वंदे मातरम् पर फिर घमासान: 150 साल पुराने गीत में आज का भारत क्या खोज रहा है?

वंदे मातरम् पर फिर घमासान: 150 साल पुराने गीत में आज का भारत क्या खोज रहा है?


बंकिमचंद्र की कविता से स्वतंत्रता संग्राम के उद्घोष तक और 2026 की सियासी बहस तक—‘वंदे मातरम्’ की पूरी कहानी, जिसमें इतिहास भी है, विवाद भी और भारत को समझने का एक बड़ा सवाल भी।

वंदे मातरम्। दो शब्द। डेढ़ सौ साल का इतिहास। और आज फिर एक राजनीतिक विवाद। सवाल सिर्फ गीत का नहीं है। सवाल उस भारत का है, जिसे हम इन दो शब्दों में देखते हैं।

गुलामी का दर्द, आजादी का सपना, स्वदेशी आंदोलन, क्रांतिकारियों का साहस, संविधान सभा की गरिमा और आज की राजनीति की गर्मी—सब कुछ ‘वंदे मातरम्’ के साथ चलता आया है।

150 साल बाद भी अगर ये दो शब्द बहस के केंद्र में हैं, तो यह उनकी कमजोरी नहीं, उनकी ताकत का प्रमाण है। लेकिन कहानी 1875 से थोड़ी पहले शुरू होती है।

जब धरती सिर्फ जमीन नहीं, मां थी

अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त की एक पंक्ति है—
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।”
पृथ्वी मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं।

इसे आधुनिक राष्ट्रवाद का प्राचीन प्रमाण मान लेना इतिहास के साथ ज्यादती होगी। उस समय आधुनिक अर्थों वाला राष्ट्र-राज्य था ही नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि भारतीय सभ्यता में धरती को केवल जमीन नहीं, जीवन और मातृत्व से जोड़कर देखने का भाव बहुत पुराना है।

19वीं सदी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसी सांस्कृतिक भावभूमि को औपनिवेशिक भारत की बेचैनी से जोड़ा और मातृभूमि को ‘मां’ की आवाज दी।

यहीं से ‘वंदे मातरम्’ की आधुनिक यात्रा शुरू होती है।

1875: कविता से राष्ट्रभावना तक

सरकारी अभिलेखों के अनुसार बंकिमचंद्र ने 7 नवंबर 1875 को ‘वंदे मातरम्’ की रचना की। बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ’ में शामिल किया गया।

‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है—मां को नमन।

पहले दो अंतरों में यह मां कोई युद्धरत देवी नहीं, बल्कि जल, हरियाली, फसल और शीतल हवा से भरी मातृभूमि है। लेकिन गुलाम भारत में अपनी मातृभूमि को नमन करना सिर्फ कविता कैसे रह सकता था? उसमें राजनीति अपने आप आ गई।

1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया। इसके बाद यह साहित्य के पन्नों से निकलकर राष्ट्रीय आंदोलन के मंच पर पहुंच गया।

फिर आया 1905।

1905: जब गीत नारा बन गया

बंगाल विभाजन के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी का समर्थन, जुलूस, सभाएं और विरोध प्रदर्शन।
और हर जगह— वंदे मातरम्।
अब यह कविता नहीं थी।
यह सत्ता को चुनौती थी।

ब्रिटिश सरकार ने इसकी ताकत पहचानी और सार्वजनिक उपयोग को रोकने के प्रयास किए।
1906 में इसी नाम से Bande Mataram नाम का राष्ट्रवादी अंग्रेजी अखबार भी निकला, जिससे श्री अरविंद और बिपिन चंद्र पाल जैसे राष्ट्रवादी जुड़े।
एक गीत का नाम आंदोलन की पहचान बन चुका था।

लेकिन यहीं कहानी में एक जरूरी पेच आता है

‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरे मातृभूमि और प्रकृति का वर्णन करते हैं। लेकिन आगे के अंतरों में मातृभूमि को दुर्गा और अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीकों से जोड़ा गया है।

यहीं सवाल उठा— क्या एक बहुधार्मिक देश का साझा राष्ट्रीय गीत धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा हो सकता है?
यह आज की राजनीति का पैदा किया हुआ सवाल नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही इस पर बहस हुई थी।
1937 में कांग्रेस के भीतर विचार के बाद राष्ट्रीय अवसरों के लिए पहले दो अंतरों को अपनाने की परंपरा बनी। कारण था—इनमें मातृभूमि और प्रकृति का वर्णन था, जबकि बाद के धार्मिक बिंबों को लेकर कुछ समुदायों की आपत्तियां थीं।

