Experts View : अगले हफ्ते निफ्टी के 24000 के नीचे जाने की संभावना कम, बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

अगले हफ्ते निफ़्टी के 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे टूटने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है, इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। ये बातें SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। उनके मुताबिक बहुत आक्रामक बिकवाली न होने से पता चलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है। निफ्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनमें से ज्यादातर एवरेज अब फ्लैट हो गए हैं,जो बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन (बाजार के एक दायरे में रहने) का संकेत दे रहे हैं।

उनका मानना ​​है कि हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स से निकट भविष्य में बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है।

अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम

बाजार की चाल पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है,इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। पिछले सात ट्रेडिंग सेशन में निफ़्टी 24,379 और 24,077 के दायरे में ही घूमता रहा है,जिससे साफ पता चलता है कि इसमें किसी खास दिशा में बढ़ने का मोमेंटम नहीं है। इंडेक्स अपने 200-दिन के EMA के ऊपर टिक नहीं पाया और हफ्ते के आखिर में 24,200 के आस-पास बंद हुआ,जो लगातार तीसरी वीकली गिरावट है। हालांकि,जबरदस्त बिकवाली न होने से संकेत मिलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ़्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनके ज्यादातर एवरेज अब सपाट हो गए हैं,जो किसी बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। मोमेंटम इंडिकेटर भी इस बात का सपोर्ट कर रहे हैं। डेली RSI पिछले 13 सेशन से एक ही दायरे में बना हुआ है,जबकि स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर भी एक रेंज में ही ऊपर-नीचे हो रहा है,जो बाजार में अनिश्चितता की भावना को दिखाता है।

अब निफ्टी के लिए 24,000-23,950 का जोन काफी अहम हो गया है,जो पिछले स्विंग लो और ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन सपोर्ट से मेल खाता है। अगर निफ्टी लगातार 23,950 के नीचे बना रहता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स जल्द ही 23,700 की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,250-24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रेंज के किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने से बाजार की अगली चाल तय हो सकती है।

अगले हफ्ते बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

बैंक निफ्टी पर बात करते हुए सुदीप शाह ने कहा कि ऐसा लगता है कि अगले हफ्ते बैंक निफ़्टी में एक मजबूत चाल देखने को मिल सकती है,हालांकि ब्रेकआउट किस दिशा में होगा,यह अभी तय नहीं है। पिछले कुछ सेशन से इंडेक्स लगभग 1,075 अंकों के दायरे में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि मार्केट में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है और न ही तेजड़िए और न ही मंदड़ियों का साफ दबदबा दिख रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए एक अहम घटना डेली चार्ट पर बोलिंगर बैंड स्क्वीज़ का बनना है,जो उतार-चढ़ाव में भारी कमी का संकेत है। ऐसे सेटअप के बाद अक्सर कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिलती है,जिससे संकेत मिलता है कि बैंक निफ्टी में जल्द ही एक बड़ा ब्रेकआउट हो सकता है।

मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं,जिसमें RSI और स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर दोनों ही साइडवेज (एक ही दायरे में)चल रहे हैं। ADX गिरकर 7.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है,जो बहुत कमजोर ट्रेंड का संकेत है। पिछले आंकड़ों की बात करें तो ADX की ऐसी कम रीडिंग के बाद अक्सर कीमतों में किसी एक दिशा में तेज चाल देखने को मिलती है।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी के लिए 58,000-58,200 का स्तर अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है,जबकि 57,200-57,000 एक अहम सपोर्ट एरिया है। इन दोनों में से किसी भी जोन के पार निर्णायक ब्रेकआउट से बैंक निफ्टी के अगले बड़े ट्रेंड का पता चलने की संभावना है।

