1942 A Love Story: अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ स्टारर ‘1942 ए लव स्टोरी’ सिनेमाघरों में होगी री रिलीज

1942 A Love Story: ‘1942 अ लव स्टोरी’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्म इस महीने फिर से सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। विधु विनोद चोपड़ा की डायरेक्ट की गई यह फिल्म, बेहतर क्वालिटी वाले 8K विज़ुअल और 5.1 सराउंड साउंड के साथ सिनेमाघरों में लौटेगी।

बुधवार को NH स्टूडियोज़ ने घोषणा की कि अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ स्टारर यह फ़िल्म 21 अगस्त को सिनेमाघरों में फिर से रिलीज होगी। इस फिल्म को इटली के बोलोग्ना में मौजूद दुनिया की जानी-मानी फिल्म रेस्टोरेशन सुविधा ‘L’Immagine Ritrovata’ और भारत की ‘प्रसाद फिल्म लैब्स’ के सहयोग से रिस्टोर किया गया है।

इस मेहनत भरे रेस्टोरेशन से फ़िल्म के विज़ुअल और भी शानदार हो गए हैं, जबकि इसका ओरिजिनल सिनेमैटिक अंदाज़ भी बना हुआ है। साथ ही, इसमें डॉल्बी 5.1 सराउंड साउंड मिक्स का इस्तेमाल किया गया है। 1994 में रिलीज हुई ‘1942: अ लव स्टोरी’ हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा रोमांटिक ड्रामा फ़िल्मों में से एक है।

यह फिल्म अपनी बेहतरीन एक्टिंग के साथ-साथ आर.डी. बर्मन के सदाबहार संगीत के लिए भी याद की जाती है। 1993 में निधन से पहले, यह महान संगीतकार का आखिरी पूरा किया गया साउंडट्रैक था। ‘एक लड़की को देखा’, ‘कुछ न कहो’, ‘रिम झिम रिम झिम’ और ‘रूठ न जाना’ जैसे गाने आज भी कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं।

री-रिलीज़ के बारे में बात करते हुए, NH स्टूडियोज़ के डायरेक्टर श्रेयंस हीरावत ने एक प्रेस नोट में कहा, “विधु विनोद चोपड़ा की शानदार फ़िल्मों के कलेक्शन को हासिल करना NH स्टूडियोज़ के लिए एक अहम उपलब्धि है। ये ऐसी फ़िल्में हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को आकार दिया है और कई पीढ़ियों के दर्शकों को प्रेरित करती रही हैं।

इस असाधारण विरासत को संजोने और उसका जश्न मनाने में पार्टनर बनकर हमें गर्व है। ‘1942: अ लव स्टोरी’ से शुरुआत करते हुए, हमारी कोशिश है कि इन सदाबहार क्लासिक फ़िल्मों को बेहतरीन क्वालिटी में बड़े पर्दे पर वापस लाया जाए, ताकि दर्शक इनका अनुभव वैसे ही कर सकें जैसा इन्हें हमेशा से देखा जाना चाहिए था।”

फिल्म के नए वर्शन के बारे में बात करते हुए फिल्ममेकर विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, “मैं एक बहुत ज़रूरी बात कहना चाहता हूं कि पहली बार दर्शक इस फिल्म को वैसे ही देख पाएँगे, जैसा इसे देखा जाना चाहिए था। क्योंकि जब यह फिल्म रिलीज़ हुई थी, तब भारत में डॉल्बी सराउंड साउंड की सही सुविधा नहीं थी। यहां तक कि कलर ग्रेडिंग में भी कुछ कमियां थीं। यह भारत की पहली फिल्म थी जिसे डॉल्बी में बनाया गया था और हम ही डॉल्बी को भारत लाए थे। मैंने फिल्म की मिक्सिंग लंदन में करवाई थी। हम इसे वापस तो ले आए, लेकिन कोई भी सिनेमा हॉल डॉल्बी चलाने के लिए तैयार नहीं था। क्या आप सोच सकते हैं? हमने मेट्रो सिनेमा में खास तौर पर बाहर से मंगवाई गई केबल बिछाईं और सराउंड साउंड स्पीकर लगवाए।”

El Nino Impact: अल नीनो और युद्ध के बीच भारत के मानसून से दुनिया को क्यों हो रही टेंशन? नए संकट की आहट!

