गुरुग्राम में बारिश का ऐसा कहर कि करोड़ों के फ्लैट और लग्जरी कारें भी बेकार! स्कूल चलेंगी ऑनलाइन, ऑफिसों में WFH

Gurugram Rain: देश के सबसे महंगे और आधुनिक शहरों में गिने जाने वाले गुरुग्राम की चमक तेज बारिश के सामने फीकी पड़ गई है। हरियाणा के इस प्रमुख शहर में भारी जलभराव ने आम लोगों से लेकर करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी और लग्जरी कारों तक सबको एक ही कतार में ला खड़ा कर दिया है। हालत यह रही कि महंगे इलाकों में रहने वाले लोगों को भी पानी से भरी सड़कों पर निकलने में भारी परेशानी हुई।

बारिश के कारण गुरुग्राम की कई प्रमुख सड़कें और अंडरपास पानी में डूब गए। ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। कई जगह स्कूल बसें तथा एंबुलेंस तक जलभराव में फंस गईं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने आज यानी 25 अगस्त को जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में क्लासेस ऑनलाइन कराने का निर्देश दिया है। वहीं कॉरपोरेट और निजी कंपनियों को कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा देने की सलाह दी गई है।

75 MM बारिश ने बिगाड़े हालात

जिला प्रशासन ने बताया कि सोमवार को गुरुग्राम में 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजीव चौक, इफ्को चौक, रेलवे रोड, सेक्टर-5, पुरानी दिल्ली रोड, महरौली रोड और बसई रोड समेत प्रमुख इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए। नाहरपुर अंडरपास में भी पानी भर गया। कई सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही। लोग पानी से भरी सड़कों से गुजरते दिखाई दिए। पुराने गुरुग्राम के सदर बाजार, गुरुद्वारा रोड और पुरानी दिल्ली रोड समेत कई इलाकों में जलभराव के कारण घंटों तक भारी जाम लगा रहा।

ट्रैफिक जाम से हाहाकार

ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिरहौल बॉर्डर, राजीव चौक, नरसिंहपुर और कुछ अन्य जगहों पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही। उन्होंने कहा कि स्थिति संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। ‘साइबर हब’ के पास गेटवे टावर मेट्रो स्टेशन के सामने एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया, जिससे प्रमुख मार्ग पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ।

शीतला माता रोड पर बुरा हाल

शीतला माता रोड भी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल रहा। इस सड़क पर मानसून में अक्सर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बारिश के दौरान नगर निगम के अधिकारी मौके पर सक्रिय रहे। नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया और अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त यश जालुका ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों के साथ जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया।

स्कूल बसों में फंसे बच्चे, 5-6 घंटे की देरी

बारिश का सबसे बड़ा असर स्कूली बच्चों पर देखने को मिला। कई स्कूल बसें पानी में फंस गईं और बच्चों को घर पहुंचने में सामान्य से 5 से 6 घंटे ज्यादा समय लगा। जलभराव के कारण कई परिवारों को अपने बच्चों के घर लौटने को लेकर घंटों चिंता में रहना पड़ा। यही वजह है कि प्रशासन ने 25 अगस्त को स्कूलों को ऑनलाइन करने का फैसला लिया।

करोड़ों की प्रॉपर्टी भी नहीं बचा पाई

गुरुग्राम की पहचान देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में होती है। गोल्फ कोर्स रोड जैसे इलाकों में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी मौजूद है। लेकिन सोमवार 24 अगस्त को हुई बारिश ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया- क्या करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी भी खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और जलभराव से बचा सकती है?

