एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान का विरोध किया है। वे चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल से मिले एप्रूवल को अपीलीय ट्राइब्यूनल में चैलेंज करेंगे।
तीनों मिलकर NCLAT में रिपेमेंट प्लान को करेंगे चैलेंज
LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने कहा है कि चंद्रा की इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स में उनकी (तीनों की मिलाकर) 8.45 फीसदी वोटिंग शेयर है। उन्होंने कहा कि वे इस रिपेमेंट प्लान का विरोध करते हैं। इस बारे में LIF HF ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, “इस प्लान को आखिर में इसलिए मंजूरी मिली क्योंकि दूसरे फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की तरफ से पेश प्लान के पक्ष में कुल 80.81 फीसदी वोट मिले।”
तीनों ने NCLT में भी रिपेमेंट का विरोध किया था
एलआईसी एचएफ ने कहा कि वह तुरंत नेशनल कंपनी लॉ एपेलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में अपील फाइल करेगी। इसमें उसके साथ दूसरी सरकारी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भी होंगे। Canara Bank ने कहा है कि उसने रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चैलेंज करेगा।
इन तीनों का कुल वोटिंग शेयर सिर्फ 8.45 फीसदी
केनरा बैंक ने कहा है, “उसने (1.60 वोटिंग शेयर) दूसरी सरकारी कंपनियों एलआईसी एचएफ (6.09 फीसदी वोटिंग शेयर) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (0.76 फीसदी वोटिंग शेयर) के साथ इस प्लान का विरोध किया था और चंद्रा की तरफ से पेश 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ वोटिंग की थी। “
मामले की फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की गई थी
बैंक ने यह भी कहा है कि उसने फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन उसके पास माइनॉरिटी वोटिंग शेयर होने से उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। अब वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चुनौती देगा। Union Bank of India ने भी कहा है कि उसने भी रिजॉल्यूशन प्लान को खारिज किया है। उसने NCLT के समक्ष भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।
NCLT ने चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को दी है मंजूरी
उसने कहा है कि कुछ प्राइवेट क्रेडिटर्स (लोन देने वाले) का वोटिंग शेयर ज्यादा होने से NCLT में रिपेमेंट प्लान को मंजूरी मिल गई। बैंक ने कहा है कि वह जल्द NCLAT में इस प्लान को चैलेंज करेगा। इससे पहले NCLT ने सुभाष चंद्रा की तरफ से पेश रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी थी। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की तरफ से फाइल इनसॉल्वेंसी मामले में चंद्रा ने यह रिपेमेंट प्लान पेश किया था।
रिपेमेंट प्लान के तहत 22,000 करोड़ पेमेंट के दावे का सेटलमेंट होगा
NCLT ने इस मामले में जो आदेश दिया है, उसके तहत क्रेडिटर्स (कर्ज देने वालों) की तरफ से पेश 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के दावों के सेटलमेंट के लिए सुभाष चंद्र 6.5 करोड़ रुपये चुकाएंगे। दिग्गज प्राइवेट बैंक HDFC Bank भी इस मामले में अपील करने के बारे में सोच रहा है। एचडीएफसी बैंक ने 27 अगस्त को कहा था कि उसने भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।
आप बेटी के लिए अच्छा भविष्य चाहते हैं और बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं है तो आप सुकन्या समृद्धि योजना का फायदा उठा सकते हैं। यह सरकार की सभी निवेश योजनाओं में सबसे ऊपर है, क्योंकि इसका इंटरेस्ट रेट सबसे ज्यादा है। इस स्कीम में 15 साल तक निवेश करने पर अच्छा फंड तैयार हो जाता है, जो बेटी के हायर एजुकेशन या शादी-ब्याह में काम आ सकता है।
इस स्कीम की खास बात 8.2 का सालाना इंटरेस्ट
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की शुरुआत 2015 में हुई थी। सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ’ अभियान के तहत यह स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम में कोई व्यक्ति अपनी बेटी के नाम से बैंक या पोस्ट ऑफिस में अकाउंट ओपन कर सकता है। इस स्कीम की खास बात इसका रिटर्न है, जो 8.2 फीसदी है। यह इस स्कीम को अट्रैक्टिव बनाता है। कोई व्यक्ति अपनी दो बेटियों के लिए इस स्कीम में अकाउंट ओपन कर सकता है।
1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स डिडक्शन का भी फायदा
