Tempsens Instruments IPO: खुलते ही छा गया यह IPO! 1 घंटे में फुल, लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे का बड़ा इशारा

Tempsens Instruments IPO: राजस्थान बेस्ड टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया के 650 करोड़ रुपये के आईपीओ को निवेशकों की तरफ से पहले ही दिन जबरदस्त रिस्पांस मिला है। 20 अगस्त को बोली खुलने के पहले ही घंटे में यह इश्यू 1.20 गुना सब्सक्राइब हो गया। ग्रे मार्केट में भी इसके अनलिस्टेड शेयरों की भारी डिमांड देखने को मिल रही है।

Tempsens Instruments IPO: सब्सक्रिप्शन स्टेटस

एनएससी (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ में ऑफर पर रखे गए 1,51,81,667 शेयरों के मुकाबले 1,89,88,300 शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी हैं:

गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 2.31 गुना सब्सक्रिप्शन

रिटेल निवेशक (RII): 1.50 गुना सब्सक्रिप्शन

₹650 करोड़ रुपये के इस कुल आईपीओ में ₹95 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹555 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। निवेशक इस आईपीओ में 24 अगस्त तक बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के लिए ICICI Securities और JM Financial बुक-रनिंग लीड मैनेजर के रूप में काम कर रहे हैं।

एंकर इन्वेस्टर्स से जुटाए ₹194.5 करोड़

आईपीओ खुलने से ठीक एक दिन पहले 19 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹194.5 करोड़ जुटाए। अरंडा इन्वेस्टमेंट्स और गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गज इंटरनेशनल फंड्स के साथ एचडीएफसी, निप्पॉन लाइफ, कोटक महिंद्रा और टाटा जैसे 8 डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स को भी शेयर अलॉट किए गए।

जुटाये गए पैसों का कहां होगा इस्तेमाल?

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹95 करोड़ में से ₹18.1 करोड़ का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक हीटिंग और केबल सॉल्यूशंस बिजनेस के कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए। ₹55 करोड़ कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम जनरल कॉर्पोरेट जरूरतों में इस्तेमाल होगी।

कंपनी की कमाई और बिजनेस प्रोफाइल

राजस्थान बेस्ड टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स टेम्परेचर सेंसर्स बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनी है। दुनिया भर में इसके 15 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं और भारत के टेम्परेचर सेंसर सेगमेंट में इसका 10.5% व नॉन-कॉन्टैक्ट टेम्परेचर सेंसर मार्केट में 21.3% मार्केट शेयर है।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY26 में इसका कुल रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹444.9 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹378.5 करोड़ था। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 11.2% की बढ़त के साथ ₹60.6 करोड़ से बढ़कर ₹67.3 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी को अपनी कुल कमाई का 71.5% हिस्सा घरेलू बाजार से और बाकी 28.5% हिस्सा एक्सपोर्ट्स से मिलता है।

GMP से तगड़ा लिस्टिंग गेन का इशारा

इन्वेस्टरगेन के अनुसार, Tempsens Instruments का शेयर ग्रे मार्केट में ₹220 के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर इसका अनुमानित लिस्टिंग प्राइस करीब ₹520 (₹300 + ₹220) बैठता है। इस हिसाब से निवेशकों को करीब 73% का लिस्टिंग गेन की संभावना है।

सब्सक्राइब करें या नहीं? जानें ब्रोकरेज की राय

दिग्गज ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी ने Tempsens Instruments के IPO को लंबी अवधि के नजरिए से ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक, ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर यह शेयर FY26 की कमाई के आधार पर 35.4x P/E और 25.64x EV/EBITDA के वैल्यूएशन पर उपलब्ध है।

कंपनी की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, टेम्परेचर सेंसर्स व केबल्स का डायवर्सिफाइड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में फैलता बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी सतर्क किया है कि अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन पूरी तरह से फेयरली प्राइज्ड नजर आ रहा है, लेकिन इसके लंबे समय के बिजनेस फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हैं।

SBI Securities ने भी Tempsens Instruments के IPO को लंबी अवधि के लिए ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर पोस्ट-इश्यू बेसिस पर कंपनी का वैल्यूएशन 37.3x FY26 P/E पर आंका है। ब्रोकरेज ने थर्मल इंजीनियरिंग सेगमेंट में कंपनी की मार्केट लीडरशिप, प्रोजेक्ट्स और मेंटेनेंस (MRO) के बीच बैलेंस रेवेन्यू मिक्स और FY24 से FY26 के बीच एक्सपोर्ट में मिली 46.5% की सालाना ग्रोथ को बड़ा पॉजिटिव बताया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