El Nino Impact On Monsoon: वैश्विक स्तर पर खाद्य महंगाई की मार झेल चुकी दुनिया के सामने साल 2026 के अंत तक एक बार फिर से भोजन महंगा होने का नया संकट मंडराने लगा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्ध की वजह से फ्यूल और फर्टीलाइजर की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही है।इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश भारत में मानसून की धीमी और देर से हुई शुरुआत ने वैश्विक चावल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को लेकर दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल के ऊंचे दाम, खाद आपूर्ति में रुकावट और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम कृषि उत्पादन व उसके परिवहन की लागत को लगातार बढ़ा रहे हैं। इस वजह से दुनिया भर के उपभोक्ताओं को इस साल के अंत और वर्ष 2027 के दौरान खाद्य महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में राहत की खबर यह है कि घरेलू स्तर पर सुधरती बारिश और पर्याप्त अनाज भंडार के दम पर भारत पर इसका असर सीमित रहने का अनुमान है।

संयुक्त राष्ट्र ने दिए संकेत: साल के अंत से फिर बढ़ेंगे खाने-पीने के सामान के दाम

साल 2022 में ग्लोबल महंगाई को बढ़ाने में खाद्य कीमतों ने मुख्य भूमिका निभाई थी लेकिन चालू वर्ष में ऊर्जा लागत अधिक रहने के बावजूद खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रही हैं। हालांकि यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतें अब ज्यादा तेजी से बढ़ेंगी और साल के अंत तक खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने शुरू हो जाएंगे।

इसका असर अगले साल यानी 2027 में और अधिक देखने को मिलेगा। टोरेरो के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतों का असर रिटेल यानी खुदरा बाजार में दिखने में तीन से छह महीने का समय लगता है।

हालांकि हाल के महीनों में गेहूं, मक्का और चावल जैसी प्रमुख फसलों की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन यह मौजूदा समय की ठीक-ठाक पैदावार दिखा रही है। असली चुनौती अगली बुवाई के सीजन में उत्पादन लागत बढ़ने से सामने आएगी।

युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर बढ़ा भारी दबाव

ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा की है। ये दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। मैक्सिमो टोरेरो के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह का अवरोध कृषि प्रणालियों और उसके इनपुट्स पर सीधा असर डालता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची दरें सिंचाई, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा देती हैं। इसके अलावा नेचुरल गैस के दाम बढ़ने से खाद बनाना भी काफी महंगा हो जाता है।

इसी तरह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने डीजल और नेचुरल गैस के निर्यात पर असर डाला है। इससे दुनिया भर में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यूरोप, अमेरिका, ब्राजील और एशिया के किसान इस दबाव को महसूस कर रहे हैं और कम मुनाफे की वजह से फसलें उगाएं या न उगाएं, इस सवाल से जूझ रहे हैं।

भारत का मानसून बना दुनिया के लिए अहम वॉचपॉइंट

दुनिया में चावल के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और सबसे बड़े निर्यातक देश भारत का मानसून अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजारों के लिए एक प्रमुख वॉचपॉइंट बना हुआ है। भारत में मानसून की देरी से शुरुआत और औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। अगर भारत के चावल उत्पादन में कोई बड़ी बाधा आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई टाइट हो सकती है। इससे कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर सीमित: बजाज एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट

बजाज एसेट मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में देर से आए मानसून का देश की इकॉनमी पर बड़ा निगेटिव असर पड़ने की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जून के आखिरी हफ्ते में बारिश काफी बेहतर हुई है। जुलाई में भी मानसूनी बारिश मजबूत रही। देश के प्रमुख नदी घाटियों और जलाशयों में पानी का स्तर बेहतर स्थिति में है। भारत के पास सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार तय बफर नॉर्म्स से लगभग 5 गुना अधिक है। ये खाद्य कीमतों में उछाल को रोकने में एक मजबूत कवच का काम करेगा।

