Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Sky Gold Q1 Results: मुंबई की B2B ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Sky Gold and Diamonds ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 78% बढ़कर 2,012.8 करोड़ रुपये रही। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) दोगुना से ज्यादा यानी 140% बढ़कर 104.9 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने कहा कि यह ग्रोथ संगठित ज्वेलरी रिटेलर्स से मजबूत मांग, हल्के वजन (Lightweight) और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की बढ़ती बिक्री और बेहतर मैन्युफैक्चरिंग एग्जीक्यूशन की वजह से आई है।

कैश फ्लो भी हुआ पॉजिटिव

Sky Gold ने बताया कि जून तिमाही में उसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव रहा। इसका श्रेय एसेट-लाइट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल, एडवांस गोल्ड बिजनेस की बढ़ती हिस्सेदारी और एक्सपोर्ट पेमेंट जल्दी मिलने को दिया गया है।

हल्की ज्वेलरी और एक्सपोर्ट पर फोकस

स्काई गोल्ड अब हल्के वजन की ज्वेलरी, कम कैरेट के गहने और डायमंड-स्टडेड ज्वेलरी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उसका मानना है कि इससे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मजबूत होगा। साथ ही, एक्सपोर्ट कारोबार बढ़ाने पर भी कंपनी का फोकस है।

हाल ही में कंपनी ने लंदन में आयोजित Asiana UK-India Jewellery Expo में अपने प्रोडक्ट्स पेश किए। कंपनी के मुताबिक, उसे ब्रिटेन और यूरोप के खरीदारों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और 30-45 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक तैयार हुई।

₹8,100 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

स्काई गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगेश चौहान ने कहा कि संगठित ज्वेलरी बाजार और डिजाइन बेस्ड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उनका मानना है कि भारत डिजाइन-बेस्ड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 8,100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कंपनी का फोकस रेवेन्यू ग्रोथ, मुनाफे और मजबूत कैश फ्लो के बीच संतुलन बनाए रखने पर रहेगा।

स्काई गोल्ड के शेयरों का हाल

स्काई गोल्ड का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 4.61% बढ़कर 723 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 106.78% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 169.37% का रिटर्न दिया है। 5 साल में 3,114% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.20 हजार करोड़ रुपये है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 शुरुआती गिरावट से उबरने की कोशिश जरूर करता दिखा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स 65 अंक यानी 0.3% गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का असर बाजार पर दिखा।

अब सोमवार, 10 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? कौन से लेवल अहम रहेंगे? इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

निफ्टी 50 में Grasim, TCS और Hindalco सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Trent में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी और PSU बैंक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 0.22% की बढ़त रही। Nifty Smallcap 100 0.05% फिसल गया।

अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?

Motilal Oswal के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इसकी वजह मजबूत घरेलू आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तिमाही नतीजों का अंतिम दौर हो सकता है। हालांकि, शेयरों में खबरों के आधार पर शेयरों में हलचल बनी रह सकती है।

 

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक आंकड़ों पर रहेगी। इनमें भारत के CPI और WPI महंगाई के आंकड़े, जून तिमाही के नतीजे अहम रहेंगे। साथ ही, अमेरिका के CPI और PPI महंगाई के आंकड़े, OPEC की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और चीन के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन व रिटेल सेल्स के आंकड़े भी आएंगे।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी का रुझान फिलहाल कमजोर जरूर है। हालांकि, इंडेक्स 24,400-24,300 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है। यह स्तर पहले रेजिस्टेंस था और अब सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर तक फिसलता है तो यह खरीदारी का मौका हो सकता है। वहीं, ट्रेंड बदलने के लिए 24,700 के ऊपर निकलना जरूरी होगा।

Angel One के हितेश राठी के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,450-24,350 के बीच है। इसके नीचे 24,000 बड़ा सपोर्ट रहेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,650-24,750 पहला रेजिस्टेंस और 24,800-24,850 अगला अहम स्तर होगा।

HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों से निफ्टी 24,400-24,700 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स अभी भी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 24,770 और 25,000 रेजिस्टेंस रहेंगे। वहीं, गिरावट पर 24,430-24,380 का दायरा सपोर्ट देगा।

बैंक निफ्टी पर क्या राय है?

