सफर के बीच कार न दे दे धोखा! रोड ट्रिप से पहले कर लें ये 5 आसान चेकिंग

लंबी रोड ट्रिप पर निकलने से पहले सिर्फ सामान पैक करना और रास्ता तय करना ही काफी नहीं होता। कई घंटों तक लगातार कार चलने से इंजन, टायर, ब्रेक और दूसरे जरूरी हिस्सों पर रोज की ड्राइविंग के मुकाबले ज्यादा दबाव पड़ता है। यदि कार में पहले से कोई छोटी समस्या है, तो लॉन्ग ड्राइव के दौरान वह बड़ी परेशानी बन सकती है और रास्ते में काफी समय तक फंसना पड़ सकता है।

लेकिन रोड ट्रिप से पहले कार की कुछ जरूरी चीजों को आसानी से घर पर ही चेक किया जा सकता है। इसके लिए किसी खास टूल की जरूरत नहीं पड़ती और थोड़े समय में कार की बेसिक कंडीशन का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिससे रास्ते में अचानक खराबी, देरी या अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।

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1. ब्रेक चेक करें

लंबी रोड ट्रिप से पहले ब्रेक की अच्छी तरह जांच कर लें। गाड़ी चलाते समय अगर चीं-चीं, रगड़ने या किसी तरह की अजीब आवाज आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। साथ ही ब्रेक फ्लूइड का लेवल भी देखें। यदि फ्लूइड बहुत कम है या ब्रेक कमजोर लग रहे हैं, तो ट्रिप से पहले मैकेनिक को जरूर दिखाएं। पहाड़ी रास्तों पर जाने वाले लोगों के लिए ब्रेक की जांच और भी जरूरी है, क्योंकि ढलान पर ब्रेक का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

2. टायर चेक करें

लंबी हाईवे ड्राइव में टायर की हालत बहुत मायने रखती है। निकलने से पहले टायर में सही हवा भरवाएं और ट्रेड की गहराई देखें। टायर में कट, दरार, उभार या कोई चीज फंसी हुई हो तो उसे भी चेक करें। यदि टायर एक तरफ से ज्यादा घिसा हुआ है, तो यह अलाइनमेंट या दूसरी परेशानी का संकेत हो सकता है। बारिश के मौसम में अच्छे ट्रेड वाले टायर सड़क पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करते हैं।

3. इंजन ऑयल देखें

रोड ट्रिप में इंजन लगातार कई घंटों तक चलता है, इसलिए निकलने से पहले इंजन ऑयल का लेवल जरूर चेक करें। इसके लिए डिपस्टिक की मदद ली जा सकती है। कार को समतल जगह पर खड़ा करके और इंजन बंद करने के बाद, गाड़ी के मैनुअल में दिए तरीके के हिसाब से ऑयल चेक करें। यदि ऑयल बहुत कम है या काफी पुराना और गंदा दिखाई दे रहा है, तो ट्रिप से पहले इसे बदलवाना या जरूरत के अनुसार टॉप-अप करवाना बेहतर है।

4. कूलेंट चेक करें

लंबी ड्राइव में इंजन ज्यादा देर तक चलता है, इसलिए कूलेंट का सही लेवल होना जरूरी है। कूलेंट रिजर्वॉयर में दिए गए मिनिमम और मैक्सिमम निशान के बीच लेवल देखें। अगर कूलेंट कम है, तो कार कंपनी के बताए कूलेंट से ही उसे भरें। कूलेंट का रंग बहुत गंदा या जंग जैसा दिखे तो मैकेनिक से जांच करवाएं। साथ ही पाइप में दरार या उभार भी देख लें। गर्म इंजन में रेडिएटर कैप कभी न खोलें।

5. बैटरी की जांच करें

लंबी यात्रा से पहले बैटरी और उसके टर्मिनल जरूर देखें। टर्मिनल के आसपास सफेद या नीली परत जैसी जंग दिखाई दे तो उसे साफ करवाएं। यदि कार स्टार्ट होने में ज्यादा समय ले रही है, तो बैटरी की जांच करवा लेना अच्छा है। कार की बैटरी करीब 3 से 5 साल तक चल सकती है, इसलिए बैटरी काफी पुरानी हो चुकी है, तो रोड ट्रिप से पहले उसकी हेल्थ टेस्ट करवा लें।

6. वाइपर और वॉशर फ्लूइड

बारिश या खराब मौसम में साफ दिखाई देना सेफ ड्राइविंग के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए ट्रिप से पहले वाइपर ब्लेड में दरार या ज्यादा घिसाव तो नहीं है, यह देखें। वाइपर चलाकर भी चेक करें कि वे शीशे को अच्छी तरह साफ कर रहे हैं या नहीं। यदि निशान या पानी की लकीरें रह जाती हैं, तो वाइपर बदल देना बेहतर है। साथ ही वॉशर फ्लूइड का टैंक भी पूरा भर लें, क्योंकि हाईवे पर धूल-मिट्टी और गंदगी की वजह से इसकी जरूरत ज्यादा पड़ सकती है।