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस स्थिति को लेकर कई पोस्ट किए। कुछ लोगों ने यह तक कहा कि शहर में करोड़ों रुपये के फ्लैट और महंगी कारें होने के बावजूद अगर सड़कें पानी में डूब जाएं तो इन संपत्तियों की असली उपयोगिता कितनी रह जाती है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने शेयर किया कि उसने कार खरीदने के बजाय अपना पैसा शेयर बाजार में निवेश किया था। लेकिन बारिश के दौरान उसे एक बाइक सवार ने मदद करके सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। इस घटना ने गुरुग्राम के जलभराव और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहस को और तेज कर दिया।

तीसरी बार बारिश ने रोका गुरुग्राम

इस मानसून में यह पहली बार नहीं है जब गुरुग्राम की रफ्तार थमी हो। इससे पहले 9 जुलाई को भी लगातार बारिश के बाद निजी संस्थानों और कॉरपोरेट ऑफिसों के लिए WFH की सलाह दी गई थी। अगस्त के पहले सप्ताह में भी लगातार बारिश के बाद दो दिन के लिए WFH एडवाइजरी जारी की गई थी। उस दौरान 24 घंटे में गुरुग्राम में करीब 97 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। IMD ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। कई निचले इलाकों में पानी भर गया था।

₹1,400 करोड़ खर्च के बावजूद उठे सवाल

बारिश के बाद गुरुग्राम के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधते हुए शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम पर करीब ₹1,400 करोड़ खर्च किए जाने के बावजूद शहर बारिश के दौरान जलभराव से जूझ रहा है। सुरजेवाला ने स्कूल बसों के फंसने, सड़कों पर पानी भरने और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। गुरुग्राम समेत दिल्ली-एनसीआर में आज भी भारी बारिश हो रही है।

ये भी पढ़ें- यूपी में लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं; इलाहाबाद HC ने खारिज की मुस्लिम छात्रा की याचिका

यूपी में लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं; इलाहाबाद HC ने खारिज की मुस्लिम छात्रा की याचिका

Hijab in Islam: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति देने का स्कूल अधिकारियों को निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है। प्रयागराज के अतरसुइया थाना अंतर्गत टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए यह याचिका दायर की थी। रिजवी ने इस स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की है। वह इसी स्कूल में 11वीं कक्षा में एडमिशन ले रही है। अदालत ने कहा कि दूसरी हाई कोर्ट्स की भी यही राय रही है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने कहा, “हमने याचिकाकर्ता से जुड़ी विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरें देखी हैं और केवल उसे छोड़कर किसी भी छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है। यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है।”

अदालत ने कहा, “जब कभी भी यह मुद्दा उठा है, उच्च न्यायालयों का एकमत रहा है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है। एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।” हाई कोर्ट ने 21 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि याचिका में यह दावा कि हिजाब पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, केवल एक दावा भर है।”

स्टूडेंट ने स्कूल प्रशासन से यूनिफॉर्म के अलावा सिर पर स्कार्फ पहनने की इजाजत देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामिक परंपरा का एक जरूरी हिस्सा है। छात्रा उसी स्कूल में छठी कक्षा से ही इसे पहनती आ रही हैं।

‘हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की जरूरी प्रथा नहीं’

हाई कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है। कोर्ट ने आगे कहा, “जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाई कोर्ट्स की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए हेडस्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है, जिसके बिना आस्था खतरे में पड़ जाएगी।” अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रिट याचिका में यह दावा कि हेडस्कार्फ पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, महज एक दावा भर है।”

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब तक किसी स्कूल का यूनिफॉर्म कोड निष्पक्ष और बिना भेदभाव का है। उसे संस्थान में अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है, तब तक संस्थान को अपने आंतरिक अनुशासन और ड्रेस कोड को लागू करने की पूरी आजादी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट शिक्षण संस्थान को अपने परिसर में एक जैसा ड्रेस कोड लागू करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने माना कि तय स्कूल यूनिफॉर्म का पालन करना जरूरी है। साथ ही व्यक्तिगत आधार पर उसमें हेडस्कार्फ जोड़ने की अनुमति मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

ये भी पढ़ें- मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

कोर्ट ने साफ किया कि अगर यूनिफॉर्म सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। व्यक्तिगत छात्रों को अपनी पसंद के आधार पर तय यूनिफ़ॉर्म में बदलाव करने या उसे न पहनने की अनुमति देने से यूनिफॉर्म का मूल मकसद ही खत्म हो जाएगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के हाथ से निकलकर व्यक्तिगत छात्रों के हाथ में चला जाएगा।

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

DK Shivakumar-Adani meeting: कर्नाटक में अदाणी-शिवकुमार की मुलाकात को लेकर सियासी घमासान! BJP ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड को लेकर साधा निशाना

