युवा मानव सुथार ने गॉल टेस्ट में 10 विकेट चटकाकर बटोरी सुर्खियां

अपना दूसरा ही टेस्ट खेल रहे भारतीय बांए हाथ के स्पिनर मानव सुथार ने गॉल टेस्ट में 10 विकेट लेकर सूर्खियां बटोरी। भले ही देवदत्त पड्डीकल ने बल्ले से 167 और 44 रनों की पारी खेली हो लेकिन मानव सुथार का श्रेय नकारा नहीं जा सकता।

पहली पारी में भारत की ओर से मानव सुथार ने सर्वाधिक 4 विकेट लिए। उन्होंने अपने 21.4 ओवर के स्पैल में 76 रन दिए। दूसरी पारी में भी उन्होंने 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट निकाले। भोजनकाल के बाद मानव सुथार ने एक ही ओवर में 3 विकेट लेकर मैच को भारत की झोली में डाल दिया। आज बारिश के ना आने के कारण ही भारत यह मैच अपनी गिरफत में ले पाया।भाग्य का ऐसा साथ रहा कि भारत के मैच जीतते ही मैदान पर तेज बारिश शुरु हो गई।कुल 2 टेस्ट मैचों में ही मानव ने 17 विकेटों का आंकड़ा छू लिया है।

डेब्यू में छा गए थे मानव सुथार

जुलाई में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के सबसे बड़े स्टार रहे डेब्यूटेंट मानव सुथार। युवा स्पिनर ने अपने पहले ही टेस्ट मैच में शानदार गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में 6 विकेट झटके। उन्होंने अफगान बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और मैच पर भारत की पकड़ मजबूत कर दी।

अफगानिस्तान के खिलाफ पर्दापण टेस्ट मैच में 33 रन देकर छह विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज मानव सुथार, नरेंद्र हिरवानी के खास क्लब में शामिल हो गये थे। यह किसी भारतीय द्वारा पर्दापण टेस्ट पारी में दूसरा सबसे अच्छा गेंदबाजी प्रदर्शन था और लगभग चार दशकों में किसी भारतीय गेंदबाज का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था।राजस्थान के इस बाएं हाथ के स्पिनर ने सटीक लाइन-लेंथ, कंट्रोल और तेज टर्न के साथ अफगानिस्तान की बल्लेबाजी लाइन-अप को तहस-नहस कर दिया था। टेस्ट पदार्पण से पहले उन्होंने 29 प्रथम श्रेणी मैचों में 129 विकेट अपने नाम किए हैं।

कप्तान शुभमन ने की तारीफ

भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में दस विकेट लेकर टीम की 165 रन से जीत में अहम भूमिका निभाने वाले बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक देश की तरफ से खेलेंगे।गिल ने मैच के बाद कहा, ‘‘वह शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं। वह बहुत ही होनहार खिलाड़ी हैं। वह ऐसा खिलाड़ी है जो लंबे समय तक भारत के लिए खेल सकता है।’’

मानसून का इस बार खेती पर कैसा असर! खरीफ फसलों की बुआई का गैप घटकर 2% पहुंचा पर धान दे रहा टेंशन, समझिए इसके मायने

देश में इस साल मानसूनी बारिश की शुरुआती सुस्ती के बाद अब खेती-किसानी के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आ रही है। जून के महीने में बीते 12 सालों की सबसे कम बारिश (40 फीसदी घाटा) दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में हुई सामान्य बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया है। Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसूनी फसलों के रकबे में जून के मुकाबले बड़ा सुधार देखने को मिला है। अगर आने वाले दिनों में बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है तो इससे देश में खाद्यान्न की महंगाई को कंट्रोल करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

बुआई का अंतर घटकर 2% पर आया, 101.7 मिलियन हेक्टेयर में हुई बुआई

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक देशभर के किसानों ने 101.7 मिलियन हेक्टेयर (लगभग 251 मिलियन एकड़) में मानसूनी फसलों की बुआई पूरी कर ली है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में हुई बुआई के मुकाबले महज 2 फीसदी कम है। जून के महीने में अल नीनो के असर की वजह से यह अंतर काफी ज्यादा था।

