ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया:8 आईटी कंपनियों के खिलाफ एक्शन, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर सीधा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें चार भारतीय कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल भी शामिल हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी एक्शन लिया गया है। अब ये सभी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के लिए एप्लीकेशन नहीं दे पाएंगी। इसके तहत कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करती है। इस फैसले के बाद ट्रम्प सरकार ने कहा कि हम अमेरिकियों की नौकरियां छीनकर विदेशियों को नौकरी पर नहीं रख सकते। फैसले के बाद इन कंपनियों के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे हजारों भारतीय कर्मचारियों की प्रॉसेस रुक सकती है। सवाल- इन कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? जवाब- अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से सस्पेंड किया है। अब इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जो आवेदन पहले से चल रहे हैं, उनकी प्रक्रिया भी रोक दी गई है। सवाल- PERM क्या होता है? जवाब- अमेरिका में किसी विदेशी कर्मचारी को नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड दिलाने के लिए कंपनी को पहले यह साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कहा जाता है। सवाल- इसका ग्रीन कार्ड से क्या संबंध है? जवाब- PERM ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक जरूरी कदम है। अगर यह प्रक्रिया रुक जाती है तो कंपनी अपने कर्मचारी के ग्रीन कार्ड की आगे की प्रक्रिया भी नहीं बढ़ा पाती। सवाल- क्या भारतीय कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड रद्द हो गया? जवाब- नहीं। जिन लोगों को पहले ही ग्रीन कार्ड मिल चुका है, उन पर इस फैसले का असर नहीं है। इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनका ग्रीन कार्ड प्रोसेस चल रही है या जो जल्द इसके लिए आवेदन करने वाले थे। सवाल- भारतीय कर्मचारियों पर असर क्यों पड़ेगा? जवाब- टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी कर्मचारी अमेरिका में काम करते हैं। इनमें कई कर्मचारी H-1B वीजा पर हैं और आगे चलकर अपनी कंपनी की मदद से ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश करते हैं। अब PERM प्रक्रिया रुकने से उनके ग्रीन कार्ड में देरी हो सकती है। सवाल- क्या H-1B वीजा भी रद्द होगा? जवाब- नहीं। H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड अलग हैं। H-1B वीजा विदेशी कर्मचारी को कुछ समय के लिए अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति देता है। वहीं ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। इसलिए PERM पर रोक लगने से H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होगा। सवाल- जिनके पास पहले से ग्रीन कार्ड है, उनका क्या होगा? जवाब- उनका ग्रीन कार्ड रद्द नहीं होगा। इस फैसले का असर उन लोगों पर है जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सवाल- अमेरिका ने यह कार्रवाई क्यों की? जवाब- अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए इमिग्रेशन नियमों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक, 2009 से इन 8 कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए। इस दौरान उन्हें 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा और 1 लाख से ज्यादा PERM मंजूरियां मिलीं। सोंडरलिंग का दावा है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हुईं। हालांकि, कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अंतिम रूप से साबित नहीं हुए हैं। सवाल- जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर क्या आरोप लगाया? जवाब- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, जबकि कंपनी को करीब 6,300 H-1B वीजा और 3,000 ग्रीन कार्ड मिले। वेंस का आरोप है कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए इमिग्रेशन नियमों का इस्तेमाल कर रही हैं। सवाल- क्या सभी भारतीय आईटी कर्मचारियों पर असर पड़ेगा? जवाब- नहीं। इसका असर खास तौर पर उन भारतीय कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका ग्रीन कार्ड प्रोसेस इन 8 कंपनियों के जरिए चल रहा है या जो इसके लिए आवेदन करने वाले हैं। सिर्फ H-1B वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों का वीजा इस फैसले से अपने आप रद्द नहीं होगा। सवाल- कितने भारतीय प्रभावित होंगे? जवाब- अमेरिकी सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि कितने भारतीय कर्मचारी प्रभावित होंगे। यह भी साफ नहीं है कि रोक कितने समय तक रहेगी। हालांकि, टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के शामिल होने से बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है। सवाल- अब आगे क्या होगा? जवाब- फिलहाल इन कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पुराने लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रुकी रहेगी। अब इन कंपनियों के कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड प्रोसेस कब शुरू होगा, यह अमेरिकी सरकार के अगले फैसले पर निर्भर करेगा।

