BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया

आज के दौर में जब ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट्स छुट्टियों में घूमने-फिरने या आराम करने की सोचते हैं। वहीं, बेंगलुरु के एक BBA सेकंड ईयर के स्टूडेंट ने कुछ अलग करने का फैसला किया। पहले सास की परीक्षाएं खत्म होने के बाद मिले लगभग 3 महीने के वेकेशन में उसने सड़कों पर उतर रैपिडो बाइक चलाने का फैसला किया। इसके बाद इस छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी इस 3 महीने की यात्रा की पूरी कहानी बताई। छात्र ने अपनी पोस्ट में रोज की कमाई, ऐप के एल्गोरिदम, रेस्टोरेंट के चक्करों और गिग वर्कर्स की जिंदगी की कठिनाई को विस्तार से बताया है।

सुबह 8 से शाम 4:30 बजे की ड्यूटी और ₹1200 की रोजाना कमाई

स्टूडेंट ने बताया कि वह सुबह लगभग 8 बजे ऐप पर ऑनलाइन होता था और शाम 4:30 बजे तक काम करके घर लौट आता था। यानी वह रोज करीब 8.5 घंटे सड़कों पर बिताता था। शुरुआत में उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रैपिडो का प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम कैसे काम करता है। लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि शहर के किस इलाके में और किस समय राइड्स की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। जैसे ही उसने एल्गोरिदम का को समझ लिया, उसकी कमाई आसान हो गई। एक दिन में वह रोजाना करीब ₹1200 तक कमा लेता था। छात्र के लिए पॉकेट मनी और साइड हसल के तौर पर यह कमाई काफी अच्छी थी।

पर क्या सबकुछ अच्छा ही था? गिग वर्कर्स की असली मजबूरी समझिए

इस तजुर्बे ने छात्र को उन लोगों की जिंदगी के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया जो पूरी तरह से डिलीवरी या राइड-शेयरिंग पर ही निर्भर हैं। उसने बताया कि 8.5 घंटे के दौरान वह कभी ब्रेक नहीं लेता था या तो वह बाइक चला रहा होता था या फिर अगली राइड का इंतजार कर रहा होता था। छात्र का कहना है कि वह छुट्टियों में सिर्फ एक्सपीरियंस और पॉकेट मनी के लिए यह काम कर रहा था, इसलिए उसके पास किसी भी वक्त काम बंद करके घर जाने का विकल्प था। लेकिन जो लोग अपने परिवार को पालने के लिए फुल-टाइम यह काम करते हैं, उनके पास घर लौटने का ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

छात्र ने ऐप के सिस्टम पर भी नाराजगी जताई। उसने लिखा कि कैप्टन (ड्राइवर) का अपनी राइड्स पर कोई कंट्रोल नहीं होता। अगर कोई ग्राहक राइड कैंसिल कर देता है, तो उसकी गलती न होने के बावजूद ड्राइवर की रेटिंग खराब हो जाती है। किसी भी समस्या के समय ऐप से सही कस्टमर सपोर्ट पाना किसी बुरे सपने जैसा है।

दोपहर में जब राइड कम तो आजमाई ये ट्रिक

स्टूडेंट की पोस्ट के मुताबिक दोपहर 12 से 3 बजे के बीच राइड्स काफी कम हो जाती थीं, इसलिए वह इस दौरान फूड ऑर्डर डिलीवर करने लगा। उसने बताया कि रेस्टोरेंट का अनुभव एकदम अलग होता था। कभी खाना तुरंत मिल जाता तो कभी 20-25 मिनट तक खड़े होकर इंतजार करना पड़ता। अपने इस सफर की एक सबसे हैरान कर देने वाली घटना का जिक्र करते हुए उसने बताया कि रैपिडो के जरिए स्विगी का एक फूड ऑर्डर लिया था क्योंकि उसकी ड्रॉप लोकेशन लड़के के घर के पास थी।

