UPAVP दे रहा दिवाली पर सस्ता घर खरीदने का मौका, गाजियाबाद में पाएं ₹29.83 लाख में 1-BHK फ्लैट

दिवाली के मौके पर अगर आप दिल्ली-NCR में अपना घर खरीदने का सपना पूरा करना चाहते हैं, लेकिन बजट ज्यादा नहीं है, तो गाजियाबाद की ब्रह्मपुत्र एन्क्लेव हाउसिंग स्कीम आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) की इस योजना में रेडी-टू-मूव 1-BHK फ्लैट 29.83 लाख रुपये से शुरू हो रहे हैं। यानी आप बिना निर्माण पूरा होने का इंतजार किए अपने घर में शिफ्ट होने की योजना बना सकते हैं।

यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार में स्थित है। योजना के तहत कुल 277 फ्लैट रखे गए थे, जिनमें से अब 57 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। सभी फ्लैट का क्षेत्रफल 47.73 वर्ग मीटर है, जबकि इनकी कीमत 29.83 लाख रुपये से 36.40 लाख रुपये के बीच है।

पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर फ्लैट बुकिंग

यहां फ्लैट की बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर ऑनलाइन की जा रही है। सिद्धार्थ विहार से NH-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मिलती है। ऐसे में दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में काम करने वाले लोगों के लिए यह लोकेशन उपयोगी हो सकती है। हालांकि, घर खरीदने से पहले अपने ऑफिस की दूरी और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय का आकलन जरूर करें।

इस प्रोजेक्ट का UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर UPRERAPRJ7935 है। फ्लैट बुक करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर यह जरूर देख लें कि कौन-से फ्लैट उपलब्ध हैं, शुरुआत में कितनी रकम देनी होगी और बाकी भुगतान कब तक करना है। इसके अलावा, बुकिंग रद्द करने और पैसे वापस मिलने से जुड़ी शर्तों को भी अच्छी तरह समझ लें।

फ्लैट पसंद आने के बाद उसका नंबर और फ्लोर देखने के साथ पानी-बिजली की सुविधा, हवा और रोशनी आने की व्यवस्था और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूर करें। इससे बाद में होने वाली परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।

निवेश से पहले आसपास की प्रॉपर्टी की कीमतें जरूर जांचें

अगर आप इस फ्लैट को निवेश के मकसद से खरीद रहे हैं, तो फैसला लेने से पहले आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों और किराये की मांग का भी पता लगाएं। भविष्य में फ्लैट को बेचने पर कितनी कीमत मिल सकती है, इसका भी अंदाजा लगाएं। ध्यान रखें कि सरकारी हाउसिंग स्कीम या अच्छी कनेक्टिविटी होने भर से प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने या मुनाफा मिलने की गारंटी नहीं होती।

फ्लैट की उपलब्धता, कीमत और बुकिंग से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए UPAVP की आधिकारिक पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।

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Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन भी चांदी गिरी, जानिए आपके आपने शहर का ताजा भाव

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन भी चांदी की कीमतो में गिरावट देखने को मिली। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। उधर गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमत 2,40,000 रुपये प्रति किलो हो गई।

आज बाजार ओपन होने से पहले तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 1.24% घटकर यानी 2805 रुपये गिरावट के साथ 2,22,950 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,25,755 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियंस के मुताबिक चांदी की कीमत 2,23,280 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60.37 डॉलर प्रति औंस हो गई।

औद्योगिक मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव, ये सभी घरेलू स्तर पर चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। स्थानीय बाज़ार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं।

आइए 13 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में चांदी की ताजा कीमतों पर एक नज़र डालते हैं

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹ 2,39,900
मुंबई₹ 2,39,900
कोलकाता₹2,39,900
चेन्नई₹2,44,900
लखनऊ₹2,39,900
पटना₹2,39,900
जयपुर₹2,39,900
अहमदाबाद₹2,39,900
पुणे₹2,39,900
बेंगलुरु₹2,39,900
हैदराबाद₹2,39,900
भोपाल₹2,39,900
चंडीगढ़₹2,39,900
नोएडा₹2,39,900
गुरुग्राम₹2,39,900

चांदी में गिरावट क्यों

डॉलर मजबूत होने की वजह से चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आ पा रही है। वहीं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर है, जिनसे यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों में क्या बदलाव कर सकता है।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 18 महीने के ऊंचे स्तर पर है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित हो रही है। सोने और चांदी की कीमतों पर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। वहीं, ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय ऐसे विकल्पों में पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं, जिनसे ब्याज मिलता है।

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो दो सप्ताह के ऊंचे स्तर के करीब है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकता है।

अब कहां रखें नजर

आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व के बयान, डॉलर की चाल और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरें सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले सप्ताह फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची ब्याज दरों से सोने-चांदी पर दबाव पड़ा था। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत में प्रगति से जुड़ी टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार के माहौल में सुधार आया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए ठीक-ठाक संकेत नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 1800 करोड़ की बिकवाली हुई है। डाओ फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त है। उधर कल US इंडेक्स मिले-जुले रहे। लेकिन एशिया में कमजोर कारोबार होता दिख रहा है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

अनुमान के आसपास रहे HCL टेक के नतीजे

दूसरी तिमाही में HLC टेक के नतीजे अनुमान के आसपास रहे। रेवेन्यू में तीन तो मुनाफे में 11% की बढ़त दिखी। मार्जिन का आंकड़ा उम्मीद से अच्छा रहा। Advanced AI से रेवेन्यू 29% बढ़कर 219 मिलियन डॉलर पर रही। कंपनी ने पूरे कारोबारी साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस का लोअर रेंज 1%-4% से बढ़ाकर 2.5%-4% कर दिया है।

RBL Bank के Q2 नतीजे अच्छे

दूसरी तिमाही में RBL Bank ने अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा करीब तीन गुना हो गया है। ब्याज से होने वाली कमाई में 37 परसेंट का उछाल आया है। एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा है।

ICICI प्रू लाइफ, टाटा एलेक्सी के नतीजे आज

आज वायदा में शामिल ICICI प्रूडेंशियल लाइफ और Tata elxsi के नतीजे आएंगे। दूसरी तिमाही में ICICI Pru life का annual premium equivalent यानी APE 18% बढ़ सकता है। वहीं VNB मार्जिन में भी सुधार दिख सकता है। वहीं टाटा Tata elxsi के मुनाफे में तीन परसेंट तो रेवेन्यू में दो परसेंट की बढ़त संभव है।

