Weather Update: अगले 48 घंटे भारी! यूपी, MP और झारखंड समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम हुआ एक्टिव

IMD Weather Bulletin: देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां प्रचंड रूप पकड़ने की वजह से भारी बारिश का दौर चल रहा है। आने वाले दिनों में भी इसमें राहत की उम्मीद नहीं दिख रही क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 अगस्त को जारी अपने वेदर बुलेटिन में चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटे देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिलेगी। झारखंड और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों पर बने डिप्रेशन (अवदाब) के असर से मौसम का मिजाज काफी आक्रामक हो गया है।

इसके चलते उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से उठा यह डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए झारखंड और आसपास के इलाकों में केंद्रित हो गया है। अगले 24 घंटों के दौरान इसके इसी दिशा में झारखंड और बिहार से होकर गुजरने और धीरे-धीरे कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना है। त्तर हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पंजाब के ऊपर ऊपरी हवा का साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जबकि मानसूनी ट्रफ भी अपने सामान्य स्थान पर सक्रिय है।

पिछले 24 घंटों में बदला मौसम का मिजाज

IMD के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिली है। उत्तराखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेमी से अधिक की बेहद भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं छत्तीसगढ़, असम व मेघालय, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में 12 से 20 सेमी की बहुत भारी बारिश हुई है। इसके अलावा कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में भी 7 से 11 सेमी तक की भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

दक्षिण-पूर्वी UP, MP और झारखंड में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम प्रणालियों के प्रभाव से उत्तर भारत और मध्य भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर बेहद मूसलाधार यानी अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और झारखंड में 18 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है।

उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में 18 अगस्त को, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 19 अगस्त के दौरान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 और 20 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान में भी अलग-अलग दिनों में तेज बौछारों के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तराखंड में 18 से 24 अगस्त तक गरज और चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका बनी रहेगी।

मध्य भारत और ओडिशा-छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं के साथ बरसेगी आफत

मध्य भारत में पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 से 20 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 18 से 22 अगस्त के दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का अनुमान है। पूर्वी भारत में झारखंड में 18 अगस्त को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

इनकी स्पीड 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ओडिशा में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होगी। बिहार, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 से 20 अगस्त के दौरान हल्की से मीडियम और कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने के आसार हैं।

पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों का हाल

पूर्वोत्तर भारत में असम और मेघालय में 18 अगस्त को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 18 से 24 अगस्त तक लगातार भारी बारिश और बिजली चमकने का दौर जारी रहेगा। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 18 से 24 अगस्त तक व्यापक बारिश होगी, जबकि मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी गरज-चमक देखने को मिलेगी।

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दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और कर्नाटक के अलग अलग इलाकों में तेज सतही हवाएं और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज पड़ेंगे रिमझिम फुहारे! IMD ने 23 अगस्त तक जताया बारिश का अनुमान, जानें पूरे हफ्ते का हाल

Delhi Weather Today: दिल्लीवासियों को मंगलवार (18 अगस्त) को एक बार फिर हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दिल्ली के कुछ इलाकों में सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम को ध्यान में रखते हुए अपने दिन की प्लानिंग करने की सलाह दी गई है।

IMD के अनुसार, “आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।” इस दौरान अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

दिल्ली का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान

IMD ने आने वाले हफ्ते में बारिश का अनुमान लगाया है। IMD के अनुसार, 19 और 20 अगस्त को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पूर्वानुमान में कहा गया है, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कई जगहों पर हल्की बारिश और कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। शाम से रात के समय बहुत हल्की से हल्की बारिश का एक और दौर हो सकता है।”

वहीं, इन दिनों दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

इसके बाद, 21 और 22 अगस्त को IMD ने बहुत हल्की से हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। IMD के अनुमान के अनुसार, “आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम के समय कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

इन दिनों अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

आखिर में, 23 अगस्त के लिए IMD का अनुमान वही है, जिसमें बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक, “आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम के बीच कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

इस दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

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सफर के बीच कार न दे दे धोखा! रोड ट्रिप से पहले कर लें ये 5 आसान चेकिंग

लंबी रोड ट्रिप पर निकलने से पहले सिर्फ सामान पैक करना और रास्ता तय करना ही काफी नहीं होता। कई घंटों तक लगातार कार चलने से इंजन, टायर, ब्रेक और दूसरे जरूरी हिस्सों पर रोज की ड्राइविंग के मुकाबले ज्यादा दबाव पड़ता है। यदि कार में पहले से कोई छोटी समस्या है, तो लॉन्ग ड्राइव के दौरान वह बड़ी परेशानी बन सकती है और रास्ते में काफी समय तक फंसना पड़ सकता है।

