अब होर्मुज की टेंशन खत्म! रूस ने चली ऐसी चाल कि भारत तक बिना समुद्र पार किए पहुंचेगा माल, मॉस्को से नई दिल्ली तक बनेगी रेल लाइन?

Russia-India Rail Link: रूस अब भारत के साथ तेल कारोबार समेत अन्य व्यापार बढ़ाने के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बेहद महत्वाकांक्षी विकल्प तलाश रहा है। रूस ने मॉस्को से भारत तक मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते एक ओवरलैंड रेलवे कनेक्शन की संभावनाओं पर विचार शुरू करने का संकेत दिया है। अगर यह विचार जमीन पर उतरता है, तो रूस से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए एक ऐसा वैकल्पिक रूट तैयार हो सकता है, जो कई महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) को दरकिनार करते हुए सीधे जमीन के रास्ते हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच बनाएगा।

‘The Chenab Times’ के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कथित तौर पर इस तरह के रेलवे कनेक्शन की संभावना की विस्तृत जांच की वकालत की है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार, Marat Khusnullin ने हिंद महासागर तक पहुंच बनाने वाले रेल रूट की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की बात कही है। इस कदम का मकसद भारत और रूस के बीच व्यापार के रास्तों में विविधता लाना। साथ ही समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

समुद्री रास्तों के जोखिम से परेशान रूस?

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री रूट में बढ़ती अस्थिरता और वहां पैदा होने वाले जोखिमों को माना जा रहा है। खुसनुलिन ने कथित तौर पर बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया। उनका संकेत था कि अगर भारत तक पहुंचने वाला कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध हो सकता है, तो उसकी जांच की जानी चाहिए।

हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में रूस के लिए जमीन के रास्ते भारत और हिंद महासागर तक पहुंच बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

कहां-कहां से गुजरेगी प्रस्तावित रेल लाइन?

सबसे चौंकाने वाली बात इस संभावित रूट को लेकर है। प्रस्तावित अवधारणा के तहत रेल कॉरिडोर को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई संवेदनशील देशों से होकर भारत तक लाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

संभावित रूट में ये देश शामिल हो सकते हैं:-

रूस-तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत…

हालांकि, अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई अंतिम रूप से मंजूर रेलवे प्रोजेक्ट नहीं है। रूस की तरफ से फिलहाल इसकी व्यवहार्यता और संभावित रूट की जांच की बात सामने आई है। अभी तक परियोजना की लागत, फंडिंग मॉडल, सटीक रेल रूट, निर्माण एजेंसियों या पूरा होने की समयसीमा को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत के लिए क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट?

भारत के लिए इस प्रोजेक्ट का महत्व काफी ज्यादा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। अगर रूस से भारत तक एक मजबूत ओवरलैंड रेल नेटवर्क तैयार होता है, तो दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे रूस से भारत आने वाले ऊर्जा उत्पाद, कच्चा माल, मशीनरी, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए नए विकल्प पैदा हो सकते हैं।

INSTC के साथ जुड़ सकता है यह विचार

रूस लंबे समय से भारत तक पहुंच के लिए वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण व्यापार रूट्स को बढ़ावा देने में रुचि रखता है। इसी व्यापक रणनीति में इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रस्तावित रेल कनेक्शन इस तरह के उत्तर-दक्षिण संपर्क को एक नई दिशा दे सकता है। खासकर अगर मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच रेल नेटवर्क को आपस में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। इससे रूस को भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य तेजी से बढ़ते बाजारों तक भी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

पाकिस्तान बना सबसे बड़ी चुनौती

योजना सुनने में जितनी बड़ी है, इसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित रूट्स जिन देशों से होकर गुजरता है, उनमें से प्रत्येक के सामने अलग-अलग राजनीतिक, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां हैं। अफगानिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता एक बड़ी चुनौती है। वहीं, पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए भारत तक रेल लाइन पहुंचाने के लिए जटिल राजनयिक और सुरक्षा समझौतों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा पहाड़ी और कठिन भौगोलिक इलाकों में रेल लाइन का निर्माण अपने आप में बहुत महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ईरान क्यों बन सकता है सबसे अहम कड़ी?

