Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Lalithaa Jewellery Listing: आईपीओ को 66 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर शानदार संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹72 यानी 35.82% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 24 अगस्त को करीब 36% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹201 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

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Lalithaa Jewellery IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Lalithaa Jewellery के बारे में

ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।

आईपीओ को लेकर क्या था ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई सिक्योरिटीज ने ललिता ज्वैलरी आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि वह अभी की बजाय लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाही तक कंपनी के परफॉरमेंस को ट्रैक करेगी। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 की कमाई के मुकाबले 11.1 गुना पर थी जोकि ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री पियर्स के हिसाब से है। हालांकि हेजिंग पॉलिसी नहीं होने को एक रिस्क बताया था। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक गोल्ड के भाव स्थिर होने पर कंपनी का मार्जिन कम हो सकता है।

एक और ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने ललिता ज्वैलरी को सब्सक्राइब रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने लिस्टिंग गेन के साथ-साथ रिस्क उठा सकने वाले निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कल्याण ज्लैवर्स (Kalyan Jewellers) और टाइटन (Titan) जैसे दिग्गजों के मुकाबले P/E बेसिस पर यह आईपीओ 75% डिस्काउंट पर है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म ने ₹1066 करोड़ के जीएसटी विवाद और प्रमोटर से जुड़े मामले को अहम रिस्क के तौर पर जिक्र किया है लेकिन यह भी कहा कि टैक्स से जुड़े पुराने मामले काफी हद तक सुलझ चुके हैं।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट से लिस्टिंग को लेकर मिल रहे ये संकेत

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट में ऐसी है शेयरों की हालत

Horizon Industrial Parks Listing: इनकम में उछाल के बावजूद लगातार घाटे में चल रही होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का आईपीओ दो गुना से कम सब्सक्राइब हो पाया। ग्रे मार्केट से भी इसके शेयरों की ढाई फीसदी प्रीमियम पर ही लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹1.5 यानी 2.50% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब 2.5% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। इसके शेयर कल 24 अगस्त को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹60 के भाव पर जारी हुए हैं। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर ₹5 का डिस्काउंट मिला है। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

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शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

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Horizon Industrial Parks IPO को मिला था सुस्त रिस्पांस

होरिजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का ₹2,600 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। यह इश्यू ओवरऑल 1.52 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.94 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.03 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.02 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 1.64 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 43,34,09,090 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2,250.00 कंपनी और इसकी पूर्ण मालिकाना हक वाली कुछ सब्सिडरीज का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Horizon Industrial Parks के बारे में

जीएलएल रिपोर्ट के मुताबिक नेटवर्क के हिसाब से ब्लैकस्टोन के निवेश वाली होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स इंफ्रा डेवलपर है। कंपनी के आईपीओ ड्राफ्ट के मुताबिक इसके पास देश के 10 बड़े शहरों में कुल 5.80 स्क्वेयर फीट में फैले हुए 45 लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल एसेट्स हैं। यह बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए बड़े और नए जमाने के हिसाब से वेयरहाउसेज और इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज बनाती है और फिर उन्हें किराए पर देती है।

इसके पास मुख्य रूप से तीन एसेट्स हैं- ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, रिटेल और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के इस्तेमाल के लिए फुलफिलमेंट सेंटर्स (वेयरहाउसिंग); मैन्युफैक्चरिंग, ईवी, रिन्यूएबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इत्यादि के लिए इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज; और लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए इन-सिटी सेंटर्स जिनका इस्तेमाल डार्क स्टोर्स, फार्मा, क्लाउड किचन, रिटेल और सर्विस बिजनेस में होता है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले तीन वित्त वर्षों से इनकम में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद इसका घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024 में इसे ₹162.21 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था जोकि वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर ₹178.78 करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹203.65 करोड़ पर पहुंच गया तो दूसरी तरफ इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना करीब 77% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹767.84 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹6,884.34 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹3,214.54 करोड़ पड़े थे।

Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 61% रिटर्न दे सकते हैं, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां चुनिंदा शेयरों पर बुलिश बनी हुई हैं। Jefferies और Macquarie समेत कई फर्मों ने इन स्टॉक्स पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इनमें सबसे ज्यादा अपसाइड Patanjali Foods में दिख रहा है, जहां करीब 61% तक रिटर्न की उम्मीद जताई गई है।

Divi’s Laboratories

ब्रोकरेज Macquarie ने फार्मा कंपनी Divi’s Laboratories पर 10,200 रुपये का टारगेट दिया है। इसमें मौजूदा स्तर से करीब 19% तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि कैपेक्स से कमाई बढ़ने और ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार से ग्रोथ तेज हो सकती है।

