भाजपा नेता भी तेवर दिखा रहे हैं

भारतीय जनता पार्टी में अभी जो स्थिति है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे सकता है। यह भी थोड़ी दूर की कौड़ी है कि मोदी और शाह में अनबन है, जिसकी वजह से कैबिनेट में फेरबदल का फैसला टल रहा है। लोग बड़े दावे से कह रहे हैं कि भाजपा में पहले कभी फैसला करने में इतना समय नहीं लगता था और न इतनी हिचक दिखती थी। हो सकता है कि मोदी और शाह में कुछ मुद्दों पर असमहति हो लेकिन दोनों में झगड़ा है, इस वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं हो रहा है या शाह के करीबी नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो जाएगी यह थोड़ी दूर की कौड़ी दिख रही है। लेकिन राजनीति में कभी भी और कुछ भी संभव है।

इन अटकलों के बीच भाजपा के अंदर की खींचतान सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की आठ सीटों पर बिल्कुल नए और कई गुमनाम से चेहरे तय किए गए। इससे पार्टी के कई नेता नाराज हैं। दो बार सांसद रहे और उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुजन राजनीति का बड़ा चेहरा रहे धर्मेंद्र कश्यप ने नाराजगी में पार्टी छोड़ दी है। वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे ही पिछले दिनों ओडिशा के पार्टी के सांसद, पुराने नेता और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने बिना नाम लिए पार्टी के कई नेताओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। लेकिन साथ यह भी कह दिया कि कितनी भी साजिश हो जाए वे सरकार नहीं छोड़ेंगे। सवाल है कि क्या उनसे सरकार छुड़ाने यानी इस्तीफा कराने का प्रयास हो रहा था?

इसी बीच केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन का इस्तीफा हो गया। कहा जा रहा है कि इस्तीफे के लिए कहा तो कई मंत्रियों को गया है लेकिन लोग इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। कई मंत्रियों ने कथित तौर पर कहा है कि अगर हटाना है तो प्रधानमंत्री खुद ही सरकार से हटा दें। अगर ऐसा है तो यह भाजपा की पिछले 12 साल की राजनीति में नई चीज है।

PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।

वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।

कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?

यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।

कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?

PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

पात्रता की शर्तइसका क्या मतलब है?
पहली बार EPF मेंबरशिपकर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए।
जॉइनिंग की तारीख नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
मासिक सैलरी कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)।
सर्विस की अवधिपहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है।
एंप्लॉयर कम्प्लायंसजिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो।

 कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?

यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:

किस्तजरूरी शर्त  अधिकतम राशि
पहला किस्त निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर ₹7,500
दूसरी किस्त 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने परबाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक)

ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।

फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?

दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।

इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।

पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?

सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।

एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ

इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

दुनिया बना रही बुद्धि, भारत बनेगा पालतू?

बुद्धि के ब्रह्म ने मानो मशीन में, एआई में अपना निवास बना लिया हो। तभी अब मशीनें मनुष्य से लाखों गुना विशाल दिमाग दिखलाते हुए हैं। हर दिन, हर सप्ताह इतनी खबरें, ऐसी-ऐसी कवर स्टोरीज आ रही हैं कि अब एआई का न ओर है और न छोर। इस सप्ताह पत्रिका द इकोनॉमिस्ट का कवर देखा, यूरेका एआई! यदि विज्ञान की खोजों का जिम्मा मशीनों ने अपने हाथ में ले लिया तो? देख पढ़ने की तुक समझ नहीं आई। लगा पढ़ने की जरूरत ही नहीं है! आखिर मनुष्य यानी पाठक पढ़े भी तो उसमें एआई के असीम को समझने, विचारने का सामर्थ्य कितना है? उसके करने के लिए अब है क्या? बेचारा मनुष्य। जहाँ वह असंख्य दिमागी सीमाओं में बँधा हुआ है, वहीं एआई स्वतंत्र है, स्वच्छंद है, बेफिक्र है और अपने ही पुर्जों, भाषा के अनंत में उड़ता हुआ।

बात केवल लिखने-पढ़ने की ही नहीं है। द इकोनॉमिस्ट की 15 अक्टूबर की कवर स्टोरी के अनुसार, छह अक्टूबर 2026 का दिन गणित के इतिहास का सबसे बड़ा दिन साबित हो सकता है। कैसे? इस दिन अमेरिकी कंपनी ओपनएआई ने एक ही दिन में 719 शोधपत्र जारी किए। दावा किया कि उसके एआई मॉडल ने गणित की कम से कम 372 ऐसी समस्याओं के समाधान खोज लिए हैं जिनमें बड़े-बड़े गणितज्ञ दशकों से उलझे हुए थे। उससे पहले सितंबर में एआई ने तरल पदार्थों की गति से जुड़ी एक ऐसी गणितीय समस्या को महज 88 घंटों में हल करने का दावा किया जिस पर गणितज्ञ एक सदी से माथापच्ची कर रहे थे।

