क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? सरकार ने गिनाई 5 वजहें और त्योहारों से पहले लिया यह बड़ा फैसला

Sugar Price Rise: देश में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले चीनी की कीमतें रॉकेट हुई जा रही हैं। 20 जुलाई को चीनी का भाव 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम था जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। चीनी की कीमतों को लेकर पैनिक की स्थिति न आए, इसके लिए अब सरकार ने इसे लेकर डिटेल में जानकारी जारी की है। इसमें चीनी की बढ़ती कीमतों की असल वजहें और इसे कंट्रोल करने के उपायों के बारे में बताया गया है। आपको बता दें कि सरकार ने एक दशक के बाद पहली बार चीनी के आयात का भी फैसला लिया है, जिसे इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी रिलीज के मुताबिक सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों को उचिद दर पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या एथेनॉल की वजह से बढ़ीं कीमतें? सरकार ने खारिज किया दावा

सरकार ने उन दावों को पूरी तरह से गलत बताया है जिनमें चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को माना जा रहा था। सरकार का दावा है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गया है। देश में बनाए जा रहे एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाजों, खासकर मक्के से तैयार किया जा रहा है।

फिर चीनी महंगी होने की असली वजह क्या है?

सरकार के मुताबिक चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी किसी एक वजह से नहीं हो रही है। इसके पीछे कई वजहें एक साथ जिम्मेदार हैं। सरकार ने बताया है कि शुरुआती अनुमानों की तुलना में घरेलू उत्पादन कम रहा है। त्योहारों का सीजन नजदीक आने से बाजार में मांग बढ़ी है। इसके अलावा मौसम की मार की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। चौथी वजह इंटरनेशनल बाजार में चीनी सप्लाई में कमी को बताया गया है। पांचवीं वजह में सरकार ने माना है कि कुछ तबकों द्वारा चीनी की जमाखोरी भी की गई है।

शुरुआती अनुमानों से कम रहा चीनी का उत्पादन

चालू पेराई सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा शुरुआत में इसके 343 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया गया था। उत्पादन में इस गिरावट की मुख्य वजह गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों का लगना और भारी बारिश से हुए जलजमाव को बताया जा रहा है। हालांकि उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

दुनिया भर में बढ़ रहे हैं चीनी के दाम

चीनी की किल्लत सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि फिलहाल यह एक वैश्विक समस्या है। वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक चीनी घाटा लगभग 33 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। मौसम की विपरीत परिस्थितियों ने इसे ग्लोबली प्रभावित किया है। इंटरनेशनल बाजार में चीनी की कीमतें 30 जून को $474 प्रति टन थीं, जो 20 अगस्त 2026 तक 16% से अधिक बढ़कर $552 प्रति टन पर पहुंच गईं।

एथेनॉल प्रोग्राम से किसानों और मिलों को हुआ फायदा

भारत में आमतौर पर सालाना 320-340 लाख मीट्रिक टम चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत 280-290 लाख मीट्रिक के आसपास रहती है। सरप्लस उत्पादन वाले वर्षों में अतिरिक्त स्टॉक के कारण चीनी मिलों के फंड फंस जाते थे जिससे किसानों के गन्ने के भुगतान में देरी होती थी। ऐसे में एक्स्ट्रा चीनी को एथेनॉल में बदलने की पॉलिसी फायदा मिला है। इससे मिलों की फाइनेंशियल स्थिति में भी सुधार आया है। 20 अगस्त तक, 2025-26 चीनी सीजन के गन्ने के 97% बकाए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।

इसकी वजह से मिलों की सरकारी मदद पर निर्भरता भी घटी है। 2014 से 2021 के बीच चीनी उद्योग को लगभग ₹14600 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी जबकि 2021-22 के बाद से ऐसी किसी सब्सिडी की घोषणा नहीं की गई है। साथ ही, लंबी अवधि में उपभोक्ताओं के लिए कीमतें स्थिर रही हैं और अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच इनमें सालाना सिर्फ 3% की ही वृद्धि हुई है।

जमाखोरी पर नकेल और त्योहारों से पहले सरकार के 5 बड़े फैसले

बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी पर रोक लगाने तथा आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। देशभर में चीनी व्यापारियों/डीलेरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। 1 सितंबर से बल्क कंज्यूमर्स को अपनी 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। जमाखोरी और आर्टिफिशियल किल्लत को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें मिलों में चीनी के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही हैं। एहतियाती तौर पर घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला लिया है।

इसके अलावा राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इससे त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी।

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El Nino impact: भारत में अल नीनो और कमजोर मानसून का दोहरा वार! क्या बढ़ेंगे दाल, चावल और सब्जियों के दाम?

