शहर की नौकरी छोड़ पहाड़ों में बसे पति-पत्नी! 4BHK मकान, फ्री पानी और ₹50 हजार के खर्च का ब्रेकडाउन वायरल

शहर की तेज रफ्तार जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच रहना सुनने में जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही दिलचस्प है यह जानना कि वहां रोजमर्रा की जिंदगी कितने खर्च में चलती है। हिमाचल प्रदेश के मनाली के पास रहने वाले दिव्या भट्ट और सौरभ यादव ने अपनी पहाड़ी जिंदगी की झलक सोशल मीडिया पर साझा की है। दोनों ने गजान गांव में अपना ठिकाना बनाया है और साथ ही होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने अपने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में रहते हुए उनका महीने का खर्च करीब ₹50 हजार आता है।

इस बजट में घर का राशन, बाहर खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च शामिल हैं। खास बात यह है कि आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती ही उनके लिए मनोरंजन का बड़ा जरिया है, इसलिए कई आउटिंग पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता। अब उनका यह सादा लेकिन खूबसूरत लाइफस्टाइल इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

मनाली के पास गांव में बसाया घर

दिव्या और सौरभ ने हिमाचल प्रदेश के गजान गांव को अपना ठिकाना बनाया है। यह गांव मनाली के पास हिमालयी इलाके में स्थित है। दोनों यहां रहते भी हैं और एक होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने इंस्टाग्राम पर ‘Living in the Mountains, Episode 1’ नाम से वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ों में अपनी जिंदगी और हर महीने होने वाले खर्च का हिसाब बताया।

1BHK का किराया करीब ₹15 हजार

कपल जिस 4BHK प्रॉपर्टी में रहता है, उसका इस्तेमाल उनके होमस्टे से भी जुड़ा है। इसलिए उनका रहने का खर्च सामान्य किरायेदार से अलग है। दिव्या के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ रहने के लिए मनाली के पास घर किराए पर लेना चाहता है, तो 1BHK का किराया करीब ₹15,000 और 2BHK का करीब ₹25,000 तक हो सकता है।

घर का खाना, फिर भी ₹15 हजार का फूड बजट

पहाड़ों में रहने के बावजूद कपल खाने पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करता। दोनों ज्यादातर खाना घर पर ही बनाते हैं। दिव्या के मुताबिक, उनकी महीने की ग्रॉसरी करीब ₹10,000 आती है। इसके अलावा बाहर खाने-पीने पर करीब ₹5,000 खर्च हो जाते हैं।

छोटी दूरी के लिए गाड़ी नहीं, पैदल सफर

गांव में रहने का एक फायदा यह भी है कि रोजमर्रा के कई छोटे काम पैदल ही हो जाते हैं। दिव्या ने बताया कि दोनों स्थानीय स्तर पर ज्यादातर जगह पैदल जाते हैं। इसके बावजूद गाड़ी के ईंधन पर करीब ₹3,000 प्रति महीने खर्च हो जाता है।

पानी का बिल जीरो, बिजली करीब ₹1,000

यूटिलिटी खर्च की बात करें तो कपल के लिए पानी पर कोई मासिक खर्च नहीं है। दिव्या के अनुसार, पानी मुफ्त है। वहीं बिजली का बिल करीब ₹1,000 प्रति महीने आता है।

पहाड़ों में घूमना भी बजट में शामिल

पहाड़ों में रहने का सबसे बड़ा फायदा शायद यही है कि घूमने के लिए महंगी जगहों की जरूरत नहीं पड़ती। आसपास प्रकृति आसानी से उपलब्ध है, इसलिए कपल की ज्यादातर आउटिंग मुफ्त ही होती हैं। फिर भी अपने छोटे-मोटे माउंटेन एडवेंचर पर करीब ₹3,000 महीने का खर्च हो जाता है।

करीब ₹50 हजार में पूरा महीना

दिव्या के मुताबिक, ग्रॉसरी, बाहर का खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च जोड़ने पर दोनों का कुल मासिक खर्च करीब ₹50,000 बैठता है। हालांकि, उनका रहने का इंतजाम होमस्टे बिजनेस से जुड़ा है, इसलिए यह खर्च ऐसे व्यक्ति से अलग होगा जो सिर्फ अपने रहने के लिए घर किराए पर लेता है।