इस प्रस्ताव में ईरान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ईरान पहले से ही रूस और भारत के बीच वैकल्पिक व्यापार रूट्स की रणनीति में अहम स्थान रखता है। रूस के लिए ईरान के जरिए हिंद महासागर तक पहुंच बनाना समुद्री चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने का रास्ता हो सकता है। यही कारण है कि भारत, रूस और ईरान के बीच परिवहन संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं को आने वाले वर्षों में रणनीतिक महत्व मिल सकता है।

रूस के निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी क्षमता

इसी संदर्भ में खुसनुलिन ने रूस के निर्माण क्षेत्र को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि अगर कम से कम पांच साल के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो रूस का निर्माण क्षेत्र हर साल अतिरिक्त 1 ट्रिलियन रूबल तक के निवेश को absorb करने में सक्षम है। इससे संकेत मिलता है कि रूस अपने परिवहन और बुनियादी ढांचे के विस्तार को केवल विदेश नीति के नजरिए से नहीं बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साधन के तौर पर भी देख रहा है।

क्या बदल सकता है पूरा क्षेत्रीय व्यापार समीकरण?

अगर कभी यह रेल कॉरिडोर वास्तविकता बनता है, तो इसका असर सिर्फ रूस और भारत तक सीमित नहीं रहेगा। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ सकता है, ईरान को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में मजबूत कर सकता है और भारत को यूरोप तथा रूस से आने वाले माल के लिए एक अतिरिक्त जमीनी संपर्क दे सकता है। साथ ही, रूस के लिए यह अपने व्यापार को ऐसे समुद्री मार्गों से दूर diversify करने का साधन बन सकता है, जहां युद्ध, राजनीतिक तनाव या भू-राजनीतिक संकट के कारण कभी भी व्यवधान पैदा हो सकता है।

अभी सपना, लेकिन रणनीतिक संकेत बेहद बड़ा

फिलहाल, मॉस्को से भारत तक इस प्रस्तावित रेल लाइन को घोषित और मंजूर प्रोजेक्ट नहीं माना जा सकता। क्योंकि इसकी आधिकारिक घोषणा से पहले सुरक्षा, लागत, फंडिंग और संबंधित देशों की राजनीतिक सहमति जैसे कई सवाल अभी बाकी हैं। लेकिन रूस द्वारा इस विकल्प पर सार्वजनिक रूप से विचार किए जाने का संकेत अपने आप में महत्वपूर्ण है।

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मॉस्को साफ तौर पर अपने व्यापारिक रास्तों को ज्यादा सुरक्षित और एशिया केंद्रित बनाने की कोशिश कर रहा है। इस रणनीति में भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार और रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। अगर रूस-भारत के बीच मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते ऐसा ओवरलैंड कॉरिडोर वास्तव में बन पाया, तो यह सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं होगी। बल्कि यूरेशिया के व्यापार समीकरण को बदलने वाला नया संपर्क रूट्स साबित हो सकता है।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उछाल और वेस्ट एशिया को लेकर बढ़ा कंफ्यूजन क्या बाजार पर दिखाएगा असर, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, Wall Street में रात भर हुई गिरावट और US के अहम जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजारों में सावधानी के माहौल के बीच GIFT Nifty आज सुबह गिरा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के कारण जियोपॉलिटिकल जोखिम बने हुए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी से कुछ सहारा मिल सकता है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 24,647 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले सेशन की क्लोजिंग से 101 अंक या 0.41 फीसदी नीचे था। हालांकि, यह गुरुवार को Nifty 50 की 24,636 की क्लोजिंग से थोड़ा ऊपर बना रहा, जिससे घरेलू बेंचमार्क के लिए फ्लैट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।

गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48 फीसदी बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 11.35 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ। PSU बैंकों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में कमजोरी ने बढ़त को सीमित कर दिया।

US जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजार सर्तक

शुक्रवार को एशियाई शेयरों में सावधानी के साथ कारोबार हुआ क्योंकि निवेशक US के रोजगार डेटा का इंतजार कर रहे थे, जो अगले महीने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले पर उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स फ्लैट रहा और इसमें साप्ताहिक आधार पर 0.4 फीसदी की गिरावट की ओर बढ़ रहा था। जापान का Nikkei 225 0.9 फीसदी गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 0.5 फीसदी नीचे आया। हालांकि, चीन के CSI 300 में 0.2 फीसदी की बढ़त हुई।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी सुस्त रहे। Nasdaq फ्यूचर्स फ्लैट रहे और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 फीसदी नीचे रहे। गुरुवार को US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली की, साथ ही वे कॉर्पोरेट नतीजों और US-ईरान संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों से जुड़े घटनाक्रमों का आकलन कर रहे थे। डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.85 फीसदी गिरा, S&P 500 में 0.18 फीसदी की गिरावट आई और नैस्डैक कम्पोजिट 0.06 फीसदी नीचे आया।