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने बताया कि जून के बाद से बुआई की गति में काफी सुधार देखने को मिला है। दलहन, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुआई संतोषजनक दिख रही है। हालांकि कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से थोड़ा कम है तो कुछ दूसरी फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी देखी गई है।

अगस्त और सितंबर की बारिश होगी बेहद अहम

भारत की कुल वार्षिक बारिश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही मिलता है। यह मानसून न सिर्फ फसलों की सिंचाई के लिए बल्कि भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी बहुत जरूरी है। जून से सितंबर तक चलने वाले इस सीजन में उगाई जाने वाली फसलें देश के कुल वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा होती हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 17 अगस्त तक देश में क्यूमेलेटिव बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। कृषि सचिव ने स्पष्ट किया कि फसलों की पैदावार और अंतिम उत्पादन के लिए अगस्त और सितंबर महीनों की बारिश बेहद निर्णायक साबित होगी। इसके लिए कृषि मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है। आतिश चंद्रा ने कहा कि हम राज्यों से आग्रह कर रहे हैं कि वे किसानों को इस सीजन में उपलब्ध सभी भूमि पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही बुआई में थोड़ी देरी ही क्यों न हो रही हो।

धान की बुआई पिछड़ी, लेकिन अभी भी उम्मीद बरकरार

खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल यानी धान का रकबा अभी भी पिछले आंकड़ों से पीछे चल रहा है। ये चिंता का विषय बना हुआ है। वैसे कृषि सचिव का कहना है कि किसानों के पास अगस्त के अंत तक और कुछ राज्यों/क्षेत्रों में सितंबर के महीने तक भी धान की रोपाई करने का समय उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी फसलों के अंतिम उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि राज्यों के साथ समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

इसका सप्लाई और महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?

अगर मानसूनी बारिश और फसलों की बुआई में यह रिकवरी नहीं होती तो देश में खाद्यान्न की सप्लाई प्रभावित हो सकती थी। सप्लाई घटने से खाने के सामान की कीमतें बढ़तीं और महंगाई पर काबू पाने की सरकारी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था। कृषि और खाद्य बाजार पर दबाव के संकेत पहले से ही दिखने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो भारत लगभग एक दशक में पहली बार चीनी के आयात शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है ताकि घरेलू स्तर पर कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके।

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आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

Can You Drink Rain Water

Can You Drink Rain Water: बादलों से बरसती बूंदें जितनी राहत देती हैं, उतनी ही मन में एक बड़ी उलझन भी छोड़ जाती हैं—क्या गिलास भरकर बारिश का यह पानी पिया जा सकता है? पहली नज़र में कांच सा साफ़ दिखने वाला यह पानी सीधा पीने के लिए मुफ़ीद नहीं होता।

 

क्यों नहीं पीना चाहिए सीधा बारिश का पानी?

हवा का ज़हर: बूंदें आसमान से ज़मीन तक पहुँचते-पहुँचते हवा में मौजूद धूल, धुएं, टॉक्सिक केमिकल्स और स्मॉग को अपने अंदर समेट लेती हैं।

बैक्टीरिया का घर: जब यह पानी छतों, नालियों या पाइपों से होकर बहता है, तो इसमें छिपे सूक्ष्मजीव और नुकसानदेह बैक्टीरिया आसानी से घुल जाते हैं।

एसिडिक कुदरत: वायुमंडलीय गैसों के संपर्क में आने से कई बार बारिश के पानी में एसिडिक यानी अम्लीयता की मात्रा बढ़ जाती है, जो सेहत पर भारी पड़ सकती है।

 

पीने लायक न सही, पर बेहद काम की हैं ये बूंदें

भले ही आप इसे सीधे गटक न सकें, लेकिन पानी की हर बूंद को कई स्मार्ट तरीकों से काम में लाया जा सकता है:

पौधों की सेहत का राज: यह पानी नेचुरल मिनरल्स का खजाना होता है। बागवानी में इसका इस्तेमाल आपके घर के पौधों को नई रंगत देता है।

चमकदार घर और गाड़ियां: फर्श पोंछने, खिड़कियों और बर्तन चमकाने से लेकर अपनी चमचमाती कार धोने तक, यह पानी पानी की बर्बादी रोकता है।