El Nino Impact on India: प्रशांत महासागर में मजबूत होता अल नीनो का प्रभाव भारत की फूड इकॉनमी के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जलवायु की यह स्थिति खेती की पैदावार पर असर डाल सकती है जिससे फूड सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा। ऐसा हुआ तो खाने-पीने के सामान पर महंगाई का असर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि भारत सरकार ने इस वित्त वर्ष में खरीफ की फसल को कम नुकसान का अनुमान दिया है पर भारत के विकास आउटलुक में पहले से ही महंगाई के जोखिम ने अपनी जगह बना रखी है।

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) पहले ही चेतावनी जारी कर चुका है कि वित्त वर्ष 2026-27 में फूड और फ्यूल इंफ्लेशन भारत के आथिर्क विकास पर असर डाल सकते हैं। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 फीसदी से कम है। Ind-Ra के मुताबिक FY27 में रिटेल इंफ्लेशन औसतन 4.9 प्रतिशत रह सकता है। पिछले वित्त वर्ष में यह सिर्फ 2 फीसदी था। अल नीनो की वजह से फूड इंफ्लेशन बढ़ने के जोखिम को आर्थिक विकास में रुकावट डालने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना गया है।

कृषि क्षेत्र की मौजूदा तस्वीर और खरीफ की स्थिति

वैसे अल नीनो के खतरे के बावजूद मौजूदा खेती की तस्वीर बहुत अधिक चिंताजनक नजर नहीं आ रहा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 18 अगस्त को स्पष्ट किया था कि इस साल के खरीफ उत्पादन पर अल नीनो का कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों को छोड़कर अल नीनो का बड़ा असर नहीं दिख रहा है और स्थिति कुल मिलाकर अच्छी बनी हुई है। अधिकांश हिस्सों में फसलों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बारिश हुई है।

देश के कृषि क्षेत्र ने कुछ इलाकों में कम बारिश के बावजूद व्यापक नुकसान से बचाव किया है। 14 अगस्त तक 1016.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी, जो इस अवधि तक सामान्य रूप से कवर होने वाले औसत क्षेत्र का 92 प्रतिशत है। यह रकबा पिछले साल के स्तर से सिर्फ 2 फीसदी ही कम है। कृषि मंत्री के मुताबिक बुआई का अंतर काफी कम हुआ है और संवेदनशील माने जाने वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर लगभग 100 रह गई है।

हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति असमान बनी हुई है। कर्नाटक और तेलंगाना में जल संकट का सामना करना पड़ा है जबकि पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बारिश की कमी अधिक देखी गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 12 अगस्त तक कुल मानसूनी घाटा 12 प्रतिशत था। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में 26 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीप में 19 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। आपको बता दें कि अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता। इसमें कुछ हिस्से सूखे रह जाते हैं जबकि अन्य हिस्सों में सामान्य या अधिक बारिश होती है।

खाद्य कीमतों और अर्थव्यवस्था पर अल नीनो का प्रभाव

अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के गर्म होने से होने वाला एक मौसमी बदलाव है। ये वैश्विक स्तर पर वायुमंडलीय परिसंचरण, बारिश और तापमान को बदल देता है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा असर मानसून और कृषि पर देखा जाता है। कमजोर या असमान मानसून उन फसलों की उपज को घटा सकता है जो सिंचाई के बिना पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। उत्पादन में गिरावट से आपूर्ति कम होती है, जिससे थोक और खुदरा कीमतें बढ़ने लगती हैं।

फसल की यह कमी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहती बल्कि पूरी फूड सप्लाई चेन (प्रॉक्यूरमेंट, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग और रिटेल) पर भी असल डालती है। मुख्य फसलों की कम उपलब्धता से आयात की मांग बढ़ती है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ पड़ता है और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है। Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अल नीनो की वजह से पैदा हुई महंगाई कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत को मिलने वाले फायदे को भी खत्म कर सकती है।

जब अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां या अन्य फसलें कम पैदा होती हैं, तो बाजार में उनकी उपलब्धता घट जाती है। मांग समान रहने पर कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके सीधे असर से खरीद लागत बढ़ जाती है। आखिरकार यह बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचती है जिससे घरेलू बजट बिगड़ता है। सरकार को भी कीमतें नियंत्रित करने के लिए अपने स्टॉक से अनाज छोड़ने, आयात बढ़ाने या निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाने पड़ते हैं। लगातार खाद्य मुद्रास्फीति बने रहने से भारतीय रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश भी कम हो जाती है।

दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ अल नीनो का खतरा

मौजूदा अल नीनो एक बड़े वैश्विक जलवायु संकट का रूप ले रहा है। क्लाइमेट ब्रिंक डैशबोर्ड के मुताबिक प्रशांत महासागर के नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान 30 साल के औसत से लगभग 2.6°C अधिक हो चुका है। पूर्वानुमानों के अनुसार नवंबर तक यह अंतर 3.9°C तक पहुंच सकता है। ऐसा हुआ तो ये 2015 के शक्तिशाली अल नीनो के करीब 3°C के रिकॉर्ड को भी पार कर जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) का अनुमान है कि 69 प्रतिशत संभावना है कि यह 1950 के बाद का सबसे मजबूत अल नीनो बन जाएगा। इस वजह से दुनिया के कुछ हिस्से अत्यधिक गर्म और सूखे हो रहे हैं जबकि अन्य इलाकों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ आ रही है। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में लंबे सूखे के कारण भीषण जंगलों की आग देखी गई है।