वित्त वर्ष 2027 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर औसतन 5 से 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये खाद्य आपूर्ति के अस्थाई दबावों की वजह से होगी। हालांकि कोर इन्फ्लेशन दर कंट्रोल में है। भारत की रूरल इकॉनमी मजबूत बनी हुई है। मई में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह एग्रीकल्चर क्रेडिट करीब 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा। गैर-कृषि आय के मजबूत रहने से बुवाई में देरी के बावजूद ग्रामीण खपत बनी हुई है।

रिपोर्ट में ऐतिहासिक तथ्यों के हवाले से कहा गया कि जून 2026 पिछले एक सदी में सबसे शुष्क महीनों में से एक रहा लेकिन पूरे मानसून का नतीजा जून से तय नहीं होता। अगर अगस्त और सितंबर में बारिश का सिलसिला बेहतर बना रहता है तो मानसून घाटे की चिंताएं दूर हो जाएंगी और 2026 को एक रिकवरिंग मानसून वर्ष के रूप में देखा जाएगा।

बढ़ती लागत से किसानों ने घटाई बुवाई: अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक संकट

बढ़ती उत्पादन लागत के कारण दुनिया भर के किसानों ने फसलों का रकबा घटाना शुरू कर दिया है। ईरान संघर्ष के शुरुआती तीन महीनों में वैश्विक स्तर पर गेहूं और मक्के की बुवाई में गिरावट आई है। कई अमेरिकी किसानों ने सोयाबीन की ओर रुख किया है क्योंकि इसमें खाद की जरूरत कम होती है। अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्‍त सरकारी मदद के बिना 2027 में 9 प्रमुख फसलें उगाने वाले अमेरिकी किसानों को कुल मिलाकर 32 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

दुनिया के बड़े कृषि निर्यातक देशों में शामिल ऑस्ट्रेलिया ने अनुमान लगाया है कि फ्यूल और खाद की अत्यधिक ऊंची कीमतों के साथ इनपुट्स की अनिश्चितता के चलते उसकी सर्दियों की फसल उत्पादन में 21 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

अल नीनो की आहट से खाद्य सुरक्षा पर मंडराया ‘परफेक्ट स्टॉर्म’

भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ अल नीनो मौसम पैटर्न के मजबूत होने की आशंका ने संकट को और गहरा कर दिया है। एफएओ ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की वजह से मौसम पर पड़ने वाला असर फसलों की पैदावार घट सकती है। ऐसा हुआ तो खाद्य आपूर्ति में कमी आएगी और दुनिया भर में करोड़ों लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं।

जलवायु का झटका, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और फ्यूल-खाद की आपूर्ति में आ रही बाधा, ये सारी बातें मिलकर वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए एक परफेक्ट स्टॉर्म यानी चौतरफा संकट पैदा कर रही हैं। हालांकि कमोडिटी बाजार अब तक कुछ हद तक टिकाऊ बने रहे हैं लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत का पूरा असर आने वाले महीनों में सुपरमार्केट और खुदरा दुकानों में सामानों के दामों में दिखाई देगा।

ये भी पढ़ें- आज का मौसम: बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, दिल्ली-यूपी में भी होगी प्रचंड बरसात, IMD ने दी ये चेतावनी

इससे दुनिया भर के लोगों के लिए महंगाई का खतरा एक बार फिर बढ़ सकता है। दूसरी ओर भारत में सुधरती मानसूनी बारिश, प्रचुर अन्न भंडार और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के चलते देश के भीतर इसका व्यापक आर्थिक असर सीमित रहने की उम्मीद है।

Sheikh Hasina: ‘भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा…’; शेख हसीना ने की PM मोदी की तारीफ

Sheikh Hasina Hails PM Modi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार (5 अगस्त) को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। 2024 में बांग्लादेश की सत्ता से हटाए जाने के बाद मीडिया से यह उनकी पहली बातचीत थी। दिल्ली से एक वर्चुअली इंटरनेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हसीना ने अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों के बावजूद बांग्लादेश लौटने के अपने इरादे को दोहराया। भारत को बांग्लादेश का बहुत अच्छा दोस्त बताते हुए हसीना ने कहा कि नई दिल्ली मुश्किल समय में हमेशा ढाका के साथ खड़ा रहा है और आगे भी ऐसा ही करेगा।