लोगों को पसंद आई पहाड़ों वाली जिंदगी

वीडियो सामने आने के बाद लोगों का ध्यान सिर्फ ₹50 हजार के बजट पर नहीं गया, बल्कि कपल की शांत जिंदगी ने भी खूब आकर्षित किया। एक यूजर ने पहाड़ों के नजारे को जिंदगी का ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ बताया। वहीं कई लोगों ने कहा कि असली लग्जरी पैसा नहीं, बल्कि ऐसी जगह मिलने वाला सुकून और शांति है।

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Trading plan : कच्चे तेल में तेजी और IT शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर बढ़ाया दबाव, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading plan : कच्चे तेल में तेजी और IT शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। निफ्टी 175 अंक से ज्यादा फिसलकर 24300 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी की तेजी भी कम हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी नरमी देखने को मिल रही है। बाजार में गिरावट के बावजूद वौलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX में तेजी देखने को नहीं मिल रही है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रा ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा है कि वे फरवरी 2027 तक का कार्यकाल पूरा करेंगे। लेकिन फिर से नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। कंपनी के बोर्ड को उत्तराधिकारी पर फैसला लेना चाहिए। एन चंद्रा के इस्तीफे से TCS 5 फीसदी फिसलकर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। टाटा ग्रुप के दूसरे शेयरों पर भी दबाव देखने को मिल रहा है।

IT शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली है। आईटी इंडेक्स दो फीसदी से ज्यादा फिसला है। TCS के साथ LTM, परसिस्टेंट और इंफोसिस में भी दबाव देखने को मिल रहा है। साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल, रियल्टी और FMCG इंडेक्स करीब एक फीसदी फिसले हैं। वहीं दूसरी ओर आज सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा तेजी है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

हॉस्पिटल शेयरों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिल रही है। मैक्स हेल्थ और अपोलो हॉस्पिटल 3-4 फीसदी टूटकर निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। उधर फोर्टिस भी करीब 6 फीसदी टूटा। हॉस्पिटल चार्जेज पर कैप लगाने की सिफारिश से दूसरे दिन भी इन शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है।

नतीजों के लिहाज से कल बड़ा दिन है। कल निफ्टी की दो कंपनियों टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) और मैक्स हेल्थ के रिजल्ट आएंगे। TMPV का रेवेन्यू तिमाही आधार पर 46% बढ़ सकता है। लेकिन कच्चे माल के दाम बढ़ने से मुनाफे और मार्जिन पर दबाव संभव है। साथ ही जुबिलेंट फूड, अंबर समेत वायदा की 5 कंपनियां भी रिजल्ट पेश करेंगी।

बाजार: खराब दिन

बाजार पर अपनी राय देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार के लिए आज एक खराब दिन रहा। सुबह-सुबह CNBC-आवाज़ पर इसी की चर्चा थी। कल ही बाजार ने चेतावनी के संकेत दिए थे। निफ्टी अब 24,350 के नीचे काम कर रहा है। हालांकि बैंक निफ्टी अभी भी अहम स्तरों के ऊपर है। लेकिन निफ्टी IT और बाकी बड़े शेयरों में गिरावट है। एन चंद्रा की टाटा संस वाली खबर से भी सेंटीमेंट खराब हुआ है। चंद्रा दोबारा चेयरमैन नहीं बनेंगे। अदाणी ग्रुप के शेयरों में भी बड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली। हॉस्पिटल शेयरों में आज भी बड़ी गिरावट आई।

बाजार: अब क्या?

बाजार में ब्रेकआउट फेल होने के पूरे संकेत हैं और ऐसे में वापस रेंज के लो टेस्ट हो सकते हैं। अगर निफ्टी 24,300 के नीचे बंद हुआ तो बड़ा नेगेटिव होगा। कच्चा तेल नीचे आने को तैयार नहीं है और मामला सिर्फ तेल का नहीं, सप्लाई का है। होर्मुज से सप्लाई वापस ठप हो चुकी है। ऐसे में बाजार में वापस बड़े करेक्शन का रिस्क है। स्टॉक स्पेसिफिक मौके भी अब काफी कम हो रहे हैं और परसों अर्निंग सीजन भी खत्म हो रहा है। ऐसे में बाजार में थोड़ा सतर्क रहना बेहतर रहेगा। लेकिन अगर अच्छा ट्रेड मिले तो जरूर लें, जैसे कि आज नाल्को और PI इंडस्ट्रीज में मिली।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,150-24,250 पर सपोर्ट और 24,400-24,450 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस है।

