Thangamayil Jewellery Share Price: Q1 मुनाफे में जबरदस्त उछाल के बाद भी शेयर में लगा 10% का लोअरसर्किट, आखिर क्या है इसकी वजह

Thangamayil Jewellery Share Price: ज्वैलरी रिटेलर थंगामयिल ज्वैलरी  (Thangamayil Jewellery) के शेयरों में 29 जुलाई को भारी गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में दमदार मुनाफे के बाद भी शेयर में आज 10 फीसदी का लोअरसर्किट लग गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों ने कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के बजाय मौजूदा तिमाही के लिए कंपनी के सतर्क नजरिए पर ज्यादा ध्यान दिया, जिससे सेंटीमेंट पर असर पड़ा।

जून तिमाही के दौरान कंपनी ने रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में जबरदस्त ग्रोथ दिखाया है। हालांकि, मैनेजमेंट ने मांग में लगातार कमजोरी की ओर इशारा किया। इसके पीछे उन्होंने वेस्ट एशिया में युद्ध की अनिश्चितता, सोने पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी, रुपये की गिरती कीमतों को टहराया है। साथ ही सोने की कीमतें कम होने की उम्मीद में ग्राहकों द्वारा खरीदारी टालने का हवाला भी दिया है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

थंगामयिल ज्वैलरी  ने जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए ₹85 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹45.7 करोड़ से 86% ज्यादा है। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 71.2% बढ़कर ₹2,666.4 करोड़ हो गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही में यह ₹1,558 करोड़ था।

ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी मजबूत रही। EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 66.2% बढ़कर ₹144.6 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹87 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन थोड़ा घटकर 5.4% रह गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 5.6% था।

अच्छे फाइनेंशियल नतीजे दिखाने के बावजूद, कंपनी ने निकट भविष्य में मांग को लेकर सतर्क रुख दिखाया।

30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान सेम-स्टोर सेल्स (SSS) ग्रोथ 44.4% रही, जबकि तिमाही-दर-तिमाही आधार पर यह ग्रोथ 72.3% थी। थंगामयिल ज्वैलरी  ने कहा कि सोने की बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) अपेक्षाकृत कम रही, भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें पिछली तिमाही (जब कीमतें काफी ऊंची थीं) की तुलना में कम थीं। कंपनी के अनुसार, मांग पर मुख्य रूप से 13 मई, 2026 से सोने पर आयात शुल्क (import duty) 6% से बढ़कर 15% होने और भारतीय रुपये की कीमत में काफी गिरावट का असर पड़ा। इन घटनाक्रमों के कारण कई ग्राहकों ने गहनों की खरीदारी टाल दी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में अमेरिकी डॉलर के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें कम हो सकती हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता का ग्राहकों की धारणा पर बुरा असर पड़ा। कंपनी ने बताया कि जिन इलाकों में वह काम करती है, वहां से आने वाले पैसे (remittances) में कमी के कारण विदेशों में रहने वाले भारतीयों (expatriates) द्वारा सोने की खरीदारी में सुस्ती आई, जिससे तिमाही-दर-तिमाही आधार पर बिक्री और कम हुई।

मैनेजमेंट ने संकेत दिया कि मौजूदा तिमाही में भी यह कमजोरी बनी हुई है। थंगामयिल ज्वैलरी  ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के पहले 28 दिनों में बिक्री में कोई खास सुधार नहीं दिखा। बिक्री में लगातार सुस्ती की वजह युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता और ग्राहकों की यह उम्मीद रही कि अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आएगी, जिसके चलते उन्होंने खरीदारी को और टाल दिया।

कंपनी को उम्मीद है कि जियोपॉलिटिकल हालात स्थिर होने और सोने की कीमतों को लेकर नजरिया बेहतर होने पर यह टली हुई मांग वापस आएगी। उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में मांग में सुधार होगा।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

