Houthi attack Saudi: सऊदी अरब के तेल भंडार पर बड़ा संकट! कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है स्टॉक, हूती विद्रोहियों के हमलों से टेंशन में MBS

Houthi attack on Saudi Arabia: सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन अगर जल्द दोबारा शुरू नहीं हुई, तो अरब देश के पास निर्यात के लिए मौजूद कच्चे तेल का भंडार महज 5 से 7 दिनों में खत्म हो सकता है। ‘रॉयटर्स’ ने सऊदी तेल शिपमेंट से जुड़े तीन उद्योग सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

इस पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। सऊदी तेल खरीदारों और कारोबारियों के मुताबिक, इससे दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी, यानी लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन, बाजार से हट सकता है।

ड्रोन हमले के बाद बंद हुई पाइपलाइन

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को शुक्रवार को ड्रोन हमलों में नुकसान पहुंचने के बाद बंद कर दिया गया। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से में मौजूद तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। सऊदी सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत कब तक पूरी होगी। रॉ

यटर्स से बातचीत में उद्योग से जुड़े सूत्रों ने मरम्मत की अलग-अलग समयसीमा बताई है। एक सूत्र के मुताबिक, इसे ठीक करने में 5 से 6 सप्ताह लग सकते हैं। जबकि दूसरे का कहना है कि पाइपलाइन इससे पहले भी चालू हो सकती है। मरम्मत के दौरान पाइपलाइन से आंशिक रूप से तेल पंपिंग शुरू किए जाने की संभावना भी बताई गई है।

यानबू में सिर्फ कुछ दिनों का तेल भंडार

सूत्रों के मुताबिक, यानबू बंदरगाह पर मौजूद कच्चे तेल का स्टॉक मौजूदा निर्यात को केवल 5 से 7 दिनों तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो यह भंडार भी खत्म हो सकता है। सऊदी अरब के पास मिस्र के कुछ बंदरगाहों पर भी एक्स्ट्रा तेल स्टॉक मौजूद है। इनमें लाल सागर पर स्थित ऐन सुखना और भूमध्य सागर पर स्थित सिदी केरिर शामिल हैं। एक अन्य उद्योग सूत्र के अनुसार, इन भंडारों से ग्राहकों को कुछ और दिनों तक तेल की आपूर्ति की जा सकती है।

भंडारण क्षमता की बात करें तो:

यानबू: करीब 3.5 करोड़ बैरल

ऐन सुखना: करीब 1.8 करोड़ बैरल

सिदी केरिर: करीब 2 करोड़ बैरल

हालांकि ये सभी भंडारण सुविधाएं पूरी क्षमता तक भरी हुई नहीं हैं। ऐसे में पाइपलाइन दोबारा शुरू नहीं होने पर इन भंडारों के भी धीरे-धीरे खत्म होने का खतरा है।

सऊदी अरब का तेल उत्पादन 30 साल के निचले स्तर पर

पाइपलाइन संकट ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब का तेल उत्पादन पहले ही काफी गिर चुका है। सऊदी अरब ने OPEC को बताया कि अगस्त में उसका तेल उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि फरवरी में यह करीब 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब की तेल आपूर्ति तीन दशकों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

इसके पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते तेल की आवाजाही में आई बाधा को प्रमुख कारण बताया गया है। IEA का अनुमान है कि इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 57 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट आ सकती है, जो दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 6 फीसदी है।

होर्मुज संकट के बीच पाइपलाइन थी सऊदी अरब का अहम रास्ता

पिछले करीब छह महीनों से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी। इसकी मदद से सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात कर पा रहा था। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल तेल यानबू पहुंचाया जाता था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग 4 फीसदी के बराबर है। अब पाइपलाइन बंद होने से सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों का संकट बढ़ गया है।

लाल सागर में हूतियों से भी बढ़ा खतरा

सऊदी अरब को लाल सागर क्षेत्र में एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यमन के हूती लड़ाकों ने युद्ध के बीच सऊदी तेल शिपमेंट को निशाना बनाने की धमकी दी है। शुक्रवार को उन्होंने लाल सागर के मुहाने पर स्थित एक द्वीप पर कब्जा करने का भी दावा किया।

