कार का माइलेज हो रहा है कम? मारुति, हुंडई, टाटा और Kia समेत हर पेट्रोल कार के लिए जानिए ईंधन बचाने के सबसे आसान तरीके

भारत में कार खरीदते समय लोग सबसे पहले उसके माइलेज पर ध्यान देते हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब अच्छी माइलेज पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गई है। वहीं, देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बढ़ने के बाद भी ईंधन की बचत को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। हालांकि, कार कंपनियों का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन किसी भी कार का वास्तविक माइलेज काफी हद तक आपकी ड्राइविंग की आदत, गाड़ी की देखभाल और सड़क की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

चाहे आपके पास मारुति सुजुकी स्विफ्ट, हुंडई क्रेटा, टाटा नेक्सन, महिंद्रा XUV 3XO या किआ सेल्टोस जैसी कोई भी कार हो, कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप हर लीटर ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं और अपनी ईंधन लागत को कम कर सकते हैं।

क्या E20 पेट्रोल से कार का माइलेज कम हो जाता है?

E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में एनर्जी कम होती है। यही वजह है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कार का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। 4 जुलाई को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि E20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू, E10 पेट्रोल के मुकाबले करीब 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। इसी कारण माइलेज में भी लगभग इतनी ही कमी देखने को मिल सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कार सामान्य तौर पर 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उसका माइलेज करीब 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर तक कम हो सकता है।

कार का माइलेज कैसे बढ़ाएं?

चाहे आपकी कार E10 पेट्रोल पर चलती हो या E20 पेट्रोल पर, अच्छी माइलेज पाने का सबसे आसान तरीका है संतुलित और आराम से ड्राइविंग करना। तेज रफ्तार में अचानक एक्सीलेटर दबाने, बार-बार तेज ब्रेक लगाने और इंजन को बेवजह ज्यादा आरपीएम (स्पीड) पर चलाने से बचें। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। शहर के ट्रैफिक में गाड़ी चलाते समय धीरे-धीरे एक्सीलेटर दबाएं। इससे इंजन पर कम दबाव पड़ता है और ईंधन की बचत होती है। वहीं, हाईवे पर जहां संभव हो, एक समान गति बनाए रखकर गाड़ी चलाने से भी बेहतर माइलेज मिल सकता है।

क्या टायर का प्रेशर माइलेज पर असर डालता है?

टायर में सही हवा होना कार की माइलेज के लिए बहुत जरूरी है। अगर टायर में हवा कम होगी, तो सड़क पर उसका रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाएगा। ऐसे में इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी और ईंधन की खपत भी बढ़ जाएगी। इसलिए कार मालिकों को कम से कम हर 15 दिन में एक बार टायर का प्रेशर जरूर जांचना चाहिए। हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए तय प्रेशर के अनुसार ही टायर में हवा भरवाएं। इससे न सिर्फ माइलेज बेहतर होगी, बल्कि टायर की उम्र भी बढ़ेगी।

क्या समय पर सर्विस न कराने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

अगर कार की सर्विस समय पर नहीं कराई जाती, तो उसका सीधा असर माइलेज पर पड़ सकता है। एयर फिल्टर गंदा या जाम होने, स्पार्क प्लग घिस जाने और इंजन ऑयल पुराना होने से इंजन पहले जितनी क्षमता से काम नहीं कर पाता। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाती है। इसलिए कार की नियमित सर्विस कराना बहुत जरूरी है। समय पर सर्विस होने से इंजन बेहतर तरीके से काम करता है, ईंधन की बचत होती है और कार की परफॉर्मेंस भी अच्छी बनी रहती है। हर कार के साथ मिलने वाली ओनर मैनुअल में सर्विस का पूरा शेड्यूल दिया होता है। उसी के अनुसार समय-समय पर सर्विस कराते रहें। यह न सिर्फ कार को बेहतर स्थिति में रखता है, बल्कि कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करने में भी मदद करता है।

क्या ज्यादा सामान रखने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

कार में जितना ज्यादा वजन होगा, इंजन को उसे चलाने के लिए उतनी ही ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए अगर आप डिग्गी में बिना जरूरत का भारी सामान रखते हैं, तो इससे ईंधन की खपत बढ़ सकती है और माइलेज कम हो सकती है। इसके अलावा, कार की छत पर लगाए जाने वाले रूफ कैरियर या रूफ बॉक्स भी हवा के प्रवाह में रुकावट पैदा करते हैं। खासकर हाईवे पर इनकी वजह से कार को आगे बढ़ने में ज्यादा ताकत लगती है, जिससे माइलेज पर असर पड़ता है।

क्या गाड़ी खड़ी होने पर इंजन चालू रखना सही है?

आज की पेट्रोल कारें खड़ी रहने पर भी ईंधन खर्च करती हैं। अगर आपको एक मिनट या उससे ज्यादा समय तक कहीं रुकना है, तो जहां संभव हो, इंजन बंद कर देना बेहतर होता है। इससे ईंधन की बचत होती है। आजकल कई नई कारों में ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम दिया जाता है। यह सुविधा ट्रैफिक सिग्नल या लंबे इंतजार के दौरान अपने आप इंजन बंद कर देती है और जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू कर देती है, जिससे ईंधन की बचत होती है।

क्या एसी चलाने से कार का माइलेज कम हो जाता है?

