शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन, एक्सपर्ट ने बताई इसकी तीन बड़ी वजहें

शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी

कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।

बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल 

सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।

क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट 

उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।

कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था

कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।

कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव 

बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Gold ने बीते एक साल में 35% रिटर्न दिया, अभी गोल्ड और शेयर में से किसमें निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा?

सोना ने बीते एक साल में 35.3 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स (टीआरआई) ने 5.4 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। इस लिहाज से बीते एक साल में गोल्ड के निवेशकों को अच्छा मुनाफा हुआ है, जबकि शेयरों के निवेशकों को लॉस उठाना पड़ा है। सवाल है कि क्या शेयरों की जगह गोल्ड में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद है?

छोटे टाइम फ्रेम में कई बार सोने ने दिया ज्यादा रिटर्न

इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। फंड्सइंडिया के वेल्थ कनवर्सेशंस अगस्त 2026 की रिपोर्ट बताती है कि छोटे-छोटे टाइम फ्रेम में गोल्ड ने शेयरों से ज्यादा रिटर्न दिया है। लेकिन, जब हम लंबे टाइम फ्रेम में देखते हैं तो शेयरों ने सोने के मुकाबले निवेशकों को ज्यादा रिटर्न दिए हैं।

सालाना आधार पर गोल्ड कभी आगे तो कभी पीछे रहा है

फंडसइंडिया ने साल 2000 से लेकर अब तक गोल्ड और Nifty 50 TRI के रिटर्न की तुलना की है। डेटा बताते हैं कि सालान आधार पर रिटर्न की तुलना करने पर गोल्ड कई बार रिटर्न के मामले में शेयरों से आगे रहा है तो कई बार पीछे रहा है। कई बार किसी साल इसने शेयरों के मुकाबले 79 फीसदी रिटर्न दिया है तो कभी इसका रिटर्न शेयरों के मुकाबले 65 फीसदी तक कम रहा है।

लंबी अवधि में शेयरों का रिटर्न गोल्ड से ज्यादा 

निवेश की अवधि बढ़ाने पर हमें दूसरे तरह के नतीजे मिलते हैं। 10 साल की अवधि में गोल्ड का सालाना रिटर्न Nifty 50 TRI के मुकाबले करीब 2 पर्सेंटेज प्वाइंट कम रहा है। 15 साल की अवधि में भी औसत रिटर्न सालाना आधार पर शेयरों के मुकाबले 2 पर्सेंटेज प्वाइंट कम रहा है। 20 साल की अवधि में भी देखने पर सालाना आधार पर गोल्ड का औसत रिटर्न शेयरों के मुकाबले करीब 2 पर्सेंटेज प्वाइंट कम रहा है।

रिटर्न में थोड़ा अंतर भी लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा करता है

रिटर्न में 2 पर्सेंटेज प्वाइंट का फर्क पहली नजर में ज्यादा नहीं लगता है। लेकिन, जब हम 10, 15 और 20 साल की अवधि में रिटर्न की बात करते हैं तो यह छोटा फर्क काफी बड़ा बन जाता है। सवाल है कि क्या इसका मतलब है कि गोल्ड की जगह शेयरों में निवेश करने पर ज्यादा पैसा बनेगा? इस सवाल का जवाब बहुत आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि आपके निवेश (पोर्टफोलियो) में सोने और शेयरों की भूमिका अलग-अलग होती है।

लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए शेयरों में निवेश समझदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन यानी पैसा बनाने के लिए शेयर सही हैं। गोल्ड का काम पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना है। इसका फायदा यह है कि कई बार जब शेयर बाजार में दबाव दिखता है तो गोल्ड पोर्टफोलियो को नुकसान से बचाता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है बीता एक साल है। बीते एक साल में जब शेयरों ने निगेटिव रिटर्न दिया है तो गोल्ड ने बंपर 35 फीसदी का रिटर्न दिया है।

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इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में गोल्ड और शेयर की भूमिका अलग-अलग है

जब आप निवेश का प्लान बनाते हैं तो आपके दिमाग में गोल्ड और शेयर की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। ज्यादातर इनवेस्टर्स दूसरी तरह से सोचते हैं। वे सिर्फ यह देखते हैं कि किसी एसेट में निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा। ऐसा सोचना गलत है। 10, 15, 20, 30 साल के पीरियड में रिटर्न की तुलना से यह स्पष्ट हो चुका है कि शेयरों में निवेश करने पर ज्यादा वेल्थ क्रिएशन होता है। इसका मतलब है कि आपका ज्यादा निवेश शेयरों में होना चाहिए और कुछ निवेश गोल्ड में होना चाहिए। इससे लंबी अवधि में आपके पोर्टफोलियो का रिटर्न बेहतर रहेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Gold Loan कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी, आपको आगे भी मालामाल कर सकते हैं ये शेयर

गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों में 21 अगस्त को तूफानी तेजी दिखी। इसकी वजह यह है कि विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस और मण्णपुरम फाइनेंस के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने इन शेयरों को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है।

IIFL Finance के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस

IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance के शेयरों में 2 से 8 फीसदी की तेजी दिखी। सबसे ज्यादा 7.26 फीसदी की तेजी IIFL Finance के शेयर में दिखी। इससे शेयर का भाव 682.90 रुपये पर पहुंच गया। जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ सकता है।

IIFL Finance का शेयर बीते एक साल में 48 फीसदी चढ़ा है

सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, जेपी मॉर्गन का मानना है कि आईआईएफएल फाइनेंस टर्नअराउंड की शुरुआती अवस्था में है। प्रॉफिट बनाने की बढ़ती क्षमता को देखते हुए इसके शेयरों की रिरेटिंग हो सकती है। बीते एक साल में आईआईएफएल फाइनेंस का शेयर 48 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

मुथूट फाइनेंस के शेयरों में भा सकती है तेजी

मुथूट फाइनेंस के शेयरों के बारे में भी जेपी मॉर्गन की राय पॉजिटिव है। उसने इस शेयर के लिए 3,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 14 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इस शेयर का प्रदर्शन इस साल दूसरी गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों से कमजोर रहा है। ऐसे में अभी निवेश करने से आगे अच्छी कमाई हो सकती है। Muthoot Finance का शेयर 21 अगस्त को 2.29 फीसदी चढ़कर 3,038 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह 13.54 फीसदी चढ़ा है।

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश से भी होगी कमाई

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश करने पर अच्छी कमाई हो सकती है। जेपी मॉर्गन ने इस शेयर के लिए 395 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 13 फीसदी तेजी आ सकती है। उसने कहा है कि कंपनी के जून तिमाही के नतीजों से इसके टर्नअराउंड के संकेत मिले हैं। मण्णपुरम फाइनेंस का शेयर 21 अगस्त को 2.35 फीसदी चढ़कर 357.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 35 फीसदी उछला है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में नाममात्र की तेजी 

गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में बने रहे। 21 अगस्त को निफ्टी 0.08 फीसदी यानी 20 अंक चढ़कर 24,252 पर बंद हुआ। सेंसेक्स सिर्फ 3 अंक चढ़कर 77,540 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.46 फीसदी की मजबूती दिखी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Shiprocket Share Price: लगातार दूसरे दिन रॉकेट बने शेयर, IPO में निवेश का मौका चूक गए तो अब क्या करें?

Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयर 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन रॉकेट बन गए। कंपनी के शेयर 19 अगस्त को 35 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे। उसके बाद शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी थी। कारोबार खत्म होने पर शेयर करीब 48 फीसदी तेजी के साथ बंद हुए। आज यानी 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। खुलते ही शेयर करीब 8 फीसदी तक उछल गए। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:00 बजे शेयर 5.26 फीसदी चढ़कर 150.78 रुपये पर चल रहा था।

गोल्डमैन सैक्स की कंपनी ने किया बड़ा निवेश

Shiprocket के शेयरों में आज (20 अगस्त) को आई तेजी की वजह एक खबर है। खबर है कि गोल्डमैन सैक्स की कंपनी गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने शिपरॉकेट के 40,24,040 शेयर खरीदे हैं। यह ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 131 रुपये के प्राइस पर हुआ है। इससे लगातार दूसरे दिन शेयरों को पंख लग गए। जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे शेयरों में जबर्दस्त तेजी का जश्न मना रहे है।

आईपीओ को जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था

Shiprocket के आईपीओ को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट के संकेत के मुताबिक रही। कंपनी के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 36-37 फीसदी चल रहा था।

निवेशक शेयरों में कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं

आनंदराठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि शिपरॉकेट को इंडिया में ई-कॉमर्स ईकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस मार्केट में काफी प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ लिस्टिंग गेंस बुक कर सकते हैं। बाकी शेयर वे अपने पास रख सकते हैं। लंबी अवधि में शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है।

नए इनवेस्टर्स ‘वेट एंड वॉच’ की पॉलिसी अपना सकते हैं

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट महेश एम ओझा ने कहा कि जिन निवेशकों ने आईपीओ में अप्लाई नहीं किया था या जिन्हें अप्लाई करने के बाद भी शेयर एलॉट नहीं हुए, वे ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करो और देखो की पॉलिसी अपना सकते हैं। उन्हें अगली 1-2 तिमाही तक कंपनी के रिजल्ट्स को देखना चाहिए। रेवेन्यू ग्रोथ, ऑपेरेटिंग प्रॉफिट देखने के बाद ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो का इनवेस्टमेंट