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए इसलिए भी अहम थी क्योंकि यह देश को होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने का रास्ता देती थी। इसके लंबे समय तक बंद रहने से सऊदी अरब को अपने स्टोरेज में मौजूद तेल और दूसरे सीमित निर्यात मार्गों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है।

दुनिया भर में तेल कीमतों पर और बढ़ सकता है दबाव

अगर पाइपलाइन की मरम्मत में कई सप्ताह लगते हैं, तो सऊदी अरब के लिए विदेशी ग्राहकों को नियमित तेल आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक बंदी का मतलब वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल सऊदी कच्चे तेल की कमी हो सकता है।

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इससे पहले ही सीमित वैश्विक सप्लाई पर दबाव और बढ़ेगा और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब की यह पाइपलाइन सिर्फ एक देश की तेल सप्लाई का मामला नहीं है। इसके लंबे समय तक बंद रहने पर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Asian Market Today: ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद और AI को लेकर चिंताओं से एशिया बाजार गिरे, तेल की कीमतों में उछाल

Asian Market Today: तेल की कीमतों में नई तेजी, सख़्त मॉनेटरी पॉलिसी की बढ़ती उम्मीदों और AI कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर नई चिंताओं ने निवेशकों के मूड पर असर डाला जिसके चलते सोमवार को एशियाई शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला।

सेमीकंडक्टर और AI से जुड़े शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया की SK Hynix में 5% से ज़्यादा और जापान की Kioxia में 9% से ज़्यादा की गिरावट आई। Samsung Electronics में लगभग 4% और Advantest में 4.7% की गिरावट आई, जो AI इन्वेस्टमेंट साइकल से जुड़ी कंपनियों के प्रति सावधानी को दर्शाता है।

चिप शेयरों में यह बिकवाली तब हुई जब AI क्षेत्र के बड़े अधिकारियों ने ज़्यादा शक्तिशाली सिस्टम से जुड़े जोखिमों को देखते हुए मॉडल डेवलपमेंट की रफ़्तार को धीमा करने की बात कही। Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने इंडस्ट्री से डेवलपमेंट धीमा करने और मज़बूत सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा, जबकि OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और xAI के CEO एलन मस्क ने भी इस पहल का समर्थन किया।

निवेशक अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या AI से जुड़े बिज़नेस से होने वाली कमाई, ज़्यादा एडवांस्ड मॉडल बनाने और चलाने के लिए ज़रूरी भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को सही ठहरा पाएगी। इससे ज़्यादा वैल्यूएशन वाले टेक्नोलॉजी शेयर, खर्च, रिटर्न या AI को अपनाने की रफ़्तार को लेकर चिंताएं बढ़ने पर तेज़ी से उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो गए हैं।

साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी एशियाई बाज़ारों पर दबाव बढ़ाया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड में 2% से ज़्यादा की बढ़त हुई और यह $107 प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि पिछले हफ़्ते इसमें लगभग 9% की बढ़त हुई थी।

सऊदी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और खाड़ी में शिपिंग पर नए हमलों ने ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर ओमान में होने वाली बैठक टाल दी गई।

लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने की संभावना से महंगाई और ब्याज दरों को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। उम्मीद से ज़्यादा अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद, बाज़ार अब बुधवार को फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की ज़्यादा संभावना मानकर चल रहे हैं।

निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में बैंक ऑफ़ जापान द्वारा ब्याज दरों में क्वार्टर-पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की भी ज़्यादा संभावना देख रहे हैं।

जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.7% गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स 3.3% नीचे आया। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.8% गिरा। US इक्विटी फ्यूचर्स भी बाज़ार के कमज़ोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसमें Nasdaq 100 फ्यूचर्स में लगभग 1% की गिरावट है।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटी वैल्यूएशन पर और दबाव बढ़ रहा है, खासकर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर, जहां भविष्य की कमाई की उम्मीदें पहले से ही ज़्यादा हैं। 10-साल की US ट्रेजरी यील्ड 5% के करीब बनी हुई है, जबकि पिछले हफ़्ते 2-साल की यील्ड में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई।

