कल का मौसम: 13 अगस्त को यूपी समेत 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट! इन 2 इलाकों में IMD ने जारी की रेड कलर वॉर्निंग

Weather Update 13 August: दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के बड़े हिस्से में सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बीच आईएमडी ने 13 अगस्त के मौसम को लेकर भी एक विस्तृत चेतावनी बुलेटिन जारी किया है। इसके मुताबिक देश के उत्तरी, पूर्वी, मध्य, पश्चिमी और दक्षिण-प्रायद्वीपीय हिस्सों में बादलों की तगड़ी आवाजाही के बीच मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार देश के 20 से अधिक राज्यों में तेज से बहुत तेज बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है। इस मानसूनी बारिश के बीच सबसे गंभीर स्थिति पूर्वी भारत के दो राज्यों में देखने को मिल सकती है। इन राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने रेड कलर वार्निंग जारी की है।

गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लिए रेड वार्निंग

मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार 13 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से भी बेहद भारी बारिश यानी अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। इसी परिस्थिति को देखते हुए इन दोनों इलाकों के लिए रेड कलर वार्निंग जारी की गई है। इसका सीधा मतलब है कि स्थानीय प्रशासन और नागरिक स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें और आवश्यक कदम उठाएं। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम प्रणालियों के प्रभाव से तटीय इलाकों में तेज बारिश के साथ-साथ निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या पैदा हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में बहुत भारी बारिश का अनुमान

मध्य भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के मौसम में भी 13 अगस्त को खासा असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इसके साथ ही राज्य के कई इलाकों में मेघगर्जन और बिजली चमकने का अंदेशा भी जताया गया है, जिससे नदी-नालों में उफान और ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश और पहाड़ी राज्यों समेत 20 से अधिक राज्यों में भारी बारिश

देश के एक बड़े हिस्से में 13 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के कई स्थानों पर भारी बारिश की प्रबल संभावना है। पश्चिमी भारत और उससे सटे क्षेत्रों में राजस्थान, गुजरात क्षेत्र, कोंकण एवं गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र के इलाकों में भी तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

मध्य और पूर्वी भारत की बात करें तो पश्चिम मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान है। पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के इलाकों में भी भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है।

तेज आंधी, बिजली चमकने और हवाओं की रफ्तार का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। आंध्र प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है।

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इसी तरह अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, तटीय कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम और तेलंगाना में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली हवाओं के साथ बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और विदर्भ में भी बिजली चमकने के साथ वज्रपात का अलर्ट दिया गया है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में सतह पर तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

समंदर में तूफानी हलचल और मछुआरों के लिए चेतावनी

अरब सागर में मानसूनी हवाओं के प्रभाव से मौसम काफी उग्र रहने की संभावना है। सोमालिया और ओमान तट के पास और उससे दूर, पश्चिमी-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों तथा दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार रफ्तार तक पहुंच सकती हैं। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को इन क्षेत्रों तथा गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है।

वंदे भारत ट्रेनों के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाएगी ₹1350 करोड़ का IPO

वंदे भारत के लिए पार्ट्स बनाने वाली निफा 1,350 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने का प्लान बना रही है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। निफा कोलकाता की कंपनी है। इसने इश्यू के प्रबंधन के लिए नोमुरा और एक्सिस कैपिटल को एडवाइजर नियुक्त किया है। शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है। इससे आईपीओ बाजार में हलचल बढ़ी है।

आईपीओ के पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए

Nipha के आईपीओ में नए शेयर इश्यू करने की संभावना है। कंपनी इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कर्ज चुकाने और बिजनेस से जुड़ी दूसरी जरूरतों के लिए करेगी। अभी इश्यू के बारे में बातचीत जारी है। इससे बाद में इश्यू के साइज और दूसरी चीजों में बदलाव हो सकता है।

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस से होगा फायदा 

आईपीओ के प्लान की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, “इनवेस्टर्स के बीच मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की अच्छी डिमांड है। रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ा है। इसका फायदा निफा जैसी कंपनियों को मध्यम से लंबी अवधि में मिलेगा।”

कंपनी की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं

निफा की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं। इनमें से 9 पश्चिम बंगाल में है और एक हरियाणा में है। कंपनी रेलवे के अलावा एग्रीकल्चर, इलेक्ट्रिकल-स्विच गियर और इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज को प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। आईपीओ के प्लान के बारे में जानने के लिए कंपनी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

