Silver Rate Today 2 September: चांदी के दाम में फिर गिरावट, दिल्ली से चेन्नई तक जानें आज की कीमत

Silver Rate Today 2 September: चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से मिला-जुला संकेत सामने आया है। पिछले कुछ समय से कीमती धातु की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और इसका असर आज के रेट पर भी दिखाई दिया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी की कीमत ₹2,40,500 प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले ₹5,000 कम है। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी कमजोर नजर आई। MCX पर सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 0.24 फीसदी गिरकर ₹2,28,993 प्रति किलो पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी हलचल का असर भी कीमती धातु पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने, गहने बनवाने या निवेश के लिए भाव पर नजर रख रहे हैं, तो आज के रेट आपके लिए जानना जरूरी है। आगे जानिए देश के प्रमुख शहरों में चांदी कितने रुपये किलो बिक रही है।

MCX पर भी चांदी हुई कमजोर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली। आज सुबह तक चांदी का भाव 0.24 फीसदी यानी ₹556 की गिरावट के साथ ₹2,28,993 प्रति किलो रह गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में MCX पर चांदी ₹2,29,549 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

दिल्ली समेत शहरों में चांदी कितने की मिल रही है?

अगर आप अपने शहर में चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो नीचे प्रमुख शहरों के ताजा भाव देख सकते हैं। ज्यादातर शहरों में चांदी की कीमत ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास है।

शहर 1 किलो चांदी का भाव

दिल्ली ₹2,55,000

मुंबई  ₹2,55,000

कोलकाता     ₹2,55,000

चेन्नई ₹2,60,000

पटना  ₹2,55,000

लखनऊ      ₹2,55,000

मेरठ  ₹2,55,000

अयोध्या      ₹2,55,000

कानपुर ₹2,55,000

गाजियाबाद   ₹2,55,000

नोएडा ₹2,55,000

गुरुग्राम      ₹2,55,000

चंडीगढ़ ₹2,55,000

जयपुर ₹2,55,000

अहमदाबाद   ₹2,55,000

पुणे   ₹2,55,000

लुधियाना     ₹2,55,000

गुवाहाटी      ₹2,55,000

इंदौर  ₹2,55,000

सूरत  ₹2,55,000

नागपुर ₹2,55,000

नासिक ₹2,55,000

बैंगलोर ₹2,55,000

वडोदरा ₹2,55,000

भुवनेश्वर     ₹2,60,000

रायपुर ₹2,55,000

हैदराबाद      ₹2,60,000

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत कमजोर हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चांदी करीब $64.74 प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

एक दिन पहले कितनी थी चांदी?

पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी ₹2,45,500 प्रति किलो पर स्थिर थी। इसके बाद इसमें ₹5,000 की गिरावट आई और कीमत घटकर ₹2,40,500 प्रति किलो रह गई। विदेशी बाजारों में भी चांदी पर दबाव रहा। हाजिर चांदी की कीमत करीब 3 फीसदी गिरकर $64.68 प्रति औंस रह गई थी।

मंगलवार को वायदा बाजार में क्या हुआ था?

इससे ठीक एक दिन पहले घरेलू वायदा बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग थी। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की ताजा खरीदारी के चलते चांदी वायदा 0.19 फीसदी बढ़कर ₹2,40,577 प्रति किलो पहुंच गया था। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट में ₹27 की तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में चांदी 0.17 फीसदी गिरकर $66.46 प्रति औंस पर आ गई थी।

खरीदारी करने वालों के लिए क्या समझना जरूरी है?

चांदी के भाव में इस समय तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। घरेलू बाजार, MCX और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अलग-अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर आप चांदी के गहने, सिक्के या निवेश के लिए सिल्वर खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर जांच लें। साथ ही, चांदी की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

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PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: दिल्ली के 2.30 लाख परिवारों को तोहफा! घर की छत पर मुफ्त लगेगा 3 KW का सोलर पैनल, सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: देश की राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 2.30 लाख घरों की छतों पर तीन किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि पात्र परिवारों को इसके लिए अपनी जेब से शुरुआती रकम खर्च नहीं करनी होगी। योजना के तहत केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर सिस्टम लगाने का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा।

‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का है। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

400 यूनिट तक बिजली खपत वाले घरों को मिलेगा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है। तीन किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम घरेलू जरूरतों के एक बड़े हिस्से की बिजली पैदा करने में मदद करेगा। इससे ऐसे परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की संभावना है। सरकार का मकसद केवल बिजली का बिल कम करना नहीं है। बल्कि दिल्ली के घरों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना भी है। यानी जिस घर की छत पर सोलर पैनल लगेगा, वह खुद बिजली पैदा कर सकेगा। इससे अपनी जरूरत के मुताबिक उसका इस्तेमाल कर सकेगा।