लेकिन रोड ट्रिप से पहले कार की कुछ जरूरी चीजों को आसानी से घर पर ही चेक किया जा सकता है। इसके लिए किसी खास टूल की जरूरत नहीं पड़ती और थोड़े समय में कार की बेसिक कंडीशन का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिससे रास्ते में अचानक खराबी, देरी या अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।

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1. ब्रेक चेक करें

लंबी रोड ट्रिप से पहले ब्रेक की अच्छी तरह जांच कर लें। गाड़ी चलाते समय अगर चीं-चीं, रगड़ने या किसी तरह की अजीब आवाज आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। साथ ही ब्रेक फ्लूइड का लेवल भी देखें। यदि फ्लूइड बहुत कम है या ब्रेक कमजोर लग रहे हैं, तो ट्रिप से पहले मैकेनिक को जरूर दिखाएं। पहाड़ी रास्तों पर जाने वाले लोगों के लिए ब्रेक की जांच और भी जरूरी है, क्योंकि ढलान पर ब्रेक का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

2. टायर चेक करें

लंबी हाईवे ड्राइव में टायर की हालत बहुत मायने रखती है। निकलने से पहले टायर में सही हवा भरवाएं और ट्रेड की गहराई देखें। टायर में कट, दरार, उभार या कोई चीज फंसी हुई हो तो उसे भी चेक करें। यदि टायर एक तरफ से ज्यादा घिसा हुआ है, तो यह अलाइनमेंट या दूसरी परेशानी का संकेत हो सकता है। बारिश के मौसम में अच्छे ट्रेड वाले टायर सड़क पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करते हैं।

3. इंजन ऑयल देखें

रोड ट्रिप में इंजन लगातार कई घंटों तक चलता है, इसलिए निकलने से पहले इंजन ऑयल का लेवल जरूर चेक करें। इसके लिए डिपस्टिक की मदद ली जा सकती है। कार को समतल जगह पर खड़ा करके और इंजन बंद करने के बाद, गाड़ी के मैनुअल में दिए तरीके के हिसाब से ऑयल चेक करें। यदि ऑयल बहुत कम है या काफी पुराना और गंदा दिखाई दे रहा है, तो ट्रिप से पहले इसे बदलवाना या जरूरत के अनुसार टॉप-अप करवाना बेहतर है।

4. कूलेंट चेक करें

लंबी ड्राइव में इंजन ज्यादा देर तक चलता है, इसलिए कूलेंट का सही लेवल होना जरूरी है। कूलेंट रिजर्वॉयर में दिए गए मिनिमम और मैक्सिमम निशान के बीच लेवल देखें। अगर कूलेंट कम है, तो कार कंपनी के बताए कूलेंट से ही उसे भरें। कूलेंट का रंग बहुत गंदा या जंग जैसा दिखे तो मैकेनिक से जांच करवाएं। साथ ही पाइप में दरार या उभार भी देख लें। गर्म इंजन में रेडिएटर कैप कभी न खोलें।

5. बैटरी की जांच करें

लंबी यात्रा से पहले बैटरी और उसके टर्मिनल जरूर देखें। टर्मिनल के आसपास सफेद या नीली परत जैसी जंग दिखाई दे तो उसे साफ करवाएं। यदि कार स्टार्ट होने में ज्यादा समय ले रही है, तो बैटरी की जांच करवा लेना अच्छा है। कार की बैटरी करीब 3 से 5 साल तक चल सकती है, इसलिए बैटरी काफी पुरानी हो चुकी है, तो रोड ट्रिप से पहले उसकी हेल्थ टेस्ट करवा लें।

6. वाइपर और वॉशर फ्लूइड

बारिश या खराब मौसम में साफ दिखाई देना सेफ ड्राइविंग के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए ट्रिप से पहले वाइपर ब्लेड में दरार या ज्यादा घिसाव तो नहीं है, यह देखें। वाइपर चलाकर भी चेक करें कि वे शीशे को अच्छी तरह साफ कर रहे हैं या नहीं। यदि निशान या पानी की लकीरें रह जाती हैं, तो वाइपर बदल देना बेहतर है। साथ ही वॉशर फ्लूइड का टैंक भी पूरा भर लें, क्योंकि हाईवे पर धूल-मिट्टी और गंदगी की वजह से इसकी जरूरत ज्यादा पड़ सकती है।