लॉन्ड्री और फ्लशिंग: कपड़े धोने से लेकर टॉयलेट फ्लश तक के भारी-भरकम इस्तेमाल में बारिश का पानी सबसे बेहतर विकल्प है।

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पानी सहेजने के तरीके और कुछ जरूरी सावधानियां

छत पर टैंक सेट करके या फिर प्लास्टिक के बड़े बैरल और ड्रम लगाकर आप इस बरसाती खजाने को आसानी से जमा कर सकते हैं। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान ज़रूर रखें:

  • जिस ड्रम या टैंक में पानी स्टोर कर रहे हों, उसे पहले अच्छी तरह साफ-सुथरा कर लें।
  • पानी जमा करते वक्त एक बुनियादी फिल्टर ज़रूर लगाएं ताकि पत्तियां या कचरा अंदर न जाए।
  • अगर किसी मजबूरी में इस पानी को लंबे समय तक इस्तेमाल या किसी काम में लेना पड़े, तो इसे अच्छी तरह उबाल लेना ही समझदारी है।
  • कुदरत की इस अमूल्य देन को सही तरीके से सहेजकर आप न सिर्फ अपने पानी का बिल घटा सकते हैं, बल्कि धरती को बचाकर एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़ भी निभा सकते हैं।

 

Galle Test: मानव सुथार यानी ‘फिरकी का नया जादूगर’, 10 विकेट झटक श्रीलंका को किया चारों खाने चित

श्रीलंका की धरती पर एक बार फिर भारतीय टीम ने जीत का झंडा गाड़ दिया है। बुधवार को गॉल में खेले गए पहले टेस्ट के पांचवें और आखिरी दिन भारत ने श्रीलंका को 165 रन से हरा दिया। इस जीत के हीरो मानव सुथार रहे, जिन्होंने मैच में कुल 10 विकेट लिए। भारत ने इस जीत के साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। यह भारत के 600वें टेस्ट मैच में मिली जीत भी है।मानव सुथार ने मैच का अपना 10वां विकेट भारी बारिश शुरू होने से ठीक पहले लिया। उनके विकेट लेते ही मैच खत्म हो गया और करीब पांच मिनट बाद गॉल में तेज बारिश शुरू हो गई।

मानव सुथार के जाल में फंसे श्रीलंका के बल्लेबाज

गॉल की पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। ऐसे मैदान पर मिली यह जीत भारत का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। इससे पहले भारत को घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्पिन वाली पिचों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। कुछ हिस्से तक भारतीय गेंदबाजों का सामना किया, लेकिन आखिरकार 206 रन पर पूरी टीम ऑलआउट हो गई। मानव सुथार ने श्रीलंका के आखिरी चार विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी।सुथार ने दूसरी पारी में 55 रन देकर 6 विकेट लिए। यह लगातार दूसरा टेस्ट था, जिसमें उन्होंने एक पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में भी उन्होंने 5 विकेट लिए थे। इस मैच की पहली पारी में भी सुथार ने श्रीलंका के 4 बल्लेबाजों को आउट किया था।

सीरीज के पहले ही मैच 10 विकेट किया अपने नाम

लंच के बाद श्रीलंका ने 6 विकेट पर 175 रन से खेलना शुरू किया और बिना कोई विकेट गंवाए स्कोर 199 रन तक पहुंचा दिया। उस समय लगा कि मेजबान टीम मुकाबले में वापसी कर सकती है, लेकिन तभी मानव सुथार ने गेंदबाजी में वापसी की और लगातार विकेट लेकर मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में कर दिया।76वें ओवर में मानव सुथार ने सोनल दिनुशा को 84 रन के स्कोर पर आउट किया। इसके बाद उन्होंने लगातार दो गेंदों पर प्रभात जयसूर्या और लाहिरू कुमारा को पवेलियन भेज दिया। इन विकेटों के साथ श्रीलंका का स्कोर 9 विकेट पर 199 रन हो गया।

 