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो के पैसे लगे हैं। शुरुआत में यह कंपनी शिपिंग सर्विस देती थी। अब इसका फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिससे जरिए यह डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स से लेकर MSME का शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है। इसके बिजनेस के दो सेगमेंट-कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस हैं।

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कंपनी कई तरह की शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है

कंपनी के कोर बिजनेस में डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग अप्लिकेशंस आते हैं। इमर्जिंग बिजनेसेज में कार्गो एंड फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग सॉल्यूशंस, कैपिटल सॉल्यूशंस और हायपर लोकल डिलीवरीज आती हैं। इकोनॉमिक एक्टिविटीज बढ़ने का फायदा कंपनी को मिलेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

 

ट्रम्प ने ड्रोन इंपोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाया:राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया, चीनी कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान

अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनमैन्ड ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स के आयात यानी इंपोर्ट पर 100% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों और चीनी कंपनियों के वर्चस्व वाले इस सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से अमरीका में ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम होगी। पिछले साल तक अमेरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में चीनी कंपनी की लगभग 70% हिस्सेदारी थी। ड्रोन के वजन और क्षमता के हिसाब से टैरिफ तय हुआ व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। लागू होने की समय-सीमा और छूट के नियम नया टैरिफ स्ट्रक्चर अलग-अलग समय-सीमा में लागू किया जाएगा… विशेष छूट: हस्ताक्षर के 20 दिनों के भीतर अमरीकी युद्ध विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर द्वारा FCC की कवर्ड लिस्ट से छूट प्राप्त प्रोडक्ट्स और कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ 180 दिनों बाद प्रभावी होगा। ब्रिटेन और यूरोप समेत 7 सहयोगी देशों पर भी टैरिफ अमेरिका ने केवल विरोधी देशों पर ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन पर भी टैरिफ लागू किया है… चीन की ड्रोन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रम्प प्रशासन चीनी ड्रोन तकनीक पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है। पिछले साल दिसंबर में फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीनी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की थी और विरोधी देशों के ड्रोन को वायरलेस कम्युनिकेशंस की मंजूरी देने पर रोक लगा दी थी। वैश्विक बाजार में शेनझेन स्थित कंपनी DJI टेक्नोलॉजीज का दबदबा है, जिसकी पिछले साल तक अमेरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में लगभग 70% हिस्सेदारी थी। इसके अलावा, हाल ही में चीन ने भी अमरीकी व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरीका को ड्रोन एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध और हाइब्रिड वॉर से बढ़ी चिंता ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। दोनों देशों द्वारा इलाके की रक्षा और उस पर कब्जा करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल ने एक नए हाइब्रिड वॉर को जन्म दिया है। ट्रम्प ने अपने आधिकारिक पत्र में अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम को अमरीका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी करार दिया है। एक्सपर्ट्स की राय: कॉमर्शियल मार्केट का ढांचा पूरी तरह बदलेगा अमरीका-चीन टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा के विशेषज्ञ क्रेग सिंगलेटन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह फैसला कॉमर्शियल मार्केट को पूरी तरह से नया आकार देगा। क्रेग सिंगलेटन ने कहा कि अमरीकी कॉमर्शियल और सरकारी खरीदारों को तुरंत एक बड़े पूंजीगत बदलाव की जरूरत होगी। उन्हें अब अमरीका या सहयोगी देशों के सप्लायर्स की तरफ रुख करना होगा, भले ही उनके प्रोडक्ट्स की कीमत ज्यादा क्यों न हो। यह फैसला चीन के ड्रोन बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और ट्रम्प तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले तनाव बढ़ा सकता है। क्या है अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS)? अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) को सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है। ये ऐसे विमान होते हैं जिन्हें बिना किसी इंसानी पायलट के रिमोट कंट्रोल या ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए उड़ाया जाता है। इनका इस्तेमाल फोटोग्राफी, सामान की डिलीवरी से लेकर मिलिट्री सर्विलांस और सटीक हमलों तक में किया जाता है। ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाओ: ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

Godrej Consumer Share Price: गोदरेज कज्यूमर का शेयर क्रैश, क्या यह निवेशकों के लिए खरीदारी का बड़ा मौका है?

