‘ईरान और हूतियों को भयानक मिलिट्री सजा दी जाएगी, अब फिर हमला हुआ तो…’, सऊदी के जहाजों पर अटैक के बाद ट्रंप का फूटा गुस्सा; दे डाली धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान समर्थित हूतियों के किसी भी भविष्य के हमले के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समूह फिर से जहाजों को निशाना बनाता है, तो उन्हें बड़ी सैन्य सजा दी जाए

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‘जहाज पर हमला किया तो पुल या पावर प्लांट उड़ा देंगे’, ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।

CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।

फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”

रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”

बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।

उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”

अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।

यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।

ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।

ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”

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Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

Gold Price : सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई है। निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर लगी है। मिडिल ईस्ट का संकट गहराने से तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। साथ ही,अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक और पॉलिसी मेकर ने संकेत दिया है कि बढ़ती महंगाई के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल हाजिर बाजार में सोने का भाव 0.3% गिरकर 4,004.63 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है। अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर 4,008.70 डॉलर पर आ गया है।

सोमवार को लगातार नौवें दिन अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेजी आई है। फिर से शुरू हुई लड़ाई में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों संख्या बढ़कर तीन हो गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं।

गोल्डसिल्वर सेंट्रल के मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रायन लैन का कहना है कि युद्ध अभी भी जारी है। ऐसे में बाजार की फोकस तेल की बढ़ती कीमतों पर बना हुआ है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और सोने पर दबाव बना हुआ है। हालांकि,गोल्ड के लिए 4,000 डॉलर का स्तर काफी अहम रहा है और यह दिखाता है कि जब भी गोल्ड स्तर से नीचे गिरता है तो उसे सपोर्ट मिलता है।

तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने के डर और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहने की आशंका को मजबूत कर रही हैं। हालांकि सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव (हेज) के रूप में देखा जाता है,लेकिन ऊंची ब्याज दरें बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) में बने रहने की अवसर लागत (opportunity cost) को बढ़ा देती हैं।

क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने उन पॉलिसी मेकर्स का सपोर्ट किया है जिनका तर्क है कि महंगाई में बढ़त को रोकने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। ऐसे में 29 जुलाई को फेड की अगली बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना दिख रही है।

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स अब दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 82% संभावना देख रहे हैं, जबकि पिछले सप्ताह यह 73% थी। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग की राय है कि लंबे समय के नजरिए से वे सोने को लेकर अधिक सतर्क है और 3,886 डॉलर के अहम लेवल पर नजर रखे हुए हैं। अगर यह स्तर नीचे की ओर टूटता है,तो सोने में और कमजोरी आ सकती है और यह 3,500 डॉलर की गिर सकता है।

वहीं दूसरी ओर,स्पॉट सिल्वर की प्राइस 1.3% बढ़कर 56.61 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। जबकि प्लेटिनम 0.3% गिरकर 1,587.20 डॉलर पर आ गया गया है। पैलेडियम 0.3% घटकर 1,243.99 डॉलर पर पहुंच गया है।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि आज के सेशन में सोने के लिए 3,989 डॉलर और 3,945 डॉलर पर सपोर्ट है,जबकि 4,040 डॉलर और 4,074 डॉलरप्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है। वहीं,चांदी के लिए 55.50 डॉलर और 54.40 डॉलर पर सपोर्ट है और 57.50 डॉलर और 58.80 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस है।

मनोज कुमार जैन का सुझाव है कि लॉन्ग-टर्म निवेशक बाजार में इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी जमा कर सकते हैं,लेकिन ट्रेडर्स को लॉन्ग पोजीशन में क्लोजिंग के आधार पर सोने के लिए 1,39,650 रुपए और चांदी के लिए 2,14,000 रुपए पर स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए और हर बढ़त पर मुनाफा बुक करना चाहिए।

 

 

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US Iran War News: क्या ईरान ने अमेरिका के सामने किया सरेंडर? ट्रंप के मंत्री ने तेहरान से बातचीत के दिए संकेत

US Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कई माध्यमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। CNN से बातचीत में रुबियो ने कहा, “हमें कई चैनलों के जरिए ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वहां की सत्ता और नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे को लेकर विभाजन भी बढ़ रहा है।”

सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीति के संकेत

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

इससे पहले भी रुबियो ने आरोप लगाया था कि ईरान क्षेत्रीय संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से भी वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजरानी की सुरक्षा के लिए अधिक सहयोग देने की अपील की।

दुनिया के देशों से सहयोग की अपील

फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अमेरिका समुद्री रूट्स की सुरक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। लेकिन अन्य देशों को भी उपकरण, संसाधन और आर्थिक सहयोग देकर इस जिम्मेदारी में भागीदारी करनी चाहिए।

लगातार नौवीं रात अमेरिकी हमले

ईरान पर अमेरिकी हमलों का सिलसिला लगातार नौवीं रात भी जारी रहा। ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई धमाके हुए। इसके अलावा मौजूदा अभियान के दौरान पहली बार उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज (Tabriz) में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सैन्य अभियान का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है।

ट्रंप बोले- फिर किया जोरदार हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा हमलों के बाद कहा कि यह कार्रवाई उन तीन महान देशभक्तों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ‘फीफा क्लब विश्व कप’ फाइनल से वॉशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर बहुत जोरदार हमला किया।”

बातचीत का रास्ता अब भी खुला

हालांकि, सैन्य संघर्ष लगातार तेज हो रहा है, लेकिन मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं, और यदि ईरान वार्ता के लिए आगे आता है तो अमेरिका उस विकल्प पर भी विचार करने को तैयार है।

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Iran Kuwait Conflict: ईरान के हमले से कुवैत के पावर प्लांट में लगी भीषण आग, अमेरिका ने भी तेज किए वार। देखें वीडियो

Iran Kuwait Conflict: कुवैत में रविवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब ईरान ने अल-सुबिया पावर जनरेशन और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। बता दें कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका ने लगातार नौवीं बार रात को ईरान के ठिकानों पर हमले किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अल-सुबिया प्लांट से उठता हुआ काला धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। ये वीडियो ओपन सोर्स इंटेल समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा शेयर किए गए हैं।

वहीं, ईरान के इस हमले पर कुवैत की सेना ने कहा कि उन्होंने दिन भर देश के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोनों को रोका।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा, “आज सुबह से ही सशस्त्र बलों ने कुवैत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाया है, जिन्हें रोककर बेअसर कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि “ईरान की निंदनीय आक्रामकता देश में आम नागरिकों और जरूरी सुविधाओं को निशाना बना रही है।” उन्होंने बताया कि बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े कुछ ठिकानों पर हमले किए गए, जिससे वहां आग लग गई और भारी नुकसान हुआ।

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ नए दौर के हमलों की घोषणा की। CENTCOM ने X पर कहा, “उसने आज शाम 7 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात नए हमले शुरू किए। ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना जारी रखेंगे जिनका इस्तेमाल होर्मुज (Strait Of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।”

मरीन वन से रवाना होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले उस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में किए गए थे।

ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर जोरदार हमला किया।” उन्होंने बताया कि ये हमले हाल के दिनों में मध्य पूर्व में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों के “सम्मान में” किए गए थे।

बता दें कि यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है, जब इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी कुवैत के बिजली और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमलों की खबर सामने आई थी।

कुवैत, जो अपनी पानी की सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) पर निर्भर है, तेहरान द्वारा खाड़ी देश में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से जुड़ी सुविधाओं को संभावित टारगेट के तौर पर पहचाने जाने के कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव में फंसता जा रहा है।

यह तनाव ऐसे समय और गहरा गया है, जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों ने क्षेत्र में ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

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अमेरिका का ईरान पर नया हमला, IRGC की गोलीबारी में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को जॉर्डन में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई गोलीबारी में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। अमेरिका ने अभी तक मारे गए और घायल सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। इस घटना के बाद अमेरिका ने रविवार को ईरान के खिलाफ ताजा हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य जॉर्डन में हुए हमले का “तुरंत जवाब” देना और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को सजा देना था।

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इन एयरस्ट्राइक का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित कर सकता है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती थी। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं।

 

ईरान ने अंतरिम समझौते से पीछे हटने का किया ऐलान

ईरान के एक वार्ताकार ने कहा कि तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को फिलहाल निलंबित कर दिया है। समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, यह कदम युद्धविराम की कोशिशों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि संघर्ष समाप्त होने के कोई संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।

 