सुथार को गेंद से अच्छी टर्न और उछाल मिल रही थी। उन्होंने केशरा नुवंथा को बोल्ड कर श्रीलंका की पारी खत्म कर दी और भारत को 165 रन से शानदार जीत दिलाई। हालांकि, सोनल दिनुशा और श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को जीत के लिए उम्मीद से ज्यादा इंतजार कराया। दोनों ने भारतीय गेंदबाजों का अच्छी तरह सामना किया, लेकिन सुथार के लगातार विकेटों ने श्रीलंका की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं।

मैच में लिए ये अहम विकेट

रात से नाबाद खेल रहे सोनल दिनुशा और धनंजय डी सिल्वा ने 202 गेंदों पर 95 रन की साझेदारी की। दोनों ने शुरुआती सेशन में एक घंटे से ज्यादा समय तक भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसाए रखा। भारतीय स्पिनरों के खिलाफ श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने एक बार फिर स्वीप शॉट का खूब इस्तेमाल किया। मैच में पहले भी यह तरीका उनके लिए काफी कारगर रहा था। भारत की ओर से रवींद्र जडेजा सबसे प्रभावी स्पिनर रहे। उन्होंने लगातार सही लाइन पर गेंदबाजी की और पिच से अच्छी पकड़ भी हासिल की। मानव सुथार ने दिन की शुरुआत में ज्यादा ओवर नहीं किए, लेकिन उनकी गेंदबाजी लगातार खतरनाक बनी रही। दूसरी ओर, कुलदीप यादव को पिच की खुरदरी सतह से ज्यादा मदद नहीं मिली। उनकी गेंदें भी काफी सपाट रहीं। कुलदीप ने ‘अराउंड द विकेट’ गेंदबाजी करते हुए एंगल बनाने की कोशिश की, लेकिन इस वजह से उनके लिए बल्लेबाज को LBW आउट करने का मौका कम हो गया।

धनंजय डी सिल्वा ने 125 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की। इसके कुछ ही देर बाद सोनल दिनुशा ने भी अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। दिनुशा की फिफ्टी खास रही। उन्होंने कुलदीप यादव की गेंद पर स्लॉग-स्वीप खेलकर छक्का लगाया और अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद रवींद्र जडेजा ने धनंजय डी सिल्वा को आउट कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई। जडेजा की गेंद में अतिरिक्त उछाल आया और डी सिल्वा के स्वीप शॉट का टॉप-एज लगा। गेंद शॉर्ट फाइन लेग पर खड़े मानव सुथार के हाथों में चली गई।

इसके बाद निरोशन डिकवेला ने श्रीलंका के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की। पहली पारी में उन्होंने संभलकर बल्लेबाजी की थी, लेकिन इस बार उन्होंने कुलदीप यादव और जडेजा के खिलाफ बड़े शॉट खेलने की कोशिश की। वह लगातार स्लॉग-स्वीप खेलने के प्रयास में थे, लेकिन आखिरकार प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर आउट हो गए।

भारत को मिली शानदार जीत

निरोशन डिकवेला ने खुद के लिए जगह बनाकर कवर के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर उनके बल्ले का किनारा लगा। गेंद विकेट के पीछे खड़े ऋषभ पंत के हाथों में चली गई और डिकवेला आउट हो गए। इसके बाद सोनल दिनुशा और केशरा नुवंथा ने करीब 30 मिनट तक हिम्मत और थोड़े भाग्य के सहारे बल्लेबाजी की। श्रीलंका को उम्मीद थी कि वह किसी तरह समय निकाल ले और मौसम खराब होने से पहले मैच को बचाने की कोशिश करे। लेकिन मानव सुथार के दोबारा गेंदबाजी पर आते ही श्रीलंका की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। मिडिल सेशन में 30 मिनट से कुछ ज्यादा समय के अंदर श्रीलंका का निचला क्रम बिखर गया। बारिश शुरू होने से ठीक पहले सुथार ने केशरा नुवंथा को आउट कर अपने 10 विकेट पूरे किए और भारत को शानदार जीत दिला दी।

पहाड़ों में बसने का सपना 71 दिनों में ही टूटा! दिल्ली छोड़ मनाली रहने गए Gen Z कंटेंट क्रिएटर ने लौटकर क्या बताया?