TVS ग्रुप में पारिवारिक विवाद

TVS ग्रुप में उत्तराधिकार प्लान पर विवाद शुरू हो गया है। परिवार ओनरशिप और मैनेजमेंट के अधिकारों पर आमने-सामने है। मां मल्लिका श्रीनिवासन और बेटी लक्ष्मी वेणु ने सेटलमेंट का प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा है कि 2024 का फैमिली MOU कोई आर्थिक समझौता नहीं है। परिवार की सभी संपत्तियां कोई एक आदमी नहीं बांट सकता।

23 महीने के ऊपरी स्तर पर रिटेल महंगाई

रिटेल महंगाई 23 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर में CPI महंगाई 4.83% से बढ़कर 5.54% पर रही है। खाने-पीने की चीजों के साथ ग्रामीण और शहरी महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

कच्चे तेल में उबाल, 106 डॉलर के करीब

जियो पॉलिटिकल संकट गहराने से कच्चे तेल में उबाल आया है। इसके भाव 106 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रुस के यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रा पर हमले से कीमतों में उछाल आया है। हॉर्मूज संकट और हूती-सऊदी के बीच घमासान ने भी सेंटिमेंट खराब किए हैं।

मार्केट ओवरव्यू

पिछले सेशन में रिकवरी के बाद,12 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क पर फिर से बिकवाली का दबाव दिखा। IT, FMCG और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट के बीच निफ्टी 22,300 के स्तर की ओर फिसल गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत गिरकर 71,924.68 पर और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,363.35 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी बढ़त के साथ 22,415.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

इस साल मार्केट के सबसे चर्चित सेक्टर में से एक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों पर नतीजों के सीज़न से पहले फिर से दबाव बना है,जिससे एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है।

दक्षिण कोरिया और जापान में शेयरों में गिरावट के कारण MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.9% गिर गया है और अगस्त के मध्य के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है।

AI ट्रेड का पैमाना माने जाने वाले कोस्पी इंडेक्स में 4.8% तक की गिरावट आई है और यह जुलाई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है,क्योंकि चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों SK Hynix Inc. और Samsung Electronics Co. के शेयरों में 5% से ज़्यादा की गिरावट आई। टोक्यो में ट्रेडर्स के लंबे वीकेंड के बाद लौटने पर निक्केई 225 इंडेक्स में 2% की गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को नैस्डैक कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी वजह सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर हमले के बाद तेल की कीमतों में लगभग $2 प्रति बैरल की बढ़ोतरी रही।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 195.60 अंक या 0.38% बढ़कर 51,850.55 पर बंद हुआ। S&P 500 में 4.30 अंक या 0.06% की गिरावट आई और यह 7,807.24 पर बंद हुआ,जबकि नैस्डैक कंपोजिट 120.27 अंक या 0.44% गिर कर बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

12 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने 1,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा देना जारी रखा और सेशन के दौरान 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर खरीदे।

 

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 13 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

आप और लेफ्ट के सहारे प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रदर्शन वैसे तो कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से हो रहा है लेकिन असल में इस प्रदर्शन में उनका कुछ भी नहीं है। सारी तैयारी लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के नेता कर रहे हैं। यह ध्यान रखने की जरुरत है कि इस बार का प्रदर्शन जून और जुलाई में हुए प्रदर्शन से बहुत अलग है। उस समय नीट पेपर लीक से प्रभावित 24 लाख छात्र और उनके परिवार के लोग आंदोलन से जुड़े थे और साथ ही हर परिवार की सहानुभूति उस आंदोलन के साथ थी। जो जंतर मंतर नहीं पहुंच रहा था उसका भी भावनात्मक जुड़ाव उस प्रदर्शन से था। इस बार का प्रदर्शन प्रभावित यानी पीड़ित पक्ष का नहीं है। यह थर्ड पार्टी प्रदर्शन है। पार्टियों द्वारा प्रायोजित है। इसमें ऐसा नहीं हो रहा है कि जिनके नाम कटे हैं वे लोग हजारों या लाखों की संख्या में सड़क पर उतर रहे हैं।

यह स्वंयस्फूर्त आंदोलन नहीं है। इसके लिए लोगों को मोबाइलाज करना पड़ रहा है। वह काम करने के लिए न तो अभिजीत दीपके और उनकी चार लोगों की टीम के पास कोई संगठन है और न कोई सलाहियात हैं। पता नहीं है कि उनको ऑनलाइन या दूसरे माध्यम से कितना पैसा मिला है। लेकिन यह पता है कि उनके पास कोई संगठन नहीं है। जबकि प्रोटेस्ट मोबिलाइज करना बहुत मुश्किल काम होता है वह भी तब जब मुद्दा सीधे आम लोगों को प्रभावित करने वाला नहीं हो। यह काम आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कर रही हैं। राजधानी दिल्ली में भी लेफ्ट पार्टियों के छात्र संगठनों के पास बड़ा कैडर है और आप के पास संसाधन है। आप को चार महीने में पंजाब और गोवा का चुनाव भी लड़ना है। इसलिए आप और लेफ्ट अपने संगठन और संसाधन से लोगों को मोबिलाइज कर रहे हैं और सीजेपी को उसका श्रेय मिल रहा है।

सनातन धर्म में गिरावत, विकृति की वजह

मनुस्मृति 1/91 से यह विचार भी सामने आता है कि जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को ऊंचा या नीचा नहीं माना जाना चाहिए। शिक्षा के अवसर सभी को मिलने चाहिए। लेकिन महाभारत के युद्ध के बाद समाज को व्यवस्थित करने वाली वर्ण व्यवस्था में बदलाव आने लगा। जो वर्ण व्यवस्था पहले योग्यता और कर्म के आधार पर निर्धारित होती थी, वह धीरे-धीरे जन्म आधारित व्यवस्था में बदलने लगी। वर्ण भी पैतृक संपत्ति की तरह पिता से पुत्र को मिलने लगा। इसी परिवर्तन ने समाज में ऊंच-नीच की भावना को बढ़ावा दिया।