अगर इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो इस स्कीम में निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन भी क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, मैक्सिमम सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत होगी। यह लंबी अवधि की इनवेस्टमेंट स्कीम है, जिससे आपके निवेश की वैल्यू बढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।
सालाना 10000 रुपये के निवेश पर 3,11,839 रुपये इंटरेस्ट
इस स्कीम में हर साल सिर्फ 10,000 रुपये के निवेश से आप 15 साल में 3,11,839 रुपये का इंटरेस्ट कमा सकते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से हम आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि आपकी बेटी की उम्र 5 साल है। आप अभी इस स्कीम में निवेश शुरू करते हैं। आपका SSY अकाउंट 2047 में मैच्योर हो जाएगा।
सिर्फ 15 साल तक निवेश करने पर 4.61 लाख का फंड तैयार
आप 15 साल में कुल 1,50,000 रुपये का निवेश करते हैं। इस पर सालाना 8.2 फीसदी के इंटरेस्ट रेट से आपको मैच्योरिटी पर 3,11,839 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। इसका मतलब है कि 2047 में अकाउंट मैच्योर होने पर आपको कुल 4,61,839 रुपये मिलेंगे। यह पैसा आपकी बेटी की उच्च शिक्षा के काम में आ सकती है।
माता-पिता दो बेटियों के लिए उठा सकते हैं स्कीम का फायदा
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर माता-पिता जिनकी एक या दो बेटियां हैं, उन्हें इस स्कीम का फायदा उठाना चाहिए। इस स्कीम में हर महीने कम से कम 1000 रुपये निवेश करने पर साल में आप 12,000 रुपये का निवेश करते हैं। अगर आपकी बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो 2047 में अकाउंट मैच्योर करने पर आपका पैसा बढ़कर 5,54,206 रुपये हो जाएगा।
Union Budget 2027: बजट 2027 बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (बजट डिविजन) ने सरकार के सभी मंत्रालयों को बजट सर्कुलर 2027-28 इश्यू कर दिया है। यूनियन बजट हर साल 1 फरवरी को पेश होता है। इस साल 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाला बजट वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्र सरकार का बजट होगा।
12 अक्टूबर से प्री-बजट मीटिंग्स शुरू हो जाएंगी
मंत्रालयों को सर्कुलर जारी होने के साथ ही 2026-27 के रिवाइज्ड एस्टिमेट (RE) और 2027-28 के लिए बजट एस्टिमेट (BE) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सर्कुलर में मंत्रालयों से दोनों का अनुमान पेश करने को कहा गया है। प्री-बजट मीटिंग्स का सिलसिला 12 अक्तूबर, 2026 से शुरू हो जाएगा। इसकी अध्यक्षता एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी करेंगे।
6 अक्टूबर तक मंत्रालयों को अपनी मांग बतानी होगी
सभी मंत्रालयों और विभागों को पैसे की अपनी जरूरत के बारे में यूनियन बजट इंफॉर्मेशन सिस्टम (UBIS) को बताने को कहा गया है। उन्हें यह काम 6 अक्तूबर, 2026 तक पूरा करना होगा। उधर, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर अब तक 55,757 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
सरकार विनिवेश का 78 फीसदी लक्ष्य हासिल कर चुकी है
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। अब तक वह इस टारगेट का 78 फीसदी जुटा चुकी है। अभी इस वित्त वर्ष के खत्म होने में 7 महीने का समय बचा है। अनुमान है कि बाकी पैसा इस दौरान आसानी से जुटा लेगी।
मुश्किल में पेश होगा अगले वित्त वर्ष का बजट
अगले वित्त वर्ष का यूनियन बजट ऐसे वक्त में पेश होने जा रहा है, जब इकोनॉमी के सामने कई चुनौतियां हैं। वैश्विक स्थितियां खासकर मध्यपूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का असर भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ा रहा है। क्रूड की कीमतों में उछाल से महंगाई लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर महंगाई कंट्रोल में नहीं आती है तो इसका असर जीडीपी ग्रोथ पर भी पड़ेगा। इधर, डॉलर के मुकाबले रुपये में काफी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।
अगले साल यूपी चुनावों का असर बजट पर दिख सकता है
सरकार और आरबीआई की कोशिश महंगाई को जल्द से जल्द काबू में करने पर होगी। उधर, अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है। 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाले बजट पर यूपी चुनावों को असर दिख सकता है। सरकार बजट में विदेशी निवेश बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान कर सकती है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता
खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