नेपाल में चीनी का रेट पहुंचा 120 रुपये किलो! समझिए दशैं-तिहार त्योहार से पहले नेपाली शुगर इंडस्ट्री क्यों दिख रही डंवाडोल

Price of sugar in Nepal: नेपाल के लोगों के लिए दशैं और तिहार जैसे बड़े हिंदू त्योहारों से पहले ही चीनी की मिठास जेब पर बहुत भारी पड़ने लगी है। नेपाल में चीनी की किल्लत रिपोर्ट की जा रही है। खुदरा बाजारों में जो चीनी अबतक 95-100 रुपये बिक रही थी, उसका रेट अब 120 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोग अगर बढ़ी हुई कीमतें चुकाने को तैयार हैं तो भी दुकानों पर चीनी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। नेपाल के न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट की मानें तो नेपाली सरकार इसे लेकर कोई ठोस कदम भी अबतक नहीं उठा पाई है।

आइए समझते हैं कि आखिर नेपाल में अचानक ये चीनी की क्राइसिस क्यों दिखने लगी है और क्या इसका भारत से भी कोई कनेक्शन है या नहीं?

तीन महीने में ही टूटा उद्योगपतियों का वादा, खाली हुए स्टॉक

‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की चीनी सप्लाई काफी हद तक पड़ोसी देश भारत पर निर्भर करती है। जब भारत ने बैशाख के अंतिम सप्ताह में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था तब से ही नेपाली बाजार में चीनी की भारी किल्लत की आशंका पैदा हो गई थी। उस समय नेपाल शुगर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि देश के भीतर चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की कोई बात नहीं है। एसोसिएशन ने यह भी कहा था कि फैक्ट्रियों के स्तर से चीनी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

उद्योगपतियों के इस आश्वासन के बाद बाजार में फैला डर कुछ हद तक शांत हुआ। सरकार ने भी घरेलू उत्पादन पर भरोसा जताते हुए आयात के फैसलों को आगे बढ़ा दिया। यह वादा तीन महीने से ज्यादा नहीं टिका। अब स्थिति यह है कि जेठ के महीने में पर्याप्त स्टॉक का दावा करने वाले उद्योगपति ही अब अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक बैठकों के दौरान उद्योगपति अब सीधे तौर पर कह रहे हैं कि उनके पास चीनी का स्टॉक समाप्त हो चुका है और अब उनके पास चीनी नहीं बची है।

आयात प्रक्रिया में देरी से पैदा हुआ डर

नेपाल के आयातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और देश के भीतर बढ़ती मांग के बीच तालमेल न बैठ पाने की वजह से ऐसा हो रहा है। अगर सरकार ने समय रहते चीनी आयात की अनुमति नहीं दी और कोटा प्रणाली को लेकर स्पष्ट नीतिगत फैसले नहीं किए तो त्योहारों के चरम पर बाजार में भारी किल्लत और कीमतों में प्रचंड उछाल देखने को मिल सकता है।

ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की बढ़ती कीमतों और कमोडिटी मार्केट में आई अस्थिरता की वजह से चीनी के दाम भी डॉलर में लगातार बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर भारत और अन्य देशों से नेपाल आने वाली चीनी पर पड़ रहा है। व्यवसायियों ने सरकार पर आयात प्रक्रिया में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। आयातकों का तर्क है कि जब भी बाजार में चीनी की कमी की अफवाहें या खबरें फैलती हैं तो उपभोक्ता और खुदरा व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर जमा करने लगते हैं।

भारत से G2G के जरिए 10,000 क्विंटल चीनी मंगाने की तैयारी

बाजार में गहराते संकट और लगातार मिल रही शिकायतों के बीच फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड त्योहारों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के साथ ‘G2G’ (सरकार से सरकार) माध्यम के जरिए 10000 क्विंटल चीनी आयात करने की अंतिम तैयारी में है।

ये भी पढ़ें- Sugar Price: त्योहारों से पहले चीनी की मिठास हुई महंगी और ‘कड़वी’, सरकार ने सख्त किए स्टॉक लिमिट के नियम