द्वापर युग में महाभारत के युद्ध से पहले ही ब्राह्मणत्व का ह्रास शुरू हो गया था। ब्राह्मण अपने मूल कर्तव्यों से दूर होने लगे थे। वे गुरुकुलों को छोड़कर राजकुमारों को पढ़ाने के लिए राजमहलों और उनके घरों तक जाने लगे थे। दूसरी ओर राजाओं और राजकुमारों में उच्छृंखलता बढ़ रही थी। वे धर्म, राज्य और शासन की अपने ढंग से व्याख्या करने लगे थे। जरासंध जैसे राजा चक्रवर्ती सम्राट बनने की महत्वाकांक्षा में निर्दोष राजाओं और उनके राजवंशों को समाप्त करने के प्रयास में लगे हुए थे।

महाभारत के युद्ध के बाद केंद्रीय सत्ता के अभाव में इन प्रवृत्तियों को और बढ़ने का अवसर मिला। राजनीतिक अस्थिरता ने वैदिक धर्म के ह्रास और उसमें विकृतियां पैदा होने की परिस्थितियां बनाईं। महाभारत के युद्ध में केवल बड़ी संख्या में मनुष्यों का ही संहार नहीं हुआ, बल्कि अनेक विद्वानों और मनीषियों की मृत्यु के साथ ज्ञान-विज्ञान, कला और कौशल की परंपराओं को भी भारी क्षति पहुंची।

आपसी फूट के कारण कौरवों, पांडवों और यादवों का विनाश हुआ। लेकिन आपसी फूट का वही रोग आज भी भारतीय समाज में बना हुआ है। पता नहीं इस भयंकर रोग से कब मुक्ति मिलेगी या यह भारतीयों को सुख-शांति से वंचित कर दुख के सागर में डुबोता रहेगा। आज भी हिंदू समाज का एक बड़ा हिस्सा आपसी फूट और संघर्ष के उसी रास्ते पर चलता दिखाई देता है, जिस पर दुर्योधन चला था। लोग अपने ही समाज और देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

भारतीय प्राचीन शास्त्रों के अध्येताओं के अनुसार स्वायंभुव मनु से लेकर पांडवों तक आर्यों का चक्रवर्ती राज्य रहा। इसके बाद आपसी विरोध और संघर्ष के कारण उनका पतन शुरू हुआ। दूसरे शब्दों में कहें तो इस देश को जितना नुकसान गृहकलह ने पहुंचाया, उतना शायद किसी एक अन्य कारण ने नहीं पहुंचाया।

इसका परिणाम यह हुआ कि देश का पूरा वातावरण सनातन वैदिक जीवन मूल्यों के ह्रास और उनमें विकृतियां पैदा होने का कारण बनने लगा। राजनीतिक पराजय ने केवल क्षत्रियों के पराक्रम और शक्ति को ही कमजोर नहीं किया, बल्कि भारतीय चिंतन, आत्मगौरव, अस्मिता और आत्मसम्मान की भावना को भी गहरी चोट पहुंचाई।

चारों ओर से आक्रमणों और संकटों से घिरे भारतीय इतने भयभीत और असुरक्षित महसूस करने लगे कि उन्होंने अपने धर्म और समाज की रक्षा के लिए अपने चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाने का प्रयास किया। उद्देश्य था कि सनातन वैदिक धर्म सुरक्षित बना रहे। यह उपाय कुछ हद तक कारगर भी हुआ, लेकिन इसका एक दूसरा परिणाम निकला। भारतीय समाज धीरे-धीरे अपने धर्म के मूल स्रोत वेदों से ही दूर होता चला गया। वेदों का नाम तो लोगों को मालूम था, लेकिन उनके ज्ञान और शिक्षाओं से उनका संबंध कमजोर पड़ता गया।

स्थिति यहां तक पहुंची कि जो ब्राह्मण वर्ग कभी वेदों को अपना सर्वस्व मानता था, वह भी वेदों और उनके वास्तविक अर्थों से अपरिचित होने लगा। दुख की बात है कि आज भी वेदों के वास्तविक ज्ञाता विद्वानों की कमी बनी हुई है। यही देश की अवनति और पतन का एक प्रमुख कारण है।

वैदिक मान्यता के अनुसार ब्राह्मण वह है जो वेदों का ज्ञाता हो, स्वार्थ से मुक्त हो, परमात्मा के तत्व को समझता हो, विशाल हृदय वाला हो और सबके कल्याण की कामना करता हो। जो भेदभाव से ऊपर उठकर समाज का मार्गदर्शन करे, वही ब्राह्मण कहलाने का अधिकारी है।

लेकिन दुर्भाग्य से विद्या और ज्ञान के आधार पर ब्राह्मण कहलाने की परंपरा धीरे-धीरे जन्म के आधार पर ब्राह्मण होने की व्यवस्था में बदल गई। कुछ लोगों ने केवल जन्म के आधार पर स्वयं को ब्राह्मण घोषित करना शुरू कर दिया। यह धारणा भी प्रचारित की गई कि ब्राह्मण के मुख से निकला वचन स्वयं भगवान का वचन है और जो ब्राह्मण से विरोध करता है, उसका नाश हो जाता है। ‘ब्रह्मवाक्यं जनार्दनः’ और ‘ब्रह्मद्रोही विनश्यति’ जैसे कथन इसी धारणा के प्रतीक हैं। इन कथनों का अपना धार्मिक संदर्भ हो सकता है, लेकिन जब इन्हें उनके मूल संदर्भ से अलग करके स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया गया तो इनसे समाज में अनेक बुराइयां पैदा हुईं।

इस प्रकार वैदिक ज्ञान से दूर हो चुके स्वार्थी और अशिक्षित तथाकथित ब्राह्मणों ने भारतीय समाज की सोचने-समझने की शक्ति को कमजोर किया। उन्होंने ज्ञान पर अपना अधिकार बनाए रखने का प्रयास किया और दूसरे वर्गों को शिक्षा से वंचित रखा।

इसके पीछे उनका स्वार्थ था। अशिक्षित व्यक्ति को भ्रमित करना आसान होता है। उसे अपने हित में इस्तेमाल करना भी सरल होता है। इसलिए दूसरे वर्गों को शिक्षित होने से रोकने की प्रवृत्ति बढ़ी। इसका सबसे अधिक प्रभाव क्षत्रियों पर पड़ा, क्योंकि उस समय राजसत्ता उन्हीं के हाथों में थी। धर्म और ज्ञान के क्षेत्र में मर्यादाओं का इससे बड़ा उल्लंघन क्या हो सकता था?

