Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है शेयर

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) का ₹650 करोड़ का IPO 20 अगस्त को खुला था। अभी तक यह 21.69 गुना भर चुका है। इसमें 24 अगस्त को भी पैसे लगाए जा सकेंगे। उसके बाद अलॉटमेंट 25 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 28 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं। स्टॉक मार्केट में कंपनी की शुरुआत धांसू रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर 107 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। मतलब कि IPO निवेशकों को तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग डे पर सच हो जाएं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। Tempsens Instruments IPO के लिए प्राइस बैंड ₹285-₹300 प्रति शेयर और लॉट साइज 50 शेयर है। IPO में ₹95 करोड़ के 32 लाख नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की ओर से ₹555 करोड़ के 1.85 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है।

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) लिमिटेड एक थर्मल इंजीनियरिंग कंपनी और खास तरह के केबल बनाने वाली कंपनी है। यह कस्टमाइज्ड टेंपरेचर सेंसिंग सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और खास तरह के केबल की डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है। कंपनी के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं। कंपनी कॉन्टैक्ट और नॉन कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाती है।

किस कैटेगरी में अब तक कितना सब्सक्रिप्शन

IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा अभी तक 3.31 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 52.98 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 18.73 गुना और कर्मचारियों के लिए रिजर्व हिस्सा 28.93 गुना भर चुका है। IPO के लिए ICICI Securities Ltd और JM Financial बु​क रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल सॉल्यूशंस को लेकर पूंजीगत खर्च के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। IPO की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹194.55 करोड़ जुटाए। IPO में ₹1.5 करोड़ के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी ​बचे हिस्से में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Tempsens Instruments की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 19 प्रतिशत बढ़कर ₹455.86 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹71 करोड़ रहा। ​एक साल पहले रेवेन्यू ₹382.47 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹62.56 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 के दौरान टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स पर ₹77.95 करोड़ की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IND vs SL: मैदान पर श्रीलंकाई गेंदबाज से भिड़े यशस्वी जायसवाल, दोनों खिलाड़ियों में हुआ बॉडी कॉन्टैक्ट

IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला कोलंबो में खेला जा रहा है। मुकाबले में भारत के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। पहले बल्लेबाजी करने आई भारत की टीम ट्री ब्रेक होने तक 52 ओवर में 3 विकेट खोकर 187 रन बना ली है। वहीं इस मुकाबले के दौरान यशस्वी जायसवाल आउट होने के बाद श्रीलंकाई गेंदबाज से भिड़ गए। श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के साथ जायसवाल की मैदान पर तीखी बहस हुई। जायसवाल 45 रन बनाकर आउट हुए थे और आउट होने के बाद फर्नांडो के सेलिब्रेशन से वह नाराज नजर आए। इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के बीच बहस बढ़ गई और वीडियो में दोनों खिलाड़ियों के  ऐसा लगा कि जायसवाल ने फर्नांडो को सिर से टक्कर मारने की कोशिश की।

मैदान पर भिड़े जायसवाल-असिथा

ये मामला 17वें ओवर की आखिरी गेंद के बाद हुआ। इससे पहले यशस्वी जायसवाल ने असिथा फर्नांडो की गेंदों पर तीन चौके लगाए थे, लेकिन ओवर की आखिरी गेंद पर वह बोल्ड हो गए। आउट होने के बाद जायसवाल वापस लौटे और फर्नांडो के जश्न पर नाराजगी जताई। दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर बहस हुई और मामला इतना बढ़ गया कि जायसवाल फर्नांडो के बेहद करीब आ गए और उन्हें सिर से टक्कर मारते हुए नजर आए। श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने बीच में आकर यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो को अलग किया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। भारत ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना रखी है।

 

क्या है आईसीसी के नियम

ICC के नियमों के मुताबिक, मैदान पर मारपीट या किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाना लेवल-4 का गंभीर अपराध माना जाता है। आर्टिकल 2.18 के तहत किसी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी, दर्शक या किसी अन्य व्यक्ति के साथ मारपीट करना नियमों का उल्लंघन है। जानबूझकर या लापरवाही से किसी को चोट पहुंचाने पर खिलाड़ी या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