कंपनी के सूचना अधिकारी माधव मिश्रा के मुताबिक पहले चरण में 10,000 क्विंटल चीनी लाई जा रही है और यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह चीनी बहुत जल्द नेपालगंज सीमा पर पहुंच जाएगी। सरकारी स्तर पर यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को चीनी की किल्लत का सामना न करना पड़े।

रवि कुमार दिवाकर कौन हैं? यूपी के वो जज जिन्होंने 4 महीने में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई, उनसे 100 केस हटा लिए गए

Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की कोर्ट में ट्रांसफ़र किया गया है।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफ़र वकीलों और मुक़दमा लड़ने वालों की उस आशंका के बाद किया गया है कि कोर्ट मौत की सज़ा सुना सकती है। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट जज के पास हत्या के लगभग 100 मामले पेंडिंग थे। इस जज ने पिछले चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है। अब इन मामलों को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफ़र कर दिया गया है।

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि जिन मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद हो सकती है, उन्हें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हटाकर डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में भेज दिया गया। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि यह ट्रांसफर वकीलों और मुक़दमे से जुड़े लोगों की उस आशंका के बाद किया गया कि अदालत मौत की सज़ा सुना सकती है।

कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

जज रवि कुमार दिवाकर, जो अभी मुज़फ़्फ़रनगर की फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर तैनात हैं, चार महीनों में 10 मामलों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाने के बाद फिर से चर्चा में आए हैं। वह नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में तैनात हैं।

दिवाकर पहली बार 2022 में चर्चा में आए थे, जब वाराणसी में सिविल जज के तौर पर काम करते हुए उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफ़िक सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश ने उन्हें देश के सबसे ज़्यादा चर्चित कानूनी और धार्मिक विवादों में से एक का हिस्सा बना दिया।

उन्होंने 2009 में एडिशनल सिविल जज के तौर पर अपना न्यायिक करियर शुरू किया और उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में काम किया, जिनमें आज़मगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली शामिल हैं। मुज़फ़्फ़रनगर में उनके हालिया फ़ैसलों ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है। अप्रैल और अगस्त 2026 के बीच, उन्होंने हत्या, अपहरण और डकैती जैसे अपराधों से जुड़े 10 मामलों में मौत की सज़ा सुनाई। अदालत ने इनमें से कई मामलों को “दुर्लभतम से दुर्लभ” (rarest of rare) श्रेणी का माना।

लखनऊ के रहने वाले, 46 वर्षीय जज ने 2009 में आज़मगढ़ में एडिशनल सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी। इसके बाद मई 2015 में उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज और लगभग पांच महीने बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर पदोन्नत किया गया। जज दिवाकर, जिनके पास BCom और LLM की डिग्री है, नवंबर 2025 से मुज़फ़्फ़रनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के तौर पर काम कर रहे हैं।

10 मामलों में 22 मौत की सज़ाएं

2014 की हत्या के मामले में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 13 अगस्त को, शामली में पुरानी रंजिश से जुड़ी गोलीबारी की घटना में पवन कुमार की हत्या के लिए चार लोगों — रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार — को मौत की सज़ा सुनाई गई।

1999 में फिरौती के लिए हत्या में मौत की सज़ा- 12 अगस्त को शाहनवाज़ को 1999 में लकड़ी व्यापारी सलीम को 5 लाख रुपये की फिरौती के लिए अगवा करने और उसकी हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

2011 में किसान की हत्या में 4 लोगों को मौत की सज़ा- 17 जुलाई को शामली में 2011 में लूट की कोशिश के दौरान किसान राज सिंह की हत्या करने के आरोप में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

पूर्व ग्राम प्रधान को मौत की सज़ा- 6 जुलाई को पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उनके साथी सहदेव को 2010 में राजबीर सिंह की हत्या के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” (rarest of rare) मामला करार दिया।

होम गार्ड की हत्या के लिए मौत की सज़ा- 2 जुलाई को दीपक को 2020 में ड्यूटी पर तैनात होम गार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” मामला माना।

दो लोगों को मौत की सज़ा- 20 जून को गजेंद्र और रामकिरण को राजेंद्र सैनी की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई।

15 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में मौत की सज़ा- 30 मई को 50 वर्षीय रहीस को 2011 में एक महिला और उसके छह साल के बेटे की हत्या करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले को “दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ” माना।

महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा- 28 अप्रैल को 2019 के एक हत्या के मामले में एक महिला और उसके तीन बेटों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

वकील की हत्या में तीन लोगों को मौत की सज़ा- 6 अप्रैल को 45 लाख रुपये के पैसों के विवाद को लेकर 2019 में वकील मोहम्मद समीर को अगवा करने और उनकी हत्या करने के आरोप में तीन लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।

UP Board Exam 2027: नए पैटर्न का होगा यूपी बोर्ड 12वीं के छात्र का प्रश्न पत्र, 80 नंबर की लिखित परीक्षा में हर यूनिट से आएंगे सवाल

UP Board Exam 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में इंटरमीडिएट यानी 11वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की घोषणा की है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)-2023 और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र (PARAKH) की सिफारिशों के आधार पर नए सत्र से कक्षा 11 में लागू किया जाएगा। इसके तहत यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट कक्षा की लिखित परीक्षा 80 नंबरों की होगी, जबकि 20 नंबर आंतरिक मूल्यांकन के लिए होंगे।

वर्तमान में यूपी बोर्ड की 12वीं कक्षा में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान जैसे विषयों में 70-70 नंबर की लिखित और 30-30 नंबर की प्रायोगिक परीक्षा होती है। वहीं हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र जैसे गैर प्रायोगिक विषयों में 100-100 नंबर की लिखित परीक्षा होती है। लेकिन इन बदलावों के लागू होने के बाद अब गैर प्रायोगिक विषयों में भी 20-20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन और प्रायोगात्मक परीक्षा 30-30 अंकों की बजाय 20-20 नंबर की कराने का निर्णय लिया गया है। अगले शैक्षणिक सत्र से यह बदलाव कक्षा 11 से लागू करने की तैयारी है।

11वीं-12वीं के पेपर में होंगे 35% अनुप्रयोग आधारित प्रश्न

राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11 व 12 के लिए इतिहास, भूगोल, इकोनॉमिक्स और सिविक्स के सैंपल पेपर तैयार किए हैं। इनमें परख के सुझावों के अनुसार सबसे ज्यादा 35% अंकों के सवाल एप्लिकेशन बेस्ड होंगे। पहले यूपी बोर्ड में ज्ञान (20%), बोध (30%), एप्लिकेशन बेस्ड (30%) और कौशल (20%) के चार बिन्दुओं आधार पर प्रश्नपत्र सेट किया जाता था और मूल्यांकन होता था। मगर अब नए प्रश्नपत्र के जरिए ज्ञान (17.5%), बोध (17.5%), अनुप्रयोग (35%), विश्लेषण (22%), मूल्यांकन (4%) और सृजन (4%) छह मानकों के आधार पर छात्रों को परखा जाएगा।

हर यूनिट आएगा पेपर में सवाल

यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट के प्रश्नपत्र नए सिरे से तैयार किए जा रहे हैं। इसमें हर यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य किया गया है और हर यूनिट का वेटेज भी निर्धारित किया गया है। छात्रों के लिए हर यूनिट को पढ़ना जरूरी होगा, क्योंकि बाहरी विकल्प के प्रश्न पेपर में नहीं रखे गए हैं। वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या कम की गयी है। प्रत्येक विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प में रूप में प्रश्न दिए गए हैं जो उसी यूनिट, उसी उद्देश्य और उसी कठिनाई स्तर के होंगे। पेपर में दिए गए सवालों से छात्रों में मूल्यांकन करने की क्षमता, विश्लेषण एक सृजनात्मक शक्ति के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

NEET UG 2026 Counselling: जारी नहीं हुआ है नीट यूजी राउंड 1 काउंसलिंग रिजल्ट, एमसीसी 21 अगस्त को जारी करेगा मेरिट लिस्ट

Upper Circuit Stocks: Tata Motors PV से मिला नया बिजनेस, रॉकेट की स्पीड से अपर सर्किट पर पहुंचा यह शेयर