इसलिए आज इसे केवल गीत काट दिया गया” कहना इतिहास को बहुत सरल बना देना है।

लेकिन इसके उलट यह कहना भी सही नहीं कि मूल गीत में धार्मिक प्रतीक थे ही नहीं।

थे। बिल्कुल थे।

और शायद ‘वंदे मातरम्’ की सबसे बड़ी ऐतिहासिक सच्चाई यही जटिलता है।

आजादी की रात भी ‘वंदे मातरम्’ था

14 अगस्त 1947। देश आजादी की दहलीज पर था।
संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक शुरू हुई और सुचेता कृपलानी ने ‘वंदे मातरम्’ गाया।
जिस गीत ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी थी, वही आजाद भारत के जन्म का साक्षी बना।
15 अगस्त की सुबह पंडित ओंकारनाथ ठाकुर की आवाज में इसके प्रसारण ने इसे स्वतंत्र भारत की शुरुआती सांस्कृतिक स्मृतियों में दर्ज कर दिया।
इतिहास में इससे खूबसूरत दृश्य कम होंगे—
जिस गीत पर कभी रोक लगाई गई, वही आजाद भारत की पहली सुबह में गूंज रहा था।

1950: राष्ट्रीय गीत, लेकिन राष्ट्रीय गान नहीं

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि ‘वंदे मातरम्’, जिसने स्वतंत्रता संघर्ष में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, उसे जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।
इसलिए तथ्य बिल्कुल स्पष्ट है—

जन गण मन — राष्ट्रीय गान।
वंदे मातरम् — राष्ट्रीय गीत।

दोनों प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और एक दूसरे का विकल्प भी नहीं हैं। दोनों की ऐतिहासिक यात्राएं अलग हैं।
एक स्वतंत्र भारत की संवैधानिक पहचान का गान बना; दूसरा स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृति और मातृभूमि के प्रति भावनात्मक समर्पण की आवाज रहा।

फिर 150 साल बाद विवाद क्यों?

2025-26 में देश ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसी दौरान केंद्र ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय गीत के छह अंतरों वाले पूर्ण आधिकारिक संस्करण और उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया।

इसके बाद बहस तेज हुई—

पूरा गीत या पहले दो अंतरे?

भाजपा का तर्क है कि मूल रचना का पूरा सम्मान होना चाहिए।
कांग्रेस ने 1937 की परंपरा का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे जारी रखने का फैसला किया।
अब बहस सिर्फ गीत की नहीं रही।

राष्ट्रवाद, धर्म, तुष्टीकरण, इतिहास, कांग्रेस, भाजपा—सब एक साथ मैदान में हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर तीखा हमला किया और इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर इसी तरह के आरोप लगाए।

कांग्रेस का जवाब है—वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वीकार की गई ऐतिहासिक परंपरा का पालन कर रही है।
लेकिन इस पूरी बहस में एक दिलचस्प विडंबना भी सामने आई।

20 अगस्त को भाजपा-शासित नागपुर नगर निगम की बैठक में भी केवल दो अंतरे गाए गए।
अब सवाल और दिलचस्प हो गया—

क्या यह विवाद इतिहास का है, प्रोटोकॉल का है या राजनीति का?

असल विवाद दो अंतरों का नहीं है

मेरी नजर में ‘वंदे मातरम्’ पर मौजूदा विवाद का असली सवाल यह नहीं है कि दो अंतरे गाए जाएं या छह।
बड़ा सवाल यह है—

राष्ट्रवाद की परिभाषा कौन तय करेगा?

एक पक्ष कहता है—मूल रचना का पूरा सम्मान होना चाहिए।
दूसरा कहता है—राष्ट्रीय प्रतीक ऐसा होना चाहिए जिसमें हर भारतीय अपने लिए जगह महसूस करे।
और इतिहास?

इतिहास दोनों से थोड़ा बड़ा है।
क्योंकि सच यह है—
वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का महान राष्ट्रवादी उद्घोष था।
उसके मूल पाठ में धार्मिक प्रतीक भी हैं।
1937 में पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय उपयोग के लिए चुनने का ऐतिहासिक निर्णय भी हुआ था।
1950 में उसे राष्ट्रीय गीत का सम्मान भी मिला।
इनमें से किसी एक तथ्य को मिटाकर हम इतिहास नहीं लिख सकते।

भारत की खूबसूरती शायद इसी जटिलता में है

भारत ने 1950 में जन गण मन और वंदे मातरम्—दोनों को जगह दी।
क्योंकि राष्ट्र केवल भावनाओं से नहीं चलता।
और सिर्फ संविधान से भी नहीं।
राष्ट्र चलता है—
भावना और विवेक के बीच संतुलन से।
‘वंदे मातरम्’ हमें मातृभूमि से प्रेम करना सिखाता है। लेकिन लोकतांत्रिक भारत हमें यह भी सिखाता है कि मातृभूमि में सिर्फ हम नहीं रहते।
हमसे अलग सोचने वाला भी।
हमसे अलग पूजा करने वाला भी।
हमसे असहमत नागरिक भी।
वह भी उतना ही भारत है जितने हम हैं।

150 साल बाद ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ क्या है?