जारी रहेगी छोटे-मझोले शेयरों का आउटपरफॉर्मेंस

सुदीप शाह का मानना है कि आगे मिड और स्मॉलकैप स्टॉक बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन करते दिख सकते हैं। उनका कहना है कि हाल की तेजी के बाद बीच-बीच में होने वाली प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निकट भविष्य में ब्रॉडर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है। निफ़्टी मिडकैप 100 और निफ़्टी स्मॉलकैप 100 दोनों ने नए रिकॉर्ड स्तर छुए हैं,जो मज़बूत मार्केट भागीदारी और बेहतर सेंटीमेंट को दिखाते हैं।

तकनीकी तौर पर ये दोनों इंडेक्स मजबूत अपट्रेंड में बने हुए हैं और अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। साथ ही मोमेंटम इंडिकेटर भी बुलिश जोन में हैं। निफ्टी मिडकैप 100 के लिए, 63,700-63,500 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया है। अगर यह इसके ऊपर बना रहता है,तो यह इंडेक्स 65,000-65,800 के स्तर तक जा सकता है।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 के लिए 19,980-19,950 एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। 20,150 के स्तर को मजबूती से पार करने पर नई खरीदारी का मोमेंटम बन सकता है और इंडेक्स 20,400-20,600 के स्तर तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर,इनका ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

 

बाजार का मौजूदा मिजाज किसी भी एक दिशा में साफ नहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रहेगी सबसे अच्छी -अमोल अठावले

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बाजार का मौजूदा मिजाज किसी भी एक दिशा में साफ नहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रहेगी सबसे अच्छी -अमोल अठावले

Market Trend: भारतीय इक्विटी मार्केट ने 28 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते की क्लोजिंग सतर्कता भरे रुख के साथ की। ग्लोबल इंटरेस्ट रेट,जियोपॉलिटिकल रिस्क और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से जुड़ी वोलैटिलिटी के चलते निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव दिखा,जिससे बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा। हालांकि,शुक्रवार को ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों से मिले पॉजिटिव संकेतों के बीच IT शेयरों में जबरदस्त खरीदारी आई। इससे बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली,फिर भी बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए।

निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले का कहना है कि पिछले हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के बाद एक सीमित दायरे में कारोबार होता दिखा। निफ्टी 0.31 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 310 अंकों की गिरावट आई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई,जबकि FMCG इंडेक्स में सबसे ज्यादा 1.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक बेयरिश कैंडल बनाया है और ऊपर की तरफ इसे लगातार 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,350/77,900 जोन के पास रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है,जो काफी हद तक नेगेटिव संकेत है।

अमोल अठावले का मानना ​​है कि शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का मिजाज कमज़ोर है,लेकिन नई बिकवाली तभी हो सकती है जब 24,100/77,100 का लेवल टूटे। अगर ऐसा होता है तो मार्केट 24,000-23,800/76,800-76,200 तक गिर सकता है। दूसरी ओर 50-डे SMA या 24,200/77,500 ट्रेडर्स के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन का काम करेगा। अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर ट्रेड करने में कामयाब रहता है तो यह 24,350/77,900 पर स्थित 20डे SMA को फिर से टेस्ट कर सकता है। इसके बाद भी और तेजी आ सकती है,जिससे इंडेक्स 24,500/78,400 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय

अमोल अठावले की राय है कि बैंक निफ्टी के लिए 50 और 20 डे के SMA या 57,700 का स्तर ट्रेडर्स के लिए तुरंत ध्यान देने वाले लेवल होंगे। जब तक बैंक निफ्टी इन स्तरों से नीचे रहता है,तब तक सेंटीमेंट कमजोर बने रहने की संभावना है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स के 56,800-56,500 के स्तर तक गिरने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके उलट,57,700 के ऊपर जाने पर बैंक निफ्टी 58,000-58,500 की ओर उछाल आ सकता है। बाजार का मौजूदा मिजाज किसी एक दिशा में साफ नहीं है। इसलिए,शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

 

Market Next week : मिड और स्मॉल कैप इंडेक्स ने किया सेंसेक्स-निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

