Kalanamak Rice: ₹40 से ₹150 पहुंचा कालानमक चावल का भाव! 5 गुना बढ़ा उत्पादन, ‘बुद्ध राइस’ ने किसानों की बल्ले-बल्ले कर दी

Kalanamak Rice: अपनी खास सुगंध और गुणों के लिए फेमस कालानमक चावल की खेती और इसकी बिक्री ने उत्तर प्रदेश के किसानों की किस्मत बदल दी है। हाल के वर्षों में कालानमक चावल के खेती के क्षेत्रफल और प्रोडक्शन दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इससे किसानों की इनकम भी बढ़ी है। साल 2018 में जहां कालानमक चावल का बिक्री मूल्य ₹40 प्रति किलोग्राम था। वहीं, साल 2026 में यह बढ़कर ₹150 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसी का असर है कि सामान्य चावल की तुलना में इसकी खेती करने वाले किसानों के लाभ में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान काला नमक चावल को लेकर अहम जानकारियां शेयर की हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों में आए इस भारी उछाल और बेहतर वित्तीय लाभ की वजह से इस धान को उगाने वाले किसानों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सिद्धार्थनगर जिले में साल 2018 में जहां सिर्फ 2915 किसान कालानमक धान की खेती करते थे। वहीं, 2024 तक यह संख्या बढ़कर 23000 पहुंच गई है। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर में 2018 से 2025 के दौरान इसका उत्पादन 5 गुना से अधिक बढ़ा है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली मदद के बारे में जानिए

कालानमक चावल की खेती करने वाले किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग से जुड़ी मदद दी जा रही है। पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कालानमक प्रसंस्करण और मिलिंग यूनिट्स बनाने पर 35 फीसदी (अधिकतम ₹10 लाख) तक क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी दी जाती है।

इसके अलावा सरकार कालानमक महोत्सव का आयोजन कर इस चावल के ब्रांड का प्रचार-प्रसार कर रही है। स्थानीय किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिद्धार्थनगर में ओडीओपी योजना के तहत एक सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कालानमक चावल के प्रचार, उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए विशेष प्रोजेक्ट फंडिंग भी निर्धारित की है।

6 नई उन्नत किस्में विकसित, उत्पादकता हुई लगभग दोगुनी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली कालानमक चावल की नई किस्मों के विकास और पारंपरिक किस्मों के संरक्षण में लगी हुई है। पारंपरिक किस्मों के अलावा कालानमक की छह नई और उन्नत किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें कालानमक KN3, बौना कालानमक 101, बौना कालानमक 102, कालानमक किरण, पूसा नरेंद्र कालानमक 1 और पूसा सीआरडी कालानमक 2 शामिल हैं।

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नई बौनी और अधिक उपज देने वाली ये किस्में बेहद असरदार साबित हो रही हैं। जहां पारंपरिक किस्मों की औसत उपज 2.5 टन प्रति हेक्टेयर होती है, वहीं इन नई किस्मों की औसत उपज 4.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलती है। बीज कार्यक्रम के तहत पिछले 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण कालानमक बीज का उत्पादन कर किसानों को बांटे गए हैं। हर साल 15-20 क्विंटल ब्रीडर बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है।

‘बुद्ध राइस’ के नाम से वैश्विक पहचान, सिंगापुर से नेपाल तक निर्यात

सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के माध्यम से कालानमक चावल के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है। APEDA क्षेत्रीय किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में निर्यात शिपमेंट की सुविधा प्रदान कर रहा है। जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बौद्ध बहुल देशों के हाई प्राइज मार्केट को टारगेट करने के लिए कालानमक चावल को बुद्ध राइस (Buddha Rice) के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।

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Monsoon & El Nino update: भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मौसम विभाग (IMD) के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, मजबूत हो रहे अल नीनो (El Nino) के असर की वजह से अगले दो हफ्तों के दौरान देश के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में औसतन से कम बारिश होने की संभावना है। ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून में आने वाली इस सुस्ती और शुष्क मौसम के लंबे खिंचने से हाल ही में बोई गई कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों (दलहन) की फसलों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