दक्षिणी ईरान में कई जगहों पर हमले

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, स्थानीय समयानुसार रात करीब 1:30 बजे होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित सिरिक (Sirik) क्षेत्र को निशाना बनाया गया। इसके अलावा हाजीआबाद (Hajiabad) के पास भी हमले की खबर है, जबकि बंदर अब्बास (Bandar Abbas) में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) के आसपास भी हमले की सूचना सामने आई है।

 

इराक में भी ड्रोन हमला

 

पड़ोसी देश इराक में इरबिल (Irbil) के पास स्थित कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के एक सैन्य ठिकाने पर रविवार सुबह ड्रोन हमला किया गया। संगठन के सैन्य अधिकारी रेबाज शरीफी के अनुसार, इस हमले में उसके आठ सदस्य घायल हुए हैं।

 

इरबिल शहर के लोगों ने भी रविवार तड़के एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई के दौरान जोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं। पिछले चार दिनों में इरबिल पर कई ड्रोन हमले हो चुके हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जैदी हाल ही में अमेरिका के दौरे पर गए थे और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।

 

हालांकि इन हमलों की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन इससे पहले ईरान और ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूह कुर्द क्षेत्र में कई हमले कर चुके हैं, जहां अमेरिकी सैनिकों के साथ ईरानी कुर्द विरोधी संगठन भी मौजूद हैं।

LPG Gas Price Today: गैस सिलेंडर की कीमतों पर बड़ा अपडेट! आज क्या है 14.2 किलो LPG का रेट, क्या बढ़ने वाली हैं कीमतें?

LPG Price Today (17 जुलाई): अगर आप आज यानी 17 जुलाई को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। देशभर में गैस सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है। जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है। वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में उपलब्ध है। इन शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी ₹2,930 है।

क्या अमेरिका-ईरान तनाव का पड़ेगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसका अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है।

यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है या संघर्ष और बढ़ता है, तो भारत में LPG की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या फिर बढ़ सकती हैं गैस सिलेंडर की कीमतें?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे। या तो LPG पर सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने पर उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल क्या करें उपभोक्ता?

फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 17 जुलाई को LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों और सप्लाई दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा।

आज के प्रमुख रेट

दिल्ली: घरेलू LPG (14.2 किग्रा)- ₹942, कमर्शियल (19 किग्रा) – ₹2,930

नोएडा: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

गाजियाबाद: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

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US-Iran War Update: ईरान ने होर्मुज को बताया ‘अटूट रेड लाइन’, अमेरिका को दी खुली चेतावनी! दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

US-Iran War Update: पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ (unbreakable red line) घोषित करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार पांचवीं रात ईरान पर हवाई हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध छोड़ बातचीत की मेज पर नहीं लौटता तो उसके बिजली प्लांटों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

क्या है ईरान की ‘रेड लाइन’?

एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह ईरान की ‘अटूट रेड लाइन’ है। इसे पार करने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। ईरान पहले भी कह चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तब तक होर्मुज को बंद रखने का विकल्प उसके पास मौजूद है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम (करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस रास्ते से बचने के लिए जमीनी पाइपलाइनें बनाई हैं। लेकिन वे कुल तेल का केवल एक छोटा हिस्सा ही ले जा सकती हैं। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात के पास इस जलमार्ग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

अमेरिका ने तेज किए हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे पहले ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी हमले किए गए थे।

ईरान में कई जगह धमाके

ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया हमलों का दायरा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक रहा। उत्तरी ईरान के सेमनान एयरपोर्ट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। जबकि लोरेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। वहीं, खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास भी हमले की सूचना मिली, जिसकी ईरान ने कड़ी निंदा की है।

35 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे धमाकों से दहशत का माहौल बताया है।

ईरान की पलटवार की धमकी

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं। बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो क्षेत्र का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ईरानी सशस्त्र बलों के जवाबी हमलों की जद में आ सकता है।

खाड़ी देशों पर भी बढ़ा खतरा

ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। कुवैत ने ड्रोन गिराने की जानकारी दी। जबकि बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी विस्फोटक ड्रोन को रोके जाने की खबर सामने आई है।

कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं

हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उसे किसी समझौते का लाभ नहीं मिलता तो वह उस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं देखता। उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है या वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं। बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

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Crude Oil Price: सप्लाई की चिंता से चौथे दिन भी बढ़त जारी, क्या $110 तक जाएगा कच्चे तेल का भाव!