क्या जायसवाल पर होगा एक्शन

ICC के आर्टिकल 2.19 में मैदान पर हिंसा करने को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। इसके तहत किसी खिलाड़ी, अधिकारी, अंपायर, रेफरी, दर्शक या किसी अन्य व्यक्ति को लात मारना, मुक्का मारना या उसके साथ हाथापाई करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी खिलाड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। मैदान पर मारपीट और हिंसा से जुड़े ये अपराध ICC की सबसे गंभीर लेवल-4 श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में सजा भी काफी सख्त हो सकती है। अपराध की गंभीरता के आधार पर खिलाड़ी या अधिकारी पर कम से कम 5 टेस्ट या 10 वनडे मैचों का बैन लगाया जा सकता है। गंभीर मामले में लाइफटाइम बैन भी लगाया जा सकता है।

Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

Shadowfax में क्वालकॉम ने बेची ₹184 करोड़ की हिस्सेदारी, सोमवार को शेयर में दिख सकता है जबरदस्त एक्शन

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Bobby Deol: ‘मैं इससे बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहा हूं’, ‘एनिमल’ और ‘आश्रम’ की सक्सेस के बाद विलेन रोल मिलने पर बोले बॉबी देओल

Bobby Deol: एक्टर बॉबी देओल अपने करियर की दूसरी पारी में हैं। 90 और 2000 के दशक में इस बॉलीवुड स्टार ने रोमांटिक हीरो समेत कई लीड रोल निभाए और खूब सफलता पाई। लेकिन पिछले दशक में उनकी वापसी के बाद से उन्हें ज्यादातर दमदार विलेन के रोल में देखा गया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में बॉबी ने माना कि उन्हें एक ही तरह के रोल में बांध दिया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे इस छवि को तोड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

बॉबी देओल ने विलेन के तौर पर अपनी छवि में बंधे रहने पर बात की

शनिवार को दिल्ली में जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान बॉबी ने कहा कि उन्हें विलेन वाले रोल बहुत मिल रहे हैं, लेकिन वह इस छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। एक्टर ने कहा, “अगर कोई एक्टर किसी खास तरह के रोल में सफल हो जाता है, तो उसे वैसे ही रोल मिलते रहते हैं। इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है।”

बॉबी ने प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ से वापसी की, जिसमें उन्होंने एक ठग और अपराधी का रोल निभाया, जो खुद को भगवान का दूत बताने वाला बाबा बनकर लोगों को धोखा देता था। इसके बाद उन्हें 2023 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ में विलेन का रोल मिला। तब से, बॉबी ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ जैसी फिल्मों में विलेन का रोल निभा चुके हैं।

‘मैं इसे तोड़ने की पूरी कोशिश करता हूं’

बॉबी ने कहा कि यह बहुत स्वाभाविक है कि जब कोई एक्टर किसी खास रोल में सफल हो जाता है, तो बाद में उसे उसी तरह के रोल मिलने लगते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अब वह अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स करने की कोशिश कर रहे हैं। 57 साल के एक्टर ने PTI को बताया, “मैं उस छवि से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करता हूं। मैंने हाल ही में ‘बंदर’ नाम की एक फिल्म की है, जो बहुत अलग थी। विलेन के रोल में भी अलग-अलग तरह के विलेन होते हैं, जिनके अलग-अलग शेड्स होते हैं। इसलिए मुझे ऐसे रोल निभाने में मज़ा आता है। मैं कुछ वेब सीरीज़ भी करने वाला हूँ जो अलग होंगी।”

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ में उन्होंने एक उम्रदराज़ स्टार का रोल निभाया, जिस पर उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड ने रेप का आरोप लगाया था। यह फिल्म जून में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और क्रिटिक्स ने इसकी तारीफ़ की थी। इस साल बॉबी के दो और प्रोजेक्ट्स – ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ – में भी उन्होंने विलेन का रोल निभाया।

बॉबी देओल की आने वाली फिल्में

बॉबी जल्द ही प्राइम वीडियो की सीरीज़ ‘तीन कौवे’ में नज़र आएंगे। इस स्पाई ड्रामा की शूटिंग अभी चल रही है और इसमें सिद्धांत गुप्ता, फातिमा सना शेख और पावेल गुलाटी भी अहम भूमिकाओं में होंगे।