फिर भी, कुछ निवेशकों का मानना ​​है कि AI डेवलपमेंट और खर्च में कमी आने से आखिरकार इस सेक्टर को फ़ायदा हो सकता है, क्योंकि कंपनियों को पहले से लगाए जा रहे कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से रिटर्न पाने के लिए ज़्यादा समय मिल जाएगा।

हालांकि, बाज़ार के लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या AI इन्वेस्टमेंट की मौजूदा रफ़्तार से इतनी ज़्यादा कमाई हो पाएगी जो ऊँचे वैल्यूएशन को बनाए रख सके।

Crude Oil Price: सऊदी अरब के इस कदम से बढ़ी सप्लाई में रुकावट की आशंका, ब्रेंट क्रूड $108 के करीब

क्रूड और US बॉन्ड यील्ड बिगाड़ सकते है बाजार का मूड, गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, इंडेक्स पर कहां रखें आज नजर

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के निचले स्तर पर खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी 100 अंक से ज़्यादा की गिरावट के साथ कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में नई तेज़ी, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और एशियाई व US इक्विटी बाज़ारों में गिरावट का असर बाजारों पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व के अहम शिपिंग रूट पर हमले तेज़ होने के बाद ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि US में थोक महंगाई बढ़ने से अगले हफ़्ते फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुईं।

GIFT निफ्टी सुबह 8 बजे 23,343 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो 117 अंक या 0.5 प्रतिशत नीचे था। गुरुवार को भारतीय इक्विटी बाजारों ने लगातार तीन सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था, हालांकि सीमित दायरे में कारोबार के कारण बढ़त मामूली रही। सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर पहुंचा।

एशियाई बाजारों में गिरावट

शुक्रवार को एशियाई शेयरों और बॉन्ड में गिरावट आई क्योंकि निवेशक ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और US में सख्त मौद्रिक नीति की संभावना से जूझ रहे थे। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया में सबसे ज़्यादा नुकसान देखा गया। जापान का Topix 1 प्रतिशत गिरा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स में 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 और हांगकांग के Hang Seng में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि शंघाई कंपोजिट 0.6 प्रतिशत गिरा।

गुरुवार की बिकवाली के बाद US इक्विटी फ्यूचर्स में कुछ स्थिरता के संकेत दिखे, जिसमें एशियाई कारोबार में S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई।

मध्य पूर्व में सप्लाई से जुड़े जोखिम बढ़ने से ब्रेंट $110 के करीब पहुंचा

कच्चा तेल भारतीय बाज़ारों के लिए सबसे बड़ी मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौती बना हुआ है। फारस की खाड़ी और लाल सागर दोनों से शिपिंग के लिए बढ़ते खतरों के बीच कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी जारी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग $110 तक पहुंचने के बाद 1% बढ़कर $108.68 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1% बढ़कर $103.45 प्रति बैरल हो गया। गुरुवार को दोनों बेंचमार्क में 6% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी।

ईरान-समर्थित हूतियों ने गुरुवार को यमन के मोचा बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे रेड सी में शिपिंग के लिए खतरा बढ़ गया है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ट्रैफ़िक पर भी रोक लगी हुई है क्योंकि खाड़ी में टैंकरों पर हमले बढ़ गए हैं।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमलों से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है और क्रूड मार्केट में जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट

गुरुवार को अमेरिकी इक्विटी में गिरावट आई क्योंकि प्रोड्यूसर की कीमतों में बढ़ोतरी और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से यह चिंता बढ़ गई कि महंगाई के कारण फेडरल रिजर्व को अगले हफ़्ते ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। अगस्त में अमेरिकी थोक महंगाई 0.4% बढ़ी, जिससे कीमतों के दबाव को लेकर चिंता बढ़ गई। इसके जवाब में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई, और 10-साल की यील्ड लगभग तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी को उम्मीद है कि 23,500-23,600 का स्तर निफ्टी के लिए तुरंत रेजिस्टेंस का काम करेगा, जबकि 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट बना रहेगा। 23,200 के नीचे जाने पर गिरावट 23,050-23,000 तक बढ़ सकती है, हालांकि बहुत ज़्यादा ओवरसोल्ड मोमेंटम इंडिकेटर टेक्निकल बाउंस की गुंजाइश भी बनाते हैं।

गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बने रहे और उन्होंने 438 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को सपोर्ट देना जारी रखा और सेशन के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की इक्विटी खरीदी।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी 111 अंक नीचे, एशिया में भी दबाव, क्रूड $108 के पार

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Crude Oil: गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पर जाने का जताया अनुमान, ऐसा हुआ तो मचेगी बड़ी तबाही

क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.49 फीसदी उछाल के साथ 98.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.72 फीसदी उछाल के साथ 93.97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। 7 सितंबर को भी क्रूड में तेजी दिखी थी। जुलाई के बाद क्रूड़ की कीमतें सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जो अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है।

4 मई को ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर पर पहुंच गया था

गोल्डमैन सैक्स ने क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकर्स पर हमले नहीं रुकते हैं तो क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। 28 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल दिखा है। 4 मई को भाव 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में रुकावटें बढ़ रहीं

गोल्डमैन सैक्स में कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड Daan Struyven ने कहा, “पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि जहाजों की आवाजाही के लिहाज से रुकावटें बढ़ रही हैं।” अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मामला फंसा हुआ है। सामान्य दिनों में इस रास्ते दुनिया का करीब 20 फीसदी ऑयल गुजरता है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से इस रास्ते ऑयल की सप्लाई नाममात्र की रह गई है।

महंगा क्रूड भारत के लिए बढ़ा सकता है मुसीबत

8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बढ़ता दिखा। अगर यह 100 डॉलर पार करता है तो 23 जुलाई के बाद ऐसा पहली बार होगा। अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह से टकराव बना हुआ है, उससे क्रूड के 100 डॉलर पर पहुंच जाने के आसार दिखते हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना भारत के लिए खराब है। भारत क्रूड की करीब 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है।

इस साल 4 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर पर था। इसका मतलब है कि यह उस लेवल से करीब 40 फीसदी ऊपर है। इससे पहले भारत में महंगे क्रूड की वजह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। अगर जल्द भाव नीचे नहीं आता है तो फिर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं। इसका असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा।

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महंगे क्रूड की वजह से महंगाई को मिलेगी हवा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर दूसरी चीजों और सर्विसेज की कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही विमान किराया आसमान में चल रहा है। पिछले छह महीनों में दूध, और ब्रेड सहित रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। रेस्टॉरेंट्स में भी खाना महंगा हो गया है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों के ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ा है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार इजाफा हो रहा है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आरबीआई महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

Iran-America War Update: अमेरिका-ईरान की जंग ने लिया खतरनाक मोड़! ईरानी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी युद्धपोतों को बनाया निशाना

Iran-America War Update: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है। इस खतरनाख हमले से ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है। ‘अल जजीरा’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने कहा कि दो अमेरिकी युद्धपोतों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे। ईरानी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल थे।

ईरानी सेना ने दावा किया कि मिसाइल हमले से जहाजों को नुकसान पहुंचा और उसके बाद दोनों युद्धपोत उस इलाके से चले गए। ‘अल जजीरा’ के हवाले से तस्नीम न्यूज एजेंसी ने IRGC के दावे की रिपोर्ट दी कि दोनों जहाज नुकसान पहुंचने और आगे के हमलों के डर से संघर्ष वाले इलाके से भागने को मजबूर हुए। ईरान का यह दावा उस समय आया है जब इस इलाके में सैन्य और कमर्शियल जहाजों के बीच हमलों का दौर चल रहा है, जो ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद शुरू हुआ।

IRGC ने और कड़े हमले की चेतावनी दी

IRGC ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की पहले की चेतावनी का भी जिक्र किया, जिन्होंने कहा था, “अगर आप हमारे दो जहाजों पर गोली चलाते हैं, तो हम और भी भारी आर्थिक कीमत वसूलेंगे। आपके तीन जहाजों को नष्ट कर देंगे।” IRGC ने इस बयान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि अगर ईरानी शिपिंग के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका और भी जोरदार जवाब दिया जा सकता है।