प्री-CAS रणनीति

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FSSAI bans plastic: पान मसाला और गुटखा छोटे प्लास्टिक पाउच में नहीं आएगा! नया नियम लागू होने पर जानें कैसे बिकेगा माल

FSSAI bans plastic: पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के लिए पैकेजिंग को लेकर सरकार की तरफ से एक बड़ा बदलाव किया गया है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। नए नियमों के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़ेगा। FSSAI ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026’ का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसी के साथ अब ये नियम लागू हो गए हैं।

नए नियमों के तहत पान मसाला को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018 की शेड्यूल 4 में शामिल किया गया है। यह शेड्यूल अलग-अलग खाद्य उत्पादों के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली अनुमत पैकेजिंग सामग्री तय करता है।

अब किन चीजों से पैक हो सकेगा पान मसाला?

नए नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। इन प्राकृतिक या कागज आधारित सामग्रियों में किसी भी तरह का प्लास्टिक मौजूद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा पैकेजिंग में एल्युमिनियम फॉयल या किसी भी तरह की मेटलाइज्ड लेयर भी नहीं हो सकती। यानी केवल बाहर से कागज दिखाई देने वाली पैकेजिंग भी नियमों के दायरे से बाहर नहीं होगी। अगर उसके अंदर प्लास्टिक या धातु की छिपी हुई परत लगी है तो ऐसी पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी।

पॉलीथीन से लेकर PVC तक पर रोक

FSSAI ने प्रतिबंध को काफी व्यापक रखा है। पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और अन्य सिंथेटिक पॉलिमर, कोपॉलिमर या लैमिनेट जैसी सामग्रियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा असर उन पैकेजिंग फॉर्मेट पर पड़ेगा जिनमें कई परतों वाली प्लास्टिक या मेटल-कोटेड सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसी पैकेजिंग का इस्तेमाल आम तौर पर उत्पाद को नमी से बचाने, उसकी खुशबू बनाए रखने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब पान मसाला उद्योग को इन सुविधाओं के लिए प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।

टिन और कांच के डिब्बे बनेंगे विकल्प

FSSAI ने पान मसाला के लिए टिन और कांच के कंटेनर के इस्तेमाल की भी अनुमति दी है। इस बदलाव के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग तकनीक और डिजाइन पर दोबारा काम करना पड़ सकता है। इस तरह कंपनियों के सामने अब मुख्य रूप से दो तरह के विकल्प होंगे:-

  • पहला पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त प्राकृतिक सामग्री से बनी पैकेजिंग
  • जबकि दूसरा टिन या कांच के कठोर कंटेनर में हुई पैकेजिंग

कागज की पैकिंग में भी छिपा प्लास्टिक नहीं चलेगा

नए नियमों में पैकेजिंग के एक ऐसे तरीके को भी स्पष्ट किया गया है, जो लंबे समय से उद्योग में इस्तेमाल होता रहा है। कई उत्पादों की पैकिंग ऊपर से कागज जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या एल्युमिनियम की परत लगी होती है। अब ऐसी कंपोजिट पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी, अगर उसमें प्रतिबंधित सामग्री मौजूद है। यानी केवल पैकेजिंग का बाहरी हिस्सा कागज का होना पर्याप्त नहीं होगा। पूरी पैकेजिंग को निर्धारित मानकों के अनुरूप होना पड़ेगा।

छोटे निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती

नए नियमों का सबसे बड़ा असर उन निर्माताओं पर पड़ सकता है जो लंबे समय से फ्लेक्सिबल और मल्टी-लेयर पैकेजिंग पर निर्भर हैं। कंपनियों को अब अपनी सप्लाई चेन, पैकेजिंग सामग्री की खरीद, डिजाइन और पैकेजिंग तकनीक की समीक्षा करनी होगी। विशेष रूप से छोटे निर्माताओं के लिए प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग की ओर बदलाव करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें नई सामग्री और पैकेजिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पड़ेगी।