UP Weather Alert: यूपी के भारी होंगे अगले कुछ दिन! IMD ने कई जिलों में जारी किया भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में मानसून इन दिनों पूरी रह एक्टिव है। इन दिनों प्रदेश में जमकर बारिश हो रही है। वहीं लोगों को अभी बारिश से राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 17 अगस्त को कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की संभावना है। वहीं 20 और 21 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इस दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। वहीं लोगों को इससे सावधान रहने की सलाह दी है।

23 अगस्त तक होगी भारी बारिश

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के मुताबिक,, प्रदेश के ऊपर बने मौसमी सिस्टम और मानसूनी द्रोणी की स्थिति में बदलाव के कारण बारिश के लिए परिस्थितियां अनुकूल हुई हैं। अगले 48 घंटों में कई जगह भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम भी आगे बढ़ रहा है, जिसका असर 19 अगस्त से उत्तर प्रदेश में दिखाई दे सकता है। इसके चलते 23 अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है।

यूपी के इन शहरों में होगी भारी बारिश

18 से 22 अगस्त तक यूपी के कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहेगा। 18 अगस्त को पूर्वी और मध्य यूपी के कई जिलों में भारी बारिश, 19 अगस्त को चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना है। 20 और 21 अगस्त को कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं 22 अगस्त को भी बांदा, चित्रकूट, गोरखपुर, लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या समेत कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है।

बारिश के साथ बिजली गिरने का भी खतरा

मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। लोगों को खुले में जाने और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है और नदियों व जलाशयों का जलस्तर बढ़ सकता है। इससे सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

El Nino Impact On Monsoon: अल-नीनो के साये में मानसून, समझिए कम बारिश से इकॉनमी पर पड़ सकता है कैसा असर

भारत में मानसून पर मंडराते अल-नीनो के खतरे ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से मानसूनी बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वसे एजेंसी का यह भी मानना है कि अगर मौसम का यह झटका बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता है तो भारत की समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

एसएंडपी के मुताबिक भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन इकॉनमी (जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस) में शामिल है, जहां के लोग कीमतों में होने वाले उछाल के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन देशों में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है और कृषि काफी हद तक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करती है।

12% कम हुई बारिश, अगस्त में भी सुस्त रह सकता है मानसून

भारत के मानसूनी बारिश की स्थिति फिलहाल अच्छी नजर नहीं आ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अगस्त तक 2026 के मानसून सीजन के दौरान बारिश औसत से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके अलावा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में मानसून और कमजोर हो सकता है।

भारत में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से ही मिलता है। ये खेती-किसानी के लिए बेहद जरूरी है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि में सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे अधिकांश फसलें नियमित बारिश पर ही निर्भर रहती हैं।

दालों, सोयाबीन और मक्के की पैदावार पर पड़ सकता है असर

अगर बारिश में कमी का यह दौर लंबा खींचता है तो इससे दालों, सोयाबीन, कपास और मक्के जैसी फसलों की पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस सीजन में किसानों को पहले से ही असमान बारिश का सामना करना पड़ा है। हालांकि जुलाई में हुई बेहतर बारिश ने शुरुआती सुस्त मानसून से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की थी, लेकिन अब फिर से जोखिम बढ़ गया है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। विभाग ने अगस्त महीने में औसत से कम बारिश होने का अंदेशा जताया है जबकि इसी दौरान अल-नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो भारत में अल-नीनो का संबंध कमजोर या अनिश्चित मानसूनी बारिश से रहा है।

बिजली आपूर्ति और जलाशयों पर भी पड़ेगा प्रभाव

कम बारिश का असर सिर्फ भोजन और फसलों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से देश के प्रमुख जलाशय खाली रह सकते हैं, जिससे हाइड्रो पावर प्रोडक्शन में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है।

सबसे बड़ा जोखिम आम परिवारों के बजट पर है। कृषि उत्पादन में कमी आने से बाजार में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति घट जाएगी और कीमतें ऊपर चढ़ जाएंगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर तब जब रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी।

भारत के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक, लेकिन चुनौतियां बरकरार

तमाम जोखिमों के बावजूद भारत के पास खाद्य आपूर्ति के बड़े झटके से निपटने के लिए कुछ मजबूत सुरक्षा चक्र मौजूद हैं। देश के पास वर्तमान में चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पिछले अल-नीनो दौर की तुलना में भारत की खेती के तरीकों, सिंचाई सुविधाओं और फसल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है। इससे भी देश की खाद्य उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।