हालांकि बुधवार के कारोबार में स्टॉक 10% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। थंगामयिल ज्वैलरी  के शेयरों में पिछले 1 महीने में 10%, 3 महीनों में 62% और पिछले 6 महीनों में 85% की बढ़त हुई है। एक साल के आधार पर, स्टॉक ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है और इसमें 249% की उछाल आई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में इसने 1,370% का रिटर्न दिया है।

स्टॉक ने पिछले कारोबारी सत्र में 28 जुलाई को ₹7,429 का अपना 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹1,774.35 पिछले साल जुलाई में दर्ज किया गया था।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Adani Ports Q1 Result: 10% उछलकर मुनाफा पहुंचा ₹3650 करोड़ पर, रेवेन्यू में जोरदार तेजी

Adani Ports Q1 Result: अदाणी ग्रुप की पोर्ट कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 के कारोबारी नतीजे पेश किए। देशी-विदेशी कारोबार के दम पर रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट की मजबूत ग्रोथ ने इसके मुनाफे को सपोर्ट किया और यह 10% उछल पड़ा।

Adani Ports Q1 Result: खास बातें

जून 2026 तिमाही में अदाणी पोर्ट्स का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर ₹3,311 करोड़ से 10% उछलकर ₹3,650 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू भी 19% बढ़कर ₹10,821 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी का परफॉरमेंस दमदार रहा। अदाणी पोर्ट्स का जून तिमाही में ईबीआईटीडीए ₹6,541 करोड़ रहा जोकि सालाना आधार पर 19% अधिक है लेकिन मार्जिन में इस दौरान हल्की सुधार दिखी और यह 60.2% से 60.4% पर पहुंच गया।

वैसे तो कंपनी का देश-विदेश में कारोबार तेजी से आगे बढ़ा लेकिन घरेलू पोर्ट बिजनेस अहम बना रहा। कंपनी के घरेलू पोर्ट्स बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 12% बढ़ा। इसे बेहतर कार्गो मिक्स, हाई रियलाइजेशंस और कॉर्गो वॉल्यूम में उछाल से सपोर्ट मिला। जून तिमाही में घरेलू बंदरगाहों ने 115.3 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो संभाला। इसके घरेलू पोर्ट्स बिजनेस का ईबीआईटीडीए मार्जिन 74% रहा जिसे इंडस्ट्री में शानदार माना जाता है।

अदाणी पोर्ट्स का कहना है कि यह अब तक के सबसे बड़े पोर्ट कैपेसिटी एक्सपैंशन प्रोग्राम पर काम कर रही है। जून 2026 तक इसकी घरेलू पोर्ट क्षमता 653 MMT थी और कंपनी का लक्ष्य दिसंबर 2030 तक इसे बढ़ाकर 1,000 MMT करने का लक्ष्य है। जून तिमाही के दौरान पूरे भारत में कार्गो मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 27.6% थी, जबकि कंटेनर कार्गो मार्केट में हिस्सेदारी 44.8% थी।

जून तिमाही में कंपनी के इंटरनेशनल पोर्ट्स बिजनेस का रेवेन्यू और ईबीआईटीडीए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। इस सेगमेंट से रेवेन्यू सालाना आधार पर 80% बढ़कर ₹1,747 करोड़ हो गया, जबकि ईबीआईटीडीए 256% उछलकर ₹730 करोड़ हो गया। इसे ऑस्ट्रेलिया और कोलंबो में शानदार परफॉरमेंस से सपोर्ट मिला।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver price Today: फेड फैसले से पहले सोने-चांदी में उठा-पटक, चांदी ‌₹2200 हुई महंगी, अब क्या करें निवेशक

Gold Silver price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आज 29 जुलाई को उठा- पटक देखने को मिल रही है। बुधवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 158 रुपये गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। उसके विपरीत, चांदी की कीमतें 0.69 फीसदी बढ़कर 2.17 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स 158 रुपये या 0.11 प्रतिशत गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुए, जिसमें 375 लॉट का कारोबार हुआ। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी की कीमतें 2250 रुपये या 1.04 फीसदी बढ़कर 2,18,649 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