DK Shivakumar-Adani meeting: दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी ने रविवार 24 अगस्त को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के साथ मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा।

सूत्रों के अनुसार, अदाणी ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ गए थे। एयरपोर्ट लौटते समय सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर शिवकुमार से मिले। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया। यह मुलाकात हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना के बीच हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है। हालांकि, टेंडर को अभी आधिकारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

यह तत्काल पता नहीं चल सका कि शिवकुमार और अदाणी के बीच बातचीत में सुरंग सड़क परियोजना का मुद्दा उठा या मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रही। शिवकुमार ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार था जब वह (अदाणी) यहां मुझसे मिलने आना चाहते थे। वे यहां कई कारोबार कर रहे हैं। वह शिष्टाचारवश मुझसे मिलने आए थे।”

BJP हुई हमलावर

इस बीच, BJP के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने इस मुलाकात की आलोचना करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिवकुमार को अदाणी से मिलने की अनुमति दी थी। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अशोक ने कहा, “कांग्रेस दिल्ली में अदाणी का विरोध करती है, जबकि कर्नाटक में उसके पक्ष में है। क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?” उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने अदाणी के लिए ‘लाल कालीन बिछा दी’ है।

अशोक ने शिवकुमार से राहुल गांधी को यह बताने को कहा कि अदाणी एक कारोबारी हैं। वह केवल कारोबार कर रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर तंज कसते हुए अशोक ने उनसे बेंगलुरु आने और लालबाग या सैंकी टैंक में किसी पेड़ को गले लगाने को कहा जो प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना से प्रभावित होंगे। BJP सुरंग सड़क परियोजना का विरोध कर रही है। भगवा पार्टी के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है।

प्रियांक खड़गे की आई सफाई

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सीएम डीके शिवकुमार की गौतम अदाणी के साथ हुई मीटिंग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह उद्योगपति राज्य सरकार के लिए सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्टर है। टेंडर प्रोसेस पर कोई असर नहीं डाला गया है। खड़गे ने पत्रकारों से कहा, “हमारे लिए अदाणी एक कॉन्ट्रैक्टर हैं। वे कुछ प्रोजेक्ट्स में सबसे कम बोली लगाने वाले हैं। ये कर्नाटक सरकार के लिए अहम प्रोजेक्ट्स हैं। हमने टेंडर प्रोसेस को प्रभावित नहीं किया है। कोई भी L1 बन सकता है।”

BJP से पूछा सवाल

उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप पर कांग्रेस का राजनीतिक रुख नहीं बदला है। लेकिन साथ ही कहा कि राजनीतिक मतभेदों से यह तय नहीं हो सकता कि सरकारी टेंडर की प्रक्रिया कैसे होगी। खड़गे ने कहा, “अगर अदाणी कानूनी तरीके से टेंडर हासिल करते हैं, तो ठीक है।” उन्होंने टनल रोड प्रोजेक्ट पर बीजेपी के रुख पर भी सवाल उठाया। साथ ही पूछा कि क्या विपक्ष अब भी इसका विरोध करेगा, जब अदाणी ग्रुप की एक कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है।

राज्य सरकार द्वारा बताई गई बोली की जानकारी के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज ने 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यह बोली सरकार की शुरुआती अनुमानित प्रोजेक्ट लागत 17,698 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

वहीं, शिवकुमार की अदाणी से मुलाकात पर कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, “हमने साफ तौर पर कहा है कि हम एकाधिकार के खिलाफ हैं। हम किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम हमेशा कहते हैं कि अगर किसी एक उद्योगपति का एकाधिकार हो जाए, तो यह देश के लिए अच्छा नहीं है।”

Delhi Rains: दिल्ली-NCR में भारी बारिश से हवाई सेवा प्रभावित! 250 से ज्यादा उड़ानें लेट, 15 फ्लाइट डायवर्ट

