Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर के पार, इन कंपनियों के शेयर फिसले, ONGC और ऑयल इंडिया में उछाल

Crude Oil Price: क्रूट ऑयल की कीमतें फिर से चढ़ने लगी हैं। इसकी वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। करीब एक महीने बाद अमेरिका के हमले और ईरान के जवाबी हमले की खबर है। ब्रिटिश मेरिटाइम एजेंसी यूनाइटेड किंग्डम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक ट्रैंकर पर हमले की खबर दी है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जोरदार हमले की धमकी दी है। इससे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 1 सितंबर को 92 डॉलर के पार चला गया।

शेयरों पर दिखा क्रूड में उछाल का असर 

क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर दिखा। क्रूड ऑयल का इस्तेमाल करने वाली कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। इनमें पेंट बनाने वाली कंपनियां, एयरलाइंस कंपनियां और टायर कंपनियां शामिल थी। कच्चे तेल की कीमतों के लगातार ऊंचे लेवल पर बने रहने से इन कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ता है।

एशियन पेंट्स का शेयर 3.42 फीसदी गिरा

Asian Paints के शेयरों में 1 सितंबर को बड़ी गिरावट दिखी। यह शेयर 3.42 फीसदी गिरकर 2,562 पर बंद हुआ। बर्जर पेंट्स का शेयर भी 1.28 फीसदी गिरकर 491.40 रुपये पर बंद हुआ। JSW Dulux का शेयर 0.46 फीसदी गिरा। Shalimar Paints का शेयर 1.05 फीसदी फिसला।

इंडिगो के शेयर में आई 3.77 फीसदी गिरावट 

इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.77 फीसदी गिरकर 5,036 रुपये पर बंद हुआ। स्पाइसजेट का शेयर 3.20 फीसदी की कमजोरी के साथ 9.99 रुपये पर क्लोज हुआ। एयरलाइंस कंपनियों की कुल ऑपरेशन कॉस्ट में एटीएफ की बड़ी हिस्सेदारी होती है। क्रूड ऑयल महंगा होने पर एटीएफ की कीमतें भी बढ़ जाती है। इससे एयरलाइंस कंपनियों का कुल खर्च बढ़ता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव

टायर बनाने वाली कंपनियों में जेके टायर, गुडईयर इंडिया, सीएट के शेयरों में गिरावट आई। गुडईयर का शेयर 0.65 फीसदी गिरकर 738 रुपये पर बंद हुआ। Ceat का शेयर 0.058 फीसदी गिरकर 3,417 पर बंद हुआ। जेके टायर का शेयर 1.41 फीसदी गिरकर 373 रुपये पर बंद हुआ। टायर बनाने में क्रूड ऑयल का इस्तेमाल होता है।

IOCL, HPCL, BPCL के शेयर भी फिसले 

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी 1 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर 1.89 फीसदी गिरकर 136.50 रुपये पर बंद हुआ। बीपीसीएल का शेयर 2.38 फीसदी फिसला। HPCL का शेयर भी 0.93 फीसदी की गिरावट के साथ 362.35 रुपये पर क्लोज हुआ। कच्चा तेल महंगा होने से इन कंपनियों की कॉस्ट बढ़ जाती है।

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ONGC, Oil India के शेयरों में उछाल

तेल का उत्पादन करने वाली ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। ONGC का शेयर 2.02 फीसदी चढ़कर 236.49 रुपये पर बंद हुआ। Oil India का शेयर 1.31 फीसदी चढ़कर 489.50 रुपये पर पहुंच गया। क्रूड महंगा होने से अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा होता है।

Reliance का Ice Cream Market में बड़ा दांव! ₹10 से शुरू होगी Bombay Creamery की आइसक्रीम, जानें क्या है खास

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रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड यानी RCPL अब आइसक्रीम बाजार में भी उतर गई है। कंपनी ने बॉम्बे क्रीमरी नाम से नया आइसक्रीम ब्रांड लॉन्च किया है। इसकी कीमत ₹10 से शुरू होगी। बॉम्बे क्रीमरी की आइसक्रीम रियल डेयरी क्रीम से बनाई जाएगी। कंपनी ने इसे कोन, कप, टब, बार और स्टिक जैसे अलग-अलग फॉर्मेट में उतारा है। फिलहाल इसकी बिक्री पश्चिम भारत में शुरू की जा रही है और जल्द ही इसे पूरे देश में उपलब्ध कराने की योजना है।