1875 में यह मातृभूमि की कविता थी।
1905 में प्रतिरोध का नारा बनी।
1947 में आजादी की आवाज।
1950 में राष्ट्रीय गीत।
और 2026 में?
शायद यह हमसे एक और कठिन सवाल पूछ रही है।
क्या राष्ट्रप्रेम सिर्फ नारा है?
या जिम्मेदारी भी?
क्या मातृभूमि को प्रणाम करना केवल मंच पर ‘वंदे मातरम्’ कहना है?
या उसकी नदियों, जंगलों, हवा, लोकतंत्र और संस्थाओं की रक्षा करना भी?
क्या देशभक्ति का अर्थ केवल अपने जैसे लोगों से प्रेम करना है?
या अपने से अलग नागरिक के अधिकार और सम्मान की रक्षा करना भी?
यहीं ‘वंदे मातरम्’ एक पुराने गीत से निकलकर आज के भारत का सवाल बन जाता है।

मां को नमन करना आसान है

डेढ़ सौ साल पहले ‘वंदे मातरम्’ गुलाम भारत के लिए स्वाधीनता का सपना था।
आज स्वतंत्र भारत में वही दो शब्द शायद हमें स्वतंत्रता की जिम्मेदारी याद दिला सकते हैं।
क्योंकि मातृभूमि को नमन केवल उसके नाम का उद्घोष करना नहीं है।
मातृभूमि को नमन उसके लोकतंत्र, उसकी विविधता, उसकी गरिमा और उसके हर नागरिक के सम्मान की रक्षा करना भी है।

आखिर—
मां को नमन करना आसान है।

मां के हर बच्चे को अपना मानना—शायद कहीं अधिक कठिन।

और अगर ‘वंदे मातरम्’ हमें यह कठिन काम सिखा दे, तो 150 साल बाद भी इसकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
क्योंकि 150 साल बाद भी ‘वंदे मातरम्’ हमसे यही पूछता है—जिस भारत को हम मां कहते हैं, उसके लिए हम कर क्या रहे हैं?
वंदे मातरम्।

Stocks To Watch: रेलटेल, एचएएल से मणिपाल हेल्थ तक, 21 अगस्त को इन 13 शेयरों पर रहेगी मार्केट की नजर

Stocks to Watch 21 August: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 21 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, लीडरशिप बदलाव और ब्लॉक डील्स के चलते कई दिग्गज शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त के ट्रेडिंग सेशन के दौरान इन 13 प्रमुख शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी:

1- मणिपाल हेल्थ (Manipal Health Enterprises)

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिर साल-दर-साल आधार पर 7.7% घटकर 231 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 250 करोड़ रुपये था। वैसे कंपनी का रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3091 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA 25.6% बढ़कर 736.5 करोड़ रुपये रहा जबकि EBITDA मार्जिन घटकर 23.8% रह गई। ये पिछले साल 26.2 फीसदी थी।

2- सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy)

सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को एक घरेलू स्वतंत्र बिजली उत्पादक/EPC प्लेयर से सोलर पीवी मॉडल्स की सप्लाई के लिए 190 करोड़ रुपये का कॉमर्शियल ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

3- केआईएमएस (KIMS – Krishna Institute of Medical Sciences)

कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने हैदराबाद के गचीबोवली में 250 बिस्तरों वाले अरेते अस्पताल के विशेष संचालन और प्रबंधन (O&M) के लिए औरेविया हॉस्पिटल्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह शुरुआती समझौता 5 साल के लिए है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। केआईएमएस को अस्पताल के नेट रेवेन्यू का 9% शुल्क के रूप में मिलेगा।

4- रेलटेल (RailTel Corporation of India)

नवरत्न पीएसयू रेलटेल को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 164.79 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 60 महीनों के लिए किराए के आधार पर एमपीएलएस वीपीएन नेटवर्क स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करना है।

5- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV)

कंपनी ने जानकारी दी है कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से गुजरात के साणंद प्लांट और आसपास के सप्लायर फैसिलिटीज में आई मुश्किलें खत्म हो गई हैं और कामकाज चालू हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 35-40 करोड़ रुपये का नॉन मैटेरियरल नुकसान हुआ है, जबकि बीमा दावा 30 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पादन, संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।

6- लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels)

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इस प्रमुख कंपनी ने गुजरात के भरूच में नया होटल खोलकर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। ये गुजराज में कंपनी का 12वां एक्टिव होटल है। कंपनी के 20 और होटल पाइपलाइन में हैं। नए होटल का प्रबंधन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कार्नेशन होटल्स करेगी।

7- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)

NCLT की बेंगलुरु पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और साइएंट (Cyient) के 50:50 हिस्सेदारी वाले डॉरमेंट जॉइंट वेंचर इन्फोटेक एचएएल लिमिटेड को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया मार्च 2024 में शुरू हुई थी और इस वेंचर के क्लोजर होने की वजह से एचएएल के रक्षा कार्यक्रमों या बैलेंस शीट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

8- टॉरेंट पावर (Torrent Power)

टॉरेंट पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरभ मशरूवाला ने 20 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 से विकास पोद्दार को नया सीएफओ नियुक्त किया है।

9- रैलिस इंडिया (Rallis India)

कंपनी ने बताया है कि उसके सीएफओ भास्कर स्वामीनाथन टाटा समूह की दूसरी कंपनी में शामिल होने के लिए 4 नवंबर 2026 से अपने पद से इस्तीफा देंगे। कंपनी उसी तारीख से श्रीधर राधाकृष्णन को नया सीएफओ नियुक्त करेगी।

10- एफएमसीजी शेयर (Adani Wilmar, Patanjali, Marico, Agro Tech)

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा उपभोक्ताओं को खुला खाद्य तेल न खरीदने की सलाह देने के बाद अडानी विल्मर, पतंजलि फूड्स, मैरिको और एग्रो टेक फूड्स के शेयर फोकस में रहेंगे। एफडीए ने मिलावट सहित दूसरे उल्लंघनों को देखते हुए खाद्य तेल क्षेत्र के लिए कंप्लायंस ऑर्डर भी जारी किया है।

11- निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance)

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बताया है कि बीमा नियामक IRDAI ने FY25 के लिए लागू एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए उसे चेतावनी दी है। इसके साथ ही 19 अगस्त 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए कंपनी के नए व्यावसायिक स्थान खोलने पर रोक लगा दी है।

12- अमागी मीडिया लैब्स (Amagi Media Labs)

क्लाउड-आधारित SaaS कंपनी अमागी मीडिया लैब्स के शेयर फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी ने गुरुवार को 600 करोड़ रुपये का ब्लॉक डील लॉन्च किया है। यह डील कंपनी की कुल इक्विटी का 5% रिप्रेजेंट करती है।

13- केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies)

केफिन टेक में एक बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली, जहां जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने 925 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 1400 करोड़ रुपये में 1.51 करोड़ शेयर (8.8% हिस्सेदारी) बेचे। इस डील में इंवेस्को म्यूचुअल फंड ने 400 करोड़ रुपये में 2.5% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मिराए एसेट MF (1.5%), कोटक महिंद्रा MF (1.2%) और एचएसबीसी MF (1%) ने भी खरीदारी की।

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Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

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अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।

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बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।

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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।

 

31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा

DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

सरकार ने तय की स्टॉक सीमा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।

आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे

सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा।  इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।

 

चीनी महंगी होने की क्या वजह है?

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

 

इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है। 

क्या और बढ़ेंगे दाम ?

दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।

Weather Update: मध्य प्रदेश, यूपी संग इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-NCR में भी मूसलाधार! 26 अगस्त तक ऐसा रहेगा मौसम

Weather Update: देश भर में मानसूनी बारिश का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। इस वक्त उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तथा पूर्वोत्तर राज्यों तक झमाझम बारिश का दौर जारी है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा वेदर बुलेटिन में चेतावनी जारी की है कि उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों के ऊपर बना हुआ वेल-मार्क लो प्रेशर एरिया मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 और 21 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब समेत देश के कई राज्यों में 26 अगस्त तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला बना रहेगा।

अगर बीते 24 घंटों के दौरान दर्ज किए गए बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं उत्तराखंड, हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तमिलनाडु, असम, नागालैंड और पश्चिम मध्य प्रदेश में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली-NCR में 26 अगस्त तक ऐसा रहेगा हाल