फील्डमार्शल ने नए डीजल इंजन लॉन्च किए, टैक्ट्रर और खेती की मशीनों में आएंगे काम; ARAI से मिली मंजूरी

इंजीनियरिंग कंपनी Fieldmarshal P.M. Diesels Private Limited ने 15 HP और 18 HP कैटेगरी में नए सिंगल-सिलेंडर डीजल इंजन लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, ये भारत के पहले ARAI-अप्रूव्ड और TREM V-कम्प्लायंट सिंगल-सिलेंडर डीजल इंजन हैं। यह लॉन्च कंपनी के 60 साल से ज्यादा लंबे इंजीनियरिंग सफर में अहम पड़ाव है।

कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और खेती की मशीनों के लिए डिजाइन

नए इंजन खास तौर पर कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और खेती की मशीनों के लिए बनाए गए हैं। कंपनी का कहना है कि इनमें बेहतर टेक्नोलॉजी, ईंधन की बचत और मजबूती पर फोकस किया गया है। साथ ही, इनका डिजाइन कॉम्पैक्ट रखा गया है, ताकि खेती से जुड़े अलग-अलग कामों में इनका इस्तेमाल आसान हो।

देश में विकसित की गई EGR टेक्नोलॉजी

इन इंजनों में भारत में विकसित EGR सिस्टम लगाया गया है। यह उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है। साथ ही, इंजन के सुचारू संचालन पर भी फोकस किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी नए TREM V उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करती है।

TREM V टेक्नोलॉजी के लिए पेटेंट फाइलिंग

Fieldmarshal ने अपनी TREM V इंजन टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई राष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग भी की हैं। कंपनी के मुताबिक, इससे देश में ही R&D, इंजीनियरिंग और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर उसका फोकस दिखता है।

कंपनी अब एडवांस्ड इंजन, ट्रैक्टर और खेती के मशीनीकरण से जुड़े समाधान विकसित करने पर आगे बढ़ रही है। इसके अलावा कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, जल समाधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना है।

कंपनी ने क्या कहा?

Fieldmarshal P.M. Diesels के डायरेक्टर ऋषि पटेल ने कहा कि TREM V इंजन प्लेटफॉर्म कंपनी की इंजीनियरिंग यात्रा में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि छह दशकों से ज्यादा समय से कंपनी का फोकस ऐसे प्रोडक्ट बनाने पर रहा है, जो वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों में भरोसेमंद प्रदर्शन दे सकें।

उन्होंने कहा कि ARAI से मंजूर TREM V-कम्प्लायंट 15 HP और 18 HP सिंगल-सिलेंडर इंजन का लॉन्च और इससे जुड़ी पेटेंट फाइलिंग भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं को दिखाती है।

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS और इंफोसिस समेत कई टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इन कंपनियों को एक इमिग्रेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने वर्कर वीजा सिस्टम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को वॉशिंगटन में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से अमेरिका में किसी कंपनी ने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा गलत इस्तेमाल नहीं किया है।

Infosys, Wipro और HCL भी कार्रवाई के दायरे में

अमेरिकी श्रम सचिव Keith Sonderling ने बताया कि Microsoft के अलावा कई दूसरी टेक कंपनियों पर भी कार्रवाई हुई है। इनमें Cognizant Technology Solutions, Infosys, TCS, Wipro, HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं।

Sonderling ने कहा कि इस मामले में कई संघीय जांच चल रही हैं। जिस प्रोग्राम पर कार्रवाई हुई है, वह अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने में मदद करता है।

ट्रंप प्रशासन क्यों सख्त हुआ?

