Gold Silver Price: सोने -चांदी में तेजी कायम, जानिए आखिर क्यों अहम हैं ग्लोबल संकेत?

Gold Silver Price:  हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। निवेशक ब्याज दरों की उम्मीदों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और चल रहे जियोपॉलिटिकल जोखिमों पर नजर रखे हुए थे। COMEX पर सोना $4,451.30 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,440 प्रति औंस से $14 या 0.32% ज़्यादा था। इस मेटल ने दिन के दौरान $4,473.20 प्रति औंस का उच्चतम और $4,422.30 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

चांदी में ज़्यादा तेजी देखी गई। COMEX पर चांदी $65.845 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.060 प्रति औंस से $0.737 या 1.13% ज़्यादा थी। सेशन के दौरान इसकी कीमत $64.850 और $66.395 प्रति औंस के बीच रही।

क्यों हो रहा है सोने की कीमतों में बदलाव ?

हाल के हफ़्तों में कमजोर अमेरिकी आर्थिक डेटा और कम बॉन्ड यील्ड से सोने को सहारा मिला है। बाजार अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों, डॉलर में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर भी नज़र रखे हुए है।

ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की सप्लाई में रुकावट के कारण महंगाई का जोखिम बना हुआ है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ाकर सेंट्रल बैंकों के लिए हालात मुश्किल बना सकती हैं।मार्केट अपडेट के अनुसार, पिछले हफ़्ते सोने में 0.8% की बढ़त भी हुई थी।

टाटा म्यूचुअल फंड ने सोने पर अपने अगस्त 2026 के ‘हाउस व्यू’ में कहा कि ब्याज दरों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड का आकलन करने के कारण निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फंड ने सोने पर मध्यम से लंबी अवधि का सकारात्मक नज़रिया बनाए रखा और सेंट्रल बैंक की खरीदारी, निवेश की मांग और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन को इसके लिए संरचनात्मक आधार बताया।

चांदी की कीमतों में तेज़ी की वजह क्या?

कीमती धातुओं में आई आम तेजी से चांदी को भी फ़ायदा हुआ है, लेकिन औद्योगिक इस्तेमाल के कारण इसकी मांग का पैटर्न सोने से अलग है।

टाटा म्यूचुअल फंड ने कहा कि चांदी के लिए निकट भविष्य का नजरिया वैश्विक आर्थिक स्थितियों और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगा। फंड ने कहा कि सोलर इंस्टॉलेशन में कमी और सप्लाई की तंगी में ढील से कीमतों में ठहराव और ज़्यादा उतार-चढ़ाव का दौर आ सकता है। साथ ही, फंड हाउस को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, AI-संबंधित हार्डवेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर पावर में इस्तेमाल से लंबी अवधि की मांग को फ़ायदा होगा। निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

सोने के लिए, मुख्य बातें हैं – US में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और जियोपॉलिटिकल जोखिम। डॉलर का कमजोर होना और यील्ड का कम होना आम तौर पर सोने के लिए अच्छा होता है क्योंकि इससे यह मेटल निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक बन जाता है।

चांदी की कीमतों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है क्योंकि इसकी कीमत तय करने में इंडस्ट्रियल डिमांड की बड़ी भूमिका होती है।

टाटा म्यूचुअल फंड ने मध्यम से लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशकों को धीरे-धीरे निवेश करने (स्टैगर्ड इन्वेस्टमेंट) का तरीका अपनाने का सुझाव दिया है। अलग-अलग कीमती मेटल्स में निवेश के लिए, यह सोने में ज़्यादा निवेश करने को प्राथमिकता देता है क्योंकि इसमें सुरक्षात्मक गुण होते हैं, साथ ही चांदी में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना भी होती है।

फंड हाउस ने 70:30 के गोल्ड-टू-सिल्वर एलोकेशन को एक बड़े रणनीतिक ढांचे के तौर पर बताया है, न कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग कॉल के तौर पर। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कीमती मेटल्स की ग्लोबल कीमतें घरेलू कीमतों से अलग हो सकती हैं क्योंकि भारतीय कीमतें करेंसी में उतार-चढ़ाव, इंपोर्ट से जुड़ी लागत, टैक्स और स्थानीय बाज़ार की स्थितियों से प्रभावित होती हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान से लड़ाई के बाद अमेरिका का इलाका हो जाएगा! डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि ईरान से लड़ाई खत्म होने के बाद वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया का यह अहम समुद्री रास्ता अमेरिकी सेना के नियंत्रण में है।

रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रैली में ट्रंप ने कई बातें कहींं

लॉन्ग आईलैंड में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रैली में ट्रंप ने ईरान से चल रही लड़ाई के बारे में कई बाते कहीं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित करने का ऐलान वह ईरान की पराजय के बाद करेंगे। उन्होंने कहा, “ईरान को पूरी तरह हराने के बाद जल्द ही मैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित कर दूंगा।”