अमित शाह को दिया सुझाव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।
खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।
Nifty Option Trading Tips: जब निफ्टी गिरता है तो आमतौर पर ट्रेडर्स की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि पुट खरीद लिया जाए। अगर निफ्टी नीचे जा रहा है, तो पुट से पैसा बनना चाहिए लेकिन हर बार ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं। अभी मार्केट ऐसा ही है। जब निफ्टी गिर रहा हो और India VIX ऊपर न भागे तो इसका संकेत अलग हो सकता है। मार्केट कमजोर हो सकता है लेकिन ट्रेडर्स में घबराहट नहीं है। बस इसी से तय होता है कि पुट खरीदने वाले मुनाफा मिलेगा या उसका प्रीमियम धीरे-धीरे गलने लगेगा। ऐसी स्थिति में क्वांटसैप (Qunatsapp) के रिसर्च हेड और सीईओ शुभम अग्रवाल ने खास स्ट्रैटेजी सुझाई है।
गिरावट है लेकिन घबराहट नहीं
वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX से यह पता चलता है कि आने वाले समय में मार्केट में कितनी हलचल के आसार हैं। मार्केट की तेज गिरावट के बीच ऑप्शंस की मांग बढ़ जाती है, जिससे प्रीमियम आमतौर पर महंगा हो जाता है और इंडिया विक्स भी बढ़ता है। ऐसे में निफ्टी में गिरावट के साथ विक्स का बढ़ना गंभीर संकेत माना जा सकता है लेकिन निफ्टी के गिरने के बावजूद विक्स स्थिर है तो इसे कंसालिडेशन का संकेत माना जा सकता है यानी इंडेक्स सपोर्ट और रेजिस्टेंस के बीच एक सीमित दायरे में घूम रहा है।
ऐसी स्थिति में पुट खरीदना महंगा पड़ सकता है। डायरेक्शन व्यू सही होने के बावजूद ऑप्शन की वैल्यू कम हो सकती है क्योंकि समय बीतने के साथ थीटा डिके प्रीमियम को लगातार घटाता रहता है और वोलैटिलिटी में भी कोई बड़ा उछाल नहीं आता। उदाहरण के लिए निफ्टी 24,200 से गिरकर 24,100 पर आ जाता है और आपको लगता है कि गिरावट आगे भी जारी रहेगी और आप पुट खरीद लेते हैं, लेकिन इसके बाद निफ्टी कई सेशंस तक साइडवेज चलता रहता है। यहां ट्रेडर्स के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि जिस गिरावच का इंतजार हो रहा हो, वह बहुत देर से आए और दूसरी तरफ थीटा डिके के चलते आपके ऑप्शन का प्रीमियम कम होता रहे।
फिर क्या करना चाहिए?
अगर आपका व्यू बेयरेश तो है, लेकिन तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद भी नहीं है, तो बेय पुट स्प्रेड अधिक व्यावहारिक रणनीति हो सकती है। इसमें ऐट-द-मनी या इन-द-मनी पुट खरीदना होता है और उससे नीचे के स्ट्राइक का पुट बेचना होता है। जैसे कि अगर निफ्टी लगभग 24,200 पर है, तो आप 24,200 पुट खरीद सकते हैं और 24,000 पुट बेच सकते हैं।
इस स्ट्रैटेजी के तहत बेचे गए पुट से मिलने वाला प्रीमियम आपके शुरुआती खर्च को कम करता है। इसके बदले आपका अधिक मुनाफा सीमित हो जाता है, लेकिन आपका अधिकतम घाटा भी सीमित रहता है और महंगे प्रीमियम को लेकर आपका एक्सपोजर कम हो जाता है। कम वोलैटिलिटी वाले माहौल में यह रणनीति ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है। हालांकि ध्यान दें कि यह भी मुनाफे की गारंटी नहीं है। यह सिर्फ कम प्रीमियम खर्च करके और तय रिस्क के साथ बेयरेश व्यू लेने का एक तरीका है।
इस तरह से लें ट्रेड लेने का फैसला
अकेले इंडिया विक्स को ही देखकर ट्रेड लेने का फैसला नहीं लेना चाहिए बल्कि इसे निफ्टी प्राइस एक्शन के साथ मिलाकर देखें। अगर निफ्टी निर्णायक ढंग से सपोर्ट को नीचे तोड़ता है और उसी समय विक्स भी बढ़ने लगे तो बड़ी गिरावट के आसार मजबूत हो जाते हैं। जब तक ऐसा कंफर्मेशन नहीं मिलता, तब तक जल्दबाजी में ट्रेड करने की बजाय इंतजार अच्छी रणनीति हो सकती है।
निफ्टी के लगातार एक रेंज में फंसे होने पर टाइम डिके से पुट बायर्स को नुकसान हो सकता है। ऐसे में निफ्टी गिरने पर फटाक से पुट खरीदने की बजाय यह भी देखें कि निफ्टी की गिरावट के साथ-साथ वोलैटिलिटी भी बढ़ रही है या नहीं और अगर इसका जवाब नहीं है तो मार्केट अभी कंसालिडेशन फेज में है। कुल मिलाकर प्राइस, वोलैटिलिटी, रिस्क और टाइम डिके को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए।
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IT Stocks : बाजार में एक ऐसा भी समय था जब आईटी सेक्टर से हर कोई दूर रहना चाहता था। एआई की सुनामी की वजह से सब डरे हुए थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से या फिर कुछ हफ्ते से आईटी सेक्टर में एक ठहराव सा दिखा है या यह भी कह सकते हैं कि इसमें मजबूती दिख रही है। ऐसे में अब सेक्टर पर क्या रणनीति होनी चाहिए इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आईटी पर हम तब बुलिश हुए थे जब इंडेक्स 27,000 पर था। वहां से 31,000 तक का मूव आ चुका है। अब आईटी व्यू बहुत क्लियर है। अब आप आईटी में एकतरफा तेजी नहीं देख सकते, जैसा कि पहले हमने 27,000 के स्तर से देखा था।