बाजार जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है। ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स 4,031.22 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर ट्रेड कर रहे थे। मार्केट में नई पोजीशन बनने से चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

आज रात US फेड पॉलिसी को होगा ऐलान

US फेड का पॉलिसी फ़ैसला आज रात 11:30 बजे (IST) आएगा, जबकि फेड चेयर केविन वॉर्श की टिप्पणी रात 12:00 बजे (IST) होनी है।

जून में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहने के बाद, ऐसी पूरी उम्मीद है कि US सेंट्रल बैंक आज ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण महंगाई बढ़ने की नई चिंताओं की वजह से फेड सितंबर और दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, FedWatch टूल बताता है कि बाज़ार को सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 76% संभावना और 29 जुलाई को 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की 30% संभावना दिख रही है।

क्या कहते है बाजार जानकार

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह ने कहा, “बाज़ार अभी ब्याज दरें बढ़ने की लगभग एक-तिहाई संभावना मानकर चल रहा है। सख़्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों ने US डॉलर इंडेक्स को 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे बुलियन (सोने-चांदी) पर दबाव पड़ा है।” US फेड के अलावा, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) भी क्रमशः गुरुवार और शुक्रवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।

बढ़ी हुई ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक होती हैं, क्योंकि ऊंची दरों से इस पीली धातु (जो कोई रिटर्न नहीं देती) को अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है।

इस बीच, डॉलर इंडेक्स 0.10% गिरकर 101.30 पर आ गया, जबकि US 10-साल के बॉन्ड का यील्ड पिछले सेशन के 4.60% से बढ़कर 4.61% हो गया।

अब क्या हो रणनीति

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, आज के सेशन में सोने के लिए $4,010 और $3,974 पर सपोर्ट और $4,070 और $4,110 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी के लिए $56.80 और $56 पर सपोर्ट और $58.40 और $59.10 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है।

MCX पर, जैन ने बताया कि सोने के लिए सपोर्ट ₹1,40,800 और ₹1,40,000 पर है और रेजिस्टेंस ₹1,42,200 और ₹1,43,100 पर है, जबकि चांदी के लिए सपोर्ट ₹2,14,000 और ₹2,12,200 पर है और रेजिस्टेंस ₹2,17,700 और ₹2,20,000 पर है।जैन ने कहा, “हम लंबे समय के निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे बाजार में आई इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी खरीदें, और ट्रेडर्स FOMC मीटिंग के नतीजों से पहले इससे दूर रहें।

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में मामूली बढ़त, खरीदारी से पहले जानें 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

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IT Stocks : Infosys और TCS करीब 3% भागे, AI खर्च से जुड़ी चिंताएं कम होने से पूरे सेक्टर में आई हरियाली

IT Stocks: बुधवार को भारतीय IT शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। इस तेजी को इन्फोसिस और TCS जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। AI पर बहुत ज़्यादा खर्च और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर बनी चिंताओं के कारण निवेशकों ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजों से पहले सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों की ओर रुख कर लिया है। इसका फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को भी मिल रहा है। इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स आज सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है। निवेशकों की नजर आज आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले पर बनी हुई है।

फिलहाल निफ्टी IT इंडेक्स 2.47 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। निफ्टी आईटी बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। निफ्टी में सिर्फ 0.93 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इन्फोसिस 3.37 प्रतिशत बढ़कर निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाले शेयरों में शामिल है। वहीं, TCS में 2.65 प्रतिशत, विप्रो में 1.78 प्रतिशत और HCL टेक्नोलॉजीज में 1.1 प्रतिशत की तेजी आई है। मिडकैप आईटी की बात करें तो कोफोर्ज में 4.42 प्रतिशत, KPIT टेक्नोलॉजीज में 4.07 प्रतिशत और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 2.75 प्रतिशत की तेजी आई है।