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश का बड़ा असर असर देखने को मिल रहा है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त को और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 से 26 अगस्त के दौरान अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 20 अगस्त और 22 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश जबकि 21 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में 20 से 26 अगस्त तक लगातार गरज-चमक के साथ बारिश की व्यापक गतिविधियां जारी रहेंगी। यहां पूरे सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 20 से 23 अगस्त के दौरान काफी बारिश होगी। 24 से 26 अगस्त के बीच बारिश का असर कम हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश में 20 से 22 अगस्त तक व्यापक बारिश और भारी बारिश की चेतावनी है, जिसके बाद 23 से 26 अगस्त के दौरान बारिश की तीव्रता में कमी आ सकती है।

मध्य भारत में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

मध्य भारत के राज्यों में लो प्रेशर एरिया का सीधा असर देखने को मिल रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 20 से 26 अगस्त तक लगभग पूरे सप्ताह बारिश जारी रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 और 21 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है जबकि 22 से 26 अगस्त तक लगातार भारी बारिश का सिलसिला बना रहेगा। पश्चिम मध्य प्रदेश में 20 और 21 अगस्त को व्यापक बारिश होगी और 20 से 25 अगस्त के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 22 से 26 अगस्त के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होगी।

विदर्भ क्षेत्र में 23 और 24 अगस्त को तेज बारिश की संभावना है जबकि बाकी दिनों में छिटपुट बारिश देखने को मिलेगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20 से 24 अगस्त तक गरज के साथ बिजली चमकने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना

पूर्वी भारत में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 20 से 26 अगस्त तक अधिकांश स्थानों पर बारिश होगी। गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड में 22 से 26 अगस्त, बिहार में 22 से 24 अगस्त और ओडिशा में 21 से 26 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश का दौर देखने को मिलेगा। ओडिशा में 23 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है जबकि 21-22 और 24-26 अगस्त के दौरान भारी बारिश होगी। बिहार में 22 से 25 अगस्त, गांगेय पश्चिम बंगाल में 23 से 25 अगस्त और झारखंड में 23 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 20 से 26 अगस्त के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 20 से 22 अगस्त तक काफी बारिश होगी। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 20 से 26 अगस्त तक पूरा हफ्ता बारिश से सराबोर रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 20 से 25 अगस्त के दौरान और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 20 से 23 अगस्त के बीच भारी बारिश और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम और दक्षिण भारत का मौसमी पूर्वानुमान

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 20 से 26 अगस्त तक लगातार काफी बारिश होने की संभावना है। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में 20 से 26 अगस्त के दौरान छिटपुट से लेकर हल्की या मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तटीय कर्नाटक में 20 से 26 अगस्त तक काफी बारिश होगी। केरल और माहे तथा लक्षद्वीप में 20 अगस्त और फिर 23 से 26 अगस्त के दौरान अच्छी बारिश होने के आसार हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 24 व 25 अगस्त को और केरल में 23 व 24 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलाा तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, उत्तरी व दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 20 से 24 अगस्त के दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

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IMD Rain Alert: आज इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़-MP और यूपी में भी होगी आफत की बरसात

IMD Weather Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 20 अगस्त यानी आज देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। खासतौर पर छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत, हिमालयी राज्यों और मध्य भारत के कई हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है। कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है।

छत्तीसगढ़, पूर्वी MP और पश्चिमी UP में बहुत भारी बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, 20 अगस्त को छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, उत्तराखंड तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश का अनुमान है।

इन राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं का अलर्ट

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ आंधी और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, बिहार, तटीय कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान, झारखंड, केरल और माहे, मध्य प्रदेश, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु-पुडुचेरी और कराईकल, तेलंगाना तथा पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।

इन राज्यों में बिजली गिरने का भी खतरा

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा तथा उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तेज सतही हवाएं

मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कुछ स्थानों पर तेज सतही हवाएं चलने की संभावना भी जताई है। इससे खुले इलाकों में आवाजाही और स्थानीय स्तर पर पेड़ या कमजोर संरचनाओं को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

अरब सागर में भी तेज हवाओं का असर

मौसम का असर समुद्री इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। अरब सागर में कई हिस्सों में तेज हवाओं की स्थिति रहने की संभावना है। सोमालिया और ओमान के तटों के आसपास तथा उनसे लगे समुद्री क्षेत्रों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं। जबकि झोंकों के साथ इनकी गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और उससे लगे दक्षिण-पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी तथा कुछ उत्तर-पूर्वी और पूर्व-मध्य हिस्सों में भी ऐसी परिस्थितियां बनने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में भी समुद्र रहेगा अशांत

बंगाल की खाड़ी में भी कुछ समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं का असर रहने की संभावना है। गल्फ ऑफ मन्नार से लगे कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण श्रीलंका के तट से लगे दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। हवा के झोंकों के दौरान गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में समुद्र में जाने वाले मछुआरों और अन्य नाविकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