एसएंडपी का कहना है कि मौसम से जुड़ी अस्थायी रुकावट का मतलब यह नहीं है कि इकॉनमी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान पहुंचेगा। नुकसान का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि मौसम कितना प्रतिकूल होता है और सरकार इससे निपटने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तत्काल चिंता यही है कि अगर बारिश और कमजोर होती है तो रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यह दबाव कितने समय तक रहेगा, यह काफी हद तक मानसून, फसल उत्पादन और आने वाले महीनों में अल-नीनो की ताकत पर निर्भर करेगा।

सोनल के शतक और डिकवेला के अर्धशतक से श्रीलंका भारत के खिलाफ बची फॉलोऑन से

INDvsSL श्रीलंका की पूरी टीम एक भी दिन बल्लेबाजी नहीं कर पाई और 79.4 ओवर में 284 रन बनाकर सिमट गई। श्रीलंका एक वक्त पर 90 रनों पर 5 विकेट गंवा चुकी थी और उसके सिर के ऊपर गाले (अपने ही घरेलू मैदान) पर फॉलोओन का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में निरोशन डिकवेला और सोनल दिनूशा ने 146 रनों की साझेदारी कर टीम को शर्मसार होने से बचाया।

श्रीलंका की पारी के बाद घने बादल मैदान पर छाने लग गए और बारिश के आने के बाद अंपायर्स को तीसरे दिन के खेल के समाप्ति की घोषणा करनी पड़ी। श्रीलंका की ओर से अभ्यास मैच में प्रभावित करने वाले युवा सोनल दिनूशा ने शतक मारा वहीं निरोशन डिकवेला 80 पर आउट होकर शतक पूरा नहीं कर सके।

भारत की ओर से मानव सुथार ने सर्वाधिक 4 विकेट लिए। उन्होंने अपने 21.4 ओवर के स्पैल में 76 रन दिए। रविंद्र जड़ेजा ने भी 3 विकेट लेकर 21 ओवर में 57 रन दिए। भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे जिसके आधार पर उसको 178 रनों की बढ़त प्राप्त है।

कल का मौसम: IMD की बड़ी चेतावनी! 18 अगस्त को 6 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, दिल्ली से यूपी-बिहार तक ऐसा रहेगा वेदर

18 अगस्त को मौसम विभाग ने बड़े पैमाने पर बारिश का अलर्ट जारी किया है। झारखंड में सबसे ज्यादा खतरा है। यहां बहुत ज्यादा भारी बारिश की पूरी संभावना बन रही है। इसी तरह बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा काफी व्यापक रहने वाला है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

झारखंड में आफत की बारिश, बिहार समेत 6 राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

18 अगस्त को मौसम का सबसे भयानक रूप झारखंड में देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। राज्य में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा देश के 6 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 18 अगस्त को बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इन राज्यों में बारिश की तीव्रता काफी अधिक रहेगी।

दिल्ली-एनसीआर, पूर्वी UP और उत्तराखंड समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी 18 अगस्त को हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में भी अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बिजली कड़कने की आशंका

बारिश के साथ-साथ 18 अगस्त को देश के अलग अलग हिस्सों में तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश, गुजरात क्षेत्र, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना है।

इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल व सिक्किम, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

गुजरात, सोमालिया और ओमान तटों पर 65 किमी/घंटे की गति से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों में 18 अगस्त को स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रहेगी। अरब सागर में गुजरात, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास, तथा मध्य-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश भागों और दक्षिण-पश्चिम, उत्तर व मध्य-पूर्व अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने के आसार हैं। इनकी गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने समुद्र में तेज हवाओं को देखते हुए मछुआरों को तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।

462 रन बनाकर भारत ने श्रीलंका पर बनाया गॉल टेस्ट में दबाव

INDvsSL देवदत्त पडिक्कल (167), केएल राहुल (82) और ध्रुव जुरेल (51) रन की शानदार पारियों की बदौलत भारत ने पहले टेस्ट मैच के तीसरे दिन सोमवार को श्रीलंका के खिलाफ  462 रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। रविवार सांयकाल 460 रनों पर 9 विकेट गंवाकर आज खेलेने उतरी भारतीय टीम का प्रसिद्ध कृष्णा के तौर पर अंतिम विकेट गिरा। उनका विकेट अशिता फर्नेंडो ने लिया।