78 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार भी 78 हजार रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी देने की व्यवस्था करेगी। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बड़ी रकम का बोझ उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘पीएम सूर्य घर’ योजना के मुताबिक, इंस्टॉलेशन का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है। इसके तहत मार्च 2027 तक सभी पात्र 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभ लेने के लिए पहले पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं

इस योजना की एक अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए कोई एडवांस राशि नहीं देनी होगी। सरकार की ओर से प्रक्रिया पूरी कराकर पात्र घरों पर सिस्टम लगाया जाएगा। हालांकि, यदि सोलर सिस्टम की कुल लागत और उपलब्ध सब्सिडी के बीच अंतर रहता है, तो राज्य सरकार द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इससे आम परिवारों के लिए योजना का लाभ लेना आसान होगा।

घरों को बिजली उत्पादक बनाना लक्ष्य

दिल्ली सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल बिजली के बिल में कमी लाना नहीं है। इसके जरिए घरों को क्लीन एनर्जी का उत्पादक बनाना भी लक्ष्य है। रूफटॉप सोलर से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे लंबे समय में बिजली की मांग और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही दिल्ली में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्च 2027 तक पूरा करने की तैयारी

सरकार ने PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को तेजी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2027 तक 2.30 लाख पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे दिल्ली के बड़ी संख्या में परिवारों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर मध्यम और कम बिजली खपत वाले परिवारों के लिए यह योजना घरेलू बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

दिल्ली में बढ़ेगा रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घरों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करना सरकार की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि 2.30 लाख घरों पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, तो इससे राजधानी में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

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सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत देने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले महीनों में पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने और सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगवाने के लिए किसी भी तरह का एडवांस भुगतान नहीं करना होगा।

GIFT निफ्टी से मिल रहे बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत, क्रूड 96 डॉलर के करीब

बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सुस्त शुरुआत करने की संभावना दिख रही है। GIFT निफ्टी हल्की गिरावट के साथ शुरुआत का संकेत दे रहा है। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी,US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और US-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में जोखिम से बचने का माहौल बन गया है। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट और वॉल स्ट्रीट में कमजोरी से दबाव और बढ़ सकता है, हालांकि घरेलू स्तर पर संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहने से कुछ राहत मिल सकती है।

सुबह करीब 8.30 बजे GIFT निफ्टी 24,027 पर ट्रेड कर रहा था। इसमें 24 अंक यानी 0.1 प्रतिशत की गिरावट दिख रही थी। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 12.99 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 76,944.28 पर आ गया,जबकि निफ्टी 24.60 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 24,055.80 पर बंद हुआ।

ग्लोबल हालात काफी खराब हो गए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत $96 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है,US 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड 4.8 प्रतिशत के करीब है और जियोपॉलिटिकल तथा ब्याज दरों से जुड़ी चिंताएं फिर से उभर आई हैं।

रिस्क-ऑफ़ ट्रेड बढ़ने से एशियाई बाजारों में गिरावट

बुधवार को एशियाई इक्विटी में भारी गिरावट आई है। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में बिकवाली और अमेरिका-ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने निवेशकों के जोखिम लेने के उत्साह को कम कर दिया है। जापान को छोड़कर एशिया पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 0.8 प्रतिशत गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) खुलते ही 3 प्रतिशत लुढ़क गया,जबकि जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 2.2 प्रतिशत गिर गया।

उधर कल अमेरिकी शेयरों में गिरावट जारी रहने के बाद S&P 500 e-mini फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है।

अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी के और सख्त होने की उम्मीदें बढ़ने के साथ US 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड बढ़कर लगभग 4.80 प्रतिशत हो गया है। रॉयटर्स के मुताबिक फेड फंड्स फ्यूचर्स के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि दो हफ़्ते बाद होने वाली US फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 67 प्रतिशत है।

तेल की कीमतों में लगभग 1% की बढ़ोतरी

बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 1% की बढ़ोतरी हुई। पिछले सेशन की तेजी आगे बढ़ी दिखी है। US और ईरान के बीच रात भर हुए हमलों के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बढ़ गईं हैं और मिडिल ईस्ट में तनाव के जल्द कम होने की उम्मीदें कम हो गईं हैं।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 87 सेंट या 0.92% बढ़कर $95.52 प्रति बैरल पर दिख रहा है। जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 80 सेंट या 0.89% बढ़कर $91.02 पर आ गया है। मंगलवार को दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स में $4 से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी,जो 24 जुलाई के बाद ब्रेंट में और 23 जुलाई के बाद WTI में सबसे बड़ी बढ़त रही।

बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से वॉल स्ट्रीट में गिरावट

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट जारी रही। ग्लोबल स्तर पर बॉन्ड की बिकवाली तेज हो गई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। नैस्डैक कम्पोजिट 1.03 प्रतिशत गिरकर 26,099.77 पर आ गया,जबकि डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.79 प्रतिशत गिरकर 52,766.93 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.71 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,631.47 पर आ गया।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और US ट्रेजरी यील्ड के 4.8 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी मार्केट के लिए मुश्किल हालात बन रहे हैं। एक्सटर्नल मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल जोखिमों का असर निकट भविष्य में बाजार की दिशा पर पड़ने की संभावना है।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी आर का मानना ​​है कि निफ्टी का रुख सतर्क से लेकर कमज़ोर बना रहेगा,जिसमें 24,150-24,200 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम करेगा। 24,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है और इंडेक्स इसके नीचे बना रहता है तो यह 23,900-23,800 की ओर जा सकता है।

 

Stock Market live Updates : GIFT Nifty से सुस्त शुरुआत के संकेत, US और एशियाई बाजार गिरे

 

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NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना किसी टेंशन के जीवन जीने के लिए एक फिक्स मंथली इनकम का होना बेहद जरूरी है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) देश में रिटायरमेंट प्लानिंग का सबसे लोकप्रिय और टैक्स-एफिशिएंट जरिया बन चुका है। लेकिन अधिकांश निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि ‘अगर मुझे 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹20,000 की पेंशन चाहिए, तो मुझे अपने एनपीएस खाते में कितना फंड जमा करना होगा?’

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप रिटायरमेंट के समय अपने कुल फंड का कितना हिस्सा ऐन्यूटी में जमा करते हैं और कितना कैश निकालते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹20,000 पेंशन के लिए कितना फंड जरूरी?

NPS के नियमों के मुताबिक, 60 साल की उम्र में आपको अपने कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा ऐन्यूटी में लगाना अनिवार्य होता है, जिससे आपको आजीवन पेंशन मिलती है। बाकी 60% हिस्सा आप एकमुश्त टैक्स-फ्री कैश निकाल सकते हैं। फिलहाल भारत में प्रमुख बीमा कंपनियों की ऐन्यूटी दर औसतन 6% प्रति वर्ष के आसपास है।

स्थिति 1: जब आप 100% पैसा ऐन्यूटी में लगाते हैं (मैक्सिमम पेंशन)

अगर आप रिटायरमेंट पर कोई एकमुश्त कैश नहीं निकालते और अपना पूरा 100% फंड पेंशन के लिए ऐन्यूटी में डाल देते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी कॉर्पस: ₹40 लाख

मासिक पेंशन (6% ऐन्यूटी दर पर): ₹20,000 / महीना

कुल रिटायरमेंट फंड: ₹40 लाख

स्थिति 2: जब आप 40% ऐन्यूटी और 60% लंपसम का विकल्प चुनते हैं

अगर आप 60% पैसा कैश निकालना चाहते हैं और केवल अनिवार्य 40% हिस्से से ही ₹20,000/माह पेंशन बनाना चाहते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी हिस्सा (40%): ₹40 लाख

एकमुश्त कैश निकासी (60%): ₹60 लाख (पूरी तरह टैक्स-फ्री)

कुल रिटायरमेंट फंड (100%): ₹1 करोड़

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

₹20,000 पेंशन पाने के लिए हर महीने कितना SIP निवेश करना होगा?

अगर हम NPS में इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) और सरकारी सिक्योरिटीज़ (G) के कॉम्बिनेशन से औसतन 10% वार्षिक रिटर्न मानकर चलें, तो आपकी उम्र के हिसाब से हर महीने की जाने वाली SIP इस प्रकार होगी:

लक्ष्य: ₹1 करोड़ का कुल फंड बनाना (₹60 लाख कैश + ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹2,630 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹4,450 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹7,750 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹13,170 / महीना

लक्ष्य: ₹40 लाख का कुल फंड बनाना (0% कैश, 100% ऐन्यूटी से ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹1,050 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹1,780 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹3,100 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹5,270 / महीना

NPS में निवेश के 3 बड़े फायदे

एक्स्ट्रा टैक्स बचत: आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1B) के तहत 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