एशियाई चिप शेयरो में लगातार बनी कमजोरी के बावजूद भारतीय IT शेयरों में रिकवरी देखने को मिल रही है। दक्षिण कोरियाई चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में भारी गिरावट आई है। AI के ऊंचे वैल्यूएशन,बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा भारी कैपिटल खर्च को देखते हुए निवेशक अब चिप शेयरों से दूरी बना रहे हैं। इसका फायदा सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयरों को मिल रहा है।

ऐसा लगता है कि निवेशक माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के नतीजों से पहले भारतीय सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनियों के शेयर को खरीदने के लिए इनमें आए करेक्शन का फायदा उठा रहे हैं। इन दोनों कंपनियों के नतीजों से AI पर खर्च के ट्रेंड के बारे में नए संकेत मिलने की उम्मीद है।

बाजार की नजर आज आने वाले US फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी के जुड़े ऐलानों पर है। CME फेडवॉच के मुताबिक बाजार यह मान कर चल रहा है कि US फ़ेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना कि दक्षिण कोरियाई चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के पक्ष में हो सकती है। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो दक्षिण कोरिया में चिप शेयरों में आई भारी गिरावट भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

₹30000 की SIP और हर 3 साल में ₹50 लाख का रिटर्न! जानिए म्यूचुअल फंड कंपाउंडिंग का असली जादू

Mutual Fund SIP Compounding Formula: ‘मेरे म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में कुछ भी खास नहीं हो रहा है, पैसा वहीं का वहीं अटका हुआ लगता है।’ अगर आप भी हर महीने रेगुलर एसआईपी कर रहे हैं और शुरुआती 2-3 सालों में बड़े रिटर्न न देखकर निराश हो रहे हैं, तो आज के मार्केट कंडीशन में ये थिंकिंग स्वाभाविक है। म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों के धैर्य खोने और SIP बंद करने की सबसे बड़ी वजह यही शुरुआती धीमी रफ्तार होती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ₹30,000 की मंथली एसआईपी से पहला ₹50 लाख का फंड बनने में जहां 8 साल से ज्यादा का समय लगता है, वहीं आगे चलकर हर 2 से 3 साल में पोर्टफोलियो में ₹50-50 लाख रुपये जुड़ने लगते हैं?

आइए ‘फंड्सइंडिया’ (FundsIndia) के आंकड़ों से समझते हैं कि कंपाउंडिंग की ताकत कैसे काम करती है और शुरुआत में धीमा दिखने वाला निवेश बाद में रॉकेट की रफ्तार कैसे पकड़ता है।

₹30,000 की SIP से कैसे घटती जाती है ₹50 लाख की टाइमलाइन?

अगर आप हर महीने ₹30,000 की एसआईपी करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो आपके पोर्टफोलियो की ग्रोथ का सफर कुछ ऐसा होगा:

  • पहला ₹50 लाख: बनने में लगभग 8 साल और 3 महीने का समय लगता है।
  • दूसरा ₹50 लाख (₹1 करोड़ का फंड): इसे जुड़ने में केवल 4 साल का वक्त लगता है।
  • तीसरा ₹50 लाख (₹1.5 करोड़ का फंड): यह पड़ाव 3 साल से भी कम समय में हासिल हो जाता है।
  • ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ का सफर: इसमें केवल 2 साल का समय लगता है।
  • ₹2 करोड़ से ₹2.5 करोड़ का सफर: यह माइलस्टोन महज 1 साल और 8 महीने में पूरा हो जाता है।
  • ₹4 करोड़ के पार: एक बार जब पोर्टफोलियो ₹4 करोड़ के पार पहुंच जाता है, तो हर अगला ₹50 लाख जुड़ने में लगभग 1 साल या उससे भी कम का समय लगता है।

यानी शुरुआत में जिस ₹50 लाख को बनाने में 8 साल लगे थे, वही ₹50 लाख आगे चलकर हर 1 से 3 साल में आपके खाते में जुड़ने लगते हैं!