निफ्टी आईटी अभी भी 200 डे मूविंग एवरेज क्रॉस नहीं कर पाया है। ऐसे में अभी भी यह कहना बहुत मुश्किल है कि ये एक बेयर मार्केट रैली है या एक नई रैली की शुरुआत है। लेकिन एक बड़ा मूव प्ले हो चुका है। ऐसे में अब आईटी में स्पेसिफिक स्टॉक्स पर फोकस करने की जरूरत है। किसी एकतरफा तेजी की उम्मीद न करें। इस समय आईटी के तीन-चार स्टॉक्स, जैसे कि कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और ओएफएसएस के शेयर अच्छे लग रहे है। टाटा टेक भी अच्छा लग रहा है।
आईटी में अब इंडेक्स पर फोकस करने के बजाय इंडिविजुअल स्टॉक्स पर फोकस करें,क्योंकि आईटी में जो बड़ी ट्रेड थी वो प्ले आउट हो चुकी है। हालांकि, अगर आईटी इंडेक्स 32500 को क्रॉस करेगे तो शायद आपको आईटी इंडेक्स में बड़ी ट्रेड प्ले आउट होगी।
AnandRathi Wealth के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज ने कहा कि उन्होंने जून महीने में कहा था कि आईटी अपने सबसे बुरे दौर से बाहर आ चुका है। हम अक्सर यही देखते हैं कि निफ्टी को सालाना आधार पर कौन 3-4 फीसदी से आउटपरफार्म कर सकता है। हम शॉर्ट टर्म रैली नहीं देखते है। हमें पहले निफ्टी की तुलना में निफ्टी आईटी में 3-4 फीसदी के आउटपरफार्मेंस का अंदाजा लगाया है। पिछले 1-1.5 महीनों में हमें ऐसा ही देखने को मिला है। अब यहां से हमें निफ्टी आईटी से इतनी ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। फिर भी हमें इसमें 2-3 फीसदी का एक्सेस रिटर्न देखने को मिल सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्दोपाध्याय का कहना है कि आईटी तो एक वैल्यू ट्रैप है। एआई रिलेटेड डिसरप्शन रियल है। इस डिसरप्शन से बाहर कौन आएगा वो तो समय बताएगा। लेकिन इस समय फंडामेंटली मीडियम टर्म के नजरिए से आईटी से दूर रहने की सलाह होगी। लार्ज कैप्स से तो बिल्कुल ही दूर रहने की जरूरत है। हालांकि, एआई पर फोकस करने वाली मिड कैप आईटी की चुनिंदा कंपनियों पर नजर रहनी चाहिए।
SW Capital के डायरेक्टर पंकज जैन ने कहा कि अभी आईटी से रिस्क रिवॉर्ड लार्जकैप आईटी के पक्ष में अच्छे होते दिख रहे हैं। आईटी शेयरों के पिछले 4-5 हफ्तों के मूव से कुछ अच्छे सिगनल मिले हैं। इनके नतीजे भी उम्मीद से अच्छे रहे हैं। साथ ही इनकी मैनेजमेंट कमेंट्री भी अच्छी रही है। लार्जकैप आईटी को लेकर उम्मीदें दिख रही है। लेकिन इस सेक्टर में बहुत स्टॉक स्पेसिफिक रहने की जरूरत है।
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Jio Platforms IPO: देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ के लिए रास्ता साफ हो गया है। 37,000 करोड़ रुपये के इस मेगा आईपीओ के लिए आपको तैयार रहने की जरूरत है। सेबी से मंजूरी मिलने के बाद अब ह्यूंडई मोटर इंडिया के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड टूटने जा रहा है। ह्यूंडई मोटर इंडिया का आईपीओ पिछले साल आया था। यह आईपीओ 27,870 करोड़ रुपये का था।
Jio Platforms देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries की डिजिटल इकाई है। Jio Platforms की सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm आज देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके 50 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन के सब्सक्राइबर्स हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में कंपनी इनवेस्टर्स को सिर्फ नए शेयर इश्यू करेगी। इसका मतलब है कि इस इश्यू में कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा।
SEBI से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी अब आईपीओ में शेयर का प्राइस-बैंड तय करेगी। इनवेस्टर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि Jio Platforms रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटेल बिजनेसेज की होल्डिंग कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की Jio Platforms में 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी में दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों की भी ब़ड़ी हिस्सेदारी है। इनमें Meta Platforms और Google शामिल हैं, जिनकी हिस्सेदारी क्रमश: 9.98 फीसदी और 7.73 फीसदी शामिल हैं।