Larsen & Toubro

ब्रोकरेज Jefferies ने इंजीनियरिंग कंपनी Larsen & Toubro पर Buy रेटिंग के साथ 5,000 रुपये का टारगेट दिया है। यह करीब 23% का संभावित उछाल दिखाता है। मजबूत ऑर्डर बुक और भारत के कैपेक्स साइकल से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

TVS Motor Company

ब्रोकरेज Jefferies ने ऑटो कंपनी TVS Motor Company पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके लिए 5,425 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 24% रिटर्न दे सकता है। ब्रोकरेज को वॉल्यूम ग्रोथ और कमाई में मजबूत बढ़त की उम्मीद है।

Emmvee Photovoltaic Power

ब्रोकरेज Jefferies ने सोलर कंपनी Emmvee Photovoltaic Power पर Buy रेटिंग कायम रखी है। 440 रुपये का टारगेट मौजूदा स्तर से करीब 31% ऊपर है। मजबूत ऑर्डर बुक, TOPCon टेक्नोलॉजी और विस्तार योजनाओं को इसकी बड़ी ताकत माना गया है।

Patanjali Foods

ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG कंपनी Patanjali Foods पर Buy कॉल देते हुए 560 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 61% की तेजी का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई और पूंजी पर रिटर्न में मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है।

Stocks to Watch: सुजलॉन, लेंसकार्ट से मीशो तक… 24 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 15 स्टॉक्स

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है शेयर

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) का ₹650 करोड़ का IPO 20 अगस्त को खुला था। अभी तक यह 21.69 गुना भर चुका है। इसमें 24 अगस्त को भी पैसे लगाए जा सकेंगे। उसके बाद अलॉटमेंट 25 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 28 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं। स्टॉक मार्केट में कंपनी की शुरुआत धांसू रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर 107 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। मतलब कि IPO निवेशकों को तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग डे पर सच हो जाएं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। Tempsens Instruments IPO के लिए प्राइस बैंड ₹285-₹300 प्रति शेयर और लॉट साइज 50 शेयर है। IPO में ₹95 करोड़ के 32 लाख नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की ओर से ₹555 करोड़ के 1.85 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है।

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) लिमिटेड एक थर्मल इंजीनियरिंग कंपनी और खास तरह के केबल बनाने वाली कंपनी है। यह कस्टमाइज्ड टेंपरेचर सेंसिंग सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और खास तरह के केबल की डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है। कंपनी के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं। कंपनी कॉन्टैक्ट और नॉन कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाती है।

किस कैटेगरी में अब तक कितना सब्सक्रिप्शन

IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा अभी तक 3.31 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 52.98 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 18.73 गुना और कर्मचारियों के लिए रिजर्व हिस्सा 28.93 गुना भर चुका है। IPO के लिए ICICI Securities Ltd और JM Financial बु​क रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल सॉल्यूशंस को लेकर पूंजीगत खर्च के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। IPO की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹194.55 करोड़ जुटाए। IPO में ₹1.5 करोड़ के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी ​बचे हिस्से में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Tempsens Instruments की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 19 प्रतिशत बढ़कर ₹455.86 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹71 करोड़ रहा। ​एक साल पहले रेवेन्यू ₹382.47 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹62.56 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 के दौरान टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स पर ₹77.95 करोड़ की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

Shadowfax में क्वालकॉम ने बेची ₹184 करोड़ की हिस्सेदारी, सोमवार को शेयर में दिख सकता है जबरदस्त एक्शन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bobby Deol: ‘मैं इससे बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहा हूं’, ‘एनिमल’ और ‘आश्रम’ की सक्सेस के बाद विलेन रोल मिलने पर बोले बॉबी देओल

Bobby Deol: एक्टर बॉबी देओल अपने करियर की दूसरी पारी में हैं। 90 और 2000 के दशक में इस बॉलीवुड स्टार ने रोमांटिक हीरो समेत कई लीड रोल निभाए और खूब सफलता पाई। लेकिन पिछले दशक में उनकी वापसी के बाद से उन्हें ज्यादातर दमदार विलेन के रोल में देखा गया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में बॉबी ने माना कि उन्हें एक ही तरह के रोल में बांध दिया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे इस छवि को तोड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

बॉबी देओल ने विलेन के तौर पर अपनी छवि में बंधे रहने पर बात की

शनिवार को दिल्ली में जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान बॉबी ने कहा कि उन्हें विलेन वाले रोल बहुत मिल रहे हैं, लेकिन वह इस छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। एक्टर ने कहा, “अगर कोई एक्टर किसी खास तरह के रोल में सफल हो जाता है, तो उसे वैसे ही रोल मिलते रहते हैं। इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है।”

