्थकेयर सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों पर ज्यादा दबाव है। इससे आउटसोर्सिंग की मांग बढ़ रकही है। उन्होंने यह भी कहा था कि FY27 के लिए ग्रोथ का कंपनी का गाइडेंस लो डबल-डिजिट में होगा।

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कमजोर बाजार में भी शेयरो में तेजी 

सैजिलिटी के शेयरों में 8 अक्टूबर को तब तेजी देखने को मिली, जब शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक दबाव में थे। निफ्टी 1.60 फीसदी यानी 361 अंक गिरकर 22,242 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.45 फीसदी यानी 1,058 अंक गिरकर 71,588 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.90 फीसदी की गिरावट दिखी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।