जिस समाज को कभी गुण, कर्म और योग्यता के आधार पर ब्राह्मणत्व प्राप्त करने वाले विद्वानों ने उन्नति के शिखर तक पहुंचाया था, उसी समाज को जन्म के आधार पर ब्राह्मण होने का दावा करने वालों ने संकट में डाल दिया।

दोनों में बुनियादी अंतर था। पहले ब्राह्मणत्व का आधार गुण, कर्म, ज्ञान और योग्यता थी। बाद में जन्म को ही उसका आधार बना दिया गया। पहले साधना और अध्ययन जरूरी थे, बाद में बिना साधना के भी जन्म के आधार पर श्रेष्ठता का दावा होने लगा।

किसी समाज को आगे बढ़ाने का मूल आधार साधना, परिश्रम और योग्यता है। लेकिन आज समाज को इस रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा और मार्गदर्शन देने वालों की कमी दिखाई देती है।

वैदिक काल में धर्म का एक प्रमुख आधार यज्ञ था। शतपथ ब्राह्मण 1/5/1/7 में कहा गया है, ‘यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म।’ अर्थात यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञ का उद्देश्य एक ओर पर्यावरण की शुद्धि माना गया था तो दूसरी ओर वह व्यक्ति की आध्यात्मिक साधना का माध्यम भी था। लेकिन समय के साथ यज्ञ की परंपरा में भी विकृतियां पैदा होने लगीं।

वाममार्गियों ने यज्ञ में पशुबलि की प्रथा शुरू की। जबकि निरुक्त 2/11 के अनुसार यज्ञ को ‘अध्वर’ अर्थात अहिंसक कहा गया है। स्वार्थ और मांसाहार की इच्छा से प्रेरित लोगों ने वेद मंत्रों की अपने अनुकूल व्याख्या की। उन्होंने पशुबलि ही नहीं, बल्कि गौबलि और नरबलि जैसी प्रथाओं को भी धार्मिक कर्मकांड का हिस्सा बना दिया।

वैदिक ग्रंथों में गाय को ‘अघ्न्या’ कहा गया है। अर्थात जिसे मारा नहीं जाना चाहिए। ऋग्वेद 10/87/16 का उल्लेख करते हुए लेखक पशुबलि, गौबलि और नरबलि के निषेध की बात करता है।

यः पौरुषेयेण क्रविषा समङ्क्ते यो अश्वेन पशुना यातुधानः।

यो अघ्न्याया भरति क्षीरमग्ने तेषां शीर्षाणि हरसापि वृश्च।

समाज में शिक्षा और वैदिक ज्ञान की कमी के कारण लोगों को भ्रमित करना आसान हो गया था। इसका लाभ उन पुरोहितों ने उठाया जो अपनी इच्छाओं और स्वार्थ के अनुसार धार्मिक कर्मकांडों की व्याख्या करने लगे थे।

इस तरह यज्ञ जैसी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा पशुबलि जैसी प्रथाओं से विकृत होने लगी। पशुहिंसा को यज्ञ का आवश्यक हिस्सा बताने वाले लोग आज तक यह सिद्ध नहीं कर पाए कि किसी जीव की बलि देकर उसे स्वर्ग पहुंचाया जा सकता है। वे न तो अपने प्रियजनों को मारकर स्वर्ग भेज सके और न ही यज्ञ की वेदी पर किसी मृत व्यक्ति को फिर जीवित कर सके।

इससे लेखक यह निष्कर्ष निकालता है कि पशुबलि का औचित्य सिद्ध करने वाले विधान स्वार्थी पुरोहितों ने अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बनाए थे।

महर्षि दयानंद सरस्वती ने भी यज्ञ में पशुबलि और पशुहत्या का पूरी तरह निषेध किया था। उनके अनुसार अश्वमेध, गोमेध और नरमेध का अर्थ घोड़े, गाय या मनुष्य की बलि देना नहीं है। उनकी व्याख्या में राष्ट्र की उन्नति और अभिवृद्धि के लिए किए जाने वाले कार्य अश्वमेध हैं। अन्न की अभिवृद्धि से जुड़े कार्य गोमेध हैं और मनुष्य का अंतिम संस्कार नरमेध है। लेकिन वैदिक ज्ञान से दूर होते जाने के कारण समय के साथ यज्ञ की मूल भावना विकृत होती गई।

महर्षि दयानंद की तरह गौतम बुद्ध ने भी सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने यज्ञ में पशुबलि और हिंसा की प्रथाओं को स्वीकार नहीं किया। जब पशुबलि को वेदों के अनुकूल बताया गया तो गौतम बुद्ध वेदों की प्रामाणिकता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हुए।

वैदिक धर्म की एक प्रमुख विशेषता एकेश्वरवाद रही है। वेदों में एक परमेश्वर की महिमा का वर्णन मिलता है। ऋग्वेद 1/164/46 के अनुसार इंद्र, मित्र, वरुण आदि उसी एक प्रकाशस्वरूप परमात्मा के नाम हैं। इसी मंत्र में कहा गया है कि सत्य एक है, लेकिन विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।

‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति।’

ऋग्वेद 10/114/5 में भी इसी विचार को व्यक्त किया गया है।

‘एकं सन्तं बहुधा कल्पयन्ति।’

अर्थात एक ही तत्व की अनेक रूपों में कल्पना की जाती है। कठोपनिषद में भी एक परमात्मा के अनेक रूपों में प्रकट होने का विचार मिलता है।

‘एको वशी सर्वभूतान्तरात्मा एकं रूपं बहुधा यः करोति।’

आचार्य यास्क ने भी इस विचार का समर्थन किया। उनके अनुसार एक ही देवता अपने ऐश्वर्य और गुणों के कारण अनेक रूपों में स्तुति का विषय बनता है।

‘महाभाग्याद् देवताया एक आत्मा बहुधा स्तूयते।’ निरुक्त 7/4

इसी प्रकार शतपथ ब्राह्मण 14/7/2/22 में कहा गया है।

मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति।

मनसैवानुद्रष्टव्यमेतदप्रमेयं ध्रुवम्।

इसका आशय है कि जो परम सत्य को अनेक अलग-अलग रूपों में देखता है, वह जन्म-मृत्यु के चक्र में पड़ा रहता है। परम तत्व को मन और आत्मज्ञान से समझना चाहिए, क्योंकि वह अत्यंत सूक्ष्म और स्थायी है।