जलवायु वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह अल नीनो वर्ष 2027 में वैश्विक तापमान में करीब 0.3°C और बढ़ा सकता है। इस वजह से ग्लोबल टेंप्रेचर औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 1.76°C ऊपर पहुंच सकता है, जिससे 2027 अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है।

मैन मेड ग्लोबल वार्मिंग भी अल नीनो के असर को और घातक बना रही है। गर्म हवा अधिक नमी सोखती है जिससे अति-बारिश की तीव्रता बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ उच्च तापमान मिट्टी की नमी सुखाकर सूखे को और भीषण बना देता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड और कोरल डेटा बताते हैं कि पिछली एक सदी में अल नीनो की तीव्रता में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत के लिए तात्कालिक निष्कर्ष यही है कि भले ही कृषि क्षति अभी व्यापक न हुई हो, लेकिन मानसून के घाटे और अल नीनो के मजबूत होने से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर जोखिम लगातार मंडरा रहा है।

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कल का मौसम: 22 अगस्त को मूसलाधार बारिश की चेतावनी! IMD ने बताया दिल्ली-यूपी से लेकर MP-बिहार के मौसम का हाल

India Weather Update: देश भर में मानसून की हलचल ने अलग अलग इलाकों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का मौसम बना रखा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार 22 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक देश के अधिकांश राज्यों में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत देश के 15 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को मध्य प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम का कड़ा मिजाज देखने को मिलेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश के इलाकों में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पूरे मध्य प्रदेश में बारिश के साथ-साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। मौसम के रौद्र रूप को देखते हुए लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी गई है।

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दिल्ली, यूपी, बिहार और पंजाब-हरियाणा में झमाझम बारिश

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 22 अगस्त को झमाझम बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बादलों का जमावड़ा रहेगा और कई जगहों पर भारी बारिश देखने को मिल सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भी तेज बारिश की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत और तटीय राज्यों का हाल

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का खतरा

बारिश के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बवंडर जैसी हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बिजली कड़कने की आशंका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तटीय कर्नाटक, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई जगहों पर बहुत तेज हवाएं सतही चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, तूफानी हवाओं की चेतावनी

समुद्री क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। अरब सागर के अधिकांश पश्चिमी-मध्य हिस्से, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के दक्षिणी तट से सटे इलाकों में भी 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की कड़ी चेतावनी दी है।

Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में इन दिनों बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में इनकी संख्या काफी ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A या H1N1 के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि मॉनसून के दौरान ज्यादा नमी और रुक-रुक कर होने वाली बारिश, साथ ही भीड़-भाड़ वाली बंद जगहें और फ्लू का टीका लगवाने वालों की कम संख्या इस बढ़ोतरी की वजह हैं।

हालांकि, ज्यादातर मरीज घर पर आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम और घर के अंदर भीड़-भाड़ की वजह से बढ़ीं बीमारियां

दिल्ली के BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, पूरे इलाके में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए आउटपेशेंट (OPD) आने वालों और इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने कहा कि मामलों में रेस्पिरेटरी वायरस इन्फेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मौसम का बदलना, ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश से कम्युनिटी में पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणु) के जिंदा रहने और फैलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।”

सिंघल ने कहा कि H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी तीन वजहों से हो रही है: पहला, नमी वाला गर्म मौसम, जिससे इन्फेक्शन वाली बूंदें हवा में ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। दूसरा, ” लोगों का बंद और एयर कंडीशन वाले कमरों में ज्यादा समय बिताना जहां हवा का बहाव ठीक नहीं होता और वायरस तेजी से फैलता है। और तीसरा, “फ्लू का सालाना वैक्सीनेशन कम होना और साफ-सफाई की आदतों में लापरवाही बरतना, जिससे बहुत से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।”

दिल्ली में H1N1 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अर्जुन खन्ना ने हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण शुरू में हल्का लग सकता है, लेकिन कमजोर मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का खतरनाक स्तर तक गिरना और कभी-कभी फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने जैसी स्थिति में बदल सकता है।

खन्ना ने कहा, “बात साफ है: हर बार बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन इन्फ्लूएंजा को हल्के में भी न लें।” उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे बहुत से मरीज देख रहे हैं जिन्हें तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, खांसी, गले में खराश और बहुत ज्यादा थकान है। हमें चिंता है कि कुछ मरीजों की हालत उतनी तेजी से बिगड़ रही है, जितनी आम वायरल बुखार में उम्मीद नहीं की जाती।”