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इमिग्रेशन सिस्टम पर सख्ती की बात करता रहा है। अब कानूनी और गैर-कानूनी दोनों रास्तों से होने वाले प्रवासन पर कार्रवाई बढ़ाई जा रही है।

H-1B वीजा प्रोग्राम भी लंबे समय से ट्रंप के समर्थकों के निशाने पर है। उनका कहना है कि इस प्रोग्राम से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।

ट्रंप समर्थक यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि H-1B सिस्टम में बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल होता है। इसी वजह से यह प्रोग्राम अमेरिकी इमिग्रेशन पॉलिसी की बहस में लगातार बना हुआ है।

कंपनियों के लिए क्या मतलब है?

इस फैसले से सबसे बड़ी चिंता विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में लंबे समय तक रखने की प्रक्रिया को लेकर है। ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरिंग पर असर पड़ने से कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों की लॉन्ग टर्म प्लानिंग मुश्किल हो सकती है।

इसका असर खासकर उन भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका अमेरिकी कारोबार बड़ा है और जो बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को अमेरिका में भेजती हैं। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक वित्तीय असर कितना होगा, यह आगे होने वाली संघीय जांच और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

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शेयर बाजारों में तेजी जारी, ट्रेंट का शेयर 13 फीसदी उछाल

घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गयी और इस दौरान टाटा समूह की फैशन और लाइफस्टाइल रिटेल कंपनी ट्रेंट का शेयर 13 प्रतिशत के करीब उछल गया।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सुबह 126 अंक ऊपर 72,508 अंक पर खुला। इसके बाद इसका ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा। बंद होने से पहले एक हजार अंक तक उछलने के बाद अंत में यह 685.34 अंक (0.95 प्रतिशत) चढ़कर 73,067.81 अंक पर बंद हुआ।

ट्रेंट ने सोमवार को शेयर बाजारों को दिये गये अपडेट में बताया था कि गत 30 सितंबर को समाप्त दूसरी तिमाही में उसका राजस्व 23 प्रतिशत बढ़कर 5,788 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इससे आज उसका शेयर 12.78 प्रतिशत चढ़कर 2,904 रुपये पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,776.10 अंक पर पहुंच गया। सोमवार को भी दोनों सूचकांक हरे निशान में रहे थे।

वृहत बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.23 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.08 प्रतिशत मजबूत हुआ।

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सेक्टर आधारित समूहों में रसायन फार्मा, तेल एवं गैस, स्वास्थ्य, एफएमसीजी और वित्तीय कंपनियों के समूहों के सूचकांक एक से दो प्रतिशत तक चढ़ गए। आईटी और रियल्टी सेक्टरों में गिरावट रही।

एनएसई में जिन 3,695 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 2,453 के शेयरों में तेजी और 1,125 में गिरावट रही। अन्य 117 कंपनियों के शेयर अंततः अपरिवर्तित बंद हुए।

सेंसेक्स की कंपनियों में ट्रेंट की 12.78 प्रतिशत की तेजी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 3.59 प्रतिशत की बढ़त में रहा। हिंदुस्तान यूनीलिवर का शेयर 2.83 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 2.77, इंडिगो का 2.23, इटरनल का 2.08, एशियन पेंट्स का 2.03 और एक्सिस बैंक का 2.01 प्रतिशत चढ़ गया।

भारती एयरटेल में 1.49 प्रतिशत और सन फार्मा में 1.07 प्रतिशत की तेजी रही। एलएंडटी, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स और टाटा स्टील के शेयर भी हरे निशान में रहे।

टेक महिंद्रा का शेयर 2.30 प्रतिशत टूट गया। टाइटन में 1.30 फीसदी और बजाज फाइनेंस में 0.95 फीसदी की गिरावट रही। आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टीसीएस के शेयर भी नीचे बंद हुए।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 1.05 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग एक प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 0.56 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 0.25 प्रतिशत ऊपर रहा।

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चार दिन की गिरावट से उबरा शेयर बाजार

विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में चार दिन के बाद तेजी लौट आई और प्रमुख सूचकांक 0.6 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 472.77 अंक (0.66 प्रतिशत) ऊपर 72,382.47 अंक पर बंद हुआ। यह सुबह 431 अंक चढ़कर 72,340.95 अंक पर खुला था और कुछ ही देर में 722 अंक की बढ़त में पहुंच गया। हालांकि दोपहर बाद तक यह 71,840.18 अंक तक लुढ़क भी गया। इस प्रकार सूचकांक में 791 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त में 22,555.75 अंक पर बंद हुआ। लगातार चार दिन की गिरावट के बाद बाजार में तेजी लौटी है।

एफएमसीजी और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों में अधिक लिवाली देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी 1.80 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूह के सूचकांक में 1.53 फीसदी और मीडिया समूह में 0.92 फीसदी की तेजी रही। बैंकिंग, वित्त, रियल्टी और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांक भी ऊपर रहे। स्वास्थ्य और फार्मा समूहों से सूचकांक टूट गए।

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से घरेलू बाजार में निवेश धारणा मजबूत हुई। वृहत बाजार में भी बिकवाली की जोर रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.42 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.47 प्रतिशत की बढ़त में रहा।

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एनएसई में जिन 3,706 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 1,844 के शेयर लाल निशान में और 1,745 के हरे निशान में रहे। अन्य 117 कंपनियों के शेयर अपरिवर्तित रहे।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 में तेजी रही। आईटीसी का शेयर 4.49 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इटरनल के शेयर में 2.50 फीसदी, भारती एयरटेल में 2.38, बजाज फाइनेंस में 2.28, अडानी पोर्ट्स में 2.13 और आईसीआईसीआई बैंक में 2.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.72 फीसदी, एलएंडटी का 1.48, एनटीपीसी का 1.45, टाइटन का 1.43, टीसीएस का 1.40, मारुति सुजुकी का 1.07 और पावरग्रिड का शेयर 0.92 प्रतिशत चढ़ा। बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी हरे निशान में रहे।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 3.69 प्रतिशत की गिरावट रही। एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.99 प्रतिशत, सन फार्मा का 1.55, इंफोसिस का 1.50 और एशियन पेंट्स का 1.43 प्रतिशत टूट गया। ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयर भी लाल निशान में रहे।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 2.40 प्रतिशत, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 0.28 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में ब्रिटेन का एफटीएसई 0.52 फीसदी और जर्मनी का डैक्स 0.25 फीसदी ऊपर था।

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GIFT Nifty दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत, क्या HDFC बैंक और IT आज संभालेंगे बाजार की कमान

Gift Nifty Indicator: 5 अक्टूबर को भारतीय बाजार में गैप-अप ओपनिंग की संभावना है, क्योंकि GIFT Nifty 140 अंक ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसे US में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (monetary tightening) को लेकर कम होती चिंताओं और तेल की कीमतों में गिरावट से सहारा मिल रहा है।

5 अक्टूबर को सुबह 7:47 बजे, GIFT Nifty 143 अंक ऊपर 22,633.5 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले हफ्ते Nifty 50 और Sensex दोनों में लगातार आठवीं बार साप्ताहिक गिरावट देखी गई। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज़ बढ़ोतरी जैसे कारण थे, जिन्होंने रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया।

संभावित गैप-अप ओपनिंग के पीछे ये चार मुख्य कारण हैं

1) कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के बढ़ते एक्सपोर्ट और G7 देशों द्वारा तेल स्टॉक जारी करने से सप्लाई बढ़ रही है, जबकि ईरान युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और नुकसान की चिंताएं बनी हुई हैं।

0115 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 35 सेंट या 0.34% गिरकर $101.90 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $90.49 प्रति बैरल पर था, जिसमें 62 सेंट या 0.68% की गिरावट आई।

पिछले हफ्ते ब्रेंट ने अपनी ज़्यादातर बढ़त गंवा दी थी, जबकि WTI 1.6% नीचे था। यह गिरावट तब आई जब शुक्रवार को G7 देशों ने इमरजेंसी रिज़र्व से 100 मिलियन बैरल डीज़ल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई और US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद एनर्जी एक्सपोर्ट पर पाबंदियां न लगाने का वादा किया।