यह गिरावट हफ्ते की मजबूत शुरुआत के बाद आई है, जिसमें डाऊ और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इसकी वजह मजबूत अर्निंग्स सीज़न और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव के संभावित डिप्लोमैटिक समाधान को लेकर उम्मीद थी।

क्रूड में उछाल

शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से शिपिंग को लेकर अनिश्चितता फिर से सामने आ गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत बढ़कर $83.48 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.1 प्रतिशत बढ़कर $78.84 हो गया। यह बढ़ोतरी गुरुवार को $3 प्रति बैरल से ज़्यादा की बढ़त के बाद हुई।

नई चिंताएं तब सामने आईं जब ईरान ने ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दुश्मन माने जाने वाले जहाज़ों पर पाबंदियां लगाने और प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाज़ों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए क्या है अहम लेवल

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि मिडिल ईस्ट में संभावित डिप्लोमैटिक सफलता को लेकर उम्मीदें किसी औपचारिक समझौते के न होने से कमज़ोर पड़ गई हैं, जिससे बाज़ार जियोपॉलिटिकल खबरों के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने एशियाई इक्विटी में कमज़ोरी की ओर भी इशारा किया, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी, जो ग्लोबल निवेशकों के बीच लगातार सावधानी का संकेत है।

पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी का व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और अगर यह स्तर लगातार टूटता है तो 24,800-25,000 की ओर मोमेंटम मज़बूत हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,600 तत्काल सपोर्ट है, उसके बाद 24,500 है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी, निक्केई 1.5% टूटा

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।  कोस्पी और निक्केई 1.5 फीसदी तक टूटा है। निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में एक और बढ़ोतरी पर नजर रखे हुए थे और ब्याज दरों के भविष्य के बारे में संकेत पाने के लिए अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे थे। निक्केई करीब 0.96 फीसदी की गिरावट के  साथ 65,061.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.34 फीसदी की  बढ़त दिखा रहा है।  ताइवान का बाजार 0.24 फीसदी  गिरकर 44,290.00 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ25,436.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 0.61 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ3,909.90 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

गुरुवार रात अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में ज़्यादातर कोई हलचल नहीं दिखी, क्योंकि निवेशक जुलाई की जॉब्स रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे थे, जिस पर सबकी नज़रें टिकी थीं। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.04% और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में 0.3% की मामूली बढ़त हुई, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 17 अंक या 0.03% गिर गए।

यह सुस्त चाल वॉल स्ट्रीट में कमज़ोर सेशन के बाद दिखी, जहां तेल की बढ़ती कीमतों ने इक्विटी पर दबाव डाला। डॉव जोन्स 460 अंक से ज़्यादा या 0.9% गिर गया, जिससे लगातार पांच सेशन की बढ़त का सिलसिला टूट गया। इस बीच, S&P 500 में 0.2% और नैस्डैक कम्पोजिट में 0.1% की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतें

शुक्रवार को तेल की कीमतों में और बढ़त हुई, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तक पहुंच को लेकर नई चिंताएँ पैदा हो गईं। ईरान ने ओमान के साथ मिलकर प्रस्ताव दिया है कि दुश्मन माने जाने वाले जहाज़ों को इस अहम जलमार्ग से गुज़रने से रोका जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 99 सेंट या 1.2% बढ़कर $83.48 प्रति बैरल हो गए, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 85 सेंट या 1.1% बढ़कर $78.84 प्रति बैरल हो गए।

US-ईरान युद्ध

ईरान एक ऐसे बिल पर विचार कर रहा है जो अमेरिका, इज़राइल और दुश्मन माने जाने वाले दूसरे देशों के जहाज़ों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रने से रोकेगा। यह एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा गुज़रता था।