हसीना ने घोषणा की है कि वह देश को सही राह पर लाने के वास्ते दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने यह बात भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित प्रेसवार्ता में कही। वह पांच अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं। इस ‘डिजिटल’ प्रेसवार्ता में पत्रकारों को केवल उनकी आवाज सुनाई दे रही थी। वह नजर नहीं आ रही थीं।

हसीना ने कहा, “मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।” अवामी लीग की नेता हसीना ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र रहा है।”

‘मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं’

उन्होंने अपने संबोधन में अपने देश के राजनीतिक माहौल, उनके लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा, “मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को विकास, धर्मनिरपेक्षता और समृद्धि के रास्ते पर वापस लाने के लिए है।”

‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब’ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “चाहे मेरी किस्मत में कुछ भी लिखा हो, मैं अपने लोगों के बीच रहने के लिए बांग्लादेश लौटूंगी। जब मेरे प्यारे देशवासी तकलीफ़ में हों, तो मैं उनसे दूर नहीं रह सकती।”

उन्होंने कहा, “मुझे हिरासत में लिया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है, मुझ पर झूठे मामले थोपे जा सकते हैं। लेकिन डर लोगों के प्रति मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता। मेरी जिंदगी निजी सुरक्षा के हिसाब-किताब से कहीं ऊपर है।”

‘मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं’

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी वापसी पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के साथ किसी भी तरह की पर्दे के पीछे की बातचीत की संभावना को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, “मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है। मुझे बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है। मैं लौटना चाहती हूं क्योंकि वहां के लोग सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति के हकदार हैं।” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही उन्हें अपने देश से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन वह वहां के लोगों से कभी अलग नहीं हुईं।

78 वर्षीय हसीना ढाका छोड़ने के बाद से भारत में रह रही हैं। पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हसीना की सरकार की कार्रवाई को लेकर मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद से ढाका नयी दिल्ली से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है।

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं थे, जिनके बाद उनकी सरकार सत्ता से हट गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठित समूहों ने इस आंदोलन को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने का काम किया।

हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याओं को वैध बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश एक विफल राष्ट्र है और देश में कानून-व्यवस्था नहीं है। जॉय ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक और पाकिस्तान बन गया है।

बांग्लादेश की कड़ी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने हसीना की प्रेसवार्ता पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश इस बात से नाराज है कि ढाका द्वारा नई दिल्ली को इस कार्यक्रम के द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित असर के बारे में चिंता जताए जाने के बावजूद, यह बातचीत करने की इजाजत दी गई। उसने कहा कि भारतीय धरती पर हसीना की बातचीत का कार्यक्रम बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान है।

ये भी पढ़ें- बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला, शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए थे शामिल

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, “बांग्लादेश भारत के साथ ऐसे संबंध बनाए रखना चाहता है जो रचनात्मक हों, दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हों और भविष्य की ओर देखने वाले हों। ये संबंध संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने और राष्ट्रीय सम्मान पर आधारित हों।”

बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला, शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए थे शामिल

Attack on Shakib Al Hasan house: बांग्लादेश के मगुरा जिले में बुधवार (5 जुलाई) रात बांग्लादेश के पूर्व कप्तान और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला हुआ। हसन के मगुरा स्थित घर पर कुछ लोगों ने कथित तौर पर अचानक से हमला कर दिया। इस दौरान उनके घर में आग लगाने की कोशिश की गई। यह हमला तब हुआ जब उन्होंने दिल्ली में सत्ता से हटाई जा चुकीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। पुलिस ने बताया कि अज्ञात उपद्रवियों ने घर में तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की। स्थानीय खबरों के मुताबिक हमले के दौरान पेट्रोल बम भी फेंके गए।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला बुधवार रात करीब 8:45 बजे (स्थानीय समय) शाकिब के घर पर हुई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हमले के दौरान उन्हें पटाखे जैसी तेज आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय मीडिया ने खबर दी कि घर पर पेट्रोल बम भी फेंके गए। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर पेट्रोल बम के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में 39 वर्षीय क्रिकेटर के घर के बाहर पटाखे जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। शाकिब मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से अवामी लीग के पूर्व सांसद हैं।