आज देश में मौसम का कुल मिलाकर हाल

20 अगस्त को मौसम विभाग के पूर्वानुमान से साफ है कि मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां सक्रिय रहेंगी। छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश की संभावना सबसे प्रमुख चेतावनी है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और तेज बारिश, बिजली और हवाओं के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

आंधी-तूफान और हवाएं

40-50 किमी/घंटा तेज हवाएं: अंदमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में तेज हवाएं चलेंगी।

30-40 किमी/घंटा तेज हवाएं: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, तटीय एवं दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है।

चीनी के दाम 65 रुपये किलो, 15 दिन में 15 रुपए बढ़े दाम; क्यों बढ़ रहे हैं कीमत?

चीनी के दाम 65 रुपये किलो, 15 दिन में 15 रुपए बढ़े दाम; क्यों बढ़ रहे हैं कीमत?

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खुदरा बाजार में चीनी पहली बार 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कारोबारियों के अनुसार, पिछले 15 दिन में इसके दाम करीब 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं। देश में चीनी के बढ़ते दामों और त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने चीनी के स्टॉक पर शिकंजा कसा है। ALSO READ: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, इकोनॉमिक डी-डे घोषित

 

क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम?

चीनी का कम स्टॉक : चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।

 

गन्ने की फसल पर मौसम का असर : महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

 

गन्ने से एथेनॉल उत्पादन : इस साल करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा गया। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा कम हुई है। सरकार अब एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है।

 

त्योहारी सीजन की मांग : अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ रहा है। ALSO READ: वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, 1937 के प्रस्ताव पर कायम, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ पहले दो अंतरे

 

क्या और बढ़ेंगे दाम ?

दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।


सरकार ने कसा शिकंजा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।

Tukaram Munde: 24 घंटे के भीतर IAS तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने मारे ताबड़तोड़ छापे, होटल के किचन में खुले नाले से घुसते चूहे देखते ही ऐक्शन!

Tukaram Munde: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने राज्य भर में मिलावटी खाने की सामग्रियों, अनसेफ फूड और बैन गुटखा व पान मसाले के खिलाफ एक बड़ा और आक्रामक अभियान चला रखा है। एफडीए आयुक्त और कड़क मिजाज के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र अभियान के तहत पिछले 24 घंटे के दौरान हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे राज्य के होटल संचालकों, डेयरी कारोबारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।

इस राज्यव्यापी छापेमारी के दौरान एफडीए की टीमों ने कुल 25.30 लाख रुपये मूल्य के फूड प्रोडक्ट जब्त किए हैं। इसमें 11.40 लाख रुपये के बैन प्रोडक्ट हैं और करीब 14,552 किलोग्राम दूसरी खाद्य सामग्रियां शामिल हैं।

मालाड के होटल राधा का लाइसेंस निलंबित, किचन में दिखे चूहे और कॉकरोच

जांच टीम जब मुंबई के मालाड स्थित होटल राधा के किचन में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। किचन में खुले नाले से चूहे सीधे अंदर घुस रहे थे। इतना ही नहीं आटा गूंदने की मशीन पर कॉकरोच रेंगते हुए पाए गए। रसोई में चारों तरफ गंदा और ठहरा हुआ पानी, ग्रीस जमा हुआ था और बेहद अनहेल्दी स्थितियां मौजूद थीं। इन गंभीर कमियों को देख एफडीए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए होटल राधा का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

कुर्ला के ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ और इंजीनियरिंग कॉलेज के मेस पर गाज

एफडीए की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। कुर्ला स्थित प्रसिद्ध ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ में खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर उल्लंघन पाए गए। यहां कच्चे मांस का स्टोरेज ठीक नहीं था। टेंप्रेचर रिकॉर्ड नहीं मिला और पके और कच्चे भोजन को ठीक तरीके से रखा नहीं गया था। बतर्न और मशीनें बेहद गंदी मिलीं तो एफडीए ने इसका FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

इसके अलावा नवी मुंबई के खारघर स्थित सरस्वती कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के फूड बिजनेस पर भी गाज गिरी है। जांच में कॉलेज के फूड वेंचर में पेस्ट-कंट्रोल के अपर्याप्त इंतजाम, वेंटिलेशन की कमी, जरूरी प्रयोगशाला जांच का न होना और स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बाद इसके संचालन को सस्पेंड कर दिया गया।