इससे पहले रविवार को बाएं हाथ के बल्लेबाज पड़िक्कल ने दिन की शुरुआत 131 रन से की थी, आत्मविश्वास के साथ 150 और फिर 160 के स्कोर तक पहुंचे और खराब गेंदों पर लगातार प्रहार करते रहे। उन्होंने 215 गेंदों में 150 रन पूरे किए और उसके बाद भी अपना आक्रामक खेल जारी रखा। केएल राहुल ने भी उतना ही अहम साथ दिया और 175 गेंदों में 10 चौकों और एक छक्के की मदद से 82 रन बनाए। एक समय ऐसा लग रहा था कि वह एक बड़ा शतक बनाएंगे, लेकिन केशरा नुवंता ने एक बेहतरीन गेंद डाली जो टर्न हुई और उछली, जिससे राहुल को अपना शॉट बदलना पड़ा और गेंद सीधे शॉर्ट लेग पर चली गई।

पडिक्कल ने अपनी पारी में 230 गेंदों का सामना किया और इस दौरान 15 चौके और एक छक्का लगाया और अंत में प्रभात जयसूर्या की गेंद पर वह स्टंप आउट हुए। उनके आउट होने के साथ ही वह लंबी पारी समाप्त हुई जिसने श्रीलंकाई गेंदबाज़ों पर लगातार दबाव बनाए रखा था। ऋषभ पंत के आउट होने से भारत की 300 रन के पार जाने की गति थोड़ी धीमी हुई। पंत ने 62 गेंदों में तेज 39 रन बनाए। पंत ने नुवंता पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन मिड-ऑफ की तरफ़ शॉट का सही समय नहीं चुन पाए, जहां सोनल दिनुशा ने दौड़ते हुए कैच पूरा किया। यह नुवंता का पहला टेस्ट विकेट था।

चायकाल के बाद भारत के विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा। रवींद्र जडेजा (13) रन के रूप में भारत का छठा विकेट गिरा। उन्होंने नुवंता ने पगबाधा आउट किया। इस दौरान ध्रुव जुरेल ने तेजी के साथ रन बनाते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया। 110वें ओवर में उन्हें प्रभात जयसूर्या ने आउट किया। ध्रुव जुरेल ने 68 गेंदों में चार चौके और एक छक्का लगाते हुए (51) रनों की पारी खेली। मोहम्मद सिराज (11) रन को ए फर्नांडो ने आउट किया। मानव सुथार (24) रन नौवें विकेट के रूप में आउट हुये। उन्हें प्रभात जयसूर्या ने आउट किया।

बारिश के कारण केवल दो सत्र का खेल हो पाया। पहले सत्र में कुल 76 रन बने और तीन विकेट गिरे। दूसरे सेशन में 96 रन बने और चार विकेट गिरे। कुल मिला कर आज का खेल दोनों टीमों के नाम रहा। लेकिन भारतीय टीम के लिए अच्छी ख़बर यह है कि पिच स्पिनरों के लिए मददगार बनती जा रही है। ऐसे में 460 रनों का स्कोर अच्छा स्कोर दिख रहा है। स्टंप्स के समय कुलदीप यादव (नाबाद 12) और प्रसिद्ध कृष्णा (नाबाद एक) रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।श्रीलंका की ओर से प्रभात जयसूर्या ने चार विकेट लिये। केशरा नुवंता को तीन विकेट मिले। ए फर्नांडो ने एक बल्लेबाज को आउट किया।

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज होगी हल्की बारिश! IMD ने जारी किया अगले कुछ दिनों का पूरा शेड्यूल

Delhi Weather Today: दिल्ली में सोमवार (17 अगस्त) को हल्की बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दिनभर आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में लोगों को मौसम को देखते हुए अपने दिन की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

सोमवार के लिए जारी IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, “आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच एक-दो बार बहुत हल्की बारिश हो सकती है। शाम से रात के समय भी बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है।” इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

दिल्ली के मौसम का साप्ताहिक पूर्वानुमान

IMD ने अगले कुछ दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है और उसी के अनुसार दिन-वार पूर्वानुमान जारी किया है।

18 अगस्त के लिए IMD के पूर्वानुमान में कहा गया है, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे; सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की से हल्की बारिश की एक या दो बार बौछारें पड़ सकती हैं। शाम से रात के बीच भी बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।” इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