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RCPL का कहना है कि वह बॉम्बे क्रीमरी को किफायती कीमत पर प्रीमियम डेयरी अनुभव देने वाले ब्रांड के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी अपने बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, रिटेल पहुंच और कंज्यूमर इनसाइट्स के सहारे इस कैटेगरी में लंबे समय के लिए उतर रही है।

 

RCPL के डायरेक्टर टी. कृष्णकुमार ने कहा कि बॉम्बे क्रीमरी को इस सोच के साथ तैयार किया गया है कि आइसक्रीम में डेयरी की असली पहचान बनी रहे। कंपनी का दावा है कि वह रियल डेयरी क्रीम से बनी आइसक्रीम को ऐसी कीमत पर उपलब्ध कराना चाहती है, जो भारतीय परिवारों की पहुंच में हो।

 

बॉम्बे क्रीमरी के साथ RCPL पहली बार आइसक्रीम कैटेगरी में उतर रही है। कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की FMCG इकाई है और अलग-अलग कंज्यूमर प्रोडक्ट कैटेगरी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

ETF Investment Strategy: शेयर बाजार में निवेश करते समय हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या फंड लगाने के लिए सही समय का इंतजार करना चाहिए? क्या गिरावट आने पर पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है?

म्यूचुअल फंड के विपरीत, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शेयर बाजार में दिनभर रियल-टाइम पर ट्रेड होते हैं। यही वजह है कि इनकी कीमतों में हर सेकंड होने वाला बदलाव निवेशकों को आकर्षित करता है। आइए समझते हैं कि ETF में टाइमिंग कितनी मायने रखती है और बिना जोखिम बढ़ाए बेहतर रिटर्न कैसे हासिल किया जाए।

टाइमिंग बनाम अवधि

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए बाजार को टाइम करने की कोशिश करने से ज्यादा जरूरी बाजार में बने रहना है।

म्यूचुअल फंड बनाम ETF: म्यूचुअल फंड का NAV दिन में केवल एक बार तय होता है, जबकि ETF बाजार के घंटों के दौरान लगातार खरीदे और बेचे जाते हैं।

इंट्राडे वोलैटिलिटी का सच: दिन के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए अवसर हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को ‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में अपना निवेश नहीं रोकना चाहिए।

रिटर्न का पैच: बाजार के विभिन्न सूचकांकों (जैसे- निफ्टी 50, स्मॉलकैप, हाइब्रिड) का डेटा बताता है कि आउटपरफॉर्मेंस हमेशा टुकड़ों में आता है। अगर आप सही समय के इंतजार में बाहर बैठे रहे और वह तेजी का दौर निकल गया, तो आपका लॉन्ग टर्म रिटर्न काफी घट जाएगा।

मार्केट टाइमिंग के जोखिम से कैसे बचें?

बाजार में सही समय चुनने के बजाय जोखिम को कम करने के दो सबसे प्रभावी तरीके हैं:

ETF में SIP: निश्चित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी राशि ETF में लगाएं। इससे आपको Rupee-Cost Averaging का फायदा मिलेगा और अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी होने से एवरेज कॉस्ट बेहतर होगी।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन: अलग-अलग सेगमेंट के ETF में पैसा लगाएं या हाइब्रिड इंडेक्स ETF चुनें। डेटा दर्शाता है कि हाइब्रिड इंडेक्स की वोलैटिलिटी प्योर इक्विटी इंडेक्स की तुलना में लगभग 40% कम होती है।

ETF खरीदते और बेचते समय ध्यान रखने योग्य 3 जरूरी रूल्स

अगर आप खुद ETF में ट्रेड कर रहे हैं, तो इन तकनीकी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

1- शुरुआती और आखिरी मिनटों से बचें: बाजार खुलने के पहले 5-10 मिनट और बंद होने के आखिरी 5-10 मिनट में ट्रेडिंग न करें। इस दौरान लिक्विडिटी कम होती है और प्राइस वोलैटिलिटी अधिक रहती है।

2- घड़ी नहीं, Bid-Ask Spread और iNAV देखें: खरीदने से पहले यह जांचें कि ETF का ट्रेडेड प्राइस उसके इंडिकेटिव NAV के आसपास ही हो। जब ETF iNAV की तुलना में भारी प्रीमियम पर मिल रहा हो, तो खरीदारी से बचना चाहिए।

3- सिस्टमैटिक एंट्री लें: एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें ताकि एक ही दिन के गलत एंट्री पॉइंट का नुकसान न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी? NPS, EPF और एन्युटी पर समझिए एक्सपर्ट का ये मास्टर प्लान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Sensex लगातार दूसरे दिन लाल, एक्सपायरी को Nifty 24056 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