कम लागत वाला प्रोडक्ट: NPS दुनिया के सबसे कम फंड मैनेजमेंट फीस वाले निवेश विकल्पों में से एक है, जिससे लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

कम जोखिम पर बेहतर रिटर्न: NPS का ऑटो चॉइस और एक्टिव चॉइस आपको उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट में एसेट एलोकेशन मैनेज करने की सुविधा देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Ideas: निफ्टी में अभी और गिरावट मुमकिन, कमजोर बाजार में भी इन दो शेयरों में हो सकती है कमाई

Trading Ideas : खराब ग्लोबल संकेतों के चलते कल 1 सितंबर को बाजार पर दबाव दिखा। हालांकि बाजार निचले स्तरों से सुधरकर बंद हुआ। निफ्टी और सेंसेक्स की फ्लैट क्लोजिंग हुई। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली रही। निफ्टी 25 प्वाइंट गिरकर 24,056 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 13 प्वाइंट गिरकर 76,944 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी 615 प्वाइंट गिरकर 57,410 पर बंद हुआ। मिडकैप 890 प्वाइंट गिरकर 63,335 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 में से 30 शेयरों में बिकवाली रही। सेंसेक्स के 30 में से 17 शेयरों में बिकवाली दिखी। बैंक निफ्टी के 14 में से 11 शेयरों में बिकवाली रही। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे मजबूत होकर 94.95 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

आज के लिए बाजार पर अपनी रणनीति साझा करते हुए manasjaiswal.com के मानस जायसवाल ने कहा कि कल निफ्टी ने नॉर्मल ट्रेडिंग आवर्स में 24,000 के लेवल को तो ब्रेक किया था। क्लोजिंग बेसिस पर यह 24050 के आसपास बंद हुआ। अगर हम निफ्टी फ्यूचर्स की बात करें तो चार्ट्स पर एक फ्रेश ब्रेकडाउन दिखता है। ऐसे में लगता है कि निफ्टी में और गिरावट हो सकती है। निफ्टी में हमें 23860 तक के लेवल्स देखने को मिल सकते हैं। इस गिरावट पर खरीदारी ना करें। कभी कोई उछाल मिले तो लॉन्ग पोजीशन से निकलना ही बेहतर रहेगा। अब आपको फ्रेश खरीदारी तभी करनी है जब निफ्टी 24,250 के ऊपर निकले और उसके ऊपर सस्टेन करना शुरू करें। उससे पहले सेल ऑन रैलीज़ का मार्केट बना रहेगा।

बैंक निफ्टी में भी 57,200 पर सपोर्ट है। अगर बैंक निफ्टी 57,200 के नीचे ट्रेड करने लगेगा तो गिरावट बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में 56,800 तक के लेवल्स देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में यहां भी सतर्क रहने की जरूरत है। खरीदारी तभी करें जब बैंक निफ्टी 58,000 के ऊपर सस्टेन होना शुरू करे।

मानस जायसवाल के टॉप पिक्स

आज के लिए उनकी एक बाय और एक सेल की रेमेंडेशन है। उनको आईटी स्पेस बढ़िया लगता है। आईटी स्पेस में काफी स्टॉक्स ऐसे हैं जहां पर फ्रेश ब्रेकआउट देखने को मिला है। HCLT जिसने अपने 200 डे मूविंग एवरेज को रिगेन कर लिया है, इसमें उनकी लॉन्ग साइड में ट्रेड लेने की सलाह है। इस शेयर में 1329 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 1390 रुपए तक के टारगेट्स के लिए खरीदारी की सलाह है।

वहीं, SBI में बिकवाली की सलाह है। अगर आप SBI के चार्ट्स देखें तो इस स्टॉक ने 100 डे मूविंग एवरेज के सपोर्ट को तोड़ दिया है। यह 100 डे मूविंग एवरेज के नीचे फिसला है। स्टॉक अब 200 डे मूविंग एवरेज को टेस्ट कर सकता है। इसलिए SBI में बिकवाली करेंगे। इसके लिए 1041 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 1010 रुपए तक के टारगेट रखें।

 

Market cues : नियर टर्म में बाजार के सतर्क और कंसोलिडेशन के दौर में रहने के संकेत, इन लेवल्स पर रहे नजर

 

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Ather Konarc S 125 vs rivals: Price and specifications compared

Ather Konarc S 125 vs rivals: Price and specifications compared
A studio shot showing the Ather Konarc, Chetak C3001, TVS iQube, and Vida VX2 Go.