नतीजतन गणितज्ञ हैरान-परेशान हैं। कुछ तो विरोध में उतर आए हैं। आखिर मनुष्य के वर्षों के अध्ययन, चिंतन और शोध का अर्थ क्या बचेगा यदि मशीन चंद घंटों में उत्तर निकाल दे? और वह भी ऐसे उत्तर जिन्हें सही मानने से पहले मनुष्य को समझने में ही महीनों लग जाएँ! ध्यान रहे, ये एआई कंपनियों के घोषित समाधान हैं, जिनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक जाँच और पुष्टि अलग प्रश्न है।

पर गणित मात्र एक विषय है। मौसम की भविष्यवाणी, परमाणु संलयन के प्रयोग, नई धातुओं और पदार्थों की खोज, प्रोटीन की संरचना, दवाइयों का निर्माण आदि सभी में तो एआई घुस चुकी है। जीव विज्ञान में भी छलाँगें हैं। मशीनें डीएनए की भाषा पढ़ रही हैं। उसमें फेरबदल सुझा रही हैं। सूखे और गर्मी को झेलने वाली फसलें तैयार करने की कोशिश हो रही है। प्रयोगशालाओं में जीवित कोशिकाओं के कंप्यूटर मॉडल बनाने की तैयारी है। मतलब कल को वैज्ञानिक किसी दवा का असर पहले कंप्यूटर की आभासी कोशिका पर जाँचेंगे। और आगे? बिल्कुल नए जीवों की रचना भी संभव होगी! द इकोनॉमिस्ट ने बताया है कि एआई की मदद से प्राकृतिक वायरसों से अलग सोलह प्रयोगात्मक वायरस बनाए जा चुके हैं, जो बैक्टीरिया पर हमला करते हैं। सोचें, जिस जीव-जगत को समझने में मनुष्य को सदियाँ लगीं, अब उसकी जैविक संरचना में परिवर्तन और नए जीव बनाने की संभावनाएँ मशीनों से लगातार खुल रही हैं और खुलती जाएँगी।

असली बात इससे भी आगे की है। गूगल डीपमाइंड, ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियाँ एआई को केवल वैज्ञानिकों की सहायता करने वाला औजार नहीं बनाए रखना चाहतीं। वे स्वयं वैज्ञानिक खोजों के मैदान में उतर रही हैं। क्यों? इसलिए भी कि विज्ञान की कठिन समस्याएँ हल करते हुए उनके एआई मॉडल और अधिक बुद्धिमान बन सकते हैं। यानी मशीन विज्ञान की समस्याएँ सुलझाएगी, उससे अपनी बुद्धि बढ़ाएगी और फिर उसी बढ़ी हुई बुद्धि से अपने से भी बेहतर मशीन बनाने की कोशिश करेगी।

तब मनुष्य कहाँ होगा? वैज्ञानिक खोज का मालिक, उसका निरीक्षक या मशीन द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को समझने में लगा एक विद्यार्थी, शोधकर्ता? द इकोनॉमिस्ट की संपादकीय चिंता यही है कि विज्ञान में मनुष्य की समझ और नियंत्रण बना रहना चाहिए। अन्यथा वह स्थिति भी संभव है जिसमें मशीनें खोजें करती रहें और मनुष्य केवल उनसे पूछता रहे कि अब क्या करना है। पत्रिका ने तो यहाँ तक लिखा है कि ऐसा समाज मनुष्यों को मशीनों के पालतू प्राणियों जैसी स्थिति में पहुँचा सकता है!

इस नई दुनिया का बाजार तेजी से सभी ओर बन रहा है। एआई की बुद्धि अब टोकन के हिसाब से बिक रही है। जिस तरह कभी अनाज, नमक या पशुओं से मूल्य का हिसाब होता था, वैसे अब मशीन की भाषा पढ़ने, लिखने और सोचने की कीमत टोकन में तय हो रही है। एक कंपनी का एआई दूसरी कंपनी से चालीस गुना सस्ता हो सकता है। सस्ते और महँगे एआई मॉडलों के बीच ग्राहक को चुनाव कराने वाली ओपनराउटर जैसी कंपनी को खरीदने के लिए भुगतान कंपनी स्ट्राइप ने कथित तौर पर 7.5 अरब डॉलर का सौदा किया है।

यानी बुद्धि का नया बाजार! किस काम के लिए सस्ती मशीन का दिमाग लगाना है और किस काम के लिए महँगी मशीन का, यह कारोबार का नया हिसाब, नया मॉडल है। जाहिर है औद्योगिक उत्पादनों, सेवाओं में जैसे सस्ते विकल्प देकर बाजार पर कब्जा करता है वैसे ही एआई बाजार में भी चीन की डीपसीक जैसी कंपनियाँ सस्ते एआई मॉडल बेचकर अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे रही हैं।