ईरान की फार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, ईरान के एक सांसद ने कहा कि संसद की एक कमिटी एक प्रस्ताव के मसौदे की जांच कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत न सिर्फ़ ऐसे जहाज़ों के इस रास्ते का इस्तेमाल करने पर रोक लगेगी, बल्कि इन नियमों को तोड़ने वालों पर कार्गो की कीमत का 20% तक जुर्माना भी लगाया जाएगा।

इसके अलावा, ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि तेहरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से कार्गो की कीमत का 5% से 7% तक ट्रांज़िट शुल्क (गुज़रने का शुल्क) वसूलना चाहता है। खबर है कि ओमान लगभग 3% शुल्क के लिए बातचीत कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि जहाज़ बिना किसी शुल्क के गुज़रें।

आज सोने की कीमत

शुक्रवार को सोने की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और तेल की कीमतों में नरमी के कारण इसमें जनवरी के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त देखने को मिली। निवेशक फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों के बारे में नए संकेत पाने के लिए अमेरिका की आने वाली ‘नॉन-फार्म पेरोल’ रिपोर्ट पर भी नज़र बनाए हुए थे।

स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,235.57 प्रति औंस पर स्थिर रही, जिससे इसकी साप्ताहिक बढ़त 4.8% हो गई। वहीं, US गोल्ड फ्यूचर्स 0.1% गिरकर $4,293.80 पर आ गया।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: क्रूड में उछाल और वेस्ट एशिया को लेकर कंफ्यूजन से बाजार के सेंटिमेंट कमजोर हुआ। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट नीचे। GIFT निफ्टी, जो निफ्टी 50 के परफॉर्मेंस का शुरुआती इंडिकेटर है, 24,653 पर ट्रेड कर रहा था। गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48% बढ़कर 78,954.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 11.35 अंक या 0.05% बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ।

एनर्जी मार्केट पर भी नज़रें टिकी रहीं क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सामान्य शिपिंग बहाल करने की कोशिशों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ब्रेंट क्रूड 1.4% बढ़कर $83.65 प्रति बैरल हो गया; इस अहम जलमार्ग पर कोई स्थायी व्यवस्था न होने से मध्य पूर्व से सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क में इस साल 37% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में क्रूड की ऊंची कीमतों का असर वॉल स्ट्रीट पर भी दिखा था। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 460 अंक या 0.9% से ज़्यादा गिरा, जिससे लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। S&P 500 में 0.2% और नैस्डैक कंपोजिट में 0.1% की गिरावट आई

Gold Silver price Today: 7 हफ्ते के हाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी चढ़ी, बुलियन में तेजी की क्या है वजह?

Gold Silver price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी देखने को मिली। वहीं चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और गिरती ट्रेज़री यील्ड जैसे कारणों ने सोने-चांदी की मांग को बढ़ावा दिया। COMEX पर, सोने के फ़्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,361.30 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के फ़्यूचर्स 0.65% बढ़कर $62.695 प्रति औंस हो गए। स्पॉट मार्केट में, सोना $4,285.84 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है।

यह हालिया बढ़ोतरी पिछले सत्र में बुलियन (सोना-चांदी) में फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त के बाद हुई है।

कीमतों में बढ़त क्यों

कमजोर डॉलर से सस्ता होता है सोना

प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कमज़ोर हुआ, जिससे डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी विदेशी खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गई। कमजोर डॉलर आमतौर पर वैश्विक बाज़ारों में बुलियन की मांग को समर्थन देता है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी कमी आई, जिससे सोने जैसी बिना यील्ड (ब्याज) वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो गई। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो निवेशक अक्सर कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाते हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें

बाजारों में तब आशावाद देखा गया जब रिपोर्टों से संकेत मिला कि राजनयिक प्रयासों से पश्चिम एशिया में कोई समाधान निकल सकता है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर चर्चा भी शामिल है। तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों को नीचे धकेल दिया।

कच्चे तेल की कम कीमतें ऊर्जा-जनित महंगाई के डर को भी कम करती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो जाती हैं। इससे सोने के लिए एक अनुकूल माहौल बनता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें चर्चा में

निजी पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर रहने और लेबर मार्केट में कुछ नरमी के संकेत मिलने के बाद निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण का भी पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

बाजार पार्टिसिपेट अब शुक्रवार (7 अगस्त) को आने वाली अमेरिकी नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। कमजोर जॉब्स रिपोर्ट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने को और समर्थन मिलेगा। इसके विपरीत, उम्मीद से मज़बूत रोज़गार डेटा सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को फिर से जगाकर बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

चांदी का क्या हाल है?

