UP News: सरकारी स्कूलों के रसोइयों की सैलरी में ₹1000 की बढ़ोतरी, 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिड-डे मील’ योजना के तहत काम करने वाली रसोइयों के हित में चार अहम ऐलान किया है। योगी सरकार ने दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव लेने की अनिवार्य दो साल की उम्र-अंतर की शर्त खत्म कर दी है। यानी अब दोनों बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव ले सकेंगी। इसके अलावा करीब 3.5 लाख रसोइयों का मासिक मानदेय सितंबर से 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो साल में 10 महीने मिलेगा।

साथ ही योगी सरकार ने 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राज्य के मिड-डे मील प्रोग्राम के तहत काम करने वाले 3.54 लाख रसोइयों के लिए कैशलेस मेडिकल कार्ड शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने इस पहल को उनकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि स्कूल की रसोई में खाना बनाना सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह लाखों बच्चों की सेहत, शिक्षा और भविष्य में योगदान देता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3.54 लाख मिड-डे मील रसोइयों के लिए रविवार को कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

सीएम योगी ने रविवार को X पर लिखा, “रक्षाबंधन के पहले प्रदेश के रसोइयों हेतु चार उपहार…1- मानदेय में वृद्धि…2- दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता…3- प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार… 4- साड़ी के लिए धनराशि बढ़ाकर ₹1,000।” सीएम योगी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “रसोइयों का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर अब ₹3,000 कर दिया गया है..।”

मुख्यमंत्री ने ‘पीएम पोषण योजना’ के तहत रसोइयों के तौर पर काम करने वाली महिलाओं की तारीफ की। सीएम योगी ने उन्हें प्रोग्राम की ‘बुनियादी ताकत’ बताते हुए स्कूली बच्चों को खाना खिलाने में उनके योगदान का जिक्र किया।

उनके ट्वीट में लिखा, “हमारी रसोइया माताएं और बहनें, जो अपनी मेहनत और ममता से इस पवित्र काम को पूरा करती हैं, वे पीएम पोषण की असली बुनियादी ताकत हैं।” मंत्रिमंडल ने बुलंदशहर में नए बस अड्डों और अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग को चार लेन करने की संशोधित परियोजना को भी मंजूरी दी है।

जर्जर स्कूलों के वीडियो पर CM योगी का SP पर हमला

योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सोशल मीडिया पर प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों के वीडियो साझा कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इनमें से कई इमारतें 2017 से पहले की हैं, जब प्रदेश में सपा की सरकार थी।

लखनऊ में आयोजित ‘मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पुराने और जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित कर उन्हें नए भवनों से बदलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने भवनों की तस्वीरें और वीडियो दिखाकर मौजूदा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने कई पुराने और खराब हो चुके स्कूल भवनों को नए भवनों से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जो भवन अभी भी जर्जर स्थिति में हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था दोनों की स्थिति खराब थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में गरीबों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हुई तथा प्रदेश में दंगे और अव्यवस्था आम बात थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। सीएम योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षित भवन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM Poshan Yojana) के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऐलान भी किए। सीएम योगी ने कहा कि मिड-डे मील तैयार करने वाले रसोइये बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार उनके हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं है। बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों और रसोइयों के कल्याण पर भी सरकार का ध्यान है।

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FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। वहीं दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने सभी तरह के घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया है।

FSSAI ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

30 दिन के लिए लाइसेंस सस्पेंड

नई दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd के परिसर में निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां मिलीं। जांच में डिजाइन, ऑपरेशनल कंट्रोल, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने में खामियां पाई गईं।

इसके बाद FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। कंपनी को इस दौरान सभी खाद्य कारोबार रोकने और कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।

SDP Industries के सभी घी पर रोक

दमन की SDP Industries Pvt Ltd के खिलाफ FSSAI ने घी में मिलावट की आशंका के चलते प्रतिबंध आदेश जारी किया है।