और अब जरा कल्पना करें, दिमाग में भारत पर सोचें तो क्या मिलेगा? खाली खोखा! दुनिया में जब अमेरिका और चीन की कंपनियाँ मशीनों से गणित की अनसुलझी समस्याएँ हल कराने, नई दवाएँ और जीव बनाने तथा एआई से एआई की बुद्धि बढ़ाने में लगी हैं, तब भारत इस वैज्ञानिक क्रांति में कहाँ खड़ा है? बकौल विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2026 के, भारत इनोवेशन में 139 अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में 38वें स्थान पर है। स्विट्जरलैंड पहले, स्वीडन दूसरे, अमेरिका तीसरे, दक्षिण कोरिया चौथे और सिंगापुर पाँचवें स्थान पर हैं। चीन दसवें स्थान पर पहुँच चुका है।

मतलब दुनिया में नवाचार की दौड़ का हिसाब देखें तो भारत अभी पहले तीस देशों में भी नहीं है। जबकि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्थाओं में एक है। उसके नौजवान वैश्विक तकनीकी कंपनियों में काम कर रहे हैं। कहने को भारत सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है। ऐसे ही विकसित चरण के स्टार्टअप उद्यमों में वेंचर कैपिटल सौदों के मामले में चौथे स्थान पर है। नवाचार से प्राप्त परिणामों में 25वें स्थान पर है। लेकिन मार कहाँ खा रहा है? नवाचार के लिए आबोहवा याकि जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं में 49वें स्थान पर होने के कारण! मतलब दुनिया की तकनीक को चलाने, उसके लिए सेवाएँ देने और उसका बाजार बनने के जुगाड़ों में भारत आगे है, लेकिन मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीक बनाने की बुनियादी क्षमता में पीछे।

जबकि चीन की छलाँगें क्या हैं? वह सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन से आगे सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और गहन वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, अमेरिका में गहन विज्ञान और भौतिक तकनीक पर आधारित 12,752 स्टार्टअप हैं। चीन में ऐसी कंपनियों की संख्या 2025 में 3,466 हो गई। पाँच वर्षों में दोगुने से अधिक! और ये कंपनियाँ केवल मोबाइल एप्लीकेशन बनाने या ऑनलाइन सामान बेचने वाली नहीं हैं। ये भौतिक दुनिया की नई तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियाँ हैं।

यानी चीन की तैयारी उस दुनिया के लिए है जिसमें मशीनें विज्ञान की खोज करेंगी और उनसे नई मशीनें, नई दवाएँ, नए पदार्थ और नई उत्पादन प्रणालियाँ बनेंगी। तब सवाल है कि भारत क्या करेगा? दुनिया की तकनीक का सेवा प्रदाता और उपभोक्ता बना रहेगा? या अपनी खोज, अपने आविष्कार और अपनी वैज्ञानिक क्षमता से उस दुनिया के निर्माण में भी हिस्सा लेगा?

सवाल केवल विज्ञान की प्रयोगशालाओं का नहीं है। मनुष्य के जीवन का भी है। आखिर विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक विकास किसलिए हैं? नागरिक के बेहतर जीवन के लिए ही न? पर भारत और भारत के नागरिक याकि भीड़ बेहतर जीवन की जिद कहाँ करते हैं? लोगों की जिंदगी खैराती बनने, प्रदूषणों, झुग्गी झोपड़ियों, कॉकरोचपने में ही विकसित भारत के सपनों की है। कोई आश्चर्य नहीं कि 2026 में भारत का एक भी शहर दुनिया के सौ सबसे रहने योग्य शहरों में नहीं है! इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की 173 शहरों की ग्लोबल लिवेबिलिटी रैंकिंग में नई दिल्ली 120वें, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर हैं। दुनिया में कोपेनहेगन पहले, वियना दूसरे और मेलबर्न तीसरे स्थान पर हैं।

भारत की राजधानी दिल्ली को स्वास्थ्य सेवाओं में महज 41.7 और संस्कृति तथा पर्यावरण में 35.4 अंक मिले। सोचें, देश की राजधानी की यह स्थिति! और वह भी तब जब दिल्ली में चमचमाते एयरपोर्ट हैं, मेट्रो है, एक्सप्रेसवे हैं, गगनचुंबी इमारतें हैं। खरबों रुपये निर्माण पर खर्च हुए हैं। बावजूद इसके नागरिक के लिए साफ हवा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित परिवेश और सुविधाजनक रोजमर्रा का जीवन उपलब्ध कराना चुनौती है। जबकि चीन के सभी सर्वेक्षित शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लगातार दर्ज होता हुआ है।

तो तस्वीर में एक मशीनें मनुष्य से आगे निकलने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में मनुष्य अभी रहने योग्य शहर की बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है। वहाँ चिंता है कि एआई कहीं विज्ञान पर अधिकार न कर ले। यहाँ चिंता है कि प्रदूषण से साँस कैसे बचे, बीमारी में अस्पताल कैसा मिले, सड़क पर चलना कितना सुरक्षित हो और रोजमर्रा की जिंदगी कैसे कटे। दुनिया की वैज्ञानिक छलाँग और भारत के नागरिक की वास्तविकता का अंतर दिन-रात का है! कुछ भी हो सारे विकास की कसौटी तो अंततः मनुष्य जीवन के अपने बदलाव ही तो हैं!