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम भी जोड़े गए

FSSAI के संशोधन में स्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से जुड़े प्रावधानों को भी फूड पैकेजिंग व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन प्रावधानों के तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को रखने, पैक करने या बेचने के लिए प्लास्टिक के सैशे के इस्तेमाल पर पहले से लागू प्रतिबंधों को मजबूत किया गया है। नियमों में इन उत्पादों के लिए किसी भी रूप में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को भी दोहराया गया है। इस तरह, सरकार ने पान मसाला की पैकेजिंग से जुड़े पर्यावरण नियमों के साथ फ़ूड सेफ़्टी के नियमों को भी एक जैसा कर दिया है।

अप्रैल में शुरू हुई थी नियम बदलने की प्रक्रिया

इन बदलावों की प्रक्रिया इसी साल अप्रैल में शुरू हुई थी। 28 अप्रैल को FSSAI ने प्रस्तावित संशोधनों का ड्राफ्ट जारी किया था। इस ड्राफ्ट में पान मसाला को शेड्यूल 4 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से पैकेजिंग की अनुमति देने की बात कही गई थी।

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लेकिन शर्त थी कि इनमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर या मेटल की परत नहीं होनी चाहिए। ड्राफ्ट में टिन और कांच को भी पैकेजिंग के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद संबंधित पक्षों और उद्योग से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद FSSAI ने 10 अगस्त को अंतिम संशोधन अधिसूचित कर दिए।

इस दिन लॉन्च होगा Google Pixel 11! मिल सकते हैं ये 5 बड़े अपग्रेड, जानें पूरी डिटेल

Google Pixel 11 सीरीज बस कुछ ही घंटों में ग्लोबल मार्केट में लॉन्च होने वाली है। जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि यह सीरीज इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) के हिसाब से 13 अगस्त को सुबह 3:30 बजे लॉन्च होगी। फिलहाल, Google ने इस इवेंट की पुष्टि कर दी है और इसे एलेक्स कूपर और स्टीफन करी होस्ट करेंगे। ऐसे में अगर आप जानना चाहते हैं कि इस लॉन्च इवेंट में क्या-क्या देखने को मिल सकता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आइए जानते हैं Google Pixel लॉन्च इवेंट में सुंदर पिचाई की तरफ से होने वाली 5 बड़ी घोषणाएं क्या हो सकती हैं।

Google Pixel लॉन्च इवेंट में 5 बड़ी घोषणाओं की उम्मीद

HiLight कैमरा बार: इसे Google के इस साल के सबसे दिलचस्प फीचर्स में से एक माना जा सकता है। यह कैमरा बार में लगा एक नया लाइट वाला एलिमेंट होगा और फ्यूचर में इसे Pixel का खास फीचर कहा जा सकता है। इस बार का इस्तेमाल विजुअल अलर्ट और नोटिफिकेशन जैसे कामों के लिए किया जाएगा।

Google Tensor G6: यह प्रोसेसर 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर आधारित Pixel 11 सीरीज का मुख्य आकर्षण होगा। कहा जा रहा है कि यह चिपसेट अपने पिछले वर्जन की तुलना में ज्यादा बेहतर परफॉर्मेंस देगा।

एक्सक्लूसिव Gemini फीचर: Google की आदत रही है कि वह Pixel 11 सीरीज के लॉन्च के समय अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करता है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि यह कंपनी आम लोगों के लिए कुछ ऐसे Pixel-एक्सक्लूसिव Gemini फीचर लाएगी, जो Pixel 11 सीरीज के डिवाइस को दूसरे फोन के मुकाबले बढ़त दिलाएंगे।

कैमरा में सुधार: ऐसी चर्चा है कि दमदार सेंसर देने के अलावा, Google कुछ खास AI-पावर्ड फोटोग्राफी फीचर्स भी लाने वाला है, ताकि उनके सेंसर दूसरों से अलग और बेहतर दिखें।

इकोसिस्टम: उम्मीद है कि Google इस साल अपनी नई वॉच, फोन, Pixel Tag और दूसरे प्रोडक्ट्स के जरिए इकोसिस्टम के अनुभव को और ज्यादा खास तरीके से पेश करेगा।