इस प्रकार वैदिक ग्रंथों में ईश्वर की अवधारणा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की गई है। लेकिन समय के साथ यह धारणा मजबूत होती गई कि देवता एक नहीं, बल्कि अनेक हैं। इस विचार को बढ़ावा देने में वेदों की कर्मकांड आधारित व्याख्याओं की भी भूमिका रही। अलग-अलग देवताओं की स्तुति और उनके अलग नामों के कारण यह धारणा बनने लगी कि सभी देवता स्वतंत्र और अलग-अलग अस्तित्व रखते हैं।

आचार्य यास्क जैसे विद्वानों ने भी कुछ सीमा तक देवताओं के अलग-अलग स्वरूपों की व्याख्या स्वीकार की थी। लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न देवताओं के स्वतंत्र व्यक्तित्व, चरित्र और धार्मिक परंपराएं विकसित होने लगीं। इससे वैदिक धर्म की एकेश्वरवाद की मूल भावना कमजोर हुई। इसका प्रभाव हिंदू समाज की एकता पर भी पड़ा।

जो समाज पहले एक परमात्मा की अवधारणा से जुड़ा हुआ था, उसमें अलग-अलग देवताओं और आस्थाओं के आधार पर समुदाय बनने लगे। विभिन्न समूहों के अपने-अपने आराध्य और धार्मिक केंद्र हो गए। परिणामस्वरूप समाज अनेक संप्रदायों में बंटता चला गया।

वैदिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन समाज में व्यक्ति का वर्ण उसके गुण और कर्म के आधार पर निर्धारित होता था। ‘वर्ण’ शब्द की उत्पत्ति ‘वृ’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ वरण करना या चुनना है। इसका आशय यह है कि वर्ण जन्म से अपने आप प्राप्त नहीं होता था, बल्कि व्यक्ति को अपनी योग्यता और कर्म के आधार पर उसे प्राप्त करना पड़ता था।

वर्ण कोई पैतृक संपत्ति नहीं थी जो पिता से पुत्र को विरासत में मिल जाए। उसे विद्या की तरह अध्ययन, परिश्रम और साधना से प्राप्त करना होता था। जैसे किसी योग्य और विद्वान पिता का पुत्र केवल जन्म लेने से पिता की विद्या और योग्यता प्राप्त नहीं कर सकता, उसे स्वयं अध्ययन और परिश्रम करना पड़ता है। उसी प्रकार वर्ण की योग्यता भी व्यक्ति को स्वयं अर्जित करनी होती थी।

यह एक न्यायसंगत व्यवस्था थी, क्योंकि इसमें जन्म के बजाय व्यक्ति की योग्यता और कर्म को महत्व दिया गया था।

मनुस्मृति में वर्णों के लिए बताए गए कर्म भी इसी विचार की पुष्टि करते हैं। मनुस्मृति के पहले अध्याय में चारों वर्णों के कार्यों का वर्णन मिलता है। मनुस्मृति 1/88 के अनुसार ब्राह्मण का प्रमुख कार्य अध्ययन और अध्यापन करना, यज्ञ करना और कराना तथा पूरे समाज को अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना था। समाज के कल्याण की चिंता करना भी उसका कर्तव्य था।

मनुस्मृति 1/89 के अनुसार क्षत्रिय का कार्य अध्ययन करने के साथ देश की बाहरी और आंतरिक शत्रुओं से रक्षा करना तथा राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखना था।

मनुस्मृति 1/90 के अनुसार वैश्य का कार्य अध्ययन के अलावा पशुपालन, कृषि, व्यापार, उद्योग और दूसरे आर्थिक कार्यों के माध्यम से संपत्ति अर्जित करना था।

शूद्र का कार्य अन्य तीन वर्णों की सेवा, सहायता और श्रम से जुड़े काम करना माना गया था।

मनुस्मृति 1/91 से यह विचार भी सामने आता है कि जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को ऊंचा या नीचा नहीं माना जाना चाहिए। शिक्षा के अवसर सभी को मिलने चाहिए। वेदों का ज्ञान और विद्या पूरे समाज के लिए उपलब्ध होने चाहिए। लेकिन महाभारत के युद्ध के बाद समाज को व्यवस्थित करने वाली वर्ण व्यवस्था में बदलाव आने लगा।

जो वर्ण व्यवस्था पहले योग्यता और कर्म के आधार पर निर्धारित होती थी, वह धीरे-धीरे जन्म आधारित व्यवस्था में बदलने लगी। अब व्यक्ति का वर्ण उसके गुण, कर्म और विद्या से तय होने के बजाय परिवार और जन्म से निर्धारित होने लगा। वर्ण भी पैतृक संपत्ति की तरह पिता से पुत्र को मिलने लगा।

इस परिवर्तन ने समाज में ऊंच-नीच की भावना को बढ़ावा दिया। जन्म के आधार पर श्रेष्ठता और हीनता की धारणाएं मजबूत होने लगीं। गौतम धर्मसूत्र जैसे ग्रंथों के अध्ययन से पता चलता है कि बाद के समय में शूद्रों को समाज में निम्न स्थान दिया जाने लगा था।

गौतम धर्मसूत्र 1/1 के अनुसार उन्हें वेद पढ़ने और यज्ञ करने के अधिकार से वंचित रखा गया। कई स्मृति और सूत्र ग्रंथों में शूद्रों के उपनयन संस्कार का विधान भी नहीं मिलता।

उस समय उपनयन संस्कार शिक्षा प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण शर्त माना जाता था। इसलिए उपनयन के अधिकार से वंचित होने का अर्थ शिक्षा के अवसरों से भी वंचित होना था। वर्णों के आधार पर दंड व्यवस्था में भी भेदभाव होने लगा। एक जैसा अपराध करने पर अलग-अलग वर्णों के लोगों को अलग-अलग दंड दिए जाते थे।

इस प्रकार समय के साथ न समाज में सभी वर्णों की स्थिति समान रही और न ही उनके लिए कानून और दंड की व्यवस्था समान रही। जो वर्ण व्यवस्था मूल रूप से समाज के संगठन, विभिन्न कार्यों के संचालन और सभी के विकास के उद्देश्य से बनाई गई थी, वह धीरे-धीरे ऊंच-नीच और जन्म आधारित भेदभाव की व्यवस्था में बदल गई। यही सनातन वैदिक धर्म में ह्रास और विकृति का एक बड़ा कारण बना।

Andhra Pradesh: डिवाइडर से टकराई EV, धू-धू कर जली कार, चार लोगों की जिंदा जलकर मौत