ट्रंप ने कहा कि ईरान लड़ाई में बुरी तरह से हार रहा है

ट्रंप ने यह भी कहा कि लड़ाई में ईरान बुरी तरह से हार रहा है। उन्होंने सैन्य शक्ति के इस्तेमाल के अपने सरकार के फैसले को भी सही बताया। उन्होंने कहा, “मैंने उससे ज्यादा सेना की तैनाती की है, जितना मैं पहले चाहता था।” उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव बनाना जरूरी था।

अमेरिका किसी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर यह दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल समझौते के संकेत नहीं दिख रहे है। 17 जून को दोनों देशों के बीच शांति को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन, यह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में दो सबसे बड़ी बाधा

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं होने की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह से रोक लगाना चाहता है। इसके लिए ईरान तैयार नहीं है। दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान अपना नियंत्रण चाहता है। अमेरिका इसके लिए भी तैयार नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनियाभर में क्रूड ऑयल की सप्लाई का एक बड़ा समुद्री रास्ता है।

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पहले भी ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयान दे चुके है्ं

ऐसा पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मजु को अमेरिका का इलाका बनाने की बात कही है। उन्होंने मार्च में भी कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ अमेरिका’ किया जा सकता है। भारत और चीन देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज काफी अहम है। भारत के क्रूड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।

Donald Trump: ‘मैं ईरान पर भरोसा करने वाला आखिरी इंसान’,आखिर ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा? तुर्किए से लौटते वक्त विमान बदलने की भी बताई वजह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और वे ईरान पर भरोसा करने वाले आखिरी व्यक्ति हैं। उन्होंने फिर दोहराया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब अमेरिका के नियंत्रण में ह

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Stock Market: क्रूड की तेजी क्या बिगाड़ेगी बाजार का खेल, गिफ्ट निफ्टी से लेकर जानें संकेत दे रहे है ग्लोबल बाजार

GIFT Nifty Indicator: भारतीय बाजारों के लिए आज भी सुस्त संकेत मिल रहे है। गिफ्ट निफ्टी फ्लैट कामकाज कर रहा है।  FIIs की कैश में हल्की खरीदारी हुई, लेकिन वायदा में बिकवाली रही।  नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी थोड़े बढ़े है।  हालांकि निवेशक US महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले सतर्क हैं। मिले-जुले एशियाई बाज़ार, वॉल स्ट्रीट में रात भर की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी से बढ़त सीमित रह सकती है।

सुबह 7:50 बजे GIFT Nifty 40 अंक या 0.16 फीसदी बढ़कर 24,555.5 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि Nifty 50 मंगलवार के 24,471.70 के क्लोजिंग स्तर से ऊपर खुल सकता है। घरेलू बाज़ार पिछले सत्र में गिरावट के बाद रिकवरी की कोशिश करेगा। मंगलवार को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच Sensex 388.19 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 78,154.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 112.10 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 24,471.70 पर आ गया।

US महंगाई के आंकड़ों पर सबकी नजर

ग्लोबल निवेशक जुलाई के लिए US कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (महंगाई) रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं, जो बुधवार को आएगी। इससे फेडरल रिज़र्व के अगले ब्याज दर कदम के बारे में नए संकेत मिल सकते हैं। इस अनिश्चितता के कारण बुधवार को एशियाई कारोबार में US इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

एशियाई बाज़ार मिले-जुले, टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त

US महंगाई के आंकड़ों से पहले भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बीच एशियाई बाज़ारों में सतर्कता के साथ कारोबार हुआ, हालांकि टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त से कुछ सहारा मिला। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का टेक्नोलॉजी-हैवी कोस्पी (Kospi) मज़बूत कॉर्पोरेट नतीजों की बदौलत 2.8 प्रतिशत उछला।

अन्य जगहों पर, जापान का Topix 0.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा, हांगकांग का Hang Seng 0.8 प्रतिशत गिरा और शंघाई कंपोजिट में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। मिडिल ईस्ट में तनाव की चिंताओं के बीच

वॉल स्ट्रीट में गिरावट

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि निवेशकों को उस समझौते की उम्मीद कम हो गई जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता था और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल सकता था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए नियुक्त सेक्रेटरी ने कहा कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं बदलता और युद्ध खत्म करने के लिए तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक यह जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इससे समझौते की उम्मीदें और कम हो गई।

S&P 500 में 0.32 प्रतिशत, नैस्डैक कम्पोजिट में 0.6 प्रतिशत और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.34 प्रतिशत की गिरावट आई।

ब्रेंट क्रूड $90 के करीब पहुंचा

भारतीय शेयरों के लिए कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। बुधवार को कीमतों में हालिया तेजी जारी रही, क्योंकि अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें कम हो रही हैं और दो जहाजों पर हमलों के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताएं हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.81 प्रतिशत बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.85 प्रतिशत बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया।