कंपनी के रेलवे पोर्टफोलियो में कई प्रोडक्ट्स शामिल

कंपनी वंदे भारत के लिए कंपोनेंट्स की सप्लाई के साथ ही रेलवे को LHB कोच और EMU सप्लाई करती है। इसके रेलवे पोर्टफोलियो में लोकोमोटिव कास्टिंग्स, ट्रैक और पर्मानेंट-वे कंपोनेंट्स, ट्रेन कपलिंग और ड्राफ्ट सिस्टम्स, फ्रेट रेल प्रोडक्ट्स और रेल-व्हील सेट्स शामिल हैं।

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2030 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 800 करने का प्लान

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस का फायदा निफा को मिलेगा। सरकार वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाना चाहती है। दिसंबर 2025 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 164 थी। सरकार का प्लान 2030 तक इसे बढ़ाकर 800 और 20247 तक 4,500 करने का प्लान है। FY26 में निफा का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 634 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 475 करोड़ रुपये था। इसका ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 19 फीसदी था।

सोना ₹1.54 लाख के पार, चांदी ₹3600 चढ़ी, निवेशकों को अब किस बात पर करना चाहिए फोकस!

Gold Silver Price: ग्लोबल बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त के चलते भारत में बुधवार 12 अगस्त को सोने-चांदी की कीमतों में तेजी जारी रही। हालांकि अब निवेशक जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर नजर बनाए हुए थे। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा 0.66% बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी के वायदा 1.50% बढ़कर ₹2.39 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

घरेलू बुलियन मार्केट में यह बढ़त ग्लोबल स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आई। जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग बनी रही, जबकि चांदी को औद्योगिक मांग की उम्मीदों से अतिरिक्त सहारा मिला।

कीमतों को क्या दे रहा सहारा

सोना निवेशकों के फोकस में बना हुआ है क्योंकि वे जियोपॉलिटिकल जोखिमों का आकलन कर रहे हैं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के बारे में संकेत पाने के लिए अमेरिका के लेटेस्ट महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया और उसके आसपास शिपिंग से जुड़े नए तनाव ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल की ओर बढ़ गया, जबकि अमेरिकी क्रूड $83 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था।

जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय में अक्सर सोने की मांग बढ़ती है क्योंकि निवेशक इस धातु का इस्तेमाल वैल्यू स्टोर करने और पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए करते हैं।

आज आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, क्योंकि इनका अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। महंगाई के आंकड़े कम रहने से आसान मॉनेटरी स्थितियों की उम्मीदें मजबूत हो सकती हैं, जबकि उम्मीद से ज्यादा आंकड़े आने पर ब्याज दरों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाने की संभावना बढ़ सकती है।

सोने से ज्यादा चांदी में बढ़त

बुधवार (12 अगस्त) के घरेलू कारोबार में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें MCX पर सितंबर वायदा में 1.50% की बढ़त देखी गई।

चांदी की मांग दो तरह की होती है । पहला निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक कामों में भी इसका इस्तेमाल होता है। इससे चांदी को सोने की तरह ‘सेफ-हेवन’ वाले कारकों के अलावा मांग का एक अतिरिक्त सहारा भी मिलता है।

और कितनी तेजी संभव

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “सोने और चांदी को लगातार मजबूत सहारा मिल रहा है, जो कीमती धातुओं में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।” देसाई के अनुसार, कीमतें अधिक होने के बावजूद दोनों धातुओं की फिजिकल मांग अच्छी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि निवेश की दिलचस्पी और लगातार औद्योगिक मांग के कारण चांदी में भी तेजी आई है। साथ ही, देसाई ने चेतावनी दी कि बुलियन की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन और प्रॉफ़िट-बुकिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह पॉज़िटिव है, लेकिन इसकी रफ़्तार धीमी है।एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के ज़रिए निवेश का प्रवाह भी मददगार रहा है, हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी हुई है।

मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह पॉज़िटिव बना रहा, जबकि जुलाई में सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह लगभग ₹1,285 करोड़ रहा, जो जून में ₹4,286 करोड़ था।

इस धीमी रफ़्तार से पता चलता है कि निवेश की मांग खत्म नहीं हुई है, लेकिन नए निवेश की रफ़्तार पिछले महीने की तुलना में कम हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, घरेलू स्तर पर ऊंची कीमतें, दुनिया भर में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतें और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें – ये सभी बातें आने वाले समय में बुलियन की कीमतों के लिए अहम रहेंगी।

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त, आगे क्या हो सकता है असर?