Ather recently launched its first scooter on the completely new EL platform. Called the Konarc, it is currently available in six variants, starting at Rs 99,999 and going up to Rs 1.45 lakh at the moment. However, it appears that Ather is looking to make sure that there’s a Konarc at every price range. The most affordable Konarc S with 100km range isn’t going to be available until early next year, which makes the Konarc S 125km range variant the entry-level Konarc. So, how does it compare to the offerings from legacy manufacturers? Let’s find out.

Ather Konarc S 125 vs rivals: Motor, battery and charging

Chetak offers the most range

 

Ather Konarc S 125

TVS iQube 3.1 kWh

Chetak C3001

Vida VX2 Go 3.1

Peak motor power

4kW

4.4kW

3.1kW

6kW

Rated torque

16Nm

33Nm

20Nm

25Nm

Claimed top speed

70kph

82kph

80kph

70kph

Battery capacity

2.7kWh

3.1kWh

3kWh

3.1kWh

Claimed charge time (0-80 percent)

4h30m

4h03m

2h55m

4h45m

IDC range

125km

123km

131km

127km

These scooters rarely compare 1:1 in specifications, but if we take range as the most important factor, these are Ather Konarc’s closest rivals. As such, the Vida VX2 Go is the most powerful here, while the iQube develops the most torque. However, the Chetak quotes the highest range of the lot, and it sweetens the deal further by offering the fastest bundled charger (750W) and the shortest 0-80 charging time.

Ather Konarc S 125 vs rivals: Dimensions and underpinnings

iQube is the lightest and has the lowest seat height

 

Ather Konarc S 125

TVS iQube 3.1kWh

Chetak C3001

Vida VX2 Go 3.1

Wheelbase

1,352mm

1,301mm

1,355mm

1,301mm

Seat height

770mm

770mm

775mm

777mm

Ground clearance

NA

157mm

NA

155mm

Kerb weight

126.5kg

116.8kg

125kg

118kg

The C3001 and the Konarc have the longest and second-longest wheelbase, respectively, and they’re on the heavier side as well; the latter is explained by their metal body panels. Seat height is more or less on par, but if you care about the minutest of numbers, the Vida VX2’s is the tallest of the bunch. However, we wouldn’t expect that to deter buyers from choosing the Vida.

Ather Konarc S 125 vs rivals: Brakes, tyres and suspension

Konarc is the only one with a 14” wheel

 

Ather Konarc S 125

TVS iQube 3.1kWh

Chetak C3001

Vida VX2 Go 3.1

Brakes (F,R)

220mm disc, 130mm drum

220mm disc, 130mm drum

130mm drum, 130mm drum

190mm disc, 130mm drum

Tyres (F,R)

90/90-14, 100/90-12

90/90-12, 90/90-12

NA

90/90-12, 100/80-12

Suspension (F,R)

Telescopic, monoshock

Telescopic, twin shock

Leading-link, monoshock

Telescopic, monoshock

Ather’s biggest advantage over the others is its 14-inch front wheel, something none of the other scooters has. It also has the widest rear tyre, even though they all use 12-inch wheels. As for brakes, Chetak is the only one here without a disc brake. It is also the only one to feature a leading-link front suspension, paying homage to the design used on the original petrol-powered Chetak of yesteryear, whereas the others get a more modern telescopic fork.

Ather Konarc S 125 vs rivals: Features

Basics sorted, with more features requiring subscriptions

Ather has reserved the top-shelf feature set for the Konarc Z line, which is slated to release late next year. As standard, the Konarc gets the largest-in-size 7-inch LCD cluster. It also has AirWalk, a feature that will make manually moving the scooter easier. No other scooter in this comparison can match that. The iQube gets a 5-inch TFT instrument cluster, the C3001 gets a monochrome LCD cluster, and the VX2 Go 3.1 gets a 4.2-inch LCD. They all also offer ride modes and basic smartphone connectivity as standard.

However, most of Ather’s tech features require Ather StackPro, which costs Rs 16,000 for the Konarc S 125km variant. This is a big add-on to the overall price of the scooter, but it is a one-time purchase. If you spring for it, you do get a lot of features such as TrueRange, AutoHold and Vehicle FallSafe. Ather also promises yearly software upgrades and new features, a claim no other manufacturer on this list can meet or beat.

The other scooters also require a paid subscription to access the full feature suite. However, Ather’s is the most expensive and has the highest number of features. Chetak offers a lifetime subscription to its TecPac for Rs 3,000. Vida and TVS charge Rs 999 and Rs 900 per year, respectively, for theirs.