ऐसा क्यों होता है? समझिए ‘Slowly, then Suddenly’ का सिद्धांत

शुरुआती सालों में आपके पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा आपकी जेब से लगाई गई अपनी मूल पूंजी होता है। चूंकि उस समय आपका कुल जमा फंड छोटा होता है, इसलिए 12% का रिटर्न भी रुपयों के हिसाब से कम दिखता है।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, आपको मिले हुए रिटर्न पर भी रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है। इसे ही कंपाउंडिंग या ब्याज पर ब्याज का जादू कहते हैं। एक समय के बाद पोर्टफोलियो की ग्रोथ आपकी जेब से जाने वाली मंथली SIP से नहीं, बल्कि आपके फंड द्वारा कमाए गए रिटर्न से तय होने लगती है।

आपकी जेब का पैसा vs कंपाउंडिंग का रिटर्न

FundsIndia के आंकड़ों के मुताबिक समय के साथ आपके निवेश में कितना बड़ा बदलाव आता है, इसे इस तुलना से समझिए:

 

आपकी जेब का पैसा vs कंपाउंडिंग का रिटर्न

जब आपका फंड ₹4.5 करोड़ से ₹5 करोड़ होता हैं, तो उस ₹50 लाख में आपकी जेब से जाने वाली ₹30,000 की SIP की हिस्सेदारी केवल 6% होती है, जबकि 94% पैसा आपके पुराने फंड पर मिले ब्याज और रिटर्न से आता है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय ज्यादातर लोग धैर्य इसलिए खो बैठते हैं क्योंकि शुरुआती सालों में मेहनत और अनुशासन सबसे ज्यादा लगता है, लेकिन उसका परिणाम सबसे कम दिखता है। पहला ₹50 लाख बनाने के लिए भारी अनुशासन, निरंतरता और धैर्य की जरूरत होती है। अगर आप शुरुआती 3-4 सालों में ही अपनी एसआईपी रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं, तो आप कंपाउंडिंग का असली फायदा उठाने से चूक जाते हैं।

एक बार जब आपका पोर्टफोलियो एक बड़े आकार तक पहुंच जाता है, तो आपकी वही ₹30,000 की मंथली एसआईपी बेहद कम समय में जबरदस्त रिटर्न देने लगती है।

कंपाउंडिंग का नियम सीधा है, ‘शुरुआत में बहुत धीमा, बाद में बहुत तेज’। अगर आप लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस और वित्तीय आजादी पाना चाहते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव और शुरुआती धीमी रफ्तार से घबराएं नहीं। अपनी एसआईपी जारी रखें और समय को अपना काम करने दें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

5 सेकंड में ₹2.78 लाख करोड़ की बारिश, Sensex में 794 अंकों की तेजी, Nifty भी 24200 के पार

Stock Market Rally: कच्चे तेल में उछाल के बावजूद वैल्यू बाइंग के चलते मार्केट में अच्छी रौनक दिखी। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 800 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी अच्छी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब आधे फीसदी मजबूत हुए। सेक्टरवाइज रियल्टी और ऑयल एंड गैस को छोड़ फिलहाल सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन आईटी सेक्टर सबसे अधिक जोश में है। इसका निफ्टी इंडेक्स करीब ढाई फीसदी मजबूत हुआ है। इस रौनक में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ढाई लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:21 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 662.66 प्वाइंट्स यानी 0.86% के उछाल के साथ 77,428.58 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 194.60 प्वाइंट्स यानी 0.81% के उछाल के साथ 24,179.95 पर है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 793.56 प्वाइंट्स चढ़कर 77,559.48 तक तो निफ्टी भी 217.85 प्वाइंट्स उछलकर 24,203.20 तक पहुंच गया।