Gold vs Inflation: 46 साल के आंकड़ों से मिला जवाब, गोल्ड में निवेश महंगाई से लड़ाई में कितना कारगर

Gold vs Inflation: गोल्ड के भाव एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ने लगे हैं। 24 कैरट की शुद्धता वाला 10 ग्राम गोल्ड अब करीब ₹1.64 लाख के भाव पर पहुंच गया है जबकि कुछ ही दिन पहले यह लगभग ₹1.59 लाख में मिल रहा था। हालांकि गोल्ड के भाव में इस तेजी के चलते ही इसमें निवेशकों का रुझान दिखता है बल्कि इसे बड़े पैमाने पर महंगाई की रफ्तार से बचाव के तौर पर देखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना वाकई लॉन्ग टर्म में महंगाई से लड़ाई में अच्छा हथियार साबित हुआ है और अगर हां तो कितना। इसे लेकर फंड्सइंडिया की वेल्थ कंवर्जेशंस अगस्त 2026 रिपोर्ट के डेटा से सामने आया है कि जैसे-जैसे गोल्ड रखने की अवधि यानी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, महंगाई से आगे रहने में इसकी रफ्तार अधिक स्थिर हो जाती है।

Gold vs Inflation: अलग-अलग टाइमफ्रेम में कैसी रही भिड़ंत

फंड्सइंडिया ने साल 1995 और साल 2025 के बीच अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड में सोने से मिलने वाले रिटर्न और महंगाई की तुलना की। इसमें गोल्ड के रिटर्न और महंगाई के बीच सालाना औसत अंतर को मापा गया। इस डेटा के मुताबिक एक साल में दोनों के बीच किसकी रफ्तार अधिक रही, यह इस बात पर काफी निर्भर है कि गोल्ड की खरीदारी कब हुई। औसतन गोल्ड ने एक साल में इनफ्लेशन को करीब 4 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ दिया। हालांकि एक साल में ही खरीदारी के अलग-अलग समय के हिसाब से ही गोल्ड ने इनफ्लेशन को 24 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पछाड़ दिया तो कुछ अवधि में 28 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पिछड़ गई।

अब अगर पांच साल में बात करें तो गोल्ड ने महंगाई की रफ्तार यानी इनफ्लेशन को औसतन सालाना 5 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ा तो 10,15 और 20 साल की अवधि में भी ऐसी ही स्थिति रही। इसका मतलब है कि कम समय में जरूरी नहीं है कि गोल्ड इनफ्लेशन को पछाड़ दे लेकिन लंबे समय में यह अब तक आगे ही साबित हुआ है।

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हर साल लगातार नहीं बढ़ी गोल्ड की चमक

लॉन्ग टर्म में गोल्ड ने शानदार रिटर्न दिया है और महंगाई को मात दी है लेकिन इसकी चमक लगातार हर साल नहीं बढ़ी है। इसे लेकर फंड्सइंडिया ने 1980 से लेकर अब तक गोल्ड ने कितना रिटर्न दिया, एक और एनालिसिस की। इसमें सामने आया कि इसमें जोरदार तेजी के दौर भी आए हैं तो लॉन्ग टर्म तक सुस्त रिटर्न के दौर भी रहे हैं। रोलिंग-रिटर्न डेटा के मुताबिक अलग-अलग पीरियड में गोल्ड का औसतन सालाना रिटर्न करीब 10% रहा है लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न इस बात पर बहुत निर्भर रहा कि निवेशक ने किस समय सोना खरीदा था। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनफ्लेशन हेज यानी महंगाई के खिलाफ हथियार होने का मतलब ये नहीं है कि जब भी महंगाई बढ़ेगी, सोने की कीमत भी उसी समय बढ़ेगी या सोना हर साल महंगाई से ज्यादा रिटर्न देगा या सोने की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

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कौन 16 करोड़ रुपये में खरीद ले गया गांधीजी की चिट्ठी-चरखा, 688 हैंडरिटेन विचार और ये सारी विरासतें? अब मिली ये जानकारी

National Gandhi Museum: महात्मा गांधी से जुड़े पत्रों, हस्तलिखित दस्तावेजों और उनके निजी इस्तेमाल की वस्तुओं की हालिया नीलामी को लेकर नेशनल गांधी म्यूजियम ने चिंता जताई है। म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा है कि गांधी के ऐसे दस्तावेज और व्यक्तिगत सामान केवल किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन दुर्लभ सामग्रियों के मालिकों से इन्हें नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय को सौंपने की अपील की है, ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