और घूम फिर कर सवाल बुद्धि (मनुष्य की) पर लौटता है। अब तक मनुष्य स्वयं ज्ञान अर्जित करता था। उसे समझने, परखने, उस पर संदेह करने और आगे बढ़ाने में पीढ़ियाँ खपती थीं। अब मशीनें ज्ञान के ऐसे परिणाम सामने रख सकती हैं जिन तक पहुँचने का रास्ता स्वयं वैज्ञानिकों को समझ न आए। तब ज्ञान बढ़ेगा, लेकिन क्या मनुष्य की समझ उसी अनुपात में बढ़ेगी? खासकर भारत जैसे देशों में? दुनिया निश्चित ही आगे अधिक बुद्धिमान मशीनों और उन पर अधिक निर्भर मनुष्यों की बनेगी। उसके जो स्वामी मनुष्य होंगे, मालिक होंगे वे क्या हैसियत इसलिए हुए होंगे, इसकी कल्पना ही दहलाने वाली है!

Stocks to Watch: 19 अक्टूबर को Axis Bank, Yes Bank, HDFC Bank, RailTel, Zen Tech समेत इन शेयरों पर नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

सोमवार, 19 अक्टूबर को कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। लिस्ट में एक्सिस बैंक, HDFC Bank, यस बैंक, IDBI Bank, रेलटेल, जेन टेक्नोलोजिज, वेदांता जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा सोमवार को एक शेयर एक्स-स्टॉक स्प्लिट ट्रेड करने वाला है। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजे

बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलीमर्स, HFCL, हिंदुस्तान जिंक, जस्ट डायल, डेल्टा कॉर्प, एलीवेट कैंपस, पिरामल फाइनेंस, SML महिंद्रा, वरमोरा ग्रैनिटो, शोभा, तत्व चिंतन फार्मा केम और वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीस

इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

ICICI Bank: Q2 (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) में स्टैंडअलोन बेसिस पर मुनाफा सालाना आधार पर 20.1% बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7% बढ़कर 25,338.7 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.20% हो गया, नेट NPA घटकर 0.30% हो गया।

Axis Bank: Q2 में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 7,003.28 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,371.4 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.16 प्रतिशत रहा। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.35 प्रतिशत हो गया।

Yes Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 65% बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7% बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA 1.2% और नेट NPA 0.2% दर्ज किया गया।

HDFC Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 4.7% बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 9.7% बढ़कर 34,619.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.11% और नेट NPA घटकर 0.37% हो गया।

IDBI Bank: Q2 में स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 2205.45 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 2.12 प्रतिशत और नेट NPA रेशियो घटकर 0.17 प्रतिशत पर आ गया।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफे में 21.1% का उछाल आया और यह 1,468.9 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 26.3% बढ़कर 4,145.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो 2.39% और नेट NPA रेशियो 0.31% रहा।

पंजाब नेशनल बैंक: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 12.8% बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8% बढ़कर 11,601.3 करोड़ रुपये रही। ग्रॉस NPA रेशियो 2.55% और नेट NPA रेशियो 0.25% दर्ज किया गया।

अर्बन कंपनी: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 182.5 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 41.4% बढ़कर 537.3 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के बोर्ड ने इक्विटी और कनव​र्टिबल सिक्योरिटीज के जरिए 2,500 करोड़ रुपये तक जुटाने को मंजूरी दी है।

LTM: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 0.2% घटकर 1,397.9 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 13.6% बढ़कर 11,807.6 करोड़ रुपये हो गया। LTM ने प्रति शेयर 25 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

ले ट्रैवेन्यूज टेक्नोलॉजी (Ixigo): Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 61.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले कंपनी 3.2 करोड़ रुपये के घाटे में थी। रेवेन्यू 12.9% बढ़कर 320.96 करोड़ रुपये हो गया।

RailTel: कंपनी को रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB), सिकंदराबाद से 167.52 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस’ (LoA) मिला है। यह RRB भर्ती प्रक्रिया के परीक्षा-पूर्व और परीक्षा-बाद के चरणों के लिए AM-RMS सेवाएं प्रदान करने से संबंधित है। इसके अलावा RailTel को ‘हेल्थ इंश्योरेंस TPA ऑफ इंडिया’ से 18.99 करोड़ रुपये का परचेज ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी 3 साल की अवधि के लिए IT इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराएगी।