आंध्र प्रदेश के NTR जिले में विजयवाड़ा वेस्ट बाईपास पर सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। विजयवाड़ा वेस्ट बाईपास पर एक इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) डिवाइडर से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गई। इस हादसे में तीन साल के बच्चे समेत चार लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कार में सवार लोग गुंटूर जिले के नंबुरु गांव में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। ये एक्सीडेंट शाम करीब 6 बजे हुआ।

हादसे में 4 लोगों की हुई मौत

हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान विजयवाड़ा के नुन्ना इलाके के रहने वाले 39 वर्षीय कोम्मारेड्डी रामदेव के रूप में हुई है। उनके साथ उनकी 65 वर्षीय मां कोम्मारेड्डी अरुणा और 30 वर्षीय बहन तिगुरु विजया की भी मौत हो गई। दोनों महिलाएं गुंटूर जिले के नंबुरु की रहने वाली थीं। हादसे में एक बच्चे की भी जान चली गई, जिसकी पहचान फिलहाल नहीं हो सकी है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का इलाज जारी है।

कुछ ही देर में फैल गई आग

हादसे से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार को आग की तेज लपटों में घिरा देखा जा सकता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, तेज रफ्तार कार सड़क के किनारे लगे डिवाइडर या रेलिंग से टकरा गई, जिसके बाद उसमें आग लग गई। आग कुछ ही समय में पूरी गाड़ी में फैल गई और अंदर बैठे चार लोग बाहर नहीं निकल सके। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।  हादसे में घायल हुए पांचवें व्यक्ति को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई है।

पुलिस कर रही मामले की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड ने कार में लगी आग बुझाई, जबकि पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुट गई। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में कार की तेज रफ्तार को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसा कैसे हुआ और टक्कर के बाद कार में आग किस वजह से लगी, इसका पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

गोल्ड-सिल्वर या इक्विटी? त्योहारी सीजन में कैसे करें ₹10 लाख का निवेश, फंड मैनेजर से जानिए सटीक रणनीति

Gold vs Equity Investment: किसी भी निवेशक से पैसा निवेश करते समय सबसे बड़ी गलती ये होती है कि वे पिछले सालों में शानदार रिटर्न देने वाले एसेट में ही आगे भी बढ़त की उम्मीद करने लगते हैं। साल 2024 के बाद से सोना और चांदी ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं, जबकि शेयर बाजार में लंबा करेक्शन देखने को मिला है।

12 अक्टूबर 2026 तक, सोना लगभग ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इतनी बड़ी तेजी के बाद अब कीमती धातुओं में टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है। इसका मतलब है कि कीमतें तेजी से ऊपर जाने के बजाय लंबे समय तक एक सीमित दायरे में रह सकती हैं।

इन्हीं सब अनिश्चितताओं के बीच इस त्योहारी सीजन में नया पैसा कहा-किसमें लगाए इस लेकर काफी कन्फ्यूजन है। 129 वेल्थ एंड रिसर्च एनालिस्ट और पॉल एसेट में फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल से समझते हैं इस इस समय क्या हो निवेश की रणनीति।

गोल्ड-सिल्वर बनाम इक्विटी: नया पैसा कहां लगाएं?

गोल्ड: अनिश्चितता से बचाव के लिए पोर्टफोलियो में सोने का होना जरूरी है।

सिल्वर: इंडस्ट्रीज में डिमांड का फायदा मिलता है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है।

रणनीति: ऑल-टाइम हाई के आसपास सोना-चांदी में एकमुश्त बड़ा निवेश करने में अब बहुत ज्यादा फायदा नहीं है।

प्रसेनजीत पॉल का मानना है कि, मेटल्स के उलट, इक्विटी में जोखिम के मुकाबले रिटर्न का अवसर बेहतर नजर आ रहा है। निफ्टी 9 अक्टूबर 2024 के 24,981 के स्तर से गिरकर 9 अक्टूबर 2026 को 22,520 पर आ गया, जबकि इसका P/E मल्टीपल 23.48 से घटकर 19.20 गुना हो गया है। वैल्युएशन अब काफी वाजिब और आकर्षक हो चुकी है।

बाजार अक्सर आर्थिक आंकड़ों में सुधार दिखने से पहले ही रिकवर करना शुरू कर देते हैं। अगले दो सालों में इक्विटी का प्रदर्शन कीमती धातुओं से बेहतर रह सकता है। निवेशक नए पैसे को 3 से 4 किस्तों में बांटकर इक्विटी में निवेश कर सकते हैं।

मॉडरेट-रिस्क निवेशकों के लिए ₹10 लाख का पोर्टफोलियो एलोकेशन

अगर आप मध्यम जोखिम वाले निवेशक हैं, तो ₹10 लाख की पूंजी को इस तरह बांट सकते हैं:

मॉडरेट-रिस्क निवेशकों के लिए ₹10 लाख का पोर्टफोलियो एलोकेशन

आपको बता दें कि यह प्रस्तावित पोर्टफोलियो एलोकेशन एक उदाहरण है और इसे निवेशक के मौजूदा पोर्टफोलियो, वित्तीय जिम्मेदारियों और समय सीमा के अनुसार एडजस्ट किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, नए निवेश के लिए हमारी पहली पसंद इक्विटी है, स्थिरता के लिए हाई-क्वालिटी फिक्स्ड-इनकम एसेट्स और डायवर्सिफिकेशन के लिए सोना-चांदी में एक सीमित हिस्सा रखना चाहिए।

क्या हो निवेशक की मूल सोच?

फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल के मुताबिक, निवेश का नियम बेहद सीधा है- ‘जब बाजार में डर हो तब खरीदें और जब लालच हो तब बचें’। इसका मतलब बॉटम या टॉप का अंदाजा लगाना नहीं है, बल्कि सिर्फ इसलिए किसी एसेट में नहीं फंसना है क्योंकि उसने बीते दिनों में असाधारण रिटर्न दिए हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

2026 में त्योहारों के मौसम में घर खरीदना: खरीदार स्थिर होम लोन ब्याज दरों का बेहतर लाभ कैसे उठा सकते हैं?