₹2.78 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 28 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,79,07,917.44 करोड़ था। आज यानी 29 जुलाई 2026 को यह बढ़कर ₹4,81,86,128.26 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹2,78,210.82 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 18 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें फिलहाल 18 स्टॉक्स ग्रीन जोन में हैं। सबसे अधिक तेजी फिलहाल इंफोसिस, एलएंडटी और एचयूएल में है। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट पावरग्रिड, इंडिगो और एशियन पेंट में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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33 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज फिलहाल 2493 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 1635 शेयर फिलहाल मजबूत हैं तो 726 में गिरावट है जबकि 132 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। इसके अलावा 33 शेयर एक साल के हाई और 24 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 42 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 53 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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इंट्रा-डे में आज इन स्टॉक्स पर फोकस

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूपी के इन जिलों में घर खरीदने का सुनहरा मौका! UPSIDA ने मेगा ई-ऑक्शन के जरिए निकाली प्लॉट योजना, जानें- कीमत समेत सबकुछ

UP Housing Scheme: उत्तर प्रदेश में अपना सपनों का घर बनाने और व्यावसायिक निवेश करने की चाहत रखने वालों के लिए गुड न्यूज है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने यूपी के विभिन्न शहरों में आवासीय और कमर्शियल प्लॉटों की बिक्री के लिए मेगा ई-ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू की है। इच्छुक खरीदार अब पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से अपनी पसंद का प्लॉट खरीद सकेंगे। प्राधिकरण ने ई-ऑक्शन की तिथियों को भी बढ़ा दिया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।

UPSIDA की इस योजना के तहत प्रयागराज के सरस्वती हाईटेक सिटी, उन्नाव के ट्रांसगंगा सिटी, बाराबंकी और हरदोई में आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, गौतमबुद्ध नगर में बैंक्वेट हॉल के लिए व्यावसायिक प्लॉट भी ई-नीलामी के जरिए आवंटित किए जाएंगे। प्राधिकरण का कहना है कि ई-ऑक्शन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष, आसान और ऑनलाइन होगी। इससे खरीदार बिना किसी बिचौलिए के सीधे बोली लगा सकेंगे।

महत्वपूर्ण तारीख

  • रजिस्ट्रेशन एवं दस्तावेज डाउनलोड शुरू: 9 जुलाई 2026, सुबह 10:00 बजे
  • कैटलॉग, प्रोसेसिंग फीस एवं EMD जमा करने की आखिरी तारीख: 4 अगस्त 2026, शाम 6:00 बजे
  • ऑनलाइन दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख: 5 अगस्त 2026, शाम 6:00 बजे
  • ऑनलाइन ई-बिडिंग: 7 अगस्त 2026, सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक

कैसे होगा प्लाटों का आवंटन?

UPSIDA ने बताया है कि औद्योगिक प्लॉटों का आवंटन ‘निवेश मित्र पोर्टल’ के माध्यम से भी किया जा रहा है। इच्छुक निवेशक और खरीदार ई-ऑक्शन पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यहीं आपको इस स्कीम के बारे में पूरी डिटेल्स मिल जाएगी।

प्राधिकरण का उद्देश्य पारदर्शी प्रणाली के जरिए लोगों को सुरक्षित निवेश का अवसर उपलब्ध कराना और प्रदेश में नियोजित शहरी एवं औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना से घर बनाने का सपना देखने वाले लोगों के साथ-साथ निवेशकों और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

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आवेदन कैसे करें?

  • रजिस्ट्रेशन और अन्य सभी डिटेल्स के लिए आवेदक आधिकारिक ऑक्शन पोर्टल https://upsida.project247.in/ पर जा सकते हैं।
  • हेल्पलाइन: यदि किसी आवेदक को रजिस्ट्रेशन या ई-ऑक्शन की प्रक्रिया से संबंधित कोई सवाल या समस्या हो, तो वे निम्नलिखित माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:-

फोन नंबर: वासु पटेल – 9510974587

(सोमवार से शुक्रवार: सुबह 10:00 से शाम 7:00 बजे तक | 1st और 3rd शनिवार: सुबह 10:00 से शाम 6:00 बजे तक)