Upper Circuit Stocks: ऑटो कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट्स बनाने वाली कंपनी ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज के शेयर मार्केट की रौनक में आज उछलकर अपर सर्किट पर पहुंच गए। इसके शेयरों को टाटा ग्रुप से सपोर्ट मिला है। टाटा ग्रुप की टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स से इसे सप्लाई ऑर्डर के रूप में नया बिजनेस मिला तो इसके शेयरों की चमक बढ़ गई। जोश में उछलकर यह 5% के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि मार्केट में खरीदार रहे लेकिन कोई बेचने वाला नहीं। फिलहाल बीएसई पर यह ₹88.84 (Autoline Industries Share Price) के अपर सर्किट पर बना हुआ है। वहीं घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। सेंसेक्स चार कारोबारी दिन तो निफ्टी सात कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद आज मजबूत हुआ।

Tata Motors PV से कैसा ऑर्डर मिला है Autoline को

ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज ने एक कारोबारी दिन पहले इक्विटी मार्केट का कारोबार बंद होने के बाद शाम में एक्सचेंज फाइलिंग में टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स से मिले ऑर्डर की जानकारी दी। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक टाटा मोटर्स पीवी ने हैचबैक गाड़ियों के लिए चार जरूरी पार्ट्स की सप्लाई का इसे नया बिजनेस दिया है। इस बिजनेस से कंपनी को सालाना लगभग ₹80 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जबकि इससे जुड़े टूलिंग से लगभग ₹30 करोड़ का एक बार का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

कंपनी की बात करें तो पुणे की ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज का मुख्य काम शीट मेटल कंपोनेंट्स, एसेंबलीज और सब-एसेंबलीज बनाना है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फुट कंट्रोल मॉड्यूल्स पार्किंग ब्रेक्स, हिंग्स, एग्जास्ट सिस्टम्स, ट्यूब्यूलर स्ट्रक्चर्स और कई प्रकार शीट-मेटल स्टैंपिंग्स और वेल्डेड एसेंबलीज हैं। यह पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियों के लिए 3 हजार से अधिक अलग-अलग प्रोडक्ट्स बनाती है। इसका कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ और इसके पास 9 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज के शेयरों निवेशकों का पैसा रॉकेट की स्पीड से बढ़ाया है और महज कुछ महीने में निवेश दोगुना से अधिक हो गया। 30 मार्च 2026 को बीएसई पर यह महज ₹48.41 के भाव में मिल रहा था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से यह रॉकेट की स्पीड से रिकवर होकर 5 महीने में 114.52% मजबूत हुआ और 13 अगस्त 2026 को ₹103.85 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

1% प्राइस हाइक पर 1% उछल पड़ा शेयर, Maruti के बाद अब Hyundai की भी कारें होंगी महंगी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket Share Price: लगातार दूसरे दिन रॉकेट बने शेयर, IPO में निवेश का मौका चूक गए तो अब क्या करें?

Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयर 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन रॉकेट बन गए। कंपनी के शेयर 19 अगस्त को 35 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे। उसके बाद शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी थी। कारोबार खत्म होने पर शेयर करीब 48 फीसदी तेजी के साथ बंद हुए। आज यानी 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। खुलते ही शेयर करीब 8 फीसदी तक उछल गए। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:00 बजे शेयर 5.26 फीसदी चढ़कर 150.78 रुपये पर चल रहा था।

गोल्डमैन सैक्स की कंपनी ने किया बड़ा निवेश

Shiprocket के शेयरों में आज (20 अगस्त) को आई तेजी की वजह एक खबर है। खबर है कि गोल्डमैन सैक्स की कंपनी गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने शिपरॉकेट के 40,24,040 शेयर खरीदे हैं। यह ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 131 रुपये के प्राइस पर हुआ है। इससे लगातार दूसरे दिन शेयरों को पंख लग गए। जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे शेयरों में जबर्दस्त तेजी का जश्न मना रहे है।

आईपीओ को जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था

Shiprocket के आईपीओ को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट के संकेत के मुताबिक रही। कंपनी के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 36-37 फीसदी चल रहा था।

निवेशक शेयरों में कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं

आनंदराठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि शिपरॉकेट को इंडिया में ई-कॉमर्स ईकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस मार्केट में काफी प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ लिस्टिंग गेंस बुक कर सकते हैं। बाकी शेयर वे अपने पास रख सकते हैं। लंबी अवधि में शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है।