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Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

HDFC Bank Share Price : स्टॉक ने हिट किया 52 हफ्तों का नया लो, जानिए कब तक कायम रहेगा यह दबाव

HDFC Bank Share Price : एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज भी गिरावट देखने को मिल रही है। आज के कारोबारी सत्र में इसने 52 वीक का नया लो बनाया है। फिलहाल 12.45 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 6.15 रुपए यानी 0.84 फीसदी की कमजोरी के साथ 722 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 722 रुपए है। आज यह शेयर 729 रुपए पर खुला था। वहीं, कल की इसकी क्लोजिंग भी 729 रुपए ही थी। टेक्निकल नजरिए से देंखें तो इस स्टॉक में नेगेटिव प्राइस ब्रेकआउट देखने को मिला है। यह अभी अपने दूसरे सपोर्ट लेवल (S2) से नीचे ट्रेड कर रहा है। इसका दूसरा सपोर्ट लेवल ₹733.10 पर है।

एक्सचेंज पर उपलब्ध आंकड़ो से पता चलता है कि HDFC बैंक के शेयर अपने पिछले निचले स्तर ₹726.75 से भी नीचे गिर गए हैं, जो इसने 2 अप्रैल, 2026 को छुआ था। यह स्टॉक मई 2024 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसने 23 अक्टूबर, 2025 को ₹1,020.35 का 52-हफ़्ते का हाई छुआ था।

कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक, BSE सेंसेक्स में 8.2 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, इसी अवधि में HDFC बैंक में 27 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे में इसका प्रदर्शन बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है।

FPIs ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाई

एचडीएफसी बैंक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम की है। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2026 तिमाही के आखिर में HDFC बैंक में FPI की हिस्सेदारी घटकर 41.83 फीसदी हो गई, जो मार्च 2026 तिमाही के आखिर में 44.05 फीसदी थी। दिसंबर 2025 तिमाही में इस प्राइवेट सेक्टर के बैंक में FPI की हिस्सेदारी 47.67 फीसदी थी और सितंबर 2025 तिमाही के आखिर में यह 48.39 फीसदी थी।

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बढ़ाई हिस्सेदारी

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जून तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 41.9 फीसदी कर दी। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तिमाही के अंत में उनकी हिस्सेदारी 36.3 फीसदी थी। इंडिविजुअल पब्लिक शेयरहोल्डरों ने भी HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इनकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 15.6 फीसदी और दिसंबर 2025 तिमाही के अंत के 15.1 फीसदी से बढ़कर 16.3 फीसदी हो गई है।

Market Insight : खराब बाजार में भी इंडिया VIX का गिरना ठीक संकेत नहीं, क्या बाजार में आ सकता है बड़ा करेक्शन?

स्टॉक में क्यों आ रही गिरावट?

बैंक के मार्जिन पर शॉर्ट-टर्म दबाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से इस शेयर पर दबाव बना है। इस साल अब तक यह स्टॉक में 27 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। बाजार जानकारों का कहना है कि बैंक के NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) में रिकवरी और फंड की लागत कम होने पर ही इसमें फिर से तेजी आ सकती है। DII की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी से FPI की बिकवाली को कुछ हद तक संतुलित करने में सहायता मिली है। लेकिन स्टॉक में हो रही गिरावट को रोकने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। अगर बैंक के मार्जिन पर दबाव बना रहता है और फंड की लागत कम नहीं होती तो आगे भी स्टॉक पर दबाव बना रहेगा।

शेयर की चाल पर एक नजर

इस स्टॉक में लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दोनों ही नजरिए से बाजार को निराश किया है। पिछले 1 हफ्ते में इसमें 1.57 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं, 1 महीने में यह शेयर 12.30 फीसदी टूटा है। 3 महीने में इसमें 3.6 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है। वहीं, इस साल अब तक इसमें 27 फीसदी की गिरावट आई है। 1 साल में यह शेयर 26.53 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसमें 10.62 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है।

RPSC 1st Grade Result 2026: आरपीएससी ने कॉमर्स और इंग्लिश विषयों का 1st ग्रेड टीचर रिजल्ट जारी कर दिया है, वेबसाइट पर देखें मेरिट लिस्ट