जांच में कंपनी के Shraddha, Shree Saras और Gokul ब्रांड के कई घी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में घी के नमूनों में A-sitosterol मिला, जो घी में नहीं होना चाहिए। साथ ही फैटी एसिड की संरचना भी तय मानकों से अलग पाई गई।

FSSAI के मुताबिक इससे वनस्पति या दूसरे बाहरी फैट की मिलावट का संकेत मिला। कंपनी को अपने अधिकृत परिसर से बने, स्टोर किए गए या बेचे जाने वाले सभी घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है।

हाल में कई बड़ी कंपनियों पर भी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब FSSAI ने हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इनमें Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Mondelez India, Ferrero India समेत कई बड़े ब्रांड शामिल हैं।

ये नोटिस भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं।

Amazon, Flipkart और Domino’s भी कार्रवाई की जद में

FSSAI ने बताया कि Amazon और Flipkart को भी कुल 12 नोटिस जारी किए गए हैं। Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।

इसके अलावा KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee समेत 30 से ज्यादा फूड सर्विस कंपनियों को भी नोटिस मिले हैं। नियामक ने Domino’s के पांच लाइसेंस भी सस्पेंड किए हैं। FSSAI का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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अक्षय खन्ना शादी और बच्चों को ‘लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव’ मानते हैं, बोले- ‘मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं’

मशहूर स्टार अक्षय खन्ना ने खुलकर बताया है कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की। उनका कहना है कि बात कमिटमेंट की नहीं, बल्कि शादी के बाद जैसी ज़िंदगी जीनी पड़ती है, उसकी है। 2019 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि उन्हें अपनी पर्सनल ज़िंदगी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद है और वे इसे छोड़ना नहीं चाहते।

अक्षय खन्ना ने बताया कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की

जब अक्षय से पूछा गया कि क्या वे भविष्य में शादी करने के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे उस तरह की जिंदगी के लिए सही हैं। उन्होंने कहा कि शादी का मतलब होगा अपनी मौजूदा जीवनशैली में बड़े बदलाव करना और अपनी जिंदगी का कंट्रोल किसी और के साथ शेयर करना।

“मैं खुद को शादी करते हुए नहीं देखता, मैं शादी के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं उस तरह की ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। यह एक कमिटमेंट है, लेकिन जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव भी है। शादी सब कुछ बदल देती है। मैं अपनी ज़िंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जब आप किसी और के साथ अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं, तो आपका पूरा कंट्रोल नहीं रहता। आपको बहुत सारा कंट्रोल छोड़ना पड़ता है। आप एक-दूसरे की ज़िंदगी शेयर करते हैं।”

एक्टर से यह भी पूछा गया कि क्या शादी का फैसला उनके निजी स्वभाव की वजह से लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे कोई खास घटना या वजह नहीं थी और वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं, बचपन से ही।

उन्होंने बच्चे गोद लेने की बात भी खारिज कर दी

अक्षय से पूछा गया कि अगर वे शादी नहीं करते हैं तो क्या वे बच्चे गोद लेने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने वैसा ही जवाब दिया, यह कहते हुए कि वे बच्चों की परवरिश के साथ आने वाली जीवनशैली में बदलाव भी नहीं चाहते। “मैं उस ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। अपनी ज़िंदगी शेयर करने के लिए। चाहे शादी हो या बच्चे। वह भी आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देता है।

आपके लिए जो चीजें ज़रूरी होती हैं, वे कम जरूरी हो जाती हैं, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। उस तरह के बदलाव ज़िंदगी में आते हैं… और अपनी ज़िंदगी में उस तरह के बदलाव करना मैं नहीं चाहता। मैं समझौता करने को तैयार नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मैं ऐसा करने को तैयार होऊंगा।”