वो एक आइसक्रीम शॉप से जुड़ा ऑर्डर था। पर जब वो आइसक्रीम शॉप पहुंचा तो वहां बिजली नहीं थी। उनकी मशीनें और कंप्यूटर बंद थे। वे ऑर्डर तैयार नहीं कर सकते थे। दुकान वालों ने उससे कहा कि उसे स्विगी को कॉल करके ऑर्डर कैंसिल कराना होगा।

उसने स्विगी को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि वे इसे कैंसिल नहीं कर सकते और उसे रैपिडो से संपर्क करना होगा। फिर उसने रैपिडो को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि यह स्विगी का ऑर्डर है इसलिए स्विगी से बात करो। कुल मिलाकर वो स्विगी और रैपिडो के इस इन्फिनिट लूप में फंस गया और 45 मिनट तक परेशान होता रहा। आखिरकार उसने देखा कि डिलीवरी लोकेशन एक ट्यूशन सेंटर की थी। उसने गूगल मैप्स पर ट्यूशन सेंटर का नंबर ढूंढा और उन्हें सीधे कॉल करके पूरी बात बताई। इसके बाद ट्यूशन सेंटर वालों ने रेस्टोरेंट स्टाफ से बात की और तब जाकर ऑर्डर कैंसिल हुआ।

छात्र ने बताया कि सबसे अजीब बात यह है कि रैपिडो तब तक कस्टमर का कांटेक्ट नंबर नहीं दिखाता जब तक आप खाना पिक न कर लें (जिसके लिए रेस्टोरेंट के ओटीपी की जरूरत होती है)। अगर वह ड्रॉप लोकेशन कोई रैंडम घर होता तो वह शायद कुछ नहीं कर पाता।

ऑटो ड्राइवरों लड़ाई हो जाने का भी खतरा

बेंगलुरु में अक्सर बाइक टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। छात्र ने बताया कि 3 महीनों के दौरान वह मजेस्टिक, रेलवे स्टेशनों और दूसरे बिजी इलाकों में नियमित रूप से ऐप लॉगिन करता था। ऑटो वाले कई बार उसे घूर-घूरकर ऐसे देखते थे मानो उसे स्कैन कर रहे हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि पूरे 3 महीनों में किसी भी ऑटो वाले ने उसे कभी धमकी नहीं दी और न ही कोई विवाद हुआ।

ग्राहकों के साथ उसका अनुभव काफी अच्छा रहा। उसने रास्ते में कई अनजान यात्रियों के साथ दिलचस्प बातचीत की और किसी भी ग्राहक के साथ उसका कोई कड़वा अनुभव नहीं रहा। उसने यह काम आरटीओ और बैन वाले हालिया विवादों से पहले ही खत्म कर लिया था, इसलिए उसे उस तरह की किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

3 महीने के सफर से मिला जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

इस BBA छात्र का मानना है कि यह 3 महीने का सफर सिर्फ ₹1200 रोज कमाने के बारे में नहीं था। इसने उसे जमीनी हकीकत दिखाई। राइड के लिए लंबा इंतजार, पेट्रोल का खर्च, अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म के कड़े नियम, रेस्टोरेंट की परेशानियां और लगातार चलते रहने का मानसिक दबाव जैसी जमीनी हकीकतों से उसे रुबरू होना पड़ा।

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रेडिट पोस्ट के आखिर में उसने अपने इस अनुभव का सबसे बड़ा हासिल बताते हुए लिखा है कि ‘एक स्टूडेंट के तौर पर 3 महीने के लिए गिग वर्क करना और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे मजबूरी में करना, दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। मेरे लिए यह महज एक साइड हसल था, लेकिन किसी और के लिए वही ₹1,200 उसके घर के बिल भरने और भूखे रहने के बीच का इकलौता सहारा हो सकते हैं।’

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 26 अगस्त से बांटे जाएंगे सैंक्शंस लेटर, महिलाओं के खाते में इस दिन से आएंगे ₹2,500!