चांदी भी मजबूत बनी रही, जिसे उन्हीं मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों का समर्थन मिला जिनसे सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कम बॉन्ड यील्ड और डॉलर के कमजोर होने से फायदा मिलने के अलावा, चांदी को एक कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल, दोनों तरह की भूमिकाओं से भी सपोर्ट मिल रहा है।

निवेशकों की नजरें आने वाले US के आर्थिक डेटा और सेंट्रल बैंक की उम्मीदों पर टिकी हैं, इसलिए आने वाले समय में सोने और चांदी, दोनों में उतार-चढ़ाव के बने रहने की संभावना है।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजारों में गिरावट के बीच क्या हरे निशान में खुलेंगे भारतीय बाजार, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator:  कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, US-ईरान शांति समझौते की दिशा में प्रगति की उम्मीदें और घरेलू कंपनियों की अच्छी कमाई का माहौल भारतीय इक्विटी को सहारा दे सकता है। हालांकि एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी का असर क्षेत्रीय बाजारों पर पड़ रहा है। यहीं कारण है कि 6 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। ग्लोबल संकेतों के मिले-जुले होने के बावजूद GIFT निफ्टी पॉजिटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है।

सुबह लगभग 7:45 बजे GIFT निफ्टी 58.5 अंक या 0.24 फीसदी बढ़कर 24,693 पर ट्रेड कर रहा था, जो संकेत देता है कि निफ्टी 50 बुधवार के 24,624.65 के क्लोजिंग लेवल से ऊपर खुल सकता है। यह पॉजिटिव संकेत भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के बुधवार के सेशन में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मजबूती के साथ बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 152.05 अंक या 0.19 फीसदी बढ़कर 78,581.00 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 9.75 अंक या 0.04 फीसदी बढ़कर 24,624.65 पर पहुंचा और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद 24,600 के स्तर से ऊपर बंद होने में कामयाब रहा।

एशियाई बाजारों में गिरावट

बुधवार की जोरदार तेजी के बाद एशियाई इक्विटी में सुस्ती देखी गई, जिसमें वॉल स्ट्रीट में रात भर की कमजोरी के बाद टेक्नोलॉजी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.69 प्रतिशत की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 1.57 प्रतिशत गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.64 फीसदी नीचे आया क्योंकि बड़ी चिप बनाने वाली कंपनियों पर दबाव था। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 2.44 फीसदी की गिरावट आई, जबकि SK हाइनिक्स लगभग 7 फीसदी लुढ़क गया।

US बाजार रात भर मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए, जिसमें डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज एक और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति को लेकर उम्मीद टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी पर भारी पड़ी। डाउ में 0.49 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 में 0.17 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.83 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि तिमाही नतीजों के बाद स्पेसएक्स और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस के शेयरों में कमजोरी देखी गई।

तेल की कीमतों में नरमी

कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई क्योंकि निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या ईरान-ओमान बातचीत में हुई प्रगति से अंततः अमेरिका-ईरान के बीच व्यापक शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.18 प्रतिशत गिरकर 79.31 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.35 प्रतिशत गिरकर 74.96 डॉलर पर आ गया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिसी फैसले के बाद, अब निवेशकों का ध्यान अप्रैल-जून तिमाही के जारी अर्निंग्स सीजन (कंपनियों के नतीजों के दौर) पर लौटने की उम्मीद है। कंपनियों के नतीजे और मैनेजमेंट की कमेंट्री स्टॉक-स्पेसिफिक हलचल के मुख्य कारण बने रहेंगे, जबकि मध्य पूर्व से जुड़ी वैश्विक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व्यापक बाजार धारणा को प्रभावित करते रहेंगे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को लगातार छह सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और वे नेट सेलर (शुद्ध विक्रेता) बन गए, तथा 943 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया, जिससे विदेशी बिकवाली के असर को कम करने में मदद मिली।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Stock Market: वॉल स्ट्रीट की थमी तेजी, एशियन मार्केट धड़ाम, निक्केई करीब 2% और कोस्पी 4% टूटा