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

जेब में ₹0 कैश, फिर भी घूमेंगे विदेश! देखें कहां काम करेगा भारतीय UPI

कभी भी अब्रॉड ट्रैवल में सबसे बड़ी परेशानी होती है पेमेंट करना। पहले लोगों को कैश बदलवाना पड़ता था या इंटरनेशनल कार्ड साथ रखना पड़ता था। लेकिन अब भारत के लोगों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। कई देशों में UPI से सीधे मोबाइल के जरिए पेमेंट की सुविधा मिलने लगी है, जिससे शॉपिंग करना, होटल का बिल पेमेंट या रेस्टोरेंट में पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

स्पेन की तैयारी 

जल्दी ही स्पेन भी अब वह देश होगा, जहां जाकर भारत के लोग UPI से आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दुकानों पर सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैवल पहले से ज्यादा आसान होगा।

नेपाल और भूटान 

नेपाल और भूटान घूमने जाने वाले भारतीयों के लिए UPI काफी काम की फैसिलिटी है। यहां कई दुकानों, होटलों और आउटलेट पर UPI से पेमेंट किया जा सकता है। इससे करेंसी चेंज करने की परेशानी कम हो जाती है और मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

ग्रीस 

ग्रीस भी कुछ समय पहले UPI फैसिलिटी अपनाने वाले देशों में जुड़ चूका है। अगर आप एथेंस की हिस्टोरिक साइट देखने जाएं या सेंटोरिनी और माइकोनोस आइलैंड की सैर करें, तो कई जगहों पर डिजिटल पेमेंट करने की फैसिलिटी मिल सकती है। इससे शॉपिंग करना और घूमना दोनों आसान हो जाते हैं।

सिंगापुर

सिंगापुर उन देशों में है, जहां भारतीय UPI को अपनाया गया। यहां टूरिस्ट शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और कई जगहों पर आसानी से मोबाइल से पेमेंट कर सकते हैं। इससे बार-बार कैश निकालने या पैसे बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कतर और यूएई

कतर, दुबई और अबू धाबी वाले पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी UPI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर QR कोड स्कैन करके आसानी से पेमेंट किया जा सकता है। इससे ट्रैवल में पेमेंट करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका

फ्रांस यूरोप का पहला देश था, जिसने UPI पेमेंट की शुरुआत की। इसके बाद मॉरिशस और श्रीलंका ने भी यह फैसिलिटी शुरू कर दी थी। अब इन देशों में कई होटल, लोकल मार्केट, बीच, रेस्टोरेंट पर टूरिस्ट आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं। इससे घूमने-फिरने का एक्सपीरियंस आसान बन जाता है।

टूरिस्ट बेनिफिट 

दुनिया के कई देशों में UPI की सुविधा मिलने से भारत के लोग का काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब हर बार फॉरेन करेंसी साथ रखने या इंटरनेशनल कार्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां UPI अवेलेबल है, वहां मोबाइल से QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है। जो भी देश इस फैसिलिटी को अपना रहे हैं, वहां ट्रैवल करना अब आसान और सेफ होता जा रहा है।

लेऑफ के बाद ऑफिस की आखिरी विजिट बनी दर्दनाक याद! सोशल मीडिया पर वायरल हुई इमोशनल कहानी

नौकरी से निकाले जाने के बाद एक कर्मचारी कंपनी को लैपटॉप वापस करने के लिए ऑफिस गया। व्यक्ति के साथ वहां पर हैरान कर देने वाली घटना हुई। व्यक्ति ने ये घटना शेयर करते हुए बताया कि, ऑफिस की यह आखिरी यात्रा उसके 2 साल के बेटे के लिए भी एक मुश्किल और समझ से परे अनुभव बन गई। उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। Reddit पर शेयर पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि, वह ब्लैकरॉक की कंपनी प्रीक्विन में काम करता था। हाल ही में उसकी नौकरी चली गई थी और वह ऑफिस में अपनी आखिरी दिन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पहुंचा था।

