
अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।
बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।
31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा
DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।
सरकार ने तय की स्टॉक सीमा
भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।
आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे
सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा। इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।
चीनी महंगी होने की क्या वजह है?
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।
इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है।
क्या और बढ़ेंगे दाम ?
दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।