Delhi Lakshmi Yojana 2026: दिल्ली सरकार की ‘लक्ष्मी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को 26 अगस्त से आर्थिक सहायता के सैंक्शन लेटर मिलना शुरू हो जाएंगे। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (18 अगस्त) को दिल्ली सचिवालय में हुई बैठक के बाद यह अहम जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सैंक्शन लेटर जारी होने के बाद योजना की राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी। सरकार के अनुसार, 1 सितंबर से महिलाओं के खातों में 2,500 रुपये की राशि जमा होना शुरू हो जाएगी।

सरकार ने 1 अगस्त से इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन मिलने के बाद सरकार ने आवेदनकर्ताओं की जांच और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए।

कौन महिलाएं होंगी पात्र?

इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला की उम्र 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए। साथ ही वह दिल्ली की निवासी हो और उसकी पारिवारिक आय निर्धारित सीमा के भीतर हो। आवेदन करने वाली महिला की आयु 18 साल से अधिक होने के साथ-साथ वह दिल्ली में कम से कम 10 वर्षों से रह रही होनी चाहिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला या उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी अथवा पेंशनभोगी होने पर वह योजना के लिए पात्र नहीं होगी। आयकर दाता परिवारों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा, जो महिलाएं पहले से किसी अन्य सरकारी योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं, वे भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगी। सरकारी नियमों के अनुसार, जिन महिलाओं या उनके परिवार के सदस्यों के पास चार पहिया वाहन है, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन को इस नियम से अलग रखा गया है।

बैंक खाते में सीधे पहुंचेगी स्कीम की राशि

सरकार ने योजना में भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी रखने पर जोर दिया है। पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में डायरेक्ट भेजे जाएंगे। इसके लिए लाभार्थी के बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, यदि किसी महिला के परिवार में सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता या निर्धारित सीमा से अधिक आय वाला सदस्य है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगी। वहीं, परिवार के किसी सदस्य के पास चार पहिया वाहन होने की स्थिति में भी आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया पर रखी जा रही नजर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक में योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता न हो और पात्र महिलाओं को समय पर योजना का लाभ मिले। सरकार ने बताया कि आवेदन की जांच पूरी होने के बाद लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए जाएंगे।

26 अगस्त से स्वीकृति पत्र मिलने शुरू होंगे और 1 सितंबर से बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि लक्ष्मी योजना का उद्देश्य दिल्ली की जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। योजना के लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।

पैसा प्राप्त करने का विकल्प

लाभार्थियों को राशि प्राप्त करने के लिए विकल्प दिए गए हैं:-

पहला विकल्प: दैनिक खर्चों के लिए ₹1,000 प्रति माह सेंट्र्ल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट में प्राप्त कर सकते हैं और बाकी ₹1,500 को आवर्ती जमा (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खाते में जमा करा सकते हैं।

दूसरा विकल्प: लंबी अवधि की बचत के लिए पूरी ₹2,500 की राशि को RD या FD में जमा करा सकते हैं।

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Mehul Choksi: भारी कैश के साथ मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल लंदन में हिरासत में, भगोड़ा हीरा कारोबारी कब आएगा भारत?

Mehul Choksi Lawyer Detained: लंदन में भारतीय आपराधिक मामलों के चर्चित वकील और भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का केस लड़ने वाले विजय अग्रवाल को ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अग्रवाल पर ब्रिटेन में इमिग्रेशन और वर्क परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप है। विजय अग्रवाल भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के वकील के तौर पर खास तौर पर चर्चित रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर तब हिरासत में लिया गया जब UK इमिग्रेशन अधिकारियों ने लंदन के मेफेयर इलाके में एक प्रॉपर्टी की जांच की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मकान मालिक की शिकायत के बाद की गई। इसी जांच के दौरान विजय अग्रवाल को हिरासत में लिया गया। विवेक अग्रवाल ने भारत में कई हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट क्राइम और फाइनेंशियल फ्रॉड केस संभाले हैं।