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी! पहाड़ों पर गाड़ी चलाने की छोटी सी गलती कर देगी ट्रिप खराब

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) से पहाड़ों की ट्रेवलिंग करना रोमांचक जरूर होता है, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग शहर (city driving) की सड़कों से काफी अलग होती है। घुमावदार मोड़, खड़ी चढ़ाई और बदलता मौसम सफर को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं पहाड़ों पर सेफ ड्राइविंग (mountain driving) के जरूरी टिप्स, जो आपकी ट्रिप को सिक्योर और यादगार बनाएंगे:

पहाड़ों पर धीरे और समझदारी से ड्राइव करें

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पहाड़ी सड़कों पर तेज रफ्तार से बचें और गाड़ी को हमेशा सही गियर में चलाएं। ढलान पर बार-बार ब्रेक लगाने की बजाय इंजन ब्रेकिंग (engine braking) का इस्तेमाल करें। ब्लाइंड मोड़ों पर हॉर्न जरूर बजाएं और बिना जरूरत किसी वाहन को ओवरटेक न करें। अगर पॉसिबल हो, तो रात में ड्राइविंग से बचें।

 

 

थकान महसूस हो तो तुरंत ब्रेक लें

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लंबी दूरी तक लगातार ड्राइव करने से थकान बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। हर 2 से 3 घंटे में थोड़ा आराम करें, पानी पिएं और हल्का नाश्ता करें। अगर साथ में दूसरा ड्राइवर है, तो जरूरत पड़ने पर ड्राइविंग (driving) बदल लें। थकान में गाड़ी चलाने से हमेशा बचें।

 

 

सफर से पहले गाड़ी की पूरी जांच करें

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हिल स्टेशन जाने से पहले अपनी कार की अच्छी तरह जांच करवा लें। ब्रेक, टायर, इंजन ऑयल, कूलेंट, बैटरी और स्पेयर व्हील (spare wheel) की कंडीशन जरूर देखें। साथ ही फर्स्ट एड किट (first-aid kit), टॉर्च, टूल किट, पानी और जरूरी डॉक्यूमेंट अपने साथ रखें। मौसम (weather) और सड़क की जानकारी पहले से लेने से भी जर्नी आसान हो जाती है।

मौसम और सड़क की कंडीशन पर नजर रखें

पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है। जर्नी शुरू करने से पहले बारिश, कोहरा या भूस्खलन (landslides) की जानकारी जरूर लें। अगर सड़क फिसलन भरी हो, तो गाड़ी धीरे चलाएं और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। रास्ते की ताजा जानकारी के लिए GPS और वहां के लोगों की सलाह भी काम आ सकती है।

इमरजेंसी (emergency) के लिए हमेशा तैयार रहें

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ट्रेवलिंग के दौरान किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन के लिए पहले से तैयारी रखें। मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें और जरूरी हेल्पलाइन नंबर सेव करके रखें। गाड़ी में रिफ्लेक्टर (reflector), टो-रोप (tow rope) और बेसिक टूल्स जरूर रखें। खराब मौसम या अंधेरा होने पर रसिक लेने की बजाय सेफ जगह रुकना बेहतर होता है।

कार का माइलेज हो रहा है कम? मारुति, हुंडई, टाटा और Kia समेत हर पेट्रोल कार के लिए जानिए ईंधन बचाने के सबसे आसान तरीके

भारत में कार खरीदते समय लोग सबसे पहले उसके माइलेज पर ध्यान देते हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब अच्छी माइलेज पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गई है। वहीं, देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बढ़ने के बाद भी ईंधन की बचत को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। हालांकि, कार कंपनियों का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन किसी भी कार का वास्तविक माइलेज काफी हद तक आपकी ड्राइविंग की आदत, गाड़ी की देखभाल और सड़क की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

चाहे आपके पास मारुति सुजुकी स्विफ्ट, हुंडई क्रेटा, टाटा नेक्सन, महिंद्रा XUV 3XO या किआ सेल्टोस जैसी कोई भी कार हो, कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप हर लीटर ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं और अपनी ईंधन लागत को कम कर सकते हैं।

क्या E20 पेट्रोल से कार का माइलेज कम हो जाता है?

E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में एनर्जी कम होती है। यही वजह है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कार का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। 4 जुलाई को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि E20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू, E10 पेट्रोल के मुकाबले करीब 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। इसी कारण माइलेज में भी लगभग इतनी ही कमी देखने को मिल सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कार सामान्य तौर पर 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उसका माइलेज करीब 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर तक कम हो सकता है।

कार का माइलेज कैसे बढ़ाएं?