पुलिस के अनुसार, कई अज्ञात लोगों ने घर पर ईंट और पत्थर फेंके। इससे खिड़कियां टूट गईं। फिर उन्होंने घर में आग लगाने की कोशिश की। फिलहाल किसी के घायल होने की खबर नहीं है।मगुरा सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अब्दुल्ला अल मामून ने ‘द डेली स्टार’ को बताया, “कई उपद्रवियों ने घर पर ईंट के टुकड़े फेंके और खिड़कियां तोड़ दीं। उन्होंने घर में आग लगाने की भी कोशिश की।” घटना के बाद घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हमलावरों की पहचान और हमले के मकसद का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला

यह हमला तब हुआ जब शाकिब दिल्ली से शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे। यह कार्यक्रम ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ द्वारा आयोजित किया गया था। बातचीत के दौरान हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के अशांति के दौरान अपनी सरकार के कामकाज का बचाव किया। पूर्व पीएम ने दावा किया कि छात्रों के नेतृत्व में हुआ विद्रोह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं था। बल्कि सत्ता परिवर्तन का एक सोचा-समझा ऑपरेशन था।

राजनीतिक तनाव अभी भी बरकरार

यह घटना बांग्लादेश में हसीना के सत्ता से हटने के बाद जारी राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। मीडिया से बातचीत से पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिज़न पार्टी (NCP) के नेताओं ने इस कार्यक्रम की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। कथित तौर पर मीडिया संगठनों को हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाने के खिलाफ चेतावनी दी।

अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों का आरोप है कि शाकिब के घर पर हुआ हमला इस कार्यक्रम में उनकी भागीदारी से जुड़ा था। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने हमले और मीडिया के साथ बातचीत के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया है, और पुलिस ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं की है।

शाकिब के राजनीतिक संबंध

बांग्लादेश के सबसे महान ऑलराउंडर क्रिकेटरों में से एक माने जाने वाले शाकिब अवामी लीग के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव के कारण हमेशा चर्चा और विवाद का विषय रहे हैं। उन्हें 2024 के आम चुनाव में मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से अवामी लीग के टिकट पर सांसद चुना गया था। विपक्षी दलों ने इस चुनाव की आलोचना करते हुए कहा था कि इसमें वास्तविक प्रतिस्पर्धा का अभाव था।

अगस्त 2024 में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, बांग्लादेश में अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। बुधवार को अपने संबोधन में, हसीना ने अपनी पार्टी पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की और कई कानूनी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद बांग्लादेश लौटने के अपने इरादे को दोहराया। इस कार्यक्रम में शाकिब की भागीदारी ने राजनीतिक तनाव के इस दौर में पूर्व सत्ताधारी पार्टी के साथ उनके निरंतर जुड़ाव को उजागर किया।

अभी तक घर नहीं लौटे हैं शाकिब

हसीना सरकार के गिरने के बाद से शाकिब बांग्लादेश नहीं लौटे हैं। राजनीतिक बदलाव के बाद उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें हत्या का एक मामला भी शामिल है जिसमें उन्हें कई आरोपियों में से एक के तौर पर नामजद किया गया है। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान ने बार-बार कहा है कि अगर उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और उत्पीड़न से बचाव का भरोसा मिले, तो वे लौटने और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।

यह अनुभवी ऑलराउंडर संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने परिवार के साथ रहते हुए फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलना जारी रखे हुए है। उन्होंने कैरेबियन प्रीमियर लीग और लंका प्रीमियर लीग जैसे टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया है। जबकि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने पहले संकेत दिया है कि राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी के लिए दरवाजे खुले हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को ऐलान किया वह देश को सही राह पर लाने के वास्ते दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

ये भी पढ़ें- India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

उन्होंने कहा कि इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने यह बात भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित प्रेसवार्ता में कही। वह 5 अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं। तब से वह भारत में ही हैं। इस डिजिटल प्रेसवार्ता में पत्रकारों को केवल उनकी आवाज सुनाई दे रही थी। वह नजर नहीं आ रही थीं।