Bajaj Finance Home Loan: स्थिर ब्याज दरें त्योहार के मौसम में खरीदारी की योजना बनाना आसान बना सकती हैं, लेकिन फैसला आपकी आर्थिक क्षमता के आधार पर ही होना चाहिए। बुकिंग करने से पहले अपनी ईएमआई, लोन की अवधि और कुल कर्ज लागत की जांच करें।

घर खरीदने का फैसला अक्सर एक योजना के रूप में शुरू होता है और सही समय आने पर यह एक ठोस निर्णय मेंबदल जाता है। कई परिवारों के लिए नवरात्रि ऐसा ही समय होता है, जब त्योहार की खुशी के साथ लंबे समय सेसोची जा रही घर खरीदने की योजना पर आगे बढ़ने का मन बनता है।

वित्तीय स्थिति भी फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने अगस्त2026 में रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, जिससे कर्ज लेने वालों को वित्तीय योजना बनाने के लिए एक स्थिर आधार मिला है। लेकिन शुभ तारीख फैसले का आधार नहीं, सिर्फ उसका एक हिस्सा होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्णयह है कि संपत्ति आपकी बजट सीमा में हो और उसकी मासिक किस्तें चुकाने के बाद आपके पास अन्य जरूरतों केलिए पर्याप्त पैसा बचा रहे।

स्थिर ब्याज दर का माहौल इस फैसले को आसान बना सकता है, क्योंकि इससे मासिक किस्त और कर्ज की लागतका अनुमान लगाना अधिक आसान हो जाता है। घर बुक करने से पहले यह जरूर देखें कि आपको कितना कर्ज लेनाहै, आपकी आर्थिक स्थिति के अनुसार कर्ज की कितनी अवधि सही रहेगी और कुल मिलाकर आप पर कितना वित्तीयबोझ पड़ेगा।

आपके घर की खरीदारी के लिए त्योहारी समय का क्या मतलब है?

नवरात्रि को परंपरागत रूप से बड़ी खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है और इसका सांस्कृतिक महत्व भी है। डेवलपरऔर कर्ज देने वाली कंपनियां भी इस दौरान विशेष ऑफर ला सकती हैं। अगर आपको ऐसा कोई ऑफर मिलता है, तो सिर्फ बड़े दावे पर ध्यान देने के बजाय वास्तविक बचत देखें और अंतिम कीमत व शर्तों की तुलना सामान्य कीमतोंसे जरूर करें।

सीधी बात यह है: समय यह तय करने में मदद कर सकता है कि आप खरीदारी कब करें, लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि आप इसे खरीदने का खर्च उठा सकते हैं या नहीं।

ब्याज दरें आपकी खरीदारी की क्षमता को कैसे प्रभावित करती हैं?

होम लोन की ब्याज दरें मासिक किस्त और लोन की पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल राशि को प्रभावित करतीहैं। ब्याज दर में मामूली अंतर, जैसे 0.25% कम दर, 20-25 वर्षों में आपकी कुल भुगतान राशि को काफी कम करसकता है।

आपकी खरीदारी के लिए वही ब्याज दर महत्वपूर्ण है, जो आपके लोन पर लागू होती है। बजाज फाइनेंस होम लोनकी ब्याज दरें 7.25%* प्रति वर्ष से शुरू होती हैं, जो आपकी प्रोफाइल और अन्य कारकों पर निर्भर करती हैं।

आपका मासिक बजट कितना खर्च संभाल सकता है?

हर महीने आप जितनी ईएमआई आसानी से चुका सकते हैं, उसके आधार पर आगे की गणना करें। ईएमआई कैलकुलेटर में तीन चीजें डालनी होती हैं: मूलधन, ब्याज दर और लोन की अवधि। इससे आपको मासिक किस्त, लोन की पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल राशि और भुगतान की पूरी योजना का अनुमान मिल सकता है।

अपनी अधिकतम पात्रता से शुरुआत करने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को आजमाएं। कम राशि को कम अवधिमें लेने की तुलना अधिक राशि को लंबी अवधि में लेने से करें और देखें कि दोनों विकल्प आपके नकदी प्रवाह औरलोन की कुल लागत को कैसे प्रभावित करते हैं।

क्या ईएमआई को प्रबंधीय बनाए रखने के लिए आपको लंबी अवधि चुननी चाहिए?

यह फैसला आपकी मासिक किस्त और लोन की कुल लागत के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। कम अवधि कामतलब आम तौर पर ज़्यादा किस्त होता है, लेकिन सालों-साल ब्याज कम देना पड़ता है; वहीं, लंबी अवधि सेमासिक भुगतान कम हो जाता है, लेकिन कुल ब्याज अधिक चुकाना पड़ता है।

सही अवधि आपके नकदी प्रवाह और इस बात पर निर्भर करती है कि आप अतिरिक्त कितना भुगतान कर सकते हैं।लोन की अवधि तय करने से पहले बजाज फाइनेंस की वेबसाइट पर होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का इस्तेमालकरके कई विकल्पों की तुलना करें।

ब्याज दर के अलावा आपको किन बातों की तुलना करनी चाहिए?

मुख्य बताई गई दर महत्वपूर्ण है, लेकिन शुल्क, लचीलापन और अन्य शर्तें कुल लागत को प्रभावित करती हैं। अगरब्याज दर फ्लोटिंग है, तो यह भी समझें कि वह किस बेंचमार्क से जुड़ी है और उसमें बदलाव होने पर आपके भुगतानपर क्या असर पड़ेगा।

क्या देखें क्या जांचें
प्रोसेसिंग शुल्कलागू शुल्क और GST की जांच करें और इसे शुरुआती लागत में शामिल करें
ब्याज दर की संरचनासमझें कि यह फ़िक्स्ड, फ़्लोटिंग या बेंचमार्क-लिंक्ड है या नहीं
दर में बदलाव की शर्तेंबेंचमार्क से जुड़े लोन के लिए, देखें कि ब्याज दर में बदलाव कब और कैसे आप परअसर डालेगा
समय से पहले भुगतान की शर्तेंलोन का कुछ हिस्सा पहले चुकाने और पूरा लोन समय से पहले चुकाने की शर्तों को जांचें
अन्य शुल्ककानूनी, तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य संबंधित शुल्कों की जांच करें

बुकिंग करने से पहले फैसला लेने का आसान तरीका

एक बार जब आप किसी संपत्ति को चुन लेते हैं:

1. कुल खरीद लागत तय करें: कीमत, डाउन पेमेंट और उपलब्ध बचत में से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल की जासकने वाली राशि की पुष्टि करें।

2. कर्ज की जरूरत तय करें: उपलब्ध धनराशि के बाद आपको कितने कर्ज की जरूरत है, इसका हिसाबलगाएं।

3. ईएमआई की जांच करें: ईएमआई कैलकुलेटर में अनुमानित कर्ज राशि, ब्याज दर और पसंदीदा अवधिडालें, फिर देखें कि क्या किस्त आपकी मौजूदा देनदारियों के हिसाब से ठीक है।

4. कुल लागत की तुलना करें: अलग-अलग समय-सीमा, चुकाए जाने वाले ब्याज, शुल्क और समय से पहलेभुगतान की शर्तों की तुलना करें।

जब ये सभी आंकड़े सही बैठें, तब आप तय कर सकते हैं कि त्योहार का यह समय घर खरीदने के लिए सही है यानहीं।

बजाज फाइनेंस होम लोन आपकी योजना में कैसे फिट हो सकता है?