बेटा अंदर नहीं जा सकता

उस समय उसकी पत्नी भी काम पर थी और उनके 2 साल के बच्चे की देखभाल के लिए घर पर कोई और नहीं था। ऐसे में कर्मचारी को अपने बच्चे को ऑफिस साथ ले जाना पड़ा। उसने बताया, “घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए मेरे पास उसे अपने साथ ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं था।” लेकिन, ऑफिस पहुंचने के बाद कर्मचारी को बताया गया कि उसका बेटा अंदर नहीं आ सकता। उसने अपनी स्थिति समझाने की कोशिश की और बताया कि यह उसका आखिरी दिन था और उसे सिर्फ कंपनी का लैपटॉप जमा करके वापस जाना था। इसके बावजूद उसकी रिक्वेस्ट को मंजूरी नहीं दी गई और बच्चे को ऑफिस के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

इसके बाद कर्मचारी को मजबूर होकर एक कलीग को फोन करना पड़ा और जब तक वह लैपटॉप जमा करने की प्रक्रिया पूरी करता, तब तक अपने बेटे की देखभाल करने के लिए कहा। उसे लगा था कि यह काम महज पांच मिनट में पूरा हो जाएगा, लेकिन पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लग गए। कर्मचारी ने कहा कि इस पूरी स्थिति की वजह से उसे काफी बुरा महसूस हुआ। लेकिन, इस अनुभव से परेशान होने के बावजूद उसने साफ किया कि वह कंपनी पर किसी नियम को तोड़ने का आरोप नहीं लगा रहा है। उसका कहना था कि वह समझता है कि ऑफिस में विजिटर्स और बच्चों को लेकर कंपनी की अपनी पॉलिसी हो सकती है।

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बन गई एक दर्दनाक याद

नौकरी जाने के बाद इस अनुभव ने कर्मचारी को एहसास कराया कि कंपनी के लिए उसकी निजी परिस्थितियां उतनी मायने नहीं रखतीं, जितनी उसके लिए खुद रखती हैं। उन्होंने लिखा, “आप अपना सालों का समय दे सकते हैं, देर तक काम कर सकते हैं, जिम्मेदारी ले सकते हैं और कंपनी को अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मान सकते हैं। लेकिन जब नौकरी का रिश्ता खत्म होता है, तो आखिर में यह एक बिजनेस फैसला ही होता है।” उन्होंने लिखा, “मेरे लिए, यह चीजों को सही नजरिए से देखने की एक दर्दनाक याद दिलाने वाली बात थी।”

लोगों ने किया पोस्ट

व्यक्ति का ये पोस्ट कुछ ही समय में Reddit पर चर्चा का विषय बन गई। एक यूजर ने कहा, “कंपनी से पहले ही लेबल लगा हुआ बॉक्स मंगवा लेना चाहिए, ताकि लैपटॉप आसानी से वापस भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि कंपनी का समय या पैसा बचाने के लिए कर्मचारी को खुद अपना समय और मेहनत खर्च करने की जरूरत नहीं है।” वहीं दूसरे ने कहा, “वह अगली बार खुद ऑफिस जाने के बजाय लैपटॉप रिसेप्शन पर छोड़ सकता है, किसी पुराने कलीग से मदद मांग सकता है या कंपनी से डिवाइस वापस भेजने के लिए बॉक्स मंगवा सकता है।”

वहीं, एक और यूजर ने कहा कि, “कई लोग कॉर्पोरेट नौकरी, अच्छी सैलरी और ऑफिस की सुविधाओं वाली जिंदगी को पसंद करते हैं, लेकिन नौकरी जाने के बाद कंपनी के रवैये से उन्हें निराशा होती है”। यूजर ने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के दौरान उनके साथ खराब व्यवहार किया जाता है और ऐसी स्थिति में उनके लिए सहानुभूति महसूस करना जरूरी नहीं है।

Tata Motors CV Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2560 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू भी 20% उछला

Tata Motors CV Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors Commercial Vehicles Ltd ने 12 अगस्त को जून तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 83% बढ़कर ₹2,560 करोड़ हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और फ्रेट ग्राहकों से मजबूत मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को सहारा दिया। हालांकि, कमोडिटी की बढ़ती लागत का दबाव भी रहा।