Delhi Rains: दिल्ली-NCR में सोमवार (24 अगस्त) को हुई मूसलाधार बारिश का असर सड़क ट्रैफिक के साथ-साथ हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर 250 से ज्यादा उड़ानें देरी से चल रही हैं। जबकि मौसम खराब होने के कारण 15 उड़ानों को दूसरे शहरों की ओर डायवर्ट करना पड़ा। डायवर्ट की गई उड़ानों में तीन इंटरनेशनल फ्लाइट भी शामिल हैं। इनमें से 12 उड़ानों को जयपुर, 2 को चंडीगढ़ और 1 उड़ान को लखनऊ भेजा गया। हालांकि, मौसम में सुधार के साथ दिन आगे बढ़ने पर उड़ान संचालन के सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।

भारी बारिश से दिल्ली में जलभराव और ट्रैफिक जाम

दिल्ली में सोमवार को हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कों पर पानी भरने से कई जगहों पर यातायात की रफ्तार धीमी रही और लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि कुछ अन्य इलाकों के लिए मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया।

एयरलाइंस ने यात्रियों को किया अलर्ट

मौसम की स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस ने यात्रियों को अपनी उड़ान का स्टेटस चेक करने की सलाह दी है। एयरलाइंस ने यह भी चेतावनी दी कि खराब मौसम का असर कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर भी पड़ सकता है। एयर इंडिया (Air India) ने यात्रियों को बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों का संचालन प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हो सकता है। इंडिगो (IndiGo) ने कहा कि दिल्ली के ऊपर खराब मौसम के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है। एयरलाइन ने यात्रियों से धैर्य रखने और उड़ान की स्थिति पर नजर बनाए रखने की अपील की।

स्पाइसजेट (SpiceJet) ने भी यात्रियों को आगाह करते हुए कहा कि दिल्ली में खराब मौसम के कारण सभी आने-जाने वाली उड़ानें और उनसे जुड़ी कनेक्टिंग उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। यात्रियों से एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचने को कहा गया। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने कहा कि दिल्ली में गंभीर मौसम की स्थिति के कारण उसके नेटवर्क की कुछ उड़ानें प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को हुई असुविधा के लिए उसने खेद जताया।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों को एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जरूर चेक करने, अतिरिक्त यात्रा समय लेकर चलने और कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्रियों को एयरलाइन के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मध्य दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, नई दिल्ली, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कुछ स्थानों पर बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ भारी बारिश हुई। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शहर के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की शिकायत की।

‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी

दिल्ली में भारी बारिश के बाद मौसम विभाग ने रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों में बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ तेज से मध्यम बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे के बीच दिल्ली में सबसे अधिक 28 मिलीमीटर (मिमी) बारिश छतरपुर में दर्ज की गई। इसके बाद लोधी रोड में 24.6 मिमी और पीतमपुरा में 18.5 मिमी बारिश हुई।

इस दौरान रिज में पांच मिमी, मयूर विहार में 1.5 मिमी, सफदरजंग में एक मिमी और आयानगर में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलीं। न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन, बुराड़ी, सीआर पार्क और अलकनंदा के आसपास जलभराव की सूचना मिली। यात्रियों ने भी सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम और जलभराव वाले मार्गों की जानकारी शेयर की।

ये भी पढे़ं- Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

दिल्ली में सोमवार को शहर के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 1.4 डिग्री अधिक है। रिज में सबसे कम न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

Tukaram Mundhe News मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच एक नाम चर्चा में है तुकाराम मुंढे…। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के तौर पर 51 वर्षीय मुंढे ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कई चर्चित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत FDA ने राज्य भर में सैकड़ों होटलों, रेस्तरां और ढाबों एक्शन लिया था।

मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए हैं। मई में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद से उनकी टीम 3,000 से ज्यादा छापे और निरीक्षण कर चुकी है।

इन कार्रवाइयों में बड़े ब्रांडों के साथ-साथ क्रिकेट क्लब, होटल, मशहूर रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। मुंढे का साफ संदेश है कि जो भी खाद्य कारोबारी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

जज ने पूछा- कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई?