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Market Next week : मिड और स्मॉल कैप इंडेक्स ने किया सेंसेक्स-निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Next week : इस हफ्ते ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया और नई ऊंचाई को छुआ। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 0.5% की बढ़त हुई,जबकि निफ़्टी 50 और सेंसेक्स में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट का दौर जारी रहा। इस हफ्ते सेंसेक्स 276.32 अंक या 0.35% गिरकर 77,264.51 पर आ गया,जबकि निफ्टी 76.35 अंक या 0.31% गिरकर 24,175.65 पर बंद हुआ।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया,ग्लेनमार्क फ़ार्मा,LIC हाउसिंग फ़ाइनेंस और लॉरस लैब्स में बढ़त के कारण निफ़्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.5% बढ़कर 64,450.90 के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। दूसरी ओर रेल विकास निगम,फ़ेडरल बैंक,IDFC फ़र्स्ट बैंक,कोरोमंडल इंटरनेशनल और ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

कैपरी ग्लोबल कैपिटल,IDBI बैंक,IFCI और एथर एनर्जी में डबल डिजीट बढ़त के दम पर निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 0.5% बढ़कर 20,143.55 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। वहीं,इस हफ्ते BLS इंटरनेशनल सर्विसेज,एजिस लॉजिस्टिक्स,क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण,हिंदुस्तान कॉपर और टेनेको क्लीन एयर इंडिया के शेयरों में 6% से 12% तक की गिरावट आई।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मेटल,IT,फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई,जबकि निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स में 1.5% की तेजी आई। दूसरी ओर निफ्टी FMCG, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1% की गिरावट आई। जबकि निफ्टी ऑटो और डिफेंस इंडेक्स भी लगभग 1% नीचे बंद हुए।

विदेशी संस्थागत निवेशकों(FIIs)ने लगातार दूसरे हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी और इस हफ्ते ₹20,260 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया और हफ्ते के दौरान भारतीय इक्विटी में ₹19,309.93 करोड़ का निवेश किया। इस हफ्ते BSE में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में ₹1 लाख करोड़ से कुछ ज़्यादा की गिरावट आई।

Market This Week : सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे हफ्ते लाल निशान में हुए बंद, रुपए ने तोड़ा गिरावट का सिलसिला

अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

SBI सिक्योरिटीज के हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी के लिए 24000–23970 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया का काम कर सकता है। अगर यह 23970 के नीचे टूटता है,तो और गिरावट आ सकती है और इंडेक्स 23820 की तरफ गिर सकता सकता है। ऊपर की तरफ,24300–24330 का जोन निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। नियर टर्म में निफ्टी में तेजी के लिए इस रेजिस्टेंस का पार होना जरूरी है।

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का कहना है कि गुरुवार को 24150 के लेवल पर ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंड लाइन के सपोर्ट से नीचे आने के बाद,निफ्टी में शुक्रवार को और ज़्यादा कमज़ोरी नहीं आई। यह एक अच्छा संकेत है और ऐसे फाल्स गिरावट वाले ब्रेकआउट के बाद अक्सर तेजी से बढ़त देखने को मिलती है।

निफ्टी का ट्रेंड पॉजिटिव रुख के साथ एक दायरे (24400-24000) में बना रहने का दिख रहा है। अगर निचले दायरे के पास से कोई टिकाऊ उछाल आता है,तो निकट भविष्य में 24300-24400 के लेवल तक अच्छी-खासी बढ़त देखने को मिल सकती है। ट्रेंड बदलने के लिए अहम सपोर्ट 24000 पर है। अगर यह सपोर्ट टूटता है तो गिरावट आ सकती है।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद निफ्टी वापस’राइजिंग चैनल’में आ गया। हालांकि,ट्रेंड अभी भी बुलिश नहीं है,क्योंकि इंडेक्स 50EMA के नीचे ही ट्रेड कर रहा है। कुल मिलाकर,मोमेंटम की कमी रही और इंडेक्स एक सीमित दायरे में ही बना रहा।

ऊपर की तरफ,24,200 का लेवल निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। जब तक इंडेक्स 24,200 से नीचे रहता है,तब तक मार्केट का सेंटीमेंट कमजोर रहने की संभावना है और निकट भविष्य में इसके 23,900 तक गिरने की आशंका है।