crude Oil Price : US के ईरान पर नए हमले के बाद ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे दिन बढ़ी है। पिछले तीन सेशन में 12% बढ़ने के बाद ब्रेंट लगभग $85 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग $80 प्रति बैरल पर था। इस बढ़ोतरी से इस इलाके से क्रूड शिपमेंट में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 33 सेंट, या 0.4% बढ़कर $85.28 प्रति बैरल हो गया, जो पिछले तीन सेशन में 12% की बढ़त के बाद हुआ था। इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 42 सेंट, या 0.5% बढ़कर $80.02 प्रति बैरल हो गया।

दोनों बेंचमार्क क्रूड कॉन्ट्रैक्ट्स बुधवार को लगभग 0.3% बढ़े थे और हफ्ते की शुरुआत में पहुंचे एक महीने के हाई के करीब ट्रेड कर रहे थे।

आखिर तेजी क्यों आई?

अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर नए हवाई हमले किए और कहा कि उसने OPEC सदस्य देश के एक पोर्ट की ओर जा रहे एक खाली तेल टैंकर को रोका। कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक महीने में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गईं, क्योंकि बढ़ते संघर्ष ने एनर्जी से भरपूर मिडिल ईस्ट से सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं, जिससे दूसरी तिमाही में दर्ज लगभग 30% की गिरावट का कुछ हिस्सा पलट गया। साथ ही, रूसी फ्यूल फैसिलिटी और तेल टैंकरों पर यूक्रेन के लगातार हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन बढ़ाने की कसम खाई है, जब तक कि तेहरान स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले बंद नहीं कर देता और ज़रूरी एनर्जी कॉरिडोर को फिर से खोलने पर सहमत नहीं हो जाता। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ट्रंप मिलिट्री ऑपरेशन को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं और उन्होंने खार्ग आइलैंड को टारगेट करने की संभावना पर चर्चा की है, जहां ईरान का मुख्य तेल एक्सपोर्ट टर्मिनल है।

हालांकि, ईरान ने पीछे हटने के बहुत कम संकेत दिए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को कहा कि स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक US अपने मिलिट्री हमले खत्म नहीं कर देता और ईरानी पोर्ट पर लगी रोक नहीं हटा लेता।

ईरान के तेल टैंकरों पर हाल के हमलों ने तेज़ी से बढ़ते “शटल रन” ट्रेड में भी रुकावट डाली है, जिसमें रुकावटों से बचने के लिए स्ट्रेट के बाहर एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में क्रूड ऑयल भेजा जाता है। यह तरीका लड़ाई के दौरान यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देशों के लिए एक ज़रूरी एक्सपोर्ट रूट बन गया था, हालांकि सिस्टम में कोई भी रुकावट कुछ समय के लिए हो सकती है।

तनाव के बावजूद, स्ट्रेट से शिपिंग एक्टिविटी जारी रही है। US सेंट्रल कमांड के स्पोक्सपर्सन कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, US की मदद से जहाज़ों का ट्रांज़िट मंगलवार रात को डबल डिजिट में पहुंच गया। पिछले हफ़्ते इस रास्ते से गुज़रने वाले लगभग 300 जहाज़ों में से लगभग आधे को US सेना से मदद मिली।

$110 के ऊपर जाएगा भाव

ग्लोबल फर्म गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि अगर खाड़ी के एक्सपोर्ट में रुकावटें बनी रहती हैं, तो चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। हालांकि, इन्वेस्टमेंट बैंक को उम्मीद है कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है और तेल का प्रोडक्शन उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है, तो साल के आखिर तक कीमतें गिरकर $60 के आस-पास आ जाएंगी।

इस बीच, चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी टेक्निकल रिसर्च के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा का भी मानना ​​है कि जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ेगा, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ज़्यादा हो सकती हैं, जो एक अटकल वाली चिंता से एक संभावित स्थिति बन सकती है।

मकदा ने कहा, “कीमतें साइकोलॉजिकल रिस्क प्रीमियम दिखाती हैं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की कमज़ोरी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है। नेविगेशन पर असर डालने वाली मिलिट्री लड़ाई से अटकलें लगाई जा सकती हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 से ऊपर जा सकती हैं और स्टैगफ्लेशन का खतरा पैदा हो सकता है।”

 

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Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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