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के बाद, अक्षय खन्ना ‘इक्का’ में नज़र आए। उनका अगला प्रोजेक्ट ‘महाकाली’ है, जो प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। अक्षय इसमें शुक्राचार्य का किरदार निभा रहे हैं और इसकी पहली झलक 24 अगस्त, 2026 को दिखाई जाएगी।

Rohullah Mehdi Arrested: रोहुल्लाह मेहदी मुंबई ड्रग्स केस में गिरफ्तार, शाहिद कपूर की फिल्म ‘देवा’ में आ चुके हैं नजर

Rohullah Mehdi Arrested: सोशल मीडिया के ज़रिए चल रहे कथित ड्रग्स नेटवर्क के मामले में मुंबई के मीरा रोड इलाके के काशीमीरा में एक्टर और मॉडल रोहुल्लाह मेहदी को गिरफ़्तार किया गया है। काशीमीरा पुलिस क्राइम ब्रांच ने लगभग 5.60 लाख रुपये कीमत की 28 ग्राम MD ड्रग्स जब्त की और दो लोगों को गिरफ़्तार किया। FIR नंबर 437/2026 के मुताबिक, मेहदी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें स्नैपचैट, वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए MD ड्रग्स बेचे जाने की जानकारी मिली थी। इस जानकारी के आधार पर, अधिकारियों ने एक नकली ग्राहक का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कासिफ़ नाम के एक व्यक्ति को 28 ग्राम MD की डिलीवरी के लिए दहिसर चेक नाका इलाके में ठाकुर मॉल के पास बुलाया गया। पुलिस ने उसे कथित ड्रग डील के दौरान पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर मेहदी का नाम लिया।

जानकारी मिलने पर पुलिस ने मलाड में एक स्टूडियो के बाहर से मेहदी को गिरफ़्तार किया, जहां वह शूटिंग कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, मेहदी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले का रहने वाला है और मुंबई के गोरेगांव में रह रहा था। उसने शाहिद कपूर के साथ फ़िल्म ‘देवा’ में काम किया है और कई वेब सीरीज़ में भी नज़र आया है।

गिरफ़्तारी के बाद मेहदी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब कथित ड्रग नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेहदी ने किसे ड्रग्स सप्लाई किए होंगे। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री के और लोग भी इस मामले से जुड़े हैं।

यह ऑपरेशन DCP ज़ोन-1 राहुल चव्हाण की देखरेख में काशिमीरा पुलिस टीम ने चलाया। पुलिस ने कहा कि जांच चल रही है और और भी नाम सामने आ सकते हैं।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

FD vs SCSS: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसा कहां रखा जाए, जहां नियमित कमाई भी होती रहे और मूलधन भी सुरक्षित रहे। ऐसे में ज्यादातर लोग बैंक FD और सीनियर सिटिजंस रेविंग्स स्कीम (SCSS) के बीच उलझ जाते हैं।

अगर सिर्फ सुरक्षा देखें, तो SCSS आगे निकलती है। लेकिन कुछ बैंक ऐसी FD भी दे रहे हैं, जिनका ब्याज SCSS के बराबर या उससे थोड़ा ज्यादा है। ऐसे में फैसला सिर्फ ब्याज देखकर नहीं करना चाहिए।

एक नजर में FD vs SCSS

पैमानाSenior Citizen FDSCSS
ब्याज दरबड़े बैंकों में 7%-8%+, कुछ SFB में 8.3% तक8.20%
सुरक्षाDICGC बीमा ₹5 लाख तक
भारत सरकार की गारंटी

अवधिबैंक के हिसाब से
5 साल (3 साल बढ़ा सकते हैं)

अधिकतम निवेशकोई सीमा नहीं₹30 लाख
ब्याज भुगतानमासिक, तिमाही या मैच्योरिटी परहर तिमाही
टैक्स लाभ5 साल की टैक्स-सेविंग FD परधारा 80C के तहत पात्र

₹10 लाख पर किसमें कितना मिलेगा?