2) Accenture के Q4 नतीजे

1 अक्टूबर को Accenture के शेयरों में 22% की ज़बरदस्त उछाल आई, जो उनके लिए अब तक का सबसे अच्छा दिन साबित हुआ। कंपनी ने उम्मीद से बेहतर सालाना रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान जताया, जिससे IT कंसल्टिंग बिज़नेस की मज़बूती का पता चला। इस बिज़नेस पर AI-आधारित बदलावों (disruption) की चिंताओं का असर पड़ा था।

इस आउटलुक से पता चला कि ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनियाँ उन कंपनियों की मज़बूत मांग का फायदा उठा रही हैं जो जटिल कामों को ऑटोमेट करने और AI को अपनाने में मदद के लिए बाहरी टेक्नोलॉजी पार्टनर की तलाश कर रही हैं। इससे इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी तेज़ी आई। कॉग्निजेंट के शेयरों में लगभग 8% और IBM में लगभग 3% की बढ़त हुई। भारतीय प्रतिद्वंद्वियों विप्रो और इंफोसिस के ADRs में भी 6% से 7% के बीच बढ़त देखी गई।

3) ग्लोबल स्तर पर सकारात्मक संकेत

सोमवार को एशिया में शेयरों की शुरुआत मजबूत रही, जबकि डॉलर में थोड़ी गिरावट आई और बॉन्ड की कीमतें स्थिर रहीं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उम्मीद से कमजोर अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक पॉलिसी टाइटनिंग साइकिल (ब्याज दरें बढ़ाने की प्रक्रिया) पर अपनी उम्मीदें कम कर दीं।

चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में छुट्टियों के कारण एशिया में ट्रेडिंग कम रही, जिससे बाजारों को शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट की चालों से संकेत लेने पड़े।

पिछले हफ्ते के डेटा से पता चला कि सितंबर में अमेरिका में जॉब ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा धीमी रही और पिछले दो महीनों के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों में भारी कटौती की गई, जिससे इस महीने फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगभग खत्म हो गई।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, निवेशक अब इस महीने फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना केवल 22% मान रहे हैं, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 64% थी।

इस महीने फेड द्वारा दरें न बढ़ाने (पॉज़) की बढ़ती संभावना से जापान के निक्केई में सत्र की शुरुआत में 2% की बढ़त हुई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शेयरों में 0.5% की बढ़ोतरी हुई और जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.15% की बढ़त दर्ज की गई।

4) HDFC बैंक को नया CEO मिला

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने अनूप बागची को तीन साल के लिए अपना अगला चीफ एग्जीक्यूटिव (CEO) नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब कोई बाहरी व्यक्ति इस संस्थान का नेतृत्व करेगा।

55 वर्षीय बागची, शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे। जगदीशन ने अगस्त में फैसला किया था कि 26 अक्टूबर को उनका दूसरा तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे, जिससे उत्तराधिकार की एक अनियोजित और तेज प्रक्रिया शुरू हो गई।

वे ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और धीमी परफॉर्मेंस से जूझ रहा है।

नए CEO की घोषणा के बाद HDFC बैंक के ADR शेयरों में लगभग 5% की बढ़त हुई।

टेक्निकल आउटलुक

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के फाउंडर गौरव उदाणी ने कहा “निफ्टी के लगभग 115 अंक ऊपर, यानी 22,535 के आसपास खुलने की उम्मीद है, जो एक मजबूत गैप-अप शुरुआत का संकेत है। हाल की कमजोरी और इंडेक्स के अहम 22,500 ज़ोन के आसपास बंद होने के बाद, यह रिकवरी उत्साहजनक है, लेकिन बढ़त को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