खन्ना ने बढ़ते मामलों के पीछे मानसून का मौसम, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में खराब वेंटिलेशन और फ्लू वायरस में लगातार होने वाले बदलाव को जिम्मेदार बताया। उनका मतलब है कि पिछले संक्रमण या वैक्सीन से मिली सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं रहती।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के HOD, डॉ. विकास मौर्य ने भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल H1N1 पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या में “भारी उछाल” आया है। उन्होंने बताया कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में से लगभग 70-80% H1N1 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं, और इसके बाद इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन और रेस्पिरेटरी वायरस का नंबर आता है।

मौर्य ने कहा, “मानसून के दौरान होने वाला हर बुखार H1N1 की वजह से नहीं होता। हम अन्य वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी देख रहे हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन जैसे H3N2 के साथ-साथ राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे इन्फेक्शन शामिल हैं। चिंता की एक और बात वे वायरस हैं जिनकी पहचान अभी उपलब्ध टेस्ट से नहीं हो पाती, लेकिन मरीज के लक्षणों से लगता है कि यह वायरल इन्फेक्शन है।”

लक्षण और खतरे के संकेत

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि H1N1 का असर आम सर्दी-जुकाम की तुलना में अचानक और ज्यादा गंभीर होता है। इसमें तेज बुखार और कंपकंपी, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

खन्ना ने कहा, “सिर्फ 102 या 103 डिग्री बुखार खतरनाक नहीं है। खतरे के संकेत तब होते हैं जब इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में बेचैनी, असामान्य रूप से बहुत ज्यादा नींद आना, उलझन या ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखें।”

उन्होंने कहा, “ऐसे में इसका इलाज घर पर नहीं किया जाना चाहिए।”

खन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई मरीज ठीक होता हुआ दिखे और फिर अचानक उसे दोबारा तेज बुखार आ जाए और खांसी बढ़ जाए, तो इसे निमोनिया या किसी दूसरी गंभीर समस्या का संभावित संकेत मानकर इलाज किया जाना चाहिए।

किन्हें और कब टेस्ट करवाना चाहिए?

डॉ. सिंघल के अनुसार, हल्के मामलों में फ्लू के लिए रूटीन टेस्टिंग की जरूरत नहीं होती, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए इसकी पुरजोर सलाह दी जाती है — जैसे 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी (जैसे कैंसर के इलाज या ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से) वाले लोग।

ऐसे लोगों के लिए भी टेस्टिंग की सलाह दी जाती है जिनकी हालत बिगड़ रही हो, जैसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऐसा बुखार जो ठीक न हो रहा हो।

खन्ना ने अस्पताल में भर्ती 29,000 से ज्यादा H1N1 मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी का भी जिक्र किया, जिसमें पाया गया कि एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू करने से मौतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बहुत ज्यादा बीमार और ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में टेस्ट के नतीजे आने से पहले ही एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।

सिंघल ने कहा कि ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के अंदर शुरू किया जाए।

मानसून के दौरान डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा, “हमारी OPD सेवाओं में हर दिन डेंगू या H1N1 के शक वाले 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इनमें से 2 से 3 मरीजों को गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी या ब्लड प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे गंभीर लक्षणों के कारण भर्ती करना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा कि बाकी मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है, जिसमें वे खुद अपनी सेहत पर नजर रखते हैं और ओरल रिहाइड्रेशन (मुंह से तरल पदार्थ लेना) का तरीका अपनाते हैं।

अग्रवाल ने कहा, “हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें, साफ-सफाई बनाए रखें और लगातार बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।”

डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां

डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से बचने के लिए सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, खासकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, और बिना बुखार की दवा लिए बुखार उतरने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर पर रहने की भी सलाह दी गई है।

उन्होंने खुद से एंटीबायोटिक्स लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी है, क्योंकि ये फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करतीं और भविष्य में होने वाले इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल बना सकती हैं। जब तक डॉक्टर खास तौर पर एंटीवायरल दवा न लिखें, तब तक पैरासिटामोल जैसी बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और खूब तरल पदार्थ (fluids) लेना पहला कदम होना चाहिए।

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Naneghat Reverse Waterfall: प्रकृति का अनोखा अजूबा! इस झरने में नीचे नहीं बल्कि आसमान की ओर जा रहा पानी! हैरान कर देगा वायरल Video

Naneghat Reverse Waterfall: महाराष्ट्र में मॉनसून के दौरान, पश्चिमी घाट धुंध से ढकी पहाड़ियों, हरियाली और मौसमी झरनों वाली जगह में बदल जाते हैं। इस इलाके के सबसे अनोखे नज़ारों में से एक है नानेघाट का “रिवर्स वॉटरफॉल” (उल्टा बहने वाला झरना), जहां पानी जमीन की तरफ गिरने के बजाय ऊपर की ओर जाता हुआ दिखता है। यह पुणे ज़िले के जुन्नार इलाके में, ठाणे ज़िले की सीमा के पास स्थित है।

यह नजारा ऐसा लग सकता है जैसे प्रकृति ने कुछ समय के लिए गुरुत्वाकर्षण (gravity) को बंद कर दिया हो। लेकिन इसमें भौतिकी के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं होता। यह अद्भुत नज़ारा गिरते हुए पानी और पहाड़ियों पर तेज़ी से चलने वाली हवाओं के मेल से बनता है।

नानेघाट का झरना ऊपर की ओर बहता हुआ क्यों दिखता है?

गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर गिरता है। लेकिन नानेघाट में, मॉनसून की तेज़ हवाएँ गिरते हुए पानी से इतनी ज़ोर से टकरा सकती हैं कि पानी की बूंदें वापस ऊपर की ओर धकेल दी जाती हैं और बिखर जाती हैं। पानी लगातार नीचे गिरने वाली धारा के रूप में बहने के बजाय, बारीक बूंदों में बंट जाता है। जब ऊपर की ओर बहने वाली हवा काफी तेज़ होती है, तो ये बूंदें वापस पहाड़ी की चोटी की ओर चली जाती हैं, जिससे ऐसा लगता है जैसे कोई झरना उलटी दिशा में बह रहा हो।

दूसरे शब्दों में, गुरुत्वाकर्षण अपना काम कर रहा है। पानी असल में ऊपर की ओर नहीं बह रहा है; हवा अलग-अलग बूंदों के नीचे गिरने की गति को रोककर उन्हें ऊपर की ओर ले जा रही है। इसलिए, इस घटना को गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने वाले झरने के बजाय, हवा की वजह से होने वाला उलटी दिशा में बहने का भ्रम कहना ज़्यादा सही होगा।

मानसून के दौरान ऐसा क्यों होता है?

मानसून बहुत अहम है क्योंकि नानेघाट में भारी बारिश होती है और पश्चिमी घाट से तेज़ हवाएँ गुज़रती हैं। जब बारिश और तेज़ हवाएँ एक साथ होती हैं, तो ‘रिवर्स-वॉटरफ़ॉल’ (उल्टी दिशा में बहने वाले झरने) का नजारा देखने के लिए हालात बिल्कुल सही हो जाते हैं।

इसलिए यह नजारा मौसम पर निर्भर करता है, स्थायी नहीं। आगंतुक एक क्षण में सामान्य रूप से गिरता हुआ पानी देख सकते हैं और हवा तेज होने पर ऊपर की ओर उठने वाली फुहार का शानदार दृश्य देख सकते हैं। महाराष्ट्र टूरिज़्म राज्य के मॉनसून के नज़ारों को धुंध भरी पहाड़ियों, हरियाली और मौसमी झरनों के मौसम के तौर पर बताता है, जिससे बारिश के महीनों में प्रकृति और एडवेंचर ट्रिप के लिए यह जगह बहुत आकर्षक बन जाती है।

नानेघाट सिर्फ़ मॉनसून का एक नज़ारा नहीं है

नानेघाट महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में एक प्राचीन पहाड़ी दर्रा है और लंबे समय से कोंकण क्षेत्र और दक्कन के पठार के बीच यात्रा के लिए इस्तेमाल होता रहा है। आज, यह ट्रेकर्स और मॉनसून में घूमने आने वालों के बीच भी लोकप्रिय है। बारिश के मौसम में, आस-पास की पहाड़ियां बहुत हरी-भरी और धुंध से ढकी हो जाती हैं, जबकि झरने और जलधाराएँ यहाँ के नज़ारों की खूबसूरती और बढ़ा देते हैं।

‘रिवर्स वॉटरफ़ॉल’ (उल्टा बहने वाला झरना) ने नानेघाट को सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय बना दिया है। पानी के ऊपर की ओर बहते हुए दिखने वाले वीडियो बार-बार वायरल होते रहे हैं। क्या रिवर्स वॉटरफ़ॉल सच में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के नियम को चुनौती दे रहा है? -नहीं।

“गुरुत्वाकर्षण को मात देना” (defying gravity) सुनने में तो बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह घटना गुरुत्वाकर्षण को खत्म नहीं करती। गुरुत्वाकर्षण पानी को नीचे की ओर खींचता रहता है, जबकि तेज़ हवा गिरती हुई पानी की बूंदों पर ऊपर की ओर बल लगाती है। इसे समझने का एक अच्छा तरीका है कि आप कल्पना करें कि बगीचे में इस्तेमाल होने वाले होज़ (पाइप) से तेज़ हवा में पानी की बौछार की जा रही है। पानी उस दिशा में जाने के बजाय, जिसमें उसे शुरू में छोड़ा गया था, हवा के कारण बगल में या पीछे की ओर उड़ सकता है। नानेघाट में, इसका पैमाना और प्राकृतिक माहौल उस जानी-पहचानी भौतिकी की घटना को असाधारण बना देता है।