Sensex-Nifty closes red: उम्मीद से बेहतर जीडीपी ग्रोथ और निचले स्तर पर वैल्यू बाइंग से मार्केट में तेज रिकवरी आई लेकिन फिर कच्चे तेल के उबाल और बैंकिंग शेयरों की बिकवाली का दबाव अधिक भारी पड़ गया। इस दबाव में डे-हाई से सेंसेक्स 576 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप स्पेस में अधिक दबाव दिखा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 आज 0.25% कमजोर हुआ तो निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.39% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज एफएमसीजी और आईटी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1% मजबूत हुए। हालांकि ऑटो, बैंकिंग और फार्मा स्टॉक्स का दबाव अधिक भारी पड़ गया। निफ्टी फार्मा आज करीब डेढ़ फीसदी तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक 1% से अधिक और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 1% कमजोर हुआ। बिकवाली की इस आंधी में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो महीने के पहले कारोबारी दिन आज 1 सितंबर निफ्टी की वीकली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 12.99 प्वाइंट्स यानी 0.02% की मामूली फिसलन के साथ 76,944.28 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर बंद हुआ है।

इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स और निफ्टी में काफी उठा-पटक दिखी। पहले तो सेंसेक्स 193.01 प्वाइंट्स गिरकर 76,764.26 तक आया था, जिससे फिर यह 467.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 77,231.87 के हाई तक पहुंचा लेकिन फिर इस हाई से यह 575.75 प्वाइंट्स टूटकर 76,656.12 तक आ गया। वहीं निफ्टी भी 70.90 प्वाइंट्स टूटकर 24,009.50 तक आया था, जिससे यह फिर 133.65 प्वाइंट्स ऊपर चढ़कर 24,143.15 तक पहुंचा था लेकिन फिर इस हाई लेवल से यह 190.60 प्वाइंट्स टूटकर 23,952.55 तक आ गया।

डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 31 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,91,58,204.57 करोड़ था। आज यानी 1 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,88,11,607.93 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,46,596.64 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 13 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 13 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज आईटीसी, एचसीएलटेक और इंफोसिस सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ मारुति, एसबीआई और इंडिगो में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

TBZ Share Price: ज्वेलरी कंपनी में खरीद का तूफान, 20% बढ़त के साथ अपर सर्किट; प्रमोटर बेचेंगे 74% हिस्सा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

TBZ Share Price: ज्वेलरी कंपनी में खरीद का तूफान, 20% बढ़त के साथ अपर सर्किट; प्रमोटर बेचेंगे 74% हिस्सा

जेम्स एंड ज्वेलरी कंपनी त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी (TBZ) के शेयरहोल्डर्स के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद शानदार रहा। शेयर 20 प्रतिशत उछला और बीएसई पर 366.50 रुपये पर अपर सर्किट लगा। यह शेयर का 52 सप्ताह का नया उच्च स्तर भी है। दरअसल GRT ज्वेलर्स इंडिया, TBZ के प्रमोटर्स से कंपनी में 74.12 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। इसके लिए एक शेयर परचेज एग्रीमेंट साइन किया गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 74.12 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह खरीद 209 रुपये प्रति शेयर के भाव पर की जाएगी। इसके चलते डील की वैल्यू 1,033.71 करोड़ रुपये रहेगी। इस खरीद के पूरा होने के बाद GRT ज्वेलर्स TBZ के पब्लिक शेयरहोल्डर्स से लगभग 26 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक ओपन ऑफर भी लेकर आएगी। इस हिस्सेदारी को 249.60 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदा जाएगा। GRT Jewellers के अभी भारत में 68 स्टोर हैं। एक स्टोर सिंगापुर में भी है।

TBZ का शेयर 3 महीनों में 111 प्रतिशत मजबूत

शेयर में आई तेजी के बाद त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी का मार्केट कैप बढ़कर 2400 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर एक सप्ताह में 30 प्रतिशत, 2 सप्ताह में 46 प्रतिशत और 3 महीनों में 111 प्रतिशत चढ़ा है। 6 महीनों में शेयर की कीमत करीब 150 प्रतिशत और 2 साल में 212 प्रतिशत उछली है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 840.97 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 32.85 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग करीब 5 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 3,202.95 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 200.49 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 30 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2026 तक TBZ पर 886 करोड़ रुपये का कर्ज था और फाइनेंस कॉस्ट 77 करोड़ रुपये थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले आदेश पर रोक, NCLT की 5 सदस्यीय बेंच का फैसला