बिना जरूरी अनुमति काम करने का आरोप

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रिटिश अधिकारियों को संदेह था कि अग्रवाल ब्रिटेन में आवश्यक वर्क परमिट या अन्य जरूरी इमिग्रेशन परमिशन के बिना पेशेवर गतिविधियां कर रहे थे। इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के दौरान मेफेयर की इस प्रॉपर्टी में बड़ी मात्रा में कैश भी मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कैश के स्रोत की भी जांच की जा रही है। प्रॉपर्टी की जांच के समय अग्रवाल की फर्म से जुड़े कई जूनियर वकील भी कथित तौर पर वहां मौजूद थे। हालांकि, सामने आई रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए जाने के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने आगे क्या कार्रवाई की।

मेहुल चोकसी के प्रमुख वकील रहे हैं अग्रवाल

विजय अग्रवाल का नाम भारत के सबसे चर्चित वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपी भगोड़े मेहुल चोकसी की कानूनी पैरवी से जुड़ा रहा है। चोकसी भारत में कथित PNB धोखाधड़ी मामले में वांछित है। वह भारत से बाहर रह रहा है। अग्रवाल ने विभिन्न देशों में चल रही कानूनी कार्यवाहियों में चोकसी का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी चोकसी की ओर से पैरवी की है। बेल्जियम में चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भी अग्रवाल उसके कानूनी बचाव से जुड़े रहे। भारत द्वारा चोकसी को वापस लाने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कानूनी दलीलें पेश की हैं।

प्रत्यर्पण के खिलाफ दिए थे ये तर्क

चोकसी की भारत वापसी से जुड़े मामलों में अग्रवाल की ओर से मानवाधिकार, जेल की परिस्थितियों और चोकसी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इन आधारों पर भारत प्रत्यर्पण का विरोध किया गया। चोकसी पर भारत में करीब 13,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले से जुड़े गंभीर आरोप हैं। वह मामले में वांछित आरोपियों में शामिल है।

कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कर चुके हैं पैरवी

विजय अग्रवाल सिर्फ मेहुल चोकसी के मामले के कारण ही चर्चित नहीं हैं। बल्कि उनका कानूनी करियर भारत के कई बड़े कॉरपोरेट क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा रहा है। उन्होंने PNB बैंक घोटाले से जुड़े मामलों में बचाव पक्ष की पैरवी की है। इसके अलावा उनका नाम 2G स्पेक्ट्रम मामले से जुड़े कानूनी मामलों में भी सामने आया है।

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फिलहाल लंदन में उनकी हिरासत से जुड़े आरोपों की जांच ब्रिटिश अधिकारियों की कार्रवाई पर निर्भर है। वर्क परमिट उल्लंघन और बरामद कथित कैश से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजे आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

झारखंड में 2014 के बाद से अबतक की ये 44 भर्ती परीक्षाएं एक झटके में रद्द! जज-साइंटिस्ट, लेक्चरर तक की नौकरी गई! पूरी लिस्ट यहां देखिए

Jharkhand Exam Cancelled: झारखंड में छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और गड़बड़ियों के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार देर रात झारखंड सरकार ने कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी कर दी। देर रात जारी किए गए आठ अलग-अलग नोटिफिकेशंस के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट किया कि रद्द की गई परीक्षाओं में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा साल 2014 से आयोजित की गई परीक्षाएं शामिल हैं।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई चार घंटे की आपात कैबिनेट बैठक के फैसलों के बाद आई है। गौरतलब है कि सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक JSSC-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा को रद्द कर दिया था। साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा प्रकाशित परिणामों को भी रद्द कर दिया गया।

रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल प्रमुख पद

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार रद्द की गई 44 परीक्षाओं में प्रशासनिक, न्यायिक, शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, सहायक अभियंता, सिविल जज, अपर लोक अभियोजक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक वन संरक्षक और इसके दूसरे प्रशासनिक एवं तकनीकी पद शामिल हैं।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट और इंटरनल विजिलेंस सेल का प्रस्ताव

सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए झारखंड उच्च न्यायालय से फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा JPSC और JSSC में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोनों आयोगों के भीतर एक इंटरनल विजिलेंस सेल बनाने का भी फैसला लिया गया है।