19 अगस्त को हुई एक नीलामी में गांधी से जुड़े 86 दुर्लभ आइटम शामिल थे। इनमें उनके करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखी गई गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियों का संग्रह भी था। करीब दो सालों में लिखे गए इस संग्रह का शीर्षक ‘A Thought for the Day’ था। यह संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका और किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के नीलामी में बिकने का विश्व रिकॉर्ड बना।

‘यह खबर बेहद दुखद और पीड़ादायक’

नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने शनिवार को जारी बयान में इस नीलामी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए लेटर और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी में रखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इन वस्तुओं की बिक्री से मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक मिले।

अन्नामलाई ने इसे ‘बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर’ बताया। उन्होंने कहा कि गांधी के कई पत्र भले ही किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मूल पत्रों और उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना देश की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।

तीसरी-चौथी पीढ़ी के पास पहुंच चुके हैं कई दस्तावेज

म्यूजियम डायरेक्टर के मुताबिक, गांधी से जुड़े कई पत्र और वस्तुएं अब उन लोगों के पास हैं जो मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी से आते हैं। संभव है कि उन्हें इन सामग्रियों के ऐतिहासिक महत्व की पूरी जानकारी न हो या वे यह न जानते हों कि इन्हें किस तरह सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

ऐसे में कुछ लोग इन दुर्लभ वस्तुओं को नीलामी के जरिए बेचने का रास्ता अपना रहे हैं। अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के पत्र, पांडुलिपियां और उनके निजी इस्तेमाल की वस्तुएं सिर्फ निजी संग्रह की चीजें नहीं हैं, बल्कि भारत के साझा इतिहास का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि इन सामग्रियों को इस तरह संरक्षित किया जाना चाहिए कि भारत ही नहीं। बल्कि दुनियाभर के लोग इन्हें देख सकें, उनका अध्ययन कर सकें और महात्मा गांधी के विचारों को समझ सकें।

राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम ने की खास अपील

अन्नामलाई ने उन सभी लोगों से अपील की, जिनके पास गांधी के पत्र, उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियां या उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बेचने या नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय, दिल्ली को सौंपा जाए। उनका कहना है कि म्यूजियम इन दुर्लभ और मूल्यवान सामग्रियों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित कर सकता है। उन्हें वर्तमान तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी बना सकता है।

नीलामी में क्या-क्या बिका?

‘Gandhi: From the Collection of Anand T Hingorani’ नाम से आयोजित नीलामी में गांधी से जुड़े कुल 86 लॉट शामिल थे। इनमें पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और व्यक्तिगत वस्तुएं शामिल थीं। सबसे अधिक कीमत गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियों के संग्रह को मिली। इसमें सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता उन्मूलन, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा, अनासक्ति, आत्मबोध और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर उनके विचार दर्ज थे। यह संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका।

इसके अलावा गांधी के ईश्वर और भगवद्गीता से जुड़े विचारों पर आधारित तीन पांडुलिपियों और पत्रों का सेट ‘Message on God’ नाम से पेश किया गया, जिसे 1.68 करोड़ रुपये में बेचा गया। गांधी का ‘पेटी चरखा’ (बॉक्स स्पिनिंग व्हील) भी नीलामी में शामिल था। इसके साथ कताई के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र थे। इसकी अनुमानित कीमत 50 से 70 लाख रुपये थी, लेकिन यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।

इसके अलावा गांधी की हस्ताक्षरित एक तस्वीर (जिसमें वह लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं) 78 लाख रुपये में बिकी। आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े गांधी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बेचा गया।

हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों तक संभालकर रखा था संग्रह

नीलाम की गई सामग्री को हिंगोरानी परिवार ने कई पीढ़ियों से संभालकर रखा था। यह संग्रह गांधी और आनंद टी. हिंगोरानी के लंबे और करीबी संबंधों के माध्यम से गांधी के व्यक्तित्व और विचारों की एक निजी झलक प्रस्तुत करता है। नीलामी में खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि नीलामी कराने वाली संस्था ने बताया कि खरीदार भारत का ही है और यह महत्वपूर्ण पांडुलिपि देश में ही रहेगी।

राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम की अपील के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि महात्मा गांधी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत से जुड़े मूल दस्तावेजों और निजी वस्तुओं को निजी संपत्ति मानकर बाजार में बेचा जाना चाहिए या उन्हें राष्ट्रीय विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।

नीलामी से जुड़ी मुख्य बातें

कुल बिक्री: सैफरनआर्ट (Saffronart) नीलामी घर द्वारा ‘गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी’ शीर्षक से 86 वस्तुओं की नीलामी की गई।

सबसे महंगी वस्तु: गांधीजी द्वारा अपने निकट सहयोगी आनंद टी. हिंगोरानी को दो वर्षों में लिखे गए 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह ‘अ थॉट फॉर द डे’ 16.20 करोड़ रुपये में बिका। यह किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज़ के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।

अन्य प्रमुख वस्तुएं

‘मेसेज ऑन गॉड’ (ईश्वर और भगवद गीता पर विचार): 1.68 करोड़ रुपये

गांधीजी का पेटी चरखा (दो पत्रों के साथ): 1.02 करोड़ रुपये

लिखने के दौरान की हस्ताक्षरित तस्वीर: 78 लाख रुपये

आर्थिक स्वतंत्रता पर पत्र, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड: 57.60 लाख रुपये

कौन है खरीददार?

नीलामी घर ने पुष्टि की है कि खरीदार भारत का ही निवासी है, इसलिए ये दस्तावेज देश में ही रहेंगे। हालांकि खरीददार के नाम का खुलासा नहीं हुआ है।

संग्रहालय का पक्ष और अपील

संरक्षण पर चिंता: गांधी म्यूजियम के निदेशक ए. अन्नामलाई ने कहा कि मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी के पास ये वस्तुएं हैं, जो अक्सर इनके ऐतिहासिक महत्व या सही संरक्षण तकनीकों को समझे बिना इन्हें बेच देते हैं।

राष्ट्रीय धरोहर: उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियाँ और वस्तुएं साझा राष्ट्रीय संपत्ति हैं, जिन्हें आम जनता के अध्ययन और सीखने के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

सार्वजनिक अपील: अन्नामलाई ने निजी संग्रहकर्ताओं और वंशजों से अपील की है कि वे इन ऐतिहासिक वस्तुओं को नीलाम करने के बजाय नई दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम’ को सौंपें ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

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Bangladesh Crisis: कंगाल होने की कगार पर बांग्लादेश? गैस खत्म, 80% निर्यात ठप और ब्लैकआउट से त्राहि-त्राहि!

Bangladesh Economic Crisis: पड़ोसी देश बांग्लादेश इन दिनों अपनी अब तक की सबसे बड़ी और गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। प्राकृतिक गैस की भारी कमी के कारण देश के बड़े-बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं, खेतों के लिए खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों में जंग लग रहा है और आम जनता बिजली की किल्लत व रसोई गैस की भारी कमी से परेशान है।

घरेलू उत्पादन में गिरावट, नई गैस खोज में देरी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलएनजी (LNG) आपूर्ति ठप होने से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

फर्टिलाइजर फैक्ट्रियां बंद, कृषि और खाद सुरक्षा पर मंडराया संकट

गैस संकट की सबसे बड़ी मार बांग्लादेश के खाद उद्योग पर पड़ी है। देश की ऐतिहासिक और सबसे बड़ी ‘आशुगंज फर्टिलाइजर फैक्ट्री’ मार्च 2025 से पूरी तरह बंद पड़ी है। जहां कभी रोज 1,000 टन से ज्यादा यूरिया बनता था, वहां अब केवल जंग लगे ढांचे बचे हैं।

आशुगंज समेत देश के 6 प्रमुख यूरिया कारखाने या तो पूरी तरह बंद हो चुके हैं या क्षमता से बहुत कम पर काम कर रहे हैं। इससे 17 करोड़ की आबादी वाले इस देश के कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।