भागदौड़ भरी जिंदगी, शहरों में पलूशन वाली जहरीली हवा और तेज रफ्तार लाइफ से ऊबकर पहाड़ों की शांत वादियों में जा बसना आज हर वर्किंग युवा का सपना लगता है। वर्क फ्रॉम होम और रील्स की दुनिया में हर कोई बस यही सोचता है कि काश! वो भी सब कुछ छोड़कर पहाड़ों में हमेशा के लिए बस जाए। दिल्ली के रहने वाले एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही किया। वो यह देखने मनाली पहुंचे कि क्या सचमुच पहाड़ों की जिंदगी वैसी ही हसीन होती है जैसी तब लगता है जब हम छुट्टियां मनाने पहाड़ पहुंचते हैं या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई छिपी है?

अजय ने 23 मई को दिल्ली से मनाली के पास बसे छोटे से गांव सियाल में शिफ्ट हुए थे। उनका इरादा था कि वो यहां टूरिस्ट बनकर नहीं बल्कि लोकल शख्स की तरह रहें। अजय ने पूरे 71 दिन पहाड़ों में बिताए, इस दौरान करीब 55 वीडियो बनाए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पल इंटरनेट पर लोगों के साथ शेयर किया। लेकिन 2 अगस्त आते-आते उनका यह सपना सिमट गया और वो वापस दिल्ली लौट आए।

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जब अनजाने रास्ते और अजनबी लोग धीरे-धीरे अपने से लगने लगेअजय जब मनाली पहुंचे थे तो वहां उनका कोई अपना नहीं था, कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन देखते ही देखते वो वहां की गलियों, रास्तों, हसीन वादियों और लोकल लोगों के करीब आ गए, उनसे घुल-मिल गए। जो काम सिर्फ एक प्रयोग की तरह शुरू हुआ था, वो उनकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन गया।

दिल्ली लौटने के बाद एक वीडियो में उन्होंने मनाली की अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ दो महीने से थोड़े ज्यादा वक्त में जिस जगह से उनका इतना दिल लग गया था, उसे छोड़कर आना दर्दनाक था। अजय के मुताबिक इस तजुर्बे ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहराई और जिंदगी का नया नजरिया दिया। मनाली को अलविदा कहना उनके लिए बेहद मुश्किल था क्योंकि यह सिर्फ कोई ट्रिप खत्म नहीं हो रही थी बल्कि उनकी जिंदगी के एक नए दौर की शुरुआत थी।

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क्या वाकई पहाड़ों में बसना उतना ही हसीन है, जितना छुट्टियों में दिखता है?

अजय के मनाली शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह एक सीधे से सवाल का जवाब तलाशना था। वो ये कि क्या पहाड़ों में बसकर रहना सचमुच उतना ही मजेदार है जितना वहां कुछ दिनों की छुट्टियां बिताना? मनाली जाने से पहले अजय के दिलो-दिमाग में भी एक आम शहर की तरह ही खूबसूरत ख्यालात थे, पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच काम करना, ढलते और उगते सूरज को देखना, आसपास की वादियों में घूमना, वहां का लोकल फूड ट्राई करना और रात में अलाव के गिर्द बैठकर लोगों से बातें करना।

इनमें से कई हसीन पल उन्होंने जिए भी। लेकिन वहां फुल टाइम रहने पर उन्हें उन मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा जो अक्सर तब नहीं समझ में आतीं जब हम छुट्टियों में पहाड़ घूमने जाते हैं।

मनाली में रहने का खर्च: उम्मीद से कहीं ज्यादा किफायती!मनाली में रहने के दौरान अजय का सबसे हैरान कर देने वाला अनुभव वहां का खर्च रहा। ये उनकी उम्मीद से काफी कम निकला। अजय सियाल गांव में 14000 रुपये महीने के किराये पर अकेले एक वन-बैडरूम फ्लैट में रहते थे। इस किराये में वाई-फाई और बिजली का बिल दोनों शामिल थे। वो ज्यादातर वक्त घर पर ही खाना खुद बनाते थे। राशन और ग्रोसरी पर महीने का लगभग 3500 रुपये खर्च आता था। जब कभी खाना पकाने का मन न होता, तो वो हफ्ते में एक-दो बार बाहर खा लेते थे। इसमें करीब 500 रुपये हफ्ते का खर्च बैठता था।