नए इनवेस्टर्स ‘वेट एंड वॉच’ की पॉलिसी अपना सकते हैं

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट महेश एम ओझा ने कहा कि जिन निवेशकों ने आईपीओ में अप्लाई नहीं किया था या जिन्हें अप्लाई करने के बाद भी शेयर एलॉट नहीं हुए, वे ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करो और देखो की पॉलिसी अपना सकते हैं। उन्हें अगली 1-2 तिमाही तक कंपनी के रिजल्ट्स को देखना चाहिए। रेवेन्यू ग्रोथ, ऑपेरेटिंग प्रॉफिट देखने के बाद ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो का इनवेस्टमेंट

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो के पैसे लगे हैं। शुरुआत में यह कंपनी शिपिंग सर्विस देती थी। अब इसका फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिससे जरिए यह डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स से लेकर MSME का शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है। इसके बिजनेस के दो सेगमेंट-कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस हैं।

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कंपनी कई तरह की शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है

कंपनी के कोर बिजनेस में डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग अप्लिकेशंस आते हैं। इमर्जिंग बिजनेसेज में कार्गो एंड फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग सॉल्यूशंस, कैपिटल सॉल्यूशंस और हायपर लोकल डिलीवरीज आती हैं। इकोनॉमिक एक्टिविटीज बढ़ने का फायदा कंपनी को मिलेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

 

Zerodha का बड़ा ऐलान: अब एक ही ऐप पर मिलेंगे शेयर और म्यूचुअल फंड, Kite में ही शुरू होगी डायरेक्ट SIP

Zerodha Kite Mutual Fund Trading: देश के सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स में शामिल जेरोधा ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा फैसला किया है। Zerodha बहुत जल्द अपने पॉपुलर स्टॉक ट्रेडिंग ऐप ‘Kite’ पर ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सुविधा देने जा रहा है। यानी अब निवेशकों को शेयर खरीदने और म्यूचुअल फंड/SIP में पैसा लगाने के लिए अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।

कंपनी के म्यूचुअल फंड हेड नीलेश वर्मा ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि अगले कुछ ही महीनों में यह नया फीचर Kite ऐप पर लाइव कर दिया जाएगा।

अभी क्या है व्यवस्था और क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

अब तक Zerodha अपने यूजर्स के लिए दो अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल करता रहा है:

Kite App: एक्टिव ट्रेडिंग और शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए।

Coin App: लॉन्ग-टर्म और पैसिव इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, NPS और FD के लिए।

फिलहाल, जब यूजर्स Kite ऐप पर म्यूचुअल फंड्स देखते हैं, तो उन्हें खरीदारी करने के लिए ऑटोमैटिकली Coin ऐप पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है। लेकिन Groww जैसे प्रतिस्पर्धी ब्रोकर्स द्वारा एक ही ऐप पर सभी सुविधाएं देने के कारण यूजर्स काफी समय से Zerodha से भी ‘ऑल-इन-वन ऐप’ की मांग कर रहे थे।

Kite ऐप में मिलेंगे 2 सबसे खास और नए फीचर्स

सिंगल ऐप एक्सपीरियंस: अब यूजर्स अपने इक्विटी पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड निवेश को एक ही स्क्रीन से मैनेज और ट्रैक कर पाएंगे।

पोर्टफोलियो इंपोर्ट करने की सुविधा: यूजर्स किसी दूसरे प्लेटफॉर्म (जैसे- Groww, PayTM Money आदि) पर चल रहे अपने पुराने म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स को भी आसानी से Zerodha Kite पर इंपोर्ट कर सकेंगे।

आपको बता दें कि Zerodha अपने ‘Coin’ ऐप को बंद नहीं करेगा। Coin ऐप पैसिव इन्वेस्टर्स के लिए अलग से काम करता रहेगा, लेकिन Kite यूजर्स को अब ऐप बदलने की मजबूरी नहीं होगी।

Zerodha के इस कदम के पीछे के आंकड़े

Zerodha के पास Coin ऐप पर लगभग 30 लाख म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स और 56 लाख से ज्यादा एक्टिव SIP अकाउंट्स हैं। एसेट अंडर मैनेजमेंट(AUM) के मामले में Coin देश का दूसरा सबसे बड़ा डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म है।

Kite App गूगल प्ले स्टोर पर 1 करोड़+ डाउनलोड्स है और करीब 65 लाख+ एक्टिव यूजर बेस है। वही Coin App के 50 लाख+ डाउनलोड्स और 30 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर है।

Kite का यूजर बेस Coin से दोगुना से भी ज्यादा है। ऐसे में Kite के भीतर ही म्यूचुअल फंड्स का विकल्प मिलने से Zerodha के म्यूचुअल फंड कारोबार में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही क्यों?