NCLT ने Zee Entertainment के चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले पिछले आदेश पर रोक लगा दी है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को मामले की सुनवाई के लिए बनी पांच सदस्यीय बेंच ने यह फैसला लिया।

टाई-ब्रेकर जज की राय अंतिम फैसला नहीं

पांच सदस्यीय बेंच ने कहा कि टाई-ब्रेकर जज की राय बहुमत का फैसला नहीं है। इसलिए इसे मामले का अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता।

दरअसल, इस मामले की सुनवाई दिल्ली NCLT की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी। सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने पर बेंच के सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में टाई-ब्रेकर जज की राय के आधार पर प्लान को मंजूरी देने की बात सामने आई थी।

₹22,007 करोड़ के दावों के बदले ₹6.5 करोड़ का प्लान

सुभाष चंद्रा ने ₹22,007 करोड़ के मंजूर दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ का रिपेमेंट प्लान पेश किया था। इस पर कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

Canara Bank, Axis Bank, HDFC Bank और LIC Housing Finance ने इस प्लान के खिलाफ वोट किया था। इन सभी ने NCLT से प्लान को खारिज करने की मांग की।

बैंकों ने क्यों किया विरोध?

बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कहना था कि ₹6.5 करोड़ की रकम बेहद कम है। उनके मुताबिक, यह सुभाष चंद्रा की कुल संपत्तियों की वैल्यू का सिर्फ 0.028% है।

इसलिए उनका मानना था कि इतनी कम रकम वाला रिपेमेंट प्लान मंजूर नहीं किया जाना चाहिए।

पांच सदस्यीय बेंच करेगी मामले की सुनवाई

अब मामले की सुनवाई NCLT की पांच सदस्यीय बेंच करेगी। इसमें न्यायिक सदस्य अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल, बाचू वेंकट बलराम दास और महेंद्र खंडेलवाल शामिल हैं।

तकनीकी सदस्यों में अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चतुर्वेदी शामिल हैं। अब इस मामले में आगे का फैसला इस बड़ी बेंच की सुनवाई के बाद होगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Apple का पहला Foldable iPhone होगा बेहद खास! 4.5mm पतला डिजाइन देख उड़ जाएंगे होश, जानें पूरी डिटेल

Apple का सितंबर इवेंट अब बस एक हफ्ते दूर है। इस इवेंट में कंपनी तीन नए iPhone लॉन्च कर सकती है। इनमें Apple iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और iPhone Ultra शामिल हैं। इन तीनों में iPhone Ultra सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसकी वजह यह है कि यह Apple का पहला फोल्डेबल iPhone हो सकता है। इसके लॉन्च के साथ Apple सीधे तौर पर Samsung के फोल्डेबल फोन को टक्कर देगा। अब तक इस फोन को लेकर कई जानकारियां लीक और अफवाहों के जरिए सामने आ चुकी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं iPhone Ultra से जुड़ी अब तक की खास बातें।

भारत में Apple iPhone Ultra की रिलीज डेट और कीमत

Apple ने अपकमिंग इवेंट की तारीख पहले ही कन्फर्म कर दी है, जो 8 सितंबर है, और उस दिन हम तीन नए फोन देख सकते हैं: iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और iPhone Ultra। कीमत की बात करें तो कहा जा रहा है कि यह डिवाइस भारतीय बाजार में 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए ₹2,21,900 की शुरुआती कीमत पर आएगा।

Apple iPhone Ultra का कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

Apple iPhone Ultra में 5.3-इंच की बाहरी डिस्प्ले और 7.8-इंच की अंदरूनी LTPO OLED डिस्प्ले हो सकती है, साथ ही इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट भी मिलेगा। इसके अलावा, Caviar का दावा है कि Apple लिक्विड मेटल से बना एक एडवांस्ड हिंज और फ्लेक्सिबल ग्लास का इस्तेमाल करेगा, ताकि फोन के अनफोल्ड होने पर क्रीज (मोड़ का निशान) कम दिखे। यह भी कहा जा रहा है कि फोन टाइटेनियम बॉडी के साथ आएगा, जिसकी मोटाई अनफोल्ड होने पर 4.5mm और फोल्ड होने पर 9mm होगी। इसमें फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5,800mAh की बैटरी हो सकती है। अफवाह है कि यह डिवाइस Apple A20 Pro चिपसेट पर चलेगा।

कैमरे की बात करें तो, iPhone Ultra में डुअल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन वाला 48MP का प्राइमरी कैमरा और 48MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल कैमरा शामिल होगा। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए, फोन में 24MP का फ्रंट कैमरा भी मिल सकता है।

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