फिटनेस के शौकीन अजय ने वहां का एक लोकल जिम भी जॉइन किया। वैसे तो जिम की फीस 1800 रुपये महीना थी, लेकिन उन्होंने बात करके इसे 1500 रुपये करवा लिया। अजय को गाड़ियों के बजाय पैदल चलना पसंद था, इसलिए लोकल ट्रैवल पर उनका न के बराबर पैसा खर्च होता था। अगर इन सारे खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो मनाली में अजय का कुल मासिक खर्च करीब 21000 रुपये के आसपास आता था।

वो दिक्कतें जो आम पर्यटकों की नजरों से हमेशा छिपी रह जाती हैं

मनाली ने अजय को सुकून और नए अनुभव तो दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते कुछ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम भी सामने आईं। पहाड़ों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती थी, जिससे ऑनलाइन काम करना या वर्क फ्रॉम होम संभालना बेहद मुश्किल हो जाता था। पहाड़ों का मौसम मजेदार होने के साथ टेंशन देने वाला भी मिला। बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती थी। मानसून के आते ही सड़कें और रोजमर्रा की आवाजाही बेहाल हो गई।

यहां अकेले रहने का मतलब था कि खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई और घर के बाकी सारे काम अजय को खुद ही करने पड़ते थे। मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचने के लिए लंबी और सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। छुट्टियों में ऐसी ट्रैकिंग भले ही रोमांचक लगे लेकिन हर दिन ऐसा करना शरीर को तोड़कर रख देता है। सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अकेलापन। जिस खामोशी और शांति की तलाश में वो दिल्ली से भागे थे, वही सन्नाटा धीरे-धीरे दीमक की तरह उन्हें काटने लगा और भारी अकेलेपन में बदल गया।

अजय ने 3 जुलाई को शेयर किए गए एक वीडियो में इन तमाम दुश्वारियों का जिक्र किया था और बताया था कि आखिर क्यों पहाड़ों में उनका स्टे समय से पहले खत्म होने जा रहा है।

मनाली से लौटकर अब एक नई राह पर हैं अजय

मनाली का अपना 71 दिनों का आशियाना छोड़कर अजय अब वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन पहाड़ों को लेकर उनका नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। इस छोटे से स्टे ने उन्हें एक बड़े शहर से दूर रहने की खूबसूरती और उसकी कड़वी सच्चाइयों दोनों से रूबरू करा दिया। अजय आज भी मनाली में बिताए अपने इन दिनों को जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल मानते हैं। दिल्ली लौटने के बाद अब वो जिंदगी को एक नए अंदाज में खंगाल रहे हैं। उनके हालिया वीडियो बता रहे हैं कि पहाड़ों की बर्फीली वादियों के बाद अब वो समुद्र के शांत किनारों पर अपना वक्त बिता रहे हैं।

भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर पाई टेस्ट सीरीज में बढ़त

INDvsSL भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से गॉल टेस्ट में हराकर टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। 372 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही  श्रीलंका को भारत ने 206 रनों पर समेट दिया और सीरीज में निर्णायक बढ़त बना ली। करीब 1 साल बाद भारत किसी बड़ी टीम के खिलाफ जीता है। इससे पहले भारत ने लीड्स में इस ही दौरान इंग्लैंड को हराकर सीरीज 2-2 से बराबर की थी।

भारत की पहली पारी में 462 रन बनाए लेकिन बारिश के कारण यह पारी 2 दिन तक चली। श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 284 रन बनाए और बमुश्किल फॉलोऑन टाल पाई। भारत की दूसरी पारी 194 रनों पर सिमट गई और श्रीलंका के लिए 372 रनों का लक्ष्य दिया गया। श्रीलंका की दूसरी पारी महज 206 रनों पर सिमट गई और इस तरह भारत ने गॉल टेस्ट अपने नाम कर लिया।

77 पर 4 विकेट खोकर अंतिम दिन बल्लेबाजी करनी उतरी श्रीलंका ने मैच के पहले देढ़ घंटे संयम से बल्लेबाजी की लेकिन पहले ज़ड़ेजा और फिर प्रसिद्ध कृष्णा ने टीम को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। भोजनकाल तक श्रीलंका 6 विकेट के नुकसान पर 175 रन बना चुकी थी।