23,900 के नीचे जाने पर और गिरावट आ सकती है। दूसरी ओर 24,200 के ऊपर मजबूती दिखाने से मार्केट सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है और इससे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड मजबूत हो सकता है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

Meesho Share Price: दिग्गज ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मीशो के शेयरों की घरेलू ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा ने खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। वेंचुरा ने इसके शेयरों का जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, उसके मुताबिक मौजूदा लेवल से यह 33% से अधिक ऊपर चढ़ सकता है। अभी की बात करें तो पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार 28 अगस्त को बीएसई पर यह 0.51% की बढ़त के साथ ₹208.60 पर बंद हुआ था। आईपीओ के तहत ₹111 के भाव पर जारी होने के बाद इसके शेयर घरेलू मार्केट में 10 दिसंबर 2025 को लिस्ट हुए थे और लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर 2025 को यह ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा था।

Meesho पर क्यों हुआ ब्रोकरेज फिदा

ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑनलाइन खरीदारी का बाजार तेजी से बढ़ने वाला है। वेंचुरा के मुताबिक जैसे-जैसे टियर-2, टियर-3 और गांवों में इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन रिटेल का दायरा बढ़ रहा है, वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2030 के बीच इसकी GMV (ग्रास मर्चेंडाइज वैल्यू) सालाना 20% की रफ्तार से बढ़ सकती है।

वेंचुरा का मानना है कि ग्रोथ के सुनहरे मौके को भुनाने के लिए मीशो ने खुद को मजबूत स्थिति में रख लिया है।

मीशो का मार्केटप्लेस मॉडल ऐसा है कि पूंजी की जरूरत कम से कम पड़ती है और दुकानदारों को अपना सामान सस्ते में बेचने की सहूलियत मिलती है जिससे दाम देखने वाले ग्राहकों के बीच इसे कॉम्पटीटिव एडवांटेज मिल रहा है।

वेंचुरा के मुताबिक अभी मीशो का फोकस ग्राहक और ऑर्डर्स बढ़ाने पर है लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ेगा, हर ऑर्डर और ग्राहक से कमाई ज्यादा हो सकती है।

कमाई में उछाल के उम्मीद की वजह ये है कि अधिक ऑर्डर्स होने से प्री-ऑर्डर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम हो सकती है, एआई की मदद को ग्राहकों को सही प्रोडक्ट्स दिखाए जा सकते हैं, वाल्मो (Valmo) के जरिए लॉजिस्टिक्स अधिक बेहतर हो सकती है, सेलर्स से एडवरटाइजिंग और दूसरी सर्विसेज की कमाई बढ़ सकती है, और फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सॉल्यूशंस जैसे रेवेन्यू के नए रास्ते तैयार हो सकते हैं।

वेंचुरा के मुताबिक कुल मिलाकर मीशो को सिर्फ सामान बेचने से नहीं बल्कि ऐड, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सर्विसेज से भी कमाई हो सकेगी।

मीशो के ATU (एनुअल ट्रांजैक्टिंग यूजर्स) यानी साल में कम-से-कम एक बार मीशो पर खरीदारी करने वाले यूजर्स की संख्या अभी 27.4 करोड़ है और वेंचुरा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक यह 40.9 करोड़ पर पहुंच सकता है तो ऑर्डर्स की संख्या सालाना करीब 28.2% की रफ्तार से वित्त वर्ष 2029 में 561.9 करोड़ तक पहुंच सकता है।

वेंचुरा का अनुमान है कि मीशो का रेवेन्यू 26.2% की रफ्तार से ₹25,403 करोड़ पर पहुंच सकता है। वहीं ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2028 तक ऑपरेटिंग लेवल पर प्रॉफिटेबल हो सकती है और शुद्ध मुनाफा हासिल हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक वित्त वर्ष 2029 तक कंपनी ₹1,404 करोड़ के EBITDA और ₹1,702 करोड़ के शुद्ध मुनाफे में पहुंच सकता है।