मुंढे की कार्रवाई तब और चर्चा में आ गई जब मुंबई की एक अदालत के जज ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य विभाग निजी दुकानों के खिलाफ ही सख्ती कर रहा है। क्या अदालत की कैंटीनों की भी जांच की गई है? मुंढे की टीम ने इस सवाल का जवाब घंटों के भीतर कार्रवाई से दिया।

अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ ऐसी कैंटीनों को बंद कराया जो कथित तौर पर बिना लाइसेंस चल रही थीं। इस घटना ने यह संदेश दिया कि विभाग बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी या संस्थागत परिसरों में चलने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रख रहा है।

हर दिन वायरल हो रही छापेमारी की तस्वीरें

मुंढे की कार्रवाई की सबसे खास बात उसका सार्वजनिक असर है। छापों के बाद खाद्य विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में कई जगहों पर गंदी दीवारें, कॉकरोच, चूहे और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिखाई दी। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से खराब साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता को यह कहकर सामान्य मान लिया गया था कि भारत में ऐसा होता है।

अब मुंढे की कार्रवाई से लोगों को उम्मीद दिखाई दे रही है कि खाद्य सुरक्षा के नियम वास्तव में लागू किए जा सकते हैं। कंज्यूमर कंसल्टिंग फर्म ‘The Knowledge Company’ के पार्टनर अंकुर बिसेन के मुताबिक, लोगों में लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा है। ऐसे में मुंढे की कार्रवाई ने उसे आवाज दी है।

खाने में रंग से लेकर तेल बदलने तक, दुकानदारों में डर

मुंबई में न्यूज एजेंसी Reuters ने 25 स्ट्रीट वेंडर्स और रेस्टोरेंट का दौरा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे की कार्रवाई का असर छोटे कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है। एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक अन्य दुकानदार ने अपना तलने वाला तेल दिन में तीन बार बदलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

मुंबई के फेमस वड़ा पाव पर भी कार्रवाई

मुंबई का मशहूर वड़ा पाव भी मुंढे की खाद्य सुरक्षा मुहिम से बच नहीं पाया है। जून में खाद्य विभाग ने वड़ा पाव समेत खाने की चीजों को पैक करने के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। मुंबई में लंबे समय से सड़क किनारे खाने की चीजों को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर साफ बटर पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 14 वर्षीय सुप्रिया वागले को अपने पसंदीदा वड़ा पाव की साफ बटर पेपर में पैकिंग पसंद आई। उसका कहना है कि इससे उसे राहत महसूस होती है और वह स्ट्रीट फूड को लेकर ज्यादा भरोसा कर पा रही है।

Domino’s और Pizza Hut के बाद McDonald’s पर भी एक्शन

मुंढे की टीम ने कई बड़े ब्रांडों के आउटलेट पर भी कार्रवाई की है। Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के परमिट निलंबित किए गए हैं। इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई। विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान वहां जिंदा कीट यानी कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना मिला।

हालांकि, Reuters के सवालों पर संबंधित तीनों कंपनियों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई। मुंढे की कार्रवाई केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। विभाग ने मुंबई के एक ब्रिटिश दौर के क्रिकेट क्लब, करीब 70 साल पुराने आइसक्रीम पार्लर और 110 साल पुराने पारसी डेयरी के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

कारोबारी बोले- सुधार का समय तो दिया जाए

मुंढे की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ कारोबारियों का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने और कमियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए खाद्य विभाग पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।

एक मामले में अदालत ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के अनुसार, संबंधित खाने के प्रतिष्ठान ने अपनी कमियों में सुधार कर लिया था, इसके बावजूद उसका परमिट निलंबित रखा गया था। मुंढे ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। जहां सुधार की गुंजाइश होती है, वहां विभाग सुधार करता है।

हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से हर साल भारत में खाद्य निरीक्षकों ने एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की है। इनमें करीब 20 प्रतिशत नमूने असुरक्षित, घटिया या सही लेबलिंग के बिना पाए गए। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 खाद्य कारोबार लाइसेंस रद्द किए गए हैं। ऐसे आंकड़ों के बीच मुंबई में मुंढे की कार्रवाई को लोग सिर्फ एक अधिकारी की सख्ती के रूप में नहीं। बल्कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।

21 साल की नौकरी में कई बार हुआ तबादला

तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के तौर पर करीब 21 साल के करियर में उनका कई बार तबादला हो चुका है। 2018 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका लगभग हर साल तबादला हो जाता है।

उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार करने और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं डरने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग में उनकी शैली एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल होती छापेमारी की तस्वीरों के कारण।

सेलिब्रिटी जैसी लोकप्रियता, लेकिन मुंढे बोले- मैं सेलिब्रिटी नहीं

मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंच गए। लोग उनसे हाथ मिलाने की कोशिश करते नजर आए। एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुंढे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।

ये भी पढ़ें- लो प्रेशर सिस्टम से अगले 4 दिन भारी! यूपी, बिहार, MP समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, मौसम को लेकर IMD ने दी ये चेतावनी

उन्होंने Reuters से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं कोई सेलिब्रिटी हूं। मैं सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हूं।” मुंढे का अभियान अब मुंबई से आगे भी चर्चा का विषय बन चुका है। उनके सामने चुनौती सिर्फ छापे मारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में साफ-सफाई और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक बना रहे।

लो प्रेशर सिस्टम से अगले 4 दिन भारी! यूपी, बिहार, MP समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, मौसम को लेकर IMD ने दी ये चेतावनी

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसूनी सिस्टम एक बार फिर बेहद एक्टिव हो गया है। गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तरी ओडिशा के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर की वजह से मौसम विभाग (IMD) ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान देश के अलग अलग राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। IMD के मुताबिक इस नए मौसमी तंत्र के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके उलट दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियां काफी सुस्त रह सकती हैं।

बीते 24 घंटों में बदला मौसम का मिजाज

आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भीषण बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक की बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, केरल, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है।

उत्तर भारत का मौसम: यूपी और उत्तराखंड में तेज बारिश की संभावना

उत्तर भारत में मानसून की ट्रफ रेखा अपने सामान्य स्थान से उत्तर की ओर बनी हुई है। इसके असर से उत्तराखंड में 24 से 30 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश होगी जबकि 24 अगस्त तथा 29 से 30 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो 24 से 26 अगस्त के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश और भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी 24 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के इलाकों में भी 30 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा।

मध्य भारत का हाल: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

मध्य भारत में कम दबाव का क्षेत्र सीधा असर डाल रहा है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 24 से 26 अगस्त तक व्यापक बारिश के साथ-साथ अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 27 अगस्त को भी भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 24 से 26 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी और यह सिलसिला 29 से 30 अगस्त तक जारी रहेगा। छत्तीसगढ़ में 24 और 25 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है जबकि विदर्भ क्षेत्र में 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश और बिजली कड़कने की आशंका जताई गई है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा और बिहार में आंधी-तूफान के साथ बारिश

पूर्वी भारत में बने इस सिस्टम के चलते 24 अगस्त को ओडिशा और झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में अगले 3 से 4 दिनों यानी 24 से 27 अगस्त तक भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 अगस्त तक तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहेगी।

अंडमान में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 24 से 30 अगस्त के दौरान भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।

पश्चिमी और दक्षिण भारत का पूर्वानुमान

पश्चिम भारत के कोंकण और गोवा में 30 अगस्त तक व्यापक बारिश जारी रहेगी जबकि मध्य महाराष्ट्र में 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है। दक्षिण भारत की स्थिति देखें तो तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में 24 और 25 अगस्त को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। केरल और माहे में 24 अगस्त को बहुत भारी बारिश तथा 25 व 26 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में 24 से 28 अगस्त के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

ये भी पढ़ें- ‘VVIP विजिट से पहले ऐसी चर्चा आम बात है’; PM मोदी-ट्रंप मुलाकात में ‘नो क्वेश्चन’ पर सर्जियो गोर को भारत का जवाब

‘VVIP विजिट से पहले ऐसी चर्चा आम बात है’; PM मोदी-ट्रंप मुलाकात में ‘नो क्वेश्चन’ पर सर्जियो गोर को भारत का जवाब

Sergio Gor No Questions Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया के सवालों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि किसी भी VVIP दौरे से पहले नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी और मीडिया से बातचीत को लेकर चर्चा करना एक सामान्य प्रक्रिया है। नई दिल्ली ने कहा कि यह किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं है।