जी हां, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप कार कैसे चला रहे हैं। अगर आप लंबे समय तक एसी को सबसे कम तापमान पर चलाते हैं, तो इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ईंधन की खपत बढ़ सकती है। बेहतर माइलेज के लिए एसी का तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, रीसर्कुलेशन मोड का इस्तेमाल करने से भी एसी जल्दी ठंडा करता है और ईंधन की बचत में मदद मिलती है।

क्या प्रीमियम पेट्रोल से माइलेज बढ़ जाती है?

हर बार ऐसा नहीं होता। अगर आपकी कार बनाने वाली कंपनी ने खास तौर पर प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी है, तो केवल ज्यादा ऑक्टेन वाला पेट्रोल भरवाने से माइलेज में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता। भारत में बिकने वाली ज्यादातर पेट्रोल कारें सामान्य पेट्रोल पर बेहतर तरीके से चलने के लिए बनाई जाती हैं। जिन कारों में E20 पेट्रोल की अनुमति है, वे भी सामान्य रूप से उसी ईंधन पर अच्छी तरह काम करती हैं। इसलिए बिना जरूरत सिर्फ माइलेज बढ़ाने के लिए प्रीमियम पेट्रोल पर अतिरिक्त खर्च करना जरूरी नहीं है।

Kia Price Hike 2026: 1 जुलाई से महंगी हो जाएंगी Kia की सभी कारें, जानें आपके बजट पर कितना बढ़ेगा बोझ

Kia Price Hike 2026: कई सेगमेंट में फोर-व्हीलर ऑफर करने वाली किया इंडिया ने कन्फर्म किया है कि 1 जुलाई से उसकी सभी कारों की कीमतों में 2% तक की बढ़ोतरी होगी। इसका मतलब है कि जो लोग अभी Seltos, Sonet या Carens खरीदने की सोच रहे हैं, उनके लिए महीने के खत्म होने से पहले ही बुकिंग करना बेहतर रहेगा। यह बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से अधिकतम 2.6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। कंपनी ने इसकी वजह बढ़ती इनपुट लागत और ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताई है, जो इस साल भारत में लगभग सभी ऑटो कंपनियों की तरफ से दी गई एक सामान्य वजह है। वहीं, अगर आप इस ब्रांड की कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो डीलरशिप पर जाने से पहले आपको यह समझना जरूरी है कि यह बढ़ोतरी बिक्री के लिए मौजूद सभी किया मॉडल्स पर एक जैसी नहीं होगी।

असल में आपको कितना ज्यादा पैसा देना होगा?

Kia ने अभी तक हर मॉडल के हिसाब से सटीक कीमतें नहीं बताई हैं, लेकिन प्राइस लिस्ट को देखें तो आप कहां से गाड़ी खरीद रहे हैं, उसके आधार पर कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग होगी। अभी सोनेट (Sonet) की कीमत ₹7.33 लाख से ₹14.18 लाख, सेल्टोस (Seltos) की ₹11 लाख से ₹20 लाख और कैरेंस (Carens) की ₹11.02 लाख से ₹12.88 लाख (सभी एक्स-शोरूम) के बीच है। सबसे महंगी सेल्टोस के वेरिएंट पर 2% की बढ़ोतरी का मतलब है लगभग ₹40,000 ज्यादा, जबकि सबसे सस्ती सोनेट ट्रिम की कीमत में कम बढ़ोतरी होगी, जो लगभग ₹14,000 से ₹15,000 के बीच होगी। किया का कहना है कि वह बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद उठा रही है, न कि पूरा बोझ ग्राहकों पर डाल रही है, हालांकि उसने यह नहीं बताया कि कितना हिस्सा वह खुद उठा रही है।

क्या सिर्फ Kia ऐसा कर रही है, या सभी ऐसा कर रहे हैं?

सिर्फ Kia ही नहीं। Tata Motors, Hyundai और Maruti Suzuki ने भी इस साल की शुरुआत में अपनी कुछ गाड़ियों की कीमतें बढ़ाई हैं, और इसकी वजह भी लागत का दबाव ही बताया है, इसलिए यह कोई अकेला मामला नहीं है। अगर आप Seltos की तुलना Hyundai Creta या Maruti Suzuki Grand Vitara जैसी गाड़ियों से कर रहे हैं, तो उम्मीद करें कि आने वाले महीनों में उनकी कीमतें भी बदलती रहेंगी। जो खरीदार Kia गाड़ी खरीदने का मन बना चुके हैं, उनके लिए समझदारी इसी में है कि वे 1 जुलाई से पहले बुकिंग पक्की कर लें, क्योंकि एक बार कीमतें बढ़ने के बाद वे आम तौर पर कम नहीं होतीं, चाहे बाद में बाजार का हाल कैसा भी रहे। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि हम Kia की पूरी लाइनअप की बात कर रहे हैं; इस बदलाव में Syros, Carens Clavis, Carens Clavis EV, Carnival, EV6 और EV9 भी शामिल हैं, न कि सिर्फ वे तीन मॉडल जिन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

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