अल जजीरा की रिपोर्ट मुताबिक, IRGC ने कहा, “अगर अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी और आक्रामक कार्रवाई जारी रखता है, तो अमेरिकी सरकार को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाओं से कड़े जवाब की उम्मीद करनी चाहिए। हम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं।”

अमेरिका का पलटवार

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर दिया है। जारी किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरानी टैंकर KYLO पर अटैक कर रहे हैं। इसके बाद टैंकर में भीषण आग और भारी क्षति होती दिखती है। रविवार सुबह US सेंट्रल कमांड ने एक वीडियो जारी किया जिसमें अमेरिकी सेना ओमान की खाड़ी में ईरान के एक ऑयल टैंकर को डुबोती हुई दिखाई दे रही है।

यह दशकों में ईरान के पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ की गई सबसे अहम सैन्य कार्रवाइयों में से एक है। US सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि कोमोरोस के झंडे वाले M/T काइलो (जिसे नॉक्सन के नाम से भी जाना जाता है) को तब नष्ट कर दिया गया, जब उसके क्रू ने जहाज को छोड़ दिया था।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को निशाना बनाया

ईरान के ये ताजा दावे तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद आए हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमले के बाद उसकी सेना ने उन जहाजों पर हमला किया। न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बाद में कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तीन टैंकरों को निशाना बनाया, जिन्हें उसने अनधिकृत रास्तों पर चलने वाला बताया था।

साथ ही तीन अन्य जहाजों को भी निशाना बनाया जिनके बारे में उसने आरोप लगाया कि वे अमेरिका से जुड़े थे। ईरानी सेना ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन ईरानी शिपिंग में दखल देना जारी रखता है, तो अमेरिकी सैन्य जहाजों पर हमले और भी गंभीर हो जाएंगे।

अमेरिका का कहना है कि जहाज ईरानी हमलों से बच निकले

वहीं, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि इलाके में काम करते समय एक अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर ईरान के कई हमलों से बच निकले। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस झड़प में कोई भी अमेरिकी कर्मी घायल नहीं हुआ। इसके बाद अमेरिका ने कहा कि ईरान के तीन तेल टैंकरों को बेकार या नष्ट कर दिया गया है। एडमिरल कूपर ने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन अमेरिकी सेना की रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर ईरान के खुले में मौजूद तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा।

पीएम मोदी ने की युद्ध खत्म करने की अपील

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर पेजेश्कियान के साथ बैठक की। फरवरी में ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली द्विपक्षीय वार्ता थी।

बैठक में PM मोदी ने ईरानी नेता से यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की और उभरती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिये सुलझाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कोशिशें जारी रखने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया। एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ मिलकर काम करने के भारत के इरादे को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का भारत में स्वागत करने का इंतजार है।

GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US-Iran War: अमेरिका का ईरान पर फिर बड़ा हमला, होर्मुज स्ट्रेट में की जमकर बमबारी, तेहरान ने जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर दागी मिसाइलें

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान पर जमकर बमबारी की है। अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप (Larak Island) पर हमला कर वहां मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया है। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह करीब एक महीने में अमेरिका की ईरान के खिलाफ पहली मिलिट्री एक्शन है।

इस हमले से फरवरी से रुक-रुक कर चल रही लड़ाई में आई शांति टूट गई है। ईरान ने इसे जानलेवा हमला बताते हुए बदला लेने की घोषणा की है। इससे एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी हमले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह जुलाई के अंत के बाद ईरान पर अमेरिका का पहला बड़ा हमला है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कमांडर टिम हॉकिन्स ने CBS News को बताया कि IRGC की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। BBC के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने देखा था कि ईरानी बल होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।

लारक द्वीप पर क्यों हुआ हमला?