Tata Motors CV का रेवेन्यू 20% बढ़ा

टाटा मोटर्स CV का ऑपरेशंस से रेवेन्यू पहली तिमाही में 20% बढ़कर ₹20,576 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹17,192 करोड़ था।

कंपनी के MD और CEO गिरीश वाघ ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री ने मजबूती दिखाई। भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, बेहतर फ्लीट इस्तेमाल और अलग-अलग सेक्टर से बनी मांग ने कारोबार को सहारा दिया।

उन्होंने कहा कि Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल वॉल्यूम में सालाना आधार पर 26% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, बेहतर मार्केट रणनीति और लगातार अच्छे अमल से कंपनी की बाजार स्थिति और मजबूत हुई है।

इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल की मांग भी बढ़ी

टाटा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ दर्ज की। eSCV सेगमेंट ने मई और जून में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।

इन दो महीनों में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 10% रही। वहीं, पहली तिमाही में eSCV सेगमेंट में Tata Motors की बाजार हिस्सेदारी 47% रही। कंपनी का कहना है कि इससे इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल की बढ़ती मांग और उसके EV इकोसिस्टम की मजबूती का पता चलता है।

EBITDA मार्जिन 11.7% रहा

टाटा मोटर्स के CFO जीवी रमणन के मुताबिक, पहली तिमाही में रेवेन्यू और मुनाफे के साथ EBITDA मार्जिन भी मजबूत रहा। यह 11.7% रहा।

कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद कंपनी ने यह मार्जिन हासिल किया। तिमाही में फ्री कैश फ्लो भी मजबूत रहा और यह करीब ₹1,100 करोड़ रहा।

कंपनी ने कहा कि कमोडिटी की लागत का दबाव अभी बना हुआ है। इससे निपटने के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कीमतों में अनुशासन और बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर फोकस किया जा रहा है।

Tata Motors CV का मार्केट शेयर कितना रहा?

कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू CV VAHAN मार्केट शेयर 36.8% रहा। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई।

कैटेगरी के हिसाब से HCV में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 56.3% रही। ILMCV में 36.9%, SCV PU में 27.7% और CV Passenger सेगमेंट में 41.3% रही।

शेयर में 1.6% की गिरावट

Tata Motors CV के शेयर 12 अगस्त को 1.6% की गिरावट के साथ ₹342 पर बंद हुए। कंपनी ने तिमाही नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए। इसलिए इन नतीजों का असर अगले कारोबारी सत्र में शेयर पर देखने को मिल सकता है।

कंपनी ने आगे के प्रदर्शन को लेकर भी भरोसा जताया है। Tata Motors के मुताबिक, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, लगातार इनोवेशन और ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देने पर फोकस के चलते आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपनी बाजार स्थिति मजबूत करने और मुनाफे के साथ ग्रोथ जारी रखने की उम्मीद कर रही है।

Grasim Q1 Results: प्रॉफिट 51% बढ़कर 2146 करोड़, रेवेन्यू 21 फीसदी बढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MRF Share Price : Q1 नतीजों के बाद शेयर में गिरावट जारी लेकिन ब्रोकरेज बुलिश, आगे शेयर लगा सकता है 26% की छलांग

MRF Share Price : जून तिमाही में खराब ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के कारण MRF के शेयरों में बुधवार, 12 अगस्त को थोड़ी गिरावट देखी गई। जिससे पिछले सेशन की गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हालांकि ब्रोकरेज फर्म CLSA ने टायर बनाने वाली इस कंपनी पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बनाए रखी है।

MRF का शेयर 0.26 फीसदी गिरकर 1,30,785 रुपये पर बंद हुआ। बता दें कि मंगलवार को कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे घोषित करने के बाद शेयर में 2.04 फीसदी की गिरावट आई थी। 2026 में अब तक टायर बनाने वाली इस कंपनी के शेयर में 13.4 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 6.5 फीसदी की गिरावट देखी गई। MRF का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 55,450 करोड़ रुपये था।