मंगलवार को दोनों बेंचमार्क $1 से अधिक बढ़कर 31 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम क्लोजिंग स्तर पर बंद हुए थे। सोमवार को इनमें लगभग 5 प्रतिशत की तेजी आई थी, जिसके बाद यह बढ़त जारी रही।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

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Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

Crude Oil Price Today:  बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।

आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।

इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।

 

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Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

MCX पर सोना ₹1.53 लाख के पार, चांदी ₹2.36 के नीचे फिसली, जानें किस कारण बढ़ी मांग

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: ट्रंप की मांगों से डील की उम्मीदें हुई कम, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, ब्रेंट $90 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: कल कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन उछाल आया। मंगलवार, 11 अगस्त को एशिया में शुरुआती कारोबार में भी ये बढ़त बनी रही। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी मांगें रखने के बाद हुआ, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की किसी भी संभावित डील की उम्मीदें धुंधली हो गई।

ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात भर में 5% की बढ़ोतरी हुई। WTI आज सुबह $82 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहा। ब्रेंट $87 प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ा।

ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की सभी बातचीत में इन नई मांगों को मजबूती से रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा। हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए $300 बिलियन का फंड उस 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (chokepoint) के भविष्य के प्रशासन पर द्विपक्षीय बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह जलडमरूमध्य फिर से नहीं खुलेगा।

ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ‘एनर्जी एस्पेक्ट्स’ की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने बताया कि अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं। यह संख्या जून में MoU पर हस्ताक्षर के बाद ट्रैफिक के 14 के दैनिक औसत तक पहुंचने की तुलना में काफी कम है।

TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा, “यह देखते हुए कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, ग्लोबल इन्वेंट्री में भारी कमी आई है और फ्लो सामान्य स्तर के आसपास भी नहीं है, हम ‘शॉर्ट्स कवर’ (short covering) में आक्रामक तेजी देख सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ब्रेंट मौजूदा स्तर से $10-15 ऊपर ट्रेड करेगा।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

GIFT Nifty indicator: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन किस ओर घूमेगा बाजार का पहिया, आखिर गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत, जानें

GIFT Nifty indicator: सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के स्थिर या थोड़ी बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT Nifty से सीमित बढ़त के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि मजबूत एशियाई बाजार और शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से बाज़ार का मूड बेहतर हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क रख सकती है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 18.5 अंक या 0.08 फीसदी बढ़कर 24,660 पर ट्रेड कर रहा था। इससे शुक्रवार को 24,570.65 पर बंद हुए Nifty 50 के लिए काफी हद तक सपाट या सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिलते हैं। पिछले सत्र में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे, क्योंकि ऑटो और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी शेयरों में मजबूत बढ़त के मुकाबले फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी हावी रही। Sensex 455.59 अंक या 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 पर आ गया, जबकि Nifty 65.35 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।

एशियाई बाज़ार चढ़े

सोमवार को एशियाई इक्विटी में बढ़त देखी गई। शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से संकेत लेते हुए ये बाज़ार ऊपर चढ़े। कमज़ोर अमेरिकी रोज़गार डेटा के कारण फेडरल रिज़र्व द्वारा सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई थीं। जापान का Nikkei 225 0.6 प्रतिशत चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 0.3 प्रतिशत बढ़ा।

पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही।  S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत गिरे और Nasdaq फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

शुक्रवार को अमेरिकी इक्विटी में बढ़त हुई, जब डेटा से पता चला कि अर्थव्यवस्था में उम्मीद के विपरीत नौकरियों में कमी आई है। इससे निवेशकों ने निकट भविष्य में उधार लेने की लागत बढ़ने की उम्मीदें कम कर दीं। S&P 500 0.62 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq Composite 1.30 प्रतिशत और Dow Jones Industrial Average 0.28 प्रतिशत चढ़ा। इस हफ़्ते नैस्डैक में 5.19% की तेज़ी आई, S&P 500 में 3.58% की बढ़त हुई और डॉव 2.96% ऊपर चढ़ा। इसकी वजह कंपनियों की अच्छी कमाई और ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंताएं थीं। अब निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा के बारे में और संकेत पाने के लिए इस हफ़्ते आने वाले US महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।

होर्मुज़ को लेकर अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में सुधार

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) कितनी जल्दी पूरी तरह से फिर से खुल पाएगा। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.78% बढ़कर $78.79 हो गया।

ईरान ने रविवार को कहा कि होर्मुज से होकर नए शिपिंग रूट तय करने के लिए ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन उसने यह भी कहा कि जलमार्ग के फिर से खुलने से पहले अमेरिका को कुछ अन्य शर्तों को पूरा करना होगा।

