HDFC Bank News: अनूप बागची के MD और CEO बनने से निवेशक खुश, HDFC बैंक का ADR 5% उछला

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC बैंक के ADR में करीब 5% की तेजी आई। RBI ने अनूप बागची को बैंक का नया MD और CEO बनाने की मंजूरी दे दी है। इसकी वजह से HDFC बैंक के ADR में तेजी दिखी है। यह अमेरिका में ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज हैं, जो HDFC Bank के भारतीय शेयरों को रिप्रेजेंट करती हैं। यह शुरुआती कारोबार में 23.55 डॉलर के हाई पर पहुंच गई, जो पिछले बंद के मुकाबले करीब 5.42% की तेजी दिखाती है।

बागची 27 अक्टूबर 2026 से जिम्मेदारी संभालेंगे। मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं मांगी थी। बागची का कार्यकाल तीन साल का होगा। वह 26 अक्टूबर 2029 तक MD और CEO रहेंगे। हालांकि, इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी।

निवेशकों को संबोधित कर सकते हैं बागची 

HDFC Bank 17 अक्टूबर को दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगा। माना जा रहा है कि इसी दौरान बागची और शशिधर जगदीशन निवेशकों को संबोधित कर सकते हैं। Moneycontrol को एक सूत्र ने बताया था कि इससे बैंक में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

ICICI Group में 30 साल से ज्यादा का अनुभव

अनूप बागची को ICICI Group में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने रिटेल और MSME बैंकिंग से लेकर कॉर्पोरेट बैंकिंग, ट्रेजरी और मार्केट्स में काम किया है। इसके अलावा वह क्रेडिट पॉलिसी और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े काम भी संभाल चुके हैं।

बागची ICICI Bank में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके हैं। वहां उन्होंने होलसेल बैंकिंग, ट्रांजैक्शन बैंकिंग और मार्केट्स का काम देखा। वह ICICI Securities के MD और CEO भी रह चुके हैं। फिलहाल बागची 2023 से ICICI Prudential Life के MD और CEO हैं।

ICICI Prudential Life में उत्तराधिकारी की तलाश

बागची के HDFC Bank जाने की संभावना पहले से ही काफी ज्यादा मानी जा रही थी। इसके चलते ICICI Bank ने अपनी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के लिए उत्तराधिकारी की तैयारी शुरू कर दी थी। ICICI Group में आमतौर पर बैंक के सीनियर अधिकारियों को ग्रुप की सब्सिडियरीज की जिम्मेदारी दी जाती है। हालांकि, इस बार बैंक बाहर से भी किसी अधिकारी को ला सकता है।

एक अधिकारी के मुताबिक ICICI Bank के बोर्ड में मौजूद कुछ होलटाइम डायरेक्टर्स अभी नए हैं। इनमें से कुछ को संदीप बख्शी के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में बागची की जगह भरने के लिए बैंक अपने बोर्ड के बाहर से भी किसी नाम पर विचार कर सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank Share Price : स्टॉक ने हिट किया 52 हफ्तों का नया लो, जानिए कब तक कायम रहेगा यह दबाव

HDFC Bank Share Price : एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज भी गिरावट देखने को मिल रही है। आज के कारोबारी सत्र में इसने 52 वीक का नया लो बनाया है। फिलहाल 12.45 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 6.15 रुपए यानी 0.84 फीसदी की कमजोरी के साथ 722 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 722 रुपए है। आज यह शेयर 729 रुपए पर खुला था। वहीं, कल की इसकी क्लोजिंग भी 729 रुपए ही थी। टेक्निकल नजरिए से देंखें तो इस स्टॉक में नेगेटिव प्राइस ब्रेकआउट देखने को मिला है। यह अभी अपने दूसरे सपोर्ट लेवल (S2) से नीचे ट्रेड कर रहा है। इसका दूसरा सपोर्ट लेवल ₹733.10 पर है।

एक्सचेंज पर उपलब्ध आंकड़ो से पता चलता है कि HDFC बैंक के शेयर अपने पिछले निचले स्तर ₹726.75 से भी नीचे गिर गए हैं, जो इसने 2 अप्रैल, 2026 को छुआ था। यह स्टॉक मई 2024 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसने 23 अक्टूबर, 2025 को ₹1,020.35 का 52-हफ़्ते का हाई छुआ था।

कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक, BSE सेंसेक्स में 8.2 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, इसी अवधि में HDFC बैंक में 27 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे में इसका प्रदर्शन बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है।

FPIs ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाई

एचडीएफसी बैंक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम की है। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2026 तिमाही के आखिर में HDFC बैंक में FPI की हिस्सेदारी घटकर 41.83 फीसदी हो गई, जो मार्च 2026 तिमाही के आखिर में 44.05 फीसदी थी। दिसंबर 2025 तिमाही में इस प्राइवेट सेक्टर के बैंक में FPI की हिस्सेदारी 47.67 फीसदी थी और सितंबर 2025 तिमाही के आखिर में यह 48.39 फीसदी थी।

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बढ़ाई हिस्सेदारी

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जून तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 41.9 फीसदी कर दी। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तिमाही के अंत में उनकी हिस्सेदारी 36.3 फीसदी थी। इंडिविजुअल पब्लिक शेयरहोल्डरों ने भी HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इनकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 15.6 फीसदी और दिसंबर 2025 तिमाही के अंत के 15.1 फीसदी से बढ़कर 16.3 फीसदी हो गई है।

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स्टॉक में क्यों आ रही गिरावट?

बैंक के मार्जिन पर शॉर्ट-टर्म दबाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से इस शेयर पर दबाव बना है। इस साल अब तक यह स्टॉक में 27 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। बाजार जानकारों का कहना है कि बैंक के NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) में रिकवरी और फंड की लागत कम होने पर ही इसमें फिर से तेजी आ सकती है। DII की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी से FPI की बिकवाली को कुछ हद तक संतुलित करने में सहायता मिली है। लेकिन स्टॉक में हो रही गिरावट को रोकने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। अगर बैंक के मार्जिन पर दबाव बना रहता है और फंड की लागत कम नहीं होती तो आगे भी स्टॉक पर दबाव बना रहेगा।

शेयर की चाल पर एक नजर

इस स्टॉक में लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दोनों ही नजरिए से बाजार को निराश किया है। पिछले 1 हफ्ते में इसमें 1.57 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं, 1 महीने में यह शेयर 12.30 फीसदी टूटा है। 3 महीने में इसमें 3.6 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है। वहीं, इस साल अब तक इसमें 27 फीसदी की गिरावट आई है। 1 साल में यह शेयर 26.53 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसमें 10.62 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है।