IAS अमिताभ कौशल समिति 2 महीने में सौंपेगी रिपोर्ट

JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार और सिफारिशें देने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस सुधार समिति को 2 महीने के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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कल का मौसम 19 अगस्त: यूपी में प्रचंड बारिश की रेड कलर वॉर्निंग, IMD ने इन 20+ राज्यों में मूसलाधार का अलर्ट जारी किया

India Weather Update: देश में मानसूनी हवाओं की वजह से मौसम का मिजाज काफी आक्रामक हो गया है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 19 अगस्त के लिए ताजा वेदर बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि बुधवार को देश के 20 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश और अंधड़ की स्थिति बनी रहेगी। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों से बेहद सतर्क रहने और जलभराव व आकाशीय बिजली की घटनाओं से बचाव के कदम उठाने की अपील की है।

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक मानसून की रफ्तार काफी तेज रहने वाली है। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी कुदरत का प्रकोप देखने को मिल सकता है, जहां मूसलाधार बारिश के चलते आम जनजीवन प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

पूर्वी यूपी में रेड अलर्ट, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी तबाही की आशंका

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 19 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में आफत की बारिश होगी। यहां अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ-साथ कुछ क्षेत्रों में बेहद भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इससे नदियां उफान पर आ सकती हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है।

इन राज्यों के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी झमाझम बारिश होगी। दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और बिहार में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। साथ ही झारखंड, विदर्भ, छत्तीसगढ़, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भी होगी जोरदार बारिश

पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 19 अगस्त को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इन इलाकों में लगातार हो रही बारिश से नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। दक्षिण भारत के राज्यों में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल के कई हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की पूरी संभावना जताई गई है।

तेज हवाएं और बिजली कड़कने का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ देश के बड़े हिस्से में आकाशीय बिजली और तेज आंधी-तूफान की चेतावनी भी जारी की गई है। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर गरज और आकाशीय बिजली के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं आंध्र प्रदेश, बिहार, तटीय कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

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उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर मेघगर्जन के साथ बिजली गिरने का खतरा जताया गया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के मैदानी इलाकों में सतह पर तेज हवाएं चलेंगी।

समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, मछुआरों के लिए चेतावनी

मौसम विज्ञान विभाग ने अरब सागर के तटीय और मध्य भागों में मौसम खराब रहने का अनुमान जताया है। गुजरात, सोमालिया और ओमान के तटों के साथ और उससे दूर और पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम, उत्तर और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में मछुआरों को इन क्षेत्रों में समुद्र में न उतरने की सलाह दी गई है।

झारखंड प्रदर्शन: छात्र नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल! JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से TDPL की सभी परीक्षाओं की होगी जांच

Jharkhand students protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में अहम परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद लिया गया। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया।

सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है। सीएम ने कहा कि उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।

सीएम ने बड़ा आरोप

सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल पास करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

क्या है मांग?

सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।

अब आगे क्या होगा?

झारखंड सरकार के फैसले के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं जांच के घेरे में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जांच का दायरा केवल हाल की परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। CID 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की पड़ताल करेगी। जबकि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अलग समिति कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

JMM सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का समाधान करना और झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम

Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

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वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, 30 मीटर नीचे बन रहा BKC स्टेशन, सूरत स्टेशन ने लिया भव्य आकार

Bullet Train Update: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) तेजी से आकार ले रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट के दो सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेशनों मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) और गुजरात के सूरत स्टेशन पर काम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। BKC टर्मिनल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के दक्षिणी शुरुआती पॉइंट के तौर पर काम करेगा। बीकेसी (BKC) स्टेशन जमीन से लगभग 30 मीटर गहराई में बनाया जा रहा है।

BKC में देश के सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशनों में से एक तैयार किया जा रहा है। यह पूरे प्रोजेक्ट का सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां खुदाई और नींव (फाउंडेशन) का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है, जिससे स्टेशन के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। वहीं, सूरत स्टेशन का ढांचा और छत का काम पूरा हो चुका है। अब वहां फिनिशिंग का काम बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है।

क्यों अहम है BKC स्टेशन?