RPSC 1st Grade Result 2026: राजस्थान में स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने स्कूल लेक्चरर भर्ती 2025 के तहत अंग्रेजी और कॉमर्स विषयों का रिजल्ट जारी कर दिया है। आयोग की ओर से आयोजित 1st ग्रेड टीचर भर्ती परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मेरिट लिस्ट और कटऑफ देख सकते हैं। आयोग ने 10 अगस्त, 2026 को स्कूल लेक्चरर (स्कूल एजुकेशन) 2025 भर्ती परीक्षा का रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है।

यह रिजल्ट विज्ञापन संख्या 06/2025 के तहत जारी किया गया है। जो परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर रिजल्ट देख सकते हैं। आयोग द्वारा जारी रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में है। मेरिट लिस्ट में उन कैंडिडेट्स के रोल नंबर हैं जो भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के लिए सफल हुए हैं। आरपीएससी ने अंग्रेजी और कॉमर्स के लिए अलग-अलग रिजल्ट डॉक्यूमेंट जारी किए हैं। मेरिट लिस्ट के साथ, संबंधित कट-ऑफ अंक भी जारी किए गए हैं।

रिजल्ट डॉक्यूमेंट को योग्यता जांचने के लिए अस्थायी सूची बताया गया है। जिन कैंडिडेट्स के रोल नंबर संबंधित मेरिट लिस्ट में हैं, उन्होंने लिखित परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया है। इसके आगे उनकी नियुक्ति डॉक्यूमेंट्स सत्यापन के अधीन है। आयोग ने दोनों विषयों के लिए असफल करार दिए गए उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की है।

बाकी विषयों के रिजल्ट अलग से जारी होने की उम्मीद है। जिन कैंडिडेट ने उन सब्जेक्ट के लिए अप्लाई किया था, उन्हें आगे की अनाउंसमेंट के लिए रेगुलर तौर पर ऑफिशियल RPSC वेबसाइट चेक करते रहना चाहिए।

आरपीएससी 1st ग्रेड रिजल्ट 2026: स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के स्टेप्स

कैंडिडेट ऑफिशियल वेबसाइट पर आरपीएससी 1st ग्रेड 2026 डाउनलोड करने के लिए यहां बताए गए स्टेप्स को फ़ॉलो कर सकते हैं :

  • ऑफिशियल आरपीएससी की वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर रिजल्ट सेक्शन खोलें।
  • स्कूल लेक्चरर (स्कूल एजुकेशन) – 2025 रिजल्ट लिंक देखें।
  • इंग्लिश या कॉमर्स के लिए, जैसा लागू हो, रिजल्ट चुनें।
  • रिजल्ट PDF खोलें।
  • अपना रोल नंबर ढूंढने के लिए PDF में सर्च ऑप्शन का इस्तेमाल करें।
  • आगे के रेफरेंस के लिए रिजल्ट डाउनलोड करें और सेव करें।

कैंडिडेट को सलाह दी जाती है कि वे आरपीएससी ग्रेड 1 रिजल्ट की पूरी जानकारी पाने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर बने रहें।

UPSC CDS 2 Exam 2026 Date Out: यूपीएससी ने जारी की सीडीएस2 परीक्षा की डेट, आधिकारिक वेबसाइट पर देखें वेकेंसी, शेड्यूल और रिपोर्टिंग टाइम

दिल्ली में शुरू हुई नई Ayurvedic OPD, अब इस इलाके के लोगों को मिलेगा सरकारी आयुर्वेदिक इलाज

दिल्ली के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है। आयुष मंत्रालय के तहत सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) द्वारा चलाए जाने वाले सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI) ने दिल्ली में एक नई एक्सटेंशन ओपीडी शुरू की है। इसकी मदद से दिल्ली के रोहिणी और उसके आसपास के क्षेत्रों के लोगों तक आसानी से और बेहतर आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य बनाया गया है।

रोहिणी के सेक्टर-28 में खुला नया केंद्र, इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस नई एक्सटेंशन ओपीडी सुविधा का उद्घाटन सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबीनारायण आचार्य ने वरिष्ठ अधिकारियों और अहम लोगों की मौजूदगी में किया है। यह नई एक्सटेंशन ओपीडी सुविधा एफसी-5, ब्लॉक-ए, सेक्टर-28, रोहिणी, नई दिल्ली में मौजूद है।