बजाज फाइनेंस वेतनभोगी आवेदकों के लिए 15 करोड़ रुपये* तक का होम लोन उपलब्ध कराता है, जिसमें ब्याजदरें 7.25%* प्रति वर्ष से शुरू होती हैं और लोन की अवधि 32 साल* तक हो सकती है। पात्र आवेदकों को आवेदनके 48 घंटे* के भीतर मंजूरी मिल सकती है और वे तेजी से प्रोसेसिंग के लिए 5,000 से अधिक स्वीकृत प्रोजेक्ट में सेचुन सकते हैं।

क्या घर खरीदने के फ़ैसले पर त्योहारों के समय का असर पड़ना चाहिए?

यह प्रभावित कर सकता है, लेकिन वित्तीय स्थिति की जांच के बाद ही। अगर संपत्ति आपके बजट में है, डाउन पेमेंटदेने के बाद भी आपकी पर्याप्त बचत बचती है और ईएमआई आपकी मौजूदा आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ आसानीसे संभाली जा सकती है, तो आप आगे बढ़ने के लिए तैयार हो सकते हैं। अगर ये बुनियादी बातें पूरी नहीं होती हैं, तोकोई शुभ तारीख घर खरीदना आपके लिए किफायती नहीं बना सकती।

त्योहार का मौसम शुरुआत करने का मौका हो सकता है, लेकिन फैसला लेने की वजह नहीं। प्रॉपर्टी आपके लिएसही है या नहीं, यह आपको बजट, लोन की रकम, लोन की अवधि और बचत से तय करना चाहिए।

*नियम और शर्तें लागू

Vande Bharat Sleeper: दिवाली से पहले रेलवे का बड़ा तोहफा! दिल्ली-वाराणसी के बीच शुरू होगी स्लीपर वंदे भारत, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली और वाराणसी के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रेलव इस रूट पर जल्द ही स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की योजना बना रहा है। देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल अक्टूबर में किया जा सकता है। ट्रायल के बाद इसको दिवाली 2026 के आसपास नियमित चलाया जा सकता है। वहीं स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस के चलन से यात्रियों के समय की बचत होगी। इस ट्रेन को रात में चलाए जाने की योजाना बनाई गई है।

दिल्ली और वाराणसी के बीच प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत शुरू होने के बाद यह देश की दूसरी ऐसी ट्रेन हो सकती है। इससे पहले हावड़ा-कामाख्या रूट पर स्लीपर वंदे भारत सेवा शुरू की गई है। वहीं इस ट्रेन के रूट और स्टॉपेज को लेकर रेलवे की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है

कितने बजे चलेगी ट्रेन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई स्लीपर वंदे भारत रात के समय वाराणसी से दिल्ली के लिए रवाना हो सकती है। प्रस्तावित टाइमिंग के मुताबिक ट्रेन वाराणसी कैंट से रात करीब 9:20 से 9:30 बजे के बीच चलेगी और सुबह लगभग 5 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। सफर के दौरान ट्रेन प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल पर भी रुकेगी। प्रयागराज में रात करीब 10:45 बजे और कानपुर में सुबह लगभग 12:35 बजे ठहराव होने की संभावना है।

दिल्ली से वापसी के दौरान भी ये ट्रेन रातभर चलाई जा सकती है। प्रस्तावित समय के अनुसार स्लीपर वंदे भारत नई दिल्ली से रात करीब 9:20 से 10 बजे के बीच रवाना होकर अगले दिन सुबह लगभग 5 बजे वाराणसी पहुंच सकती है। वहीं ट्रायल रन और रेलवे की तैयारियों के बाद ट्रेन के चलने और पहुंचने का समय बदला जा सकता है।

कहां-कहां होगा स्टॉपेज

प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत से दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच रात के समय सफर करने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत ट्रेन वाराणसी कैंट से चलकर प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल होते हुए नई दिल्ली पहुंचेगी। इन प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव से यात्रियों को रात में भी इन शहरों के बीच आने-जाने का विकल्प मिल सकेगा। वहीं ट्रेन के अंतिम रूट और स्टॉपेज को लेकर रेलवे की ओर से अभी आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

ट्रेन में होंगे कुल 16 कोच

प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत में यात्रियों के लिए अलग-अलग श्रेणी की सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। ट्रेन में कुल 16 कोच हो सकते हैं, जिनमें 11 एसी 3-टियर, 4 एसी 2-टियर और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल रहने की संभावना है। इस ट्रेन में एक बार में करीब 823 यात्री सफर कर सकेंगे।

कितने घंटे का होगा सफर

नई दिल्ली-वाराणसी स्लीपर वंदे भारत की रफ्तार ट्रैक और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति के हिसाब से करीब 130 से 160 किमी प्रति घंटे तक रहने की उम्मीद है। रेलवे के मिशन रफ्तार के तहत किए जा रहे सुधारों से इस रूट पर ट्रेन की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यात्रा का समय तय टाइमटेबल, स्पीड लिमिट और अन्य परिचालन स्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल करीब 7 से 8 घंटे के रात के सफर का अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन ट्रेन का अंतिम समय अभी तय नहीं हुआ है।

होगी कनेक्टिविटी बेहतर

दिल्ली-वाराणसी के बीच प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत को लेकर रेलवे की तैयारियां जारी हैं। इस ट्रेन का परीक्षण अक्टूबर 2026 में किया जा सकता है और दिवाली के आसपास इसे नियमित सेवा में लाने की तैयारी है। ट्रेन के रखरखाव की जिम्मेदारी नॉर्दर्न रेलवे को मिलने की संभावना है। सेवा शुरू होने पर दिल्ली से वाराणसी और प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को रात में सफर करने का एक नया और आरामदायक विकल्प मिलेगा। हालांकि, ट्रेन का नंबर, किराया और अंतिम टाइमटेबल अभी रेलवे की ओर से तय नहीं किया गया है।