Asian Stock Market: एशियन मार्केट में 6 अगस्त को गिरावट आई है। आज आई यह गिरावट वॉल स्ट्रीट में हाल ही में टेक्नोलॉजी सेक्टर की वजह से आई तेजी की रफ्तार के धीमी पड़ने के कारण रही है। इस बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर दक्षिण कोरिया पर पड़ा, जहां कोस्पी (Kospi) 4.69% गिर गया। जापान का निक्केई (Nikkei) 1.88% नीचे आया। जबकि टोपिक्स (Topix) में मामूली 0.22% की गिरावट हुई। व्यापक MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.2% फिसला और हैंग सेंग फ्यूचर्स 0.9% नीचे रहा, जिससे संकेत मिलता है कि सावधानी का माहौल पूरे क्षेत्र में फैल रहा था, न कि सिर्फ़ किसी एक बाज़ार तक सीमित था।

वॉल स्ट्रीट

वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में मिला-जुला कारोबार हुआ। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद होने के बाद निवेशक अब कंपनियों की अगली तिमाही की कमाई (कॉर्पोरेट अर्निंग्स) पर ध्यान दे रहे हैं।

डॉव जोन्स फ्यूचर्स में 92 अंक या 0.2% की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2% की तेजी आई। वहीं, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

पिछले सेशन में, डॉव 263.24 अंक या 0.49% चढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग ऊंचाई पर पहुंचा और लगातार पांचवें सेशन में बढ़त बनाए रखी। इसके विपरीत, S&P 500 में 0.17% की गिरावट आई, जिससे चार दिन की तेजी का सिलसिला थम गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.83% गिरा।

शानदार कमाई के बावजूद SpaceX के शेयरों में 14% की गिरावट आई, क्योंकि निवेशक गुरुवार को लगभग 101 अरब डॉलर के स्टॉक के ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होने की तैयारी कर रहे थे। चिप से जुड़ी कंपनियों के लिए निराशाजनक माहौल के बीच, डेटा-स्टोरेज फर्म Sandisk और Western Digital के शेयरों में उनके नतीजे आने के बाद ‘आफ्टर-आवर्स’ ट्रेडिंग में क्रमशः 7.5% और 11% की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतें

गुरुवार को तेल की कीमतों में नरमी आई क्योंकि निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या ईरान-ओमान के बीच चल रही बातचीत से अमेरिका-ईरान शांति समझौता हो सकता है। इससे पांच महीने से चल रहा संघर्ष खत्म हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल सकता है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 37 सेंट या 0.5% गिरकर 79.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 53 सेंट या 0.7% गिरकर 74.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। पिछले सेशन में, ब्रेंट में मामूली बढ़त हुई थी, जबकि WTI मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ था।

अमेरिका-ईरान युद्ध

बुधवार को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच एक प्रस्तावित समझौते पर बातचीत हो रही है। इसका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करना है। इस समझौते के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर तेहरान का अधिकार हो सकता है। अगर यह समझौता फाइनल हो जाता है, तो यह ईरान को अब तक मिली सबसे बड़ी रियायतों में से एक होगी।

अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए जल्द ही कोई समझौता हो सकता है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का लगातार यही कहना है कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य (जो वैश्विक ऊर्जा शिपिंग का एक प्रमुख मार्ग है) तक पहुंच पर ईरान का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा।

इस बीच, पांच सूत्रों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर कोई नया सैन्य हमला करता है, तो वह पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जवाबी हमले करेगा। यह चेतावनी तेहरान की उस रणनीति को दर्शाती है जिसके तहत वह वाशिंगटन के क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों को खतरे में डालकर सैन्य कार्रवाई की संभावित कीमत बढ़ाना चाहता है।

आज सोने की कीमत

गुरुवार को लगातार चौथे सत्र में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और यह सात हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह कमजोर अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में कमी थी, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीदों से भी इसे समर्थन मिला।

स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,285.69 प्रति औंस हो गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। इससे पिछले सत्र में भी इस कीमती धातु ने फरवरी के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

गल्फ संकट के दौरान भारत ने होर्मुज से कैसे निकाले अपने 60 जहाज? संसद में सरकार ने बताया पूरा प्लान

संसद में सरकार ने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में पैदा हुए तनाव के दौरान उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बावजूद भारत ने अपने महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और जरूरी सामान की आवाजाही को जारी रखा। इसके लिए संबंधित एजेंसियों ने लगातार निगरानी रखी और समय पर आवश्यक कदम उठाए, जिससे देश की आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ा। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे। सरकार ने ये भी बताया कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया।