इन सब बातों को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने खरीदारी की रेटिंग और ₹278 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है।

अब रिस्क की बात करें तो यूजर्स के बढ़ने की रफ्तार उम्मीद से कम होने और कॉम्पटीशन बढ़ने से मीशो के कारोबार को झटका लग सकता है।

गिरता Nifty नहीं बना पा रहा पुट से पैसा, समझें कहां हो रही गड़बड़ी, कैसी स्ट्रैटेजी करेगी काम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI Mutual Fund: बैंक FD से बेहतर रिटर्न और 0% इक्विटी रिस्क! जानिए SBI म्यूचुअल फंड की 3 सबसे सुरक्षित योजनाएं

SBI Mutual Fund Low Risk Schemes: शेयर बाजार की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच हर निवेशक एक ऐसे विकल्प की तलाश में रहता है, जहां उसका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहे और बैंक FD की तुलना में बेहतर रिटर्न भी मिले। अगर आप भी ज्यादा जोखिम हीं लेना चाहते हैं, तो एसबीआई म्यूचुअल फंड की डेट स्कीम्स आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती हैं।

म्यूचुअल फंड की डेट कैटगरी में क्रेडिट रिस्क और इंटरेस्ट रेट रिस्क का डर बहुत कम होता है। आइए विस्तार से समझते हैं एसबीआई म्यूचुअल फंड की उन 3 सबसे सुरक्षित योजनाओं के बारे में, जहां आप बिना किसी बड़े जोखिम के अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

1. SBI Savings Fund (मनी मार्केट फंड)

एसबीआई सेविंग्स फंड एक मनी मार्केट कैटेगरी का फंड है, जो उन निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है जो बेहद कम समय के लिए अपना पैसा सुरक्षित जगह पार्क करना चाहते हैं। इसमें रिस्क लेवल बहुत कम होता है। यह फंड 1 साल तक की कम अवधि वाले बेहद सुरक्षित मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे- कमर्शियल पेपर्स, सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट और ट्रेजरी बिल्स में पैसा लगाता है।

अगर आपके पास सरप्लस कैश पड़ा है और आप 3 महीने से लेकर 12 महीने की अवधि के लिए बिना किसी जोखिम के स्थिर रिटर्न चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए एकदम सही है।

2. SBI Low Duration Fund (लो ड्यूरेशन फंड)

अगर आपका नजरिया 1 से 2 साल का है और आप बैंक सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म FD से बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखते हैं, तो एसबीआई लो ड्यूरेशन फंड एक मजबूत विकल्प है। इसमें भी रिस्क बहुत कम होता है। यह फंड 6 महीने से लेकर 12 महीने की मैकुले ड्यूरेशन वाले सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है।

अवधि कम होने के कारण इस फंड पर बाजार में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का असर न के बराबर पड़ता है। 1 से 2 साल के समयांतराल के लिए पैसा निवेश करने वाले उन लोगों के लिए ये स्कीम बेस्ट है जो हाई लिक्विडिटी और सुरक्षित ग्रोथ चाहते हैं।

3. SBI Banking and PSU Fund (बैंकिंग एंड पीएसयू फंड)

सुरक्षा और क्रेडिट क्वालिटी के मामले में यह फंड बेहद मजबूत माना जाता है, क्योंकि इसमें सरकारी गारंटी और मजबूत संस्थानों का भरोसा जुड़ा होता है। इसका रिस्क लेवल भी लो से मीडियम होता है।

सेबी के नियमों के अनुसार, इस फंड का कम से कम 80% पैसा देश के प्रमुख सरकारी व प्राइवेट बैंकों और सरकारी कंपनियों (PSUs/PFIs) द्वारा जारी बॉन्ड्स और पेपर्स में लगाया जाता है। इन कंपनियों के डूबने या डिफॉल्ट करने का खतरा न के बराबर होता है।

जो निवेशक 2 से 3 साल के नजरिए से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के विकल्प के रूप में एक सुरक्षित और टैक्स-कुशल जरिया तलाश रहे हैं।