India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के जिन क्षेत्रों का अभी तक सीमांकन नहीं हुआ है, उन्हें लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भारत सरकार ने अनसुलझे जमीन की अदला-बदली की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारत और म्यांमार मणिपुर में अपनी साझा सीमा के एक ऐसे हिस्से को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसकी सीमा अभी तय नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान इससे जुड़े सवाल पर कहा, “सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।” हालांकि, क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान की खबरों ने मणिपुर में नागरिक समाज समूहों के विरोध को जन्म दे दिया है, जिन्हें राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंताएं हैं। चर्चा के तहत आने वाला यह हिस्सा लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में आता है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी (Kabaw Valley) से सटा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट (The Diplomat)’ की 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया कि इस सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह इलाका करीब 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार की काबाव घाटी (Sagaing Region) से सटा हुआ है।

भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। ये अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों से होकर निकलती है, जहां कई जनजातीय समुदायों के दोनों देशों में पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इस सीमा में से करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) के जरिए किया जा चुका है। जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी अनसुलझा है। इनमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से शामिल हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सीमांकन का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़) का काम पूरा करना है। ताकि अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की थी। 2018 में लागू इस व्यवस्था के तहत सीमा से लगे जनजातीय समुदायों को बिना वीजा 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

1967 के समझौते के बाद भी बाकी हैं कुछ विवादित हिस्से

भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सीमा 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत तय की गई थी। इसके बावजूद कुछ हिस्सों का सीमांकन आज भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने साल 2018 में संसद को बताया था कि शेष क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा और इसके तहत नौ नए सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने हैं।

मणिपुर में मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68), मोरेह सेक्टर (75-79) और चोरो खुन्नौ सेक्टर (88-95) को संवेदनशील माना जाता है। भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई व्यापक सीमा विवाद नहीं है। केवल कुछ सीमा स्तंभों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

मणिपुर में शुरू हुआ विरोध

जमीन अदला-बदली की खबरों के सामने आने के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को सौंपने की कोशिश की जाती है तो संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।

संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। COCOMI का आरोप है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद राज्य पहले ही अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा खो चुका है। अब किसी भी नई कटौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से बिना राज्य की जनता की सहमति के कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है।

ये भी पढ़ें- Mark Zuckerberg: भारत सरकार के सामने झुके मार्क जुकरबर्ग! Meta प्लेटफॉर्म पर डीपफेक कंटेंट और खामियों के लिए मांगी माफी

मामले में बड़ी बातें

  • विदेश मंत्रालय ने केवल सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
  • जमीन की अदला-बदली को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।
  • केंद्र सरकार सीमा पर फेंसिंग कर अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना चाहती है।
  • मणिपुर के नागरिक संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय हस्तांतरण का विरोध किया है।

महाराष्ट्र में 1 साल के कोर्स पर होम्योपैथी डॉक्टर लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, डॉक्टरों ने दी हड़ताल की चेतावनी

Homeopathic doctors in Maharashtra: महाराष्ट्र ने मेडिकल सेक्टर में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाते हुए एक होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह अनुमति राज्य मेडिकल काउंसिल ने एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर दी है। इसी के साथ महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा 1 साल का फार्मकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक/एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति/रजिस्ट्रेशन दिया गया है।

हालांकि इस फैसले का मेडिकल विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट ढांचा भी मौजूद नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इसके विरोध में डॉक्टरों ने बुधवार से नॉन इमरजेंसी (Non-emergency) सेवाओं के बहिष्कार और गुरुवार से आपातकालीन सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी है, जिसका फैसला अगस्त के मध्य (mid-Aug) तक आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा पवार नाम की एक होम्योपैथ डॉक्टर, जिन्होंने फार्माकोलॉजी में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स किया है, उनका रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में कर दिया गया। यह रजिस्ट्रेशन उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में होम्योपैथी डॉक्टरों ने MMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

सूत्रों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल अधिकारियों ने पहले पंजीकरण प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की थी। ताकि सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत पूरी हो सके। लेकिन प्रदर्शन कर रहे होम्योपैथ डॉक्टरों के MMC कार्यालय पहुंचने के बाद आखिरकार पंजीकरण कर दिया गया।

डॉक्टर संगठनों का विरोध तेज

इस फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को गैर-आपातकालीन (Non-Emergency) चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है।