इसके अलावा 24 घंटे एक्टिव रहे संकट प्रबंधन सिस्टम ने इस दौरान हजारों फोन कॉल और ईमेल का जवाब देकर लोगों की मदद की। सरकार की ओर से शेयर किए गए ये आंकड़े बताते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान भारत ने किस तरह हालात से निपटने के लिए बड़े स्तर पर काम किया।

भारत में ज्यादातार तेल खाड़ी देशों से आता है

खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर दूसरे देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश प्रमुख हैं। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक कोई रुकावट आती है, तो इसका असर तेल की सप्लाई, माल ढुलाई की लागत और बीमा खर्च पर पड़ सकता है। इससे देश में ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

60 मालवाहक जहाज आए वापस

सरकार ने बताया कि तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारत की ओर आने वाले 60 मालवाहक जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोगों की सुरक्षा और सहायता को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार ने जानकारी दी कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, संकट के दौरान समुद्री जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और जरूरत पड़ने पर सहायता व परामर्श की व्यवस्था भी की गई। संकट के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए आपातकालीन सहायता व्यवस्था पूरी तरह एक्टिव रखी गई थी।

24 घंटे किया गया काम

सरकार ने बताया कि, पूरे संकट के दौरान 24 घंटे कंट्रोल रूम और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग का संचार केंद्र लगातार एक्टिव रहा। आपात स्थिति में जहाजों को निर्देश दिए गए थे कि वे तुरंत नजदीकी भारतीय नौसेना या सहयोगी देशों के युद्धपोत से संपर्क करें। साथ ही घटना की जानकारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) को भी तुरंत दें, ताकि समय रहते जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।

सरकार के अनुसार, संकट के दौरान शुरू की गई सहायता व्यवस्था का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। कंट्रोल रूम शुरू होने के बाद वहां नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की बड़ी संख्या में मदद की गई। इस दौरान 15,771 फोन कॉल और 36,499 ईमेल का जवाब दिया गया, जिससे साफ है कि हालात को लेकर लोगों में चिंता थी और लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी था।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

Gold Silver Price Outlook: देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतों में 5 अगस्त को बढ़त देखने को मिली। मजबूत ग्लोबल संकेतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर इन कीमती धातुओं की मांग के कारण घरेलू वायदा बाजार (फ्यूचर्स मार्केट) में दोनों में तेजी देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 4,545 रुपये या 2.05 फीसदी बढ़कर 2,26,160 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इस साल 9 जुलाई को भी चांदी इसी स्तर के आसपास ट्रेड कर रही थी, जब कमोडिटी एक्सचेंज पर इसकी कीमत 2,26,377 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने के वायदा भाव ₹2,165 या 1.5% बढ़कर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए।

ग्लोबल बाज़ार में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स (Comex) गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 2% बढ़कर $4,226.50 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 3.21% बढ़कर $61.46 प्रति औंस हो गए।

सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी?

जानकारों का कहना है कि यह तेजी जियोपॉलिटिकल हालात, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच कीमती धातुओं की बढ़ती मांग की वजह से आई है।

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में भी बढ़त देखी गई, क्योंकि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोना खरीदना बढ़ाया है।”

जानकारों के मुताबिक, मार्केट में नए सौदे होने से चांदी की कीमतों को भी फायदा हुआ।

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बातचीत में प्रगति की खबरों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई और कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, जिसके बाद बुलियन की कीमतों में बढ़त हुई।

कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम कर सकती हैं, जिससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ता है और कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलता है।

RBI का पॉलिसी फ़ैसला और उसका असर

यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने लगातार चौथी पॉलिसी मीटिंग में बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

कैपिटलXB के को-फ़ाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजिताभ भारती ने कहा कि RBI का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई के जोखिमों पर नजर रखने के बीच संतुलन को दिखाता है। “हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ग्लोबल महंगाई के आउटलुक पर असर डाल रहा है, लेकिन RBI का ध्यान विकास को बढ़ावा देने और साथ ही महंगाई पर बारीकी से नजर रखने पर बना रहेगा।”

इंडियन कंज्यूमर के लिए इस बढ़ोतरी का क्या है मतलब?