भोजनकाल के बाद मानव सुथार ने एक ही ओवर में 3 विकेट लेकर मैच को भारत की झोली में डाल दिया। आज बारिश के ना आने के कारण ही भारत यह मैच अपनी गिरफत में ले पाया।भाग्य का ऐसा साथ रहा कि भारत के मैच जीतते ही मैदान पर तेज बारिश शुरु हो गई।

Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।

Delhi Weather Today: राजधानी में आज फिर बरसेंगे बदरा, IMD ने बताया इस हफ्ते कैसा रहेगा मौसम?

Delhi Weather Today: दिल्ली में बुधवार (19 अगस्त) को मौसम सुहाना रहने के साथ बारिश के आसार हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज राजधानी के कई इलाकों में हल्की बारिश, जबकि कुछ जगहों पर मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर तक कई स्थानों पर हल्की बारिश की एक या दो बौछारें पड़ेंगी, जबकि कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, शाम से रात तक हल्की से मध्यम बारिश की एक और बौछार पड़ने की संभावना है।”

19 अगस्त को, IMD ने अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान लगाया है।

दिल्ली के मौसम का साप्ताहिक पूर्वानुमान

IMD ने अनुमान लगाया है कि दिल्ली में 23 अगस्त तक बारिश हो सकती है, जबकि 24 अगस्त को बारिश नहीं होगी।

20 अगस्त के लिए IMD ने हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है। पूर्वानुमान के अनुसार, “आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कई जगहों पर हल्की बारिश और कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। शाम से रात के समय भी बहुत हल्की से हल्की बारिश का एक और दौर हो सकता है।” इस दौरान अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

21 अगस्त से बारिश की रफ्तार होगी कम

21 अगस्त को बारिश की तीव्रता कम होकर बहुत हल्की बारिश में बदलने की उम्मीद है। IMD ने 21, 22 और 23 अगस्त को बहुत हल्की से हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। तीनों दिनों के लिए अनुमान में कहा गया है, “आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।”

इन दिनों अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

24 अगस्त से बारिश पर लग सकता है ब्रेक

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 अगस्त को दिल्ली में बारिश का दौर थम सकता है। इस दिन बारिश की कोई संभावना नहीं है और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रह सकते हैं।

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2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

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वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस संभावित संकट के पीछे भूराजनीतिक तनाव, उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी और अल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के पैटर्न को प्रमुख कारण माना गया है।

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2027 की पहली छमाही में महंगाई 5% तक पहुंचने का अनुमान

 

रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के पहले छह महीनों में वैश्विक महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है। इसकी तुलना में 2026 की इसी अवधि में यह करीब 2.8% रही थी।

 

संभावित संकट केवल खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने और मौसम में अनिश्चितता के कारण किसानों के लिए फसल उत्पादन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। अगर खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो विकासशील देशों में परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खाद्य वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है।

 

उर्वरक की कमी बढ़ा सकती है चिंता

 

संभावित खाद्य संकट में उर्वरक आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल यूरिया निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 42%, जबकि अमोनिया निर्यात में हिस्सेदारी करीब 27% है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

 

रिपोर्ट में एक संभावित घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया गया है। इसके अनुसार, संघर्ष से ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी, उत्पादन में गिरावट और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बाधित आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में एक से चार साल तक का समय लग सकता है।

 

अल नीनो से फसल उत्पादन पर बढ़ सकता है दबाव

 

अल नीनो से जुड़े मौसम में बदलाव वैश्विक कृषि पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के दौरान सूखा, बाढ़ और अन्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो के कारण फसल उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, एक 'सुपर अल नीनो' वैश्विक खाद्य महंगाई को करीब 0.7% तक बढ़ा सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव 1.3% से 1.5% तक पहुंच सकता है।

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भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर

 

भारत में अगर मानसून कमजोर या अनियमित रहता है तो कृषि क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर धान, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर बारिश के बदलते पैटर्न का प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत के सामने चुनौती केवल पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने की नहीं होगी, बल्कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए कृषि उत्पादन की लागत को वहनीय बनाए रखना भी होगी।