गारमेंट्स इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था को भारी झटका

बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) निर्यातक है, जो उसके कुल निर्यात राजस्व का लगभग 80% हिस्सा है। गैस की कमी के कारण सैकड़ों कपड़ा और टेक्सटाइल मिलें बंद होने के कगार पर हैं या अपने उत्पादन में भारी कटौती करने को मजबूर हैं। कारखाने बंद होने से हजारों मजदूरों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ रहा है।

घरों में चूल्हे ठंडे, बिजली गुल और सड़कों पर प्रदर्शन

गैस की कमी ने आम नागरिकों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पाइप से मिलने वाली घरेलू गैस का प्रेशर इतना कम है कि खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कई इलाकों में रात भर गैस का एक कतरा भी नहीं आता, जिससे लोग लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर हैं।

गैस से चलने वाले पावर प्लांट पूरी क्षमता से बिजली नहीं बना पा रहे हैं। देश में घंटों के पावर कट लग रहे हैं। सरकार ने मॉल और बाजारों को एक घंटा पहले बंद करने का आदेश जारी किया है।

सीएनजी (CNG) स्टेशनों पर घंटों इंतजार करने के बाद भी ईंधन न मिलने पर ऑटो और गैस-रिक्शा चालकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

आखिर क्यों पैदा हुआ यह महा-संकट?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ, बल्कि सालों की अनदेखी का नतीजा है। साल 2018 तक बांग्लादेश गैस के मामले में आत्मनिर्भर था, लेकिन पुराने गैस कुओं से उत्पादन घटता गया। पिछली सरकारों ने नए कुओं की ड्रिलिंग और खोज पर पर्याप्त निवेश नहीं किया। कतर और अन्य देशों से आने वाली LNG आपूर्ति मिडल ईस्ट में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण बुरी तरह बाधित हुई है।

क्या है आगे का रास्ता और समाधान?

ढाका यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी प्रोफेसर मो. अनवार हुसैन भुइयां के अनुसार, एक नए कुएं की ड्रिलिंग में $12-16 मिलियन का खर्च आता है, लेकिन उससे $4.5-4.9 अरब मूल्य की गैस निकल सकती है। सरकार ने नए ऑफशोर और ऑनशोर कुओं की नीलामी की योजना बनाई है।

पेट्रोबांग्ला के चेयरमैन मो. अब्दुल मन्नान के मुताबिक, गैस संकट का दीर्घकालिक और स्थायी समाधान ग्रीन व रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) की तरफ तेजी से कदम बढ़ाना ही है।

Skyways Air Services IPO: ₹583 करोड़ के इश्यू के​ लिए ₹131-₹138 है प्राइस बैंड, 24 अगस्त से लगा सकेंगे पैसे

मेनबोर्ड सेगमेंट में स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त को खुलने वाला है। कंपनी का इरादा ₹582.80 करोड़ जुटाने का है। इस इश्यू में ₹398.80 करोड़ के 2.89 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹184 करोड़ के 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर यशपाल शर्मा, तरुण शर्मा और निवेशक हिमांशु छाबड़ा, रोहित सहगल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹131-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है।

इश्यू की क्लोजिंग 27 अगस्त को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 28 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 1 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। IPO के लिए होलानी कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, शैनोन एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और दौलत फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है।

क्या करती है Skyways Air Services

स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड (SASL) एक जानी-मानी लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी है। एक फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी लॉजिस्टिक्स मैनेजर की तरह काम करती है। ऐसी कंपनी आमतौर पर खुद माल को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाती, बल्कि ग्राहक की ओर से माल ढोने की जगह (शिपमेंट स्पेस) बुक करती है, सीमा शुल्क की प्रक्रिया संभालती है और अलग-अलग परिवहन कंपनियों के जरिए माल को हवाई, समुद्री, सड़क या रेल मार्ग से पहुंचाने की व्यवस्था करती है।

SASL लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई तरह की सेवाएं देती है, जैसे कि एयर और ओशन फ्रेट फॉरवर्डिंग, ट्रकिंग, कस्टम्स ब्रोकिंग, वेयरहाउसिंग, टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक्सप्रेस कार्गो और पार्सल डिलीवरी, और अन्य वैल्यू-एडेड सेवाएं। कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति और ग्लोबल कनेक्टिविटी है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