गुरुवार यानी 5 अगस्त से इस बहिष्कार को आपातकालीन (Emergency) सेवाओं तक बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक मेडितल पद्धति का अभ्यास केवल उसी क्षेत्र में ट्रेनिंग कर चुके डॉक्टरों को करना चाहिए। इस तरह की अनुमति से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित

इस पूरे मामले की सुनवाई फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत का फैसला अगस्त के मध्य तक आने की उम्मीद है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा दिया गया यह रजिस्ट्रेशन सशर्त (Conditional) है। यानी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है या इसे रद्द भी किया जा सकता है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद इस बात को लेकर है कि क्या केवल एक वर्ष के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर होम्योपैथ डॉक्टरों को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जानी चाहिए। मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि इसके लिए विस्तृत मेडिकल ट्रेनिंग की आवश्यक है। जबकि होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि अतिरिक्त ट्रेनिंग के बाद उन्हें सीमित दायरे में यह अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला अब राज्य के साथ-साथ देशभर में मेडिकल व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

ये भी पढ़ें- Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

Clipboard18

उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

Clipboard19

इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

ये भी पढ़ें- President Special Train: एक ट्रेन आगे, एक पीछे.. साथ में अल्ट्रा-लग्जरी प्राइवेट सलून! जानिए कैसी होती है ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ ट्रेन जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की यात्रा

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रहेंगे ‘नमो भारत’ के ये 17 स्टेशन, इन राज्यों में स्कूल भी बंद, जानिए रूट समेत सभी बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने बताया है कि कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद और मोदीनगर के बीच 17 ‘नमो भारत’ स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट चार से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इन स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी सीमित रहेगी। NCRTC ने बताया कि वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।

निगम के अनुसार, प्रभावित स्टेशनों में मोदीनगर, मेरठ नॉर्थ, एमईएस कॉलोनी, बेगमपुल, भैंसाली, मेरठ सेंट्रल, ब्रह्मपुरी, शताब्दी नगर, रिठानी, परतापुर, मेरठ साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर और गाजियाबाद शामिल हैं। NCRTC ने बताया कि अधिकतर स्टेशनों पर इस अवधि के दौरान गेट संख्या-2 बंद रहेगा। बयान के मुताबिक, बेगमपुल स्टेशन पर गेट संख्या-2 और 3, जबकि दुहाई स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 4 बंद रहेंगे। गाजियाबाद स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 5 बंद रहेंगे।

पार्किंग भी बंद

इन स्टेशनों के प्रभावित हिस्से की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। एनसीआरटीसी ने यात्रियों को नमो भारत सेवाओं का उपयोग करने के लिए संबंधित स्टेशनों पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रवेश और निकास द्वारों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। निगम ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया।

निगम ने कहा कि सरायकाले खां-मोदीनगर कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। बयान के मुताबिक, 14 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक ट्रेनें आठ मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इस साल कांवड़ यात्रा पवित्र श्रावण मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त को समाप्त होगी।

स्कूल-कॉलेज 12 अगस्त तक बंद रहेंगे

श्रावण मास की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद जिलों में शिक्षण संस्थान 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। मेरठ में जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह के आदेश के अनुसार यह अवकाश 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके अनुसार सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

प्रशासन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए लिया गया है, क्योंकि श्रावण शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से गुजरते हैं। मेरठ प्रशासन के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षण संस्थान, जिनमें बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से जुड़े संस्थान शामिल हैं, 12 अगस्त तक बंद रहेंगे।

इसके अनुसार सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी इस दौरान क्लास बंद रखने का निर्देश दिया गया है। गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूल के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चार अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया।

इस बीच, बागपत प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए तीन अगस्त से 12 अगस्त तक कक्षा एक से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर जाते हुए बागपत से गुज़र रहे हैं। जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ‘जलाभिषेक’ के लिए जिले के प्रमुख शिवमंदिरों में भी जा रहे हैं, जिससे कांवड़ रूट और आस-पास के इलाकों में भारी ट्रैफिक हो रहा है।

कब शुरू हुई कांवड़ यात्रा?