गोर के बयान पर सरकार के सूत्र की तरफ से साफ किया गया है कि नेताओं की सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़ी व्यवस्थाओं पर VVIP दौरे से पहले चर्चा होती है। इसी संदर्भ में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं के लिए अपनी मानक प्रक्रिया अमेरिकी पक्ष के साथ साझा की थी। सूत्रों ने कहा, “किसी भी VVIP विज़िट से पहले नेताओं के पब्लिक में आने के इंतजाम के बारे में बातचीत आम बात है। इस बारे में भारतीय पक्ष ने ऐसे विजिट के लिए अपने स्टैंडर्ड प्रैक्टिस के बारे में बताया।”

सर्जियो गोर ने क्या कहा था?

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बैठक के दौरान मीडिया की मौजूदगी और पत्रकारों के सवालों को लेकर पहले से एक समझ बनी थी। गोर के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप के साथ बैठक से पहले निजी बातचीत की थी। ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारत किन मुद्दों को उठाना चाहता है और क्या नई दिल्ली की ओर से कोई विशेष अनुरोध है।

गोर ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से मुख्य अनुरोध था कि मीडिया को बैठक में बुलाया जाए। लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न बदला जाए। गोर के अनुसार, उन्होंने ट्रंप से कहा था कि भारतीय पक्ष पत्रकारों के सवाल नहीं चाहता। ट्रंप ने कथित तौर पर इस पर सहमति जताई और कहा कि कोई समस्या नहीं है।

उन्होंने कहा, “एवियन में G7 के दौरान PM मोदी से मिलने से पहले मैं प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ था। उन्होंने पूछा कि क्या भारत की कोई रिक्वेस्ट है। MEA क्या मुद्दे उठा सकता है। मैंने उनके साथ कुछ टॉपिक डिस्कस किए। भारत के MEA ने कहा था कि प्रेस को आने दें लेकिन कोई सवाल नहीं होगा। ट्रंप मान गए। लेकिन जब मीडिया आया तो क़रीब 50 कैमरे थे। दोनों ने अपनी बात रखी। फिर ट्रंप ने सबसे पहले मीडिया से पूछा कि क्या उनके कोई सवाल हैं। फिर उन्होंने 45 मिनट की कॉन्फ्रेंस की।”

ट्रंप ने पत्रकारों से पूछा- कोई सवाल?

गोर के मुताबिक, बैठक शुरू हुई तो वहां पत्रकारों के साथ करीब 50 कैमरे मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप ने शुरुआत में अपनी बात रखी। इसके बाद ट्रंप ने अचानक पत्रकारों की ओर देखकर पूछा- Any questions? यानी ‘कोई सवाल है?’

गोर ने आगे कहा कि ट्रंप के इस सवाल के बाद बैठक का पूरा प्रारूप बदल गया। पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका मिल गया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसी हो गई। उनके मुताबिक, इसके बाद कई अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए।

भारत ने क्यों कहा- यह सामान्य प्रोटोकॉल है?

गोर के बयान से ऐसा प्रतीत हुआ था कि भारत ने दोनों नेताओं की सार्वजनिक बातचीत के प्रारूप को सीमित रखने की इच्छा जताई थी। इसी पर भारत ने अब अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसी भी बड़े VVIP कार्यक्रम से पहले दोनों देशों के अधिकारी यह तय करने के लिए बातचीत करते हैं कि नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी किस तरह होगी। भारत का कहना है कि ऐसी व्यवस्थाओं पर पहले से बातचीत होना नियमित राजनयिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

प्रारूप तय करना और जवाब नियंत्रित करना अलग बात

इस मामले में सबसे अहम अंतर यही है। किसी बैठक से पहले यह कहना कि मीडिया से बातचीत किस प्रारूप में हो, एक प्रशासनिक और प्रोटोकॉल संबंधी विषय है। इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश के नेता को पत्रकारों के सवालों का क्या जवाब देना है, यह भी तय किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें- IAS Durga Shakti Nagpal: जज को फोन कर दबाव बनाने का आरोप; IAS दुर्गा शक्ति नागपाल पर चलेगा अवमानना केस

यानी भारत की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का सार यह है कि ‘नो क्वेश्चन’ या सीमित मीडिया इंटरेक्शन की पसंद बताना और किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करना दो अलग-अलग बातें हैं। गोर के मुताबिक, ट्रंप ने अंततः पत्रकारों के सवाल लेने का फैसला किया और बैठक का दायरा काफी बढ़ गया।

Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?