शेयर बाजार में हाल में लिस्ट होने वाली रिलायंस इडस्ट्रीज की यह दूसरी कंपनी होगी। इससे पहले RIL ने अपनी फाइनेंशियल बिजनेसेज की सब्सिडियरी Jio Financial Services को लिस्ट कराया था। यह आईपीओ अगस्त 2023 में आया था, जिसे इनवेस्टर्स का स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला था। कंपनी का शेयर 28 अगस्त को मामूली गिरावट के साथ 238 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 23 फीसदी गिरा है।
निवेशकों को यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि Reliance Jio Infocomm दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल सर्विसेज कंपनी है। चीन की China Mobile पहले पायदान पर है। Jio Platforms का आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल है। इसके अलावा ओएफएस, बल्क डील, ब्लॉक डील से भी कंपनियां काफी पैसे जुटा रही हैं। उधर, देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज का IPO भी जल्द आने वाला है। रिटेल इनवेस्टर्स जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के आईपीओ का काफी समय से इंतजार कर रहे हैं।
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सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक गुजरात के कुल 25 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इस स्थिति के कारण उनके परिजनों में भारी चिंता का माहौल है। रिश्तेदार लगातार राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रशासन से अपने स्वजनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
विदेशी नागरिकता वाले गुजराती भी लापता
लापता लोगों में केवल स्थानीय गुजराती ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे एनआरआई (NRI) गुजराती भी शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, लापता 25 लोगों में से कुछ नागरिक न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से नेपाल की यात्रा पर आए थे और बाढ़ के बाद उनका संपर्क टूट गया है।
राज्य सरकार और प्रशासन की लगातार निगरानी
राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाकर सूची अपडेट कर रही है। मौजूदा 25 लोगों की सूची के बाद जैसे-जैसे संपर्क स्थापित होगा, इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना है। लापता लोगों के संबंध में कोई भी नई जानकारी मिलते ही तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा।
हेल्पलाइन नंबर
079-23251900
9978405304
1070
जिलेवार लापता गुजरातियों का विवरण
सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अहमदाबाद के 5, आनंद के 4, सूरत के 4, खेड़ा के 4, गांधीनगर के 4, अमरेली के 2, राजकोट के 1 और वलसाड के 1 नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता भी है।
नेपाल में बाढ़ का कहर और भारी तबाही
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रास्ते बंद होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
150 से अधिक गुजरातियों के प्रभावित होने की खबर
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताया कि वायरल हो रहे भयानक वीडियो में लोग, मकान और वाहन तिनके की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आपदा में जान-माल के वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने में अभी लंबा समय लग सकता है। नेपाल के रसुवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आई इस आपदा में अब तक 392 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 290 भारतीयों सहित 1,400 से अधिक लोग लापता हैं। देशभर से और विशेष रूप से गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक वहां गए थे, जिनमें से प्राथमिक जानकारी के अनुसार 150 से अधिक गुजरातियों के भी इस हादसे में प्रभावित होने की रिपोर्ट मिल रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 315 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार नेपाली प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीयों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।
When Maruti Suzuki introduced its first factory-fitted CNG models in 2010, the fuel had little acceptance among private buyers. Availability was largely restricted to Delhi-NCR, Mumbai-Pune and Gujarat, while the filling network was small and uneven. CNG penetration remained at just 1-2 percent until 2016-17, but Maruti continued to improve the technology and expand its range. It began with affordable cars such as the Alto and Eeco before taking CNG to the WagonR, Swift, Baleno, Dzire and Ertiga. Today, its portfolio includes SUVs such as the Brezza, Fronx, Grand Vitara and Victoris.