CLSA ने स्टॉक पर क्या दिया तर्क

CLSA ने MRF पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बनाए रखी है और प्रति शेयर 1,65,240 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जिसका मतलब है कि मंगलवार की क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 26 फीसदी की बढ़त हो सकती है। ब्रोकरेज ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान मार्जिन पर भारी दबाव का ज़िक्र किया और बताया कि MRF का EBITDA मार्जिन क्रमिक रूप से 453 बेसिस पॉइंट्स गिर गया और उनके अनुमान से कम रहा। यह कमज़ोरी ग्रॉस मार्जिन में 566 बेसिस पॉइंट्स की क्रमिक गिरावट के कारण आई, क्योंकि कच्चे माल की लागत में 16-18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई थी।

Q1 में मुनाफ़े में कमी के बावजूद, CLSA को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव कम होगा। ब्रोकरेज के अनुसार, टायर इंडस्ट्री पहले ही कीमतों में लगभग 7-9 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है और Q2 FY27 के दौरान और बढ़ोतरी की योजना है।

CLSA को उम्मीद है कि MRF के मार्जिन में क्रमिक रूप से सुधार होगा क्योंकि कंपनी को कीमतों में बढ़ोतरी का पूरे तिमाही का फ़ायदा मिलेगा। कीमतों में और बढ़ोतरी और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) पर बढ़ी हुई लागत का बोझ डालने से भी मार्जिन में सुधार में मदद मिलनी चाहिए।

कैसे रहे तिमाही नतीजें

MRF ने जून तिमाही में कमाई में गिरावट दर्ज की, क्योंकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद ज़्यादा लागत का असर मुनाफ़े पर पड़ा। EBITDA सालाना आधार पर 7.46% घटकर ₹1,070.43 करोड़ से ₹990.63 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 13.95% से घटकर 11.77% रह गया। रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.64% बढ़कर ₹8,415.50 करोड़ हो गया। कम मुनाफ़े का असर मंगलवार को स्टॉक पर दिखा, जब नतीजों के बाद MRF के शेयर 2% से ज़्यादा गिर गए।

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अगर ‘मुसाफिर कैफे’ ने जीता दिल, तो ये 7 वेब सीरीज भी जरूर आएंगी पसंद!

हर किसी को ऐसी कहानियां पसंद आती हैं, जिनमें प्यार के साथ जिंदगी और रिश्तों की सच्चाई भी दिखाई दे। कुछ सीरीज अपनी सरल कहानी और प्यारे किरदारों की वजह से खास बन जाती हैं। आप हल्की-फुल्की, दिल को छूने वाली और जिंदगी से जुड़ी कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो ये सीरीज अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल करें।

मॉडर्न लव मुंबई – Amazon Prime Video

मुंबई की अलग-अलग जगहों और लोगों की जिंदगी पर बनी यह सीरीज प्यार के अलग-अलग रंग दिखाती है। इसमें छह अलग-अलग कहानियां हैं, जिनमें रोमांस के साथ परिवार, दोस्ती, रिश्ते और अपनी खुशी को समझने की कोशिश दिखाई गई है। सीरीज में अरशद वारसी, चित्रांगदा सिंह, फातिमा सना शेख, भूपेंद्र जदावत, ऋत्विक भौमिक और मसाबा गुप्ता जैसे कलाकार नजर आते हैं। हर कहानी में प्यार को देखने का अलग नजरिया मिलता है। कहीं कोई अपने प्यार की तलाश कर रहा है, तो कहीं परिवार अपने रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है।

नॉर्मल पीपल – Amazon Prime Video

कहानी कोनेल और मैरिएन की है, जो आयरलैंड के एक छोटे शहर में साथ पढ़ते हैं। दोनों का परिवार और रहन-सहन एक-दूसरे से काफी अलग है, लेकिन स्कूल के दिनों में दोनों के बीच प्यार हो जाता है। उनका रिश्ता आसान नहीं रहता और समय के साथ कई गलतफहमियां और परेशानियां उनके बीच आती हैं। कॉलेज जाने के बाद दोनों की जिंदगी अलग रास्ते पर चलने लगती है, लेकिन वे बार-बार एक-दूसरे के करीब आते हैं। सीरीज़ दिखाती है कि उम्र बढ़ने के साथ रिश्ते और प्यार किस तरह बदलते हैं। ‘मुसाफिर कैफे’ में प्यार और जिंदगी से जुड़े फैसलों की कहानी पसंद आई थी, तो ‘नॉर्मल पीपल’ जरूर पसंद आ सकती है।