भगवान शिव के पवित्र माह सावन के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचेगी। इसी दिन श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसी के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

कहां से लाया जाता है गंगाजल?

कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री गंगाजल लेने के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से भोलेनाथ के श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने मंजिल की ओर रवाना होते हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई प्रमुख शिवधामों में भी दर्शन-पूजन करते हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने व्यापक ट्रैफिक में बदलाव किया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर जुलाई के अंतिम सप्ताह से भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रा के चरम दिनों में कई रूट केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। जबकि अन्य वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा रूट को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। हजारों CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष गश्ती दलों की तैनाती की गई है।

ये भी पढ़ें- 36 देशों से 274 भगोड़ों को लाया गया वापस, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति भी अटैच

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कांवड़ और डीजे सिस्टम की ऊंचाई को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करने की अपील की है।

‘100 बार गिरफ्तार होने को तैयार…’; एक्ट्रेस तृषा कृष्णन पर विवादित बयान पर उदयनिधि स्टालिन का रिएक्शन

Trisha Remark Row: एक्ट्रेस तृषा कृष्णन टिप्पणी विवाद के सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद रिहा होने पर तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) पर तीखा हमला बोला। स्टालिन ने कहा कि पार्टी समर्थकों पर उनके खिलाफ झूठे आरोप फैलाने का आरोप लगाया। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता ने कहा कि अगर किसानों के हक में खड़े होने के लिए उन्हें 100 बार भी गिरफ्तार होना पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें गिरफ़्तार किया है। साथ ही, पूर्व डिप्टी सीएम ने प्रशासन को सोफ़ा मॉडल सरकार करार दिया क्योंकि वह किसानों की शिकायतों को दूर करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, “सोफ़ा_मॉडल सरकार, जो किसानों की मुश्किलों को दूर करने में अक्षम है, उसने असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश में मुझे अरेस्ट किया है।”

उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु पुलिस द्वारा रिहा किए जाने के बाद आरोप लगाया कि उनके साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, “तीन हजार पुलिसकर्मियों के साथ हमें चेन्नई से तंजावुर तक सड़क मार्ग से 400 किलोमीटर ले जाया गया। हमारे साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया।” उदयनिधि को अभिनेता तृषा को लेकर ‘द्विअर्थी’ टिप्पणी करने के मामले में मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था।

उन्हें बाद में तंजावुर ले जाया गया, जहां इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। उदयनिधि ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में आरोपों को झूठाबताया। DMK नेता ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर एक ही अर्थ वाला बयान दिया था।

उदयनिधि ने कहा, “मेरे भाषण को काट-छांट कर और कुछ हिस्सों को जोड़कर यह दावा किया गया कि मैंने अनुचित बात कही है। कुछ लोगों ने मुझ पर ‘द्विअर्थी’ बात करने का आरोप लगाया है। मैंने केवल एक ही अर्थ में बात की थी कि किसानों को पानी की जरूरत है।”

उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं का अपमान करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। तमिलनाडु की हर मां और बहन को मैं अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं।” उदयनिधि ने इस बात पर निराशा जताई कि कुछ सहयोगी राजनीतिक नेताओं ने भी उनके पूरे भाषण का संदर्भ जाने बिना उनकी आलोचना की।

‘द्विअर्थी टिप्पणी’ करने के आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए कावेरी का पानी जारी करने की मांग करते समय उन्होंने एक ही अर्थ” में बात की थी। उन्होंने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर निशाना साधते हुए उसे ‘सर्कस कैंप’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वह झूठे मामलों से डरने वाले नहीं हैं।

ये भी पढ़ें- Trisha Krishnan: राजनीति से दूर रहीं एक्ट्रेस तृषा कृष्णन, फिर भी तमिलनाडु की सियासत के केंद्र में क्यों? जानिए पूरा विवाद

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उनके साथ एक आतंकवादी जैसा व्यवहार किया और उन्हें सड़क मार्ग से तंजावुर ले जाया गया। मंगलवार को गिरफ्तार किए गए दयनिधि स्टालिन को सेंगीपट्टी में पूछताछ के बाद पुलिस थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस थाने के बाहर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) कार्यकर्ताओं ने उदयनिधि का गर्मजोशी से स्वागत किया।