अब मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। सवाल यह है कि साल भर में जेब में कितना पैसा आएगा। यही तुलना सबसे साफ तस्वीर देती है।

विकल्पब्याज दरसालाना ब्याजहर तिमाही
SCSS8.20%₹82,000₹20,500
FD (7.5%)7.50%₹75,000₹18,750
FD (8%)8%₹80,000₹20,000
FD (8.3%)8.30%₹83,000₹20,750

यहां एक बात साफ दिखती है। अगर किसी छोटे फाइनेंस बैंक में 8.3% की FD मिल जाए, तो कमाई SCSS से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। लेकिन बड़े सरकारी और निजी बैंकों की ज्यादातर FD पर SCSS अब भी आगे है।

₹30 लाख पर कितनी होगी कमाई?

SCSS में एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है। अगर कोई पूरी रकम निवेश करता है, तो हर साल ₹2,46,000 ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में ₹61,500 खाते में आएंगे। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग इसे नियमित आय के लिए चुनते हैं।

सुरक्षा में कौन आगे?

यहीं सबसे बड़ा फर्क आता है। SCSS पूरी तरह भारत सरकार की गारंटी वाली योजना है। दूसरी तरफ बैंक FD में DICGC का बीमा सिर्फ ₹5 लाख तक मिलता है। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। अगर आपके पास बड़ी रकम है, तो सुरक्षा के लिहाज से SCSS ज्यादा मजबूत विकल्प माना जाता है।

टैक्स का क्या होगा?

दोनों में मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो दोनों योजनाएं धारा 80C के तहत टैक्स लाभ के लिए पात्र हो सकती हैं। हालांकि 80C की कुल सीमा अलग से लागू होती है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है, तो SCSS बेहतर विकल्प है। अगर आपको हर तीन महीने में तय आय चाहिए, तब भी SCSS मजबूत साबित होती है। वहीं ₹30 लाख से ज्यादा रकम निवेश करनी है, तो FD का सहारा लेना पड़ेगा। अगर किसी भरोसेमंद बैंक में SCSS से ज्यादा ब्याज वाली FD मिल रही है, तो उस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

आखिरी फैसला कैसे करें

अगर सवाल है कि सीनियर सिटिजन के लिए सबसे सुरक्षित और नियमित आय वाला विकल्प कौन सा है, तो SCSS बढ़त ले जाती है। इसमें 8.2% की सरकारी गारंटी वाली ब्याज दर मिलती है। हर तिमाही पैसा खाते में आता है। वहीं अगर लक्ष्य सिर्फ ज्यादा ब्याज पाना है, तो कुछ छोटे फाइनेंस बैंकों की FD थोड़ा बेहतर रिटर्न दे सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF vs NSC: ₹10 लाख के निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? समझिए 5 साल का पूरा गणित और टैक्स कैलकुलेशन

PPF vs NSC Investment Return Comparison: अगर आपके पास ₹10 लाख हैं और आप उसे अगले 5 सालों के लिए सरकारी गारंटी वाली स्कीम में बिना किसी रिस्क के जमा करना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे बेहतरीन जरिया हैं।

स्मॉल सेविंग्स में दो सबसे पसंदीदा विकल्प पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) हैं। चालू वित्त वर्ष (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) के लिए सरकार ने पीपीएफ की ब्याज दर 7.1% और एनएससी की ब्याज दर 7.7% पर बरकरार रखी है।

अगर आप ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो 5 साल में कहां ज्यादा फायदा मिलेगा? जानिए पूरी कैलकुलेशन।

₹10 लाख के निवेश पर 5 साल की कैलकुलेशन

अगर हम दोनों स्कीम्स में ₹10 लाख के कॉर्पस पर 5 साल के ग्रोथ की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:

PPF कैलकुलेशन (7.1% ब्याज): ₹10 लाख की जमा राशि 5 साल में 7.1% सालाना ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर लगभग ₹14,09,120 हो जाएगी। इसमें आपको 5 साल में करीब ₹4,09,120 का प्री-टैक्स ब्याज मिलेगा।