 

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले पांच कारोबारी सत्रों से बैंक निफ्टी 58,248-57,353 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी अपने 20-डे EMA के ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 58,200-58,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर बैंक निफ्टी 58,700 और फिर 59,100 तक जा सकता है। वहीं, नीचे की ओर 57,300-57,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

Stocks to Watch: सोमवार 10 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 21 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

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Air India टर्बुलेंस मामले में बड़ी खबर, विमान का एक पायलट डोप टेस्ट में पॉजिटिव, क्या हुआ था फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में?

Air India Pilot News: एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। The Times of India ने कई सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस एयर इंडिया विमान को उड़ाने वाले कैप्टन का पोस्ट-फ्लाइट डोप टेस्ट कथित तौर पर साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पॉजिटिव आया है। हालांकि, इस दावे की अभी Air India ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पायलटों का डोप टेस्ट किया गया था। लेकिन Air India का कहना है कि इस टेस्ट के नतीजे अभी उसे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए एयरलाइन फिलहाल यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टेस्ट का परिणाम वास्तव में क्या रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 4 अगस्त को टर्बुलेंस का सामना करने और अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिरने के बाद फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट (नशीले पदार्थों की जांच) पॉजिटिव आया है।

Air India ने क्या कहा?

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन को जानकारी है कि लागू नियमों और प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी। हालांकि, टेस्ट के परिणाम एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके क्रू सदस्यों का नियमित रूप से ड्रग टेस्ट किया जाता है। यह प्रक्रिया किसी एक स्पेशल फ्लाइट या दुर्घटना जैसी घटना से जरूरी तौर पर जुड़ी नहीं होती। Air India के मुताबिक, वह नागरिक उड्डयन नियमों के तहत अपने क्रू की नियमित ड्रग टेस्टिंग कराती है। टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

एयरलाइन ने कहा, “एयर इंडिया किसी खास फ़्लाइट या ऑपरेशनल घटना से अलग, सिविल एविएशन नियमों का पालन करते हुए क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट करती है। हम ज़रूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करना जारी रखेंगे।” डोप टेस्ट का यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब एविएशन अधिकारी 4 अगस्त की टर्बुलेंस की घटना की जांच कर रहे हैं। इस घटना के दौरान फ्लाइट अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

आखिर 4 अगस्त को Phuket-Delhi फ्लाइट में हुआ क्या था?

नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने बताया कि फुकेत से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में मंगलवार 4 अगस्त को चार से पांच मिनट तक हवा में तेज टर्बुलेंस हुई, जिसमें चालक दल के कुछ सदस्यों को रीढ़ और गर्दन में चोटें आईं। उन्होंने बताया कि हवा में अचानक आई टर्बुलेंस के कारण विमान करीब 300 फुट नीचे चला गया। इस घटना में चालक दल के चार सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।

नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि विमान को करीब पांच मिनट तक हवा में टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “विमान को इसके बाद भी करीब एक घंटे तक उड़ान भरनी थी। इस दौरान चालक दल के सदस्यों ने यात्रियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई। यह बहुत बहादुरी का काम था… मैं उनके साहस के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।” चोटों की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि चालक दल के दो सदस्यों को रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और गर्दन के पास चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है।

13 यात्रियों को कराया गया भर्ती

विमान में 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे। मंगलवार को घटना के बाद 13 यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Air India ने एक बयान में कहा, “चार अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के विमान AI2379 से जुड़ी घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी 13 यात्रियों को पांच अगस्त को दोपहर 3:30 बजे तक अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”

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बयान में आगे कहा गया, “चालक दल के चार सदस्य अब भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उनका इलाज जारी है।’’ एयर इंडिया ने कहा कि उसकी टीम अस्पतालों में मौजूद हैं और प्रभावित लोगों के संपर्क में हैं।

Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

सीमेंस एनर्जी इंडिया के शेयर में आगे 15 प्रतिशत तक की तेजी आने की गुंजाइश है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टारगेट प्राइस से मिली है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। वहीं टारगेट प्राइस 3,950 रुपये से बढ़ाकर 4,100 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग और 4,200 रुपये प्रति शेयर का टारगेट बरकरार रखा है। यह टारगेट शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 3648.75 रुपये से 15 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सीमेंस एनर्जी इंडिया का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 67.8 प्रतिशत बढ़कर 440.9 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 39.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2485.6 करोड़ रुपये रहा। कुल खर्च 1949.5 करोड़ रुपये के रहे। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर को वित्त वर्ष के तौर पर फॉलो करती है। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 72.1 प्रतिशत बढ़कर 585.7 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर होकर 23.6 प्रतिशत हो गया।

30 जून 2026 तक सीमेंस एनर्जी इंडिया का ऑर्डर बैकलॉग 19,331 करोड़ रुपये का था। कंपनी का पावर ट्रांसमिशन बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.98 प्रतिशत बढ़कर 1,386.3 करोड़ रुपये हो गया। पावर जेनरेशन सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 36.02 प्रतिशत बढ़कर 1,099.3 करोड़ रुपये हो गया।

Siemens Energy पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि सीमेंस एनर्जी इंडिया के जून तिमाही के नतीजे हर मामले में अनुमानों से बेहतर रहे। रेवेन्यू में बढ़ोतरी पावर ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन, दोनों सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की वजह से हुई। पावर ट्रांसमिशन सेगमेंट के लिए EBIT मार्जिन में भी सुधार हुआ और पावर जेनरेशन के लिए यह अच्छा बना रहा। कुल ऑर्डर इनफ्लो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब रुपये हो गया, जिससे कुल ऑर्डर बुक 193 अरब रुपये पर पहुंच गई।

पावर ट्रांसमिशन के लिए इनफ्लो में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 24 अरब रुपये पर पहुंच गया। पावर जेनरेशन इनफ्लो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 10 अरब रुपये रह गया। ब्रोकरेज ने उम्मीद जताई है कि सीमेंस एनर्जी को रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर और स्टीम टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में घरेलू और एक्सपोर्ट-बेस्ड मौकों से फायदा मिलता रहेगा।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि सीमेंस एनर्जी के मामले में अगले 12-24 महीनों में मौजूदा पुराने ऑर्डरों (बैकलॉग) को समय पर पूरा किया जाना और कलवा/ग्रीनफील्ड ट्रांसफॉर्मर व स्विचगियर क्षमता शुरू किया जाना वे महत्वपूर्ण चीजें होंगी, जिन पर नजर रखनी चाहिए। बेहतर काम-काज और मार्जिन के कारण नुवामान ने FY26E और FY27E के EPS अनुमानों को क्रमशः 12 प्रतिशत और 3 प्रतिशत बढ़ाया है।

Dividend Stock: हर शेयर पर मिलेगा ₹60 का डिविडेंड, 24 अगस्त से पहले बनना होगा शेयरहोल्डर

शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत चढ़ा

Siemens Energy का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 43 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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प्यार में की जा रही ये गलती आपके बच्चे को बना सकती है कम आत्मनिर्भर, Helicopter Parenting को समझिए और इससे बचिए

माता-पिता के तौर पर, अपने बच्चे के लिए हर काम करना स्वाभाविक है। चाहे उनके जूते के फीते बांधना हो, स्कूल बैग पैक करना हो या हर छोटी-मोटी समस्या को सुलझाना हो, मदद अक्सर प्यार की वजह से की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बहुत ज्यादा मदद करने से असल में आपके बच्चे का विकास रुक सकता है?