“तत्काल सपोर्ट 22,450–22,500 के आसपास है, जबकि 22,750–22,850 पहला रेजिस्टेंस ज़ोन होगा। अगर निफ्टी 22,850 के ऊपर बना रहता है, तो रिकवरी 23,000 की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, मैं शुरुआती चाल के पीछे भागने से बचूंगा और इसके बजाय गिरावट पर खरीदारी के मौके तलाशूंगा, बशर्ते इंडेक्स अहम सपोर्ट ज़ोन को बनाए रखे। व्यापक ट्रेंड सतर्कता वाला बना हुआ है, और निकट अवधि के सेटअप में सार्थक सुधार के लिए 23,050 के ऊपर लगातार बने रहना जरूरी होगा। तब तक, उतार-चढ़ाव और इंट्राडे में अचानक बड़े बदलावों से इनकार नहीं किया जा सकता है।”

 

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Market View : 500-700 अंक और गिर सकता है निफ्टी, सोमवार को इन दो शेयरों पर रहे नजर

Market View : शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कल गुरुवार को निचले स्तरों से रिकवरी तो की,लेकिन दबाव कम नहीं हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी निचले स्तरों से सुधरकर बंद हुए,मगर सेंसेक्स 31 महीने के निचले स्तर पर क्लोज हुआ। कल इसमें 14 फरवरी 2024 के बाद की सबसे निचली क्लोजिंग देखने को मिली। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट का दबाव रहा। IT को छोड़ सभी सेक्टर इंडेक्स में दबाव में रहे। ऑटो,मेटल और FMCG शेयरों में दबाव देखने को मिला। FIIs की बिकवाली जारी रही। इन्होंने 10,041.84 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, DIIs की तरफ से बाजार को सपोर्ट जारी रहा। इन्होंने 9484.22 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

बाजार अगले हफ्ते

अब सवाल ये है कि जब लॉन्ग वीकेंड के बाद अगले हफ्ते बाजार खुलेगा तो किस तरह का एक्शन देखने को मिल सकता है? क्या ट्रेंड है जो आप ध्यान में रख सकते हैं? इसका जवाब देते हुए त्रिशक्ति एसोसिएट्स (Trishakti associates)के पवन माहेश्वरी ने कहा कि मार्केट ने इस पूरे वीक में एक अच्छी लाल कैंडल बनाई है। इसके अलावा 8 हफ्ते से बैंक टू बैक रेड कैंडल्स ही बन रही हैं। लेकिन कल जो मार्केट में हुआ वह एक ध्यान में रखने वाली बात है। 2:30 बजे के आसपास में बाजार ने 22200 पर सपोर्ट लिया जो मल्टीपल टाइम टेस्ट हो चुका है। वहां से एक सपोर्ट लेकर निफ्टी 22400 के आसपास टिका रहा। तो ऐसा लगता है कि 22200-22180 के आसपास निफ्टी की लोअर रेंज रह सकती है जिसको स्टॉप लॉस रखते हुए बाजार में लॉन्ग के ट्रेड्स लिए जा सकते हैं और इंडेक्स में खरीदारी की जा सकता है। अगर सोमवार को निफ्टी इन लेवल्स को बचाए नहीं रख पाता तो फिर बाजार और टूट सकता है। इसके चलते निफ्टी में 500-700 अंक तक की और गिरावट दिखाई दे सकती है।

पवन माहेश्वरी की टॉप पिक्स

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए पवन माहेश्वरी ने कहा कि कल के क्लोजिंग सेशन में बैंक और आईटी सेक्टर ने जिस तरह का मूवमेंट दिया है उसको देखते हुए इन सेक्टरों पर फोकस रहना चाहिए। Infosys ने कल गुरुवार को काफी स्ट्रांग कैंडल बनाई है जिसमें वॉल्यूम्स भी अच्छे रहे हैं। इसको देखते हुए इंफोसिस में खरीदारी की सलाह है। Infosys में ₹980 के स्टॉप लॉस के साथ, ₹1250 तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