कुल 31 होटलों की जांच, वैजापुर से उदगीर तक बैकफुट पर कारोबारी

इस विशेष अभियान के दौरान एफडीए ने कुल 31 होटलों, रेस्तरां और ढाबों का निरीक्षण किया। इनमें से 22 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए जबकि 5 खाद्य व्यवसाय लाइसेंसों को सीधे निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा राज्य के कई इलाकों में ऐक्शन हुआ। वैजापुर के परमेष्ठी सुपर शॉपी के खिलाफ बिक्री के लिए एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद रखने और दुकान में गंदगी पाए जाने पर कार्रवाई की गई।

उदगीर में FDA की टीम ने लैब में जांच के लिए देसी घी के 6 सैंपल लिए, जिनकी कुल मात्रा प्रेस नोट के अनुसार 2,400 यूनिट दर्ज की गई। पुणे और सांगली की कंपनियों से संदिग्ध गुणवत्ता वाले और मिसब्रांडेड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें खिचड़ी मसाला, डिफैटेड टोस्टेड सोया ग्रिट्स और गुड़ पाउडर शामिल हैं। इन सभी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं।

प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाले पर क्रैकडाउन: 8 एफआईआर और 10 गिरफ्तारियां

सुरक्षित खाद्य, सुरक्षित महाराष्ट्र अभियान के तहत गुटखा और पान मसाला जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की अवैध बिक्री पर भी भारी शिकंजा कसा गया है। एफडीए ने इस क्रैकडाउन में 11.40 लाख रुपये के प्रतिबंधित उत्पाद जब्त किए हैं। इस दौरान पुलिस और एफडीए की संयुक्त कार्रवाई के तहत कुल 8 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। इसमें 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 6 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया और माल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले 2 वाहनों को जब्त कर लिया गया।

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Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

कल का मौसम: 20 अगस्त को इन 15+ राज्यों में होगी आफत की बारिश! हिमाचल से यूपी-बिहार तक IMD का अलर्ट जारी, ऐसा रहेगा वेदर

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश ने विकराल रूप धारण कर रखा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 20 अगस्त के लिए मौसम का डिटेल्ड पूर्वानुमान जारी कर दिया है। IMD के मुताबिक 15 से भी अधिक राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाओं और आंधी-तूफान की आशंका है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों से लेकर मध्य भारत के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर राज्यों तक बारिश का दौर बेहद आक्रामक रहने वाला है। कई राज्यों में मूसलाधार बारिश के चलते आम जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 20 अगस्त को देश के तीन प्रमुख राज्यों में मौसम का सबसे ज्यादा रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।

पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के तल्ख तेवर जारी रहेंगे। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में 20 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पहाड़ों पर होने वाली इस बारिश से भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मानसूनी बारिश कहर बरपाने को तैयार है। मौसम विभाग ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 20 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया है। इन राज्यों में बारिश के साथ-साथ कई जगहों पर बिजली चमकने और बादलों की तेज गड़गड़ाहट भी देखने को मिलेगी।

बिहार, झारखंड और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान और कड़कती बिजली का साया

20 अगस्त को देश के बड़े हिस्से में आंधी-तूफान और बिजली कड़कने का गखतरा मंडरा रहा है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल व माहे, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में मौसम और भी ज्यादा उग्र रह सकता है। इन क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नागालैंड-मणिपुर के विभिन्न इलाकों में भी सिर्फ बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

तेज हवाओं का प्रकोप और समुद्र में मछुआरों के लिए चेतावनी

मैदानी और तटीय इलाकों में तेज हवाओं का जोर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई स्थानों पर दिनभर तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। समुद्र में बन रहे मौसमी दबाव के कारण मछुआरों को गहरे पानी में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिमी-मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्व-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी।

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इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक झोंके आने की आशंका जताई गई है।

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2027 के चुनाव से पहले BJP को क्यों याद आईं स्मृति ईरानी? समझें पूरा सियासी समीकरण

Smriti Irani: BJP ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक बड़ा चेहरा दे दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी राजनीतिक पकड़, दमदार भाषण शैली और खासतौर पर महिला वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता यूपी में चुनावी अभियान को मजबूती देने में मदद करेगी।

बता दें कि स्मृति ईरानी उन आठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश से BJP अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इससे साफ है कि पार्टी उत्तर प्रदेश को कितनी अहमियत दे रही है। ईरानी और पूर्व बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं, पूर्व धौरहरा सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। जबकि अमर पाल मौर्य को BJP OBC मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