SASL अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी Forin Container Line Pvt.Ltd. का कर्ज चुकाने के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Lumino Industries IPO: ₹700 करोड़ का एक और इश्यू, 27 अगस्त को ओपनिंग; ग्रे मार्केट में अभी से 56% चढ़ा शेयर

कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹174.54 करोड़ जुटाए। BSE पर अपलोड किए गए ​सर्कुलर के मुताबिक, SASL ने ₹138 प्रति शेयर के भाव पर 17 एंकर इनवेस्टर्स को 1.26 करोड़ शेयर एलोकेट किए। एंकर बुक में नोमुरा सिंगापुर, सिटी ग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरिशस, होलानी वेंचर कैपिटल फंड-I, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस और ASAS ग्लोबल फंड जैसे दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड और टॉरस एसेट मैनेजमेंट ने 6 स्कीम्स के जरिए निवेश किया। उन्हें ₹69.69 करोड़ के 50.5 लाख शेयर अलॉट किए गए।

कंपनी की वित्तीय सेहत

SASL का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 25 प्रतिशत बढ़कर ₹2,839.67 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹63.52 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹2,270.99 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹48.14 करोड़ रहा था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹624 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 26.81 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

तीनों ने ओढ़ रखी थी ‘WESTERN RAILWAY’ की चादर, बाजार में दिखे तो VIDEO हुआ वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने रेलवे की संपत्ति को लेकर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में तीन लोग बाजार में सफेद चादर को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि चादर पर साफ-साफ “WESTERN RAILWAY” लिखा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से वीडियो देखते ही लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें आखिर बाजार तक कैसे पहुंचीं। वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये चादरें रेलवे से चोरी की गई थीं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वायरल क्लिप के बाद लोगों ने रेलवे की संपत्ति के इस्तेमाल, यात्रियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे में बेडशीट, कंबल और अन्य लिनेन के गायब होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।

कैमरा घूमते ही दिखी रेलवे की पहचान

वीडियो को X पर @GemsOfRailway नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। फुटेज में तीनों लोग एक दुकान के बाहर नजर आते हैं और उनके शरीर पर सफेद रेलवे लिनेन लिपटा हुआ दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता सुनाई देता है कि इन लोगों ने Western Railway की चादरें चुराई हैं और अब उन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं। हालांकि, वीडियो में सिर्फ चादर पर रेलवे की मार्किंग दिखाई देती है; इन लोगों ने वास्तव में चादर चोरी की थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट से नहीं होती।

‘रेलवे की चादर’ बनी सोशल मीडिया की चर्चा

वीडियो के साथ किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं। इसी दावे के बाद लोगों का ध्यान रेलवे में लिनेन की कथित चोरी की समस्या की ओर भी गया। पोस्ट में RTI के आधार पर जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC कोचों से बेडरोल आइटम गायब होने के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया।

करोड़ों रुपये के लिनेन का नुकसान?

पोस्ट में साझा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में अलग-अलग रेलवे डिवीजनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी होने की बात कही गई है। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। दावे के मुताबिक, इन सामानों की कुल कीमत ₹104.51 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े पोस्ट में RTI डेटा के हवाले से दिए गए हैं।

लोगों ने कहा- ‘रेलवे को फैशन ब्रांड बना दिया’

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अंदाज में प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति के प्रति लापरवाही बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चादर को ऐसे पहना गया है जैसे वह किसी फैशन ब्रांड का हिस्सा हो। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि लोग “WESTERN RAILWAY” को ऐसे पहन रहे हैं जैसे कोई फैशन लेबल हो। वहीं कई अन्य लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान का मुद्दा उठाया।

असली सवाल सिर्फ चादर का नहीं

इस वायरल वीडियो ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है अगर सार्वजनिक संपत्ति लोगों के निजी इस्तेमाल में पहुंच रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और दूसरे लिनेन सार्वजनिक सुविधा का हिस्सा हैं। इनके गायब होने से सीधे तौर पर रेलवे के खर्च और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों और चादरों को लेकर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को दावे और आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न हो।

20 साल में एग्जिक्यूटिव ट्रेनी से DGM तक का सफर! गेल की तरक्की ने कैसे लंबे समय तक टिके एंप्लॉयी की जिंदगी बदली और मिला अवॉर्ड

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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