दूसरा अगर आप देखें तो कल के मार्केट में लास्ट के एक घंटे के अंदर IDBI बैंक ने भी काफी अच्छा मूव दिया है। पिछले तीन-चार महीने से यह शेयर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ही बढ़ता रहा है। इस शेयर में भी ₹80 के स्टॉप लॉस के साथ, ₹105 तक के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 1 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,450 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 570.59 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक या 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ। लगभग 1306 शेयरों में बढ़त हुई, 2916 शेयरों में गिरावट आई और 191 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, M&M, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स शामिल रहे, जबकि बढ़त वाले शेयरों में HDFC लाइफ, SBI लाइफ इंश्योरेंस, HDFC बैंक, इंफोसिस और TCS शामिल रहे।

सेक्टरल इंडेक्स में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स में 2 प्रतिशत और टेलीकॉम इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर, ऑटो, मीडिया, FMCG, इंफ्रा, मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल और रियल्टी इंडेक्स 2-3 प्रतिशत गिरे, जबकि एनर्जी, फार्मा, PSU बैंक और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर ने कहा कि बाजार में बिकवाली की मुख्य वजह बाहरी कारक रहे हैं। बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे 2026-27 के इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

घरेलू स्तर पर भी,निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों और अगले हफ्ते आने वाली RBI की पॉलिसी को लेकर सतर्क हैं। Q2 की कमाई Q1 के मुकाबले कम रहने की उम्मीद है। Q1 में ऑपरेटिंग कॉस्ट घटने का फायदा मिला था,जो इस बार शायद न मिले। वहीं,RBI जिसने पिछली पॉलिसी में ज्यादा खुला रुख अपनाया था,अब ग्लोबल महंगाई के दबाव और रुपये (INR) को सहारा देने की जरूरत को देखते हुए अपने रुख में बदलाव पर विचार कर सकता है। इसके बावजूद,यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी हुई है और इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है।

लंबे समय के निवेशक निवेश बनाए रख सकते हैं और बाजार में करेक्शन का फायदा उठाकर धीरे-धीरे और निवेश कर सकते हैं। वहीं,कम समय के निवेशक इंतज़ार करो और देखो की रणनीति अपना सकते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के मज़बूत कदमों से ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में स्थिरता न आ जाए तब तक हमें वेट एंड वॉच मोड में रहना चाहिए।

मार्केट पर टेक्निकल व्यू

कोटक सिक्योरिटीज में हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि छोटे ट्रेडिंग वीक में बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट आई। निफ्टी 3.10 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में लगभग 2000 अंकों की गिरावट आई। सेक्टरों की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट-बुकिंग देखी गई। कंज्यूमर और ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। कंज्यूमर इंडेक्स 6.15 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स 5.85 प्रतिशत गिरा।

इस पूरे हफ्ते बाजार को ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली का दबाव झेलना पड़ा। वीकली चार्ट पर एक लंबी मंदी वाली कैंडल बनी। इंट्राडे चार्ट पर निफ्टी लगातार’लोअर हाई’और ‘लोअर लो’बनाता रहा जो काफी हद तक निगेटिव ट्रेंड का संकेत है।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि बाजार का शॉर्ट टर्म स्ट्रक्चर कमजोर है। लेकिन यह ‘ओवरसोल्ड’पोजीशन में है। इसलिए,मौजूदा स्तरों से’पुलबैक रैली’की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नीचे की ओर निफ्टी के लिए 22,200 अहम सपोर्ट जोन है। जबकि 22,500 एक तत्काल रेजिस्टेंस लेवल है। 22,500 के ऊपर जाने पर पुलबैक 22,700–22,800 तक बढ़ सकता है। इसके विपरीत,22,200 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी 22,000–21,950 तक गिर सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,54,000 एक अहम सपोर्ट जोन है। अगर यह इस स्तर के ऊपर बना रहता है,तो इंडेक्स 55,000–55,500 तक वापस उछल सकता है। हालांकि,54000 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और 53,500–53,200 तक गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि निफ्टी 22,544 के लेवल के पास हल्की गिरावट (गैप-डाउन) के साथ खुला और हाल के सेशन में दिखी कमजोरी के कारण दबाव में बना रहा। इंडेक्स अभी 22,500–22,550 के अहम सपोर्ट जोन को टेस्ट कर रहा है, इसलिए शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर के लिए इस जोन का टिके रहना जरूरी है। अगर यह लगातार 22,500 के नीचे बना रहता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,300 के लेवल तक जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऊपर की तरफ 22,700–22,800 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस एरिया का काम कर सकता है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर रिकवर करता है तो इससे कुछ स्टेबिलिटी मिल सकती है और 23,000 की तरफ बढ़ने में मदद मिल सकती है। 23,000 स्ट्राइक पर सबसे ज़्यादा कॉल OI भी है,जिससे डेरिवेटिव्स के नजरिए से यह लेवल एक बड़ा रेजिस्टेंस बन जाता। मोमेंटम इंडिकेटर कमजोर बने हुए हैं। RSI 20s के बीच में है और पूरी तरह से ओवरसोल्ड जोन में है,जो लगातार गिरावट का मोमेंटम दिखाता है। हालांकि,बहुत ज्यादा ओवरसोल्ड हालात की वजह से बीच-बीच में रिकवरी की कोशिशें हो सकती हैं। लेकिन निकट भविष्य के लिए टेक्निकल आउटलुक बेयरिश बना हुआ है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Promoter Selling Stock: 6 महीने में 150% चढ़ा EMS कंपनी का स्टॉक, अब प्रमोटर्स बेच सकते हैं 6% हिस्सेदारी