ईमेल ID: eauction@upsida.co.in / vasu.patel@procure247.com

प्राधिकरण का एड्रेस: UPSIDA कॉम्प्लेक्स, A-1/4, लखनपुर, कानपुर – 208024

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उबाल से क्या लाल होगा बाजार या बुल्स भरेगा आज नई उड़ान, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशियाई बाज़ार मंगलवार की भारी बिकवाली से उबर गए हैं। US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट से पहले आई उम्मीद ने ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाया है।

सुबह 8:15 बजे GIFT निफ्टी 245 अंक या 1.02 फीसदी बढ़कर 24,230 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार की क्लोजिंग 23,985.35 से काफी ऊपर खुल सकता है। यह सकारात्मक संकेत तब आया है जब मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़्यादातर सपाट कारोबार हुआ था। सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। IT, ऑटो और रियल्टी शेयरों में बढ़त के बावजूद एनर्जी, FMCG, मेटल और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के कारण बाज़ार में गिरावट रही।

भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में रिकवरी

पिछले सेशन में भारी नुकसान के बाद बुधवार को एशियाई शेयरों में रिकवरी हुई, क्योंकि निवेशक US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई का इंतज़ार कर रहे थे।

मंगलवार को 3.6 प्रतिशत गिरने के बाद MSCI का एशिया-पैसिफिक शेयरों (जापान को छोड़कर) का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.8 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि जापान के निक्केई में लगभग 1 प्रतिशत की तेज़ी आई। नैस्डैक फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत बढ़े और यूरोपीय फ्यूचर्स ने भी मज़बूत शुरुआत का संकेत दिया।

यह रिकवरी AI से जुड़े खर्च, चिप-सेक्टर के वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बनी चिंताओं के बावजूद हुई, जिनकी वजह से इस हफ़्ते की शुरुआत में टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी।

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण क्रूड में उछाल

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण हाल के दिनों में देखी गई शांति खत्म हो गई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 3 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़कर $81.95 पर पहुंच गया। यह बढ़त तब हुई जब US सेना ने कहा कि ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें सफलतापूर्वक रोक दिया गया। मंगलवार को अमेरिकी बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। एप्पल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजे आने से पहले, सेमीकंडक्टर शेयरों में आई गिरावट की भरपाई डिफेंसिव हैवीवेट शेयरों में हुई बढ़त से हो गई।

S&P 500 में 0.21 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.03 प्रतिशत चढ़ा। नैस्डैक कंपोजिट 0.22 प्रतिशत गिरा क्योंकि निवेशक टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर सतर्क रहे।

उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व बुधवार को बाद में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा; बाज़ार में दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना 71 प्रतिशत और 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 29 प्रतिशत मानी जा रही है।

निफ्टी- बैंक निफ्टी पर क्या बनाए रणनीति

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि सोमवार को आई ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कमज़ोर ग्लोबल मार्केट संकेतों के बीच मंगलवार को निफ्टी 50 कंसोलिडेशन के दौर में चला गया। उन्होंने बताया कि डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक छोटी बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है, जिसमें ऊपर की तरफ़ एक छोटी शैडो (upper shadow) है। यह 24,000–24,100 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास उतार-चढ़ाव वाली चाल (choppy price action) का संकेत देता है, जो ‘पोलैरिटी में बदलाव’ (change in polarity) के कॉन्सेप्ट के अनुरूप है।

शेट्टी के अनुसार, जारी कंसोलिडेशन के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है। हालांकि, इंडेक्स के एक अहम ओवरहेड रेजिस्टेंस के पास होने की वजह से, उन्हें उम्मीद है कि 24,100 के लेवल के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट की कोशिश करने से पहले, मार्केट में निकट भविष्य में और कंसोलिडेशन या मामूली पुलबैक देखने को मिल सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

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