बॉबी ने प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ से वापसी की, जिसमें उन्होंने एक ठग और अपराधी का रोल निभाया, जो खुद को भगवान का दूत बताने वाला बाबा बनकर लोगों को धोखा देता था। इसके बाद उन्हें 2023 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ में विलेन का रोल मिला। तब से, बॉबी ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ जैसी फिल्मों में विलेन का रोल निभा चुके हैं।

‘मैं इसे तोड़ने की पूरी कोशिश करता हूं’

बॉबी ने कहा कि यह बहुत स्वाभाविक है कि जब कोई एक्टर किसी खास रोल में सफल हो जाता है, तो बाद में उसे उसी तरह के रोल मिलने लगते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अब वह अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स करने की कोशिश कर रहे हैं। 57 साल के एक्टर ने PTI को बताया, “मैं उस छवि से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करता हूं। मैंने हाल ही में ‘बंदर’ नाम की एक फिल्म की है, जो बहुत अलग थी। विलेन के रोल में भी अलग-अलग तरह के विलेन होते हैं, जिनके अलग-अलग शेड्स होते हैं। इसलिए मुझे ऐसे रोल निभाने में मज़ा आता है। मैं कुछ वेब सीरीज़ भी करने वाला हूँ जो अलग होंगी।”

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ में उन्होंने एक उम्रदराज़ स्टार का रोल निभाया, जिस पर उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड ने रेप का आरोप लगाया था। यह फिल्म जून में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और क्रिटिक्स ने इसकी तारीफ़ की थी। इस साल बॉबी के दो और प्रोजेक्ट्स – ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ – में भी उन्होंने विलेन का रोल निभाया।

बॉबी देओल की आने वाली फिल्में

बॉबी जल्द ही प्राइम वीडियो की सीरीज़ ‘तीन कौवे’ में नज़र आएंगे। इस स्पाई ड्रामा की शूटिंग अभी चल रही है और इसमें सिद्धांत गुप्ता, फातिमा सना शेख और पावेल गुलाटी भी अहम भूमिकाओं में होंगे।

Gold vs Inflation: 46 साल के आंकड़ों से मिला जवाब, गोल्ड में निवेश महंगाई से लड़ाई में कितना कारगर

Gold vs Inflation: गोल्ड के भाव एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ने लगे हैं। 24 कैरट की शुद्धता वाला 10 ग्राम गोल्ड अब करीब ₹1.64 लाख के भाव पर पहुंच गया है जबकि कुछ ही दिन पहले यह लगभग ₹1.59 लाख में मिल रहा था। हालांकि गोल्ड के भाव में इस तेजी के चलते ही इसमें निवेशकों का रुझान दिखता है बल्कि इसे बड़े पैमाने पर महंगाई की रफ्तार से बचाव के तौर पर देखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना वाकई लॉन्ग टर्म में महंगाई से लड़ाई में अच्छा हथियार साबित हुआ है और अगर हां तो कितना। इसे लेकर फंड्सइंडिया की वेल्थ कंवर्जेशंस अगस्त 2026 रिपोर्ट के डेटा से सामने आया है कि जैसे-जैसे गोल्ड रखने की अवधि यानी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, महंगाई से आगे रहने में इसकी रफ्तार अधिक स्थिर हो जाती है।

Gold vs Inflation: अलग-अलग टाइमफ्रेम में कैसी रही भिड़ंत

फंड्सइंडिया ने साल 1995 और साल 2025 के बीच अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड में सोने से मिलने वाले रिटर्न और महंगाई की तुलना की। इसमें गोल्ड के रिटर्न और महंगाई के बीच सालाना औसत अंतर को मापा गया। इस डेटा के मुताबिक एक साल में दोनों के बीच किसकी रफ्तार अधिक रही, यह इस बात पर काफी निर्भर है कि गोल्ड की खरीदारी कब हुई। औसतन गोल्ड ने एक साल में इनफ्लेशन को करीब 4 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ दिया। हालांकि एक साल में ही खरीदारी के अलग-अलग समय के हिसाब से ही गोल्ड ने इनफ्लेशन को 24 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पछाड़ दिया तो कुछ अवधि में 28 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पिछड़ गई।

अब अगर पांच साल में बात करें तो गोल्ड ने महंगाई की रफ्तार यानी इनफ्लेशन को औसतन सालाना 5 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ा तो 10,15 और 20 साल की अवधि में भी ऐसी ही स्थिति रही। इसका मतलब है कि कम समय में जरूरी नहीं है कि गोल्ड इनफ्लेशन को पछाड़ दे लेकिन लंबे समय में यह अब तक आगे ही साबित हुआ है।