लारक द्वीप ईरान के महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास के बिल्कुल करीब स्थित है। यह रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य के बीचों-बीच आता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान फिलहाल इस इलाके से गुजरने वाले टैंकरों को लारक द्वीप के पास से होकर जाने और जांच कराने के लिए मजबूर कर रहा है।

कुछ जहाजों से कथित तौर पर 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लिए जाने की बात भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की ओर से समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी को देखते हुए लारक द्वीप पर मौजूद लॉन्चरों को निशाना बनाया गया।

ईरान ने दी बदले की धमकी

ईरानी सेना IRGC ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की है। इसे ट्रंप प्रशासन की बड़ी रणनीतिक और घातक गलती बताया। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि इस गलत आकलन की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ेगी। ईरान की IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, लारक द्वीप पर हमला ड्रोन के जरिए किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि हमले में दो लोगों की मौत हुई है। जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। IRGC का दावा है कि इन हमलों में अमेरिकी ठिकानों के तकनीकी ढांचे, रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहां भारी नुकसान हुआ है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने देश के हवाई क्षेत्र में घुसी आठ मिसाइलों को रोक लिया है। जॉर्डन की सरकारी न्यूज एजेंसी पेट्रा के अनुसार, सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ये मिसाइलें सोमवार तड़के देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई थीं।

ट्रंप ने दी थी समुद्री सुरंगों पर चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को या तो नष्ट कर दिया गया है या हटा दिया गया है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने दोबारा किसी जहाज या नाव के जरिए नई सुरंगें बिछाने की कोशिश की तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप के इस दावे को ‘प्रचार और भ्रम फैलाने वाली बात’ बताया है।

ईरान पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान किया था। इनका उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग करना तथा उसके सहयोगी देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाना है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इन प्रतिबंधों को पहले से जारी अमेरिकी आर्थिक दबाव का ही विस्तार बताया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य संघर्ष में असफल रहने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल इस्तेमाल होने वाले तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था। इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य टकराव या समुद्री ट्रैफिक में रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

छह महीने से जारी है ईरान युद्ध

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री ट्रैफिक लगभग बंद हो गया था।

अब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई ने इस लंबे संघर्ष को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला दिया है। सबसे बड़ी टेंशन यह है कि होर्मुज में फिर से सैन्य टकराव बढ़ा तो इसका सीधा असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर पड़ सकता है।

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Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Gold-silver Price : 360 ONE के प्रेसिडेंट और हेड-ब्रोकरेज,विरल शाह का कहना है कि अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो अगले 6 से 8 महीनों में सोना और चांदी में मौजूदा स्तरों से 10% तक की तेजी आ सकती है। उनका मानना ​​है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं और हाई बॉन्ड यील्ड को लेकर US का रुख कीमती धातुओं को सपोर्ट करता रहेगा।

कमजोर डॉलर,US में कमजोर जॉब आंकड़ों और US ट्रेजरी विभाग की बॉन्ड-खरीद की घोषणा की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही जबरदस्त तेजी आ चुकी है। हालांकि,विरल शाह को लगता है कि सोने में 4,700–4,800 डॉलर और चांदी में 70–72 डॉलर के आस-पास कुछ टेक्निकल सेलिंग देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व का बयान निकट भविष्य में के लिए एक अहम ट्रिगर साबित होगा।

डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने आगे कहा कि अगर डॉलर और कमजोर होता है तो कमोडिटीज को और फायदा मिल सकता है। डॉलर इंडेक्स के लिए 100-101 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। उनका मानना ​​है कि डॉलर इंडेक्स के 97 की तरफ जाने से सोने,चांदी और बेस मेटल्स को सपोर्ट मिल सकता है।

कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत

प्रेशियस मेटल के अलावा,विरल शाह कॉपर और जिंक को लेकर भी पॉज़िटिव हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर में लगभग एक साल से स्ट्रक्चरल बुल ट्रेंड बना हुआ है। उन्हें कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि उनका मानना ​​है कि कॉपर में अब तक की जोरदार बढ़त के बाद आगे और बढ़त का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