Godrej Consumer Share Price: गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर 12 अगस्त को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। इसकी वजह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ सुधीर सीतापति का अचानक इस्तीफा है। एक समय शेयर 10 फीसदी गिरकर 922.5 रुपये पर आ गया था। लेकिन, बाद में थोड़ा संभला। 10:45 बजे यह 9.52 फीसदी गिरकर 928.10 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर अब तक 25 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी 50 में 6.4 फीसदी गिरावट आई है।

जेफरीज और सिटी की शेयरों में निवेश की सलाह

सीतापति का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। आसिफ मलबरी को उनकी जगह नियुक्त कर दिया गया है। अचानक कंपनी की लीडरशिप में आए इस बदलाव पर ब्रोकरेज फर्मों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है। जेफरीज और सिटी ने शेयर को खरीदने (buy) की अपनी सलाह बनाए रखी है। एचएसबीसी ने शेयर पर अपनी रेटिंग घटाकर ‘होल्ड’ कर दी है। सीएलएसए ने शेयर पर ‘अंडरपर्फॉर्म’ की रेटिंग दी है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि नई लीडरशिप की वजह से कंपनी की स्ट्रेटेजी में बदलाव नहीं होगा।

जेफरीज ने दिया 1400 रुपये का टारगेट प्राइस

जेफरीज ने गोदरेज कंज्यूमर के शेयर के लिए 1,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि 11 अगस्त के क्लोजिंग प्राइस से यह शेयर करीब 36 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि नए सीईओ को एग्जिक्यूशन को मजबूत बनाने के साथ ही फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करना होगा। नए बिजनेस पर फोकस करने के साथ ही कंपनी को अपने पुराने इनसेक्टिसाइड्स और सोप बिजनेस पर ध्यान देना होगा।

सिटी ने भी दी शेयर में निवेश की सलाह

Citi ने भी शेयर को खरीदने की सलाह दी है। उसने शेयर के लिए 1,350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, उसने कहा है कि लीडरशिप में बदलाव का असर स्टॉक पर शॉर्ट टर्म में पड़ सकता है। हालांकि, मलबरी की नियुक्ति से कंपनी की स्ट्रेटेजी की दिशा अपरिवर्तित रहेगी। कंपनी के FY27 के गाइडेंस और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन अपरिवर्तित रहेंगे।

एचएसबीसी ने रेटिंग घटाकर होल्ड किया

HSBC ने शेयर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसने शेयर पर रेटिंग घटाकर होल्ड कर दी है। शेयर के लिए 1,120 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि अचानक सीतापति के इस्तीफे से एग्जिक्यूशन को लेकर अनिश्चितता बनी है। ब्रोकरेज फर्म ने स्टॉक का वैल्यूएशन मल्टीपल भी घटाया है। टारगेट प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल को 45 गुना से घटाकर 40 गुना कर दिया है।

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सीएलएसए के मुताबिक शेयर 25% गिर सकता है

CLSA का रुख इस शेयर को लेकर और सावधानी भरा है। उसने शेयर पर ‘अंडरपरफॉर्म’ की रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 772 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 11 अगस्त के क्लोजिंग प्राइस से करीब 25 फीसदी गिर सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पर्सनल वॉश और होम इनसेक्टिसाइड्स में कंपनी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक 40% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने दांव लगाने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई दिग्गज ब्रोकरेज हाउस चुनिंदा शेयरों को लेकर बुलिश हैं। Morgan Stanley, HSBC, Motilal Oswal, Nuvama और JM Financial ने पांच कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनके मुताबिक, अगले 12 महीनों में ये शेयर करीब 24% से 40% तक का रिटर्न दे सकते हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों पर एक्सपर्ट्स सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance पर Morgan Stanley ने ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,420 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,143 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 24.2% की रिटर्न संभावित तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मजबूत रिटेल लोन डिस्बर्समेंट और बेहतर लोन ग्रोथ कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

Britannia

FMCG कंपनी Britannia पर Nuvama ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 7,240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 5,508 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 31.4% उछाल की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव प्रमुख जोखिम हैं।

Hindalco Industries

मेटल कंपनी Hindalco Industries पर HSBC ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ 1,430 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,053.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 35.7% की तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि एल्यूमिनियम की मजबूत वैश्विक मांग और चीन की उत्पादन सीमा कंपनी के लिए सकारात्मक रहेगी।

Time Technoplast

प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी Time Technoplast पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 280 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 205.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 36.3% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि पैकेजिंग और कम्पोजिट सिलेंडर बिजनेस में विस्तार के दम पर लगातार मजबूत रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ दर्ज कर सकती है।

Ventive Hospitality

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Ventive Hospitality पर JM Financial ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 840 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 603.20 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 40% की संभावित तेजी बनती है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया लागत का दबाव अस्थायी है और लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

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