हालांकि, स्मृति ईरानी के लिए यह नई जिम्मेदारी खास तौर पर अहम मानी जा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार के बाद से ईरानी के पास पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं थी। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले बेहद अहम चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय संगठन में वापस लाया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि BJP इस चुनाव में महिला वोटरों के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में ईरानी की वापसी को पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मनोज भद्रा ने कहा,  “ऐसे समय में जब सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तब भाजपा स्मृति ईरानी की वापसी के माध्यम से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। वह एक प्रभावशाली वक्ता हैं और कई भाषाओं में भाषण दे सकती हैं। वह विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपस्थिति से पार्टी महिला मतदाताओं को फिर से लुभाने और उन्हें अपने पाले में एकजुट करने के लिए जोरदार प्रयास करेगी।”

हालांकि, भाजपा के लिए ईरानी की राजनीतिक उपयोगिता केवल महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तक ही सीमित नहीं है। उनकी आक्रामक शैली और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी अच्छी जान-पहचान उन्हें उस राज्य में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में से एक बना सकती है, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। उनका राजनीतिक कद उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों को चुनौती देने में भी सक्षम बनाता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश ईरानी के लिए एक जाना-पहचाना राजनीतिक क्षेत्र है। उन्होंने पहली बार 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ा था, जहां उन्होंने कांग्रेस के गढ़ में राहुल गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना जारी रखा और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखा। भाजपा नेता अमेठी में पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत करने में उनकी निरंतर जमीनी भागीदारी को श्रेय देते हैं।

ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराया था

उनके प्रयासों का फल 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला, जब उन्होंने राहुल गांधी को सीधे मुकाबले में हराकर अमेठी पर गांधी परिवार के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया। इस जीत ने ईरानी को भाजपा के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बना दिया और उन्हें “जायंट किलर” का खिताब दिलाया।

हालांकि, 2024 की हार उनके राजनीतिक करियर में एक झटका साबित हुई। वह अमेठी सीट किशोरी लाल शर्मा से हार गईं। उस हार के बाद, उन्हें अपनी हालिया नियुक्ति तक कोई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी गई।

अमेठी में भाजपा नेताओं का मानना ​​है कि उनकी वापसी से क्षेत्र में पार्टी के चुनाव प्रचार को नई ऊर्जा मिल सकती है। अमेठी और रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर उनकी नियुक्ति का जश्न मनाया। समर्थकों का कहना है कि ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ईरानी जल्द ही जमीनी स्तर पर वापसी करेंगी।

भाजपा के अमेठी स्थानीय नेता जनमजय शर्मा ने कहा कि ईरानी ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में राहुल गांधी से हारने के बावजूद, वह नियमित रूप से अमेठी आती रहीं और लोगों के दिलों में उनकी एक खास जगह है।

हालांकि, अमेठी और पड़ोसी रायबरेली में चुनावी समीकरण भाजपा के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने अमेठी की चार सीटों में से दो, तिलोई और जगदीशपुर सीटें जीतीं। जबकि सपा ने गौरीगंज और अमेठी की सीटें जीतीं थी। हालांकि, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

वहीं, रायबरेली में सपा ने 6 विधानसभा सीटों में से चार सीटें – बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार – जीतीं, जबकि भाजपा ने रायबरेली और सलोन सीटें जीतीं। हालांकि, ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडे बाद में भाजपा में शामिल हो गए और अब योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं।

ईरानी जल्द शुरू कर सकती हैं यूपी का दौरा

भाजपा सूत्रों के अनुसार, ईरानी जल्द ही उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे शुरू कर सकती हैं और विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए विशेष रूप से अमेठी और रायबरेली पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “स्मृति ईरानी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता है और भाजपा के लिए भीड़ जुटाना आसान है।” उन्होंने आगे कहा, “दूसरा, वह राहुल गांधी का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी… और इस खींचतान को मीडिया कवरेज मिलेगा, जिससे पार्टी को फायदा होगा।”

‘तुलसी’ से सियासत तक का सफर

बता दें कि ईरानी का राजनीतिक सफर टेलीविजन से शुरू हुआ, जहां लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी के किरदार से वे घर-घर में मशहूर हो गईं। उन्होंने 2003 में भाजपा में प्रवेश किया और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया और 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार में शिक्षा, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में स्मृति ईरानी की BJP के राष्ट्रीय संगठन में वापसी पार्टी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके पास उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का अनुभव है और वह पार्टी के लिए एक पहचाना हुआ और आक्रामक चेहरा हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी की ऐतिहासिक जीत से बनी अपनी राजनीतिक पकड़ को पूरे उत्तर प्रदेश में BJP के लिए चुनावी फायदे में बदल पाएंगी? यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि पार्टी राज्य में अगले चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू कर रही है।

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