Zen Technologies: यह कॉग्निट सिमेंटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (CSPL) में 51.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। कंपनी के बोर्ड ने 17 अक्टूबर की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उसी दिन कंपनी ने शेयर परचेज एग्रीमेंट, शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट और शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट कर लिया। डील पूरी होने के बाद कॉग्निट सिमेंटिक्स, जेन टेक की सब्सिडियरी बन जाएगी। यह खरीद फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर 135.15 करोड़ रुपये में होगी।

GPT इंफ्राप्रोजेक्ट्स: कंपनी को वेस्टर्न रेलवे के भावनगर डिवीजन के ‘चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर’ (CSTE) से 149.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। साथ ही, वेस्टर्न रेलवे के ही रतलाम डिवीजन से सिग्नलिंग कार्यों के लिए 134.11 करोड़ रुपये का एक और वर्क ऑर्डर मिला है।

ACME Solar Holdings: कंपनी की सब्सिडियरी, ‘एक्मे ग्रीनटेक ट्वेंटी’ ने ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (SECI) के साथ एक ‘पावर परचेज एग्रीमेंट’ किया है। यह समझौता FDRE ट्रेंच IX के तहत 300 MW के ‘अश्योर्ड पीक पावर प्रोजेक्ट’ के लिए है, जिसमें टैरिफ 6 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।

LCC Projects: कंपनी को गुजरात सरकार से एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ टेंडर’ मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में मच्छु-I बांध से त्रिवेणी थंगा जलाशय और वांकानेर व चोटिला तालुका के विभिन्न गांवों तक पानी की आपूर्ति करना शामिल है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 10 वर्षों तक प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव का काम भी शामिल है। कॉन्ट्रैक्ट की कुल अनुमानित वैल्यू 151.57 करोड़ रुपये है।

Vedanta: कंपनी ने ‘वेदांता जिंक इंटरनेशनल’ (VZI) के तहत ‘गाम्सबर्ग प्रोजेक्ट’ के दूसरे चरण में लगभग 60 करोड़ डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इसके जरिए दक्षिण अफ्रीका में कंपनी की सालाना जिंक उत्पादन क्षमता दोगुनी होकर 5 लाख टन हो जाएगी।

ग्लोबल सेटअप क्या बिगाड़ेगा खेल या बाजार दिखाएगा अपनी चाल, जानें गिफ्ट निफ्टी से कैसे मिल रहे संकेत

RBL Bank: बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ‘एमिरेट्स NBD बैंक PJSC’ की सभी भारतीय शाखाओं को RBL बैंक में विलय करने की मंजूरी मिल गई है। यह विलय 1 दिसंबर, 2026 से प्रभावी होगा।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) मॉडल पर 765 kV GIS पुणे वेस्ट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट लगाने के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है। इसके लिए वार्षिक ट्रांसमिशन शुल्क 199.55 करोड़ रुपये तय किया गया है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के पुणे वेस्ट में एक नया 765/400 kV गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) सबस्टेशन लगाना शामिल है। इसके अलावा, इसमें पूरे महाराष्ट्र में 765 kV और 400 kV ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण और उनसे जुड़े बे (bays) का काम भी शामिल है।

स्टॉक स्प्लिट के लिए यह शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

जटाशंकर इंडस्ट्रीज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजारों में आज पॉजिटिव शुरुआत होने की की उम्मीद है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त देखने को मिली है। लगातार 15 सत्रों के बाद FIIs शुद्ध खरीदार बनते दिखे हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

16 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी बाजारों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी जारी रही। बाजार को आईटी,मीडिया और मेटल शेयरों में हुई खरीदारी से सपोर्ट मिला। कमजोर ग्लोबल संकेतों के बावजूद,शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी पर बिकवाली का दबाव दिखा,लेकिन जैसे-जैसे सेशन आगे बढ़ा, इनमें धीरे-धीरे सुधार आया। निफ्टी 23,149.85 के इंट्राडे हाई तक पहुंचा और कारोबारी सत्र के अंत में दिन के हाई के करीब बंद हुआ,जो लगातार बनी हुई खरीदारी की दिलचस्पी का संकेत है।

कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,146.15 पर बंद हुआ।

बाजार के लिए मिले-जुले संकेत

निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए मिले-जुले संकेत हैं। FIIs की करीब 1200 करोड़ रुपये की खरीदारी देखने को मिली है। लेकिन 108 डॉलर के करीब पहुंचकर कच्चा तेल फिक्र बढ़ा रहा है। वहीं शुक्रवार को US INDICES में तेज गिरावट रही। नैस्डैक दो फीसदी से ज्यादा फिसला है, एशिया भी कमजोर दिख रहा है। हालांकि गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट है।

ट्रंप के फैसले से राहत, 100% टैरिफ खतरा टला

रूस से तेल खरीदने पर भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्टपति ट्रंप ने 100% टैरिफ वाला कानून 60 दिनों के लिए टाला है।