News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई का BKC स्टेशन इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनल होगा। इसे जमीन से करीब 30 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। यही वजह है कि इसे पूरी परियोजना के सबसे जटिल निर्माण कार्यों में शामिल किया गया है। स्टेशन के लिए खुदाई और फाउंडेशन से जुड़े प्रमुख काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। अंडरग्राउंड स्टेशन होने के कारण यहां निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग, सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। BKC स्टेशन तैयार होने के बाद मुंबई से बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सूरत स्टेशन का स्ट्रक्चर तैयार, अब इंटीरियर का काम जारी

गुजरात के सूरत में बुलेट ट्रेन स्टेशन का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का मुख्य स्ट्रक्चरल फ्रेम और रूफिंग का काम पूरा हो चुका है। अब यहां फर्श, क्लैडिंग और सीलिंग लगाने समेत अन्य इंटीरियर फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूरत स्टेशन का डिजाइन भी खास तरीके से तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला में सूरत की पहचान यानी हीरा काटने और पॉलिश करने के उद्योग से प्रेरणा ली गई है। स्टेशन की डिजाइन के जरिए शहर की कारोबारी और औद्योगिक पहचान को दर्शाने की कोशिश की गई है।

508 किमी लंबा होगा पूरा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत की पहली हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। करीब 508 किलोमीटर लंबी यह समर्पित रेल लाइन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगी। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसके रास्ते में कई प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी शहर इससे जुड़ेंगे।

इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन होंगे

मुंबई (BKC)

ठाणे

विरार

बोइसर

वापी

बिलिमोरा

सूरत

भरूच

वडोदरा

आनंद

अहमदाबाद

साबरमती

320 km प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की उम्मीद है। इस रफ्तार से मुंबई से अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी लाइन तैयार होने से पहले इसके कुछ हिस्सों पर चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू की जा सकती है। यानी यात्रियों को पूरे कॉरिडोर के पूरा होने का इंतजार जरूरी नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी। इसके साथ ही भारत के हाई-स्पीड रेल युग की शुरुआत हुई।

हर स्टेशन की डिजाइन में दिखेगी शहर की पहचान

इस प्रोजेक्ट से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के स्टेशनों को केवल परिवहन केंद्र के रूप में नहीं। बल्कि संबंधित शहर की पहचान से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों में आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और अलग-अलग परिवहन माध्यमों से कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। साबरमती स्टेशन को विशेष रूप से एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बुलेट ट्रेन के साथ मेट्रो, BRTS और सामान्य रेलवे को जोड़ा जाएगा। स्टेशन के आसपास के क्षेत्र का विकास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांतों के आधार पर किए जाने की योजना है।

कब शुरू होगी देश की पहली बुलेट ट्रेन?

बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना देख रहे लोगों को अभी करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल सर्विस अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए केवल स्टेशन और ट्रैक ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के रखरखाव की अत्याधुनिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इस रेलवे कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ट्रेनों की नियमित जांच, मरम्मत और रखरखाव के लिए तीन अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं। इनमें एक महाराष्ट्र के ठाणे और दो गुजरात के सूरत और साबरमती में होंगे।

ठाणे डिपो में पहली बार इस्तेमाल होंगी ये टेक्नोलॉजी

मुंबई कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनस होने के कारण ठाणे का रोलिंग स्टॉक डिपो बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसे अत्याधुनिक मशीनरी से लैस किया जा रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें भारत में पहली बार इस्तेमाल किए जाने की योजना है। डिपो में हाई-स्पीड ट्रेन सेट की जांच और रखरखाव किया जाएगा। ताकि ट्रेनें नियमित सेवा के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