इसे देखने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उल्टा बहने वाला झरना (रिवर्स वॉटरफॉल) मौसम पर निर्भर करने वाली घटना है, इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आने वाले लोगों को पानी ऊपर की ओर बहता हुआ दिखेगा ही। मॉनसून के दौरान, खासकर जब तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश होती है, तब इस नज़ारे को देखने का सबसे अच्छा मौका मिलता है।

एक ऐसा नज़ारा जिसे विज्ञान से सबसे अच्छी तरह समझाया जा सकता है

नानेघाट का उल्टा बहने वाला झरना इस बात की याद दिलाता है कि प्रकृति के कुछ सबसे शानदार नज़ारों के लिए किसी अलौकिक या जादुई स्पष्टीकरण की ज़रूरत नहीं होती। मॉनसून की बारिश, इलाके की बनावट और तेज़ हवाओं का मेल ही ऐसा नज़ारा बनाने के लिए काफ़ी है जो प्रकृति की सबसे जानी-पहचानी ताकतों में से एक को चुनौती देता हुआ लगता है।

कुछ पलों के लिए, गिरता हुआ पानी ऐसा लग सकता है जैसे वह आसमान की ओर चढ़ रहा हो। गुरुत्वाकर्षण गायब नहीं हुआ है, बस हवा इतनी तेज़ हो गई है कि पानी बिल्कुल अनोखे और अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार करने लगता है।

मुंबई और पुणे से नानेघाट कैसे पहुंचें?

नानेघाट तक मुंबई और पुणे दोनों जगहों से सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। यात्रा के आखिरी हिस्से में वैशाखरे गाँव के पास ट्रेकिंग बेस तक पहुँचना शामिल है। शुरुआती जगह और मॉनसून के दौरान सड़क की हालत के आधार पर रास्ता और यात्रा का समय अलग-अलग हो सकता है।

मुंबई

पर्यटक कल्याण और मुरबाड होते हुए वैशाखरे की ओर गाड़ी चलाकर जा सकते हैं, जहाँ से नानेघाट का रास्ता शुरू होता है। ट्रैफ़िक और मौसम के आधार पर, बेस तक सड़क से पहुंचने में आम तौर पर लगभग तीन घंटे लगते हैं। ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए कल्याण सबसे नज़दीकी बड़े रेलवे स्टेशनों में से एक है, जिसके बाद नानेघाट की ओर जाने के लिए बस या टैक्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पुणे

नानेघाट पहुंचने के लिए सड़क मार्ग आम तौर पर चाकन और जुन्नार से होकर गुज़रता है। शुरुआती जगह और रास्ते के आधार पर, इस सफ़र में लगभग तीन से चार घंटे लग सकते हैं।

Weather Update: एमपी में भारी बारिश का दौर जारी, दिल्ली-UP में भी बरसेंगे बादल, इन राज्यों में 27 अगस्त तक होगी मूसलाधार बारिश

India Weather Update: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने निम्न दबाव के क्षेत्र के असर से देश के कई हिस्सों में मानसून सुपर एक्टिव मोड में है और जबर्दस्त बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि पूर्वी मध्य प्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों में बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों में 27 अगस्त तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला बना रहेगा। बीते 24 घंटों के दौरान भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, मिजोरम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 12 से 20 सेमी तक भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।

मध्य भारत में बारिश का तांडव, मध्य प्रदेश में मूसलाधार का अलर्ट

मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से मध्य भारत में मानसूनी बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब भी सक्रिय है। इसकी वजह से 21 और 22 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 25 अगस्त के बीच, पूर्वी मध्य प्रदेश में 23 से 26 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 21 से 27 अगस्त तक कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इस दौरान इन राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका बनी हुई है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बदलेगा मौसम, दिल्ली-यूपी में बरसेंगे बादल

उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून ट्रफ के सामान्य स्थिति के आसपास रहने और उत्तरी हरियाणा में एक चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के चलते दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में मौसम में बड़ा बदलाव देखा जाएगा। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 अगस्त को भारी बारिश के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 22 से 24 अगस्त के बीच व्यापक स्तर पर बारिश होगी। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में 21 से 27 अगस्त तक लगातार मूसलाधार बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी 21 और 22 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत का हाल, उड़ीसा और बंगाल में अलर्ट

उत्तरी बंगाल की खाड़ी, बांग्लादेश और दक्षिण गांगेय पश्चिम बंगाल के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण की वजह से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 से 26 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। उड़ीसा में 24 से 27 अगस्त के बीच बेहद भारी बारिश हो सकती है। बिहार और झारखंड में भी 22 से 25 अगस्त के दौरान तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 अगस्त तक रुक-रुक कर भारी बारिश होने का अनुमान है।

दक्षिण भारत में कम होगी बारिश की रफ्तार, तटीय इलाकों में तेज हवाएं

एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसूनी बारिश की गतिविधियां स्लो रहने का पूर्वानुमान दिया है। केरल, माहे और तटीय कर्नाटक में 21 से 27 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। केरल और तमिलनाडु में 23 से 25 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और कर्नाटक के इलाकों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