आम जनता को मिलेगा सीधा लाभ, मजबूत होगा आयुष हेल्थकेयर इकोसिस्टम

इस नई एक्सटेंशन ओपीडी में रोहिणी और आसपास में रहने वाले लोगों को आसानी से आयुर्वेदिक आउटपेशेंट (OPD) सेवाएं मिलेंगी। इससे सीएआरआई की क्लीनिकल पहुंच और मजबूत होगी और पारंपरिक चिकित्सा का फायदा सीधे जनता के करीब पहुंचेगा।

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हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते… हर्ष गोयनका की पोस्ट ने छेड़ी बहस, क्यों चर्चा में है ये मशहूर नेशनल पार्क, क्या करने जा रही सरकार?

Kaziranga National Park: असम सरकार अगले दो महीनों में केंद्र सरकार से काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की मौजूदा 10 किलोमीटर की डिफॉल्ट सीमा को घटाकर 1 किलोमीटर करने की मांग करने की योजना बना रही है। ‘असम ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि इस कदम का मकसद नेशनल पार्क के पास, जिसमें बोकाखाट भी शामिल है, विकास परियोजनाओं पर लगी उन पाबंदियों को हटाना है जिन्हें राज्य सरकार अनावश्यक मानती है।

शर्मा ने कहा, “बोकाखाट में विकास से जुड़ी कई चुनौतियां हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं, जिनमें स्टेडियम का निर्माण, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार और अन्य अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर शुरुआती बातचीत पहले ही हो चुकी है। काजीरंगा को अंतिम ESZ नोटिफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार केंद्र के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी।

उन्होंने आगे कहा, “चूंकि काजीरंगा के लिए अभी तक अंतिम नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए डिफॉल्ट रूप से इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का है। नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम वैज्ञानिक रूप से तय 1 किलोमीटर के इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव रखेंगे।”

शर्मा ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव से बोकाखाट में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही काजीरंगा के वन्यजीवों और पर्यावरण का संरक्षण भी जारी रहेगा।

पर्यावरणविदों ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया?

वहीं, पर्यावरणविदों ने असम सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट, काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को कम करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सुरक्षित बफर जोन को कम करने से पार्क पर दबाव बढ़ सकता है और वहां के वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पार्क और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर विकास की अनुमति दी जानी चाहिए।

गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने The Federal को बताया कि ESZ (इको-सेंसिटिव जोन) को कम करने से काजीरंगा में वन्यजीवों, खासकर एक सींग वाले गैंडे के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जिसे असम का प्रतीक माना जाता है।

धेकियाजुली के एक और पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने कहा कि प्रस्तावित कटौती इको-सेंसिटिव जोन पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के खिलाफ भी हो सकती है। नाथ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो अहम बातों पर आधारित था – जानवरों को प्रजनन के लिए पर्याप्त जगह देना और उन घास के मैदानों की रक्षा करना जो उनके लिए भोजन का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार ESZ का दायरा कम करती है, तो घास के मैदान कम हो जाएंगे और जानवरों की संख्या भी घट जाएगी। अगर वे इस कदम को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।”

‘दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते…’

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, “असम एक स्टेडियम और दूसरे विकास कार्यों के लिए काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करना चाहता है। लेकिन हर मॉनसून में बाढ़ के कारण हाथी और गैंडे इन्हीं रास्तों से ऊंचे इलाकों की ओर जाने को मजबूर होते हैं।”

उन्होंने कहा, आइए स्टेडियम कहीं और बनाएं, क्योंकि हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर लंबे समय से अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी कहा था कि असम सरकार की ओर से केंद्र को न तो ESZ की अंतिम अधिसूचना भेजी गई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा गया है। नतीजतन, 10 किलोमीटर के दायरे वाला नियम अभी भी लागू है।

वहीं, असम सरकार का कहना है कि मौजूदा 10 किलोमीटर के जोन की वजह से बोकाखाट में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास रुका हुआ है। इन पाबंदियों के कारण कई प्रोजेक्ट्स, जिनमें एक आधुनिक स्टेडियम और दूसरे नागरिक विकास के काम शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

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