NSC कैलकुलेशन (7.7% ब्याज): ₹10 लाख का निवेश 5 साल में 7.7% की चक्रवृद्वि ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर ₹14,49,030 हो जाएगा। यानी 5 साल में करीब ₹4,49,030 का प्री-टैक्स मुनाफा होगा।

ध्यान रहे कि पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा करने की इजाजत है। इसलिए ₹10 लाख का यह आंकड़ा तुलनात्मक गणना के लिए 7.1% ब्याज के आधार पर दर्शाया गया है। NSC में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।

प्री-टैक्स रिटर्न में NSC आगे, लेकिन टैक्स का पेंच समझें

कागजों पर 5 साल में NSC, PPF की तुलना में सीधे तौर पर ₹39,910 का ज्यादा रिटर्न देता दिख रहा है। लेकिन असली गणित टैक्स Slab के बाद बदलता है:

PPF पर EEE स्टेटस: पीपीएफ पूरी तरह से ‘EEE’ कैटगरी में आता है। यानी जमा राशि, मिला हुआ ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पूरी तरह से टैक्स-फ्री होते हैं।

NSC पर टैक्स नियम: एनएससी से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। हालांकि, पहले 4 सालों के री-इन्वेस्टेड इंटरेस्ट पर सेक्शन 80C के तहत छूट क्लेम की जा सकती है, लेकिन आखिरी साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल रहता है। Higher Tax Slab वाले निवेशकों के लिए NSC का नेट रिटर्न कम हो सकता है।

मैच्योरिटी और लिक्विडिटी में कौन सा बेहतर?

NSC (5 साल का लॉक-इन): एनएससी की मैच्योरिटी ठीक 5 साल में पूरी हो जाती है। इसके अलावा, इसमें निवेश करते ही ब्याज दर पूरे 5 साल के लिए लॉक हो जाती है, जो मार्केट में ब्याज दरें घटने पर भी नहीं बदलती।

PPF (15 साल का लॉक-इन): पीपीएफ मूल रूप से 15 साल की लंबी अवधि की स्कीम है। हालांकि, इसमें 7वें साल से आंशिक निकासी और तीसरे साल से लोन की सुविधा मिलती है। पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है।

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?

अगर आपकी प्राथमिकता 5 साल की फिक्स्ड अवधि, गारंटीड रिटर्न और ज्यादा ब्याज दर है और आप लोअर टैक्स स्लैब में आते हैं तो NSC आपके लिए बेस्ट है। दूसरी ओर, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से टैक्स-फ्री फंड बनाना है, तो PPF से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करके दोनों स्कीम्स का सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

Ranveer Singh: ‘करियर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं’, रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ से पहले के मुश्किल दौर को किया याद

Ranveer Singh: रणवीर सिंह अपने करियर के उस मुश्किल दौर को याद कर रहे हैं, जो ‘धुरंधर’ की जबरदस्त सफलता से पहले आया था। एक्टर ने बताया है कि जब उनकी कुछ फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं, तब उन्हें जो सपोर्ट मिला, उसी की वजह से इस बड़े एक्शन फ़्रैंचाइजी के लिए उन पर जताया गया भरोसा और भी अहम हो गया।

खबरों के मुताबिक, दो हिस्सों वाली ‘धुरंधर’ फ़िल्म सीरीज ने दुनिया भर में थिएटर्स में रिलीज के दौरान 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की है। इस सफर के बारे में बात करते हुए, रणवीर ने जियो टीम और अंबानी परिवार को इस प्रोजेक्ट को पूरे भरोसे के साथ सपोर्ट करने का श्रेय दिया, जबकि इसमें बड़े पैमाने पर काम और कई जोखिम शामिल थे।