Fixing what buyers disliked
In the late 1990s, buyers who wanted a CNG car usually had to convert a petrol model using an aftermarket kit. Most kits were imported, often from Italy or Argentina, and a conversion cost around Rs 30,000-32,000.
As demand grew, some dealers began tying up with local retrofitters. But when these cars developed problems, owners often returned to Maruti workshops even though the company had not supplied or installed the kit. Poorly fitted systems raised concerns about gas leaks and vehicle fires. An aftermarket conversion could also invalidate the manufacturer’s warranty, while the engine and fuel system were not always designed to cope with CNG.
Performance was another weakness. Early conversions resulted in a noticeable drop in power. Some owners would switch to petrol before overtaking or climbing steep roads and returned to CNG once the additional performance was no longer needed.
Factory-fitted systems addressed many of these problems. Engines, valve seats, fuel lines and mounting points were designed to work with CNG. Better calibration reduced the performance loss, while the car retained its manufacturer warranty and could be serviced through Maruti’s dealer network.
The financial case was already strong. Around 2010, CNG cost roughly Rs 20-21 per kg, compared with about Rs 48 per litre for petrol and Rs 38 for diesel. A factory-fitted system added around Rs 45,000-54,000 to the price of the car, but offered better engineering, safety and warranty protection than an aftermarket conversion.
Even so, CNG did not take off immediately. Diesel was widely available, delivered better performance and offered low running costs. In 2013, diesel accounted for around 38 percent of India’s passenger vehicle market, making it the easier choice for many high-mileage users.
The network caught up
India had around 1,200 CNG stations in 2016-17. By March 2026, the network had expanded to about 8,900 stations across roughly 350 cities. This made CNG practical beyond its traditional strongholds. Petrol prices also rose sharply after 2020, crossing Rs 100 per litre in several cities and strengthening the case for switching to a cheaper fuel.
By then, Maruti had already addressed many of the product-related concerns and could respond with a broad factory-fitted portfolio. CNG’s share of Maruti’s new registrations, including private cars and cabs, increased from 14.3 percent in 2021 to 41.2 percent in the first half of 2026. Petrol’s share fell from 76.5 percent to 45.9 percent over the same period. The sharpest jump came between 2023 and 2024, when CNG’s share rose from 24.6 percent to 32 percent.
Commercial vehicles remain important. Cabs account for around 10 percent of Maruti’s cumulative registrations, but contribute more than a quarter of its CNG volumes. However, private buyers now account for the larger part of demand.
“Earlier, if a customer was opting for CNG, the perception was that he was just a very value-conscious customer,” says Maruti Suzuki’s senior executive officer, sales and marketing, Partho Banerjee. “Now, especially with underbody CNG, the profile of customers has changed. They are not only looking for mileage, they also want an aspirational product that feels no different to drive from gasoline.”
CNG moves beyond small cars
The WagonR remains the quintessential CNG hatchback. Its CNG share has risen from 42.5 percent in 2021 to 49.1 percent in the first half of 2026. Nearly every second WagonR buyer now chooses it. CNG is also gaining ground in models that were once overwhelmingly petrol-powered. Its share in the Swift has increased from 1.9 percent to 18 percent, while the Baleno has moved from 2.1 percent to 14.5 percent.
The Dzire has seen an even sharper change. CNG accounted for just 1.7 percent of its registrations in 2021. Its share reached 33.6 percent in H1 2026.
Adoption is strongest in vehicles that cover longer distances or carry more passengers. CNG’s share of the Ertiga has risen from 39.3 percent to 73.6 percent, while the Eeco has moved from 31 percent to 55.2 percent. Big shifts are now also taking place in the SUV segment, where buyers care as much about design, features and luggage space as they do about mileage.
CNG accounts for 43.4 percent of Brezza registrations, compared with 23.7 percent for its Smart Hybrid powertrain in H1 2026. The Fronx has seen its CNG share rise from 10.9 percent at launch in 2023 to 35.4 percent in the first half of 2026. In the case of the Grand Vitara, it has increased from zero to 23.9 percent.