साबरमती डिपो में छोटी-बड़ी मरम्मत की पूरी व्यवस्था

गुजरात के साबरमती डिपो में ट्रेनों की छोटी और बड़ी दोनों तरह की मरम्मत की सुविधा होगी। यहां इमरजेंसी रिपेयर एरिया, पहियों की री-प्रोफाइलिंग के लिए उपकरण, कोच बॉडी की मरम्मत और बोगी वर्कशॉप बनाई जाएंगी। ट्रेनों की नियमित जांच के लिए विशेष ट्रैक और इंस्पेक्शन रोड भी तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन की नियमित सफाई के लिए ट्रेन-वॉशिंग प्लांट भी लगाए जाएंगे।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

बुलेट ट्रेन के रखरखाव केंद्रों को तैयार करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा रहा है। डिपो में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज सिस्टम लगाए जाएंगे। ट्रेन धोने में इस्तेमाल होने वाले पानी को अधिक से अधिक दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी, जिससे पानी की खपत कम की जा सके।

जापान में ट्रेनिंग ले रहे रेलवे कर्मचारी

बुलेट ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए भारतीय कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को जापान में सीधे ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इन कर्मचारियों को जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल सिस्टम के संचालन और रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है। इस तरह मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी केवल ट्रैक और स्टेशनों तक सीमित नहीं है। स्टेशन, डिपो, रखरखाव व्यवस्था, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।

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महज 4 महीने में 10 मुकदमों के 22 अपराधियों को सुना दी फांसी की सजा, यूपी के इस जज की फैसलों की जबर्दस्त चर्चा

UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत अपने फैसलों को लेकर जबर्दस्त चर्चा में है। पिछले चार महीनों के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने 10 अलग-अलग मुकदमों में अपने फैसले सुनाए हैं। इनमें कुल 22 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने सोमवार को पीटीआई को बताया कि पिछले चार महीनों में इन 10 मामलों में दोषी ठहराए गए सभी 22 व्यक्तियों को मौत की सजा दी गई है। जिन मुकदमों में यह सजा सुनाई गई है उनमें एक वकील की हत्या, होमगार्ड की हत्या, हाईवे पर डकैती और दूसरे हत्याकांड के संगीन मामले शामिल हैं।

अप्रैल से अगस्त तक मृत्युदंड के फैसलों का पूरा ब्योरा

सरकारी वकील के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 28 अप्रैल को एक अन्य मामले में चार लोगों को मौत की सजा दी गई। मई महीने में 20 मई को एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि 20 जून को दो अपराधियों को मृत्युदंड दिया गया।

जुलाई के महीने में भी अदालत का कड़ा रुख जारी रहा। 2 जुलाई को एक व्यक्ति को, 6 जुलाई को दो लोगों को और 17 जुलाई को चार अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद अगस्त महीने में 12 अगस्त को एक व्यक्ति और 13 अगस्त को चार और अपराधियों को मौत की सजा सुनाई गई।

27 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में मिली मौत की सजा

अदालत ने 12 अगस्त को सुनाए गए फैसले में लगभग 27 साल पुराने एक लकड़ी व्यापारी के अपहरण और हत्या के मामले में एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई। यह वारदात साल 1999 में हुई थी। इसमें फिरौती के लिए सलीम नाम के व्यापारी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। अदालत ने इस मामले में शहनवाज को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया और उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

12 साल पुराने पवन कुमार हत्याकांड में 4 दोषियों को फांसी

इसके अगले ही दिन 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 12 साल पुराने एक अन्य हत्याकांड में चार व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई। यह घटना 14 जुलाई 2014 को शामली जिले के भभीसा गांव में घटी थी। जहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पवन कुमार के घर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी।

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इस गोलीबारी में पवन कुमार की मौत हो गई थी जबकि उनका भाई अशोक कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना के संबंध में शिकायत भी घायल भाई अशोक कुमार ने ही दर्ज कराई थी। जज दिवाकर ने पवन कुमार की हत्या का दोषी पाए जाने पर रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार को फांसी की सजा सुनाई और सभी दोषियों पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