मानसून में कमी से सिंचाई और कृषि आजीविका पर बड़ा असर

भारत में वार्षिक वर्षा का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसूनी बारिश से ही आता है। ये देश के महत्वपूर्ण जल स्रोतों को रीचार्ज करने के लिए बेहद जरूरी है। भारत में कृषि भूमि का लगभग आधा हिस्सा आज भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है और देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है।

न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगले दो हफ्तों के दौरान देश के कुछ पूर्वी और उत्तरी राज्यों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसदौरान देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में बारिश की कमी काफी महत्वपूर्ण या गंभीर हो सकती है।

1 जून से अब तक 12 प्रतिशत कम हुई बारिश और बढ़ा तापमान का खतरा

चालू मानसून सीजन में 1 जून से लेकर अब तक भारत में औसत से 12 फीसदी कम बारिश हुई है। देश के कुछ राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक है। उदाहरण के लिए दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी का आंकड़ा 34 फीसदी तक पहुंच गया है।

मौसम विभाग के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि मजबूत होते अल नीनो की वजह से आने वाले हफ्तों में बारिश और कम होगी। इससे महीने के अंत तक बारिश की कमी का यह अंतर और अधिक बढ़ सकता है। इसके साथ ही आने वाले सप्ताहों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होने और इसके सामान्य से ऊपर बने रहने की संभावना जताई गई है।

नई बोई गई सोयाबीन, कपास और मक्का की फसलों पर मंडराया जोखिम

जुलाई महीने में हुई सामान्य के करीब बारिश की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ गई थी। इसके बाद किसानों ने सोयाबीन, कपास, मक्का, दालें और धान जैसी खरीफ की फसलों की बुवाई में तेजी दिखाई थी। मुंबई बेस्ड एक ग्लोबल ट्रेड हाउस के डीलर के मुताबिक नई बोई गई इन फसलों की जड़ें अभी तक मिट्टी में गहराई तक नहीं पहुंची हैं। ऐसी स्थिति में, बारिश के बिना लंबा शुष्क दौर चलने से ये फसलें बेहद संवेदनशील हो जाती हैं और इन्हें भारी नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ जाता है।

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कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अगस्त तक किसानों ने 96.8 मिलियन (9.68 करोड़) हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई कर ली थी। ये एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में करीब 2 प्रतिशत कम है। अब अल नीनो के मजबूत होने और मानसून के कमजोर पड़ने से इन फसलों के उत्पादन को लेकर जोखिम काफी बढ़ गया है।

Balochistan Independence Day: 11 अगस्त को ही आजादी सेलिब्रेट करने वाला था बलूचिस्तान, जानिए आज ही के दिन वहां क्या क्या हुआ

Balochistan Independence Day: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘आजादी दिवस’ मनाए जाने को लेकर एक बार फिर अलग देश की मांग तेज हो गई है। बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस मौके पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक मान्यता दी जाए।

बलोच नेता मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए। इस मौके पर बलूच नेता ने पाकिस्तान पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहंच गए हैं जहां हम सिर्फ अपनी आजादी का जश्न ही नहीं मनाते। बल्कि दुनिया से यह मांग भी करते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए। आजादी के इस पवित्र अवसर पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।”

भारत का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य दुनिया के और खासकर भारत के बहादुर मुख्यधारा के मीडिया, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, धार्मिक नेताओं, सांसदों और उन सभी भाइयों और बहनों का दिल से आभार व्यक्त करता है जिन्होंने बलोचिस्तान की आवाज को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया और हमारे लोगों की आवाज बने। बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन मिलना जारी रहना चाहिए ताकि हम अपनी जमीन, बलूचिस्तान से पाकिस्तान रूपी कैंसर को हटा सकें।”

50 हजार बलोच पाकिस्तान में कैद

बलूचिस्तान में आजादी को दबाने के पाकिस्तान के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मीर यार बलोच ने दावा किया कि 50 हजार से ज्यादा बलोच अभी भी पाकिस्तान की यातना कोठरियों में अमानवीय अत्याचार सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की आजादी की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों की वजह से मिली है।”