अनुमान के करीब HDFC बैंक के नतीजे

HDFC BANK के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान पर खरे उतरे हैं। बैंक का मुनाफा 5% तो ब्याज से कमाई करीब 10% बढ़ी है। बैंक की असेट क्वॉलिटी में भी सुधार दिखा है। हालांकि तिमाही आधार पर नेट इंटरेस्ट मार्जिन में10 बेसिस प्वाइंट का दबाव दिखा है। हालांकि बैंक के CEO शशिधर जगदीशन ने अगली तिमाही से मार्जिन में सुधार की उम्मीद जताई है।

ICICI बैंक ने पेश किए शानदार नतीजे

ICICI बैंक ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। दूसरी तिमाही में बैंक का मुनाफा 20 परसेंट बढ़ा है। NII में भी पौने 18% का उछाल दिखा है। बैंक ने NIM के मामले में भी चौंकाया है। Q2 में मार्जिन 4.18% रहे। मार्जिन इंडस्ट्री में सबसे शानदार रहे हैं। एसेट क्वालिटी भी सुधरी है।

एक्सिस बैंक के Q2 नतीजे रहे अच्छे

एक्सिस बैंक के भी Q2 नतीजे अच्छे रहे हैं। बैंक का दूसरी तिमाही में मुनाफा 38% बढ़ा है। NII 12% बढ़ा है। बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार दिखा है। तिमाही और सालाना आधार पर NIM में हल्की कमजोरी दिखी है।

DLF का मुनाफा बढ़ा, लेकिन मार्जिन पर मार

दूसरी तिमाही में DLF का मुनाफा 10% बढा है। लेकिन रेवेन्यू 23% तो EBITDA 92% घटा है। कंपनी के मार्जिन पर भी तगड़ी मार पड़ी है। वहीं ओबेरॉय रियल्टी का प्रॉफिट फ्लैट रहा। रेवेन्यू में 6% की कमी आई है। लेकिन मार्जिन में सुधार हुआ है।

नतीजों के लिहाज से आज बड़ा दिन

नतीजों के लिहाज से आज बड़ा दिन है। निफ्टी की दो कंपनियों अल्ट्राटेक और बजाज फाइनेंस के नतीजे आएंगे । दूसरी तिमाही में बजाज फाइनेंस का मुनाफा 31 परसेंट बढ़ सकता है । वहीं ब्याज से कमाई यानी NII में 24% का उछाल संभव है। साथ ही HIND ZINC, IREDA, UNION BANK के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। इनमें इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा 0.49 प्रतिशत गिरा है। फिलीपीन पेसो और ताइवान डॉलर में भी 0.27 प्रतिशत की कमजोरी आई, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.13 प्रतिशत फिसल गया है। दूसरी ओर जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की मजबूती आई है और चीनी रेनमिनबी 0.06 प्रतिशत चढ़ गया है। थाई बाहत और मलेशियाई रिंगित में क्रमशः 0.06 प्रतिशत और 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई है, जबकि सिंगापुर डॉलर में 0.04 प्रतिशत की गिरावट आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमी

लगातार 15 कारोबारी सत्रों तक नेट बिकवाली करने के बाद, 16 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट खरीदार (net buyers) बन गए और उन्होंने लगभग 1,166 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार 45 सत्रों से चली आ रही अपनी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और इस सत्र के दौरान 3,661 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

Stock market news : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। इनमें इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा 0.49 प्रतिशत गिरा है।

 

 

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा सुस्त शुरुआत के संकेत, एशिया, यूएस के बाजार गिरे

Gold Price Today: महानवमी पर सोने में गिरावट, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक इतना रह गया भाव

देश में सोने की कीमत और नीचे आ गई है। 19 अक्टूबर को महानवमी की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में भाव 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बीते सप्ताह अलग-अलग शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 3760 रुपये तक ​फिसली। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 3450 रुपये तक सस्ता हुआ।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.12 डॉलर प्रति औंस पर है। बीते सप्ताह सोने का वैश्विक भाव ​0.7 प्रतिशत कमजोर हुआ। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली135490147800
मुंबई135340147650
अहमदाबाद135390147700
चेन्नई135340147650
कोलकाता135340147650
हैदराबाद135340147650
जयपुर135490147800
भोपाल135390147700
लखनऊ135490147800
चंडीगढ़135490147800

DA Hike: दीवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! जानिए कितनी बढ़कर आएगी आपकी अक्टूबर की सैलरी?

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट दिख रही है। 19 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते सप्ताह चांदी का भाव 10000 रुपये नीचे आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.05 डॉलर प्रति औंस है। इस साल जनवरी में देश के अंदर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी।

Petrol Diesel Price Today: 19 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें अपने शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 19 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

DA Hike: दीवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! जानिए कितनी बढ़कर आएगी आपकी अक्टूबर की सैलरी!