Ather Konarc S 125 vs rivals: Price

TVS is the most expensive, while Vida is the most affordable

 

Ather Konarc S 125

TVS iQube 3.1kWh

Chetak C3001

Vida VX2 Go 3.1

Price

Rs 1.22 lakh

Rs 1.29 lakh

Rs 1.14 lakh

Rs 1.12 lakh

Of this lot, the Konarc S is the second most expensive scooter to buy, behind only the TVS iQube. If you prefer to keep things simpler, both price-wise and features-wise, the Chetak and the Vida offer that: a lean feature set with promising range for the price. However, remember that real-world experience, such as comfort, can change this equation, and we can only comment on that after riding them.

The prices listed are ex-showroom, Bengaluru.

Market cues : नियर टर्म में बाजार के सतर्क और कंसोलिडेशन के दौर में रहने के संकेत, इन लेवल्स पर रहे नजर

Trade setup for today : क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में आई रिकवरी की वजह से कल निफ्टी क्लोजिंग बेसिस पर 24,000 के लेवल से ऊपर वापस आ गया। हालांकि 1 सितंबर को इंडेक्स में थोड़ी गिरावट के साथ कारोबार खत्म हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी उथल-पुथल के बीच टेक्निकल इंडिकेटर नियर टर्म में बाजार के सतर्क और कंसोलिडेशन के दौर में रहने का संकेत दे रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट् का कहना है कि अगर निफ्टी 24,000-23,950 के सपोर्ट जोन के नीचे टूटता है और वहां बना रहता है,तो यह 23,800 और फिर 23,600 की तरफ गिर सकता है। हालांकि,अगर इंडेक्स इस जोन के ऊपर बना रहता है तो 24,200-24,400 की तरफं ऊपर जाने की संभावना बढ़ सकती है। वीकली ऑप्शन डेटा से पता चलता है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी 23,500-24,500 की बड़ी रेंज में ट्रेड करता नजर आ सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (24056) के लिए अहम लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,978, 23,933 और 23,860

पिवट प्वांइट पर आधारित रेजिस्टेंस :24,123, 24,168 और 24,241

स्पेशल फॉर्मेशन : निफ्टी ने डेली टाइमफ्रेम पर ‘हाई-वेव कैंडलस्टिक पैटर्न’ बनाया,जो बुल्स और बेयर्स के बीच असमंजस की स्थिति को दिखाता है। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज काफी हद तक सपाट रहे,जबकि शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज में गिरावट का ट्रेंड जारी रहा। 10-डे EMA भी 50-डे और 100-डे EMA से नीचे आ गया। RSI गिरकर 42.86 पर आ गया,जबकि MACD जीरो लाइन के नीचे अपना डाउनट्रेंड जारी रखे हुए है और रेड हिस्टोग्राम बार एक और सेशन के लिए बढ़ रहा है। ये सभी इंडिकेटर निकट भविष्य में कमजोरी और मार्केट में सतर्क नज़रिए की ओर इशारा कर रहे हैं।

बैंक निफ्टी (57410) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,677, 57,823 और 58,058

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,207, 57,062 और 56,827

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,137, 58,706

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,135, 56,870

स्पेशल फॉर्मेशन : बैंक निफ्टी ने दोनों तरफ विक्स (wicks) वाली एक ‘बेयरिश कैंडल’ बनाई जो उतार-चढ़ाव के बीच कमजोर का संकेत है। इसने पिछले दिन की सारी बढ़त गंवा दी और 1.06 फीसदी नीचे बंद हुआ। इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ गया है,जो सावधानी बरतने का संकेत है। हालांकि,इसका ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉज़िटिव बना हुआ है क्योंकि इंडेक्स अभी भी अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। RSI और MACD कई सेशन से ज्यादातर एक ही दायरे में बने हुए हैं,जिससे पता चलता है कि कोई मज़बूत दिशात्मक मोमेंटम नहीं है। कुल मिलाकर,टेक्निकल सेटअप से संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में सावधानी के साथ कंसोलिडेशन हो सकता है। जब तक कि यह रेजिस्टेंस लेवल से ऊपर या मुख्य सपोर्ट लेवल से नीचे नहीं जाता, इंडेक्स के एक दायरे में ही बने रहने की संभावना है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) का अनुमान लगाने वाला India VIX कल 9.25-12.12 के बड़े दायरे में घूमने के बाद बिना किसी बदलवा के 11.19 पर बंद हुआ। वोलैटिलिटी इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे और निचले दायरे में बना रहा। इससे पता चलता है कि मार्केट में चिंता कम है। कुल मिलाकर,हालात बताते हैं कि निकट भविष्य में वोलैटिलिटी के सीमित रहने की संभावना है,हालांकि इंडेक्स में अचानक बड़ी हलचल से वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।

