Gold Price Today: दो वजहों से और टूटा गोल्ड, 10 शहरों में अब इस भाव पर बिक रहा 24 से 18 कैरट सोना

Gold Rate Today in India: अमेरिका फेड की 29 जुलाई को आने वाली मॉनीटरी पॉलिसी को लेकर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती से गोल्ड पर दबाव पड़ा तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी ने चांदी पर और दबाव बना दिया। गोल्ड की बात करें तो एक दिन के उछाल के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसकी चमक फीकी पड़ी है। इन दो दिनों में राजधानी दिल्ली में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1700 और 22 कैरट वाला ₹1560 सस्ता हुआ है। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में 10 ग्राम का 24 कैरट और 22 कैरट वाला गोल्ड फिलहाल ₹10 नीचे आया है। अब चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक फीकी हुई है। लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन आज इसके भाव नीचे आए हैं। इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹5100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
मुंबई ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
कोलकाता ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
चेन्नई ं ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
बेंगलुरू ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
हैदराबाद ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
लखनऊ ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
पटना ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170
जयपुर ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
अहमदाबाद  ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170

दो दिनों की स्थिरता के बाद दूसरे दिन फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो दो दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव कम हुए हैं। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹5100 नीचे आई है। इससे पहले दो दिनों की स्थिरता से पहले एक किलो चांदी 25 जून को ₹5 हजार महंगी हुई थी और 24 जुलाई को ₹5 हजार सस्ती हुई । अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी यह इसी भाव पर बिक रही है।

अब किस पर रहेगी नजर?

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक अब मार्केट की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। इसके अलावा यूरोजोन, जापान और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम रहेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका के जीडीपी के आंकड़े आएंगे। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का डेटा भी जारी होगा। साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े भी अहम रहेंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले भी सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी, एशिया बाजारों में गिरावट, कोस्पी 5% से ज्यादा टूटा

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी है। Sandisk 14 परसेंट लुढ़का है। Micron, SK Hynix ADR, Seagate, Intel जैसे दिग्गज भी 10 परसेंट तक नीचे फिसले। कल की बड़ी गिरावट के बाद कोरिया का बाजार आज भी दबाव में नजर आ रहा है। US में नैस्डैक में भी प्रेशर दिखा। हालांकि OLD ECONOMY को Reflect करने वाला डाओ जोंस 500 प्वाइंट ऊपर बंद हुआ।

निक्केई करीब 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ 61,555.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.27 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.81 फीसदी गिरकर 40,865.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.49 फीसदी की बढ़त के साथ 25,688.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 5.11 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 3,784.70 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार रात अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में सुस्ती रही, जबकि ईरान के हमले को अमेरिकी सेना द्वारा रोके जाने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।S&P 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स सपाट स्तर के आसपास रहे और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 38 अंक या लगभग 0.1% नीचे आए।

मंगलवार के रेगुलर सेशन के दौरान, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 500 अंकों से ज़्यादा की रैली देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने आने वाले फैसले से पहले अपनी स्थिति मज़बूत की। तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के कारण इस ब्लू-चिप इंडेक्स में लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज की गई। वहीं, सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक कम्पोजिट लगातार पांचवें सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ।

क्रूड में तेजी

बुधवार, 29 जुलाई को तेल की कीमतों में 3% से ज़्यादा की रिकवरी हुई। पिछले सेशन में हुई भारी गिरावट के बाद यह सुधार हुआ, जब अमेरिका और ईरान ने तनावपूर्ण गतिविधियों को रोक दिया था। अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से ज़्यादा कमी आने से भी इस रिकवरी को बल मिला।

पिछले तीन सेशन में 14% से ज़्यादा गिरने के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $2.71 या 3.2% बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $2.26 या 3.4% बढ़कर $81.95 प्रति बैरल पर पहुंच गया। US-Iran युद्ध

X पर एक पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए ईरान द्वारा किए गए “अचानक हमले की कोशिश” को सफलतापूर्वक रोक दिया।