बलूचिस्तान में कुर्बानियों के मजबूत इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी हमलावरों को रोका है। उन्हें बलूचिस्तान से पीछे हटने पर मजबूर किया है। पाकिस्तान के पास भले ही हजारों टैंक, सैकड़ों लड़ाकू विमान, तोपखाने और एक बड़ी सेना हो, फिर भी शारीरिक, मानसिक और लड़ने की क्षमता के मामले में बलूचिस्तान की सेना पाकिस्तान की सेना से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और सफल है।

बलूचिस्तान की सेना एक मजबूत फोर्स है जो हर स्थिति का सामना करने में सक्षम है। दुनिया की पेशेवर सेनाओं से मुकाबला करने के लिए तैयार है। बलूचिस्तान के इलाके को देखते हुए एक बड़ी सेना की जरूरत है। इसलिए बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है।”

11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी ‘आजादी’ का दिन?

जब बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, तो ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एम्बेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने कहा, “1947 में जब अंग्रेज भारत से गए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं थे। लेकिन बलूचिस्तान मौजूद था। उसने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी का ऐलान किया था। अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। इसे विश्व शांति की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान की ज़मीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है। अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है, तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। आज 56 से ज्यादा देश बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक ऐसा दौर जिसमें टकराव और जबरदस्ती से अब कोई नतीजा नहीं निकलता।”

दुनिया भर में मनाया गया आजादी का जश्न

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

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मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

कल का मौसम: दिल्ली-NCR समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, हिमाचल में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी, IMD ने बताया मौसम का हाल

Weather Update 11 August: देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। दिल्ली-NCR, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, उत्तराखंड में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR की बात करें तो यहां अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की बारिश होने की आशंका है। हालांकि, बारिश के बावजूद उमस से राहत पूरी तरह मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।

दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में, 13, 14 और 15 अगस्त को कई इलाकों में हल्की से बहुत हल्की बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। 14 अगस्त को पश्चिमी हवाएं भी चल सकती हैं। जबकि 15 अगस्त को उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव रहने का अनुमान है।

IMD के मुताबिक, पूरे सप्ताह दिल्ली में मौसम मुख्य रूप से बादल छाए रहने वाला रहेगा। इस दौरान बीच-बीच में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, इन बारिश की बौछारों से उमस में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले सात दिनों के दौरान दिल्ली के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ऐसे में बारिश के बीच भी गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है।

उत्तराखंड में अधिकांश जगह बारिश और गरज-चमक

उत्तराखंड में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता लगातार बनी रह सकती है। वहीं, मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में बारिश कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रहने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर फिसलन, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

तमिलनाडु में इन इलाकों में होगी मूसलाधार बारिश

तमिलनाडु के मौसम पर उत्तर तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र के ऊपर बने वायुमंडलीय परिसंचरण का असर पड़ने की आशंका है। 12 और 13 अगस्त को पश्चिमी घाट से लगे इलाकों और उत्तरी तटीय जिलों में बारिश की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय रह सकती हैं। इन क्षेत्रों में मध्यम बारिश होने की संभावना है। नमी से भरी हवाओं और मौजूदा वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बारिश वाले बादल बनने के लिए अनुकूल स्थिति रह सकती है।

तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में भी कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश की तीव्रता अलग-अलग इलाकों में अलग रह सकता है। दूसरी ओर, राज्य के उत्तरी आंतरिक हिस्सों में बारिश के बावजूद गर्मी बनी रह सकती है। यहां 13 अगस्त तक अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना है।

राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

राजस्थान में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश का दौर तेज रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। राज्य में बारिश की गतिविधियां 13 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद पश्चिमी राजस्थान में 14 अगस्त से मौसम में सुधार शुरू हो सकता है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में 15 अगस्त से कमी आने का अनुमान है।