Market Insight : सितंबर के दूसरे भाग में निफ्टी में आ सकती है तेजी, छोटे-मझोले शेयरों में दिख रहा दम

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 1 सितंबर को गिरकर 0.89 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.91 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस, सेल (SAIL)

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ITR फाइल करने की डेडलाइन चूक गए? अब भी हैं ये विकल्प, जानिए क्या करना होगा

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइल करने की 31 अगस्त की डेडलाइन निकल चुकी है। लेकिन अगर आप समय पर ITR फाइल नहीं कर पाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपके पास अभी भी कुछ विकल्प हैं।

आप बिलेटेड ITR फाइल कर सकते हैं। अगर पहले से फाइल किए गए ITR में कोई गलती है, तो उसे रिवाइज्ड ITR के जरिए ठीक कर सकते हैं। वहीं, कुछ खास मामलों में देरी माफ कराने के लिए इनकम टैक्स विभाग के पास आवेदन भी किया जा सकता है।

31 दिसंबर तक Belated ITR

अगर आपने 31 अगस्त तक ITR फाइल नहीं किया है, तो आप बिलेटेड ITR फाइल कर सकते हैं। इसे 31 दिसंबर 2026 तक फाइल किया जा सकता है। हालांकि, अगर आपका असेसमेंट इससे पहले पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे।

S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर टन्ना के मुताबिक, बिलेटेड ITR फाइल करने पर ब्याज और लेट फीस लग सकती है।

कितनी लेट फीस लगेगी?

AY 2026-27 के लिए बिलेटेड ITR फाइल करने पर अधिकतम ₹5,000 की लेट फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से कम है, तो अधिकतम ₹1,000 की फीस लगेगी।

अगर कोई टैक्स बाकी है, तो उस पर 1% प्रति महीने की दर से ब्याज भी लग सकता है। इसके अलावा बिजनेस लॉस और कैपिटल लॉस को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी छूट सकता है।

पुराने टैक्स रिजीम का विकल्प नहीं मिलेगा

बिलेटेड ITR फाइल करने पर एक और बात ध्यान रखना जरूरी है। आपको नए टैक्स रिजीम में रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है। ऐसे में पुराने टैक्स रिजीम में मिलने वाली डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा।

क्या बिलेटेड ITR में रिफंड मिलेगा?

हां, बिलेटेड ITR फाइल करके भी टैक्स रिफंड क्लेम किया जा सकता है। लेकिन रिफंड मिलने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

Revised ITR कब फाइल कर सकते हैं?

रिवाइज्ड ITR उन लोगों के लिए है, जिन्होंने पहले ही ITR फाइल कर दिया है। बाद में अगर कोई गलती या जानकारी छूट जाए, तो उसे रिवाइज्ड ITR के जरिए ठीक किया जा सकता है।

AY 2026-27 के लिए 31 मार्च 2027 तक रिवाइज्ड ITR फाइल किया जा सकता है। हालांकि, 31 दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर अतिरिक्त फीस लग सकती है।

अगर कुल आय ₹5 लाख तक है, तो ₹1,000 की फीस लग सकती है। वहीं, ₹5 लाख से ज्यादा आय होने पर ₹5,000 तक की फीस देनी पड़ सकती है।

31 दिसंबर के बाद क्या होगा?

अगर आप 31 दिसंबर 2026 तक भी ITR फाइल नहीं कर पाते, तो कुछ खास मामलों में एक और रास्ता बचता है। इसके लिए इनकम टैक्स विभाग से देरी माफ करने की मांग की जा सकती है।

यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलती। आपको बताना होगा कि ITR समय पर फाइल क्यों नहीं कर पाए। साथ ही अपनी बात साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे।

यह विकल्प खासतौर पर वैध रिफंड क्लेम या लॉस को कैरी फॉरवर्ड करने जैसे मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ आवेदन करने से नहीं होगा काम

देरी माफ कराने के लिए आवेदन करना ही काफी नहीं है। आपको इनकम टैक्स अधिकारियों को बताना होगा कि देरी जानबूझकर नहीं हुई थी।

अगर वजह सही नहीं पाई गई या पर्याप्त दस्तावेज नहीं दिए गए, तो आपका आवेदन खारिज हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार 5वें सत्र गिरा, चांदी एक दिन में ₹5000 फिसली

Gold Silver Prices Today: सोने में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 1 सितंबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार पांचवें सत्र सोने में गिरावट आई। यह 2,700 रुपये गिरकर 1,58,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह करीब दो हफ्ते में सोने का सबसे कम भाव है। चांदी में भी बड़ी गिरावट आई।