इस बीच, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने लगातार दूसरे दिन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में तेल सुविधाओं पर ड्रोन से हमला किया, जिससे देश पर दबाव बढ़ गया। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने मंगलवार को हमले को रोक दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या किसी सुविधा को नुकसान पहुंचा है। सरकारी IRIB न्यूज़ के अनुसार, ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया।

US Fed की बैठक

निवेशकों की नजर US फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों पर आने वाले फ़ैसले और बुधवार, 29 जुलाई को होने वाली चेयरमैन केविन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी है।CME के ​​FedWatch टूल के अनुसार, Fed फंड्स फ़्यूचर्स से संकेत मिलता है कि लगभग 70% संभावना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को मौजूदा 3.5% से 3.75% की टारगेट रेंज में ही बनाए रखेगा।

आज सोने की कीमत

दिन में बाद में आने वाले फ़ेडरल रिज़र्व के ब्याज दर के फ़ैसले से पहले बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई।

पिछले सेशन में 1.1% की गिरावट के बाद शुरुआती कारोबार में सोना $4,020 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इंटरेस्ट-रेट स्वैप से संकेत मिलता है कि Fed द्वारा 25-बेसिस-पॉइंट की दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग तीन में से एक है, जो पॉलिसी की घोषणा से पहले अनिश्चितता के असामान्य रूप से उच्च स्तर को उजागर करता है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं, क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती।

पांच महीने पहले US-Iran संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने में लगभग 25% की गिरावट आई है, क्योंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारी गिरावट के बावजूद, निवेशकों की ओर से मज़बूत ‘डिप-बाइंग’ (कीमत गिरने पर खरीदारी) के कारण यह धातु जून के आखिर से $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NPS Pension Calculation: NPS से रिटायरमेंट पर कितनी पेंशन मिलेगी? उम्र और निवेश के हिसाब से समझिए पूरा कैलकुलेशन

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी हो, ये हर नौकरीपेशा और निवेशक की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बनाया गया है। इसमें आप नौकरी के दौरान थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। रिटायरमेंट के समय एक हिस्सा एकमुश्त मिलता है। बाकी रकम से एन्युटी (Annuity) खरीदी जाती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर हर महीने 2,000, 5,000 या 10,000 रुपये जमा करें, तो रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिल सकती है? आइए आसान कैलकुलेशन से समझते हैं।

NPS में रिटायरमेंट पर पैसा कैसे मिलता है?

NPS में 60 साल की उम्र पर रिटायरमेंट के समय निकासी के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं। हमने यह कैलकुलेशन 60% रकम एकमुश्त निकालने और 40% रकम से एन्युटी खरीदने के मॉडल के आधार पर किया गया है। इसी एन्युटी से हर महीने पेंशन मिलती है।

हमने कैलकुलेशन के लिए NPS पर 10% सालाना औसत रिटर्न और एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न का अनुमान लिया है। हालांकि, NPS एक मार्केट-लिंक्ड स्कीम है। इसमें कोई तय ब्याज दर या गारंटीड रिटर्न नहीं मिलता। यानी असव रिटर्न शेयर बाजार के प्रदर्शन के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।

अगर 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेश के लिए लंबा समय मिलता है। इससे कंपाउंडिंग को अपना असर दिखाने का पूरा मौका मिलता है। यही वजह है कि कम मासिक निवेश से भी बड़ा रिटायरमेंट फंड और बेहतर मासिक पेंशन बनाई जा सकती है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹76 लाख₹45.6 लाख₹30.4 लाख₹17,700
₹5,000₹1.90 करोड़₹1.14 करोड़₹76 लाख₹44,300
₹10,000₹3.80 करोड़₹2.28 करोड़₹1.52 करोड़₹88,700