निवेशकों के लिए टेकअवे

अगर आप इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो अपनी समय सीमा के हिसाब से इन स्कीम्स का चयन कर सकते हैं:

  • 3 से 12 महीने के लिए: SBI Savings Fund
  • 1 से 2 साल के लिए: SBI Low Duration Fund
  • 2 से 3 साल के लिए: SBI Banking and PSU Fund

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Upcoming IPO: विजय केडिया का है तगड़ा निवेश! एंकर राउंड में मधुसूदन केला ने भी लगाया बड़ा दांव, 31 अगस्त से खुलेगा ये आईपीओ

Vijay Kedia Backed Asuthosh Fibre IPO: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के निवेश वाली कंपनी आशुतोष फाइबर का आईपीओ दांव लगाने के लिए खुलने जा रहा है। पब्लिक सब्सक्रिप्शन खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं।

एंकर बुक में मधुसूदन केला के मेंटरशिप वाले सिंगुलैरिटी AMC समेत कई बड़े फंड्स ने हिस्सा लिया है। आइए आपको बताते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, महत्वपूर्ण तारीखें और कैसी है कंपनी की सेहत।

एंकर बुक: इन 5 बड़े निवेशकों ने लगाए पैसे

28 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों को अपर प्राइस बैंड पर 17.43 लाख शेयर आवंटित किए:

  1. Nine Alps Corporate Advisors: ₹6 करोड़ के निवेश से 6.52 लाख शेयर खरीदे।
  2. Singularity Equity Fund II: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  3. Nav Capital Emerging Star Fund: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  4. Aarth AIF Growth Fund: ₹2.11 करोड़ के निवेश से 2.3 लाख शेयर खरीदे।
  5. Vira Bharat Opportunities Fund: ₹1 करोड़ के निवेश से 1.09 लाख शेयर खरीदे।

Asuthosh Fibre IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

गुजरात बेस्ड टेक्निकल टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाली यह कंपनी फ्रेश इश्यू के जरिए बाजार से कुल ₹56.34 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है।

  • IPO खुलने की तारीख: 31 अगस्त
  • IPO बंद होने की तारीख: 2 सितंबर
  • प्राइस बैंड: ₹87 से ₹92 प्रति शेयर
  • अलॉटमेंट: 3 सितंबर
  • लिस्टिंग: 7 सितंबर

आईपीओ के पैसों का क्या करेगी कंपनी?

आशुतोष फाइबर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने और कर्ज कम करने में करेगी। ₹25.5 करोड़ नए उपकरण और मशीनरी की खरीद के लिए। ₹20 करोड़ कंपनी का पुराना कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी।

विजय केडिया की कितनी है हिस्सेदारी?

ऑफर से पहले कंपनी के प्रमोटर्स के पास 59.79% हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है, जिसमें शेयर बाजार के जाने-माने निवेशक विजय केडिया की 6.57% हिस्सेदारी शामिल है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर के रूप में Mefcom Capital Markets को नियुक्त किया गया है।

अब जानिए कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

टेक्सटाइल यार्न और फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 88.5% बढ़कर ₹16.04 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल (FY25) में ₹8.5 करोड़ था। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2.9% की मामूली बढ़त के साथ ₹117.37 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹114 करोड़ था।

क्या है ग्रे मार्केट का हाल?

आईपीओ वॉच के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को आशुतोष फाइबर आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹37 प्रति शेयर दर्ज किया गया है। यह इसके अपर प्राइस बैंड ₹92 के मुकाबले 40.22% के तगड़े प्रीमियम का संकेत दे रहा है।

इससे पहले 28 अगस्त को भी जीएमपी ₹37 ही था, जबकि 27 अगस्त को यह ₹15 (16.30%) और 26 अगस्त को ₹13 (14.13%) पर बना हुआ था। लगातार बढ़ते और मजबूत जीएमपी ट्रेंड से स्पष्ट है कि प्राइमरी मार्केट में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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SCSS vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद कौन-सी स्कीम से होगी ज्यादा रेगुलर इनकम? समझिए पाई-पाई का कैलकुलेशन!