19 अगस्त को IMD ने फिर से हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है। अनुमान के मुताबिक, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कई जगहों पर हल्की बारिश और कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। शाम से रात के समय बहुत हल्की से हल्की बारिश का एक और दौर हो सकता है।” इस समय अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।

20 अगस्त के लिए भी IMD ने 19 अगस्त जैसा ही अनुमान जारी किया है, जिसमें अधिकतम और न्यूनतम तापमान के उसी रेंज में रहने की उम्मीद है।

IMD ने 21 और 22 अगस्त को बहुत हल्की से हल्की बारिश की संभावना जताई है। अनुमान के मुताबिक, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की से हल्की बारिश की एक या दो बार बौछारें पड़ सकती हैं। शाम से रात के बीच भी बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

वहीं, दोनों ही दिनों में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।

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ब्रिटेन की हरी घास हुई पीली, 190 साल में सबसे सूखा जुलाई, जानें क्यों बदल गया पूरा नजारा

अपनी हरी-भरी घास और खूबसूरत पार्कों के लिए मशहूर ब्रिटेन का नजारा इस बार बदला हुआ है। ब्रिटेन में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने इसकी मनमोहक हरियाली पर काफी असर डाला है और यहां की घास हरी से पीली, भूरी और सुनहरी रंग की दिखने लगी हैं। इंग्लैंड में इस बार 190 वर्षों में सबसे सूखा जुलाई देखने को मिला है जबकि वेल्स ने भी अपने इतिहास का सबसे सूखा जुलाई देखा। इस वजह से देश के लॉन, पार्क और खेत सूख रहे हैं।

यूके सरकार के मुताबिक महीनों तक बेहद कम बारिश और हाई टेंप्रेचर के बाद 10 अगस्त तक इंग्लैंड का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे की चपेट में आ चुका था। इस जल संकट ने नदियों, जलाशयों, कृषि योग्य भूमि और वन्यजीवों पर काफी असर डाला है।

क्यों पीली पड़ रही है हरी घास?

घास के रंग में आया यह बदलाव मुख्य रूप से पौधों का सर्वाइवल रिस्पॉन्स है। जब मिट्टी काफी सूख जाती है तो घास का बढ़ना रुक जाता है और वो डॉर्मेंट स्टेट में चली जाती है। जब घास पानी और एनर्जी बचाने की कोशिश करती है तो उसकी पत्तियां अपना स्वस्थ हरा रूप खो देती हैं और पीली, भूरी या पुआल के रंग की हो जाती हैं। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी के मुताबिक स्थापित लॉन अक्सर सूखे के लंबे दौर में भी जीवित रह सकते हैं क्योंकि सतह के नीचे उनकी जड़ें जीवित रहती हैं। जैसे ही बारिश लौटती है, उनमें फिर से नई हरी पत्तियां निकल आती हैं। फिर भी मौजूदा स्थितिइतनी गंभीर है कि कुछ क्षेत्रों में स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर सूखा जारी रहता है तो घास कमजोर हो सकती है और जड़ें खराब हो सकती हैं।

किसानों, जलाशयों और जल आपूर्ति पर पड़ा भारी असर

इस सूखे मौसम का सीधा असर ब्रिटेन के किसानों पर भी पड़ रहा है। इंग्लैंड की पर्यावरण एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि घास की पैदावार घटने के कारण पशुपालक किसानों को समय से पहले ही सर्दियों के लिए रखा गया चारा इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को समय से पहले फसलों की कटाई करनी पड़ रही है, फसल की पैदावार कम हो रही है और खेतों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है।

बारिश की कमी का आंकड़ा बेहद हैरान करने वाला है

जुलाई महीने में इंग्लैंड में केवल 6।5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि उसके दीर्घकालिक औसत का मात्र 10 प्रतिशत है। दक्षिणी इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में पूरे महीने लगभग न के बराबर बारिश हुई। देश में जलाशयों का जलस्तर काफी गिर गया है, नदियों का प्रवाह असामान्य रूप से कम है और लाखों लोग पानी के उपयोग पर लगी पाबंदियों से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सूखे के हालातों को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपने घर के लॉन में हर कीमत पर घास को हरा रखने की जिद न करें। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का कहना है कि भूरी हुई घास बारिश लौटने पर प्राकृतिक रूप से ठीक हो सकती है जबकि सूखे के दौरान ज्यादा सिंचाई करने से सीमित जल आपूर्ति पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ेगा।