Promoter Selling Stock: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS कंपनी Avalon Technologies में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। प्रमोटर ग्रुप के Bhaskar Srinivasan, BBS Family Trust और KBS Family Trust कंपनी में 6% तक हिस्सेदारी बेच सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस डील की वैल्यू करीब ₹861.9 करोड़ हो सकती है।

₹2,150 से ₹2,302 हो सकता है भाव

डील के लिए ₹2,150 से ₹2,302 प्रति शेयर का प्राइस बैंड बताया गया है। यह कंपनी के मौजूदा बाजार भाव से अधिकतम करीब 6.6% डिस्काउंट पर हो सकता है। डील में विक्रेताओं के लिए 180 दिन का लॉक-अप पीरियड भी रहेगा। यानी इस दौरान वे आगे शेयर नहीं बेच सकेंगे।

Nomura ने बढ़ाया टारगेट

इसी महीने ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Avalon Technologies पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,211.24 से बढ़ाकर ₹2,767.32 कर दिया है।

यह शुक्रवार के ₹2,196.60 के क्लोजिंग भाव से करीब 26% ज्यादा है। ये टारगेट शेयर को कवर करने वाले सभी ब्रोकरेज में सबसे ज्यादा है।

Zollner के साथ जॉइंट वेंचर

Nomura के मुताबिक Avalon का यूरोप की Zollner के साथ प्रस्तावितजॉइंट वेंचर कंपनी के लिए अहम हो सकता है। इससे यूरोप में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज के कारोबार में कंपनी की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही नए ग्लोबल ग्राहक जुड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज के मुताबिक इस साझेदारी से Avalon को यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा। कंपनी हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज और टेस्ट एंड मेजरमेंट जैसे सेगमेंट में भी प्रवेश कर सकती है।

एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई

Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक Avalon Technologies को कवर करने वाले 19 एनालिस्ट्स में 9 ने Buy रेटिंग दी है। वहीं 4 एनालिस्ट्स ने Hold और 6 ने Sell रेटिंग दी है।

यानी शेयर को लेकर ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। कुछ एनालिस्ट्स कंपनी के विस्तार और जॉइंट वेंचर को लेकर पॉजिटिव हैं, जबकि कुछ शेयर पर अलग नजरिया रखते हैं।

Avalon के शेयरों का हाल

Avalon Technologies का शेयर मंगलवार को BSE पर 1.37% की तेजी के साथ ₹2,340 पर बंद हुआ। पिछले महीने में स्टॉक ने करीब 150% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। वहीं बीते 5 साल में यह 479% बढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 15.66 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।