अगर 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

30 साल की उम्र में भी NPS की शुरुआत करने पर अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। हालांकि, 25 साल की तुलना में निवेश के लिए पांच साल कम मिलते हैं। इसका असर अंतिम कॉर्पस और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर साफ दिखाई देता है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹45 लाख₹27 लाख₹18 लाख₹10,500
₹5,000₹1.13 करोड़₹67.8 लाख₹45.2 लाख₹26,300
₹10,000₹2.26 करोड़₹1.36 करोड़₹90.4 लाख₹52,700

अगर 35 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर भी अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। लेकिन रिटायरमेंट तक निवेश के लिए सिर्फ 25 साल बचते हैं। इसलिए समान मासिक निवेश के बावजूद कॉर्पस और पेंशन, कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों की तुलना में काफी कम हो जाते हैं।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹26 लाख₹15.6 लाख₹10.4 लाख₹6,100
₹5,000₹65 लाख₹39 लाख₹26 लाख₹15,200
₹10,000₹1.30 करोड़₹78 लाख₹52 लाख₹30,300

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने 5,000 रुपये NPS में जमा करते हैं। अगर अगले 30 साल तक औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो रिटायरमेंट तक आपका फंड करीब 1.13 करोड़ रुपये हो सकता है।

इसमें से करीब 67.8 लाख रुपये आप एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी 45.2 लाख रुपये से एन्युटी खरीदनी होगी। अगर एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपको करीब 26,300 रुपये महीने पेंशन मिल सकती है।

उम्र का कितना असर पड़ता है?

NPS में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का है। जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है, तो उसकी अनुमानित मासिक पेंशन करीब 44,300 रुपये हो सकती है। वहीं, अगर यही निवेश 35 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो पेंशन घटकर करीब 15,200 रुपये रह सकती है। यानी सिर्फ 10 साल की देरी से रिटायरमेंट फंड और पेंशन, दोनों में बड़ा अंतर आ सकता है।

NPS में कौन निवेश कर सकता है?

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। इसमें सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और फ्रीलांसर भी शामिल हैं। अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं, तो सरकार भी आपके NPS खाते में योगदान करती है।

वहीं, प्राइवेट सेक्टर में सरकार कोई योगदान नहीं देती। हालांकि, अगर कंपनी चाहे तो वह भी अपने कर्मचारियों के NPS खाते में योगदान कर सकती है। निवेशक अपनी सुविधा के हिसाब से हर महीने, तिमाही या सालाना निवेश कर सकते हैं।

EPF: इंटरेस्ट का पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में नहीं आया है? जानिए क्या है वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

Q1 Results: A-1 लिमिटेड का जून तिमाही में दमदार प्रदर्शन, प्रॉफिट और रेवेन्यू में तगड़ा उछाल

Q1 Results: A-1 लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। इंडस्ट्रियल एसिड और केमिकल सप्लाई के साथ लॉजिस्टिक्स कारोबार से जुड़ी कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का कहना है कि बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, नए ऑर्डर और बिजनेस विस्तार का फायदा पहली तिमाही के नतीजों में देखने को मिला।

रेवेन्यू 175 करोड़ रुपये पहुंचा

कंपनी की ऑपरेशन से होने वाली आय (रेवेन्यू) सालाना आधार पर 170.5% बढ़कर 175.01 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 64.69 करोड़ रुपये थी।

मुनाफे में 429% की बढ़ोतरी

पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) 429.3% बढ़कर 3.16 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 0.60 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। वहीं, PAT मार्जिन भी 0.92% से बढ़कर 1.81% हो गया।

EBITDA में भी मजबूत सुधार

कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 210.6% बढ़कर 6.07 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1.95 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA मार्जिन 3.02% से बढ़कर 3.47% हो गया। कंपनी के मुताबिक, यह बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत नियंत्रण का नतीजा है।

नए ऑर्डर से कारोबार को मिला सहारा

तिमाही के दौरान कंपनी को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महाधन एग्रीटेक लिमिटेड और साईं बाबा पॉलीमर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसे ग्राहकों से करीब 35 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल सप्लाई ऑर्डर मिले। इसके अलावा कंपनी 127.50 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल यूरिया सप्लाई ऑर्डर पर भी काम कर रही है।