The Victoris has moved even faster. CNG accounted for 55.2 percent of its registrations in the first half of 2026. Its strong response shows that midsize SUV buyers will accept the fuel when it does not compromise the overall ownership experience.
Better packaging removes a key compromise
A large cylinder placed across the luggage compartment has long been one of CNG’s biggest drawbacks. Dual-cylinder systems that divide the gas storage between two smaller cylinders positioned lower in the boot, or placing an underbody tank, create a flatter and more usable luggage area.
Maruti’s latest CNG development is the underbody tank on the Victoris and Brezza.
Central to Maruti’s next CNG push is the underbody CNG setup. The newly launched CNG Brezza opts for this setup – just like in the Victoris – where the tank is placed beneath the floor. It does negate the ability to have the spare tyre, but luggage space remains useable with a boot that is pretty much free of intrusions.
“If I don’t compromise on my driving experience, and I don’t lose boot space, and on top of that I reduce my total cost of ownership, then it is ticking all the boxes. Why would I not go for it?” says Banerjee.
Filling the gap left by diesel
Maruti’s exit from diesel in 2020 left a gap for buyers seeking low running costs without moving to an EV. CNG has become the answer. It cannot match a diesel engine’s torque or effortless highway performance, but it can cost substantially less to run than petrol, particularly for buyers covering high monthly distances. The vehicle can also switch to petrol when CNG is unavailable.
CNG will not replace diesel in every situation. Drivers who regularly travel on highways, carry heavy loads or value strong mid-range performance may still prefer diesel where it remains available. But for largely urban use, CNG now delivers much of the economic advantage that once made diesel attractive. The market has moved beyond mileage.
CNG has reached around 20 percent penetration without requiring buyers to completely change the way they use a car. There is no home charger to install, and the vehicle can run on petrol when the gas runs out. But the next stage will require more than savings. Buyers moving onto larger and more expensive vehicles will expect performance, equipment, luggage space and convenience alongside lower running costs.
“Quality, reliability and mileage are now hygiene,” says Banerjee. “You need to give all of that anyway and then still meet their lifestyle expectations.”
With the Victoris establishing CNG in the midsize SUV market and the Brezza addressing the compact SUV space, Maruti is now taking the fuel deeper into India’s largest vehicle segment, and it says there’s more to come.
Market Technicals : 28 अगस्त को निफ्टी में 0.4% की बढ़त के साथ तेजी लौटती दिखी। लेकिन लगातार दूसरे सेशन में भी यह क्लोजिंग बेसिस पर सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ही बना रहा। इससे पता चलता है कि इसमें मज़बूत मोमेंटम की कमी है और सतर्कता के साथ कंसोलिडेशन का दौर जारी है। इंडेक्स 23,606 से 24,774 तक की रैली के 50 फीसदी फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से नीचे बना रहा। जबकि मोमेंटम इंडिकेटर्स और ऑसिलेटर्स में मजबूती की कमी दिखी। इन सभी बातों से संकेत मिलता है कि शॉर्ट टर्म में कमजोर रुझान के साथ उतार-चढ़ाव वाला ट्रेड देखने को मिल सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 24350–24400 के आसपास स्थित 200-डे EMA (24,350–24,400) के अहम रेजिस्टेंस के नीचे बना रहता है तब तक कंसोलिडेशन और रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी रह सकती है। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,000 पर है। अगर यह सपोर्ट कायम नहीं रह पाता तो निफ्टी में 23,800 की तरफ गिरावट आ सकती है। हालांकि,अगर यह रेजिस्टेंस जोन के ऊपर मजबूती दिखाता है तो इसमें 24,800 के लेवल की ओर तेजी आती नजर आ सकती है।