चाहे आपकी कार E10 पेट्रोल पर चलती हो या E20 पेट्रोल पर, अच्छी माइलेज पाने का सबसे आसान तरीका है संतुलित और आराम से ड्राइविंग करना। तेज रफ्तार में अचानक एक्सीलेटर दबाने, बार-बार तेज ब्रेक लगाने और इंजन को बेवजह ज्यादा आरपीएम (स्पीड) पर चलाने से बचें। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। शहर के ट्रैफिक में गाड़ी चलाते समय धीरे-धीरे एक्सीलेटर दबाएं। इससे इंजन पर कम दबाव पड़ता है और ईंधन की बचत होती है। वहीं, हाईवे पर जहां संभव हो, एक समान गति बनाए रखकर गाड़ी चलाने से भी बेहतर माइलेज मिल सकता है।

क्या टायर का प्रेशर माइलेज पर असर डालता है?

टायर में सही हवा होना कार की माइलेज के लिए बहुत जरूरी है। अगर टायर में हवा कम होगी, तो सड़क पर उसका रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाएगा। ऐसे में इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी और ईंधन की खपत भी बढ़ जाएगी। इसलिए कार मालिकों को कम से कम हर 15 दिन में एक बार टायर का प्रेशर जरूर जांचना चाहिए। हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए तय प्रेशर के अनुसार ही टायर में हवा भरवाएं। इससे न सिर्फ माइलेज बेहतर होगी, बल्कि टायर की उम्र भी बढ़ेगी।

क्या समय पर सर्विस न कराने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

अगर कार की सर्विस समय पर नहीं कराई जाती, तो उसका सीधा असर माइलेज पर पड़ सकता है। एयर फिल्टर गंदा या जाम होने, स्पार्क प्लग घिस जाने और इंजन ऑयल पुराना होने से इंजन पहले जितनी क्षमता से काम नहीं कर पाता। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाती है। इसलिए कार की नियमित सर्विस कराना बहुत जरूरी है। समय पर सर्विस होने से इंजन बेहतर तरीके से काम करता है, ईंधन की बचत होती है और कार की परफॉर्मेंस भी अच्छी बनी रहती है। हर कार के साथ मिलने वाली ओनर मैनुअल में सर्विस का पूरा शेड्यूल दिया होता है। उसी के अनुसार समय-समय पर सर्विस कराते रहें। यह न सिर्फ कार को बेहतर स्थिति में रखता है, बल्कि कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करने में भी मदद करता है।

क्या ज्यादा सामान रखने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

कार में जितना ज्यादा वजन होगा, इंजन को उसे चलाने के लिए उतनी ही ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए अगर आप डिग्गी में बिना जरूरत का भारी सामान रखते हैं, तो इससे ईंधन की खपत बढ़ सकती है और माइलेज कम हो सकती है। इसके अलावा, कार की छत पर लगाए जाने वाले रूफ कैरियर या रूफ बॉक्स भी हवा के प्रवाह में रुकावट पैदा करते हैं। खासकर हाईवे पर इनकी वजह से कार को आगे बढ़ने में ज्यादा ताकत लगती है, जिससे माइलेज पर असर पड़ता है।

क्या गाड़ी खड़ी होने पर इंजन चालू रखना सही है?

आज की पेट्रोल कारें खड़ी रहने पर भी ईंधन खर्च करती हैं। अगर आपको एक मिनट या उससे ज्यादा समय तक कहीं रुकना है, तो जहां संभव हो, इंजन बंद कर देना बेहतर होता है। इससे ईंधन की बचत होती है। आजकल कई नई कारों में ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम दिया जाता है। यह सुविधा ट्रैफिक सिग्नल या लंबे इंतजार के दौरान अपने आप इंजन बंद कर देती है और जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू कर देती है, जिससे ईंधन की बचत होती है।

क्या एसी चलाने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

जी हां, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप कार कैसे चला रहे हैं। अगर आप लंबे समय तक एसी को सबसे कम तापमान पर चलाते हैं, तो इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ईंधन की खपत बढ़ सकती है। बेहतर माइलेज के लिए एसी का तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, रीसर्कुलेशन मोड का इस्तेमाल करने से भी एसी जल्दी ठंडा करता है और ईंधन की बचत में मदद मिलती है।

क्या प्रीमियम पेट्रोल से माइलेज बढ़ जाती है?

हर बार ऐसा नहीं होता। अगर आपकी कार बनाने वाली कंपनी ने खास तौर पर प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी है, तो केवल ज्यादा ऑक्टेन वाला पेट्रोल भरवाने से माइलेज में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता। भारत में बिकने वाली ज्यादातर पेट्रोल कारें सामान्य पेट्रोल पर बेहतर तरीके से चलने के लिए बनाई जाती हैं। जिन कारों में E20 पेट्रोल की अनुमति है, वे भी सामान्य रूप से उसी ईंधन पर अच्छी तरह काम करती हैं। इसलिए बिना जरूरत सिर्फ माइलेज बढ़ाने के लिए प्रीमियम पेट्रोल पर अतिरिक्त खर्च करना जरूरी नहीं है।