केमिकल कारोबार का दायरा बढ़ा

A-1 लिमिटेड को ईशान डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड के सल्फर आधारित इंडस्ट्रियल केमिकल्स के लिए प्राइमरी ऑथराइज्ड डीलर नियुक्त किया गया है। कंपनी का मानना है कि इससे उसके इंडस्ट्रियल केमिकल कारोबार और ग्राहक आधार को मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में एंट्री

A-1 लिमिटेड  ने A-1 सुरेजा इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है। इसके बाद यह कंपनी उसकी सब्सिडियरी बन गई है। इस अधिग्रहण के जरिए A-1 लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में भी कदम रखा है, जिसे भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम माना जा रहा है।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

A-1 लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षदकुमार पटेल ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की मजबूत शुरुआत की है। उनके मुताबिक, इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, लंबे समय से ग्राहकों के साथ बने रिश्ते और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की बदौलत कंपनी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाने और शेयरधारकों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू बनाने पर फोकस बनाए रखेगी।

Stocks to Watch: 29 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

L&T Q1 Results: देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने जून 2026 तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14% बढ़कर 4,123 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,617 करोड़ रुपये था। यह बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। वहीं, कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6.7% बढ़कर 67,942 करोड़ रुपये पहुंच गई।

L&T की ऑर्डर बुक

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी L&T को जून तिमाही में 1,08,014 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। यह पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा है। कंपनी को रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑफशोर विंड, हेवी इंजीनियरिंग और मेटल सेक्टर से बड़े ऑर्डर मिले।

कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 7,78,954 करोड़ रुपये हो गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 52% है। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल रेवेन्यू में 51% योगदान विदेशी कारोबार का रहा।

मार्जिन पर दबाव

तिमाही में L&T का EBITDA 3.2% घटकर 6,116 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल के 9.9% से घटकर 9% पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बेहतर रहा।

ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग से मजबूती

L&T के ग्रीन एनर्जी बिजनेस को तिमाही में 33,042 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। यह पिछले साल से 58% ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट रहे। हालांकि, सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते इस सेगमेंट की रेवेन्यू 11% घट गई।

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग एंड प्रोडक्ट्स कारोबार में ऑर्डर इनफ्लो 74% बढ़कर 5,535 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिफाइनरी इक्विपमेंट से जुड़े बड़े ऑर्डर मिलने का फायदा कंपनी को मिला।

टेक और फाइनेंस ने भी दिखाया दम

L&T के टेक्नोलॉजी, प्लेटफॉर्म्स एंड सर्विसेज कारोबार की रेवेन्यू 15% बढ़कर 14,627 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर, फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की ऑपरेशनल इनकम 27% बढ़कर 5,042 करोड़ रुपये रही। इस दौरान कंपनी का कुल लोन बुक 1,29,634 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

रियल्टी कारोबार में भी तेजी

L&T के रियल्टी बिजनेस में नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी बुकिंग हुई। ऑर्डर इनफ्लो 32% बढ़कर 1,299 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,009 करोड़ रुपये पहुंच गई।

चेयरमैन ने क्या कहा?

L&T के चेयरमैन और MD एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने अलग-अलग सेक्टर और बाजारों पर फोकस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस तिमाही में Nabha Power की हिस्सेदारी बेचने का काम पूरा किया है। साथ ही, Hyderabad Metro में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए भी समझौता किया है। इससे कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

L&T के शेयर

L&T के शेयर मंगलवार को 0.63% की बढ़त के साथ 3,830 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 11.92% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल में इससे निवेशकों को 139.16% का मुनाफा हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 5.27 लाख करोड़ रुपये है।

Tata Capital Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹1547 करोड़ का मुनाफा, गोल्ड लोन कारोबार में भी एंट्री

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम? समझिए नियम और एक्सपर्ट्स की राय

Motor Insurance Policy on E20 Fuel: भारत में 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया हुआ पेट्रोल स्टैंडर्ड फ्यूल बन चुका है। इसके बाद से ही पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि, अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम खराब होता है, तो क्या कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में इसका क्लेम मिलेगा?