Compassionate Jobs: अनुकंपा नौकरी में बड़े बेटे को मिलेगी पहले प्राथमिकता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Compassionate Jobs: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिस पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक पात्र बच्चे अनुकंपा नियुक्ति का दावा करते हैं, तो बड़े बच्चे को उसकी वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के एक मामले में छोटे बेटे को दी गई अनुकंपा नियुक्ति का आदेश रद्द करते हुए मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को वापस भेज दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पात्रता की जांच के बाद बड़े बेटे के दावे पर 30 दिनों के भीतर विचार किया जाए।

मुंगेली के सरकारी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय की सितंबर 2016 में मृत्यु हो गई थी। उनकी दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी के बेटे जितेंद्र सिंह क्षत्रिय (35 वर्ष) और दूसरी पत्नी के बेटे राजकुमार दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। 7 अगस्त 2019 को मुंगेली के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने छोटे बेटे राजकुमार को नौकरी दे दी। इसके खिलाफ बड़े बेटे जितेंद्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का फैसला

जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने DEO के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हालांकि दूसरी पत्नी से जन्मा बच्चा भी कानूनी वारिस होता है। लेकिन जब कई भाई-बहनों में से चुनाव करना हो तो वरिष्ठता (उम्र में बड़े होने) के नियम का पालन होना चाहिए। अदालत ने DEO को 30 दिनों के भीतर बड़े बेटे की पात्रता की जांच कर उसके दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।

दोनों बेटों ने किया था दावा

मामला मुंगेली के एक सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। वहां पदस्थ ईश्वर सिंह क्षत्रिय की 29 सितंबर 2016 को मृत्यु हो गई थी। उनके दो विवाह हुए थे। पहली पत्नी से उनका बेटा जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से बेटा राजकुमार था। पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी ने 7 अगस्त 2019 को राजकुमार को नौकरी देने का फैसला किया। इस फैसले को जितेंद्र ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने 8 अगस्त के आदेश में मुंगेली DEO के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें छोटे बेटे राजकुमार को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब एक से अधिक पात्र संतान अनुकंपा नियुक्ति का दावा करती हैं, तो उम्र और वरिष्ठता के आधार पर बड़े बच्चे के दावे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बड़ा होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े बेटे को नियुक्ति के लिए निर्धारित सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। इसी कारण मामला दोबारा DEO के पास भेजा गया है।

शादीशुदा होना अनुकंपा नियुक्ति के रास्ते में बाधा नहीं

मामले में यह भी महत्वपूर्ण सवाल उठा कि क्या शादीशुदा संतान अनुकंपा नियुक्ति का लाभ ले सकती है। कोर्ट ने कहा कि विवाह अपने आप में आश्रित संतान को अनुकंपा नियुक्ति के लाभ से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने इस संबंध में पूर्व में दिए गए पटना हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने माना कि यदि अन्य पात्रता शर्तें पूरी होती हैं तो केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

सरकार को बड़े बेटे के दावे की जांच करनी होगी

हाईकोर्ट ने मामले को जिला शिक्षा अधिकारी के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि जितेंद्र के दावे की पात्रता की जांच की जाए और उसके बाद 30 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। इस फैसले से उन मामलों में महत्वपूर्ण दिशा मिलती है, जहां मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होते हैं। कोर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों में केवल विभाग की पसंद या किसी एक संतान को नियुक्ति देना पर्याप्त नहीं है। बल्कि पात्रता, वरिष्ठता और प्रशासनिक नियमों को ध्यान में रखकर फैसला किया जाना चाहिए।

वरिष्ठता अकेले सरकारी पद पर हक नहीं देती

इसी मामले से जुड़े एक अन्य फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ वरिष्ठता के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को ऊंचे पद पर नियुक्ति या प्रभार पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने जूनियर सहकर्मी को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को चुनौती दी थी।

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कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। पीठ ने कहा कि किसी अधिकारी को अस्थायी रूप से उच्च पद का प्रभार देना एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इसमें प्रशासनिक उपयुक्तता और अधिकारी के पूरे रिकॉर्ड को भी देखा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठता महत्वपूर्ण कारक हो सकती है, लेकिन वह अकेले किसी अधिकारी को उच्च पद का स्वतः अधिकार नहीं देती।