DA Hike Update: केंद्र सरकार के करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 से देय महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। इस बार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी बढ़ोतरी की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे DA 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। वैसे केंद्र सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा और मंजूरी की तारीख तय होना बाकी है।

8 नवंबर को दीवाली है। इसे देखते हुए कर्मचारी संगठन दीवाली से पहले इस किस्त को जारी करने की मांग कर रहे हैं। 14 अक्टूबर को ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स’ ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर 16 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान भी किया था, जिसमें 1 जुलाई से लंबित डीए/डीआर और दिवाली बोनस की मांग शामिल थी।

सरकार ने गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए 30 दिनों के एड-हॉक बोनस (अधिकतम ₹6,908) और 11.4 लाख से अधिक रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के पीएलबी बोनस (अधिकतम ₹17,951) की घोषणा कर दी है। लेकिन बोनस जहां एकमुश्त मिलता है, वहीं DA बढ़ोतरी से हर महीने की सैलरी और पेंशन में स्थायी इजाफा होता है।

3% DA Hike से किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी?

महंगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के आधार पर की जाती है। अगर डीए 60% से बढ़कर 63% होता है, तो अलग-अलग बेसिक पे पर हर महीने और सालाना होने वाले लाभ का पूरा गणित इस प्रकार है:

₹18,000 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

  • मौजूदा DA (60%): ₹10,800 प्रति माह
  • नया DA (63%): ₹11,340 प्रति माह
  • मासिक फायदा: ₹540 प्रति माह
  • वार्षिक फायदा: ₹6,480 प्रति वर्ष

₹25,500 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹765 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹9,180 प्रति वर्ष

₹35,400 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,062 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹12,744 प्रति वर्ष

₹44,900 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,347 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹16,164 प्रति वर्ष

₹56,100 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,683 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹20,196 प्रति वर्ष

एरियर और 8वें वेतन आयोग का स्टेटस

1 जुलाई से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों को एरियर यानी पिछला बकाया भी मिलेगा। जैसे ₹18,000 बेसिक पे वाले कर्मचारी को केवल जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का कुल ₹1,620 एरियर मिलेगा। इसी अनुपात में पेंशनभोगियों को भी डीआर (DR) का एरियर दिया जाएगा।

एक साल में 2 बार बढ़ता है डीए/डीआर

केंद्र सरकार औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) डीए/डीआर में संशोधन करती है। यह लंबित डीए संशोधन 8वें वेतन आयोग से पूरी तरह अलग है। 3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी समय सीमा मई 2027 के आसपास है।

21 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होने वाली है। इस बैठक में जुलाई 2026 के डीए और डीआर संशोधन पर बड़ा फैसला आ सकता है। वैसे जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक मुहर नहीं लग जाती, तब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अंतिम घोषणा का इंतजार करना होगा।

IPO की तैयारी कर रही OYO के लिए मूडीज ने आउटलुक किया ‘पॉजिटिव’, B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग बरकरार

मूडीज रेटिंग्स ने IPO लाने की तैयारी कर रही OYO की पेरेंट कंपनी प्रिज्म (Prism) के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। साथ ही कंपनी की ‘B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग’ (CFR) को बरकरार रखा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मूडीज रेटिंग्स की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट श्वेता पटोदिया का कहना है, “पॉजिटिव आउटलुक हमारी इस उम्मीद को दर्शाता है कि OYO अगले 12-18 महीनों में अपनी अच्छी कमाई और फ्री कैश फ्लो जनरेशन को बरकरार रखेगी। इससे कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और उसकी लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) भी अच्छी बनी रहेगी।”

मूडीज के अनुसार, OYO के लिए लीड एनालिस्ट पटोदिया का कहना है, “B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग (CFR) को बरकरार रखने का मतलब है कि OYO अपने मुख्य बाजारों में बजट अकोमोडेशन (ठहरने की किफायती जगह) सेक्टर में लीडिंग पोजिशन रखती है। साथ ही कारोबार में भौगोलिक विविधता है क्योंकि इसका बिजनेस भारत, यूरोप और अमेरिका में फैला हुआ है।”

12-18 महीनों में ₹3000 करोड़ हो सकता है OYO का EBITDA

मूडीज को उम्मीद है कि अगले 12-18 महीनों में OYO का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये (31.5 करोड़ डॉलर) हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी लगातार अपना विस्तार कर रही है और अपने प्लेटफॉर्म पर नए स्टोरफ्रंट (होटल/प्रॉपर्टी) जोड़ रही है। वित्त वर्ष 2025—26 में OYO का EBITDA दोगुने से भी ज्यादा होकर 2,630 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

बेहतर कमाई और वर्किंग कैपिटल के आउटफ्लो के स्थिर होने की वजह से OYO पहली बार वित्त वर्ष 2026 में पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो हासिल करने में सफल रही। मूडीज को उम्मीद है कि OYO अगले एक से दो वर्षों तक पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो बरकरार रखेगी। इसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो निकट भविष्य के खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त होगा।