स्वीट कारम कॉफी – Amazon Prime Video

यह सीरीज एक साउथ इंडियन परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाओं की कहानी है। इसमें सुंदरी, उनकी बहू कावेरी और कावेरी की बेटी निवेदिता की जिंदगी दिखाई गई है। तीनों की सोच और जिंदगी एक-दूसरे से काफी अलग है। एक दिन वे अपनी रोज की जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेने के लिए रोड ट्रिप पर निकलती हैं। इस सफर में उन्हें नई जगहें देखने और एक-दूसरे को समझने का मौका मिलता है। धीरे-धीरे वे अपने पुराने फैसलों और जिंदगी को लेकर भी सोचने लगती हैं। सीरीज में पहाड़ों और शांत जगहों के खूबसूरत नजारे भी देखने को मिलते हैं।

लिटिल थिंग्स – Netflix

यह कहानी मुंबई में साथ रहने वाले काव्या और ध्रुव की है। दोनों एक युवा कपल हैं और अपनी नौकरी, रिश्ते और रोज की जिंदगी के बीच तालमेल बनाने की कोशिश करते हैं। उनकी कहानी में बड़े ड्रामे के बजाय छोटी-छोटी बातें ज्यादा खास हैं। कभी दोनों छोटी बातों पर बहस करते हैं, तो कभी साथ में शांत शाम बिताते हैं या वीकेंड का प्लान बनाते हैं। फ्यूचर को लेकर उनकी बातचीत भी कहानी का हिस्सा है। धीरे-धीरे दोनों समझते हैं कि रिश्ते में सिर्फ प्यार ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझना भी जरूरी है।

व्हेन द वेदर इज फाइन – Netflix

मोक हे-वोन काम और प्राइवेट लाइफ की परेशानियों से थककर सियोल छोड़ देती हैं और अपने पुराने शहर लौट आती हैं। वहां उनकी मुलाकात अपने पुराने क्लासमेट इम यून-सेओब से होती है, जो एक छोटी सी किताबों की दुकान चलाता है। यून-सेओब लंबे समय से हे-वोन को पसंद करता है, लेकिन उसने कभी अपने दिल की बात नहीं कही। गांव की शांत जिंदगी में रहने के दौरान दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आते हैं। साथ में समय बिताते हुए वे अपने पुराने दुखों और परेशानियों से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। कॉफी, किताबें और सर्दियों की शांत शामें इस कहानी को और खूबसूरत बनाती हैं।

मीट योरसेल्फ – Netflix

शू होंगडोउ अपनी सबसे अच्छी दोस्त को खोने के बाद शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेने का फैसला करती हैं। वह बीजिंग छोड़कर युन्नान के एक छोटे से गांव में चली जाती हैं। वहां उनकी मुलाकात झी झियाओ से होती है, जो पहले शहर में काम करता था, लेकिन अब अपने गांव लौटकर नई जिंदगी शुरू कर रहा है। गांव में रहने के दौरान होंगडोउ नए लोगों से मिलती हैं और धीरे-धीरे शांत जिंदगी का आनंद लेना सीखती हैं। इस सफर में उन्हें खुद को समझने और अपने जीवन के बारे में नए सिरे से सोचने का मौका मिलता है। धीरे-धीरे वह फिर से खुश रहना और प्यार के बारे में सोचना शुरू करती हैं।

समबडी समवेयर – JioHotstar

सैम मिलर अपनी बहन की मौत के बाद अपने पुराने शहर लौटती हैं। यहां वापस आने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी पहले जैसी नहीं लगती। तभी उनकी मुलाकात अपने पुराने क्लासमेट जोएल से होती है, जो उन्हें एक खास लोकल ग्रुप से मिलाता है। इस ग्रुप में ऐसे लोग हैं जो खुद को दूसरों से अलग महसूस करते हैं, लेकिन एक-दूसरे के साथ उन्हें अपनापन मिलता है। धीरे-धीरे सैम नए लोगों से जुड़ती हैं और अपने बारे में फिर से जानने लगती हैं। उन्हें समझ आता है कि जिंदगी अपने तरीके से जीना और अपनी पसंद को स्वीकार करना भी जरूरी है। यह सीरीज खुद को समझने, नए लोगों से जुड़ने और जिंदगी में दोबारा शुरुआत करने की खूबसूरत कहानी है।

PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF Calulator: अगर आप हर साल ₹1.5 लाख कहीं ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और धीरे-धीरे बढ़ता भी रहे, तो PPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार की गारंटी रहती है। साथ ही, लंबे समय तक पैसा छोड़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज है। सरकार इसे समय-समय पर घटा या बढ़ा सकती है।

अगर आप हर साल PPF में पूरे ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपके पास कितने पैसे होंगे? अगर यही निवेश 20 या 25 साल तक चलता रहे तो रकम कहां पहुंच जाएगी? आइए इसका पूरा हिसाब समझते हैं।

15 साल में करीब ₹41 लाख

PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है। इस दौरान अगर आप हर साल ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो अपनी जेब से कुल ₹22.50 लाख डालेंगे।

अब इसमें ब्याज जुड़ता जाएगा। 7.1% की दर को मानकर चलें तो 15 साल बाद रकम करीब ₹40.68 लाख हो सकती है। यानी ₹22.50 लाख आपने जमा किए और करीब ₹18.18 लाख ब्याज से जुड़ गए। यहीं से PPF की असली ताकत समझ आती है।

20 साल में रकम करीब ₹67 लाख

15 साल पूरे होने के बाद PPF को आगे भी जारी रखा जा सकता है। इसे 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। अब मान लीजिए आप 20 साल तक हर साल ₹1.5 लाख डालते रहे। तब आपकी कुल जमा रकम ₹30 लाख होगी।

7.1% की दर को पूरे समय समान मानें तो 20 साल बाद यह रकम करीब ₹66.58 लाख हो सकती है। यानी आपकी जमा रकम ₹30 लाख है, लेकिन ब्याज से करीब ₹36.58 लाख और जुड़ सकते हैं।

25 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा

अब सबसे दिलचस्प हिसाब 25 साल का है। हर साल ₹1.5 लाख के हिसाब से 25 साल में आप कुल ₹37.50 लाख जमा करेंगे। लेकिन अगर 7.1% ब्याज दर पूरी अवधि में बनी रहती है, तो रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।

यानी आपने ₹37.50 लाख लगाए और करीब ₹65.58 लाख ब्याज से जुड़ गए। कुल रकम ₹1 करोड़ के पार निकल जाती है। इसी वजह से लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ यह देखना ठीक नहीं होता कि आपने कितना पैसा जमा किया है। यह भी देखना चाहिए कि उस पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय मिला।

15, 20 और 25 साल का पूरा हिसाब

अवधिहर साल जमाआपकी कुल जमा रकमअनुमानित ब्याजकुल रकम
15 साल₹1.50 लाख₹22.50 लाख₹18.18 लाख₹40.68 लाख
20 साल₹1.50 लाख₹30 लाख₹36.58 लाख₹66.58 लाख
25 साल₹1.50 लाख₹37.50 लाख₹65.58 लाख₹1.03 करोड़

नोट : ये आंकड़े 7.1% ब्याज दर को पूरे 15, 20 या 25 साल तक समान मानकर निकाले गए हैं। असल में PPF की ब्याज दर बदल सकती है। इसलिए भविष्य में मिलने वाली रकम भी अलग हो सकती है।

पैसा कब जमा करना बेहतर है?

PPF में ब्याज का कैलकुलेशन महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक खाते में मौजूद सबसे कम रकम के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप साल की पूरी ₹1.5 लाख की रकम एक साथ जमा करने की सोच रहे हैं, तो महीने की 5 तारीख से पहले जमा करना फायदेमंद हो सकता है।

अगर हर साल पैसा एक साथ जमा करना मुश्किल है, तो पूरे साल में भी किस्तों में रकम जमा की जा सकती है। लेकिन सालाना ₹1.5 लाख की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।

PPF निवेश में किन बातों का ध्यान रखें?

  • PPF में कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। लेकिन इसे सेविंग अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। PPF की ब्याज दर सरकार तय करती है। भविष्य में यह बढ़ या घट सकती है।
  • हर साल निवेश जारी रखें। अकाउंट को चालू रखने के लिए हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है।
  • नॉमिनी जरूर जोड़ें। इससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में रकम के क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • PPF सुरक्षित निवेश है, लेकिन हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अकेला PPF पर्याप्त नहीं। अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से दूसरे निवेश विकल्प भी रखें।

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