बीते 5 सत्रों में सोना करीब 9000 रुपये सस्ता हुआ

बीते पांच सत्रों में दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 5.3 फीसदी यानी 8,900 रुपये तक सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, जो बीते तीन महीनों में सोने का सबसे हाई लेवल था। लेकिन, उसके बाद से सोने में लगातार गिरावट दिख रही है।

दिल्ली में चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजारर में चांदी में भी 1 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। यह 5,000 रुपये गिरकर 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने और चांदी में लगातार गिरावट की वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। एक बार फिर से दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी हमले की सूरत बनती दिख रही है।

मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने का असर बुलियन पर पड़ रहा

अमेरिका-ईरान में टेंशन बढ़ने का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 1 सितंबर को 92 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया। अगर क्रूड की कीमतें इस लेवल पर बनी रहती हैं तो इस महीने अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही कह चुके हैं कि उनकी प्राथमिकता महंगाई को बढ़ने से रोकना है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर

आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज एंड करेंसीज) वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। दरअसल इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही है, जो महंगाई बढ़ा सकती हैं।

पीएम मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील लोगों से की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से तब तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है, जब तक ऐसा करना बहुत जरूरी नहीं हो जाता। उन्होंने लोगों से बेवजह विदेश यात्रा नहीं करने की भी अपील की है। देश में लोगों के ज्यादा सोना खरीदने से सरकार को गोल्ड का ज्यादा आयात करना पड़ता है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी 1 सितंबर को सोने और चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 2.42 फीसदी गिरकर 4,334 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 3.02 फीसदी गिरकर 64.52 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है।

3 reasons to buy the Toyota Hyryder and 2 reasons not to

3 reasons to buy the Toyota Hyryder and 2 reasons not to
Toyota Urban Cruiser Hyryder

Introduced in 2022, the Urban Cruiser Hyryder and Maruti Grand Vitara were the first products co-developed through the partnership between Toyota and Maruti Suzuki. Currently, the Hyryder is Toyota’s bestselling SUV in India, averaging 7,000-9,000 units a month. If you are considering the Hyryder, we will help you decide whether this midsize SUV is suitable for you or whether you should look elsewhere.  

Reasons to buy the Toyota Hyryder

Efficient strong hybrid engine

The petrol engine in the strong hybrid version runs on the Atkinson cycle that prioritises efficiency. Coupled with the battery and motor, the Hyryder can run temporarily on pure electric power, which helps curb fuel consumption. In our real-world fuel efficiency tests, the Hyryder strong hybrid delivered much higher efficiencies than the mild hybrid petrol automatic version: 20.28kpl in the city and 22.85kpl on the highway compared to 10.83kpl and 15.67kpl, respectively. Do note that this test was done before the rollout of E20 fuel.

Well-judged ride and handling

A combination of tough underpinnings and well-judged suspension helps the Hyryder have a balanced ride and handling setup. It handles tough roads with ease, and even the sharp surfaces are absorbed quite well. At higher speeds, the Hyryder remains glued to the road and composed, while direction changes and cornering abilities are predictable. Even when cornering, body roll is kept to a minimum despite its high 210mm ground clearance, which is remarkable.

AWD availability

The Hyryder is among the few models in the very crowded midsize SUV space to offer AWD. Available solely with an automatic gearbox, it comes with Suzuki’s AllGrip Select all-wheel-drive system, bringing decent off-road capability for the Hyryder, especially for those who regularly drive in snowy or slushy conditions. With the help of terrain modes and the ability to send 50 percent of its power to the rear wheels, it can tackle challenging roads.

Reasons not to buy the Toyota Hyryder

Engines lack outright performance

Strong-hybrid versions of the Hyryder are optimised for fuel efficiency over outright performance. Thus, drivers looking for a turbo-petrol-like exhilaration won’t be satisfied, as it lacks midrange punch. Apart from the strong hybrid, there’s also a mild hybrid version that utilises a 103hp, 139Nm 1.5-litre naturally aspirated petrol engine. Though it has enough pep in the city, as with the strong hybrid, you’ll find yourself longing for more power on the highway. Overtakes will require careful planning and working your way through the gears. At 14.01 seconds, the mild-hybrid’s 0-100kph time is slow by segment standards.

Limited boot space

With a capacity of 355 litres, the mild hybrid-powered Toyota Hyryder has one of the smallest trunks in the segment. Additionally, the Hyryder strong hybrid’s high fuel efficiency comes at the cost of boot space, which is reduced further to 255 litres because of the lithium-ion battery pack placed beneath it. This could be a dealbreaker for those who carry large suitcases on road trips.