उत्तर-पूर्वी राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से 11 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी होने की संभावना है। इसके बाद 13 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। 14 अगस्त से पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने की संभावना है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधि 15 अगस्त से कमजोर पड़ सकती है।

हिमाचल प्रदेश में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को राज्य के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। खास तौर पर कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

IMD ने राज्य में बारिश का दौर 15 अगस्त तक जारी रहने का पूर्वानुमान लगाया है। पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदियों-नालों के जलस्तर बढ़ने और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

उत्तर और दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय

IMD के ताजा पूर्वानुमान से साफ है कि देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां फिलहाल सक्रिय बनी हुई हैं। उत्तर भारत में उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश, जबकि दक्षिण भारत में तमिलनाडु के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की आशंका है। वहीं, दिल्ली में लगातार बारिश भले ही तापमान को कुछ हद तक कंट्रोल कर रही हो। लेकिन उमस और अपेक्षाकृत अधिक तापमान के कारण लोगों को पूरी तरह आराम मिलने की उम्मीद नहीं है।

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Electric Air Taxi: 2028 तक खत्म हो जाएगा ट्रैफिक जाम का झंझट! भारत के आसमान में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और कारें, जानें सभी डिटेल्स

Electric Air Taxi in india News: भारत में आने वाले कुछ सालों में हवाई सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक, भारत का लक्ष्य 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों और कारों को आसमान में उड़ान भरते देखना है। इसके लिए अगले साल से इन अत्याधुनिक विमानों की टेस्टिंग और ट्रायल को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि भारत 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी की उड़ान शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उम्मीद है कि इस नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग अगले साल तेज हो जाएगी।

हाल ही में बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए नायडू ने कहा कि इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले महानगरों के लिए आवाजाही का एक नया विकल्प बन सकते हैं। ANI के मुताबिक नायडू ने कहा, “हम चाहते हैं कि 2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें। इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है, न सिर्फ बेंगलुरु में, बल्कि मुंबई और दिल्ली में भी…।”

15 मिनट में नोएडा से गुरुग्राम

कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल से टैक्सी बुक करते हैं। लेकिन यह टैक्सी सड़क पर आने के बजाय किसी बिल्डिंग की छत पर बने खास वर्टिपैड पर आपका इंतजार कर रही है। आप लिफ्ट से ऊपर पहुंचते हैं, एक ऐसे इलेक्ट्रिक विमान में बैठते हैं जो देखने में किसी बड़े ड्रोन जैसा लगता है। कुछ ही सेकंड में वह सीधे आसमान में उड़ जाता है।

सड़क के जाम में फंसने के बजाय यह एयर टैक्सी शहर के ऊपर से उड़ते हुए आपको एयरपोर्ट तक पहुंचा देती है। दावा है कि भविष्य में ऐसी यात्रा के जरिए एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि एयर टैक्सी शुरू होने के बाद नोएडा से गुरुग्राम पहुंचने में सिर्फ 10 से 15 मिनट लगेंगे।

मंत्री ने क्या कहा?

मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरला एविएशन अगले साल पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में आ जाएगी। जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) टेस्टिंग, सुरक्षा और नियमों पर इंडस्ट्री के साथ काम करना जारी रखेंगे। नायडू ने यह भी कहा कि DGCA ने सरला एविएशन को डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल दिया है, जो कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट में एक रेगुलेटरी कदम है। मंत्री ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “2028 तक हम इसे हकीकत बनाने की योजना बना रहे हैं।”

क्या होती है इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी?

इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को टेक्नीकल भाषा में eVTOL यानी Electric Vertical Take-Off and Landing Aircraft कहा जाता है। इन टैक्सी की खासियत यह है कि इन्हें हेलीकॉप्टर की तरह रनवे की जरूरत नहीं होती। ये डायरेक्ट जमीन या वर्टिपैड से ऊपर उड़ सकते हैं। साथ ही उसी तरह नीचे उतर भी सकते हैं।

Electric Air Taxi

इनके डिजाइन में फ्लाइट और हेलीकॉप्टर दोनों की झलक दिखाई देती है। इनमें कई रोटर या इलेक्ट्रिक फैन लगाए जाते हैं, जो विमान के पंखों या उसके बाहरी हिस्सों पर लगे होते हैं। हेलीकॉप्टर की तरह eVTOL भी लंबवत उड़ान भर सकता है। लेकिन इसमें एक बड़े रोटर की जगह कई छोटे रोटर या फैन इस्तेमाल किए जाते हैं।

बैटरी और इलेक्ट्रिक तकनीक ने खोला रास्ता

eVTOL टेक्नोलॉजी का विचार नया नहीं है। इस दिशा में कई दशकों से काम हो रहा है। लेकिन हाल के सालों में बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति ने इसे कमर्शियल इस्तेमाल के करीब पहुंचा दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी बड़े पैमाने पर सफल होती हैं तो शहरों में सड़क ट्रैफिक का कुछ हिस्सा आसमान में शिफ्ट किया जा सकता है।

जॉर्जिया टेक के वर्टिकल लिफ्ट रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की निदेशक मर्लिन स्मिथ के मुताबिक, बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं। ऐसे में परिवहन के मौजूदा तरीकों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

किन कामों में इस्तेमाल हो सकती हैं eVTOL?

शुरुआत में इलेक्ट्रिक एयर कारों का इस्तेमाल लोगों को कम और मध्यम दूरी तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। कई eVTOL कंपनियां एयरलाइंस के साथ मिलकर एयर-टैक्सी सर्विस शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इनका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे-

  • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में एयर टैक्सी का इस्तेमाल हो सकेगा।
  • आग बुझाने और फायरफाइटिंग में भी ये काम करेगा।
  • इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में, खेती और कृषि कार्यों में, पर्यटन क्षेत्र में, शहरों के बीच एयर टैक्सी सेवा का लाभ उठाया जा सकेगा।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

अमेरिका में Archer, BETA Technologies और Joby जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी विकसित करने और उन्हें कमर्शियल सर्विस में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियां अंतिम FAA सुरक्षा मंजूरी के करीब पहुंच चुकी हैं। हालांकि, आम यात्रियों के लिए एयर टैक्सी की नियमित बुकिंग कब से शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। फिर भी इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का दौर लोगों की उम्मीद से काफी करीब है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह टेक्नोलॉजी?

भारत जैसे तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भारी ट्रैफिक वाले देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। खासतौर पर भारी ट्रैफिक जाम का सामने करने वाली दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में एयरपोर्ट और शहर के दूसरे हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

Electric Air TaxiS

अगर तकनीक, सुरक्षा, लागत और इससे जुड़े अथॉरिटी की मंजूरी से जुड़ी चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो 2028 के आसपास भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का सपना हकीकत में बदलता दिखाई दे सकता है। यानी आने वाले समय में सड़क पर कैब बुक करने के साथ-साथ मोबाइल से आसमान में उड़ने वाली टैक्सी भी बुक करने का विकल्प मिल सकता है।

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VIDEO: ‘शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा….’; एथेनॉल विवाद पर BJP सांसद जनार्दन मिश्रा का विवादित बयान

Ethanol-Petrol Controversy: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार (9 अगस्त) को इस पॉलिसी के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए ‘नई उड़ान’ सेवाओं के उद्घाटन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है। जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। इस दौरान एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का बचाव करते हुए बीजेपी सांसद ने विवादित बयान देते हुए कहा कि शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा जब देश में शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं…।

वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए बीजेपी सांसद मिश्रा ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, “ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।” उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली भाषा में कहा, “आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?”

एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का समर्थन किया

मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन से चल सकते हैं। लेकिन कुछ लोग एथेनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “एथेनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?” पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथेनॉल से चल रहीं। लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। मिश्रा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के सरकार के लक्ष्य का बचाव कर रहे थे।

उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथेनॉल का उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथेनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथेनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। लेकिन इसके बावजूद बेवजह विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।

एथेनॉल पर बहस तेज

मिश्रा की ये बातें केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर चल रही बहस के बीच आई हैं। इस बहस में मुख्य रूप से गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल एफिशिएंसी और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। यह कदम कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश में बने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है।

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केंद्र का कहना है कि E20 की टेस्टिंग और फील्ड अनुभव से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग लगने या गाड़ी की उम्र कम होने का कोई सबूत नहीं मिला है। मिश्रा ने बायोगैस और CNG जैसे वैकल्पिक ईंधन के लिए सरकार की व्यापक कोशिशों का भी समर्थन किया। साथ ही हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों पर भी जोर दिया। फिलहाल, उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। विपक्षी पार्टियां भगवा पार्टी पर हमलावर हैं।

ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

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महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

Nikita Rawal: रेड कार्पेट पर एक महिला ने निकिता रावल को किस किया, ‘गरम मसाला’ एक्ट्रेस के उड़े होश

Nikita Rawal: निकिता रावल का हाल ही का रेड कार्पेट अपीयरेंस तब एक अजीब मोड़ पर आ गया, जब एक महिला फैन उनके पास आई और अचानक उनके होंठों पर किस कर लिया। हां आपने सही पढ़ा। इस अजीब पल ने एक्ट्रेस को साफ तौर पर हैरान और असहज कर दिया। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और तब से ऑनलाइन चर्चा का विषय बनी हुई है।

वीडियो में निकिता एक इवेंट में पैपराजी के लिए पोज देती हुई दिख रही हैं, तभी एक महिला फ़ैन उनके पास आती है और सेल्फ़ी की मांग करती है। बातचीत के दौरान एक्ट्रेस शुरू में सहज लग रही थीं और उन्होंने फैन के साथ खुशी-खुशी पोज़ भी दिया, जबकि फ़ोटोग्राफ़र्स ने उस पल को कैमरे में कैद किया।

हालांकि, माहौल तब अचानक असहज हो गया जब फैन ने निकिता के गाल पर किस किया और फिर उन्हें अपनी ओर खींचकर होंठों पर किस कर लिया। एक्ट्रेस इस अचानक हुई हरकत से हैरान दिखीं और ऐसा लगा जैसे उन्होंने फैन को रोकने की कोशिश की हो।

इसके बावजूद, फैन निकिता को पकड़े रही। एक्ट्रेस साफ़ तौर पर असहज दिख रही थीं। जाने से पहले, फ़ैन ने उनके गाल पर फिर से किस किया, जबकि कैमरे इस अजीब स्थिति को रिकॉर्ड करते रहे। निकिता रावल ने हिंदी और साउथ इंडियन फ़िल्मों में अपना करियर बनाया है और कई प्रोजेक्ट्स में काम किया है। बॉलीवुड में, यह एक्ट्रेस ‘ब्लैक एंड व्हाइट’, ‘मिस्टर हॉट मिस्टर कूल’, ‘द हीरो – अभिमन्यु’, ‘अम्मा की बोली’, ‘गरम मसाला’ और ‘क्यूट कमीना’ जैसी फ़िल्मों में नज़र आ चुकी हैं।

निकिता ने 2012 में तेलुगु सिनेमा में कदम रखा और ‘टिम्पा’ नाम के प्रोजेक्ट में काम किया, जिसमें उन्होंने विक्रम रॉय के साथ एक इच्छाधारी नागिन का किरदार निभाया। आने वाले समय में, निकिता अरशद वारसी और चंकी पांडे के साथ ‘रोटी कपड़ा और रोमांस’ फ़िल्म में नज़र आएंगी।

पाकिस्तान पर अटैक हुआ तो सऊदी-तुर्किये हमला करेंगे? नए ‘इस्लामिक NATO’ का भारत के लिए क्या मायने है?