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हर साल लगातार नहीं बढ़ी गोल्ड की चमक

लॉन्ग टर्म में गोल्ड ने शानदार रिटर्न दिया है और महंगाई को मात दी है लेकिन इसकी चमक लगातार हर साल नहीं बढ़ी है। इसे लेकर फंड्सइंडिया ने 1980 से लेकर अब तक गोल्ड ने कितना रिटर्न दिया, एक और एनालिसिस की। इसमें सामने आया कि इसमें जोरदार तेजी के दौर भी आए हैं तो लॉन्ग टर्म तक सुस्त रिटर्न के दौर भी रहे हैं। रोलिंग-रिटर्न डेटा के मुताबिक अलग-अलग पीरियड में गोल्ड का औसतन सालाना रिटर्न करीब 10% रहा है लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न इस बात पर बहुत निर्भर रहा कि निवेशक ने किस समय सोना खरीदा था। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनफ्लेशन हेज यानी महंगाई के खिलाफ हथियार होने का मतलब ये नहीं है कि जब भी महंगाई बढ़ेगी, सोने की कीमत भी उसी समय बढ़ेगी या सोना हर साल महंगाई से ज्यादा रिटर्न देगा या सोने की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा चार्ज! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

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Skyways Air Services IPO: ₹583 करोड़ के इश्यू के​ लिए ₹131-₹138 है प्राइस बैंड, 24 अगस्त से लगा सकेंगे पैसे

मेनबोर्ड सेगमेंट में स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त को खुलने वाला है। कंपनी का इरादा ₹582.80 करोड़ जुटाने का है। इस इश्यू में ₹398.80 करोड़ के 2.89 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹184 करोड़ के 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर यशपाल शर्मा, तरुण शर्मा और निवेशक हिमांशु छाबड़ा, रोहित सहगल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹131-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है।

इश्यू की क्लोजिंग 27 अगस्त को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 28 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 1 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। IPO के लिए होलानी कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, शैनोन एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और दौलत फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है।

क्या करती है Skyways Air Services

स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड (SASL) एक जानी-मानी लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी है। एक फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी लॉजिस्टिक्स मैनेजर की तरह काम करती है। ऐसी कंपनी आमतौर पर खुद माल को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाती, बल्कि ग्राहक की ओर से माल ढोने की जगह (शिपमेंट स्पेस) बुक करती है, सीमा शुल्क की प्रक्रिया संभालती है और अलग-अलग परिवहन कंपनियों के जरिए माल को हवाई, समुद्री, सड़क या रेल मार्ग से पहुंचाने की व्यवस्था करती है।

SASL लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई तरह की सेवाएं देती है, जैसे कि एयर और ओशन फ्रेट फॉरवर्डिंग, ट्रकिंग, कस्टम्स ब्रोकिंग, वेयरहाउसिंग, टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक्सप्रेस कार्गो और पार्सल डिलीवरी, और अन्य वैल्यू-एडेड सेवाएं। कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति और ग्लोबल कनेक्टिविटी है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

SASL अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी Forin Container Line Pvt.Ltd. का कर्ज चुकाने के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Lumino Industries IPO: ₹700 करोड़ का एक और इश्यू, 27 अगस्त को ओपनिंग; ग्रे मार्केट में अभी से 56% चढ़ा शेयर

कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹174.54 करोड़ जुटाए। BSE पर अपलोड किए गए ​सर्कुलर के मुताबिक, SASL ने ₹138 प्रति शेयर के भाव पर 17 एंकर इनवेस्टर्स को 1.26 करोड़ शेयर एलोकेट किए। एंकर बुक में नोमुरा सिंगापुर, सिटी ग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरिशस, होलानी वेंचर कैपिटल फंड-I, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस और ASAS ग्लोबल फंड जैसे दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड और टॉरस एसेट मैनेजमेंट ने 6 स्कीम्स के जरिए निवेश किया। उन्हें ₹69.69 करोड़ के 50.5 लाख शेयर अलॉट किए गए।

कंपनी की वित्तीय सेहत

SASL का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 25 प्रतिशत बढ़कर ₹2,839.67 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹63.52 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹2,270.99 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹48.14 करोड़ रहा था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹624 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 26.81 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

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उद्योगपति गौतम अडानी ने कर्नाटक CM डीके शिवकुमार से की मुलाकात, टनल रोड प्रोजेक्ट में Adani Group बनी है सबसे बड़ी दावेदार

Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।

टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?

गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।

राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।

अभी नहीं मिला है ठेका

हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।

शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट

बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार

प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।

राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर

अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।

गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी

इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।

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