इंडेक्स पर क्या बनाए रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान समझौते की दिशा में हुई प्रगति से बाज़ार की धारणा (sentiment) को मदद मिली है, हालांकि बातचीत अभी भी शर्तों पर आधारित है। जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक मध्य पूर्व को लेकर बनी अनिश्चितता बड़े जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर सकती है। पोनमुडी ने आगे कहा कि WTI क्रूड का $78-79 प्रति बैरल के आसपास बने रहना यह बताता है कि बाज़ार अभी भी कुछ जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम (भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम) को ध्यान में रख रहे हैं।

पोनमुडी ने कहा कि निफ़्टी का टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,600-24,700 का ज़ोन मुख्य रेजिस्टेंस एरिया बना हुआ है। इसके ऊपर लगातार बने रहने से तेज़ी का मोमेंटम मज़बूत हो सकता है और 24,800-25,000 के स्तर तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,500 तुरंत सपोर्ट का काम कर रहा है, और उसके बाद 24,400-24,300 का ज़ोन सपोर्ट के तौर पर है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: कमजोर जॉब रिपोर्ट से दौड़ा ग्लोबल बाजार, एशिया में तेजी, निक्केई, कोस्पी 1.5% ऊपर

Asian Market Today:  एशियाई शेयर बाज़ारों में तेजी देखने को मिली। वॉल स्ट्रीट में शुक्रवार के सत्र के बाद आई बढ़त को देखते हुए थी, जो उम्मीद से कमज़ोर अमेरिकी जॉब डेटा के कारण हुई थी। रिकॉर्ड ऊंचाई पर S&P बंद हुआ। नैस्डैक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। निक्केई में 1.29% और कोस्पी में 1.47% की बढ़त हुई, जबकि टोपिक्स में 0.36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.5% की तेज़ी दिखी, हालांकि S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2% की गिरावट आई।

यह तेज़ी उस खबर के बाद आई जिसमें पता चला कि अमेरिकी नियोक्ताओं ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियों में कटौती की थी, और पिछले दो महीनों के हायरिंग के आंकड़ों को भी घटाकर संशोधित किया गया था।

वॉल स्ट्रीट

रविवार रात S&P 500 फ्यूचर्स में गिरावट आई, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौते की संभावना को लेकर चिंताएं बढ़ गई।

S&P 500 से जुड़े फ्यूचर्स में लगभग 0.2% की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.1% की बढ़त हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 99 अंक या 0.2% गिरे।

कच्चे तेल की कीमतें

सोमवार को तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ईरान ने कहा कि ओमान के साथ नए शिपिंग रूट बनाने का समझौता पूरा होने वाला है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका को अभी भी कुछ अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी होंगी।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 91 सेंट या 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गए, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 61 सेंट या 0.78% बढ़कर $78.79 प्रति बैरल हो गए।

पिछले हफ़्ते इन दोनों बेंचमार्क में 7% से ज़्यादा की गिरावट आई थी। यह गिरावट इस उम्मीद में हुई थी कि ईरान और ओमान एक समझौते के करीब हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का रास्ता साफ़ हो सकता है। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता था।

अमेरिका-ईरान युद्ध

ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता “अंतिम चरण” में है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य तभी फिर से खोला जाएगा जब अमेरिका अतिरिक्त शर्तें पूरी कर लेगा। इन शर्तों में तेहरान को उन बड़े हमलों के लिए मुआवज़ा देना भी शामिल है जिनका उसे सामना करना पड़ा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है और जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन करता रहेगा, ईरान बातचीत शुरू नहीं करेगा।

इस बीच, ईरान का समर्थन करने वाली हूथी सेनाओं ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया है। यह घटना सऊदी अरब द्वारा तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने के दो दिन बाद हुई, जबकि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के टकराव के कारण इलाके में तनाव बढ़ रहा है।

अलग से, संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी ADNOC ने शुक्रवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय उसके 15 जहाजों पर हमले हुए हैं।

आज सोने की कीमत

जनवरी के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। ट्रेडर्स ने अमेरिकी लेबर मार्केट में अप्रत्याशित गिरावट का आकलन किया, जिससे ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंता कम हुई।

पिछले हफ्ते 7% से अधिक की बढ़त के बाद, एशियाई बाजार में शुरुआती घंटों में सोना लगभग $4,345 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

हाल के हफ्तों में यह कीमती धातु काफी हद तक $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है। जून में युद्ध के कारण हुई भारी बिकवाली से सोना ‘बेयर मार्केट’ (गिरावट वाले बाजार) में चला गया था, जिसके बाद अब कम कीमत पर खरीदारी (dip-buying) में तेजी आई है।

हालिया रिकवरी के बावजूद, सोना अभी भी फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से लगभग 20% नीचे है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।