जिंक और कॉपर को सप्लाई में तंगी से मिल रहा फायदा

जिंक पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी चिंताओं,खासकर चीन में बाढ़ के कारण कम उत्पादन होने से जिंक को सपोर्ट मिल रहा है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर इन्वेंट्री कम हो रही है और सप्लाई तंग है,जबकि इसकी मांग मज़बूत बनी हुई है। शाह को उम्मीद है कि जब तक सप्लाई मांग के बराबर नहीं हो जाती,तब तक कॉपर और जिंक दोनों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट मुमकिन

कच्चे तेल पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई बेहतर होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है,तो क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्हें नहीं लगता कि यह लंबे समय तक बनी रहने वाली गिरावट होगी,क्योंकि तमाम देशों को आखिरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से भरना ही होगा।

 

 

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर, इंडेक्स में आज किन लेवल पर दें ध्यान

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है, कच्चे तेल की गिरती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर हुई बढ़त ने ग्लोबल माहौल को बेहतर बनाया है। ज़्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी और घरेलू स्तर पर इंस्टीट्यूशनल बाइंग से और सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन निवेशक Nvidia की तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं, इसलिए वे सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8.10 बजे GIFT निफ्टी 75.00 अंक या 0.31 फीसदी बढ़कर 24,555 पर ट्रेड कर रहा था। घरेलू इक्विटीज़ पॉज़िटिव मोमेंटम के साथ सेशन की शुरुआत कर रही हैं, क्योंकि मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन आखिरी घंटे में हुई खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को रिकवर करने में मदद मिली थी। मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 115.50 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 24,334.55 पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में ज़्यादातर तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर तेज़ी देखी गई, जिसे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी से सपोर्ट मिला। MSCI के एशिया-पैसिफिक इक्विटीज़ गेज में 0.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.4 प्रतिशत की बढ़त हुई। जापान का टोपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी मामूली रूप से ऊपर थे, हालांकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

बुधवार को भारतीय इक्विटीज़ के लिए कच्चे तेल की कीमतों में और तेज़ गिरावट सबसे अच्छे संकेतों में से एक है, जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है। शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सेशन की भारी गिरावट को और बढ़ा रही है। ईरान ने कहा है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत फिर से शुरू कर दी है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 प्रतिशत गिरकर $86.80 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.8 प्रतिशत गिरकर $80.87 प्रति बैरल पर आ गया। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई थी।

टेक शेयरों में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी से वॉल स्ट्रीट में बढ़त

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुए। Nvidia के नतीजों से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों में रिकवरी देखी गई, जबकि हाल ही में बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के बाद कच्चे तेल और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली। Nasdaq Composite 0.66 प्रतिशत बढ़कर 26,151.30 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 7,677.24 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average 0.30 प्रतिशत बढ़कर 53,577.40 पर पहुंच गया।

बॉन्ड यील्ड में कमी ग्लोबल इक्विटी के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। इससे पहले, कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी ने वैल्यूएशन पर दबाव डाला था और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह को लेकर चिंताएं पैदा की थीं।

FII और DII की खरीदारी

मंगलवार को इंस्टीट्यूशनल फ्लो (संस्थागत निवेश प्रवाह) सकारात्मक रहा, जिसमें विदेशी और घरेलू दोनों तरह के निवेशक नेट बायर (शुद्ध खरीदार) के तौर पर उभरे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में भी खरीदारी जारी रखी और 1,593 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट बायर रहे और उन्होंने भारतीय शेयरों में 230 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी घरेलू इक्विटी के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बुधवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी से रिस्क एसेट्स के लिए माहौल बेहतर हुआ है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में नरमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर आई रिकवरी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बेहतर माहौल को देखते हुए, GIFT निफ्टी फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में 24,500 के स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि निफ्टी की पिछली क्लोजिंग 24,334 थी; इससे घरेलू इक्विटी में गैप-अप ओपनिंग का संकेत मिलता है।

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,360 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह 24,550-24,700 के स्तर तक जा सकता है, जबकि शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 के आसपास दिख रहा है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, क्रूड में नरमी 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?

‘एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा’

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्ते या फारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।

रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमला

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।

Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।

चीन को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।

चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

होर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।