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Elon Musk Starlink Update: क्या भारत के गांवों में पहुंचेगा एलन मस्क का सुपरफास्ट इंटरनेट? अरबपति कारोबारी ने नए लाइसेंस आवेदन के साथ किया बड़ा ऐलान

Elon Musk Starlink Update: स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी स्पेसएक्स के संस्थापक अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। एलन मस्क ने कहा है कि स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत के उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बूस्ट कर सकती है जहां इंटरनेट की पहुंच लिमिटेड है। मस्क यहां पर खासकर भारत के गांवों तक सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाने की बात करते नजर आ रहे हैं।

मस्क का ये कमेंट ऐसे समय में आया है जब तमाम रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सर्विस देने के लिए एक रीअप्लाई किया है।

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि स्टारलिंक भारत में सबसे कम सेवा पाने वाले लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मदद करेगा। असल में मस्क एक्स हैंडल DogeDesigner की एक पोस्ट पर अपना रिएक्शन दे रहे थे। इस पोस्ट में भारत के दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए स्टारलिंक की सर्विस की मदद लेने की वकालत की गई थी।

इस सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच भारी अंतर को दिखाया गया है। पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 तक भारत के 11256 गांवों में अब भी 4G नेटवर्क की कवरेज नहीं थी। इसी तरह मार्च 2026 तक भारत में कुल 1.093 अरब इंटरनेट सब्सक्रिप्शन थे लेकिन इनमें से सिर्फ 44.087 करोड़ सब्सक्रिप्शन ही ग्रामीण इलाकों के थे। ग्रामीण भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन डेंसिटी प्रति 100 लोगों पर सिर्फ 48.31 थी, जबकि शहरी भारत में यह आंकड़ा प्रति 100 लोगों पर 126.80 था।

नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन

मस्क का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब रिपोर्टों के अनुसार स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नया आवेदन जमा किया है। इससे पहले कंपनी को इस मामले में झटका भी लग चुका है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र ने इससे पहले स्टारलिंक के जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क के आवेदन को खारिज कर दिया था। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने पाया था कि इसके कुछ फीचर्स और जिन रेडियो फ्रीक्वेंसी का यह इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे भारत की जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं। आपको बता दें कि स्टारलिंक के इस जेन 2 सिस्टम में डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी की क्षमता भी होती है।

भारत में मंजूरी की कोशिशें जारी

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के ग्रुप्स की मदद से इंटरनेट सर्विस देती है। कंपनी भारत में अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए लंबे समय से जरूरी रेग्युलेटरी क्लियरेंस लेने के लिए कोशिश कर रही है।

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Stocks To Watch: रेलटेल, एचएएल से मणिपाल हेल्थ तक, 21 अगस्त को इन 13 शेयरों पर रहेगी मार्केट की नजर

Stocks to Watch 21 August: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 21 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, लीडरशिप बदलाव और ब्लॉक डील्स के चलते कई दिग्गज शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त के ट्रेडिंग सेशन के दौरान इन 13 प्रमुख शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी:

1- मणिपाल हेल्थ (Manipal Health Enterprises)

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिर साल-दर-साल आधार पर 7.7% घटकर 231 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 250 करोड़ रुपये था। वैसे कंपनी का रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3091 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA 25.6% बढ़कर 736.5 करोड़ रुपये रहा जबकि EBITDA मार्जिन घटकर 23.8% रह गई। ये पिछले साल 26.2 फीसदी थी।

2- सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy)

सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को एक घरेलू स्वतंत्र बिजली उत्पादक/EPC प्लेयर से सोलर पीवी मॉडल्स की सप्लाई के लिए 190 करोड़ रुपये का कॉमर्शियल ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

3- केआईएमएस (KIMS – Krishna Institute of Medical Sciences)

कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने हैदराबाद के गचीबोवली में 250 बिस्तरों वाले अरेते अस्पताल के विशेष संचालन और प्रबंधन (O&M) के लिए औरेविया हॉस्पिटल्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह शुरुआती समझौता 5 साल के लिए है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। केआईएमएस को अस्पताल के नेट रेवेन्यू का 9% शुल्क के रूप में मिलेगा।

4- रेलटेल (RailTel Corporation of India)

नवरत्न पीएसयू रेलटेल को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 164.79 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 60 महीनों के लिए किराए के आधार पर एमपीएलएस वीपीएन नेटवर्क स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करना है।

5- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV)

कंपनी ने जानकारी दी है कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से गुजरात के साणंद प्लांट और आसपास के सप्लायर फैसिलिटीज में आई मुश्किलें खत्म हो गई हैं और कामकाज चालू हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 35-40 करोड़ रुपये का नॉन मैटेरियरल नुकसान हुआ है, जबकि बीमा दावा 30 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पादन, संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।

6- लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels)

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इस प्रमुख कंपनी ने गुजरात के भरूच में नया होटल खोलकर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। ये गुजराज में कंपनी का 12वां एक्टिव होटल है। कंपनी के 20 और होटल पाइपलाइन में हैं। नए होटल का प्रबंधन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कार्नेशन होटल्स करेगी।

7- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)

NCLT की बेंगलुरु पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और साइएंट (Cyient) के 50:50 हिस्सेदारी वाले डॉरमेंट जॉइंट वेंचर इन्फोटेक एचएएल लिमिटेड को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया मार्च 2024 में शुरू हुई थी और इस वेंचर के क्लोजर होने की वजह से एचएएल के रक्षा कार्यक्रमों या बैलेंस शीट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

8- टॉरेंट पावर (Torrent Power)

टॉरेंट पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरभ मशरूवाला ने 20 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 से विकास पोद्दार को नया सीएफओ नियुक्त किया है।

9- रैलिस इंडिया (Rallis India)

कंपनी ने बताया है कि उसके सीएफओ भास्कर स्वामीनाथन टाटा समूह की दूसरी कंपनी में शामिल होने के लिए 4 नवंबर 2026 से अपने पद से इस्तीफा देंगे। कंपनी उसी तारीख से श्रीधर राधाकृष्णन को नया सीएफओ नियुक्त करेगी।

10- एफएमसीजी शेयर (Adani Wilmar, Patanjali, Marico, Agro Tech)

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा उपभोक्ताओं को खुला खाद्य तेल न खरीदने की सलाह देने के बाद अडानी विल्मर, पतंजलि फूड्स, मैरिको और एग्रो टेक फूड्स के शेयर फोकस में रहेंगे। एफडीए ने मिलावट सहित दूसरे उल्लंघनों को देखते हुए खाद्य तेल क्षेत्र के लिए कंप्लायंस ऑर्डर भी जारी किया है।

11- निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance)

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बताया है कि बीमा नियामक IRDAI ने FY25 के लिए लागू एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए उसे चेतावनी दी है। इसके साथ ही 19 अगस्त 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए कंपनी के नए व्यावसायिक स्थान खोलने पर रोक लगा दी है।

12- अमागी मीडिया लैब्स (Amagi Media Labs)

क्लाउड-आधारित SaaS कंपनी अमागी मीडिया लैब्स के शेयर फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी ने गुरुवार को 600 करोड़ रुपये का ब्लॉक डील लॉन्च किया है। यह डील कंपनी की कुल इक्विटी का 5% रिप्रेजेंट करती है।

13- केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies)

केफिन टेक में एक बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली, जहां जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने 925 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 1400 करोड़ रुपये में 1.51 करोड़ शेयर (8.8% हिस्सेदारी) बेचे। इस डील में इंवेस्को म्यूचुअल फंड ने 400 करोड़ रुपये में 2.5% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मिराए एसेट MF (1.5%), कोटक महिंद्रा MF (1.2%) और एचएसबीसी MF (1%) ने भी खरीदारी की।

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Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

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अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।

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बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।

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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।

 

31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा

DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

सरकार ने तय की स्टॉक सीमा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।

आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे

सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा।  इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।

 

चीनी महंगी होने की क्या वजह है?

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

 

इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है। 

क्या और बढ़ेंगे दाम ?

दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।

21 अगस्त को मूसलाधार बारिश का महा-अलर्ट! यूपी-एमपी समेत 14 राज्यों में होगी भारी बारिश, देखें- मौसम विभाग की चेतावनी

Weather update for August 21: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 अगस्त के लिए वेदर बुलेटिन जारी करते हुए देश के कई राज्यों में भारी बारिश, बिजली गिरने और आंधी तूफान की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों और पूर्वोत्तर के राज्यों तक मूसलाधार बारिश देखने को मिलेगी।

पूर्वी मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने 21 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी से बेहद भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस क्षेत्र में मानसूनी प्रणालियों के असर की वजह से जमकर बारिश होगी। इससे निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यूपी-एमपी समेत 14 राज्यों में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान

पूर्वी मध्य प्रदेश के अलावा देश के 14 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की पूरी संभावना जताई गई है। उत्तर भारत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में तेज बारिश होगी। मध्य भारत के पश्चिम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मूसलाधार बारिश का अनुमान है।

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की बात करें तो ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना

कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट भी दिया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और बिजली कड़कने के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

इसके अलावा बिहार, तटीय कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और वज्रपात का अनुमान जताया गया है।

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, छत्तीसगढ़, पूरे मध्य प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में बादलों की गर्जना के साथ बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के मैदानी इलाकों में तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

मछुआरों के लिए अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने समुद्री क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व व पूर्व-मध्य अरब सागर के हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

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बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है, जिनकी रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। इस स्थिति को देखते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।