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6,650 करोड़ का IPO लाने की तैयारी

OYO अपने IPO के जरिए लगभग 6,650 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें से करीब 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। मूडीज का कहना है, “अगर IPO योजना के मुताबिक कंप्लीट होता है, तो इससे कर्ज कम करने की प्रक्रिया तेज होगी और कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी। हालांकि, IPO की टाइमिंग और इसके एग्जीक्यूशन को लेकर अनिश्चितता को देखते हुए, हमारे बेस-केस वित्तीय अनुमानों में इस रकम या इससे जुड़े कर्ज के भुगतान को शामिल नहीं किया गया है।”

डेंटिस्ट बनने दुबई गईं भारतीय महिला, डांस फिटनेस से बदली किस्मत, अब हर महीने कमाती हैं 11 लाख रुपये

कभी-कभी जिंदगी में एक छोटा-सा शौक करियर की ऐसी राह खोल देता है, जिसके बारे में इंसान ने कभी सोचा भी नहीं होता। भारतीय महिला मोनिका सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह डेंटिस्ट बनने का सपना लेकर दुबई पहुंची थीं, लेकिन डांस फिटनेस में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें एक अलग पहचान दिला दी। आज वह दुबई में महिलाओं की फिटनेस और हेल्थ से जुड़ा अपना बिजनेस चला रही हैं और हर महीने करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये तक कमाती हैं।

भारत से दुबई पहुंचीं, डेंटिस्ट के तौर पर काम करने की थी तैयारी

द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोनिका सिंह करीब 12 साल पहले दुबई गई थीं। उनका इरादा वहां डेंटिस्ट के रूप में अपना करियर बनाने का था। इसके लिए उन्हें दुबई हेल्थ अथॉरिटी (DHA) की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी थी। इसी तैयारी के दौरान वह ग्रुप वर्कआउट क्लास में जाने लगीं। यहां उन्हें डांस फिटनेस पसंद आने लगी। शुरुआत में यह सिर्फ एक्सरसाइज और खुद को फिट रखने का तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। मोनिका ने बताया कि वह पहले फिटनेस को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखती थीं। डांस फिटनेस क्लास में जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह इस क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपने पति से इस बारे में बात की और पति ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।

फिटनेस क्लास से शुरू हुआ सफर

मोनिका ने दुबई के अलग-अलग स्टूडियो में ग्रुप एक्सरसाइज क्लास लेना शुरू किया। इससे उन्हें फिटनेस इंडस्ट्री में अनुभव मिला और आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू करने का रास्ता खुला। डेंटिस्ट्री की पढ़ाई ने भी उनके काम में मदद की। मानव शरीर की बनावट और उसके काम करने के तरीके की उनकी समझ ने उन्हें फिटनेस और महिलाओं की सेहत को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। इसके बाद उन्होंने महिलाओं की वेलनेस, खासकर मिडलाइफ के दौरान होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया और इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी ली।

23 महिलाओं को देती हैं कोचिंग

आज मोनिका दुबई में महिलाओं को फिटनेस और वेलनेस कोचिंग देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल उनके पास 23 क्लाइंट हैं। उनकी मासिक कमाई 42,000 से 45,000 दिरहम के बीच बताई गई है, जो भारतीय रुपये में करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये होती है। उनका तरीका महिलाओं को जरूरत से ज्यादा कठिन एक्सरसाइज या शारीरिक दबाव में डालने के बजाय उनकी जरूरतों के हिसाब से फिटनेस लक्ष्य हासिल करने में मदद करना है।

लाखों की कमाई के बावजूद निवेश नहीं

अच्छी कमाई होने के बावजूद मोनिका ने अभी निवेश करना शुरू नहीं किया है। वह फिलहाल अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाकर रखती हैं। उनके सात साल के बेटे की स्कूल फीस, कार लोन और घर के रोजमर्रा के खर्च भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मोनिका के मुताबिक, वह घरेलू खर्चों के लिए हर महीने करीब 3,000 से 4,000 दिरहम अलग रखती हैं और बाकी रकम बचाती हैं। घर के अन्य खर्चों की जिम्मेदारी उनके पति संभालते हैं।

अब ऑनलाइन बिजनेस और बड़े घर का सपना

मोनिका का अगला लक्ष्य अपने वेलनेस बिजनेस के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और ऐप लॉन्च करना है। इसके लिए वह पैसे जोड़ रही हैं, क्योंकि इसे तैयार करने में काफी खर्च आएगा।

लंबे समय में वह अपने परिवार के साथ बड़ा घर खरीदना चाहती हैं। उनकी कहानी बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा पहले से तय नहीं होता। कभी-कभी किसी नए अनुभव को मौका देना जिंदगी की दिशा बदल सकता है। हालांकि, उनकी कमाई और सफलता का यह सफर उनकी अपनी परिस्थितियों और बिजनेस पर आधारित है।

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