इस मुद्दे पर सरकार, इंश्योरेंस कंपनियों और ऑटोमोटिव एक्सपर्ट्स का रुख बिल्कुल साफ है। आइए आपको बताते हैं कि E20 पेट्रोल और कार इंश्योरेंस से जुड़े नियम क्या कहते हैं।

क्या केवल E20 फ्यूल इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस रद्द हो जाता है?

बिल्कुल नहीं, सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ कर दिया है कि गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द नहीं होती। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने विवाद के बाद साफ किया कि, ‘गाड़ी में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से पॉलिसी अमान्य नहीं होती। क्लेम इस बात पर निर्भर करता है कि दुर्घटना या चोरी जैसी बीमित घटना हुई है या नहीं। पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल को लापरवाही नहीं माना जाएगा।’

पॉलिसीबाजार के मोटर इंश्योरेंस बिजनेस हेड पारस पसरीचा (Paras Pasricha) के मुताबिक, केवल E20 फ्यूल के इस्तेमाल से क्लेम रिजेक्ट नहीं होता। क्लेम इस बात पर तय होता है कि नुकसान की असली वजह क्या है।

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

यहीं पर बीमा के नियमों का अंतर समझना जरूरी है:

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

पारस पसरीचा के अनुसार, ‘अगर सर्वेयर की जांच में यह साबित होता है कि इंजन या फ्यूल सिस्टम का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ऐसे फ्यूल (E20) का इस्तेमाल करने से हुआ है जो वाहन निर्माता द्वारा अनुशंसित नहीं था, तो इसे स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत मैकेनिकल ब्रेकडाउन या कन्सिक्वेंशियल डैमेज माना जाएगा। इस स्थिति में क्लासिकल कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में क्लेम मिलना मुश्किल होगा।’

किस बात पर फंस रहा पेंच?

ICICI Lombard का ब्लॉग पोस्ट: जून 2026 में ICICI लोम्बार्ड के एक ब्लॉग में कहा गया था कि पुरानी गैर-E20 कंपैटिबल गाड़ियों में E20 फ्यूल से हुए नुकसान को लापरवाही के दायरे में देखा जा सकता है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख कंपनी ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की। अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी BS6 Phase-2 गाड़ियां पूरी तरह से E20 फ्यूल फ्रेंडली हैं और उनमें ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

सरकार और इंडस्ट्री का क्या रुख है?

सरकार और एथेनॉल इंडस्ट्री ने E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार को वाहन निर्माताओं या कंज्यूमर ग्रुप्स से E20 के कारण माइलेज घटने या इंजन/टैंक खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।

सरकार के मुताबिक पिछले 2.5 सालों से देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल रही हैं।

भारत इंडिपेंडेंट एथेनॉल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIEPA) के जॉइंट वाइस प्रेसिडेंट अक्षय मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा कैंपेन सिर्फ भ्रामक जानकारी पर आधारित है और एथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह से वैज्ञानिक जांच और OEM अप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।

कार मालिकों के लिए निष्कर्ष और काम की सलाह

आपकी कार का इंश्योरेंस E20 पेट्रोल डालने से रद्द नहीं होता है, दुर्घटना या चोरी की स्थिति में क्लेम पहले की तरह ही मिलेगा। अगर E20 के कारण फ्यूल पाइप, इंजेक्टर या जंग लगने से मैकेनिकल ब्रेकडाउन होता है, तो सामान्य इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा। इसके लिए आपके पास Engine Protect Add-on या Extended Warranty होना जरूरी है। आप अपनी गाड़ी के यूजर मैनुअल में फ्यूल कंपैटिबिलिटी जरूर जांच लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।