Zerodha अपने दोनों प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही ऑफर करता है। इसमें निवेशकों को कोई डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन या अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ता, जिससे लॉन्ग-टर्म में निवेशकों को रेगुलर फंड्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न (CAGR) मिलता है।

Groww और Zerodha के बीच म्यूचुअल फंड और SIP ग्राहकों को जोड़ने की होड़ में, Zerodha का यह ‘ऑल-इन-वन’ दांव मार्केट में उसकी पकड़ को और मजबूत कर सकता है।

NEET UG 2026 Counselling: जारी नहीं हुआ है नीट यूजी राउंड 1 काउंसलिंग रिजल्ट, एमसीसी 21 अगस्त को जारी करेगा मेरिट लिस्ट

NEET UG 2026 Counselling: नीट यूजी 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन करने और चॉइस लॉकिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद छात्र अब पहले राउंड के काउंसलिंग परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इस मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद छात्र अपने आवंटित कॉलेज या संस्थान में प्रवेश की प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे और अपनी सीट पक्की करेंगे। लेकिन मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) अंडरग्रेजुएट (UG) काउंसलिंग 2026 के पहले राउंड के रिजल्ट की तारीख बदलने का फैसला किया है।

नई घोषणा के अनुसार, नीट यूजी 2026 काउंसलिंग राउंड 1 का रिजल्ट अब 21 अगस्त को घोषित किया जाएगा। सीट आवंटन के बाद, अगर कैंडिडेट आवंटित सीट स्वीकार करते हैं, तो उन्हें 22 से 31, 2026 तक आवंटित संस्थान में रिपोर्ट करना होगा। नए कार्यक्रम के अनुसार, डेटा का वेरिफिकेशन 1 सितंबर को किया जाएगा। एमसीसी ने यह भी घोषणा की है कि राउंड 1 स्टेट काउंसलिंग प्रोसेस अब 27 अगस्त तक जारी रहेगा।

मेडिकल बॉडी ने कहा कि टाइम शेड्यूल का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित करने और काउंसलिंग आयोजित करने के लिए उपलब्ध सीमित समय को ध्यान में रखते हुए, सभी भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट और कॉलेजों को सभी शनिवार, रविवार और गजेटेड छुट्टियों को वर्किंग डे मानने का निर्देश दिया गया है। बदला हुआ काउंसलिंग शेड्यूल कमेटी की ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर उपलब्ध है। अगर किसी कैंडिडेट को सीट अलॉट हो जाती है, तो वे अपनी पसंद के हिसाब से अपना अलॉटमेंट फ्रीज या फ्लोट कर सकते हैं।

जो लोग सीट अपग्रेडेशन के लिए बाद के काउंसलिंग राउंड में हिस्सा लेने के लिए ‘फ्लोट’ ऑप्शन चुनते हैं, वे तय समयसीमा के अंदर ऑनलाइन मोड से दस्तावेज सत्यापन समेत प्रवेश की औपचारिकता पूरी कर सकेंगे। इस दौरान, उन्हें आवंटित किए गए संस्थान में फिजिकली रिपोर्ट करने, मूल दस्तावेज जमा करने या प्रवेश फीस देने की जरूरत नहीं होगी। इस साल लाए गए सुधारों के मुताबिक, जब तक वे बाद के काउंसलिंग राउंड में हिस्सा नहीं लेते, तब तक उनका अस्थायी प्रवेश वैध रहेगा।

आगे क्या?

अगर नीट यूजी काउंसलिंग राउंड 1 के बाद कोई सीट अलॉट नहीं होती है, तो कैंडिडेट नीट 2026 काउंसलिंग के अगले राउंड में हिस्सा लेने के लिए योग्य हो जाएंगे। अगर किसी कैंडिडेट को सीट अलॉट हो जाती है, तो वे अपनी पसंद के हिसाब से अपना अलॉटमेंट फ्रीज या फ्लोट कर सकते हैं। मेडिकल कमिटी के बताए गए नए नियमों के मुताबिक, अपग्रेडेशन चुनने वाले कैंडिडेट को फिजिकल रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं है।

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