सोने-चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी त्योहारी सीजन से ठीक पहले हुई है, जब भारत में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। ऊंची कीमतें गहने खरीदने के फैसलों पर असर डाल सकती हैं, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अपनी मर्जी से या गैर-जरूरी चीजों के लिए खरीदारी करते हैं।

कामा ज्वैलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितता और बदलती आर्थिक स्थितियों की वजह से ग्राहक ज़्यादा सतर्क हो सकते हैं।शाह ने कहा, “आर्थिक हालात के अनिश्चित होने की वजह से लोग सतर्क हो रहे हैं। जैसे-जैसे हम त्योहारी सीजन की ओर बढ़ रहे हैं, इसका असर घरेलू मांग पर थोड़ा दिखेगा, खासकर सोना खरीदने के मामले में।”हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सोने की पारंपरिक भूमिका यानी मूल्य को सुरक्षित रखने का जरिया – लंबे समय तक इसकी मांग को बनाए रख सकती है।

आगे कहां तक जाएंगे भाव

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि अगर सोने की कीमत $4,200 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो इसके $4,500 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर, इससे सोने की कीमतें लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं।

वहीं चांदी के आउटलुक पर अगर कीमत लगातार $63 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो यह $70-$71 प्रति औंस की रेंज तक जा सकती है, जो लगभग ₹2.50-2.55 लाख प्रति किलोग्राम के बराबर है।

Silver Price Today: तेजी से बढ़ रही है चांदी की कीमतें, खरीदारी से पहले जान लें 10 प्रमुख शहरों के ताजा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या बाजार में भरेगी जोश, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा हैं संकेत, RBI की पॉलिसी पर नजर

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। वॉल स्ट्रीट के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने , कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण एशियाई बाजारों में तेजी के बाद GIFT निफ्टी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहा है। आज सबकी नजरें RBI के पॉलिसी फ़ैसले पर होंगी, जिससे बैंकों, NBFCs, ऑटो और रियल्टी जैसे ब्याज दरों से असर पड़ने वाले सेक्टर के शेयरों पर ध्यान रहेगा।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 165 अंक या 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 24,745 पर ट्रेड कर रहा था, जो यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,614.90 के क्लोजिंग स्तर से काफी ऊपर खुल सकता है। बाजार के सकारात्मक शुरुआत के संकेत तब आए हैं जब भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने मंगलवार को लगातार चार सत्रों की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया था। सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 78,428.95 पर आ गया, जबकि निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। RBI के पॉलिसी फैसले और साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

एशियाई बाजारों में तेजी, वॉल स्ट्रीट रिकॉर्ड ऊंचाई पर

बुधवार को एशियाई इक्विटी में वैश्विक तेजी जारी रही, क्योंकि टेक्नोलॉजी कंपनियों की अच्छी कमाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति की उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। जापान का निक्केई 225 3 फीसदी बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4 फीसदी चढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 1.5 फीसदी ऊपर चढ़ा।

शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी फ्यूचर्स मिले-जुले रहे, जिसमें बेंचमार्क के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी ऊपर चढ़े।

अमेरिकी इक्विटी में रात भर आई तेजी के बाद वैश्विक धारणा में काफी सुधार हुआ। अच्छी कॉर्पोरेट कमाई और जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। डॉव 1.71 प्रतिशत चढ़ा, जबकि S&P 500 में 1.79 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 2.59 फीसदी की बढ़त हुई। पैलांटिर टेक्नोलॉजीज और कैटरपिलर जैसी AI से जुड़ी कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों और सालाना अनुमानों में बढ़ोतरी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ावा दिया।

तेल की कीमतों में गिरावट जारी

पिछले सेशन में 5 प्रतिशत से ज़्यादा गिरने के बाद कच्चे तेल की कीमतें दबाव में रहीं, क्योंकि US-ईरान विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट के डर को कम कर दिया। ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर $79.02 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.5 फीसदी गिरकर $75.35 पर आ गया।

RBI के पॉलिसी फैसले पर नज़र

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीद और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार के निकट-अवधि के नजरिए को मजबूत किया है, जबकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से भी बाजार की धारणा को मजबूती मिल रही है।

पोनमुडी ने कहा कि निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से बुधवार को आने वाले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर है। बाजार के प्रतिभागी महंगाई, लिक्विडिटी, ग्रोथ और व्यापक पॉलिसी आउटलुक पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।