‘धुरंधर’ से पहले के मुश्किल दौर को याद करते हुए रणवीर सिंह

रणवीर ने रिलायंस की डॉक्यूमेंट्री ‘परवाह है तो परिवार है’ में इस फिल्म के बारे में बात की और माना कि ‘धुरंधर’ को बनाना बिल्कुल भी आसान काम नहीं था। मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर ने कहा, “‘धुरंधर’ को शुरू करना या उसे बनाना आसान नहीं था। इसमें कई चुनौतियां थीं।”एक्टर ने याद किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए इसमें शामिल लोगों को मजबूत सपोर्ट की जरूरत थी, क्योंकि टीम कुछ बहुत ही बड़े और महत्वाकांक्षी स्तर पर करने की कोशिश कर रही थी।

उन्होंने कहा कि “डंके के चोट पर अपने विश्वास के साथ वापस आना कि अगर यह सफल हुआ तो हम नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे,”। हालांकि, रणवीर के लिए यह समर्थन एक और कारण से महत्वपूर्ण था। यह ऐसे समय में मिला जब उनकी अपनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मुश्किल दौर से गुजर रही थी।

‘मेरी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं’

किसी फिल्म का नाम लिए बिना रणवीर ने स्वीकार किया कि धुरंधर से पहले उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए थे। मुझे यह कहना होगा कि मुझे उस समय भी पूरा प्यार, समर्थन और प्रोत्साहन मिला जब मेरी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं,”।

रणवीर ने आगे कहा कि एक अभिनेता के करियर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और उन्होंने उन सभी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस कठिन दौर में उनका साथ दिया। एक्टर ने कहा कि लेकिन इस तरह का समर्थन मिलना मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

इस जुड़ाव को एक सौभाग्य बताते हुए रणवीर ने कहा, “इससे जुड़ना किसी आशीर्वाद, सम्मान और सौभाग्य से कम नहीं है।” यह बात तब सामने आई है जब ‘धुरंधर’ ने रणवीर के बॉक्स-ऑफिस करियर की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। खबरों के मुताबिक, दो फिल्मों वाली इस एक्शन फ़्रैंचाइज़ी ने कुल मिलाकर 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की है और यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी थिएटर हिट फ़िल्मों में से एक बन गई है।

‘प्रलय’ के साथ प्रोड्यूसर बने रणवीर सिंह

‘धुरंधर’ की सफलता के बाद रणवीर अब एक और बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुके हैं। यह एक्टर अभी ‘प्रलय’ पर काम कर रहे हैं, जो जय मेहता के निर्देशन में बन रही एक सर्वाइवल ड्रामा फ़िल्म है। खबरों के अनुसार, फ़िल्म की कहानी भविष्य के मुंबई पर आधारित है, जहां एक जानलेवा महामारी के बाद ज़ॉम्बी का प्रकोप फैल जाता है। ‘प्रलय’ रणवीर के करियर का एक अहम पड़ाव भी है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के साथ वे प्रोडक्शन के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। वह कल्याणी प्रियदर्शन के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे, जिन्हें 2025 में ‘लोकाह चैप्टर 1 चंद्र’ के बाद काफी पहचान मिली थी। ‘प्रलय’ के बारे में और जानकारी अभी सामने नहीं आई है क्योंकि इसकी शूटिंग चल रही है।

रणवीर और दीपिका पादुकोण दूसरे बच्चे के माता-पिता बनने वाले हैं

यह एक्टर अपनी पर्सनल लाइफ में भी एक नए दौर में कदम रख रहा है। रणवीर और दीपिका पादुकोण फिर से माता-पिता बनने की तैयारी कर रहे हैं। दीपिका ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए यह खबर शेयर की, जिसमें उनकी बेटी दुआ भी नज़र आई। इस कपल ने 2024 में दुआ का स्वागत किया था।

1.6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ देखकर आप भी होंगे हैरान, लेकिन 25 साल के इस युवा की असली टेंशन कुछ और है

25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?

18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी

इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश

Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।

₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन

सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।

अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं

युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।

₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह

अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।

लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह

कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।

असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है

इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?

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