‘एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा’

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्ते या फारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।

रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमला

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।

Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।

चीन को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।

चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

होर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

ये भी पढ़ें- LPG Price Today August 24: आज फिर बढ़ गए एलपीजी गैस सिलेंडर के रेट? जानिए दिल्ली से मुंबई तक कितनी है कीमत

इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।

टायर 2 सिटी के इस लड़के ने 25 की उम्र में बनाया ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ, बैंक में पड़े हैं 45 लाख रुपये! डिजिटल की ताकत से मिली ये सक्सेस

Tier 2 City Story: इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में सही सोच और सही समय पर शुरुआत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी रेडिट पर सामने आई है। भारत के एक टायर-2 शहर के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने महज 18 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग से शुरुआत की और देखते ही देखते अपना खुद का डिजिटल-मीडिया बिजनेस खड़ा कर लिया। अपनी मेहनत के बल पर इस युवक ने 25 साल की उम्र में करीब ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ हासिल कर लिया है। रेडिट पर अपनी इस सफलता की कहानी साझा करते हुए युवक ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का ब्योरा दिया है।

18 की उम्र में फ्रीलांसिंग, फिर खड़ा किया अपना बिजनेस

युवक ने बताया है कि उसने 18 साल की उम्र से ही फ्रीलांस काम करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करने के बाद उसने एक डिजिटल-मीडिया कंपनी की नींव रखी। आज उसकी इनकम का मेन सोर्स उसका बिजनेस ही है। बिजनेस होने की वजह से उसकी कमाई फिक्स नहीं है बल्कि उतार-चढ़ाव भरी है। इसके बावजूद उसका पोर्टफोलियो उसकी सफलता की कहानी बयान कर रहा है।

जानिए कहां-कहां इन्वेस्ट है ₹1.6 करोड़

25 साल के इस युवा एंटरप्रेन्योर ने अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लासेज में डाइवर्सिफाई किया हुआ है:-

भारतीय शेयर: ₹85 लाख

कैश/बैंक अकाउंट: ₹45 लाख

रियल एस्टेट: ₹15 लाख

यूएस स्टॉक्स: ₹7.5 लाख

म्यूचुअल फंड्स: ₹5 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: ₹5 लाख

क्रिप्टोकरेंसी: ₹3 लाख

गोल्ड ईटीएफ: ₹2 लाख

फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹1 लाख

बैंक में पड़े हैं ₹45 लाख, आगे की स्ट्रैटिजी पर मांगी राय

युवक के बैंक खाते में पिछले काफी समय से ₹30 से ₹45 लाख की बड़ी राशि जमा है। उसका मानना है कि बचत खाते में इतना पैसा रखना काम का सौदा नहीं है। वह पिछले 1-2 सालों से रियल एस्टेट प्रॉपर्टी तलाश रहा है, लेकिन उसे अभी तक कोई ऐसा विकल्प नहीं मिला जहां कीमत और रिस्क/रिवॉर्ड का तालमेल सही बैठता हो। सुरक्षा के लिहाज से उसके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस तो है, लेकिन फिलहाल उसने अपने या अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है।

FIRE गोल हासिल करने की चाहत

युवक का मुख्य उद्देश्य अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाना, फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करना और किसी एक बिजनेस या एसेट पर निर्भरता कम करके फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना है ताकि वह जल्द से जल्द फायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का टारगेट हासिल कर सके।

ये भी पढ़ें- Islamic NATO: भारत के खिलाफ बांग्लादेश की साजिश? सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किये के ‘इस्लामिक NATO’ में होगा शामिल

उसने रेडिट कम्युनिटी से सुझाव मांगते हुए पूछा कि अगर 25 साल की उम्र में किसी के पास ₹1.5 से ₹2 करोड़ का नेटवर्थ हो और ₹40-45 लाख कैश में हो, तो उसे अपने अगले कदम के रूप में किन चीजों पर फोकस करना चाहिए?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)