Thangamayil Jewellery Share Price: Q1 मुनाफे में जबरदस्त उछाल के बाद भी शेयर में लगा 10% का लोअरसर्किट, आखिर क्या है इसकी वजह

Thangamayil Jewellery Share Price: ज्वैलरी रिटेलर थंगामयिल ज्वैलरी  (Thangamayil Jewellery) के शेयरों में 29 जुलाई को भारी गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में दमदार मुनाफे के बाद भी शेयर में आज 10 फीसदी का लोअरसर्किट लग गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों ने कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के बजाय मौजूदा तिमाही के लिए कंपनी के सतर्क नजरिए पर ज्यादा ध्यान दिया, जिससे सेंटीमेंट पर असर पड़ा।

जून तिमाही के दौरान कंपनी ने रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में जबरदस्त ग्रोथ दिखाया है। हालांकि, मैनेजमेंट ने मांग में लगातार कमजोरी की ओर इशारा किया। इसके पीछे उन्होंने वेस्ट एशिया में युद्ध की अनिश्चितता, सोने पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी, रुपये की गिरती कीमतों को टहराया है। साथ ही सोने की कीमतें कम होने की उम्मीद में ग्राहकों द्वारा खरीदारी टालने का हवाला भी दिया है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

थंगामयिल ज्वैलरी  ने जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए ₹85 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹45.7 करोड़ से 86% ज्यादा है। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 71.2% बढ़कर ₹2,666.4 करोड़ हो गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही में यह ₹1,558 करोड़ था।

ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी मजबूत रही। EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 66.2% बढ़कर ₹144.6 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹87 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन थोड़ा घटकर 5.4% रह गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 5.6% था।

अच्छे फाइनेंशियल नतीजे दिखाने के बावजूद, कंपनी ने निकट भविष्य में मांग को लेकर सतर्क रुख दिखाया।

30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान सेम-स्टोर सेल्स (SSS) ग्रोथ 44.4% रही, जबकि तिमाही-दर-तिमाही आधार पर यह ग्रोथ 72.3% थी। थंगामयिल ज्वैलरी  ने कहा कि सोने की बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) अपेक्षाकृत कम रही, भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें पिछली तिमाही (जब कीमतें काफी ऊंची थीं) की तुलना में कम थीं। कंपनी के अनुसार, मांग पर मुख्य रूप से 13 मई, 2026 से सोने पर आयात शुल्क (import duty) 6% से बढ़कर 15% होने और भारतीय रुपये की कीमत में काफी गिरावट का असर पड़ा। इन घटनाक्रमों के कारण कई ग्राहकों ने गहनों की खरीदारी टाल दी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में अमेरिकी डॉलर के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें कम हो सकती हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता का ग्राहकों की धारणा पर बुरा असर पड़ा। कंपनी ने बताया कि जिन इलाकों में वह काम करती है, वहां से आने वाले पैसे (remittances) में कमी के कारण विदेशों में रहने वाले भारतीयों (expatriates) द्वारा सोने की खरीदारी में सुस्ती आई, जिससे तिमाही-दर-तिमाही आधार पर बिक्री और कम हुई।

मैनेजमेंट ने संकेत दिया कि मौजूदा तिमाही में भी यह कमजोरी बनी हुई है। थंगामयिल ज्वैलरी  ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के पहले 28 दिनों में बिक्री में कोई खास सुधार नहीं दिखा। बिक्री में लगातार सुस्ती की वजह युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता और ग्राहकों की यह उम्मीद रही कि अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आएगी, जिसके चलते उन्होंने खरीदारी को और टाल दिया।

कंपनी को उम्मीद है कि जियोपॉलिटिकल हालात स्थिर होने और सोने की कीमतों को लेकर नजरिया बेहतर होने पर यह टली हुई मांग वापस आएगी। उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में मांग में सुधार होगा।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

हालांकि बुधवार के कारोबार में स्टॉक 10% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। थंगामयिल ज्वैलरी  के शेयरों में पिछले 1 महीने में 10%, 3 महीनों में 62% और पिछले 6 महीनों में 85% की बढ़त हुई है। एक साल के आधार पर, स्टॉक ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है और इसमें 249% की उछाल आई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में इसने 1,370% का रिटर्न दिया है।

स्टॉक ने पिछले कारोबारी सत्र में 28 जुलाई को ₹7,429 का अपना 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹1,774.35 पिछले साल जुलाई में दर्ज किया गया था।

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FY26 में भारत में Costa Coffee के स्टोर घटकर रह गए 198, फिर भी रेवेन्यू 7% बढ़ा

ब्रिटेन के कॉफी चेन ब्रांड कोस्टा कॉफी के बीते वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 22 स्टोर कम हो गए। अब स्टोर्स की संख्या 198 रह गई है। इससे पहले के वित्त वर्ष में कंपनी के देशभर में 220 आउटलेट थे। 5 सालों में यह पहली बार है, जब भारत में कोस्टा कॉफी के स्टोर घटे हैं। कोस्टा कॉफी की एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी पार्टनर देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है। कोस्टा कॉफी का मालिकाना हक ‘द कोका कोला कंपनी’ के पास है।

हालांकि, स्टोर की संख्या कम होने के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में कोस्टा कॉफी के रेवेन्यू में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह 212.5 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2024-25 में रेवेन्यू 198.5 करोड़ रुपये था। यह दर्शाता है कि कंपनी अब केवल स्टोर बढ़ाने के बजाय प्रति आउटलेट अधिक बिक्री और बेहतर प्रदर्शन पर ध्यान दे रही है। सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि कोस्टा कॉफी अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए अधिक अनुशासित और चयनात्मक (सिलेक्टिव) रणनीति अपना रही है।

Costa Coffee ने 2020-21 से किया तेजी से विस्तार

कोस्टा कॉफी ने भारत में वित्त वर्ष 2020-21 से तेजी से विस्तार किया। उस समय कंपनी के केवल 44 स्टोर थे, जो वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 55 हो गए। वित्त वर्ष 2022-23 में इनकी संख्या 112, वित्त वर्ष 2023-24 में 179 और वित्त वर्ष 2024-25 में 220 हो गई। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में स्टोर की संख्या घटकर 198 रह गई। कोस्टा कॉफी के ग्लोबल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) फिलिप शैले ने अप्रैल, 2025 में कहा था कि भारत कंपनी के टॉप 20 बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में यह टॉप 5 बाजारों में शामिल हो सकता है।

देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी कोस्टा कॉफी को मजबूत करना जारी रखे हुए है। ब्रांड ने युवाओं पर केंद्रित रीब्रांडिंग के जरिए खुद को उन कॉफी प्रेमियों की पसंदीदा चॉइस के तौर पर स्थापित किया है जो बेहतर माहौल चाहते हैं, जिसे यंग प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए ‘सोशल स्पेस’ के तौर पर डिजाइन किया गया है।

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भारत में कोस्टा कॉफी के कॉम्पिटीटर

भारत में कोस्टा कॉफी का मुकाबला स्टारबक्स, टिम हॉर्टन्स, McCafe जैसी इंटरनेशनल चेन से है। इसके अलावा, कैफे कॉफी डे, ब्लू टोकाई, थर्ड वेव कॉफी और बरिस्ता जैसी लोकल चेन भी भारत के तेजी से बढ़ते कैफे मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।