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ब्राजील और इंडोनेशिया भी जोखिम वाले देशों में

 

रिपोर्ट में ब्राजील और इंडोनेशिया को भी संभावित खाद्य संकट से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल किया गया है। कृषि लागत में वृद्धि, फसल उत्पादन में कमी, उर्वरक की संभावित कमी और प्रतिकूल मौसम इन देशों में खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। हालांकि, संभावित संकट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भूराजनीतिक तनाव, उर्वरक की उपलब्धता, ऊर्जा कीमतों और मौसम की स्थिति किस तरह बदलती है।

आखिरी बारिश में इतना क्यों टर्र-टर्र करते हैं मेंढक? 1 KM दूर तक सुनाई देती है आवाज! जानें वजह

बारिश शुरू होते ही रात के समय मेंढकों की ‘टर्र-टर्र’ टर्राने की आवाजें ज्यादा सुनाई देने लगती हैं। बारिश के मौसम में उनकी आवाज इतनी तेज होती है कि ऐसा लगता है की वो हमारे आस-पास ही है। लेकिन ऐसा नहीं होता है बल्कि ये आवाज काफी दूर से आती है। बारिश का मौसम मेंढकों के लिए प्रजनन (रिप्रोडक्शन) का सही समय होता है। इसलिए वे साथी को अट्रैक्ट करने और अपनी मौजूदगी बताने के लिए ज्यादा आवाज करते हैं। इसी आवाज से मादा को सही साथी चुनने में मदद मिलती है। इसलिए बारिश के दिनों में तालाबों, गड्ढों और पानी जमा होने वाली जगहों के आसपास मेंढकों की टर्राने की आवाज ज्यादा सुनाई देती है। जानें इसके बारे में

मध्य प्रदेश के सागर के जूलॉजी विभाग के एक्सपर्ट डॉ. मनीष जैन के अनुसार, बारिश के मौसम में पानी जमा होने से मेंढकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। तालाब और आसपास के इलाकों में पानी मिलने से उन्हें खाने, घूमने और प्रजनन (रिप्रोडक्शन) के लिए बेहतर माहौल मिलता है। इसी वजह से मॉनसून के दौरान मेंढक ज्यादा एक्टिव होकर बार-बार टर्राते हैं।

बारिश के मौसम में होते हैं ज्यादा एक्टिव

मेंढकों की आवाज का इस्तेमाल सिर्फ प्रजनन (रिप्रोडक्शन) या आपसी मुकाबले के लिए नहीं होता। एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ आवाजें आसपास मौजूद दूसरे मेंढकों को खतरे की जानकारी देने के लिए भी होती हैं। ऐसे संकेत मिलने पर दूसरे मेंढक सतर्क हो जाते हैं और खतरा महसूस होने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं। बारिश के दिनों में मेंढकों की आवाज सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा तेज और साफ सुनाई देती है। मानसून में मेंढक पानी के आसपास अधिक एक्टिव रहते हैं। गीले वातावरण में उनकी आवाज दूर तक पहुंचती है, इसलिए कई बार ऐसा लगता है कि मेंढक पास ही टर्रा रहे हैं, जबकि वे काफी दूरी पर हो सकते हैं।

एक किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है आवाज

मेंढक का आकार उसकी आवाज की पहुंच तय नहीं करता। बारिश की रातों में कुछ छोटे मेंढकों की टर्राने की आवाज भी करीब एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दे सकती है। हालांकि, यह उनकी प्रजाति और आसपास के माहौल पर निर्भर करता है कि आवाज कितनी दूर तक पहुंचेगी। दुनिया में मेंढकों की हजारों प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनका आकार, रंग और आवाज अलग-अलग होती है। बुंदेलखंड में भी कई तरह के मेंढक मिलते हैं, जो मानसून के दौरान अधिक सक्रिय नजर आते हैं।

बारिश के बाद पानी जमा होने से मेंढकों को प्रजनन (रिप्रोडक्शन) और सक्रिय रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। पानी के आसपास वे बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे से आवाज के जरिए संपर्क करते हैं, इसलिए बारिश के बाद उनकी टर्राने की आवाज अचानक बढ़ जाती है।