जानकारों का कहना है कि हर समय मदद करने से अनजाने में बच्चों में आत्मविश्वास, मुश्किलों का सामना करने की क्षमता और जरूरी जीवन कौशल विकसित नहीं हो पाते। इसका मकसद मदद को पूरी तरह बंद करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि कब पीछे हटकर उन्हें खुद सीखने दिया जाए।

क्या आप ऐसी परेशानियां हल कर रहे हैं, जिन्हें आपका बच्चा खुद हल कर सकता है?

अगर आप हर मुश्किल को तुरंत सुलझाने की कोशिश करते हैं, तो खुद से पूछें- क्या मेरा बच्चा थोड़ी सी मदद से यह काम कर सकता है? बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से फ़ैसले लेने, नई चीज़ें आज़माने और यहां तक कि गलतियां करने का मौका देने से वे ज़्यादा आत्मनिर्भर बनते हैं। समस्या को सुलझाना एक ऐसा हुनर ​​है जो अभ्यास से आता है, न कि किसी और के उसे आपके लिए कर देने से।

बच्चों के लिए मुश्किलों का सामना करना हमेशा बुरी बात क्यों नहीं होती?

अपने बच्चे को संघर्ष करते देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अक्सर यहीं से सबसे बड़ी सीख मिलती है। चाहे होमवर्क पूरा करना हो, किसी दोस्त के साथ अनबन सुलझाना हो या कोई नया हुनर ​​सीखना हो—चुनौतियों का सामना करने से डटे रहने की हिम्मत, सोच-समझकर फ़ैसला लेने की क्षमता और मुश्किल हालात में भी मज़बूत बने रहने का गुण आता है। अगर आप बहुत जल्दी मदद के लिए आगे आ जाते हैं, तो हो सकता है कि बच्चा कुछ ज़रूरी बातें सीखने का मौका गँवा दे।

क्या हर समय मदद करने से आपके बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है?

जब माता-पिता हर काम की ज़िम्मेदारी खुद ले लेते हैं, तो बच्चे अपनी काबिलियत पर शक करने लग सकते हैं। उन्हें अपने काम खुद पूरे करने देने से- भले ही वे उन्हें एकदम सही तरीके से न कर पाएं-एक बहुत अच्छा संदेश मिलता है- “मुझे भरोसा है कि तुम इसे खुद समझकर कर लोगे।” समय के साथ, इससे उनमें आत्मविश्वास और ज़िम्मेदारी की मज़बूत भावना पैदा होती है।

माता-पिता बच्चों में आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं?

छोटे-छोटे बदलाव बड़ा फ़र्क ला सकते हैं। तुरंत जवाब देने के बजाय, ऐसे सवाल पूछें जिनसे बच्चा स्थिति को समझकर सोच सके। मदद करने से पहले उन्हें खुद कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित करें। सिर्फ़ नतीजे पर ध्यान देने के बजाय उनकी कोशिश की तारीफ़ करें और जैसे-जैसे वे बड़े हों, उन्हें धीरे-धीरे ज़्यादा ज़िम्मेदारियां सौंपें। इसका मकसद बच्चों को उनके हाल पर छोड़ देना नहीं है, बल्कि उन्हें सीखने और आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी आज़ादी देते हुए सहारा देना है।

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पेरेंटिंग का मतलब यह नहीं है कि आप अपने बच्चे के लिए सब कुछ करें। इसका मतलब है उन्हें ऐसे भविष्य के लिए तैयार करना जहां वे अपने काम खुद कर सकें। बच्चों को आज़ादी से काम करने का मौका देते हुए, उन्हें सही रास्ता दिखाना, हिम्मत बढ़ाना और इमोशनल सपोर्ट देना उन्हें काबिल और कॉन्फिडेंट इंसान बनने में मदद कर सकता है। कभी-कभी, अपने बच्चे की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका यह नहीं होता कि आप हर काम में दखल दें, बल्कि थोड़ा पीछे हटकर उन्हें यह पता लगाने का मौका दें कि वे क्या-क्या कर सकते हैं।

Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

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