Senior Citizens Savings Scheme vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद हर किसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता एक सुरक्षित और तय रेगुलर इनकम की होती है। ऐसे में डाकघर की दो सबसे लोकप्रिय सरकारी योजनाएं सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) निवेशकों की पहली पसंद बनती हैं।

दोनों ही स्कीम्स पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षित हैं, लेकिन दोनों की ब्याज दरें, निवेश की सीमा, भुगतान का तरीका और टैक्स नियम काफी अलग हैं। आइए जानते हैं कि आपके रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम ज्यादा बेहतर रहेगी।

कौन कर सकता है निवेश?

SCSS: यह स्कीम मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। हालांकि, VRS लेने वाले या सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी कुछ शर्तों के साथ 60 साल से पहले भी खाता खुलवा सकते हैं।

Post Office MIS: इस योजना में उम्र की कोई पाबंदी नहीं है। सीनियर सिटीजन के अलावा 18 साल से अधिक का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें खाता खुलवा सकता है।

ब्याज दरें और पे-आउट का तरीका

SCSS: जुलाई से सितंबर 2026 तिमाही के लिए SCSS में 8.2% सालाना का ब्याज मिल रहा है। इस योजना में ब्याज का भुगतान हर तीन महीने अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले कार्यदिवस पर होता है।

Post Office MIS: POMIS में 7.4% सालाना का ब्याज दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें ब्याज का भुगतान हर महीने सीधे आपके बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में होता है, जो घरेलू खर्च चलाने के लिए बेहद सुविधाजनक है।

अधिकतम कितना कर सकते हैं निवेश?

SCSS: इसमें एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है।

Post Office MIS: सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और जॉइंट अकाउंट में अधिकतम ₹15 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

कैलकुलेशन: किसमें कितना मिलेगा रिटर्न?

आइए गणित के जरिए समझते हैं कि अधिकतम निवेश पर आपको किस स्कीम से कितनी कमाई होगी:

केस 1: SCSS (₹30 लाख का निवेश @ 8.2%)

  • कुल निवेश: ₹30,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹2,46,000
  • हर 3 महीने की कमाई: ₹61,500
  • मंथली एवरेज: लगभग ₹20,500 प्रति माह

केस 2: Post Office MIS – जॉइंट अकाउंट (₹15 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹1,500,000
  • सालाना ब्याज: ₹1,11,000
  • हर महीने की कमाई: ₹9,250

केस 3: Post Office MIS – सिंगल अकाउंट (₹9 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹9,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹66,600
  • हर महीने की कमाई: ₹5,550

लॉक-इन पीरियड और टैक्स के नियम

दोनों ही योजनाओं का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल का होता है। हालांकि, कुछ कटौतियों और शर्तों के साथ समय से पहले निकासी की जा सकती है। दोनों ही स्कीम्स से मिलने वाला ब्याज निवेशक की टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर बैंक/डाकघर द्वारा TDS भी काटा जा सकता है। (SCSS में सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ शुरुआती निवेश पर मिलता है)।

आपके लिए कौन-सी स्कीम है बेस्ट?

SCSS चुनें: अगर आपके पास रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा है, आपकी उम्र 60 साल से ऊपर है और आप ज्यादा रिटर्न (8.2%) के साथ हर 3 महीने में एक बड़ी रकम पाना चाहते हैं।

Post Office MIS चुनें: अगर आपको हर महीने रसोई और घर के रेगुलर खर्चों के लिए तय मंथली इनकम की जरूरत है।

स्मार्ट स्ट्रेटेजी: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद दोनों का कॉम्बिनेशन सबसे बेस्ट होता है। आप अपने फंड का बड़ा हिस्सा SCSS में डालकर ज्यादा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और एक हिस्सा MIS में लगाकर हर महीने का कैश-फ्लो मेंटेन रख सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।