Saudi Arabia-Turkey-Pakistan Mecca Alliance: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मक्का डील के तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किये गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने इस समझौते को ‘इस्लामिक NATO’ करार दिया। साथ ही भारत और इजरायल की तरफ से पैदा की गई चुनौतियों से निपटने का आग्रह किया।

एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।

एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा

बयान के अनुसार, “इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।” बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी शामिल है। बयान में कहा गया है, “यह समझौता एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।”

यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है। इसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।

तुर्किये और इजरायल में बढ़ा तनाव

हाल के महीनों में तुर्किये और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें यह संकल्प लिया गया था कि उन दोनों में से किसी भी देश पर हमले को दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा। रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त ट्रेनिंग, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए सैन्य कर्मियों और विमानों को तैनात किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं। साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है। शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।

क्या बोले एक्सपर्ट?

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका काफी कम हो सकती है। रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एक पूर्व प्रमुख के बेटे अब्दुल्ला हमीद गुल ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को सुरक्षा मुहैया कराने की अमेरिका की क्षमता को लेकर क्षेत्र में शंकाएं बढ़ रही हैं।

गुल ने कहा, “खाड़ी देशों में अमेरिका के 27 सैन्य अड्डे थे। उनमें से 17 को अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ईरान ने तबाह कर दिया। इससे क्षेत्र में ये सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिकी वाकई उनकी रक्षा कर सकते हैं। इसी वजह से ऐसे समझौते करने की जरूरत पड़ी।” गुल ने कहा कि इस समझौते के साथ ही क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका बहुत कम या कहें कि खत्म सी हो जाएगी। गुल ने कहा, “कतर और कुवैत भी जल्द ही पाकिस्तान के साथ इसी तरह के समझौतों में शामिल होंगे।”

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को आभास हो गया था कि ईरान के बजाय इजरायल उनके लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने कहा कि इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर धारणा बदल दी है। वहीं, रिटायर्ड ब्रिगेडियर फारूक हमीद ने कहा कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। लिहाजा पाकिस्तान और भारत के बीच भविष्य में किसी तरह के संघर्ष के विरुद्ध यह प्रावधान ‘निवारक’ के रूप में काम करेगा।गठजोड़ से नई दिल्ली की बढ़ेगी टेंशन?

मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यही प्रावधान इस समझौते की तुलना NATO के Article 5 से किए जाने की सबसे बड़ी वजह है। NATO के Article 5 के तहत किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। इसके सदस्य देश सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता जताते हैं।

पाकिस्तान ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा

समझौते पर हस्ताक्षर के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद से पीड़ित राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर ‘Islamic NATO’ से उन चुनौतियों से निपटने की अपील, जिन्हें उन्होंने भारत और इजरायल से जुड़ा बताया। पाकिस्तान की इस बयानबाजी को खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच लंबे समय से सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी मुद्दों पर तनाव बना रहा है।

एक पर हमला तो तीनों आएंगे साथ?

मक्का में हुए इस संयुक्त रक्षा समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामूहिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता है। यानी अगर समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषक इसे NATO मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, केवल इस प्रावधान के आधार पर इसे NATO का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा। NATO एक व्यापक, संस्थागत और दशकों पुराना सैन्य गठबंधन है। जबकि पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये के बीच यह समझौता तीन देशों की रक्षा साझेदारी पर आधारित है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह एग्रीमेंट?

नई दिल्ली के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों शामिल हैं। साथ ही तुर्किये भी पाकिस्तान के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। भारत की चिंता का एक पहलू यह हो सकता है कि पाकिस्तान भविष्य में क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामूहिक रक्षा के मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश करे।

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खासकर तब, जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भारत और इजरायल को कथित चुनौतियों से जोड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नए डिफेंस डील का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करेगा?

क्या भारत के खिलाफ बनेगा सैन्य मोर्चा?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत के खिलाफ बनाया गया सैन्य गठबंधन है। समझौते का घोषित आधार तीनों देशों के बीच सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग है। लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा भारत और इजरायल का नाम लेकर बयान देना निश्चित रूप से इस घटनाक्रम को नई दिल्ली के लिए अधिक संवेदनशील बना देता है। भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि यह समझौता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित रहता है या भविष्य में इसे किसी व्यापक राजनीतिक-सैन्य गठबंधन का रूप दिया जाता है।