निफ्टी कल बढ़त के साथ खुला और दिन भर लगभग 100 अंकों के दायरे में घूमते रहने के बाद 85 अंक यानी 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 24,176 पर बंद हुआ। निफ्टी पूरे हफ्ते ज्यादातर पिछले हफ्ते के दायरे में ही कारोबार करता रहा और अपने शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बंद हुआ। इस हफ्ते इसमें 0.31 फीसदी की गिरावट आई।
डेली टाइमफ्रेम पर बेंचमार्क इंडेक्स ने पिछले दिन की रेंज के अंदर एक अच्छी बुलिश कैंडल बनाई,जिसमें नीचे की तरफ एक छोटी सी विक(wick)थी। वीकली टाइमफ्रेम पर इसने पिछले हफ्ते की रेंज के अंदर एक रेड कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ साफ शैडो(shadows)दिखाई दे रही थीं। यह रेंज-बाउंड ट्रेडिंग का संकेत है।
डेली RSI के लेवल के आस-पास न्यूट्रल बना रहा। इससे पता चलता है कि किसी खास दिशा में मज़बूत मोमेंटम की कमी है। वहीं,निचले लेवल से बढ़ते ADX से संकेत मिला कि धीरे-धीरे उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि,किसी निर्णायक ब्रेकआउट के न होने से यह संकेत मिलता रहा कि बाजार एक सीमित दायरे (रेंज-बाउंड)में ही रहेगा।
निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय
HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी के मुताबिक गुरुवार को 24150 के लेवल पर ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन के ऊंचे सपोर्ट से नीचे आने के बाद,निफ्टी में शुक्रवार को और ज्यादा कमजोरी नहीं आई। यह एक अच्छा संकेत है,क्योंकि अक्सर नीचे की ओर फाल्स ब्रेकआउट के बाद ऊपर की ओर तेज चाल देखने को मिलती है।
उनका मानना है कि निफ्टी का मेन ट्रेंड 24,000 और 24,400 के दायरे में बना हुआ है और इसमें तेजी का रुख है। अगर निचली रेंज के पास से कोई मजबूत उछाल आता है,तो जल्द ही 24,300–24,400 के लेवल तक अच्छी-खासी तेजी देखने को मिल सकती है। ट्रेंड बदलने के लिए 24,000 का लेवल एक अहम सपोर्ट है।
वीकली ऑप्शन डेटा से पता चलता है कि 24,300 और 24,500 स्ट्राइक,जहां सबसे ज़्यादा कॉल ओपन इंटरेस्ट है,वे शॉर्ट टर्म में निफ्टी के लिए रेजिस्टेंस का काम कर सकते हैं। वहीं,24,000 और 24,100 स्ट्राइक,जहां सबसे ज्यादा पुट ओपन इंटरेस्ट है,वे इंडेक्स के लिए सपोर्ट जोन का काम कर सकते हैं।
उधर फियर इंडेक्स के नाम से जाना जाने वाला इंडिया VIX लोअर लेवल पर बना रहा। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया और अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। इन बातों से पता चलता है कि मार्केट में अनिश्चितता और निवेशकों की घबराहट काफी कम हो गई थी।
बैंकिंग इंडेक्स की शुरुआत गिरावट के साथ हुई,लेकिन इसने रिकवरी की कोशिश की और इंट्राडे में 57,596 का हाई बनाया। हालांकि,यह बढ़त बरकरार नहीं रह सकी और अधिकांस ट्रेडिंग सेशन के दौरान इंडेक्स दबाव में रहा। शुक्रवार को यह इंडेक्स 14 अंक गिरकर 57,496 पर बंद हुआ और अपने 20-डे और 50-डे के EMA के दायरे में रहा,जबकि पूरे हफ्ते में इसमें 0.50 फीसदी की गिरावट आई।
डेली चार्ट पर इस इंडेक्स ने एक छोटी बॉडी वाली बुलिश कैंडल बनाई,जिसके दोनों तरफ साफ तौर पर विक्स(wicks)दिख रहे थे। इससे पता चलता है कि बुल्स और बेयर्स के बीच कोई फैसला नहीं हो पा रहा था और साफ दिशा वाला मोमेंटम नहीं था। वीकली टाइमफ़्रेम पर,इसने ऊपर और नीचे शैडो वाली एक रेड कैंडल बनाई,जो उतार-चढ़ाव के बीच दबाव का संकेत है। हालांकि,इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज के ऊपर बना रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। इससे पता चलता है कि मार्केट का ओवरऑल स्ट्रक्चर मजबूत बना हुआ है।
डेली चार्ट पर इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो शॉर्ट टर्म में सावधानी और कंसोलिडेशन का संकेत है। डेली RSI भी न्यूट्रल जोन में रहा,जिससे साफ तौर पर मजबूत मोमेंटम की कमी पता चलती है।
एक्सपर्ट की राय
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह के अनुसार 57,000–56,900 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया का काम कर सकता है। अगर यह स्तर बना रहता है तो मौजूदा कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है।
उनका मानना है कि ऊपर की तरफ 57,900–58,000 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 58,000 के ऊपर के साफ ब्रेकआउट या 57,000 के नीचे ब्रेकडाउन से मौजूदा कंसोलिडेशन का दौर खत्म हो सकता है और उस दिशा में एक बड़ी ट्रेंडिंग चाल शुरू हो सकती है।
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